रांची: झारखंड में शिक्षक बनने की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए बड़ी खबर है। झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (JTET) 2026 के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 21 अप्रैल 2026 से शुरू होकर 21 मई 2026 तक चलेगी। इच्छुक उम्मीदवार निर्धारित तिथि के भीतर आवेदन कर सकते हैं।
यह परीक्षा राज्य के प्राथमिक (कक्षा 1–5) और उच्च प्राथमिक (कक्षा 6–8) विद्यालयों में शिक्षक बनने के लिए आवश्यक पात्रता तय करती है।
जिन उम्मीदवारों ने पहले विज्ञापन संख्या 30/2024 के तहत आवेदन किया था, उन्हें भी दोबारा आवेदन करना अनिवार्य होगा।
हालांकि, ऐसे अभ्यर्थियों से कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा।
उन्हें नए नियमों के अनुसार:
प्राथमिक और उच्च प्राथमिक शिक्षकों की योग्यता अधिसूचना संख्या 487 (दिनांक 26.03.2026) के अनुसार निर्धारित की गई है।
विस्तृत जानकारी के लिए अभ्यर्थी आधिकारिक वेबसाइट पर नोटिफिकेशन देख सकते हैं।
ट्रेनिंग कर रहे अभ्यर्थियों को भी मौका
जो उम्मीदवार शिक्षक प्रशिक्षण (Training) की परीक्षा में शामिल हो रहे हैं, वे भी आवेदन कर सकते हैं, बशर्ते:
यह प्रक्रिया NCTE के दिशा-निर्देश और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुसार होगी।
JTET पास करना झारखंड में सरकारी शिक्षक बनने के लिए अनिवार्य पात्रता है। ध्यान रखें कि यह परीक्षा केवल पात्रता तय करती है, सीधे नौकरी नहीं देती।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
Computer Science Engineering को लंबे समय तक इंजीनियरिंग की सबसे लोकप्रिय ब्रांच माना जाता रहा। हर छात्र का सपना CSE में एडमिशन लेना और बड़ी टेक कंपनियों में नौकरी पाना होता था। लेकिन अब तस्वीर तेजी से बदलती नजर आ रही है। इंजीनियरिंग की दुनिया में एक नई ब्रांच तेजी से उभरकर सामने आई है, जिसने प्लेसमेंट और करियर ग्रोथ के मामले में सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। यह ब्रांच है Electronics and Communication Engineering यानी ECE। क्यों बढ़ रहा है ECE का क्रेज? दुनिया अब सिर्फ ऐप्स और वेबसाइट्स तक सीमित नहीं रह गई है। टेक्नोलॉजी का फोकस तेजी से हार्डवेयर, चिप डिजाइन, स्मार्ट डिवाइसेस और कम्युनिकेशन सिस्टम्स की ओर बढ़ रहा है। आज जिन तकनीकों की सबसे ज्यादा चर्चा है, उनमें शामिल हैं: 5G और 6G नेटवर्क Artificial Intelligence (AI) Internet of Things (IoT) Semiconductor Technology Robotics और Automation इन सभी सेक्टर्स की नींव इलेक्ट्रॉनिक्स और कम्युनिकेशन पर टिकी हुई है। यही वजह है कि कंपनियां अब ऐसे इंजीनियर्स की तलाश में हैं जो सिर्फ कोडिंग ही नहीं, बल्कि हार्डवेयर और सिस्टम लेवल टेक्नोलॉजी को भी समझते हों। AI ने बढ़ाई CSE छात्रों की चिंता पिछले कुछ वर्षों में AI टूल्स ने कोडिंग इंडस्ट्री को काफी बदल दिया है। कई बेसिक प्रोग्रामिंग और ऑटोमेशन वाले काम अब AI खुद करने लगा है। इसके चलते IT सेक्टर में पहले जैसी बड़े स्तर की हायरिंग में कुछ धीमापन देखने को मिला है। दूसरी तरफ ECE छात्रों की मांग लगातार बढ़ती जा रही है। खासकर सेमीकंडक्टर, एम्बेडेड सिस्टम और इलेक्ट्रॉनिक्स डिजाइनिंग कंपनियां तेजी से भर्ती कर रही हैं। बड़े कॉलेजों में ECE छात्रों का शानदार प्लेसमेंट अब यह सिर्फ चर्चा तक सीमित नहीं है। देश के कई बड़े इंजीनियरिंग संस्थानों के प्लेसमेंट आंकड़े भी ECE की बढ़ती ताकत को दिखा रहे हैं। Indian Institute of Technology BHU, National Institute of Technology Rourkela और IIIT Hyderabad जैसे संस्थानों में ECE छात्रों को शानदार पैकेज मिले हैं। कई कोर इलेक्ट्रॉनिक्स और चिप डिजाइन कंपनियां अब करोड़ों के ऑफर तक दे रही हैं। खास बात यह है कि कई कॉलेजों में ECE का एवरेज पैकेज अब CSE के बराबर या उससे भी ज्यादा पहुंच चुका है। ECE छात्रों के लिए कहां हैं मौके? ECE करने वाले छात्रों के लिए करियर के कई नए रास्ते खुल रहे हैं: Semiconductor Industry Chip Design Companies Telecom Sector AI Hardware Development Robotics Embedded Systems Space और Defense Technology भारत सरकार भी सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर पर तेजी से फोकस कर रही है, जिससे आने वाले वर्षों में ECE इंजीनियर्स की मांग और बढ़ सकती है। क्या ECE भविष्य की सबसे मजबूत ब्रांच बन सकती है? विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाला समय सिर्फ सॉफ्टवेयर का नहीं, बल्कि Software + Hardware Integration का होगा। ऐसे में ECE जैसी ब्रांच छात्रों को ज्यादा विविध और भविष्य-केंद्रित अवसर दे सकती है। हालांकि, करियर चुनते समय सिर्फ ट्रेंड नहीं बल्कि अपनी रुचि और स्किल्स को प्राथमिकता देना भी बेहद जरूरी है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की कक्षा 10वीं की कंपार्टमेंट परीक्षा आज, 15 मई 2026 से शुरू हो गई है। यह परीक्षाएं 21 मई तक आयोजित की जाएंगी। परीक्षा का पहला पेपर गणित (मैथमेटिक्स स्टैंडर्ड और मैथमेटिक्स बेसिक) का है। इस बार देशभर से कुल 6,68,854 छात्र परीक्षा में शामिल हो रहे हैं। प्रदर्शन सुधारने का मिलेगा मौका सीबीएसई द्वारा लागू की गई नई दो-बोर्ड परीक्षा व्यवस्था के तहत छात्रों को अपने अंकों में सुधार का दूसरा अवसर दिया जा रहा है। बोर्ड के अनुसार 5,25,655 छात्र गणित, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान और भाषा विषयों में अपने प्रदर्शन को बेहतर बनाने के लिए परीक्षा दे रहे हैं। इसके अलावा 85,285 छात्र कंपार्टमेंट परीक्षा में शामिल होंगे, जबकि 57,914 छात्र एक या दो विषयों में सुधार और कंपार्टमेंट दोनों श्रेणियों में परीक्षा देंगे। सुबह 10:30 बजे से शुरू होंगी परीक्षाएं अधिकांश परीक्षाएं सुबह 10:30 बजे से दोपहर 1:30 बजे तक आयोजित की जाएंगी। कुछ विषयों की परीक्षाएं 12:30 बजे समाप्त होंगी। परीक्षा के लिए बोर्ड ने सभी केंद्रों पर आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी कर ली हैं। जून में जारी होगा फाइनल रिजल्ट सीबीएसई ने 15 अप्रैल को पहली बोर्ड परीक्षा के परिणाम घोषित किए थे। उस परीक्षा में 24,71,777 छात्रों ने भाग लिया था, जिनमें से 23,16,008 छात्र सफल हुए थे। इस तरह कुल पास प्रतिशत 93.70 फीसदी रहा था। हालांकि बोर्ड ने स्पष्ट किया था कि वह परिणाम अंतिम नहीं था। दूसरी बोर्ड परीक्षा समाप्त होने के बाद ही फाइनल रिजल्ट जारी किया जाएगा और उसी के आधार पर छात्रों को अंतिम मार्कशीट प्रदान की जाएगी। शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव सीबीएसई की यह नई दो-बोर्ड परीक्षा प्रणाली छात्रों को तनाव कम करने और बेहतर प्रदर्शन का अवसर देने के उद्देश्य से शुरू की गई है। शिक्षा विशेषज्ञ इसे छात्रों के हित में उठाया गया सकारात्मक कदम मान रहे हैं।
नई दिल्ली, एजेंसियां। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने कक्षा 12वीं के परीक्षा परिणाम जारी कर दिए हैं। लंबे समय से रिजल्ट का इंतजार कर रहे लाखों छात्रों के लिए बड़ी खबर सामने आई है। छात्र अब अपना रिजल्ट CBSE की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन चेक कर सकते हैं। बोर्ड के अनुसार इस वर्ष कुल 85.20 प्रतिशत छात्र-छात्राएं परीक्षा में सफल हुए हैं। इस बार भी देशभर से लाखों विद्यार्थियों ने परीक्षा में हिस्सा लिया था। रिजल्ट जारी होने के बाद वेबसाइट पर भारी ट्रैफिक देखा गया, जिसके चलते छात्रों को थोड़ी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में बोर्ड ने UMANG ऐप और DigiLocker के जरिए भी मार्कशीट डाउनलोड करने की सुविधा दी है। ऐसे करें CBSE 12वीं का रिजल्ट चेक • आधिकारिक वेबसाइटों पर जाएं - cbse.gov.in, results.cbse.nic.in • CBSE कक्षा 12 के स्कोरकार्ड पीडीएफ लिंक पर क्लिक करें • लॉगिन के लिए पंजीकरण संख्या, रोल नंबर/जन्म तिथि का उपयोग करें • CBSE 12वीं का स्कोरकार्ड पीडीएफ डाउनलोड के लिए उपलब्ध हो जाएगा • CBSE कक्षा 12 के स्कोरकार्ड पीडीएफ को सेव करें और इसकी एक हार्ड कॉपी निकाल लें। UMANG ऐप और DigiLocker से भी मिलेगा रिजल्ट CBSE ने छात्रों की सुविधा के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी रिजल्ट उपलब्ध कराया है। छात्र Google Play Store से UMANG ऐप डाउनलोड कर मोबाइल नंबर या रजिस्ट्रेशन नंबर की मदद से लॉगिन कर सकते हैं। इसके अलावा DigiLocker के माध्यम से भी मार्कशीट डाउनलोड की जा सकती है। इसके लिए छात्रों को स्कूल द्वारा दिए गए एक्सेस कोड और रोल नंबर की आवश्यकता होगी। छात्रों में खुशी का माहौल रिजल्ट जारी होते ही छात्रों और अभिभावकों में खुशी का माहौल है। कई छात्र अब कॉलेज एडमिशन और करियर की अगली तैयारी में जुट गए हैं। CBSE ने छात्रों को सलाह दी है कि वे आधिकारिक वेबसाइट से ही अपना परिणाम देखें और किसी अफवाह पर भरोसा न करें।