teacher eligibility test

JTET 2026
JTET 2026: आवेदन की तिथि फिर बढ़ी, मोबाइल-ईमेल की समस्या वालों को विशेष मौका

रांची। झारखंड में शिक्षक बनने का सपना देख रहे युवाओं के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण और राहत भरी खबर है। झारखण्ड अधिविद्य परिषद् (जैक) ने झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (जेटेट) 2026 के ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि को आगे बढ़ा दिया है। अब अभ्यर्थी आगामी 20 जून  तक अपना परीक्षा आवेदन प्रपत्र ऑनलाइन जमा कर सकते हैं। मोबाइल-ईमेल वालों की समस्या का समाधान जैक को यह लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि जिन अभ्यर्थियों ने झारखण्ड शिक्षक पात्रता परीक्षा 2024 के लिए आवेदन किया था, उनके मोबाइल नंबर और ई-मेल आईडी उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्हें 2026 की परीक्षा का फॉर्म भरने में काफी तकनीकी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। छात्रों ने बोर्ड से वैकल्पिक रास्ता देने की मांग की थी। छात्रों के हित में बड़ा फैसला लेते हुए जैक ने स्पष्ट किया है कि ऐसे सभी अभ्यर्थियों को, जिनके पास पुराना मोबाइल नंबर या ईमेल नहीं है, ऑनलाइन आवेदन की सामान्य तिथि (20 जून) समाप्त होने के बाद एक विशेष अवसर दिया जाएगा। इस तय विशेष अवधि के दौरान अभ्यर्थी वेबसाइट पर अपनी सामान्य बुनियादी विवरणी दर्ज कर आसानी से अपना आवेदन फॉर्म भर सकेंगे।

Unknown जून 3, 2026 0
NASA unveils ambitious Moon Base plan for permanent human settlement on the Moon
चांद पर स्थायी मून बेस बनाएगा NASA, 20 अरब डॉलर की बड़ी योजना का ऐलान

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA ने चांद पर स्थायी मानव बस्ती बसाने की दिशा में बड़ा ऐलान किया है। एजेंसी ने करीब 20 अरब डॉलर की महत्वाकांक्षी “मून बेस” योजना पेश की है, जिसका उद्देश्य चांद पर ऐसा स्थायी ठिकाना बनाना है जहां वैज्ञानिक लंबे समय तक रहकर रिसर्च कर सकें। NASA ने इस मिशन के लिए विस्तृत रोडमैप जारी करते हुए रोवर, लैंडर और ड्रोन तकनीक विकसित करने के लिए अरबों डॉलर के कॉन्ट्रैक्ट भी दिए हैं। आर्टेमिस मिशन के बाद नई तैयारी NASA का यह कदम आर्टेमिस-II मिशन की सफलता के बाद सामने आया है। अप्रैल 2026 में आर्टेमिस-II मिशन के तहत चार अंतरिक्ष यात्रियों ने चांद की परिक्रमा की थी। यह 1972 के अपोलो-17 मिशन के बाद पहला मानव मिशन था जिसने लो अर्थ ऑर्बिट से आगे यात्रा की। अब NASA का लक्ष्य 2028 तक आर्टेमिस-III मिशन के जरिए अंतरिक्ष यात्रियों को दोबारा चांद की सतह पर उतारना है। NASA ने जारी किया मून बेस का ब्लूप्रिंट वॉशिंगटन डीसी में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में NASA प्रमुख Jared Isaacman ने कहा कि चांद पर बनने वाला यह बेस मानवता का दूसरे खगोलीय पिंड पर पहला स्थायी ठिकाना होगा। उन्होंने बताया कि मून बेस में लूनर रोवर, ड्रोन, वैज्ञानिक उपकरण और जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जाएगा ताकि इंसान चांद जैसे कठिन वातावरण में लंबे समय तक रहना सीख सकें।   2026 में शुरू होंगे तीन बड़े मिशन NASA ने 2026 के लिए तीन शुरुआती “मून बेस मिशन” घोषित किए हैं। इनका उद्देश्य इंसानों के पहुंचने से पहले तकनीक का परीक्षण करना और जोखिम कम करना है। Moon Base-I मिशन क्या करेगा? पहले मिशन “Moon Base-I” के तहत Blue Origin के “Blue Moon Mark-1 Endurance” लैंडर का उपयोग किया जाएगा। यह मिशन चांद के दक्षिणी ध्रुव के पास स्थित Shackleton Connecting Ridge इलाके में उतरेगा। यहां वैज्ञानिक उपकरण भेजे जाएंगे, जिनमें स्टीरियो कैमरे और लेजर रेट्रो-रिफ्लेक्टिव सिस्टम शामिल होंगे। NASA के मुताबिक: स्टीरियो कैमरे यह जांचेंगे कि रॉकेट थ्रस्टर चांद की सतह को कैसे प्रभावित करते हैं। लेजर सिस्टम अंतरिक्ष यानों को सटीक लोकेशन पहचानने में मदद करेगा। Moon Base-II में भेजा जाएगा भारी सामान दूसरे मिशन “Moon Base-II” में चांद पर 1100 पाउंड से ज्यादा सामान पहुंचाया जाएगा। यह मिशन Astrobotic Technology के “Griffin Lander” के जरिए भेजा जाएगा। इस मिशन में Astrolab का FLIP रोवर भी शामिल होगा। इसका उद्देश्य चांद की सतह पर भारी सामान ले जाने और मूवमेंट तकनीक विकसित करना है। Moon Base-III करेगा रहस्यमयी ‘लूनर स्वर्ल्स’ की जांच तीसरा मिशन “Moon Base-III” चांद की सतह पर दिखने वाले रहस्यमयी चमकीले पैटर्न “Lunar Swirls” का अध्ययन करेगा। वैज्ञानिकों का मानना है कि इनका संबंध चांद के नीचे मौजूद चुंबकीय क्षेत्रों से हो सकता है। इस मिशन में यूरोपियन और कोरियन स्पेस एजेंसियों के उपकरण भी शामिल होंगे। तीन चरणों में बनेगा चांद का बेस NASA ने पूरे कार्यक्रम को तीन चरणों में बांटा है। पहला चरण (2026-2028) नई तकनीकों का परीक्षण चांद की सतह पर ऑपरेशन की तैयारी लूनर वाहन और रोवर की तैनाती दूसरा चरण (2029-2032) स्थायी इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना पावर ग्रिड और सपोर्ट सिस्टम बनाना रहने योग्य मॉड्यूल विकसित करना तीसरा चरण (2032 के बाद) चांद पर लगातार मानव मौजूदगी नियमित क्रू रोटेशन स्थायी वैज्ञानिक रिसर्च करोड़ों डॉलर में बनेंगे चंद्र रोवर NASA ने Astrolab और Lunar Outpost को चांद पर चलने वाले रोवर बनाने की जिम्मेदारी दी है। Astrolab को करीब 219 मिलियन डॉलर Lunar Outpost को करीब 220 मिलियन डॉलर दिए गए हैं। इन रोवरों को तीन तरीकों से संचालित किया जा सकेगा: अंतरिक्ष यात्री खुद चलाएंगे पृथ्वी से रिमोट कंट्रोल पूरी तरह स्वायत्त संचालन NASA का लक्ष्य है कि ये रोवर चांद पर करीब एक साल तक सक्रिय रह सकें। ब्लू ओरिजिन को मिली बड़ी जिम्मेदारी Jeff Bezos की कंपनी Blue Origin को इन रोवरों को चांद तक पहुंचाने की जिम्मेदारी दी गई है। कंपनी को इसके लिए 188 मिलियन डॉलर का कॉन्ट्रैक्ट मिला है। प्रदर्शन के आधार पर अतिरिक्त 280 मिलियन डॉलर तक दिए जा सकते हैं। 2028 में भेजे जाएंगे उड़ने वाले ड्रोन NASA 2028 में चांद पर चार छोटे “हॉपिंग ड्रोन” भी भेजेगा। इनका काम उन इलाकों की तस्वीरें लेना होगा जहां रोवर पहुंचना मुश्किल होगा। इन ड्रोन को ले जाने वाला स्पेसक्राफ्ट Firefly Aerospace तैयार करेगी। “अब चांद पर स्थायी मौजूदगी बनाने का समय” NASA के मून बेस प्रोग्राम अधिकारी कार्लोस गार्सिया-गालान ने कहा कि आने वाले वर्षों में ऐसी स्थिति बनाई जाएगी जहां इंसान लगातार चांद पर मौजूद रह सकें। NASA प्रमुख जेरेड आइजैकमैन ने कहा कि यह मिशन सिर्फ अमेरिका का नहीं बल्कि पूरी मानवता का भविष्य बदलने वाला कदम साबित होगा।  

surbhi मई 27, 2026 0
Jharkhand Weather update
Jharkhand Weather update: झारखंड में मौसम ने ली करवट, गढ़वा, पलामू और चतरा में जारी रहेगी लू, कई जिलों में बारिश और तेज हवा का अलर्ट

रांची। झारखंड में भीषण गर्मी के बीच मौसम विभाग ने राहत भरी खबर दी है। राज्य के अधिकांश हिस्सों में बुधवार दोपहर बाद मौसम बदलने के संकेत हैं। विभाग के अनुसार कई जिलों में आंशिक बादल छाए रहेंगे और हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। हालांकि उत्तर-पश्चिमी जिलों गढ़वा, पलामू और चतरा में हीट वेव का असर अभी भी बना रहेगा।   तेज हवा और वज्रपात की चेतावनी मौसम विभाग ने राज्य के पूर्वी और मध्य हिस्सों में गरज के साथ तेज हवा और वज्रपात की संभावना जताई है। कुछ इलाकों में हवा की रफ्तार 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है। वहीं Simdega, Gumla, कोडरमा और हजारीबाग में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने का अनुमान है। मौसम वैज्ञानिकों ने लोगों को खुले मैदान, पेड़ों और बिजली के खंभों से दूर रहने की सलाह दी है।   कई जिलों में 45 डिग्री तक पहुंचेगा पारा उत्तर-पश्चिमी झारखंड के गढ़वा, पलामू और चतरा में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। यह राज्य का सबसे गर्म क्षेत्र बना रहेगा। वहीं देवघर, धनबाद और पाकुड़ में अधिकतम तापमान 41 डिग्री के आसपास रहने की संभावना है। राजधानी रांची और आसपास के इलाकों में अधिकतम तापमान 39 डिग्री तथा न्यूनतम 26 डिग्री रहने का अनुमान है। बोकारो, रामगढ़, खूंटी और हजारीबाग में भी तापमान 39 से 42 डिग्री के बीच रह सकता है।   बारिश से मिल सकती है राहत मौसम विभाग का कहना है कि अगले दो से तीन दिनों में अधिकतम तापमान में 3 से 4 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट आ सकती है। लगातार बादल और हल्की बारिश से लोगों को गर्मी से कुछ राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि फिलहाल उमस और गर्म हवाओं से परेशानी बनी रह सकती है। मौसम विशेषज्ञों ने लोगों को दोपहर में बाहर निकलने से बचने और पर्याप्त पानी पीने की सलाह दी है।

Unknown मई 27, 2026 0
jtet controversy
जेटेट से असुर-बिरहोर भी हटे, फिर सिर्फ भोजपुरी-मैथिली पर ही क्यों हो रहा विरोध?

रांची। झारखंड में जेटेट (J-TET) परीक्षा से कई क्षेत्रीय और जनजातीय भाषाओं को हटाए जाने के बाद राज्य में नया भाषा विवाद खड़ा हो गया है। जहां मगही, भोजपुरी, मैथिली और अंगिका जैसी क्षेत्रीय भाषाओं को हटाने पर राजनीतिक दलों और मंत्रियों ने खुलकर विरोध दर्ज कराया है, वहीं असुर, बिरहोर, भूमिज और माल्तो जैसी जनजातीय भाषाओं को सूची से बाहर किए जाने पर लगभग सन्नाटा पसरा हुआ है। इस मुद्दे ने अब राजनीति और वोट बैंक की प्राथमिकताओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।   क्षेत्रीय भाषाओं को हटाने पर राजनीतिक हलचल राज्य सरकार द्वारा जेटेट की संशोधित भाषा सूची जारी होने के बाद सबसे अधिक विरोध मगही, मैथिली, भोजपुरी और अंगिका को हटाने को लेकर हुआ। कांग्रेस कोटे के मंत्रियों समेत कई विधायकों ने इसे गलत फैसला बताते हुए कैबिनेट बैठक में भी आपत्ति दर्ज कराई। विवाद बढ़ने के बाद सरकार ने पांच मंत्रियों की एक कमेटी का गठन किया, जिसमें कांग्रेस, झामुमो और राजद के मंत्री शामिल हैं। हालांकि, इस पूरी कवायद में जनजातीय भाषाओं के मुद्दे को अपेक्षित महत्व नहीं मिल पाया। ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने समय-समय पर इस विषय को उठाया, लेकिन व्यापक राजनीतिक समर्थन अब तक नहीं दिखा।   जनजातीय भाषाओं पर क्यों चुप्पी? असुर, बिरहोर, भूमिज और माल्तो जैसी भाषाएं झारखंड की सांस्कृतिक और आदिवासी पहचान का अहम हिस्सा मानी जाती हैं। इन भाषाओं को भी 2026 में जेटेट की सूची से बाहर कर दिया गया, लेकिन इनके समर्थन में न तो बड़े आंदोलन हुए और न ही व्यापक राजनीतिक बयानबाजी देखने को मिली। विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों का मानना है कि यह चुप्पी वोट बैंक की राजनीति से जुड़ी हो सकती है। क्षेत्रीय भाषाओं से जुड़े समुदायों की संख्या अधिक होने के कारण राजनीतिक दल उनके पक्ष में खुलकर सामने आए, जबकि सीमित जनसंख्या वाले आदिवासी समुदायों की भाषाओं को अपेक्षित प्राथमिकता नहीं मिली।   किन जिलों में हटाई गईं भाषाएं? राज्य के कई जिलों में अलग-अलग भाषाओं को सूची से हटाया गया है। लोहरदगा और लातेहार में असुर और बिरहोर भाषा हटाई गई, जबकि दुमका, पाकुड़ और साहिबगंज से माल्तो और अंगिका को बाहर किया गया। पलामू और गढ़वा में मगही व भोजपुरी हटाई गईं। वहीं पश्चिम सिंहभूम से भूमिज भाषा को भी सूची से बाहर कर दिया गया।   एक दशक पहले शामिल थीं ये भाषाएं जानकारी के अनुसार, वर्ष 2016 में इन सभी भाषाओं को क्षेत्रीय और जनजातीय भाषा सूची में शामिल किया गया था। लेकिन 2026 में संशोधन के दौरान इन्हें हटाए जाने से अभ्यर्थियों और भाषा प्रेमियों में नाराजगी बढ़ गई है। कई लोग इसे प्रशासनिक लापरवाही तो कुछ इसे जानबूझकर की गई राजनीतिक छेड़छाड़ मान रहे हैं।   कमेटी में जनजातीय प्रतिनिधित्व नहीं भाषा विवाद को सुलझाने के लिए बनाई गई मंत्रियों की कमेटी में किसी भी जनजातीय समुदाय के प्रतिनिधि को शामिल नहीं किया गया है। झामुमो मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने भी इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि आदिवासी भाषाओं से जुड़े लोगों की भागीदारी जरूरी थी। अब सभी मंत्रियों की अनुशंसाएं मुख्यमंत्री को भेज दी गई हैं और उम्मीद की जा रही है कि आगामी कैबिनेट बैठक में इस संवेदनशील मसले पर अंतिम फैसला लिया जाएगा। फिलहाल, यह विवाद सिर्फ भाषा का नहीं बल्कि पहचान, प्रतिनिधित्व और राजनीतिक प्राथमिकताओं का मुद्दा बनता जा रहा है।

Unknown मई 27, 2026 0
JTET 2026
JTET की आवेदन तिथि बढ़ी, अब 2 जून तक भरे जायेंगे फॉर्म

रांची। झारखंड अधिविद्य परिषद यानी JAC ने झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा JTET 2026 की आवेदन की तिथि बढ़ा दी है। इससे अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिली है। जैक ने अभ्यर्थियों की मांग और प्राप्त सुझावों को ध्यान में रखते हुए ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि 2 जून तक बढ़ा दी है। इससे उन उम्मीदवारों को अतिरिक्त समय मिलेगा, जो किसी कारणवश निर्धारित समय सीमा के भीतर आवेदन नहीं कर सके थे। इससे पहले आवेदन प्रक्रिया 21 अप्रैल 2026 से शुरू की गई थी। जैक ने स्पष्ट किया है कि विज्ञापन संख्या 24/2026 की अन्य सभी शर्तें पूर्ववत लागू रहेंगी। वेबसाइट पर पूरी जानकारी परिषद ने अभ्यर्थियों से कहा है कि परीक्षा से संबंधित विस्तृत जानकारी, आवेदन प्रक्रिया और आवश्यक दिशा-निर्देश JAC की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध हैं। उम्मीदवार आवेदन करने से पहले सभी निर्देशों को ध्यानपूर्वक पढ़ लें, ताकि किसी प्रकार की त्रुटि से बचा जा सके। परिषद की ओर से समय-समय पर जारी अपडेट पर नजर रखने की भी सलाह दी गई है। शिक्षा के साथ सह-शैक्षिक गतिविधियों पर भी जोर जारी सूचना में यह भी उल्लेख किया गया है कि विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास को ध्यान में रखते हुए खेल एवं सह-शैक्षिक गतिविधियों के महत्व को लेकर जागरूकता बढ़ाई जा रही है। शिक्षकों को भी विद्यार्थियों को इन गतिविधियों में भाग लेने के लिए प्रेरित करने पर जोर दिया जा रहा है।

Unknown मई 21, 2026 0
JTET language controversy
जेटेट भाषा विवाद: कमेटी का सवाल-भोजपुरी-मगही बोलने वाले ज्यादा, फिर परीक्षा से बाहर क्यों?

रांची। भोजपुरी-मगही विवाद झारखंड में गरमाता जा रहा है। झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (जेटेट) की नई भाषा नियमावली को लेकर जारी विवाद पर बनी पांच मंत्रियों की उच्चस्तरीय कमेटी की बैठक में मंथन तो खूब हुआ, पर कोई नतीजा नहीं निकला। बैठक में अधिकारियों से कई अहम सवाल पूछे गए, लेकिन आवश्यक डेटा और स्पष्ट जवाब नहीं मिलने के कारण कमेटी कोई निर्णय नहीं ले सकी। अब अगली बैठक 22 मई को होगी। भोजपुरी-मगही बोलने वालों की संख्या अधिक वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह तथ्य सामने आया कि वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार झारखंड में भोजपुरी और मगही बोलने वालों की संख्या ओड़िया और बांग्ला भाषियों से करीब चार गुना अधिक है। इस पर कमेटी के सदस्यों ने सवाल उठाया कि जब इन भाषाओं का दायरा इतना बड़ा है, तो फिर इन्हें जेटेट परीक्षा से क्यों बाहर किया गया। सदस्यों ने यह भी पूछा कि वर्ष 2012 तक भोजपुरी, मगही और अंगिका भाषाओं को परीक्षा में शामिल करने का आधार क्या था और 2025 की नई नियमावली में इन्हें किस आधार पर हटाया गया। कुरमाली को शामिल नहीं करने पर भी आपत्ति बैठक में नई नियमावली में संथाल परगना के जिलों में कुरमाली भाषा को शामिल नहीं करने पर भी आपत्ति जताई गई। सदस्यों ने दावा किया कि संथाल क्षेत्र में कुरमाली बोलने वालों की संख्या तीन लाख से अधिक है। इसके बावजूद भाषा को सूची से बाहर रखा गया है। कमेटी ने मांगी विस्तृत जानकारी कमेटी ने विभाग से अगली बैठक से पहले विस्तृत तथ्यात्मक और प्रशासनिक डाटा उपलब्ध कराने को कहा है। इसमें राज्य के विभिन्न जिलों में बोली जाने वाली भाषाओं, भाषाभाषियों की संख्या, विभिन्न भाषाओं के शिक्षकों और विद्यार्थियों की संख्या तथा पिछली जेटेट परीक्षाओं में विभिन्न भाषाओं के अभ्यर्थियों के आंकड़े शामिल हैं। बैठक में ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह, पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री योगेंद्र प्रसाद, नगर विकास मंत्री सुदिव्य कुमार, उद्योग मंत्री संजय प्रसाद यादव, कार्मिक सचिव प्रवीण टोप्पो और शिक्षा सचिव उमाशंकर सिंह समेत कई अधिकारी मौजूद थे। कमेटी ने अगली बैठक में क्या-क्या जानकारी मांगी वर्ष 2012 तक भोजपुरी, मगही और अंगिका भाषाओं को जेटेट में शामिल करने का आधार क्या था और 2025 की नियमावली में इन्हें किस आधार पर हटाया गया। पूरे झारखंड में विभिन्न भाषाओं के कितने शिक्षक हैं। राज्य में किन-किन भाषाओं की पढ़ाई होती है। साथ ही इन भाषाओं को पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं की संख्या कितनी है। राज्य के अलग-अलग जिलों में भोजपुरी, मगही और अंगिका बोलने वालों की संख्या कितनी है तथा पूर्व की जेटेट परीक्षाओं में इन भाषाओं में कितने अभ्यर्थी शामिल हुए थे। असुर और बिरहोर जैसी आदिम जनजातीय भाषाओं को नियमावली से हटाने का आधार क्या है और इन भाषाओं को बोलने वालों की संख्या कितनी है। किस जिले में कौन-कौन सी जनजातीय और क्षेत्रीय भाषाएं बोली जाती हैं तथा उनके भाषाभाषियों की संख्या कितनी है। मांगी गई जानकारी का ठोस उत्तर नहीं मिला बैठक के बाद वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि अधिकारियों से मांगी गई जानकारी का ठोस उत्तर नहीं मिला। उन्होंने कहा कि भाषाओं, शिक्षकों और विद्यार्थियों से जुड़े पूरे डेटा के बिना कमेटी किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सकती। उन्होंने यह भी माना कि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से कैबिनेट बैठक में भोजपुरी, मगही और अंगिका को जेटेट में शामिल करने की मांग रखी थी।

Unknown मई 19, 2026 0
JTET Language Issue
JTET भाषा विवाद सुलझाने की कवायद तेज, मंत्रियों की कमेटी की पहली बैठक हुई संपन्न

रांची। झारखंड में JTET 2026 भाषा विवाद को लेकर गठित मंत्रियों की कमेटी की पहली बैठक रविवार को हुई। वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में मंत्री दीपिका पांडेय सिंह, संजय प्रसाद यादव, सुदिव्य कुमार सोनू और योगेंद्र प्रसाद शामिल हुए। करीब दो घंटे चली बैठक में भाषा विवाद से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई।   अधिकारियों को दिए गए अहम निर्देश बैठक के बाद मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने कहा कि पहली बैठक काफी सकारात्मक रही। कमेटी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे JTET भाषा विवाद से जुड़े सभी तथ्य, दस्तावेज और आवश्यक जानकारी अगली बैठक में प्रस्तुत करें। सरकार नई नियमावली की समीक्षा कर रही है और जिन बिंदुओं पर विवाद है, उन पर विस्तार से विचार किया जाएगा।   नियमावली में सुधार पर मंथन मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने बताया कि नई JTET नियमावली में किन-किन जगहों पर सुधार की आवश्यकता है, इसे लेकर विभाग से विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है। हालांकि अगली बैठक की आधिकारिक तारीख घोषित नहीं की गई है, लेकिन सूत्रों के अनुसार कमेटी इस शुक्रवार को दोबारा बैठक कर सकती है।   क्या है पूरा विवाद? JTET 2026 को लेकर विवाद तब शुरू हुआ जब हेमंत सोरेन सरकार ने नई नियमावली को मंजूरी दी। नई सूची में भोजपुरी, मगही और अंगिका जैसी भाषाओं को क्षेत्रीय भाषा श्रेणी से बाहर कर दिया गया, जबकि 2016 की JTET परीक्षा में ये भाषाएं शामिल थीं।   कई जिलों में विरोध पलामू, गढ़वा, गोड्डा, देवघर और दुमका जैसे जिलों में बड़ी संख्या में लोग इन भाषाओं का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में भाषाओं को सूची से हटाने पर राजनीतिक और सामाजिक विरोध तेज हो गया। विवाद बढ़ने के बाद मुख्यमंत्री ने समाधान के लिए पांच मंत्रियों की कमेटी गठित की, जिसकी पहली बैठक अब संपन्न हुई है।

Unknown मई 18, 2026 0
JTET Language Dispute
जेटेट भाषा विवाद सुलझाने के लिए सरकार ने बनाई पांच मंत्रियों की कमेटी

रांची। झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (JTET) में जिलावार भाषा निर्धारण को लेकर जारी विवाद के बीच राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने इस मामले की समीक्षा के लिए पांच मंत्रियों की उच्च स्तरीय कमेटी का गठन किया है। यह कमेटी जेटेट नियमावली में शामिल जनजातीय और क्षेत्रीय भाषाओं पर विचार करेगी तथा जरूरत पड़ने पर नई भाषाओं को जोड़ने या हटाने की सिफारिश करेगी। वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर को कमेटी का समन्वयक बनाया गया है।   किन मंत्रियों को मिली जिम्मेदारी कमेटी में झामुमो, कांग्रेस और राजद के मंत्रियों को शामिल किया गया है। इसमें वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर, उद्योग मंत्री संजय प्रसाद यादव, ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह, पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री योगेंद्र प्रसाद और उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री सुदिव्य कुमार शामिल हैं। सरकार ने कमेटी को जल्द रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है।   क्या है भाषा विवाद? जेटेट नियमावली में जिलावार जनजातीय और क्षेत्रीय भाषाओं का निर्धारण किया गया है। अभ्यर्थियों को संबंधित जिले में निर्धारित भाषा में परीक्षा देनी होती है। विवाद इस बात को लेकर है कि भोजपुरी, मगही और अंगिका जैसी भाषाओं को कई जिलों की क्षेत्रीय भाषा सूची में शामिल नहीं किया गया। पलामू क्षेत्र में मगही और भोजपुरी, जबकि संताल परगना में अंगिका को शामिल करने की मांग लगातार उठ रही है।   मंत्रियों ने पहले भी जताया था विरोध सूत्रों के अनुसार, कैबिनेट बैठक में मंत्री राधा कृष्ण किशोर और दीपिका पांडेय सिंह ने भाषा सूची को लेकर आपत्ति दर्ज कराई थी। इसके बाद सरकार ने एक बैठक में नियमावली पर फैसला टाल दिया था। बाद में नियमावली को मंजूरी देते समय भाषा विवाद के समाधान के लिए कमेटी गठित करने का निर्णय लिया गया।   10 साल बाद होगी जेटेट परीक्षा झारखंड में लगभग 10 वर्षों बाद जेटेट परीक्षा आयोजित होने जा रही है। आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और 21 मई तक फॉर्म जमा किए जाएंगे। परीक्षा जुलाई तक आयोजित होने की संभावना है।

Unknown मई 9, 2026 0
JTET exam update
भोजपुरी, मगही,अंगिका के छात्र नहीं दे सकेंगे JTET परीक्षा

रांची। हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में मंगलवार को रांची स्थित प्रोजेक्ट भवन में झारखंड कैबिनेट की अहम बैठक हुई। इस बैठक में राज्य के विकास और जनहित से जुड़े कुल 15 महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। हालांकि, झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (J-TET) नियमावली-2026 को लेकर भाषाई विवाद एक बार फिर चर्चा में रहा।कैबिनेट ने जेटेट नियमावली-2026 को मंजूरी दे दी, लेकिन इसमें भोजपुरी, मगही और अंगिका भाषाओं को क्षेत्रीय भाषा की सूची में शामिल नहीं किया गया।    15 अप्रैल को भी इस मुद्दे पर बैठक हुई  थी  बता दे  इससे पहले 15 अप्रैल की बैठक में भी इस मुद्दे पर चर्चा हुई थी। कैबिनेट की पिछली बैठक में कांग्रेस की मंत्री दीपिका पांडे सिंह और वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर ने भोजपुरी और अंगिका को क्षेत्रीय भाषा की सूची में शामिल करने का मुद्दा उठाया था। लेकिन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने विस्तृत चर्चा के बाद इसे अगली बैठक में लाने की बात कही थी। मंत्रियों का कहना था कि राज्य के कई जिलों में भोजपुरी, मगही और अंगिका व्यापक रूप से बोली जाती हैं, ऐसे में इन्हें क्षेत्रीय भाषाओं की सूची से बाहर रखना उचित नहीं है। वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने तर्क दिया था कि जैसे राज्य के बंगाल और ओडिशा से सटे इलाकों में बांग्ला और उड़िया भाषाओं को मान्यता दी गई है, उसी तरह बिहार सीमा से जुड़े जिलों में बोली जाने वाली भाषाओं को भी शामिल किया जाना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि इन भाषाओं को नजरअंदाज करने से लोगों में असंतोष बढ़ सकता है।   पुरानी नियमावली को ही मंजूरी मिली   इस बार भी पुरानी नियमावली को ही मंजूरी दी गई और  इन भाषाओं शामिल नहीं किया गया। मंगलवार को भी बैठक में ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने इस मुद्दे को उठाया। इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए मंत्रियों की एक समिति गठित की जाएगी। यह समिति 10 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी, जिसके आधार पर आगे निर्णय लिया जाएगा। 

Unknown अप्रैल 29, 2026 0
JTET-2026
JTET-2026...ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया शुरू

रांची। झारखंड में शिक्षक बनने के इच्छुक युवाओं के लिए अच्छी खबर है। झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (JTET)-2026 के लिए आज यानी 21 अप्रैल से ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू हो गई है। अभ्यर्थी 21 मई तक आवेदन कर सकते हैं। राज्य में पिछली JTET परीक्षा साल 2016 में हुई थी। लंबे इंतजार के बाद अब 2026 में फिर से परीक्षा आयोजित की जा रही है। इससे लाखों युवाओं को मौका मिलेगा जो लंबे समय से भर्ती का इंतजार कर रहे थे। उम्र सीमा में मिली बड़ी छूट नियमावली-2026 के तहत अभ्यर्थियों को उम्र सीमा में बड़ी छूट दी गई है। न्यूनतम आयु: 21 वर्ष अधिकतम आयु: 9 साल की छूट, यानि जिन उम्मीदवारों की उम्र बीच में बढ़ गई थी, वे भी अब इस परीक्षा में शामिल हो सकेंगे। परीक्षा दो स्तरों पर होगी कक्षा 1 से 5 (प्राथमिक) कक्षा 6 से 8 (उच्च प्राथमिक) योग्य अभ्यर्थी चाहें, तो दोनों लेवल के लिए एक साथ आवेदन कर सकते हैं। इससे नौकरी के अवसर बढ़ेंगे। 2024 के आवेदकों को फिर से भरना होगा फॉर्मः जिन अभ्यर्थियों ने 2024 में पहले आवेदन किया था, उन्हें भी इस बार नया आवेदन भरना जरूरी होगा। भाषा-1 और भाषा-2 का फिर से चयन करना होगाः सभी जानकारी दोबारा अपडेट करनी होगी पुराने अभ्यर्थियों को नहीं देना होगा फीसः 2024 में फीस जमा कर चुके उम्मीदवारों के लिए राहत की खबर है। उन्हें दोबारा परीक्षा शुल्क नहीं देना होगा केवल अपनी जानकारी सत्यापित करनी होगी ऑनलाइन ही होगा आवेदनः आवेदन की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी। अधिकारियों ने सलाह दी है कि अभ्यर्थी अंतिम तारीख का इंतजार न करें, ताकि तकनीकी परेशानी से बचा जा सके। युवाओं के लिए बड़ा मौकाः JTET-2026 उन उम्मीदवारों के लिए सुनहरा अवसर है जो लंबे समय से शिक्षक बनने का सपना देख रहे थे। उम्र में छूट और दोबारा मौका मिलने से बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों को फायदा होगा।

Unknown अप्रैल 21, 2026 0
Students filling Jharkhand TET 2026 online application form for teacher eligibility exam
Jharkhand TET 2026: 21 अप्रैल से आवेदन शुरू, शिक्षक बनने का सुनहरा मौका

रांची: झारखंड में शिक्षक बनने की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए बड़ी खबर है। झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (JTET) 2026 के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 21 अप्रैल 2026 से शुरू होकर 21 मई 2026 तक चलेगी। इच्छुक उम्मीदवार निर्धारित तिथि के भीतर आवेदन कर सकते हैं। यह परीक्षा राज्य के प्राथमिक (कक्षा 1–5) और उच्च प्राथमिक (कक्षा 6–8) विद्यालयों में शिक्षक बनने के लिए आवश्यक पात्रता तय करती है। महत्वपूर्ण तिथियां आवेदन शुरू: 21 अप्रैल 2026 अंतिम तिथि: 21 मई 2026 पहले आवेदन कर चुके अभ्यर्थियों के लिए जरूरी सूचना जिन उम्मीदवारों ने पहले विज्ञापन संख्या 30/2024 के तहत आवेदन किया था, उन्हें भी दोबारा आवेदन करना अनिवार्य होगा। हालांकि, ऐसे अभ्यर्थियों से कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा। उन्हें नए नियमों के अनुसार: भाषा-2 का चयन करना होगा पोर्टल पर अपनी जानकारी अपडेट करनी होगी शैक्षणिक योग्यता प्राथमिक और उच्च प्राथमिक शिक्षकों की योग्यता अधिसूचना संख्या 487 (दिनांक 26.03.2026) के अनुसार निर्धारित की गई है। विस्तृत जानकारी के लिए अभ्यर्थी आधिकारिक वेबसाइट पर नोटिफिकेशन देख सकते हैं। आरक्षित वर्ग को राहत SC/ST/OBC/EBC/दिव्यांग अभ्यर्थियों को न्यूनतम अंकों में 5% की छूट दी जाएगी  ट्रेनिंग कर रहे अभ्यर्थियों को भी मौका जो उम्मीदवार शिक्षक प्रशिक्षण (Training) की परीक्षा में शामिल हो रहे हैं, वे भी आवेदन कर सकते हैं, बशर्ते: निर्धारित तिथि तक अंतिम अंकपत्र जमा करें परिणाम जारी होने से पहले दस्तावेज सत्यापन कराएं यह प्रक्रिया NCTE के दिशा-निर्देश और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुसार होगी। जरूरी नियम आवेदन करने से पात्रता स्वतः प्रमाणित नहीं होगी अंतिम सत्यापन नियुक्ति के समय जिला शिक्षा अधीक्षक द्वारा किया जाएगा उम्मीदवार अपने अंक सुधार के लिए एक से अधिक बार परीक्षा दे सकते हैं आयु सीमा न्यूनतम आयु: 21 वर्ष (1 अगस्त 2026 तक) अधिकतम आयु: राज्य सरकार के नियमानुसार विशेष छूट पारा शिक्षकों को सेवा अवधि के बराबर छूट (अधिकतम 58 वर्ष तक) 2016–2026 के बीच परीक्षा अंतराल को देखते हुए अधिकतम 9 वर्ष की छूट क्यों जरूरी है JTET? JTET पास करना झारखंड में सरकारी शिक्षक बनने के लिए अनिवार्य पात्रता है। ध्यान रखें कि यह परीक्षा केवल पात्रता तय करती है, सीधे नौकरी नहीं देती। अभ्यर्थियों के लिए जरूरी सलाह आवेदन से पहले नियमावली ध्यान से पढ़ें भाषा चयन सोच-समझकर करें सभी जरूरी दस्तावेज पहले से तैयार रखें अंतिम तिथि का इंतजार न करें

surbhi मार्च 31, 2026 0
Student checking CTET Result 2026 online on laptop screen with scorecard details visible
CTET Result 2026 जारी: लाखों उम्मीदवारों का इंतजार खत्म, ऐसे करें स्कोरकार्ड डाउनलोड

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा (CTET) फरवरी 2026 का रिजल्ट आधिकारिक वेबसाइट पर जारी कर दिया है। लंबे समय से इंतजार कर रहे लाखों अभ्यर्थियों के लिए यह बड़ी राहत की खबर है। अब उम्मीदवार घर बैठे ही ऑनलाइन अपना स्कोरकार्ड चेक और डाउनलोड कर सकते हैं। ऐसे करें CTET Result 2026 चेक CTET रिजल्ट देखने के लिए नीचे दिए गए आसान स्टेप्स फॉलो करें: सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट ctet.nic.in पर जाएं होमपेज पर “CTET Result 2026” लिंक पर क्लिक करें अपना रोल नंबर दर्ज करें सबमिट करते ही आपका रिजल्ट स्क्रीन पर दिखाई देगा स्कोरकार्ड डाउनलोड करें और भविष्य के लिए प्रिंट निकाल ले 25 लाख से ज्यादा उम्मीदवारों ने दी परीक्षा CTET फरवरी 2026 परीक्षा का आयोजन 7 और 8 फरवरी 2026 को देशभर के लगभग 140 शहरों में किया गया था। इस परीक्षा में करीब 25 लाख अभ्यर्थियों ने हिस्सा लिया था। इस बार CBSE ने पेपर-1 और पेपर-2 दोनों के रिजल्ट एक साथ जारी किए हैं। पेपर-1: कक्षा 1 से 5 तक पढ़ाने के इच्छुक उम्मीदवारों के लिए पेपर-2: कक्षा 6 से 8 तक पढ़ाने के इच्छुक उम्मीदवारों के लिए कितने अंक लाने पर होंगे पास? CTET परीक्षा पास करने के लिए न्यूनतम अंक निर्धारित हैं: सामान्य वर्ग (General): 60% अंक OBC/SC/ST/दिव्यांग: 55% अंक   लाइफटाइम वैलिडिटी और करियर के मौके CTET की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसका सर्टिफिकेट लाइफटाइम वैलिड होता है। यानी एक बार परीक्षा पास करने के बाद उम्मीदवार को दोबारा परीक्षा देने की जरूरत नहीं होती। सफल अभ्यर्थी Kendriya Vidyalaya (KVS), Navodaya Vidyalaya (NVS) समेत विभिन्न सरकारी स्कूलों में शिक्षक भर्ती के लिए आवेदन कर सकते हैं। इसके अलावा, CBSE द्वारा उम्मीदवारों को डिजिटल मार्कशीट और सर्टिफिकेट DigiLocker के माध्यम से भी उपलब्ध कराया जाएगा।  

surbhi मार्च 31, 2026 0
Candidates checking CTET 2026 result online and downloading scorecard on laptop and mobile
CTET Result 2026: कभी भी जारी हो सकता है रिजल्ट, जानिए स्कोरकार्ड डाउनलोड करने का आसान तरीका

Central Board of Secondary Education द्वारा आयोजित Central Teacher Eligibility Test (CTET) 2026 के लाखों अभ्यर्थियों का इंतजार अब खत्म होने वाला है। बोर्ड की ओर से जल्द ही रिजल्ट जारी किए जाने की संभावना है। 8 फरवरी 2026 को आयोजित परीक्षा और कुछ केंद्रों पर 1 मार्च को हुए री-एग्जाम के बाद से उम्मीदवार लगातार नतीजों का इंतजार कर रहे हैं। Answer Key के बाद अब रिजल्ट की बारी CTET की आंसर की 12 मार्च 2026 को जारी कर दी गई थी, जिसमें पेपर 1 और पेपर 2 दोनों शामिल थे। उम्मीदवारों को 15 मार्च तक आपत्तियां दर्ज कराने का मौका दिया गया था। अब ऑब्जेक्शन विंडो बंद हो चुकी है और बोर्ड द्वारा रिजल्ट तैयार करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। पिछले वर्षों के ट्रेंड को देखें तो आंसर की पर आपत्तियां बंद होने के लगभग 10–12 दिनों के भीतर रिजल्ट जारी कर दिया जाता है। ऐसे में इस बार भी रिजल्ट किसी भी समय आधिकारिक वेबसाइट पर जारी किया जा सकता है। CTET पास करने के क्या फायदे हैं? CTET परीक्षा उन उम्मीदवारों के लिए आयोजित की जाती है, जो सरकारी स्कूलों में शिक्षक बनने की इच्छा रखते हैं। पेपर 1: कक्षा 1 से 5 तक पढ़ाने के इच्छुक अभ्यर्थियों के लिए पेपर 2: कक्षा 6 से 8 तक पढ़ाने के इच्छुक अभ्यर्थियों के लिए इस परीक्षा को पास करने के बाद मिलने वाला सर्टिफिकेट अब लाइफटाइम वैलिड होता है, जो केंद्र और कई राज्यों में शिक्षक भर्ती के लिए जरूरी योग्यता मानी जाती है। ऐसे डाउनलोड करें CTET 2026 स्कोरकार्ड रिजल्ट जारी होने के बाद उम्मीदवार इन आसान स्टेप्स को फॉलो करके अपना स्कोरकार्ड डाउनलोड कर सकते हैं: आधिकारिक वेबसाइट ctet.nic.in पर जाएं होमपेज पर “CTET Result 2026” लिंक पर क्लिक करें जरूरी डिटेल्स दर्ज करें पेपर (Paper 1 या Paper 2) का चयन करें स्क्रीन पर रिजल्ट दिखाई देगा स्कोरकार्ड डाउनलोड कर सुरक्षित रख लें उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे वेबसाइट पर नजर बनाए रखें, ताकि रिजल्ट जारी होते ही तुरंत चेक कर सकें।  

surbhi मार्च 25, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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दिल्ली में 50 लाख की रंगदारी की साजिश का खुलासा, कारोबारी की पत्नी निकली मास्टरमाइंड

abhishek singh जून 30, 2026 0