Two-Wheeler News

Royal Enfield, Jawa and TVS motorcycles with low seat heights suitable for shorter riders
Royal Enfield से Jawa तक: कम सीट हाइट वाली बेस्ट बाइक्स, छोटे कद के राइडर्स के लिए आरामदायक विकल्प

भारत में बाइक खरीदते समय ज्यादातर लोग इंजन, माइलेज और लुक्स पर ध्यान देते हैं, लेकिन छोटे कद के राइडर्स के लिए सबसे अहम चीज होती है सीट हाइट। कई बार बाइक पसंद आने के बावजूद सीट ऊंची होने की वजह से राइडिंग असहज हो जाती है। इसी समस्या को देखते हुए बाजार में अब कई ऐसी मोटरसाइकिलें मौजूद हैं जो कम सीट हाइट के साथ बेहतर संतुलन, स्टाइल और परफॉर्मेंस देती हैं। TVS Raider 125: शुरुआती राइडर्स के लिए आसान बाइक TVS Raider 125 कम सीट हाइट और हल्के वजन की वजह से नए राइडर्स के बीच काफी लोकप्रिय है। इसकी सीट हाइट लगभग 780 mm है, जिससे छोटे कद के लोग भी इसे आसानी से कंट्रोल कर सकते हैं। 124.8cc इंजन के साथ यह बाइक शहर की रोजमर्रा की राइडिंग के लिए बेहतर विकल्प मानी जाती है। इसकी शुरुआती कीमत करीब ₹82,860 (एक्स-शोरूम) है। Royal Enfield Hunter 350: भारी बाइक की आसान राइडिंग Royal Enfield Hunter 350 ने कंपनी की पारंपरिक छवि को बदल दिया है। 790 mm सीट हाइट और कॉम्पैक्ट डिजाइन इसे शहर में चलाने के लिए काफी आसान बनाते हैं। पहले जहां Royal Enfield को भारी और ऊंची सीट वाली बाइक माना जाता था, अब Hunter 350 ने छोटे कद के राइडर्स के लिए भी इसे एक प्रैक्टिकल विकल्प बना दिया है। इसकी कीमत करीब ₹1.38 लाख (एक्स-शोरूम) से शुरू होती है। Guerrilla 450: पावरफुल इंजन, आसान कंट्रोल Royal Enfield Guerrilla 450 में 452cc का दमदार इंजन दिया गया है, लेकिन सीट हाइट केवल 780 mm है। यह फीचर इसे खास बनाता है क्योंकि इसमें पावर और कंट्रोल दोनों का संतुलन मिलता है। यह बाइक उन लोगों के लिए बेहतर है जो एडवेंचर और परफॉर्मेंस दोनों चाहते हैं। इसकी कीमत लगभग ₹2.49 लाख (एक्स-शोरूम) है। TVS Ronin: आराम और स्टाइल का कॉम्बिनेशन TVS Ronin की सीट हाइट लगभग 795 mm है, जो सूची में थोड़ी ज्यादा है, लेकिन इसकी सीटिंग कम्फर्ट और रिलैक्स राइडिंग पोजिशन इसे काफी लोकप्रिय बनाती है। 225.9cc इंजन वाली यह बाइक उन लोगों के लिए बेहतर है जो रोजाना इस्तेमाल के साथ प्रीमियम फील चाहते हैं। इसकी कीमत करीब ₹1.29 लाख से शुरू होती है। Jawa 42 Bobber: सबसे कम सीट हाइट वाली बाइक Jawa 42 Bobber इस सूची में सबसे कम सीट हाइट वाली बाइक है, जो लगभग 740 mm है। इसका लो-स्लंग डिजाइन छोटे कद के राइडर्स के लिए इसे बेहद आसान और आत्मविश्वास बढ़ाने वाला बनाता है। यह बाइक स्टाइल और आराम दोनों का बेहतरीन मेल मानी जाती है। इसकी शुरुआती कीमत करीब ₹2.04 लाख (एक्स-शोरूम) है। क्यों जरूरी है सही सीट हाइट? सीट हाइट सिर्फ एक नंबर नहीं है, बल्कि यह तय करती है कि राइडर ट्रैफिक में रुकने, पार्किंग या टर्न लेते समय कितना सुरक्षित और कॉन्फिडेंट महसूस करेगा। आज भारतीय बाजार में कंपनियां सिर्फ पावर और डिजाइन ही नहीं, बल्कि हर तरह के राइडर्स के लिए बेहतर एर्गोनॉमिक्स पर भी ध्यान दे रही हैं।  

surbhi मई 23, 2026 0
Royal Enfield Flying Flea C6 electric bike showcasing retro design with modern EV features
रॉयल एनफील्ड की पहली इलेक्ट्रिक बाइक ‘Flying Flea C6’ लॉन्च: 1 रुपये में 3 Km चलने का दावा, 154 Km रेंज के साथ EV सेगमेंट में एंट्री

  नई दिल्ली: भारत की प्रतिष्ठित दोपहिया निर्माता Royal Enfield ने इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए अपनी पहली इलेक्ट्रिक बाइक Flying Flea C6 की झलक पेश कर दी है। यह लॉन्च कंपनी के लिए एक ऐतिहासिक मोड़ माना जा रहा है, क्योंकि दशकों से पेट्रोल इंजन वाली बाइक्स के लिए मशहूर ब्रांड अब EV सेगमेंट में प्रवेश कर चुका है। 1 रुपये में 3 Km: बेहद किफायती रनिंग कॉस्ट Flying Flea C6 की सबसे बड़ी खासियत इसकी कम रनिंग कॉस्ट है। कंपनी के मुताबिक यह बाइक लगभग 1 रुपये में 3 किलोमीटर चल सकती है। IDC के अनुसार इसकी रेंज 154 किलोमीटर बताई जा रही है, जिससे लंबी दूरी की यात्रा भी संभव होगी। बैटरी और चार्जिंग: फास्ट और किफायती इस इलेक्ट्रिक बाइक में 3.91 kWh की बैटरी दी गई है, जिसे लगभग 2 घंटे 16 मिनट में फुल चार्ज किया जा सकता है। चार्जिंग के दौरान करीब 4.6 kWh बिजली खर्च होती है। अगर बिजली की कीमत 10 रुपये प्रति यूनिट मानी जाए, तो एक फुल चार्ज में 50 रुपये से भी कम खर्च आएगा–जो इसे बेहद किफायती बनाता है। कीमत और BaaS मॉडल का विकल्प Royal Enfield ने इस बाइक की एक्स-शोरूम कीमत ₹2.79 लाख तय की है। साथ ही कंपनी ने Battery-as-a-Service (BaaS) मॉडल भी पेश किया है, जिसके तहत ग्राहक इसे करीब ₹1.99 लाख में खरीद सकते हैं। इस मॉडल में बैटरी उपयोग और चार्जिंग विकल्पों को कस्टमाइज करने की सुविधा भी दी गई है। क्लासिक डिजाइन, मॉडर्न टेक्नोलॉजी Flying Flea C6 का डिजाइन कंपनी की क्लासिक विरासत को दर्शाता है, लेकिन इसमें आधुनिक तकनीक का भी बेहतरीन समावेश किया गया है। यह बाइक उन ग्राहकों को ध्यान में रखकर बनाई गई है, जो स्टाइल के साथ-साथ किफायत और पर्यावरण के प्रति जागरूक हैं। EV सेगमेंट में बड़ा दांव Royal Enfield की यह पहल भारतीय EV बाजार में प्रतिस्पर्धा को और तेज कर सकती है। Flying Flea C6 न सिर्फ पारंपरिक बाइक्स को चुनौती देगी, बल्कि इलेक्ट्रिक सेगमेंट में भी नई दिशा तय करने की क्षमता रखती है।  

surbhi अप्रैल 18, 2026 0
Teaser silhouette of upcoming Yezdi motorcycle showcasing scrambler-style design ahead of April 23 launch.
23 अप्रैल को लॉन्च होगी Yezdi की नई बाइक, टीजर से मिले बड़े संकेत, दमदार इंजन की उम्मीद

भारतीय दोपहिया बाजार में एक बार फिर हलचल तेज होने वाली है। Yezdi Motorcycles ने अपनी अपकमिंग बाइक को लेकर बड़ा ऐलान किया है। कंपनी ने सोशल मीडिया पर एक टीजर जारी कर संकेत दिया है कि नई बाइक 23 अप्रैल 2026 को लॉन्च की जाएगी। टीजर के बाद ऑटो सेक्टर में इस मॉडल को लेकर उत्सुकता काफी बढ़ गई है। यह बाइक Classic Legends के तहत तैयार की जा रही है, जो पहले से ही प्रीमियम सेगमेंट में अपनी मजबूत पकड़ बना चुकी है। टीजर में क्या मिला खास संकेत? कंपनी ने टीजर के साथ एक दिलचस्प कैप्शन दिया-“Well, at least it’s not 69 days to go.” यह ‘69’ आंकड़ा Yezdi की मौजूदा Yezdi Roadster और Yezdi Adventure से जुड़ा है। इससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि नई बाइक में मौजूदा 334cc इंजन नहीं होगा, बल्कि कुछ नया और ज्यादा पावरफुल देखने को मिल सकता है। Scrambler सेगमेंट में हो सकती है एंट्री ऑटो एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह नई बाइक Scrambler सेगमेंट में आ सकती है। खास बात यह है कि उसी दिन BSA Scrambler 650 भी भारत में लॉन्च होने वाली है। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि Yezdi भी इसी सेगमेंट में बड़ा दांव खेलने की तैयारी में है। क्या मिलेगा नया इंजन? रिपोर्ट्स के मुताबिक, अगर यह बाइक BSA Scrambler 650 के प्लेटफॉर्म पर आधारित होती है, तो इसमें दमदार फीचर्स मिल सकते हैं, जैसे: 652cc सिंगल-सिलेंडर, लिक्विड-कूल्ड इंजन लगभग 45 hp की पावर 55 Nm का टॉर्क 6-स्पीड गियरबॉक्स यह सेटअप मौजूदा मॉडल्स की तुलना में काफी ज्यादा पावरफुल हो सकता है। Scrambler का अपडेटेड अवतार? फिलहाल Yezdi के पोर्टफोलियो में Yezdi Scrambler, Roadster और Adventure शामिल हैं। जहां Roadster और Adventure को हाल ही में अपडेट मिला है, वहीं Scrambler को लंबे समय से कोई बड़ा अपडेट नहीं मिला। ऐसे में संभावना है कि कंपनी इस मॉडल को नए अवतार में पेश करे। 23 अप्रैल का लॉन्च Yezdi के लिए गेमचेंजर साबित हो सकता है। अगर कंपनी ज्यादा पावरफुल इंजन और नए डिजाइन के साथ बाइक पेश करती है, तो यह मिड-साइज प्रीमियम सेगमेंट में कड़ी टक्कर दे सकती है।  

surbhi अप्रैल 9, 2026 0
KTM 390 Duke and Adventure X bikes displayed, price hike announced up to ₹40,000 in India
KTM 390 Duke और Adventure X हुई महंगी, ₹40,000 तक बढ़ी कीमतें - जानिए पूरा मामला

भारतीय प्रीमियम बाइक सेगमेंट में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। ऑस्ट्रियन टू-व्हीलर कंपनी KTM ने अपनी लोकप्रिय बाइक्स KTM 390 Duke और KTM 390 Adventure X की कीमतों में भारी बढ़ोतरी कर दी है। ऐसे में जो ग्राहक इन बाइक्स को खरीदने की योजना बना रहे हैं, उन्हें अब पहले से ज्यादा बजट तैयार रखना होगा। नई कीमतों के अनुसार, KTM 390 Duke की एक्स-शोरूम कीमत ₹2.99 लाख से बढ़कर ₹3.39 लाख हो गई है। यानी इस बाइक पर सीधे ₹40,000 का इजाफा हुआ है, जिससे यह और अधिक प्रीमियम सेगमेंट में पहुंच गई है। वहीं KTM 390 Adventure X की कीमत ₹3.26 लाख से बढ़कर ₹3.43 लाख (एक्स-शोरूम, दिल्ली) हो गई है, जो ₹17,000 की वृद्धि को दर्शाता है। इस कीमत वृद्धि के पीछे मुख्य कारण टैक्स स्ट्रक्चर में बदलाव बताया जा रहा है। 350cc से ऊपर की बाइक्स पर लागू 40% GST ने कंपनियों पर अतिरिक्त दबाव बनाया है। पहले Bajaj Auto इस टैक्स का कुछ हिस्सा खुद वहन कर रही थी, जिससे ग्राहकों पर सीधा असर नहीं पड़ा। लेकिन अब कंपनी ने अपनी रणनीति बदलते हुए पूरा टैक्स ग्राहकों पर ट्रांसफर कर दिया है। यही वजह है कि 390cc सेगमेंट की बाइक्स की कीमतों में अचानक उछाल देखने को मिला है। फिलहाल, कंपनी ने KTM RC 390 और KTM 390 Enduro जैसे अन्य मॉडल्स की कीमतों में बदलाव को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन ऑटो इंडस्ट्री के जानकार मानते हैं कि आने वाले समय में इन बाइक्स की कीमतों में भी बढ़ोतरी हो सकती है। दिलचस्प बात यह है कि कंपनी अब 350cc से कम इंजन क्षमता वाली नई बाइक्स पर काम कर रही है, जिससे 18% GST का फायदा मिल सके। माना जा रहा है कि KTM जल्द ही 350cc और 399cc सेगमेंट में नए विकल्प पेश कर सकती है, जिससे ग्राहकों को बेहतर कीमत और परफॉर्मेंस के बीच संतुलन मिल सके।  

surbhi अप्रैल 8, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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