भारतीय इलेक्ट्रिक वाहन (EV) बाजार में तेजी से बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच मारुति सुजुकी ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। कंपनी ने अपनी पहली इलेक्ट्रिक SUV Maruti Suzuki e Vitara के दम पर लॉन्च के महज चार महीनों के भीतर देश की शीर्ष EV कंपनियों में जगह बना ली है। सीमित पोर्टफोलियो होने के बावजूद कंपनी ने बिक्री के मामले में कई स्थापित ब्रांड्स को पीछे छोड़कर बाजार में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई है। जनवरी से मई 2026 के बीच मारुति सुजुकी ने कुल 4,365 इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री की। यह आंकड़ा VinFast की 4,133 यूनिट्स की बिक्री से भी अधिक है। इसके साथ ही कंपनी ने BYD, Hyundai Motor Company और Kia Corporation जैसी कंपनियों को भी पीछे छोड़ दिया है। हालांकि भारतीय EV बाजार में अभी भी Tata Motors पहले और Mahindra & Mahindra दूसरे स्थान पर कायम हैं, जबकि JSW MG Motor India तीसरे स्थान पर बनी हुई है। e Vitara बनी मारुति की सफलता की नई पहचान मारुति सुजुकी फिलहाल भारतीय बाजार में केवल एक इलेक्ट्रिक मॉडल e Vitara बेच रही है। इसके मुकाबले Hyundai के पास Hyundai Creta Electric और Hyundai Ioniq 5 जैसे मॉडल हैं। वहीं VinFast, Tata Motors और Mahindra के पास कई EV विकल्प मौजूद हैं। इसके बावजूद e Vitara की लोकप्रियता ने मारुति को तेज़ी से आगे बढ़ाया है। जनवरी से मई 2026 के दौरान कंपनी ने औसतन 873 EV प्रति माह बेचीं। यह आंकड़ा VinFast (827), Hyundai (583), BYD (488) और Kia (405) की मासिक औसत बिक्री से अधिक रहा। यह दर्शाता है कि ग्राहकों ने मारुति के पहले इलेक्ट्रिक उत्पाद को सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। EV बाजार में क्यों बढ़ रही है मांग? भारत में इलेक्ट्रिक पैसेंजर वाहनों की मांग लगातार बढ़ रही है। अप्रैल और मई 2026 के बीच EV रजिस्ट्रेशन में सालाना आधार पर 77 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई और कुल रजिस्ट्रेशन 52,274 यूनिट्स तक पहुंच गया। मई 2026 में कुल पैसेंजर वाहन बाजार में EV की हिस्सेदारी बढ़कर 6.4 प्रतिशत हो गई। विशेषज्ञों के अनुसार, पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतें, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार, सरकार की प्रोत्साहन नीतियां और नए मॉडलों की उपलब्धता इस वृद्धि के प्रमुख कारण हैं। यही वजह है कि अब अधिक ग्राहक पारंपरिक ईंधन वाहनों की जगह इलेक्ट्रिक विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं। भारत बना Maruti का EV एक्सपोर्ट हब मारुति सुजुकी केवल घरेलू बाजार में ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी e Vitara के जरिए अपनी स्थिति मजबूत कर रही है। सितंबर 2025 में निर्यात शुरू होने के बाद कंपनी अब तक 46 देशों में 35,000 से अधिक यूनिट्स भेज चुकी है। e Vitara अब मारुति की सबसे ज्यादा निर्यात होने वाली गाड़ियों में तीसरे स्थान पर पहुंच चुकी है। इससे आगे केवल Maruti Suzuki Fronx और Maruti Suzuki Jimny हैं। दिलचस्प बात यह है कि इसी प्लेटफॉर्म पर आधारित एक रीबैज्ड मॉडल Toyota Urban Cruiser eBella भी तैयार किया जा रहा है, जिसे Toyota Motor Corporation अपने ब्रांड के तहत बेच रही है। मारुति सुजुकी की यह सफलता दिखाती है कि भारतीय EV बाजार में ब्रांड की विश्वसनीयता और मजबूत डीलर नेटवर्क अभी भी बड़ी भूमिका निभाते हैं। केवल एक मॉडल के साथ टॉप 4 में पहुंचना इस बात का संकेत है कि आने वाले वर्षों में कंपनी इलेक्ट्रिक सेगमेंट में और बड़ी चुनौती पेश कर सकती है।
भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में अपनी दमदार मौजूदगी दर्ज कराने वाली Tata Sierra एक बार फिर चर्चा में है। इस बार वजह इसकी बिक्री या फीचर्स नहीं, बल्कि इसका शानदार मॉडिफाइड अवतार है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में Tata Sierra को ऑफ-रोड स्टाइल व्हील्स और टायर्स के साथ देखा जा सकता है, जिसने SUV के लुक को पूरी तरह बदल दिया है। हालांकि भारत में वाहन मॉडिफिकेशन को लेकर कानूनी सीमाएं हैं, लेकिन कार प्रेमी अपनी गाड़ियों को अलग पहचान देने के लिए कस्टमाइजेशन करवाना पसंद करते हैं। यही वजह है कि Tata Sierra का यह नया अवतार इंटरनेट पर लोगों का ध्यान खींच रहा है। ऑफ-रोड लुक ने बढ़ाया दमदार अंदाज इंस्टाग्राम पर शेयर किए गए वीडियो में Tata Sierra अपने सिग्नेचर Andaman Adventure येलो कलर में नजर आ रही है। पहली नजर में SUV का आकर्षक रंग ध्यान खींचता है, लेकिन असली बदलाव इसके व्हील्स और टायर्स में दिखाई देता है। जहां कंपनी स्टॉक मॉडल में 19-इंच ड्यूल-टोन मशीन-कट अलॉय व्हील्स देती है, वहीं इस मॉडिफाइड Sierra में आफ्टरमार्केट ऑफ-रोड स्टाइल अलॉय व्हील्स और मोटे टायर्स लगाए गए हैं। सिर्फ इस बदलाव ने SUV के पूरे व्यक्तित्व को बदल दिया है। अब यह पहले से ज्यादा मस्क्युलर, एडवेंचर-रेडी और सड़क पर मजबूत उपस्थिति वाली दिखाई देती है। क्या दिया गया है सस्पेंशन लिफ्ट? वीडियो को ध्यान से देखने पर ऐसा लगता है कि नए और बड़े टायर्स को फिट करने के लिए SUV में हल्का सस्पेंशन लिफ्ट भी दिया गया हो सकता है। व्हील आर्च और टायर के बीच कम गैप इस ओर इशारा करते हैं कि चौड़े टायर्स को आराम से फिट करने के लिए कुछ तकनीकी बदलाव किए गए होंगे। हालांकि इस मॉडिफिकेशन की आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन लुक के लिहाज से यह बदलाव काफी प्रभावशाली नजर आ रहा है। फीचर्स के मामले में भी शानदार है Sierra Tata Motors ने Sierra को प्रीमियम फीचर्स से लैस किया है। SUV में मिलने वाले प्रमुख फीचर्स: बड़ा पैनोरमिक सनरूफ ट्रिपल-स्क्रीन डैशबोर्ड सेटअप प्रीमियम लेदराइट सीट्स वेंटिलेटेड फ्रंट सीट्स इलेक्ट्रिक एडजस्टेबल सीट्स मेमोरी फंक्शन फ्लोटिंग सेंटर कंसोल एक्सटेंडेबल अंडर-थाई सपोर्ट ये सभी फीचर्स इसे अपने सेगमेंट की सबसे आधुनिक और प्रीमियम SUVs में शामिल करते हैं। तीन इंजन विकल्पों के साथ उपलब्ध Tata Sierra को कंपनी ने कई इंजन विकल्पों के साथ पेश किया है। 1.5-लीटर नैचुरली एस्पिरेटेड पेट्रोल 105 bhp पावर 145 Nm टॉर्क मैनुअल और DCA गियरबॉक्स विकल्प 1.5-लीटर टर्बो पेट्रोल 160 PS पावर 255 Nm टॉर्क टॉर्क कन्वर्टर ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन 1.5-लीटर टर्बो डीजल 116 bhp पावर 260 Nm टॉर्क मैनुअल और ऑटोमैटिक विकल्प कीमत कितनी है? Tata Sierra की एक्स-शोरूम कीमत लगभग ₹11.49 लाख से शुरू होकर ₹21.29 लाख तक जाती है। अपने आकर्षक डिजाइन, प्रीमियम फीचर्स और मल्टीपल इंजन विकल्पों की वजह से यह SUV ग्राहकों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है। वायरल हो रहे इस मॉडिफाइड मॉडल ने यह भी दिखा दिया है कि सही कस्टमाइजेशन के बाद Tata Sierra का लुक किसी अंतरराष्ट्रीय ऑफ-रोड SUV से कम नहीं लगता।
भारतीय ऑटो बाजार तेजी से इलेक्ट्रिक और वैकल्पिक ईंधन तकनीक की ओर बढ़ रहा है। इसी बदलाव को ध्यान में रखते हुए Tata Motors आने वाले समय में अपनी कार लाइनअप को और मजबूत करने की तैयारी कर रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी 2026 में कई नई इलेक्ट्रिक और स्मार्ट कारें लॉन्च कर सकती है, जिनमें EV, Flex Fuel और फेसलिफ्ट मॉडल शामिल होंगे। इन अपकमिंग मॉडल्स में Tata Sierra EV, Tata Safari EV, Tata Avinya EV, Tata Punch Flex Fuel और Tata Tiago फेसलिफ्ट जैसे नाम शामिल हैं। Tata Sierra EV: क्लासिक नाम, इलेक्ट्रिक अवतार Tata Sierra EV को कंपनी की सबसे चर्चित आने वाली कारों में गिना जा रहा है। यह मॉडल पुराने Sierra से प्रेरित डिजाइन के साथ नए इलेक्ट्रिक अवतार में पेश किया जा सकता है। रिपोर्ट्स के अनुसार इसमें: 500KM से ज्यादा ड्राइविंग रेंज डेडिकेटेड EV प्लेटफॉर्म प्रीमियम इंटीरियर कनेक्टेड कार टेक्नोलॉजी क्लोज्ड फ्रंट पैनल डिजाइन जैसे फीचर्स मिल सकते हैं। इसकी शुरुआती कीमत लगभग ₹18 लाख (एक्स-शोरूम) हो सकती है। Tata Safari EV: फैमिली SUV का इलेक्ट्रिक वर्जन कंपनी अपनी लोकप्रिय SUV Safari को भी इलेक्ट्रिक वर्जन में ला सकती है। Tata Safari EV मौजूदा ICE मॉडल जैसा डिजाइन रख सकती है, लेकिन इसमें EV-स्पेशल बदलाव देखने को मिल सकते हैं। इसमें क्लोज्ड ग्रिल, एयरोडायनामिक अलॉय व्हील्स और एडवांस्ड सेफ्टी फीचर्स दिए जा सकते हैं। यह SUV खास तौर पर बड़े परिवारों और लंबी दूरी की यात्रा करने वाले ग्राहकों को ध्यान में रखकर तैयार की जा रही है। संभावित शुरुआती कीमत: लगभग ₹26 लाख (एक्स-शोरूम) Tata Avinya EV: Tata की सबसे प्रीमियम EV Auto Expo 2022 में पेश की गई Tata Avinya EV पहले ही अपने फ्यूचरिस्टिक डिजाइन के कारण काफी सुर्खियां बटोर चुकी है। यह मॉडल कंपनी की मौजूदा EVs से बिल्कुल अलग हो सकती है। इसमें: मिनिमलिस्ट इंटीरियर लाउंज जैसी सीटिंग सस्टेनेबल मटेरियल अल्ट्रा-फास्ट चार्जिंग ADAS सेफ्टी फीचर्स दिए जाने की उम्मीद है। इसकी संभावित कीमत लगभग ₹30 लाख (एक्स-शोरूम) हो सकती है। Tata Punch Flex Fuel: वैकल्पिक ईंधन पर बड़ा दांव Tata Punch का नया Flex Fuel वर्जन भी 2026 में लॉन्च हो सकता है। यह कंपनी की पहली Flex Fuel टेक्नोलॉजी वाली कार हो सकती है। यह मॉडल एथेनॉल-ब्लेंडेड फ्यूल पर चलेगा, जिससे: पेट्रोल पर निर्भरता कम होगी प्रदूषण घटाने में मदद मिलेगी वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा मिलेगा हालांकि डिजाइन और फीचर्स मौजूदा Punch जैसे ही रह सकते हैं। Tata Tiago Facelift: नए लुक और फीचर्स के साथ अपडेट Tata Tiago फेसलिफ्ट में कंपनी कई कॉस्मेटिक और टेक्नोलॉजी अपडेट दे सकती है। संभावित बदलाव: नई फ्रंट ग्रिल अपडेटेड बंपर नए अलॉय व्हील्स बड़ा इंफोटेनमेंट सिस्टम ज्यादा कनेक्टेड फीचर्स Tiago फिलहाल पेट्रोल, CNG और EV विकल्पों में उपलब्ध है। फेसलिफ्ट मॉडल की कीमत मौजूदा मॉडल से थोड़ी ज्यादा हो सकती है। Tata की रणनीति क्या बताती है? इन अपकमिंग मॉडल्स से साफ है कि Tata Motors भारतीय बाजार में EV और वैकल्पिक ईंधन तकनीक पर बड़ा फोकस कर रही है। कंपनी अलग-अलग बजट और जरूरतों वाले ग्राहकों को टारगेट करते हुए प्रीमियम से लेकर अफोर्डेबल सेगमेंट तक अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है।
अगर आप कम बजट में ज्यादा माइलेज देने वाली और फीचर्स से भरपूर डीजल कार खरीदने की सोच रहे हैं, तो Tata Altroz आपके लिए शानदार विकल्प साबित हो सकती है। भारतीय बाजार में डीजल कारों की संख्या लगातार कम हो रही है, लेकिन लंबी दूरी तय करने वाले और रोजाना ज्यादा ड्राइव करने वाले ग्राहकों के बीच डीजल कारों की मांग अब भी बनी हुई है। ऐसे समय में Tata Altroz उन चुनिंदा कारों में शामिल है, जो किफायती कीमत, शानदार माइलेज, प्रीमियम फीचर्स और मजबूत सेफ्टी का बेहतरीन कॉम्बिनेशन देती है। यही वजह है कि इसे भारत की सबसे सस्ती डीजल कारों में गिना जाता है। कीमत कितनी है? Tata Motors की इस प्रीमियम हैचबैक की शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत 6.30 लाख रुपये है। वहीं इसका टॉप वेरिएंट 10.77 लाख रुपये तक जाता है। अगर आप डीजल वेरिएंट खरीदना चाहते हैं, तो इसकी कीमत 8.15 लाख रुपये से शुरू होकर Accomplished S ट्रिम के लिए 10.27 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) तक पहुंचती है। इंजन ऑप्शन्स Tata Altroz तीन इंजन विकल्पों के साथ आती है: 1.2 लीटर पेट्रोल इंजन 88 PS पावर 115 Nm टॉर्क 1.2 लीटर CNG इंजन 73.5 PS पावर 103 Nm टॉर्क 1.5 लीटर डीजल इंजन 90 PS पावर 200 Nm टॉर्क गियरबॉक्स विकल्प कार में सभी इंजन ऑप्शन के साथ 5-स्पीड मैनुअल गियरबॉक्स स्टैंडर्ड मिलता है। इसके अलावा पेट्रोल वेरिएंट में: 5-स्पीड AMT 6-स्पीड DCT का विकल्प भी उपलब्ध है। हालांकि डीजल वेरिएंट केवल 5-स्पीड मैनुअल ट्रांसमिशन के साथ आता है। माइलेज में भी दमदार कंपनी का दावा है कि Altroz डीजल वेरिएंट 23.64 kmpl तक का माइलेज देता है। यही वजह है कि यह कार लंबी दूरी तय करने वालों और रोजाना ज्यादा ड्राइव करने वाले ग्राहकों के लिए काफी किफायती मानी जाती है। फीचर्स और सेफ्टी फीचर्स की बात करें तो Tata Altroz कई प्रीमियम सुविधाओं के साथ आती है, जिनमें शामिल हैं: 10.25 इंच टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम Apple CarPlay और Android Auto सपोर्ट 7 इंच डिजिटल इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर वॉइस कमांड सनरूफ वायरलेस मोबाइल चार्जर 360 डिग्री कैमरा सेफ्टी के मामले में भी यह कार काफी मजबूत मानी जाती है। Global NCAP क्रैश टेस्ट में इसे 5-स्टार सेफ्टी रेटिंग मिल चुकी है, जो इसे अपने सेगमेंट की सबसे सुरक्षित कारों में शामिल करती है।
Tata Punch ने मारी बाजी, Fronx और Nexon में कांटे की टक्कर भारत में कॉम्पैक्ट SUV सेगमेंट की लोकप्रियता लगातार बढ़ती जा रही है। अप्रैल 2026 में भी ग्राहकों ने माइक्रो और सब-4 मीटर SUVs को जमकर पसंद किया। बिक्री के आंकड़ों में Tata Punch सबसे ज्यादा बिकने वाली कॉम्पैक्ट SUV बनकर उभरी। वहीं Maruti Suzuki Fronx और Tata Nexon ने भी बेहद करीबी मुकाबला दिया। दिलचस्प बात यह रही कि टॉप-3 SUVs की बिक्री में 1000 यूनिट से भी कम का अंतर देखने को मिला, जिससे अप्रैल का महीना इस सेगमेंट के लिए बेहद प्रतिस्पर्धी रहा। अप्रैल 2026 की टॉप 10 सबसे ज्यादा बिकने वाली कॉम्पैक्ट SUVs रैंक मॉडल अप्रैल 2026 बिक्री सालाना बढ़ोतरी 1 Tata Punch 19,107 52.9% 2 Maruti Fronx 18,829 31.3% 3 Tata Nexon 18,126 17.3% 4 Maruti Brezza 14,124 -16.8% 5 Hyundai Venue 12,420 56.2% 6 Kia Sonet 10,537 30.6% 7 Hyundai Exter 8,096 49.5% 8 Mahindra XUV 3XO 7,517 -0.7% 9 Skoda Kylaq 4,089 -23.8% 10 Toyota Taisor 2,550 5.3% Tata Punch बनी सबसे ज्यादा बिकने वाली SUV Tata Punch ने अप्रैल 2026 में 19,107 यूनिट की बिक्री के साथ पहला स्थान हासिल किया। इस SUV की सालाना बिक्री में 52.9 प्रतिशत की बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई। इसकी ऊंची ग्राउंड क्लीयरेंस, SUV जैसा डिजाइन और शहरों में आसान ड्राइविंग इसे ग्राहकों की पहली पसंद बना रहे हैं। Fronx और Nexon में जोरदार मुकाबला Maruti Suzuki Fronx ने 18,829 यूनिट बेचकर दूसरा स्थान हासिल किया। यह Punch से सिर्फ 278 यूनिट पीछे रही। इसके स्पोर्टी डिजाइन और बेहतर माइलेज ने ग्राहकों को आकर्षित किया। वहीं Tata Nexon ने 18,126 यूनिट बिक्री के साथ तीसरा स्थान हासिल किया। Nexon की बिक्री में भी 17.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखने को मिली। Brezza की बिक्री घटी, Venue ने दिखाई ताकत Maruti Suzuki Brezza की बिक्री में गिरावट दर्ज की गई। अप्रैल में इसकी 14,124 यूनिट बिकीं, जो पिछले साल के मुकाबले 16.8 प्रतिशत कम रहीं। माना जा रहा है कि ग्राहक इसके फेसलिफ्ट मॉडल का इंतजार कर रहे हैं। दूसरी ओर Hyundai Venue ने शानदार प्रदर्शन किया। इसकी बिक्री 56.2 प्रतिशत बढ़कर 12,420 यूनिट पहुंच गई। नए अपडेटेड मॉडल और Bharat NCAP की 5-स्टार सेफ्टी रेटिंग का इसे फायदा मिला। Sonet, Exter और XUV 3XO भी दौड़ में शामिल Kia Sonet ने 10,537 यूनिट की बिक्री के साथ मजबूत पकड़ बनाए रखी। वहीं Hyundai Exter की बिक्री में 49.5 प्रतिशत की बड़ी छलांग दर्ज की गई। Mahindra XUV 3XO की बिक्री लगभग स्थिर रही और इसमें मामूली गिरावट देखी गई। Skoda Kylaq और Toyota Taisor का प्रदर्शन Skoda Kylaq की बिक्री में 23.8 प्रतिशत की गिरावट आई। इसके बावजूद यूरोपियन डिजाइन और ड्राइविंग एक्सपीरियंस के कारण इसकी अलग पहचान बनी हुई है। वहीं Toyota Taisor ने 2,550 यूनिट बिक्री के साथ टॉप-10 सूची में जगह बनाई।
नई दिल्ली: देश में बढ़ती गर्मी के बीच Tata Motors ने अपने ग्राहकों के लिए एक बड़ा राहत भरा कदम उठाया है। कंपनी ने देशभर में अपना विशेष Summer Check-Up Camp शुरू कर दिया है, जिसके तहत कार मालिकों को न केवल फ्री में गाड़ी की जांच की सुविधा मिल रही है, बल्कि कई आकर्षक ऑफर्स और डिस्काउंट भी दिए जा रहे हैं। यह कैंप 28 अप्रैल 2026 तक सभी अधिकृत वर्कशॉप्स पर आयोजित किया जा रहा है। 30-पॉइंट फ्री हेल्थ चेक-अप: गर्मी से पहले गाड़ी पूरी तरह तैयार इस कैंप का सबसे बड़ा आकर्षण है 30-पॉइंट फ्री चेक-अप, जिसमें गाड़ी के हर जरूरी हिस्से की बारीकी से जांच की जाती है। इसमें शामिल हैं: AC की कूलिंग और परफॉर्मेंस बैटरी की स्थिति इंजन ऑयल और कूलेंट लेवल टायर अलाइनमेंट और ब्रेक सिस्टम इलेक्ट्रिकल सिस्टम CNG किट और EV डायग्नोस्टिक्स इस तरह की जांच से संभावित खराबियों का पहले ही पता चल जाता है, जिससे लंबी यात्रा या तेज गर्मी में गाड़ी के खराब होने का जोखिम कम हो जाता है। सभी गाड़ियों के लिए लागू: ICE, CNG और EV यह सर्विस कैंप Tata Motors की सभी श्रेणी की गाड़ियों पर लागू है—चाहे वे पेट्रोल-डीजल (ICE), CNG या इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) हों। गर्मी के मौसम में कूलिंग सिस्टम और इंजन पर अधिक दबाव पड़ता है, ऐसे में यह चेक-अप गाड़ी की सुरक्षा और बेहतर प्रदर्शन के लिए बेहद अहम साबित होता है। ग्राहकों के लिए खास ऑफर्स और छूट कंपनी इस कैंप के दौरान कई फायदे भी दे रही है: एक्सटेंडेड वारंटी पर 10% की छूट स्पेयर पार्ट्स, लुब्रिकेंट्स और सर्विस पर 10% तक डिस्काउंट Genuine Accessories (TMGA) पर 15% तक की छूट AMC और वारंटी के लिए आसान EMI विकल्प ये ऑफर्स खास तौर पर उन पार्ट्स को समय पर बदलने के लिए प्रेरित करते हैं, जो गर्मी में जल्दी खराब हो सकते हैं—जैसे बेल्ट, फिल्टर और होज। जल्दी बुक करें अपॉइंटमेंट चूंकि यह कैंप सीमित समय के लिए है, ग्राहकों को सलाह दी जा रही है कि वे जल्द से जल्द अपनी सर्विस स्लॉट बुक करें। अंतिम दिनों में भीड़ बढ़ने की संभावना है, जिससे देरी हो सकती है। ग्राहकों का सकारात्मक फीडबैक सोशल मीडिया पर कई ग्राहकों ने इस कैंप को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। कई यूजर्स का कहना है कि चेक-अप के बाद उनकी कार की AC कूलिंग और ओवरऑल परफॉर्मेंस में सुधार देखने को मिला है। यह कैंप Tata Nexon, Tata Punch, Tata Tiago, Tata Altroz, Tata Harrier और Tata Safari जैसे लोकप्रिय मॉडलों पर भी लागू है।
भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की दौड़ तेजी से आगे बढ़ रही है, और इसी कड़ी में Tata Motors एक और बड़ा कदम उठाने जा रही है। कंपनी अपनी लोकप्रिय SUV Tata Safari का इलेक्ट्रिक वर्जन Safari EV फेस्टिव सीजन 2026 में लॉन्च करने की तैयारी कर रही है। यह Tata की पहली तीन-रो (7-सीटर) इलेक्ट्रिक SUV होगी और कंपनी के EV पोर्टफोलियो को एक नया आयाम देगी। प्लेटफॉर्म और पावरट्रेन: Harrier EV से मिलेगा बेस नई Safari EV, Tata Harrier EV के acti.ev+ प्लेटफॉर्म पर आधारित होगी। हालांकि यह पूरी तरह नई EV (born-electric) नहीं होगी, बल्कि मौजूदा ICE मॉडल का इलेक्ट्रिक अवतार होगी। इसमें 65kWh और 75kWh बैटरी पैक मिलने की संभावना है: स्टैंडर्ड रियर-व्हील ड्राइव (RWD) हाई वेरिएंट में ड्यूल-मोटर AWD विकल्प अनुमानित रेंज Harrier EV से थोड़ी कम होगी, क्योंकि Safari का आकार बड़ा है Harrier EV के आधार पर, Safari EV में करीब 500–600 किमी की रेंज मिलने की उम्मीद है। साथ ही 100kW DC फास्ट चार्जिंग सपोर्ट भी दिया जा सकता है। दमदार फीचर्स और टेक्नोलॉजी Safari EV में Tata का नया TiDAL (Tata Intelligent Digital Architecture Layer) सिस्टम मिलेगा, जिससे कई एडवांस फीचर्स शामिल होंगे: OTA अपडेट 540-डिग्री कैमरा लेवल-2 ADAS ऑटो पार्क असिस्ट ऑफ-रोड क्रूज़ कंट्रोल UPI आधारित इन-कार पेमेंट (DrivePay) समन मोड (remote parking) इसके अलावा, मल्टी-लिंक रियर सस्पेंशन और अलग-अलग टेरेन मोड (Snow, Sand, Rock Crawl आदि) बेहतर ड्राइविंग अनुभव देंगे। डिजाइन और इंटीरियर डिजाइन में हल्के बदलाव देखने को मिलेंगे: क्लोज्ड फ्रंट ग्रिल EV बैजिंग नए एयरो अलॉय व्हील्स इंटीरियर काफी हद तक मौजूदा Safari जैसा रहेगा, लेकिन टेक्नोलॉजी अपग्रेड के साथ। लॉन्च टाइमलाइन और कीमत Safari EV का प्रोडक्शन अगस्त 2026 से शुरू हो सकता है और इसे त्योहारों के सीजन में लॉन्च किया जाएगा। कीमत की बात करें तो यह SUV लगभग 22.5 लाख से 30 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) के बीच आ सकती है। किससे होगी टक्कर? लॉन्च के बाद Safari EV का सीधा मुकाबला Mahindra XEV 9S से होगा, जिससे भारतीय EV SUV मार्केट में प्रतिस्पर्धा और तेज होगी।
जमशेदपुर प्लांट में बड़ी खुशखबरी झारखंड के जमशेदपुर स्थित टाटा मोटर्स प्लांट के कर्मचारियों के लिए राहत भरी खबर है। ग्रेड रिवीजन को लेकर लंबे समय से चल रही बातचीत अब अंतिम चरण में पहुंच गई है। गुरुवार को इस समझौते पर अंतिम मुहर लगने की संभावना जताई जा रही है। इस फैसले का सीधा लाभ 7321 स्थायी कर्मचारियों को मिलेगा। समय पर समझौता हुआ तो मिलेगा 20 हजार बोनस इस समझौते की खास बात यह है कि अगर 31 मार्च 2026 तक इसे औपचारिक रूप से लागू कर दिया जाता है, तो सभी कर्मचारियों को 20,000 रुपये का एकमुश्त बोनस मिलेगा। इससे पहले वर्ष 2022 में भी समय पर समझौता होने पर कर्मचारियों को यह लाभ दिया गया था। वेतन वृद्धि 20 से 23 हजार तक पहुंचने की उम्मीद सूत्रों के मुताबिक, इस बार वेतन वृद्धि का आंकड़ा 20,000 से 23,000 रुपये के बीच जा सकता है। वर्ष 2022 में कुल 17,000 रुपये की बढ़ोतरी हुई थी। इस बार भी बढ़ोतरी को चार चरणों (65%, 15%, 10% और 10%) में लागू किए जाने की संभावना है। जियो ग्रेड कर्मचारियों के DA पर फोकस इस बार यूनियन का सबसे बड़ा फोकस जियो ग्रेड कर्मचारियों के वेतन ढांचे को सुधारने पर है। पुराने कर्मचारियों की तुलना में नए कर्मियों का डीए (महंगाई भत्ता) काफी कम है, जो लगभग 500 रुपये के आसपास है। यूनियन इस अंतर को कम करने के लिए बेसिक पे और डीए स्ट्रक्चर में बदलाव की मांग कर रही है। बढ़े कर्मचारियों के कारण प्रबंधन पर दबाव पिछले समझौते के समय जहां कर्मचारियों की संख्या 5600 थी, अब यह बढ़कर 7321 हो गई है। ऐसे में प्रबंधन पर वित्तीय दबाव भी बढ़ा है। इसी वजह से प्रबंधन समझौते की अवधि 6 साल करना चाहता है, जबकि यूनियन 4 साल की परंपरा को बनाए रखने पर अड़ी है। सिर्फ सैलरी नहीं, इन सुविधाओं पर भी चर्चा इस बार समझौते में सिर्फ वेतन वृद्धि ही नहीं, बल्कि कई अन्य महत्वपूर्ण मांगों पर भी चर्चा हुई है: गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए मेडिकल लिमिट 5 लाख से बढ़ाने की मांग रिटायरमेंट के बाद मेडिकल इंश्योरेंस को और बेहतर करने का प्रस्ताव त्योहारों (रामनवमी, दुर्गा पूजा) पर ड्यूटी करने वाले कर्मियों को 250 रुपये वाहन भत्ता देने की मांग यूनियन ने दिए सकारात्मक संकेत टाटा मोटर्स वर्कर्स यूनियन के महामंत्री आरके सिंह के अनुसार, प्रबंधन और यूनियन के बीच बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है और अधिकांश मुद्दों पर सहमति बन चुकी है। उन्होंने भरोसा जताया कि तय समय सीमा के भीतर एक सम्मानजनक समझौता हो जाएगा। टाटा मोटर्स के कर्मचारियों के लिए यह समझौता बड़ी राहत लेकर आ सकता है। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आज इस पर अंतिम मुहर लगती है या नहीं।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।