नई दिल्ली: भारतीय कॉम्पैक्ट SUV सेगमेंट में लंबे समय से मजबूत पकड़ बनाए हुए Maruti Suzuki की लोकप्रिय SUV Maruti Brezza जल्द बड़े बदलावों के साथ बाजार में दस्तक दे सकती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी 2026 Brezza Facelift पर काम कर रही है, जिसमें डिजाइन, फीचर्स, टेक्नोलॉजी और इंजन के स्तर पर कई महत्वपूर्ण अपडेट देखने को मिल सकते हैं। सबसे बड़ी चर्चा इस बात की है कि नई Brezza में पहली बार टर्बो-पेट्रोल इंजन दिया जा सकता है, जो इसे मौजूदा मॉडल की तुलना में अधिक दमदार बना सकता है। पहली बार मिल सकता है टर्बो-पेट्रोल इंजन रिपोर्ट्स के अनुसार, फेसलिफ्ट मॉडल में 1.0-लीटर 3-सिलेंडर टर्बो-पेट्रोल इंजन मिलने की संभावना है। संभावित इंजन स्पेसिफिकेशन: 1.0-लीटर टर्बो पेट्रोल इंजन लगभग 98.6 hp पावर 147.6 Nm टॉर्क 6-स्पीड मैनुअल गियरबॉक्स इसके अलावा कंपनी मौजूदा 1.5-लीटर नैचुरली एस्पिरेटेड पेट्रोल इंजन को भी जारी रख सकती है। मौजूदा इंजन आउटपुट: 103 hp पावर 137 Nm टॉर्क 5-स्पीड मैनुअल ट्रांसमिशन CNG मॉडल में मिलेगा बड़ा फायदा नई Brezza में फैक्ट्री-फिटेड अंडरबॉडी CNG टैंक दिए जाने की भी चर्चा है। इस बदलाव के फायदे: बूट स्पेस बढ़ेगा सामान रखने में आसानी होगी CNG सिलेंडर के कारण लगेज स्पेस कम नहीं होगा बेहतर प्रैक्टिकलिटी मिलेगी यह फीचर भारतीय ग्राहकों के लिए काफी आकर्षक साबित हो सकता है। इंटीरियर होगा पहले से ज्यादा प्रीमियम नई Brezza के केबिन में भी कई बदलाव देखने को मिल सकते हैं। संभावित फीचर्स: 10.1 इंच का बड़ा टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम वायरलेस Android Auto वायरलेस Apple CarPlay नया डैशबोर्ड लेआउट प्रीमियम सीट अपहोल्स्ट्री बेहतर इंटीरियर फिनिश इन अपडेट्स के जरिए कंपनी Brezza को अधिक आधुनिक और प्रीमियम बनाने की तैयारी में है। पहली बार मिल सकता है लेवल-2 ADAS नई Brezza का सबसे बड़ा तकनीकी अपडेट लेवल-2 ADAS (Advanced Driver Assistance System) हो सकता है। संभावित ADAS फीचर्स: लेन कीप असिस्ट अडैप्टिव क्रूज़ कंट्रोल ऑटोमैटिक इमरजेंसी ब्रेकिंग फॉरवर्ड कोलिजन वार्निंग लेन डिपार्चर अलर्ट यदि यह फीचर शामिल किया जाता है, तो Brezza अपने सेगमेंट की सबसे एडवांस SUV में शामिल हो सकती है। एक्सटीरियर में क्या होगा नया? फेसलिफ्ट मॉडल के डिजाइन में भी कई कॉस्मेटिक बदलाव देखने को मिल सकते हैं। संभावित बदलाव: नई फ्रंट ग्रिल अपडेटेड बंपर नए फॉग लैंप हाउसिंग सिल्वर फिनिश स्किड प्लेट नए डिजाइन के अलॉय व्हील्स रिफ्रेश्ड फ्रंट और रियर लुक हालांकि SUV का प्लेटफॉर्म और ओवरऑल साइज पहले जैसा ही रहने की संभावना है। कब होगी लॉन्च? रिपोर्ट्स के मुताबिक 2026 Maruti Brezza Facelift को जुलाई 2026 के आसपास लॉन्च किया जा सकता है। यह अपडेट कंपनी की उस रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है जिसके तहत Brezza, Fronx और Grand Vitara जैसी SUVs को 2027 तक नए फीचर्स और तकनीक के साथ अपडेट किया जाएगा। कितनी हो सकती है कीमत? फिलहाल मौजूदा Brezza की एक्स-शोरूम कीमत लगभग ₹8.26 लाख से ₹14.04 लाख तक है। नई Brezza Facelift में: टर्बो इंजन ADAS बड़ा टचस्क्रीन नए फीचर्स जैसे अपग्रेड मिलने की वजह से कीमत में कुछ बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। हालांकि कंपनी ने अभी तक लॉन्च डेट, इंजन या कीमत को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है। क्या इंतजार करना सही रहेगा? अगर आप अगले कुछ महीनों में Brezza खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो फेसलिफ्ट मॉडल का इंतजार करना फायदे का सौदा हो सकता है। खासकर उन ग्राहकों के लिए जो बेहतर टेक्नोलॉजी, एडवांस सेफ्टी फीचर्स और अधिक आधुनिक इंटीरियर चाहते हैं।
भारतीय इलेक्ट्रिक वाहन (EV) बाजार में तेजी से बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच मारुति सुजुकी ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। कंपनी ने अपनी पहली इलेक्ट्रिक SUV Maruti Suzuki e Vitara के दम पर लॉन्च के महज चार महीनों के भीतर देश की शीर्ष EV कंपनियों में जगह बना ली है। सीमित पोर्टफोलियो होने के बावजूद कंपनी ने बिक्री के मामले में कई स्थापित ब्रांड्स को पीछे छोड़कर बाजार में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई है। जनवरी से मई 2026 के बीच मारुति सुजुकी ने कुल 4,365 इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री की। यह आंकड़ा VinFast की 4,133 यूनिट्स की बिक्री से भी अधिक है। इसके साथ ही कंपनी ने BYD, Hyundai Motor Company और Kia Corporation जैसी कंपनियों को भी पीछे छोड़ दिया है। हालांकि भारतीय EV बाजार में अभी भी Tata Motors पहले और Mahindra & Mahindra दूसरे स्थान पर कायम हैं, जबकि JSW MG Motor India तीसरे स्थान पर बनी हुई है। e Vitara बनी मारुति की सफलता की नई पहचान मारुति सुजुकी फिलहाल भारतीय बाजार में केवल एक इलेक्ट्रिक मॉडल e Vitara बेच रही है। इसके मुकाबले Hyundai के पास Hyundai Creta Electric और Hyundai Ioniq 5 जैसे मॉडल हैं। वहीं VinFast, Tata Motors और Mahindra के पास कई EV विकल्प मौजूद हैं। इसके बावजूद e Vitara की लोकप्रियता ने मारुति को तेज़ी से आगे बढ़ाया है। जनवरी से मई 2026 के दौरान कंपनी ने औसतन 873 EV प्रति माह बेचीं। यह आंकड़ा VinFast (827), Hyundai (583), BYD (488) और Kia (405) की मासिक औसत बिक्री से अधिक रहा। यह दर्शाता है कि ग्राहकों ने मारुति के पहले इलेक्ट्रिक उत्पाद को सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। EV बाजार में क्यों बढ़ रही है मांग? भारत में इलेक्ट्रिक पैसेंजर वाहनों की मांग लगातार बढ़ रही है। अप्रैल और मई 2026 के बीच EV रजिस्ट्रेशन में सालाना आधार पर 77 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई और कुल रजिस्ट्रेशन 52,274 यूनिट्स तक पहुंच गया। मई 2026 में कुल पैसेंजर वाहन बाजार में EV की हिस्सेदारी बढ़कर 6.4 प्रतिशत हो गई। विशेषज्ञों के अनुसार, पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतें, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार, सरकार की प्रोत्साहन नीतियां और नए मॉडलों की उपलब्धता इस वृद्धि के प्रमुख कारण हैं। यही वजह है कि अब अधिक ग्राहक पारंपरिक ईंधन वाहनों की जगह इलेक्ट्रिक विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं। भारत बना Maruti का EV एक्सपोर्ट हब मारुति सुजुकी केवल घरेलू बाजार में ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी e Vitara के जरिए अपनी स्थिति मजबूत कर रही है। सितंबर 2025 में निर्यात शुरू होने के बाद कंपनी अब तक 46 देशों में 35,000 से अधिक यूनिट्स भेज चुकी है। e Vitara अब मारुति की सबसे ज्यादा निर्यात होने वाली गाड़ियों में तीसरे स्थान पर पहुंच चुकी है। इससे आगे केवल Maruti Suzuki Fronx और Maruti Suzuki Jimny हैं। दिलचस्प बात यह है कि इसी प्लेटफॉर्म पर आधारित एक रीबैज्ड मॉडल Toyota Urban Cruiser eBella भी तैयार किया जा रहा है, जिसे Toyota Motor Corporation अपने ब्रांड के तहत बेच रही है। मारुति सुजुकी की यह सफलता दिखाती है कि भारतीय EV बाजार में ब्रांड की विश्वसनीयता और मजबूत डीलर नेटवर्क अभी भी बड़ी भूमिका निभाते हैं। केवल एक मॉडल के साथ टॉप 4 में पहुंचना इस बात का संकेत है कि आने वाले वर्षों में कंपनी इलेक्ट्रिक सेगमेंट में और बड़ी चुनौती पेश कर सकती है।
Tata Punch ने मारी बाजी, Fronx और Nexon में कांटे की टक्कर भारत में कॉम्पैक्ट SUV सेगमेंट की लोकप्रियता लगातार बढ़ती जा रही है। अप्रैल 2026 में भी ग्राहकों ने माइक्रो और सब-4 मीटर SUVs को जमकर पसंद किया। बिक्री के आंकड़ों में Tata Punch सबसे ज्यादा बिकने वाली कॉम्पैक्ट SUV बनकर उभरी। वहीं Maruti Suzuki Fronx और Tata Nexon ने भी बेहद करीबी मुकाबला दिया। दिलचस्प बात यह रही कि टॉप-3 SUVs की बिक्री में 1000 यूनिट से भी कम का अंतर देखने को मिला, जिससे अप्रैल का महीना इस सेगमेंट के लिए बेहद प्रतिस्पर्धी रहा। अप्रैल 2026 की टॉप 10 सबसे ज्यादा बिकने वाली कॉम्पैक्ट SUVs रैंक मॉडल अप्रैल 2026 बिक्री सालाना बढ़ोतरी 1 Tata Punch 19,107 52.9% 2 Maruti Fronx 18,829 31.3% 3 Tata Nexon 18,126 17.3% 4 Maruti Brezza 14,124 -16.8% 5 Hyundai Venue 12,420 56.2% 6 Kia Sonet 10,537 30.6% 7 Hyundai Exter 8,096 49.5% 8 Mahindra XUV 3XO 7,517 -0.7% 9 Skoda Kylaq 4,089 -23.8% 10 Toyota Taisor 2,550 5.3% Tata Punch बनी सबसे ज्यादा बिकने वाली SUV Tata Punch ने अप्रैल 2026 में 19,107 यूनिट की बिक्री के साथ पहला स्थान हासिल किया। इस SUV की सालाना बिक्री में 52.9 प्रतिशत की बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई। इसकी ऊंची ग्राउंड क्लीयरेंस, SUV जैसा डिजाइन और शहरों में आसान ड्राइविंग इसे ग्राहकों की पहली पसंद बना रहे हैं। Fronx और Nexon में जोरदार मुकाबला Maruti Suzuki Fronx ने 18,829 यूनिट बेचकर दूसरा स्थान हासिल किया। यह Punch से सिर्फ 278 यूनिट पीछे रही। इसके स्पोर्टी डिजाइन और बेहतर माइलेज ने ग्राहकों को आकर्षित किया। वहीं Tata Nexon ने 18,126 यूनिट बिक्री के साथ तीसरा स्थान हासिल किया। Nexon की बिक्री में भी 17.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखने को मिली। Brezza की बिक्री घटी, Venue ने दिखाई ताकत Maruti Suzuki Brezza की बिक्री में गिरावट दर्ज की गई। अप्रैल में इसकी 14,124 यूनिट बिकीं, जो पिछले साल के मुकाबले 16.8 प्रतिशत कम रहीं। माना जा रहा है कि ग्राहक इसके फेसलिफ्ट मॉडल का इंतजार कर रहे हैं। दूसरी ओर Hyundai Venue ने शानदार प्रदर्शन किया। इसकी बिक्री 56.2 प्रतिशत बढ़कर 12,420 यूनिट पहुंच गई। नए अपडेटेड मॉडल और Bharat NCAP की 5-स्टार सेफ्टी रेटिंग का इसे फायदा मिला। Sonet, Exter और XUV 3XO भी दौड़ में शामिल Kia Sonet ने 10,537 यूनिट की बिक्री के साथ मजबूत पकड़ बनाए रखी। वहीं Hyundai Exter की बिक्री में 49.5 प्रतिशत की बड़ी छलांग दर्ज की गई। Mahindra XUV 3XO की बिक्री लगभग स्थिर रही और इसमें मामूली गिरावट देखी गई। Skoda Kylaq और Toyota Taisor का प्रदर्शन Skoda Kylaq की बिक्री में 23.8 प्रतिशत की गिरावट आई। इसके बावजूद यूरोपियन डिजाइन और ड्राइविंग एक्सपीरियंस के कारण इसकी अलग पहचान बनी हुई है। वहीं Toyota Taisor ने 2,550 यूनिट बिक्री के साथ टॉप-10 सूची में जगह बनाई।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।