ब्रिटेन को नया प्रधानमंत्री मिल गया है। लेबर पार्टी के नेता एंडी बर्नहैम ने आधिकारिक तौर पर प्रधानमंत्री पद संभाल लिया है। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री कीर स्टारमर की जगह ली, जिन्होंने किंग चार्ल्स तृतीय को अपना इस्तीफा सौंपने के बाद पद छोड़ा। इसके बाद राजा ने एंडी बर्नहैम को नई सरकार बनाने का निमंत्रण दिया और उन्होंने 10 डाउनिंग स्ट्रीट में प्रधानमंत्री के रूप में कार्यभार संभाल लिया। कौन हैं एंडी बर्नहैम? 56 वर्षीय एंडी बर्नहैम ब्रिटेन की लेबर पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं। वह लंबे समय तक ग्रेटर मैनचेस्टर के मेयर रहे और इससे पहले स्वास्थ्य, संस्कृति तथा वित्त से जुड़े मंत्रालयों में भी काम कर चुके हैं। जुलाई 2026 में उन्हें लेबर पार्टी का नया नेता चुना गया, जिसके बाद उनके प्रधानमंत्री बनने का रास्ता साफ हो गया। कीर स्टारमर की जगह संभाली जिम्मेदारी प्रधानमंत्री पद छोड़ने से पहले कीर स्टारमर ने 10 डाउनिंग स्ट्रीट के बाहर विदाई भाषण दिया और फिर बकिंघम पैलेस जाकर किंग चार्ल्स III को अपना इस्तीफा सौंपा। संवैधानिक प्रक्रिया के तहत इसके बाद एंडी बर्नहैम को सरकार बनाने का न्योता मिला। नई सरकार के सामने बड़ी चुनौतियां एंडी बर्नहैम के सामने सबसे बड़ी जिम्मेदारी अपनी नई कैबिनेट का गठन करना और लेबर पार्टी की गिरती लोकप्रियता को संभालना है। हाल के महीनों में पार्टी को जनसमर्थन में कमी का सामना करना पड़ा है, जबकि दक्षिणपंथी नेता निगेल फराज की पार्टी का प्रभाव बढ़ा है। बर्नहैम ने अपने पहले संबोधन में महंगाई, बेघर लोगों की समस्या और राष्ट्रीय स्थिरता को सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल करने का संकेत दिया। दस साल में छठे प्रधानमंत्री एंडी बर्नहैम पिछले एक दशक में ब्रिटेन के छठे प्रधानमंत्री बने हैं। राजनीतिक अस्थिरता के दौर से गुजर रहे ब्रिटेन में नेतृत्व परिवर्तन लगातार चर्चा का विषय रहा है। 2029 में होंगे अगले आम चुनाव ब्रिटेन में अगला आम चुनाव 2029 में प्रस्तावित है। इसलिए प्रधानमंत्री बदलने का मतलब यह नहीं है कि देश में दोबारा आम चुनाव होंगे। मौजूदा संसद अपना कार्यकाल पूरा करेगी और नई सरकार उसी संसद के भीतर काम करेगी। भारत ने दी बधाई भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एंडी बर्नहैम को प्रधानमंत्री बनने पर बधाई देते हुए कहा कि भारत और ब्रिटेन के बीच साझा लोकतांत्रिक मूल्यों के आधार पर दोनों देशों के संबंध आगे भी मजबूत होंगे।
लंदन, एजेंसियां। ब्रिटेन में सत्ता परिवर्तन के बाद एंडी बर्नहैम ने आधिकारिक तौर पर प्रधानमंत्री पद की कमान संभाल ली है। उन्होंने किंग चार्ल्स III से मुलाकात के बाद सरकार बनाने का निमंत्रण स्वीकार किया और 10 डाउनिंग स्ट्रीट के बाहर अपने पहले संबोधन में देश को राजनीतिक स्थिरता, आर्थिक सुधार और जनकल्याण पर केंद्रित सरकार देने का वादा किया। कीर स्टार्मर की जगह संभाली जिम्मेदारी लेबर पार्टी के नेता एंडी बर्नहैम ने कीर स्टार्मर का स्थान लिया, जिन्होंने आंतरिक राजनीतिक दबाव के बाद प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। बर्नहैम पिछले कई वर्षों से ग्रेटर मैनचेस्टर के मेयर रहे हैं और अब ब्रिटेन के नए प्रधानमंत्री के रूप में देश का नेतृत्व करेंगे। पहले संबोधन में किए बड़े वादे प्रधानमंत्री बनने के बाद अपने पहले भाषण में बर्नहैम ने महंगाई से राहत, बेघर लोगों की समस्या खत्म करने, सार्वजनिक सेवाओं में सुधार और देशभर में आर्थिक विकास को प्राथमिकता देने की बात कही। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार "राजनीतिक स्थिरता और लोगों का भरोसा लौटाने" के लिए काम करेगी। नई कैबिनेट का किया गठन पद संभालते ही एंडी बर्नहैम ने नई कैबिनेट की घोषणा की। उन्होंने जॉन हीली को चांसलर, एड मिलिबैंड को विदेश मंत्री और यवेट कूपर को स्वास्थ्य मंत्री की जिम्मेदारी सौंपी। कई प्रमुख मंत्रालयों में नए चेहरों को जगह देकर उन्होंने अपनी नई कार्यशैली का संकेत दिया। पीएम मोदी ने दी बधाई भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एंडी बर्नहैम को ब्रिटेन का नया प्रधानमंत्री बनने पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि भारत और ब्रिटेन के बीच साझा लोकतांत्रिक मूल्यों के आधार पर दोनों देशों के संबंध आगे भी मजबूत होते रहेंगे।
लंदन, एजेंसियां। ब्रिटेन के अगले प्रधानमंत्री एंडी बर्नहैम ने पदभार संभालने से पहले बड़ा नीतिगत फैसला लेते हुए सरकार की प्रस्तावित डिजिटल ID योजना को रद्द करने का ऐलान किया है। बर्नहैम ने कहा कि इस योजना पर होने वाले खर्च को अब आम लोगों को महंगाई और बढ़ती जीवन-यापन लागत से राहत देने वाली योजनाओं पर खर्च किया जाएगा। यह फैसला उनके 20 जुलाई को प्रधानमंत्री पद संभालने से पहले सामने आया है। 1.8 अरब पाउंड की योजना होगी बंद ब्रिटिश सरकार की डिजिटल ID परियोजना पर अगले तीन वर्षों में करीब 1.8 अरब पाउंड खर्च होने का अनुमान था। बर्नहैम की टीम का कहना है कि मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों में सरकार की प्राथमिकता डिजिटल पहचान प्रणाली नहीं, बल्कि आम नागरिकों की रोजमर्रा की समस्याओं का समाधान है। महंगाई और सार्वजनिक सेवाओं पर रहेगा फोकस बर्नहैम ने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार ऊर्जा बिल कम करने, सार्वजनिक परिवहन को सस्ता बनाने और जीवन-यापन की बढ़ती लागत से राहत देने वाले कदमों पर अधिक ध्यान देगी। उन्होंने इसे सरकार की प्राथमिकताओं का "रीसेट" बताया है। 20 जुलाई को संभालेंगे प्रधानमंत्री पद लेबर पार्टी के नए नेता चुने जाने के बाद एंडी बर्नहैम 20 जुलाई को आधिकारिक रूप से ब्रिटेन के प्रधानमंत्री का पद संभालेंगे। इसके बाद वे नई कैबिनेट का गठन करेंगे और अपनी सरकार के शुरुआती फैसलों की घोषणा करेंगे। डिजिटल ID पर लंबे समय से जारी था विवाद ब्रिटेन में प्रस्तावित डिजिटल ID योजना को लेकर लंबे समय से बहस चल रही थी। समर्थकों का मानना था कि इससे सरकारी सेवाओं तक पहुंच आसान होगी, जबकि आलोचकों ने इसे निजता और नागरिक स्वतंत्रता के लिए खतरा बताया था। बर्नहैम के फैसले को इस विवादित योजना पर बड़ा यू-टर्न माना जा रहा है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।