Tata Punch ने मारी बाजी, Fronx और Nexon में कांटे की टक्कर
भारत में कॉम्पैक्ट SUV सेगमेंट की लोकप्रियता लगातार बढ़ती जा रही है। अप्रैल 2026 में भी ग्राहकों ने माइक्रो और सब-4 मीटर SUVs को जमकर पसंद किया। बिक्री के आंकड़ों में Tata Punch सबसे ज्यादा बिकने वाली कॉम्पैक्ट SUV बनकर उभरी। वहीं Maruti Suzuki Fronx और Tata Nexon ने भी बेहद करीबी मुकाबला दिया।
दिलचस्प बात यह रही कि टॉप-3 SUVs की बिक्री में 1000 यूनिट से भी कम का अंतर देखने को मिला, जिससे अप्रैल का महीना इस सेगमेंट के लिए बेहद प्रतिस्पर्धी रहा।
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Tata Punch ने अप्रैल 2026 में 19,107 यूनिट की बिक्री के साथ पहला स्थान हासिल किया। इस SUV की सालाना बिक्री में 52.9 प्रतिशत की बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई। इसकी ऊंची ग्राउंड क्लीयरेंस, SUV जैसा डिजाइन और शहरों में आसान ड्राइविंग इसे ग्राहकों की पहली पसंद बना रहे हैं।
Maruti Suzuki Fronx ने 18,829 यूनिट बेचकर दूसरा स्थान हासिल किया। यह Punch से सिर्फ 278 यूनिट पीछे रही। इसके स्पोर्टी डिजाइन और बेहतर माइलेज ने ग्राहकों को आकर्षित किया।
वहीं Tata Nexon ने 18,126 यूनिट बिक्री के साथ तीसरा स्थान हासिल किया। Nexon की बिक्री में भी 17.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखने को मिली।
Maruti Suzuki Brezza की बिक्री में गिरावट दर्ज की गई। अप्रैल में इसकी 14,124 यूनिट बिकीं, जो पिछले साल के मुकाबले 16.8 प्रतिशत कम रहीं। माना जा रहा है कि ग्राहक इसके फेसलिफ्ट मॉडल का इंतजार कर रहे हैं।
दूसरी ओर Hyundai Venue ने शानदार प्रदर्शन किया। इसकी बिक्री 56.2 प्रतिशत बढ़कर 12,420 यूनिट पहुंच गई। नए अपडेटेड मॉडल और Bharat NCAP की 5-स्टार सेफ्टी रेटिंग का इसे फायदा मिला।
Kia Sonet ने 10,537 यूनिट की बिक्री के साथ मजबूत पकड़ बनाए रखी। वहीं Hyundai Exter की बिक्री में 49.5 प्रतिशत की बड़ी छलांग दर्ज की गई।
Mahindra XUV 3XO की बिक्री लगभग स्थिर रही और इसमें मामूली गिरावट देखी गई।
Skoda Kylaq की बिक्री में 23.8 प्रतिशत की गिरावट आई। इसके बावजूद यूरोपियन डिजाइन और ड्राइविंग एक्सपीरियंस के कारण इसकी अलग पहचान बनी हुई है।
वहीं Toyota Taisor ने 2,550 यूनिट बिक्री के साथ टॉप-10 सूची में जगह बनाई।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
Tata Punch ने मारी बाजी, Fronx और Nexon में कांटे की टक्कर भारत में कॉम्पैक्ट SUV सेगमेंट की लोकप्रियता लगातार बढ़ती जा रही है। अप्रैल 2026 में भी ग्राहकों ने माइक्रो और सब-4 मीटर SUVs को जमकर पसंद किया। बिक्री के आंकड़ों में Tata Punch सबसे ज्यादा बिकने वाली कॉम्पैक्ट SUV बनकर उभरी। वहीं Maruti Suzuki Fronx और Tata Nexon ने भी बेहद करीबी मुकाबला दिया। दिलचस्प बात यह रही कि टॉप-3 SUVs की बिक्री में 1000 यूनिट से भी कम का अंतर देखने को मिला, जिससे अप्रैल का महीना इस सेगमेंट के लिए बेहद प्रतिस्पर्धी रहा। अप्रैल 2026 की टॉप 10 सबसे ज्यादा बिकने वाली कॉम्पैक्ट SUVs रैंक मॉडल अप्रैल 2026 बिक्री सालाना बढ़ोतरी 1 Tata Punch 19,107 52.9% 2 Maruti Fronx 18,829 31.3% 3 Tata Nexon 18,126 17.3% 4 Maruti Brezza 14,124 -16.8% 5 Hyundai Venue 12,420 56.2% 6 Kia Sonet 10,537 30.6% 7 Hyundai Exter 8,096 49.5% 8 Mahindra XUV 3XO 7,517 -0.7% 9 Skoda Kylaq 4,089 -23.8% 10 Toyota Taisor 2,550 5.3% Tata Punch बनी सबसे ज्यादा बिकने वाली SUV Tata Punch ने अप्रैल 2026 में 19,107 यूनिट की बिक्री के साथ पहला स्थान हासिल किया। इस SUV की सालाना बिक्री में 52.9 प्रतिशत की बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई। इसकी ऊंची ग्राउंड क्लीयरेंस, SUV जैसा डिजाइन और शहरों में आसान ड्राइविंग इसे ग्राहकों की पहली पसंद बना रहे हैं। Fronx और Nexon में जोरदार मुकाबला Maruti Suzuki Fronx ने 18,829 यूनिट बेचकर दूसरा स्थान हासिल किया। यह Punch से सिर्फ 278 यूनिट पीछे रही। इसके स्पोर्टी डिजाइन और बेहतर माइलेज ने ग्राहकों को आकर्षित किया। वहीं Tata Nexon ने 18,126 यूनिट बिक्री के साथ तीसरा स्थान हासिल किया। Nexon की बिक्री में भी 17.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखने को मिली। Brezza की बिक्री घटी, Venue ने दिखाई ताकत Maruti Suzuki Brezza की बिक्री में गिरावट दर्ज की गई। अप्रैल में इसकी 14,124 यूनिट बिकीं, जो पिछले साल के मुकाबले 16.8 प्रतिशत कम रहीं। माना जा रहा है कि ग्राहक इसके फेसलिफ्ट मॉडल का इंतजार कर रहे हैं। दूसरी ओर Hyundai Venue ने शानदार प्रदर्शन किया। इसकी बिक्री 56.2 प्रतिशत बढ़कर 12,420 यूनिट पहुंच गई। नए अपडेटेड मॉडल और Bharat NCAP की 5-स्टार सेफ्टी रेटिंग का इसे फायदा मिला। Sonet, Exter और XUV 3XO भी दौड़ में शामिल Kia Sonet ने 10,537 यूनिट की बिक्री के साथ मजबूत पकड़ बनाए रखी। वहीं Hyundai Exter की बिक्री में 49.5 प्रतिशत की बड़ी छलांग दर्ज की गई। Mahindra XUV 3XO की बिक्री लगभग स्थिर रही और इसमें मामूली गिरावट देखी गई। Skoda Kylaq और Toyota Taisor का प्रदर्शन Skoda Kylaq की बिक्री में 23.8 प्रतिशत की गिरावट आई। इसके बावजूद यूरोपियन डिजाइन और ड्राइविंग एक्सपीरियंस के कारण इसकी अलग पहचान बनी हुई है। वहीं Toyota Taisor ने 2,550 यूनिट बिक्री के साथ टॉप-10 सूची में जगह बनाई।
दक्षिण कोरिया की प्रमुख ऑटो कंपनी Hyundai Motor ने भारत में अपने 30 साल पूरे कर लिए हैं। Hyundai Motor India Limited (HMIL) की स्थापना 6 मई 1996 को हुई थी और आज यह देश की दूसरी सबसे बड़ी पैसेंजर कार निर्माता कंपनी बन चुकी है। तीन दशक के इस सफर में हुंडई ने भारत में न केवल अपनी मजबूत पकड़ बनाई, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी भारत को एक अहम एक्सपोर्ट हब के रूप में स्थापित किया। 30 साल में क्या हासिल किया? हुंडई का भारत में प्रदर्शन बेहद प्रभावशाली रहा है: कुल बिक्री: 1.35 करोड़ (13.5 मिलियन) यूनिट भारत में बिक्री: 96 लाख यूनिट निर्यात: 39 लाख यूनिट एक्सपोर्ट देश: 150+ यह आंकड़े बताते हैं कि हुंडई की ग्लोबल रणनीति में भारत की भूमिका कितनी अहम है। निवेश और विस्तार की बड़ी योजना कंपनी ने अब तक भारत में करीब 40,700 करोड़ रुपये का निवेश किया है। आने वाले पांच वर्षों में वह 45,000 करोड़ रुपये और निवेश करने की योजना बना रही है। इसके साथ ही कंपनी 2028 तक अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाकर 10.74 लाख यूनिट प्रति वर्ष करने का लक्ष्य रखती है। प्लांट और मैन्युफैक्चरिंग नेटवर्क हुंडई ने भारत में अपना पहला मैन्युफैक्चरिंग प्लांट Sriperumbudur (चेन्नई के पास) में स्थापित किया था, जहां 1998 से उत्पादन शुरू हुआ। यह कोरिया के बाहर कंपनी की पहली इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग यूनिट थी। इसके अलावा कंपनी ने हाल ही में Talegaon में भी उत्पादन शुरू किया है। दोनों प्लांट्स की संयुक्त उत्पादन क्षमता फिलहाल करीब 9.94 लाख यूनिट सालाना है। सर्विस नेटवर्क और रोजगार हुंडई का सर्विस नेटवर्क भी देशभर में मजबूत है: 1,025 शहरों में मौजूदगी 1,625 सर्विस सेंटर 50,000 से ज्यादा प्रशिक्षित प्रोफेशनल यह नेटवर्क कंपनी को ग्राहकों के बीच भरोसेमंद ब्रांड बनाने में मदद करता है। कंपनी का विजन एचएमआईएल के एमडी और सीईओ तरुण गर्ग के अनुसार, कंपनी ने 13.5 मिलियन से अधिक ग्राहकों को सेवा दी है और भविष्य में भी भारत को अपने विकास का केंद्र बनाए रखेगी। क्या संकेत देता है यह सफर? हुंडई का 30 साल का सफर भारतीय ऑटो सेक्टर के विकास की कहानी भी बयां करता है। यह दिखाता है कि कैसे विदेशी कंपनियां भारत को न केवल बड़े बाजार, बल्कि मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट हब के रूप में देख रही हैं। आने वाले समय में निवेश और उत्पादन क्षमता में बढ़ोतरी से ऑटो सेक्टर में प्रतिस्पर्धा और तेज होने की संभावना है।
लग्जरी कार निर्माता Mercedes-Benz ने अपनी नई इलेक्ट्रिक सेडान Mercedes-Benz CLA EV को भारत में पेश किया है। यह कार अपने फ्यूचरिस्टिक डिजाइन, लंबी ड्राइविंग रेंज और अल्ट्रा-फास्ट चार्जिंग टेक्नोलॉजी के चलते चर्चा में है। कंपनी का दावा है कि यह कार सिर्फ 20 मिनट की चार्जिंग में करीब 400 किलोमीटर तक चल सकती है, जो इसे अपने सेगमेंट में बेहद खास बनाती है। डिजाइन: कूपे स्टाइल के साथ फ्यूचरिस्टिक अपील नई CLA EV का डिजाइन काफी स्टाइलिश और एरोडायनामिक है। फ्रंट में ग्लॉस-ब्लैक क्लोज्ड ग्रिल के साथ इल्यूमिनेटेड स्टार पैटर्न दिया गया है, जो इसे एक प्रीमियम पहचान देता है। स्लिम LED हेडलैंप्स और फ्रंट-रियर लाइट बार इसे मॉडर्न और हाई-टेक लुक देते हैं। साइड प्रोफाइल में फ्लश डोर हैंडल और 18-इंच AMG एरो-ऑप्टिमाइज्ड अलॉय व्हील्स इसे और आकर्षक बनाते हैं। इंटीरियर और फीचर्स: डिजिटल लग्जरी का अनुभव कार के केबिन में पूरी तरह डिजिटल-फर्स्ट डिजाइन देखने को मिलता है। इसमें 10.25-इंच ड्राइवर डिस्प्ले और 14-इंच टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम दिया गया है। इसके अलावा पावर्ड और हीटेड सीट्स, मेमोरी फंक्शन, पैनोरमिक ग्लास रूफ और ऑटोमैटिक क्लाइमेट कंट्रोल जैसे फीचर्स इसे प्रीमियम बनाते हैं। सुरक्षा के लिहाज से इसमें 6 एयरबैग, 360-डिग्री कैमरा, ब्लाइंड स्पॉट मॉनिटरिंग और लेवल-2 ADAS जैसे एडवांस फीचर्स मिलते हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, इसे 5-स्टार Euro NCAP सेफ्टी रेटिंग भी मिली है। पावर और रेंज: लंबी दूरी के साथ तेज चार्जिंग भारत में CLA EV दो वेरिएंट्स में उपलब्ध है— CLA 200: लगभग 542 किमी की रेंज CLA 250+: लगभग 792 किमी की रेंज CLA 250+ में 85 kWh बैटरी दी गई है, जो करीब 268 hp की पावर और 335 Nm टॉर्क जनरेट करती है। 240 kW DC फास्ट चार्जिंग की मदद से यह कार महज 20 मिनट में करीब 400 किमी तक की रेंज दे सकती है। साथ ही, 0 से 100 किमी/घंटा की रफ्तार यह कार करीब 6.7 सेकंड में पकड़ लेती है। कीमत Mercedes-Benz CLA EV की शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत ₹55 लाख रखी गई है, जबकि टॉप वेरिएंट ₹59 लाख तक जाता है। कंपनी ने एक खास लॉन्च एडिशन भी पेश किया है, जिसकी कीमत ₹64 लाख है।