TMC vs BJP

Amit Shah addressing BJP leaders in Kolkata after Suvendu Adhikari’s victory over Mamata Banerjee in Bhabanipur
अमित शाह का ममता बनर्जी पर बड़ा हमला, बोले- शुभेंदु दा ने घर में घुसकर हराया

Amit Shah on Mamata Banerjee Bhabanipur Loss: पश्चिम बंगाल की राजनीति में भवानीपुर सीट पर ममता बनर्जी की हार के बाद बयानबाजी तेज हो गई है. भाजपा विधायक दल की बैठक के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी पर तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा कि इस बार शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को उनके ही घर में घुसकर हराया है. “नंदीग्राम में गई थीं चुनौती देने, अब भवानीपुर में मिली हार” कोलकाता में भाजपा नेताओं और विधायकों को संबोधित करते हुए अमित शाह ने ममता बनर्जी के पुराने बयान का जिक्र किया. शाह ने कहा कि 2021 में ममता बनर्जी खुद शुभेंदु अधिकारी के गढ़ नंदीग्राम में चुनाव लड़ने गई थीं और इसे अपनी राजनीतिक ताकत बताया था. उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “दीदी कहती थीं कि वह शुभेंदु के गढ़ में जाकर लड़ रही हैं. लेकिन इस बार शुभेंदु दा ने उनके अपने घर भवानीपुर में जाकर उन्हें हरा दिया.” सोशल मीडिया पर वायरल हुआ बयान अमित शाह का यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. भाजपा समर्थक इसे बंगाल की राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत बता रहे हैं, जबकि टीएमसी समर्थकों ने शाह के बयान को राजनीतिक उकसावे वाला करार दिया है. भवानीपुर में कैसे बदला चुनावी समीकरण? भवानीपुर सीट को लंबे समय से ममता बनर्जी का सबसे सुरक्षित गढ़ माना जाता रहा है. लेकिन 2026 विधानसभा चुनाव में भाजपा उम्मीदवार शुभेंदु अधिकारी ने यहां बड़ा उलटफेर करते हुए ममता बनर्जी को 15 हजार से ज्यादा वोटों से हराया. मतगणना के शुरुआती राउंड में ममता बढ़त बनाए हुए थीं, लेकिन बाद के चरणों में शुभेंदु अधिकारी लगातार आगे निकलते गए और अंत में निर्णायक जीत दर्ज की. “भ्रष्टाचार और परिवारवाद से तंग आ चुकी है जनता” अमित शाह ने दावा किया कि भवानीपुर की जनता ने भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद और तुष्टिकरण की राजनीति के खिलाफ वोट दिया है. उन्होंने कहा कि बंगाल में भाजपा की जीत सिर्फ सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि राजनीतिक संस्कृति में बदलाव का संकेत है. “शेरनी से भीगी बिल्ली” वाले बयान पर बढ़ा विवाद अपने भाषण में शाह ने ममता बनर्जी पर व्यक्तिगत तंज कसते हुए कहा कि जो नेता खुद को बंगाल की “शेरनी” बताती थीं, अब हार के बाद “भीगी बिल्ली” बन गई हैं. इस बयान के बाद राजनीतिक विवाद और गहरा गया है. टीएमसी नेताओं ने शाह की भाषा पर सवाल उठाए हैं, जबकि भाजपा इसे चुनावी जवाब बता रही है.  

surbhi मई 9, 2026 0
Suvendu Adhikari addressing supporters after defeating Mamata Banerjee in a key Bengal election battle
कौन हैं नंदीग्राम के ‘जायंट किलर’ शुभेंदु अधिकारी? जिन्होंने 2 बार ममता बनर्जी को हराकर बदल दी बंगाल की राजनीति

Who is Suvendu Adhikari: पश्चिम बंगाल की राजनीति में शनिवार का दिन ऐतिहासिक बनने जा रहा है. भाजपा विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद शुभेंदु अधिकारी राज्य के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने जा रहे हैं. इसके साथ ही बंगाल में पहली बार भाजपा की सरकार बनने जा रही है. कभी ममता बनर्जी के सबसे करीबी माने जाने वाले शुभेंदु अधिकारी आज उनके सबसे बड़े राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी बन चुके हैं. नंदीग्राम से शुरू हुआ ‘जायंट किलर’ का सफर शुभेंदु अधिकारी को बंगाल की राजनीति में ‘जायंट किलर’ कहा जाता है. इसकी सबसे बड़ी वजह ममता बनर्जी के खिलाफ उनकी दो बड़ी चुनावी जीत हैं. 2021: नंदीग्राम में ममता को दी मात साल 2021 के विधानसभा चुनाव में शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम सीट पर ममता बनर्जी को हराकर पूरे देश को चौंका दिया था. यह चुनाव बंगाल की राजनीति का सबसे चर्चित मुकाबला बना था. 2026: भवानीपुर में फिर हराया इसके बाद 2026 के चुनाव में शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को भवानीपुर सीट पर भी हराकर बड़ा राजनीतिक संदेश दिया. भवानीपुर को ममता का सबसे मजबूत गढ़ माना जाता था, लेकिन शुभेंदु ने वहां भी जीत दर्ज कर टीएमसी के अभेद्य किले को ढहा दिया. छात्र राजनीति से शुरू हुआ राजनीतिक सफर 15 दिसंबर 1970 को पूर्व मेदिनीपुर जिले के कारकुली गांव में जन्मे शुभेंदु अधिकारी राजनीतिक परिवार से आते हैं. उनके पिता शिशिर अधिकारी बंगाल की राजनीति के बड़े नेताओं में गिने जाते हैं. शुभेंदु ने अपनी शुरुआती पढ़ाई कोंटाई में की और बाद में रवींद्र भारती विश्वविद्यालय से इतिहास में एमए किया. उन्होंने छात्र राजनीति के जरिए अपना राजनीतिक करियर शुरू किया. शुरुआती दौर में वे कांग्रेस छात्र संगठन से जुड़े रहे. 1995 में वे पहली बार पार्षद बने और धीरे-धीरे बंगाल की राजनीति में अपनी पहचान मजबूत करते गए. आरएसएस से मिला संगठन और अनुशासन का प्रशिक्षण कम लोग जानते हैं कि शुभेंदु अधिकारी ने युवावस्था में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की शाखाओं में भी प्रशिक्षण लिया था. माना जाता है कि इसी दौरान उनके भीतर संगठन क्षमता और अनुशासन की मजबूत नींव पड़ी, जिसने आगे चलकर उनकी राजनीतिक शैली को आकार दिया. नंदीग्राम आंदोलन ने बना दिया बड़ा चेहरा 2007 का नंदीग्राम आंदोलन शुभेंदु अधिकारी के राजनीतिक जीवन का सबसे बड़ा टर्निंग प्वाइंट साबित हुआ. भूमि अधिग्रहण के खिलाफ हुए इस आंदोलन में उन्होंने अहम भूमिका निभाई और देखते ही देखते वे बंगाल की राजनीति के बड़े नेता बन गए. इसी आंदोलन ने उन्हें जमीनी नेता की पहचान दिलाई. क्यों टूटा ममता बनर्जी से रिश्ता? एक समय ऐसा था जब शुभेंदु अधिकारी को ममता बनर्जी का राजनीतिक उत्तराधिकारी माना जाता था. वे टीएमसी सरकार में परिवहन और पर्यावरण मंत्री भी रहे. लेकिन समय के साथ दोनों के रिश्तों में दूरी बढ़ने लगी. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी में अभिषेक बनर्जी की बढ़ती भूमिका और परिवारवाद की राजनीति से शुभेंदु नाराज थे. आखिरकार 2020 में उन्होंने टीएमसी छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया. भाजपा में आने के बाद वे बंगाल में पार्टी का सबसे बड़ा चेहरा बनकर उभरे. विपक्ष के नेता के रूप में लगातार रहे आक्रामक भाजपा में शामिल होने के बाद शुभेंदु अधिकारी ने विपक्ष के नेता के रूप में ममता सरकार को लगातार घेरा. एसएससी भर्ती घोटाला, संदेशखाली विवाद और आरजी कर अस्पताल मामले जैसे मुद्दों पर उन्होंने सड़क से लेकर विधानसभा तक आंदोलन किया. कई बार विधानसभा में हंगामे के कारण उन्हें निलंबन का भी सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने खुद को बंगाल में भाजपा के सबसे आक्रामक नेता के रूप में स्थापित किया. बंगाल की राजनीति में नए दौर की शुरुआत भाजपा नेतृत्व लंबे समय से बंगाल में ऐसे चेहरे की तलाश में था, जिसकी जड़ें बंगाल की मिट्टी से जुड़ी हों और जो राज्य की संस्कृति को समझता हो. शुभेंदु अधिकारी इस कसौटी पर पूरी तरह फिट बैठे. अब मुख्यमंत्री बनने के साथ ही उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती बंगाल में भाजपा सरकार को स्थिर और मजबूत बनाना होगी. शुभेंदु की ताजपोशी को सिर्फ सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि बंगाल की राजनीति में एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है.  

surbhi मई 9, 2026 0
Mamata Banerjee addressing press amid resignation row and legal debate in West Bengal
“इस्तीफा न दें तो क्या होगा?” ममता बनर्जी पर टकराव तेज, महेश जेठमलानी ने बताए कानूनी विकल्प

कोलकाता: पश्चिम बंगाल में चुनावी हार के बाद भी ममता बनर्जी के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने से इनकार करने पर सियासी और संवैधानिक बहस तेज हो गई है। इस बीच सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील महेश जेठमलानी ने इस स्थिति में संभावित कानूनी रास्तों को लेकर अपनी राय रखी है। क्या बोले महेश जेठमलानी? महेश जेठमलानी ने कहा कि यदि मुख्यमंत्री इस्तीफा देने से इनकार करती हैं और पद पर बनी रहने की कोशिश करती हैं, तो राज्यपाल हस्तक्षेप कर सकते हैं। उनके मुताबिक, ऐसी स्थिति में राज्यपाल आवश्यक कदम उठाते हुए सरकार को हटाने की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं। उन्होंने यहां तक कहा कि जरूरत पड़ने पर प्रशासनिक बल का इस्तेमाल भी किया जा सकता है। ममता बनर्जी का साफ इनकार ममता बनर्जी ने कोलकाता में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान स्पष्ट कहा कि वह इस्तीफा नहीं देंगी। उनका दावा है कि “नैतिक रूप से जीत हमारी हुई है” और चुनाव में धांधली हुई है। उन्होंने कहा कि वह राजभवन जाकर इस्तीफा नहीं सौंपेंगी और आगे की रणनीति पार्टी के साथ मिलकर तय करेंगी। साथ ही ममता ने भारतीय चुनाव आयोग पर भी गंभीर आरोप लगाए और कहा कि उनका मुकाबला BJP से नहीं बल्कि चुनाव आयोग से था। संवैधानिक स्थिति क्या कहती है? राजनीतिक और कानूनी जानकारों के अनुसार, अगर कोई सरकार बहुमत खो देती है या विधानसभा का कार्यकाल समाप्त हो जाता है, तो राज्यपाल के पास हस्तक्षेप का अधिकार होता है। भारतीय चुनाव आयोग द्वारा नई विधानसभा के गठन की अधिसूचना जारी होने के बाद मौजूदा सरकार का जनादेश खत्म माना जाता है। पश्चिम बंगाल विधानसभा का कार्यकाल 7 मई 2026 को समाप्त हो रहा है। ऐसे में अगर मुख्यमंत्री इस्तीफा नहीं देती हैं, तो राज्यपाल संवैधानिक प्रावधानों के तहत सरकार को बर्खास्त कर सकते हैं और नई सरकार के गठन की प्रक्रिया आगे बढ़ा सकते हैं। बढ़ सकता है टकराव ममता बनर्जी के इस रुख से राज्य में सियासी टकराव और बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं। एक ओर विपक्ष सत्ता परिवर्तन की प्रक्रिया तेज करना चाहता है, वहीं दूसरी ओर TMC नेतृत्व चुनाव परिणामों को लेकर सवाल उठा रहा है। अब नजर इस बात पर है कि राज्यपाल इस स्थिति में क्या कदम उठाते हैं और क्या मामला अदालत तक पहुंचता है। फिलहाल, बंगाल की राजनीति एक संवेदनशील मोड़ पर खड़ी नजर आ रही है।  

surbhi मई 6, 2026 0
Bengal bulldozer controversy
बंगाल में सियासी बवाल: TMC ने BJP पर दफ्तर पर बुलडोजर चलाने का लगाया आरोप

कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल में चुनाव नतीजों के बाद राजनीतिक तनाव थमता नजर नहीं आ रहा है। टीएमसी ने आरोप लगाया है कि बीजेपी के समर्थकों ने कोलकाता के न्यू मार्केट इलाके में बुलडोजर चलाकर तोड़फोड़ की और पार्टी कार्यालय को निशाना बनाया। इस घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया गया है, जिसने सियासी माहौल को और गर्म कर दिया है।   वीडियो में क्या दिखा और क्या हैं आरोप टीएमसी द्वारा साझा किए गए वीडियो में एक बुलडोजर भीड़ के बीच दुकान तोड़ता नजर आता है। आसपास मौजूद लोग नारेबाजी करते और शोर-शराबा करते दिख रहे हैं। टीएमसी का दावा है कि बीजेपी समर्थकों ने न सिर्फ दुकानों को नुकसान पहुंचाया, बल्कि पार्टी के स्थानीय दफ्तर पर भी हमला किया। पार्टी ने इस घटना को “खुली गुंडागर्दी” करार दिया है।   ‘परिवर्तन’ बनाम ‘बुलडोजर’: टीएमसी का तंज टीएमसी ने बीजेपी के चुनावी नारे “परिवर्तन” पर तंज कसते हुए कहा कि अब यह बदलाव “बुलडोजर” के रूप में दिखाई दे रहा है। पार्टी ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि चुनाव से पहले बीजेपी “भय खत्म, भरोसा शुरू” की बात कर रही थी, लेकिन अब हालात उलट हो गए हैं—“भरोसा खत्म और बुलडोजर शुरू”।   केंद्र और सुरक्षा बलों पर सवाल टीएमसी ने सीधे तौर पर प्रधानमंत्री और गृह मंत्री पर आरोप लगाते हुए कहा कि कार्यकर्ताओं को खुली छूट दी गई है। साथ ही, केंद्रीय बलों की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। पार्टी का कहना है कि सुरक्षा बल मूकदर्शक बने रहे और समय पर हस्तक्षेप नहीं किया।   पहले भी हो चुकी हैं हिंसक घटनाएं राज्य में हाल के दिनों में राजनीतिक हिंसा की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिनमें अलग-अलग जिलों में आगजनी और कार्यकर्ताओं की मौत की खबरें शामिल हैं। इन घटनाओं ने बंगाल की राजनीति को और संवेदनशील बना दिया है।

Anjali Kumari मई 6, 2026 0
Bulldozer demolishing shop in Kolkata New Market amid political clash between TMC and BJP supporters
बंगाल में ‘बुलडोजर पॉलिटिक्स’ पर बवाल: TMC का आरोप–BJP समर्थकों ने पार्टी दफ्तर पर की तोड़फोड़

West Bengal Post Election Tension: पश्चिम बंगाल में चुनाव नतीजों के बाद भी राजनीतिक तनाव थमने का नाम नहीं ले रहा है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने आरोप लगाया है कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) के समर्थक राज्य में ‘बुलडोजर एक्शन’ कर रहे हैं और विपक्षी दलों के दफ्तरों को निशाना बना रहे हैं। न्यू मार्केट इलाके का वीडियो वायरल टीएमसी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक वीडियो साझा किया है, जिसमें दावा किया गया कि कोलकाता के न्यू मार्केट इलाके में बीजेपी समर्थकों ने बुलडोजर चलाकर तोड़फोड़ की। वीडियो में एक बुलडोजर के आसपास बड़ी संख्या में लोग जमा दिखाई दे रहे हैं। बुलडोजर से एक दुकान को गिराया जा रहा है, जबकि मौके पर मौजूद लोग नारेबाजी और शोर-शराबा करते नजर आ रहे हैं। टीएमसी का आरोप है कि इस दौरान पार्टी के स्थानीय कार्यालय को भी निशाना बनाया गया। TMC का हमला–‘भरोसा खत्म, बुलडोजर शुरू’ तृणमूल कांग्रेस ने बीजेपी के चुनावी नारे ‘भय खत्म, भरोसा शुरू’ पर तंज कसते हुए कहा कि अब हालात इसके उलट हो गए हैं। पार्टी ने अपने पोस्ट में लिखा कि “भरोसा खत्म हो गया है और बुलडोजर शुरू हो गया है।” टीएमसी ने इस घटना को “खुली गुंडागर्दी” करार देते हुए आरोप लगाया कि बीजेपी समर्थकों ने दुकानों को नुकसान पहुंचाया और इलाके में डर का माहौल बनाया। केंद्र और सुरक्षा बलों पर भी सवाल टीएमसी ने सीधे तौर पर भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेतृत्व पर भी निशाना साधा। पार्टी का कहना है कि प्रधानमंत्री और गृह मंत्री ने कार्यकर्ताओं को खुली छूट दे दी है, जिससे वे सड़कों पर मनमानी कर रहे हैं। इसके साथ ही केंद्रीय सुरक्षा बलों की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए। टीएमसी का आरोप है कि सुरक्षा बल घटनास्थल पर मौजूद होने के बावजूद मूकदर्शक बने रहे। चुनाव के बाद हिंसा पर बढ़ी सियासत पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद हिंसा और तोड़फोड़ की घटनाएं पहले भी सामने आती रही हैं, लेकिन इस बार ‘बुलडोजर’ का मुद्दा सियासत का नया केंद्र बन गया है। हालांकि, इन आरोपों पर अभी तक भारतीय जनता पार्टी की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।  

surbhi मई 6, 2026 0
Bengal elections 2026
बंगाल के आसनसोल-बांकुड़ा में काउंटिंग के बीच हिंसा

कोलकाता, एजेंसियां।  पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की मतगणना के बीच हिंसा की खबरें आ रही हैं। आसनसोल और बांकुरा में बीजेपी और टीएमसी समर्थकों के बीच झड़प हो गई। देखते ही देखते हालात बिगड़ने लगे और स्थिति को काबू में करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा। बताया जा रहा है कि मतगणना के शुरुआती रुझानों के बीच अलग-अलग दलों के समर्थक बड़ी संख्या में केंद्रों के बाहर जमा थे। इसी दौरान नारेबाजी को लेकर दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए। पहले कहासुनी हुई, फिर मामला धक्का-मुक्की और झड़प तक पहुंच गया।   हालात बिगड़ते ही पुलिस का एक्शन स्थिति हाथ से निकलती देख मौके पर मौजूद पुलिस और सुरक्षाबलों ने तुरंत मोर्चा संभाला। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए हल्का बल प्रयोग किया गया और लाठीचार्ज किया गया। इसके बाद इलाके में कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। घटना के बाद प्रशासन ने दोनों जगहों पर सुरक्षा और सख्त कर दी है। अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है, ताकि किसी तरह की और गड़बड़ी न हो। अधिकारियों ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है।   मतगणना जारी, प्रशासन सतर्क इन घटनाओं के बावजूद राज्यभर में मतगणना का काम जारी है। प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में है और हर संवेदनशील इलाके पर नजर रखी जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि किसी को भी कानून हाथ में लेने की इजाजत नहीं दी जाएगी।

Anjali Kumari मई 4, 2026 0
Vote counting in West Bengal with Mamata Banerjee and Suvendu Adhikari tight contest updates
West Bengal Election Results 2026 LIVE: भवानीपुर में कांटे की टक्कर, VIP सीटों पर उलटफेर के संकेत

कोलकाता, 4 मई: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की मतगणना शुरू हो चुकी है और शुरुआती रुझानों ने राज्य की सियासत को बेहद रोमांचक बना दिया है। सबसे ज्यादा नजर भवानीपुर सीट पर है, जहां Mamata Banerjee और Suvendu Adhikari के बीच हाई-वोल्टेज मुकाबला चल रहा है। भवानीपुर: ममता vs शुभेंदु भवानीपुर सीट पर शुरुआती रुझानों में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। पहले Mamata Banerjee आगे थीं, लेकिन बाद में Suvendu Adhikari ने बढ़त बना ली। इससे साफ है कि यह सीट अंत तक बेहद करीबी मुकाबले वाली रहने वाली है। बहरामपुर: कांग्रेस vs TMC बहरामपुर सीट पर Adhir Ranjan Chowdhury और तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार के बीच कड़ी टक्कर है। शुरुआती रुझानों में कभी कांग्रेस तो कभी TMC आगे नजर आ रही है, जिससे यह सीट भी हाई-प्रोफाइल बनी हुई है। आसनसोल दक्षिण: BJP की मजबूत बढ़त आसनसोल दक्षिण सीट पर भाजपा की Agnimitra Paul ने शुरुआती राउंड में ही बड़ी बढ़त बना ली है। अग्निमित्रा पॉल: 10,055 वोट TMC के तापस बनर्जी: 3,784 वोट CPM उम्मीदवार तीसरे स्थान पर यहां भाजपा ने शुरुआती बढ़त के साथ विपक्ष पर दबाव बना दिया है। नंदीग्राम: शुभेंदु का दबदबा नंदीग्राम सीट पर Suvendu Adhikari 3000 से ज्यादा वोटों से आगे चल रहे हैं। यह सीट पहले भी काफी चर्चा में रही है और इस बार भी मुकाबला दिलचस्प बना हुआ है। अन्य VIP सीटों का हाल सोनारपुर दक्षिण: भाजपा की Rupa Ganguly आगे श्यामपुकुर: भाजपा उम्मीदवार बढ़त पर, TMC पीछे कोलकाता पोर्ट: Firhad Hakim की सीट पर कड़ी नजर दमदम और दमदम उत्तर: कांटे की टक्कर सिलीगुड़ी, खड़गपुर सदर और भांगड़: सभी सीटों पर कड़ा मुकाबला जारी क्या कहते हैं शुरुआती संकेत? शुरुआती रुझानों से साफ है कि इस बार पश्चिम बंगाल में मुकाबला बेहद करीबी है। All India Trinamool Congress, Bharatiya Janata Party, Indian National Congress, Communist Party of India (Marxist) और Indian Secular Front के बीच बहुकोणीय लड़ाई देखने को मिल रही है।  

surbhi मई 4, 2026 0
Mamata Banerjee campaigns in West Bengal amid tough electoral battle to retain power
ममता बनर्जी के लिए सत्ता की राह सबसे कठिन? ‘नबान्न’ बचाने की जंग में 5 बड़े फैक्टर बने चुनौती

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों से पहले राज्य की राजनीति अपने चरम पर है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या ममता बनर्जी चौथी बार सत्ता में वापसी कर पाएंगी या इस बार बदलाव की हवा ‘नबान्न’ तक पहुंच जाएगी। करीब 15 वर्षों से सत्ता में काबिज तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सामने इस बार बहुस्तरीय चुनौतियां खड़ी हैं, जो चुनावी नतीजों को प्रभावित कर सकती हैं। 1. भ्रष्टाचार के आरोप: छवि पर गहरा असर इस चुनाव में टीएमसी सरकार के खिलाफ सबसे बड़ा मुद्दा भ्रष्टाचार रहा है। शिक्षक भर्ती घोटाला राशन घोटाला कोयला तस्करी मामला इन मामलों में पार्टी के कई बड़े नेताओं की गिरफ्तारी और प्रवर्तन निदेशालय (ED) व केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की लगातार कार्रवाई ने सरकार की साख को चोट पहुंचाई है। विपक्ष ने इसे “सिस्टमेटिक करप्शन” बताकर जनता के बीच मजबूत नैरेटिव बनाया है। ग्रामीण और शहरी दोनों इलाकों में यह मुद्दा चर्चा का केंद्र बना हुआ है। 2. महिला सुरक्षा और संदेशखाली जैसे विवाद महिला वोट बैंक टीएमसी की सबसे बड़ी ताकत रहा है, लेकिन हालिया घटनाओं ने इस आधार को कमजोर करने की कोशिश की है। संदेशखाली विवाद आरजी कर मेडिकल कॉलेज से जुड़े आरोप इन घटनाओं ने कानून-व्यवस्था और महिला सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इसे बड़ा चुनावी मुद्दा बनाकर टीएमसी पर तीखा हमला बोला है। 3. एंटी-इन्कम्बेंसी: 15 साल की सत्ता का असर लगातार तीन कार्यकाल तक सत्ता में रहने के बाद एंटी-इन्कम्बेंसी का असर साफ दिखाई दे रहा है। जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं की दबंगई के आरोप ‘सिंडिकेट राज’ की शिकायतें स्थानीय प्रशासन पर भ्रष्टाचार के आरोप हालांकि, राज्य सरकार की योजनाएं–जैसे महिला और गरीब वर्ग के लिए आर्थिक सहायता–अब भी लोकप्रिय हैं, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर असंतोष चुनावी समीकरण बदल सकता है। 4. भाजपा का उभार और बदला राजनीतिक संतुलन पश्चिम बंगाल की राजनीति में भारतीय जनता पार्टी (BJP) का तेजी से उभार टीएमसी के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। 2011 में मामूली मौजूदगी 2021 में 77 सीटों के साथ मुख्य विपक्ष बूथ स्तर तक मजबूत संगठन उत्तर बंगाल, जंगलमहल और सीमावर्ती क्षेत्रों में भाजपा की पकड़ मजबूत हुई है। धार्मिक ध्रुवीकरण और हिंदुत्व की राजनीति ने पारंपरिक वोट बैंक को प्रभावित किया है, जिससे मुकाबला और कड़ा हो गया है। 5. युवाओं की नाराजगी और रोजगार संकट भर्ती घोटालों और सीमित रोजगार अवसरों ने युवाओं में निराशा पैदा की है। सरकारी नौकरियों में पारदर्शिता पर सवाल निजी क्षेत्र में सीमित अवसर औद्योगिक विकास की धीमी रफ्तार हालांकि ‘लक्ष्मी भंडार’ जैसी योजनाएं गरीब और महिला मतदाताओं को जोड़ने में सफल रही हैं, लेकिन शिक्षित युवा वर्ग बदलाव की तलाश में नजर आ रहा है। ममता बनर्जी का ‘फाइटर’ फैक्टर इन तमाम चुनौतियों के बावजूद ममता बनर्जी की सबसे बड़ी ताकत उनकी व्यक्तिगत छवि और जमीनी पकड़ है। संघर्षशील नेता की पहचान सीधे जनता से संवाद कल्याणकारी योजनाओं का व्यापक असर राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ममता बनर्जी आखिरी समय में चुनावी बाजी पलटने की क्षमता रखती हैं। 4 मई का फैसला तय करेगा भविष्य अब नजरें 4 मई पर टिकी हैं, जब चुनावी नतीजे सामने आएंगे। क्या ‘दीदी’ एक बार फिर सत्ता बचा लेंगी? या बंगाल में सत्ता परिवर्तन का नया अध्याय शुरू होगा?

surbhi मई 2, 2026 0
Violence, EVM glitches and clashes reported during Phase 2 voting in West Bengal Assembly Elections
बंगाल चुनाव Phase 2: मतदान के बीच हिंसा, EVM में गड़बड़ी और कई इलाकों में बवाल

सुबह से ही कई जिलों में तनावपूर्ण माहौल पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे और अंतिम चरण के मतदान के दौरान बुधवार सुबह से ही कई इलाकों में हिंसा, तोड़फोड़ और EVM में गड़बड़ी की खबरें सामने आईं। नदिया, हावड़ा, शांतिपुर और भांगर जैसे क्षेत्रों में मतदान के शुरुआती घंटों में ही माहौल तनावपूर्ण हो गया। यह चुनाव राज्य में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के विवाद के बीच हो रहा है, जिसने पहले से ही राजनीतिक तापमान बढ़ा रखा है। चापड़ा में BJP एजेंट पर हमले का आरोप नदिया जिले के चापड़ा में बीजेपी ने आरोप लगाया कि उसके पोलिंग एजेंट मोशारेफ मीर पर तृणमूल समर्थकों ने हमला किया। बताया गया कि उन्हें लोहे की रॉड से पीटा गया, जिससे वह घायल हो गए। उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया। बीजेपी उम्मीदवार सैकत सरकार ने घटना के लिए टीएमसी को जिम्मेदार ठहराया, जबकि तृणमूल कांग्रेस ने इन आरोपों से साफ इनकार किया है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। हावड़ा में EVM खराब, मतदान प्रभावित हावड़ा के एक मतदान केंद्र पर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) में तकनीकी खराबी की शिकायत मिली। इसके कारण कुछ समय के लिए मतदान प्रक्रिया बाधित रही। हालांकि, चुनाव अधिकारियों ने जल्द ही समस्या का समाधान कर मतदान दोबारा शुरू करा दिया। EVM को लेकर विपक्ष और सत्तारूढ़ दल के बीच पहले से ही तीखी बहस चलती रही है। एंटाली में प्रियंका तिबरेवाल की अधिकारियों से बहस कोलकाता के एंटाली विधानसभा क्षेत्र में बीजेपी उम्मीदवार प्रियंका तिबरेवाल की मतदान केंद्र पर चुनाव अधिकारियों और सुरक्षा बलों से तीखी बहस हो गई। उनके पोलिंग एजेंट को बूथ से बाहर निकाले जाने पर विवाद बढ़ गया। प्रियंका ने आरोप लगाया कि मतदान केंद्र के भीतर पक्षपातपूर्ण गतिविधियां हो रही थीं। शांतिपुर और भांगर में भी तनाव शांतिपुर में बीजेपी के चुनावी कैंप में तोड़फोड़ की खबर आई। वहीं, दक्षिण 24 परगना के भांगर में इंडियन सेक्युलर फ्रंट (ISF) के पोलिंग एजेंट को बूथ में प्रवेश से रोके जाने का आरोप लगा। इन घटनाओं ने कई इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। ममता बनर्जी ने केंद्रीय बलों पर लगाए गंभीर आरोप मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्रीय सुरक्षा बलों पर बीजेपी के इशारे पर काम करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि बाहरी पर्यवेक्षक और केंद्रीय बल मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं। ममता ने कहा, "वोट मतदाता डालेंगे, सुरक्षा बल नहीं। इस तरह चुनाव नहीं कराए जा सकते।" 4 मई को आएंगे नतीजे पश्चिम बंगाल चुनाव के पहले चरण में रिकॉर्ड 92.88 प्रतिशत मतदान हुआ था। दूसरे और अंतिम चरण के नतीजे 4 मई को घोषित किए जाएंगे। राज्य की राजनीति में इस बार ममता बनर्जी और बीजेपी के बीच सीधी और बेहद कांटे की टक्कर देखने को मिल रही है।  

surbhi अप्रैल 29, 2026 0
TMC councillor joins BJP in Jalpaiguri ahead of West Bengal elections amid political tensions
बंगाल चुनाव: उत्तर बंगाल में TMC को झटका, पूर्वी रॉय प्रधान BJP में शामिल

जलपाईगुड़ी: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से ठीक पहले तृणमूल कांग्रेस (TMC) को उत्तर बंगाल में बड़ा झटका लगा है। हल्दिबारी नगरपालिका की पार्षद पूर्वी रॉय प्रधान ने पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम लिया है। चुनाव से एक सप्ताह पहले हुए इस घटनाक्रम को भाजपा के लिए क्षेत्र में मजबूती के तौर पर देखा जा रहा है। टिकट से नाराज़गी बनी वजह मेखलीगंज विधानसभा सीट से परेश चंद्र अधिकारी को फिर से उम्मीदवार बनाए जाने पर पूर्वी रॉय नाराज़ थीं। शिक्षक भर्ती घोटाले में उनका नाम सामने आने के बाद भी टिकट दिए जाने पर उन्होंने सवाल उठाए और पार्टी छोड़ने का फैसला किया। पति पहले ही BJP में शामिल पूर्वी रॉय के पति अर्घ्य रॉय प्रधान, जो मेखलीगंज से पूर्व विधायक रह चुके हैं, हाल ही में भाजपा में शामिल हो चुके हैं। उन्होंने शुभेंदु अधिकारी की मौजूदगी में भाजपा का झंडा थामा था। अब पूर्वी रॉय ने भी उसी राह पर चलते हुए पार्टी बदल ली। TMC ने बताया ‘स्वार्थी’ तृणमूल कांग्रेस के स्थानीय नेता अमिताभ बिश्वास ने इस घटनाक्रम को ज्यादा महत्व देने से इनकार किया। उनका कहना है कि इससे पार्टी को कोई नुकसान नहीं होगा और चुनावी नतीजों पर इसका असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने पति-पत्नी को “स्वार्थी” बताते हुए आरोप लगाया कि वे भविष्य में महिला आरक्षण लागू होने के बाद चुनावी फायदा उठाना चाहते हैं। पूर्वी रॉय ने लगाए गंभीर आरोप वहीं, पूर्वी रॉय ने पार्टी छोड़ने के पीछे अपनी अलग दलील दी है। उनका कहना है कि वह ऐसे उम्मीदवार के लिए प्रचार नहीं कर सकतीं, जिन पर शैक्षणिक भ्रष्टाचार के आरोप लगे हों। उन्होंने कहा कि “राज्य में हजारों युवाओं का भविष्य प्रभावित हुआ है, इसलिए मैं इस फैसले के खिलाफ हूं।” राजनीतिक असर पर नजर हल्दिबारी नगरपालिका की सभी 11 सीटों पर अब तक TMC का कब्जा रहा है। ऐसे में चुनाव से पहले इस तरह का दलबदल स्थानीय राजनीति में हलचल जरूर पैदा कर सकता है। अब देखना होगा कि इस घटनाक्रम का उत्तर बंगाल, खासकर कूचबिहार और मेखलीगंज क्षेत्र के चुनावी समीकरणों पर कितना असर पड़ता है।  

surbhi अप्रैल 16, 2026 0
West Bengal election 2026 hot seats map highlighting Nandigram, Bhabanipur and key political battlegrounds
बंगाल चुनाव 2026: नंदीग्राम से भवानीपुर तक ‘हॉट सीट्स’ पर टिकी नजर, यहीं से तय होगा मुख्यमंत्री

कोलकाता: West Bengal विधानसभा चुनाव 2026 अपने चरम पर है। राज्य की सभी 294 सीटों पर राजनीतिक सरगर्मी तेज है, लेकिन असली मुकाबला उन चुनिंदा ‘हॉट सीट्स’ पर केंद्रित है, जो सत्ता की दिशा तय करेंगी। राजनीतिक जानकारों के अनुसार, इन सीटों पर परिणाम न सिर्फ All India Trinamool Congress (TMC) और Bharatiya Janata Party (BJP) के भविष्य को प्रभावित करेंगे, बल्कि यह भी तय करेंगे कि ‘नबान्न’ की सत्ता किसके हाथ में जाएगी। प्रमुख ‘हॉट सीट्स’ और उनका समीकरण: 1. भवानीपुर: दीदी का किला मुख्यमंत्री Mamata Banerjee की पारंपरिक सीट भवानीपुर इस बार भी सबसे हाई-प्रोफाइल बनी हुई है। भाजपा यहां पूरी ताकत के साथ चुनौती दे रही है, जिससे यह मुकाबला प्रतिष्ठा का बन गया है। 2. नंदीग्राम: साख की जंग 2021 में सुर्खियों में रही नंदीग्राम सीट पर Suvendu Adhikari और टीएमसी के बीच सीधी टक्कर है। यह सीट दोनों नेताओं की राजनीतिक साख का बड़ा इम्तिहान मानी जा रही है। 3. पानीहाटी: भावनात्मक मुद्दों का असर आरजी कर कांड से जुड़े भावनात्मक माहौल ने पानीहाटी को खास बना दिया है। यहां जनाक्रोश वोट में तब्दील होता है या नहीं, यह परिणाम तय करेगा। 4. सिलीगुड़ी और दार्जिलिंग: उत्तर बंगाल की चाबी Siliguri और Darjeeling भाजपा का मजबूत गढ़ रहे हैं। टीएमसी यहां वापसी की कोशिश में है, जिससे मुकाबला दिलचस्प हो गया है। 5. मालदा और मुर्शिदाबाद: कांग्रेस का फैक्टर Malda और Murshidabad में कांग्रेस मजबूत स्थिति में है। यहां Asaduddin Owaisi की पार्टी AIMIM और अन्य क्षेत्रीय समीकरणों ने मुकाबले को बहुकोणीय बना दिया है। कांग्रेस नेताओं Mausam Noor और गनी खान चौधरी परिवार का प्रभाव भी टीएमसी के लिए चुनौती बन सकता है। 6. सिंगूर: आंदोलन की विरासत Singur, जहां से ममता बनर्जी के राजनीतिक उत्थान की कहानी शुरू हुई, अब भाजपा और टीएमसी के बीच कड़ा मुकाबला देख रहा है। किसान और उद्योग से जुड़े मुद्दे यहां निर्णायक हैं। 7. डायमंड हार्बर और टॉलीगंज: शहरी वोटर का टेस्ट इन सीटों पर Abhishek Banerjee का प्रभाव माना जाता है। भाजपा यहां आक्रामक रणनीति के साथ घेराबंदी कर रही है। शहरी मतदाताओं का रुख यहां परिणाम तय करेगा। क्यों अहम हैं ये सीटें: सांकेतिक बढ़त: इन सीटों पर जीत पूरे क्षेत्र में मनोवैज्ञानिक बढ़त देती है दिग्गजों की प्रतिष्ठा: बड़े नेताओं की साख दांव पर ध्रुवीकरण का केंद्र: भ्रष्टाचार, घुसपैठ और सुरक्षा जैसे मुद्दों की परीक्षा सीएम चेहरा तय: नतीजे सीधे तौर पर मुख्यमंत्री के चयन को प्रभावित करेंगे  

surbhi अप्रैल 14, 2026 0
Voters checking electoral rolls in West Bengal amid SIR controversy and political tensions.
बंगाल में SIR विवाद: वोटर लिस्ट से नाम कटने पर सियासी घमासान

SIR in Bengal: पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान लाखों वोटरों के नाम हटाए जाने को लेकर राजनीति गरमा गई है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) और बीजेपी आमने-सामने हैं। कितने नाम कटे? कुल मिलाकर करीब 91 लाख वोटरों के नाम हटने का दावा लेकिन चुनाव आयोग (EC) ने अभी तक आधिकारिक तौर पर धर्म के आधार पर डेटा जारी नहीं किया TMC का दावा क्या है? हटाए गए नामों में: 63% हिंदू 35% मुस्लिम TMC के अनुसार: पहले चरण में 58 लाख में से 44 लाख हिंदू दूसरे चरण में ज्यादातर नाम हिंदुओं के तीसरे चरण में मुस्लिम नाम ज्यादा, लेकिन कुल मिलाकर हिंदू ज्यादा प्रभावित TMC का आरोप: “घुसपैठियों को ढूंढने के नाम पर गरीब हिंदुओं को भी हटाया गया” BJP का जवाब BJP ने इन आंकड़ों को संदिग्ध बताया कहा: “चुनाव आयोग ने ऐसा कोई डेटा जारी नहीं किया” “TMC के पास ये आंकड़े आए कहां से?” असली विवाद क्या है? SIR का मकसद: वोटर लिस्ट को अपडेट और शुद्ध करना लेकिन आरोप: वैध वोटरों के नाम भी हटाए जा रहे हैं प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी मामला क्यों अहम है? बंगाल में चुनाव से पहले वोटर लिस्ट में बदलाव का सीधा असर चुनावी नतीजों पर पड़ सकता है इसलिए यह मुद्दा राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील बन गया है।

surbhi अप्रैल 10, 2026 0
Mamata Banerjee addressing supporters in Bhabanipur amid voter list controversy before Bengal Elections 2026.
बंगाल चुनाव 2026: क्या भवानीपुर में फंस गई ममता बनर्जी की सीट? SIR पर सियासी घमासान

कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले सियासी माहौल गरमा गया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की हाई-प्रोफाइल सीट भवानीपुर को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद वोटरों की संख्या में भारी कमी ने टीएमसी की चिंता बढ़ा दी है, जबकि भाजपा इस स्थिति को अपने पक्ष में मान रही है। भवानीपुर में घटे हजारों वोटर रिपोर्ट्स के मुताबिक, भवानीपुर सीट पर करीब 51,000 वोटर कम हुए यह कुल मतदाताओं का लगभग 25% हिस्सा है SIR से पहले यहां करीब 2.06 लाख वोटर थे कैसे घटे वोट? पहला चरण: मृत, स्थानांतरित, डुप्लीकेट आदि आधार पर 44,000+ नाम हटाए गए दूसरा चरण: 2,300 से ज्यादा नाम और हटाए गए सिर्फ 18 नए वोटर जोड़े गए जांच प्रक्रिया: 14,000+ नाम जांच में गए 10,000+ बहाल, लेकिन 3,875 नाम स्थायी रूप से हटे वोटबैंक पर असर का डर हटाए गए वोटरों में: 23% मुस्लिम 77% गैर-मुस्लिम भवानीपुर में मुस्लिम वोटर TMC का पारंपरिक आधार रहे हैं ऐसे में वोट कटने से ममता बनर्जी की स्थिति कमजोर पड़ सकती है भाजपा vs टीएमसी: बढ़ी सियासी टक्कर भाजपा ने भवानीपुर को “गेम चेंजर सीट” बताया गृह मंत्री अमित शाह ने यहां रोड शो कर माहौल बनाया BJP का दावा: भवानीपुर जीतते ही बंगाल में सत्ता परिवर्तन संभव TMC का गुस्सा और एक्शन TMC ने चुनाव आयोग से शिकायत की ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट जाने के संकेत दिए पार्टी का आरोप-SIR के जरिए वोटबैंक को टारगेट किया गया मुस्लिम वोट पर सियासी नजर बंगाल में करीब 30% मुस्लिम आबादी मालदा, मुर्शिदाबाद, उत्तर दिनाजपुर जैसे जिलों में असर AIMIM जैसे दलों की एंट्री से वोट बंटने की आशंका क्यों अहम है भवानीपुर सीट? 2021 उपचुनाव में ममता बनर्जी ने यहां से 85,000 वोटों से जीत दर्ज की थी भाजपा को मिले थे 26,000 वोट इस बार वोटरों की संख्या घटने से चुनाव का समीकरण बदल सकता है

surbhi अप्रैल 9, 2026 0
Dharmendra Pradhan addressing media in Kolkata, TMC responds to political allegations during Bengal 2026 elections
बंगाल चुनाव 2026: धर्मेंद्र प्रधान का ममता सरकार पर हमला, TMC का पलटवार तेज

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के बीच सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कोलकाता दौरे के दौरान ममता बनर्जी और उनकी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए, वहीं तृणमूल कांग्रेस ने भी जोरदार जवाब दिया। कालीघाट से शुरू हुआ सियासी वार कोलकाता के कालीघाट मंदिर में पूजा के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने बंगाल की शिक्षा व्यवस्था और सरकारी योजनाओं पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि: मिड-डे मील और किताबों के लिए आए केंद्रीय फंड का दुरुपयोग हुआ शिक्षा व्यवस्था “पूरी तरह बर्बाद” हो चुकी है शिक्षक भर्ती प्रक्रिया भ्रष्टाचार से प्रभावित है “45 साल में बर्बाद हुई विरासत” प्रधान ने कहा कि स्वामी विवेकानंद और रवींद्रनाथ टैगोर जैसी महान हस्तियों की शैक्षणिक विरासत को पिछले दशकों में नुकसान पहुंचा है। उन्होंने भाजपा उम्मीदवार स्वपन दासगुप्ता के समर्थन में भी प्रचार किया। घुसपैठ और वोटर लिस्ट पर सवाल धर्मेंद्र प्रधान ने चुनावी मुद्दों को उठाते हुए कहा: वोटर लिस्ट में “घुसपैठियों” की भूमिका पर सवाल युवाओं को रोजगार और महिलाओं की सुरक्षा भाजपा की प्राथमिकता TMC का पलटवार प्रधान के आरोपों पर तृणमूल कांग्रेस ने सख्त प्रतिक्रिया दी: केंद्र सरकार पर 2 लाख करोड़ रुपये रोकने का आरोप लगाया इसे बंगाल के विकास में बाधा बताया आरोपों को पूरी तरह राजनीतिक करार दिया चुनावी शेड्यूल कुल सीटें: 294 मतदान: 23 और 29 अप्रैल (दो चरणों में) नतीजे: 4 मई क्या कहता है राजनीतिक समीकरण? बंगाल में यह चुनाव सीधे तौर पर भाजपा और TMC के बीच प्रतिष्ठा की लड़ाई बन चुका है। जहां एक ओर केंद्र सरकार राज्य सरकार पर भ्रष्टाचार और कुप्रबंधन के आरोप लगा रही है, वहीं TMC केंद्र पर फंड रोकने का आरोप लगाकर जवाबी रणनीति अपना रही है।  

surbhi अप्रैल 8, 2026 0
Protesters blocking highway in West Bengal over voter list issue with police presence and burning tyres
बंगाल में वोटर लिस्ट पर बवाल: सड़कों पर उतरे लोग, ममता बनर्जी ने बताया ‘बड़ी साजिश’

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से ठीक पहले राज्य में वोटर लिस्ट को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में नाम कटने के आरोपों के बीच कई जिलों में उग्र प्रदर्शन देखने को मिले। हालात ऐसे बने कि सड़कों पर टायर जलाकर विरोध किया गया और कई जगह हाईवे तक जाम कर दिए गए। किन-किन जिलों में भड़का विरोध? राज्य के अलग-अलग हिस्सों में जनता का गुस्सा खुलकर सामने आया: मालदा: कालियाचक, जदुपुर और मंगलबाड़ी में लोगों ने दस्तावेज दिखाकर विरोध किया, NH जाम रहा जलपाईगुड़ी: मयनागुड़ी में NH-27 को पूरी तरह ब्लॉक किया गया कूचबिहार: माथाभंगा में ग्रामीणों ने 3 घंटे तक सड़क जाम रखी पूर्वी बर्धमान: शक्तिगढ़ में लोगों ने शांतिपूर्ण मौन मार्च निकाला प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि वैध दस्तावेज होने के बावजूद उनके नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं। ममता बनर्जी का बड़ा आरोप इन घटनाओं के बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि यह पूरा मामला एक “बड़ी साजिश” का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य राज्य में अशांति फैलाना है। उन्होंने अमित शाह पर निशाना साधते हुए दावा किया कि चुनाव से पहले राष्ट्रपति शासन लगाने की कोशिश की जा रही है। NH-12 पर बढ़ा तनाव NH-12 (कोलकाता-सिलीगुड़ी मार्ग) पर स्थिति सबसे ज्यादा तनावपूर्ण रही। कई घंटों तक यातायात ठप भारी पुलिस और केंद्रीय बल तैनात न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा बढ़ाई गई प्रदर्शनकारियों ने साफ कहा है कि जब तक सभी पात्र मतदाताओं के नाम सूची में शामिल नहीं किए जाते, आंदोलन जारी रहेगा। चुनाव से पहले बढ़ा सियासी तापमान इस पूरे विवाद ने चुनावी माहौल को और गर्म कर दिया है। विपक्ष और सत्तारूढ़ दल के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज वोटर लिस्ट की विश्वसनीयता पर सवाल प्रशासन पर निष्पक्षता बनाए रखने का दबाव विशेषज्ञों का मानना है कि यह मुद्दा आने वाले चुनाव में बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकता है। निष्कर्ष पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट को लेकर उठा यह विवाद सिर्फ प्रशासनिक नहीं, बल्कि बड़ा राजनीतिक संकट बनता जा रहा है। अब देखना होगा कि सरकार और चुनाव आयोग इस स्थिति को कैसे संभालते हैं और क्या समय रहते समाधान निकल पाता है।  

surbhi अप्रैल 3, 2026 0
Asaduddin Owaisi and Humayun Kabir announcing alliance for West Bengal elections 2026 at public event
बंगाल चुनाव 2026: हुमायूं कबीर और ओवैसी का गठबंधन, तीसरे मोर्चे की राजनीति को नई दिशा

पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नया समीकरण उभरता दिख रहा है। तृणमूल कांग्रेस से निष्कासित नेता हुमायूं कबीर ने असदुद्दीन ओवैसी के साथ हाथ मिलाकर आगामी विधानसभा चुनाव 2026 के लिए बड़ा राजनीतिक गठबंधन किया है। यह गठबंधन ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) और हुमायूं कबीर की पार्टी आम जनता उन्नयन पार्टी के बीच हुआ है, जिसका उद्देश्य राज्य में तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के खिलाफ तीसरा विकल्प खड़ा करना है। हैदराबाद से गठबंधन का ऐलान इस राजनीतिक गठबंधन की घोषणा हैदराबाद में एक सभा के दौरान ओवैसी ने की। उन्होंने कहा कि यह गठबंधन बंगाल में गरीबों, वंचितों और अल्पसंख्यकों के मुद्दों को मजबूती से उठाएगा। ओवैसी ने इसे “अन्याय और अभाव के खिलाफ संयुक्त लड़ाई” बताया। लंबे समय से सहयोगी की तलाश हुमायूं कबीर ने पिछले वर्ष 22 दिसंबर को अपनी पार्टी का गठन किया था और तब से ही वे एक मजबूत सहयोगी की तलाश में थे। उन्होंने वाम दलों और अन्य क्षेत्रीय दलों से भी संपर्क साधा, लेकिन बात नहीं बन पाई। आखिरकार AIMIM के साथ यह गठबंधन आकार ले पाया। सीट शेयरिंग पर नजर गठबंधन के बाद अब सबसे अहम सवाल सीट बंटवारे को लेकर है। हुमायूं कबीर पहले ही घोषणा कर चुके हैं कि उनकी पार्टी 182 सीटों पर चुनाव लड़ेगी, जबकि लगभग 150 सीटों पर उम्मीदवारों के नाम भी घोषित किए जा चुके हैं। बताया जा रहा है कि AIMIM और आम जनता उन्नयन पार्टी के बीच सीटों को लेकर बातचीत जारी है और जल्द ही अंतिम फार्मूला सामने आ सकता है। किन क्षेत्रों पर खास फोकस AIMIM ने पिछले कुछ वर्षों में मालदा और मुर्शिदाबाद जैसे अल्पसंख्यक बहुल इलाकों में अपनी पकड़ मजबूत की है। ऐसे में यह गठबंधन इन क्षेत्रों में चुनावी समीकरण बदल सकता है। क्या बदलेगा चुनावी गणित? राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह गठबंधन बंगाल में तीसरे मोर्चे की संभावनाओं को मजबूत कर सकता है, हालांकि इसका वास्तविक प्रभाव चुनाव परिणामों में ही स्पष्ट होगा।  

surbhi मार्च 23, 2026 0
TMC digital campaign team managing WhatsApp groups and social media strategy for West Bengal Elections 2026
West Bengal Elections 2026: 1.5 लाख WhatsApp ग्रुप, 10 हजार रील्स-डिजिटल जंग में BJP को टक्कर देने के लिए TMC का मेगा प्लान

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में इस बार मुकाबला सिर्फ रैलियों और जनसभाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी जबरदस्त लड़ाई देखने को मिल रही है। सत्ताधारी All India Trinamool Congress (TMC) ने Bharatiya Janata Party (BJP) के डिजिटल अभियान का मुकाबला करने के लिए बड़े पैमाने पर रणनीति तैयार की है। 1.5 लाख WhatsApp ग्रुप, 1 करोड़ लोगों तक पहुंच मुख्यमंत्री Mamata Banerjee की पार्टी ने राज्यभर में 1.5 लाख से ज्यादा WhatsApp ग्रुप बनाए हैं, जिनसे 1 करोड़ से अधिक लोगों को जोड़ा गया है। इन ग्रुप्स के जरिए चुनावी संदेश, वीडियो और कंटेंट तेज़ी से लोगों तक पहुंचाया जा रहा है। TMC का फोकस इस बार डिजिटल स्तर पर लोकल नेटवर्क मजबूत करने पर है, जबकि BJP का अभियान अधिकतर केंद्रीय स्तर से संचालित बताया जा रहा है। ‘Didir Doot’ ऐप बना डिजिटल हथियार TMC अपने ‘Didir Doot’ ऐप के जरिए कार्यकर्ताओं और समर्थकों को जोड़ने में जुटी है। 18 लाख से ज्यादा डाउनलोड 1.3 लाख डेली एक्टिव यूजर्स 7.3 लाख मंथली एक्टिव यूजर्स इस ऐप के जरिए यूजर्स को टास्क, रियल-टाइम अपडेट, क्विज़ और इंटरैक्टिव फीचर्स दिए जाते हैं, ताकि वे लगातार चुनाव प्रचार से जुड़े रहें। 10 हजार रील्स और सोशल मीडिया इकोसिस्टम TMC का डिजिटल कैंपेन अब बड़े पैमाने पर कंटेंट प्रोडक्शन पर आधारित है। 10,000+ रील्स और शॉर्ट वीडियो 5,000+ सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स 50+ डिजिटल प्रवक्ता 1.6 लाख वॉलंटियर्स का नेटवर्क (‘ABDJ’) यह पूरा इकोसिस्टम रोज़ाना करीब 50 करोड़ इम्प्रेशन जनरेट करने का दावा करता है। ‘बंगाली अस्मिता’ पर फोकस TMC अपने डिजिटल कैंपेन में ‘बंगाली पहचान’ और ‘स्थानीय गौरव’ को प्रमुख मुद्दा बना रही है। पार्टी का संदेश है कि बाहरी ताकतें बंगाल की संस्कृति और पहचान को प्रभावित करना चाहती हैं, जबकि TMC खुद को ‘बंगाल की असली आवाज़’ के रूप में पेश कर रही है। कल्याणकारी योजनाओं का आक्रामक प्रचार TMC अपने शासन के दौरान चलाई गई योजनाओं को भी डिजिटल अभियान में प्रमुखता से दिखा रही है, खासकर ‘लक्ष्मी भंडार’ जैसी योजनाएं, जिनके जरिए महिलाओं को आर्थिक सहायता दी जाती है। पार्टी इन योजनाओं को अपनी सबसे बड़ी ताकत मानते हुए लगातार प्रचार कर रही है। BJP vs TMC: डिजिटल जंग तेज जहां BJP का अभियान राष्ट्रीय स्तर पर रणनीतिक तरीके से चलाया जा रहा है, वहीं TMC इसे जमीनी स्तर तक ले जाकर लोकल कनेक्शन मजबूत करने की कोशिश कर रही है। TMC आईटी सेल के अनुसार, पार्टी ने पिछली चुनावी गलतियों से सीख लेते हुए इस बार ज्यादा आक्रामक और संगठित डिजिटल रणनीति बनाई है। पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 में डिजिटल प्लेटफॉर्म अब निर्णायक भूमिका निभा सकता है। TMC का यह विशाल डिजिटल नेटवर्क और लोकल अप्रोच BJP के लिए कड़ी चुनौती बन सकता है, लेकिन असली फैसला जनता के वोट से ही होगा।

surbhi मार्च 23, 2026 0
BJP and TMC
बंगाल चुनाव 2026: भाजपा ने बदली रणनीति, ‘बाहरी’ नहीं अब अपने नेताओं पर दांव

पश्चिम बंगाल की सियासत में इस बार बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। भारतीय जनता पार्टी ने आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर अपनी रणनीति पूरी तरह से बदल दी है। पिछली गलतियों से सबक लेते हुए पार्टी अब “अपनों” पर भरोसा जताने की नीति पर आगे बढ़ रही है। ‘बाहरी चेहरों’ से दूरी, पुराने कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता पिछले चुनाव में पार्टी ने बड़ी संख्या में अन्य दलों से आए नेताओं को टिकट दिया था, जिससे संगठन के भीतर असंतोष पैदा हुआ था। इस बार भाजपा ने साफ कर दिया है कि वह “किराए के नेताओं” पर निर्भर नहीं रहेगी। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष के अनुसार, पार्टी इस बार केवल उन्हीं कार्यकर्ताओं को आगे बढ़ा रही है, जो लंबे समय से संगठन से जुड़े रहे हैं। इससे जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। गुटबाजी खत्म कर एकजुटता पर जोर भाजपा नेतृत्व ने इस बार आंतरिक गुटबाजी को खत्म करने पर भी विशेष ध्यान दिया है। पिछली बार अलग-अलग नेताओं के अलग सुर पार्टी के लिए नुकसानदायक साबित हुए थे। अब पार्टी का दावा है कि सभी गुट एकजुट होकर चुनाव लड़ रहे हैं। केंद्रीय नेतृत्व, जिसमें अमित शाह और राज्य के प्रमुख नेता शुभेंदु अधिकारी शामिल हैं, संगठन को एक दिशा में ले जाने पर फोकस कर रहे हैं। एंटी-इनकंबेंसी पर भाजपा का दांव भाजपा इस बार तृणमूल कांग्रेस सरकार के खिलाफ एंटी-इनकंबेंसी को बड़ा मुद्दा बनाने की तैयारी में है। पार्टी स्थानीय स्तर पर मुद्दों को उठाने और हर विधानसभा क्षेत्र में टीएमसी नेताओं के खिलाफ “चार्जशीट” पेश करने की रणनीति पर काम कर रही है। पार्टी नेताओं का मानना है कि जनता के बीच स्थानीय समस्याओं को प्रमुखता से उठाकर चुनावी माहौल अपने पक्ष में किया जा सकता है। ‘लोकल मुद्दे, लोकल चेहरे’ पर फोकस भाजपा इस बार “लोकल मुद्दे और लोकल चेहरे” की रणनीति के साथ मैदान में उतर रही है। संगठन का मानना है कि इससे जमीनी कनेक्ट मजबूत होगा और पिछले चुनाव की तुलना में बेहतर प्रदर्शन की संभावना बढ़ेगी।  

surbhi मार्च 20, 2026 0
BJP and opposition leaders
पश्चिम बंगाल चुनाव 2026: बीजेपी की पहली सूची से 8 विधायकों की छुट्टी, वाम मोर्चे में भी उम्मीदवारों को लेकर असमंजस

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की तैयारियों के बीच राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। Election Commission of India द्वारा दो चरणों में मतदान की घोषणा के साथ ही सभी दलों ने अपने-अपने उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। राज्य में पहले चरण का मतदान 23 अप्रैल को होगा, जबकि पूरी चुनाव प्रक्रिया के बाद 4 मई को मतगणना के साथ नतीजे घोषित किए जाएंगे। इस बीच उम्मीदवारों की पहली सूची जारी होते ही राजनीतिक समीकरणों में बड़े बदलाव के संकेत मिलने लगे हैं।   बीजेपी की पहली सूची: 144 उम्मीदवार, कई बड़े फैसले Bharatiya Janata Party ने अपनी पहली सूची में 144 उम्मीदवारों के नाम घोषित किए हैं। इस सूची में कई नए चेहरों को मौका दिया गया है, जबकि कुछ मौजूदा विधायकों को टिकट नहीं मिलने से पार्टी के भीतर हलचल बढ़ गई है। सबसे बड़ा राजनीतिक दांव तब देखने को मिला जब पार्टी ने Suvendu Adhikari को दो महत्वपूर्ण सीटों-भवानीपुर और नंदीग्राम-से उम्मीदवार बनाया। यह सीधा मुकाबला Mamata Banerjee के खिलाफ रणनीतिक चुनौती के रूप में देखा जा रहा है। इसके अलावा, अग्निमित्रा पॉल को आसनसोल दक्षिण, सुकुमार को कूचबिहार उत्तर (आरक्षित), साबित्री बर्मन को शीतलकुची और अजय रॉय को दिनहाटा से टिकट दिया गया है।   8 मौजूदा विधायकों का टिकट कटा बीजेपी की सूची में सबसे ज्यादा चर्चा उन 8 मौजूदा विधायकों को लेकर है, जिन्हें इस बार टिकट नहीं मिला। पार्टी ने 144 में से 48 सीटों पर अपने मौजूदा विधायकों में से सिर्फ 40 को दोबारा मौका दिया है। सूत्रों के अनुसार, जिन सीटों पर बदलाव हुआ है, उनमें उत्तर बंगाल, रारह बंगाल और दक्षिण बंगाल के क्षेत्र शामिल हैं। सबसे चौंकाने वाला फैसला दक्षिण दिनाजपुर की बालुरघाट सीट को लेकर सामने आया, जहां 2021 में जीत दर्ज करने वाले अर्थशास्त्री अशोक लाहिड़ी को टिकट नहीं दिया गया। उनके कद और पार्टी में प्रभाव को देखते हुए यह फैसला राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है।   वाम मोर्चे में भी असमंजस, CPM की सूची पर उठे सवाल दूसरी ओर Communist Party of India (Marxist) (सीपीएम) ने 192 सीटों के लिए उम्मीदवारों की प्रारंभिक सूची जारी की है। हालांकि, इस सूची के सामने आने के बाद पार्टी के भीतर कुछ सीटों को लेकर असहमति देखने को मिल रही है। खासकर मुर्शिदाबाद की रानीनगर सीट और टॉलीगंज सीट पर उम्मीदवार घोषित न होने से सवाल खड़े हो गए हैं। पार्टी की आंतरिक नीति के तहत इस बार राज्य सचिव मंडल के अधिकांश सदस्य चुनाव नहीं लड़ेंगे। इसी कारण Mohammad Salim और Sujan Chakraborty जैसे नेताओं की उम्मीदवारी पर संशय बना हुआ है। हालांकि, Minakshi Mukherjee को अपवाद के रूप में हुगली की उत्तरपाड़ा सीट से उम्मीदवार बनाया गया है।   चुनाव कार्यक्रम: महत्वपूर्ण तारीखें अधिसूचना जारी: 30 मार्च 2026   नामांकन: 30 मार्च से 6 अप्रैल   नामांकन जांच: 7 अप्रैल   नाम वापसी की अंतिम तारीख: 9 अप्रैल   मतदान (पहला चरण): 23 अप्रैल   मतगणना: 4 मई 2026     राजनीतिक तस्वीर: त्रिकोणीय मुकाबले की तैयारी राज्य में इस बार मुकाबला त्रिकोणीय होने की संभावना है। एक ओर All India Trinamool Congress लगातार सत्ता बरकरार रखने की कोशिश में है, तो वहीं बीजेपी बदलाव का दावा कर रही है। दूसरी ओर वाम मोर्चा भी अपनी खोई जमीन वापस पाने के लिए सक्रिय हो गया है। उम्मीदवारों की पहली सूची के बाद यह साफ हो गया है कि इस चुनाव में रणनीतिक बदलाव, नए चेहरे और अंदरूनी समीकरण बड़ी भूमिका निभाने वाले हैं।  

surbhi मार्च 17, 2026 0
West Bengal election campaign with TMC and BJP as voters prepare for two-phase assembly polls.
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव: दो चरणों में मतदान, TMC और BJP के बीच सीधी टक्कर

  कोलकाता: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है। Election Commission of India ने राज्य में दो चरणों में मतदान कराने का ऐलान किया है, जिसके बाद राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। चुनावी मैदान में सत्तारूढ़ All India Trinamool Congress और भारतीय जनता पार्टी के बीच सीधी टक्कर देखने को मिल रही है। पिछले कुछ वर्षों से भाजपा राज्य की सत्ता हासिल करने के लिए पूरी ताकत लगा रही है, जबकि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व में तृणमूल कांग्रेस अपनी पकड़ बरकरार रखने की कोशिश में है। ऐसे में इस बार का चुनावी मुकाबला बेहद दिलचस्प माना जा रहा है।   पहला चरण: कड़ा मुकाबला 23 अप्रैल को होने वाले पहले चरण में 152 सीटों पर मतदान होगा। अगर 2021 के विधानसभा चुनाव के नतीजों को आधार माना जाए तो इन सीटों में से लगभग 92 सीटों पर तृणमूल कांग्रेस को बढ़त मिली थी, जो करीब 60.5 प्रतिशत के बराबर है। वहीं भाजपा ने 59 सीटों पर जीत दर्ज की थी, जो लगभग 38.8 प्रतिशत हिस्सेदारी बनती है, जबकि एक सीट अन्य दलों के खाते में गई थी। यह इलाका राजनीतिक रूप से मिश्रित माना जाता है। उत्तर, पश्चिम और मध्य पश्चिम बंगाल के कई क्षेत्रों में तृणमूल और भाजपा दोनों का प्रभाव रहा है। यही वजह है कि इस चरण को भाजपा के लिए अपेक्षाकृत अनुकूल माना जा रहा है, जहां पार्टी अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश करेगी।   दूसरा चरण: TMC का मजबूत गढ़ दूसरा चरण 29 अप्रैल को होगा, जिसमें 142 सीटों पर मतदान होना है। इन सीटों में से लगभग 123 सीटों पर तृणमूल कांग्रेस का दबदबा रहा है, जो करीब 86.6 प्रतिशत हिस्सेदारी बनाता है। इसके मुकाबले भाजपा को केवल 18 सीटों पर जीत मिली थी, जबकि एक सीट अन्य दलों के खाते में गई थी। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक यह क्षेत्र तृणमूल कांग्रेस का पारंपरिक गढ़ माना जाता है। यहीं से ममता बनर्जी को लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी दिलाने में बड़ी मदद मिली थी।   भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती विश्लेषकों का मानना है कि दूसरे चरण में भाजपा के लिए सबसे बड़ी चुनौती तृणमूल के मजबूत वोट बैंक में सेंध लगाना होगा। महिलाओं, अल्पसंख्यकों और सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों का बड़ा वर्ग लंबे समय से तृणमूल कांग्रेस के साथ जुड़ा रहा है, जिससे पार्टी की पकड़ मजबूत बनी हुई है।   दो हिस्सों में बंटा चुनावी मैदान दो चरणों में होने वाला यह चुनाव पश्चिम बंगाल को लगभग दो अलग-अलग चुनावी मैदानों में बांटता नजर आ रहा है। पहले चरण में जहां मुकाबला कड़ा दिखाई देता है, वहीं दूसरे चरण में तृणमूल कांग्रेस का पलड़ा भारी माना जा रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में दोनों प्रमुख दलों की रणनीति और चुनावी अभियान इन्हीं चरणों के हिसाब से तय होने की संभावना है।  

surbhi मार्च 16, 2026 0
Mamata Banerjee addressing media about possible West Bengal Assembly election date announcement in Kolkata
पश्चिम बंगाल चुनाव: ममता बनर्जी के संकेत, 15 या 16 मार्च को हो सकती है चुनाव तारीखों की घोषणा

  कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा के 26वें चुनाव की तैयारियां अब अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं। राज्य की राजनीतिक हलचल के बीच सभी की नजरें चुनाव आयोग की ओर टिकी हैं, जो जल्द ही मतदान की तारीखों का ऐलान कर सकता है। इसी बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने संकेत दिया है कि 15 या 16 मार्च को पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा संभव है। दरअसल, चुनाव आयोग की फुल बेंच हाल ही में दो दिनों तक पश्चिम बंगाल में चुनावी तैयारियों की समीक्षा करने के बाद दिल्ली लौट चुकी है। इसके बाद राज्य की राजनीति में चुनाव कार्यक्रम को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। विभिन्न राजनीतिक दल अपने-अपने अनुमान लगा रहे हैं, जबकि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी इस पर खुलकर टिप्पणी की है।   चुनाव आयोग और भाजपा पर साधा निशाना अभिषेक बनर्जी के अनुरोध पर धरना समाप्त करने के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग अब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रभाव में काम कर रहा है। ममता बनर्जी ने कहा कि अक्सर देखा गया है कि भाजपा की बड़ी राजनीतिक सभाओं के बाद ही चुनाव कार्यक्रम घोषित किया जाता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रस्तावित ब्रिगेड परेड ग्राउंड रैली 14 मार्च को है, और संभव है कि उसके बाद ही चुनाव की तारीखों का ऐलान किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा, “अगर ब्रिगेड की बैठक के बाद भी चुनाव की घोषणा होती है तो इसमें चिंता की कोई बात नहीं है। हमने पहले भी देखा है कि बड़ी रैली के बाद ही चुनाव कार्यक्रम घोषित किया जाता है।”   सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई का भी जिक्र ममता बनर्जी ने इस मुद्दे से जुड़े एक मामले में सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि सुनवाई के दौरान अदालत ने चुनाव आयोग को कड़ी टिप्पणी करते हुए फटकार लगाई है। मुख्यमंत्री के अनुसार, अदालत के आदेश में सभी बातें लिखित रूप में नहीं हैं, लेकिन वीडियो रिकॉर्डिंग में इसे देखा जा सकता है। उन्होंने कहा कि इस मामले की अगली सुनवाई 25 तारीख को निर्धारित है। ममता बनर्जी ने इसे अपनी कानूनी और राजनीतिक लड़ाई की “महत्वपूर्ण जीत” बताया और कहा कि इससे चुनाव आयोग के सामने कई सवाल खड़े हो गए हैं।   चुनावी माहौल गर्म पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक माहौल लगातार गर्म होता जा रहा है। राज्य में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC )और भाजपा (BJP) के बीच तीखी राजनीतिक प्रतिस्पर्धा देखने को मिल रही है। ऐसे में अब सभी की नजरें चुनाव आयोग पर टिकी हैं, जो किसी भी समय पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की तारीखों की औपचारिक घोषणा कर सकता है। चुनाव कार्यक्रम घोषित होते ही राज्य में आचार संहिता लागू हो जाएगी और राजनीतिक दल पूरी ताकत के साथ चुनावी मैदान में उतर जाएंगे।  

surbhi मार्च 11, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Top week

Indian delegation at international cyber security meeting after India assumed CCDB chairmanship role
राष्ट्रीय

भारत को मिली बड़ी अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारी, संभाला CCDB के अध्यक्ष का पद

surbhi मई 15, 2026 0