United Nations

Emergency responders assist after a man set himself on fire outside the United Nations headquarters in New York during an apparent protest linked to Tibet.
UN मुख्यालय के बाहर आत्मदाह: तिब्बती झंडा लेकर पहुंचे व्यक्ति ने लगाई आग, इलाज के दौरान मौत

न्यूयॉर्क: अमेरिका के न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र (UN) मुख्यालय के बाहर गुरुवार को एक व्यक्ति ने कथित तौर पर खुद को आग लगा ली। गंभीर रूप से झुलसे 52 वर्षीय व्यक्ति को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। घटना के बाद इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई और पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। बौद्ध भिक्षु जैसे वस्त्र पहनकर पहुंचा था व्यक्ति प्रत्यक्षदर्शियों और सामने आए वीडियो के अनुसार, व्यक्ति पारंपरिक बौद्ध भिक्षु जैसे वस्त्र पहने हुए था। उसने पहले फुटपाथ पर तिब्बती झंडा रखा और फिर खुद को आग के हवाले कर दिया। कुछ ही सेकंड में वह सड़क पर गिर पड़ा। मौके पर मौजूद लोगों ने तुरंत पुलिस और आपातकालीन सेवाओं को सूचना दी। 'चीन तिब्बत छोड़ो' लिखे पर्चे बरामद न्यूयॉर्क पुलिस विभाग (NYPD) के अनुसार, घटनास्थल से "China Out of Tibet" (चीन तिब्बत छोड़ो) लिखे कई पर्चे बरामद किए गए हैं। शुरुआती जांच में घटना को तिब्बत से जुड़े विरोध प्रदर्शन से जोड़कर देखा जा रहा है, पुलिस ने अभी तक किसी आधिकारिक निष्कर्ष की पुष्टि नहीं की है। मृतक की पहचान फिलहाल सार्वजनिक नहीं की गई है, क्योंकि पहले उसके परिजनों को सूचना देना जरूरी है। 20 वर्षों से अमेरिका में रहने का दावा कुछ मीडिया रिपोर्टों में मृतक की पहचान लोबगा रांगजेन के रूप में की गई है। बताया गया है कि वह लगभग 20 वर्षों से अमेरिका में रह रहा था। अधिकारियों ने अभी तक इस पहचान की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। UN ने क्या कहा? संयुक्त राष्ट्र के प्रवक्ता ने बताया कि घटना उस समय हुई जब दिनभर की आधिकारिक बैठकें समाप्त हो चुकी थीं। इसलिए इस घटना का संयुक्त राष्ट्र के नियमित कामकाज पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा। तिब्बत मुद्दे पर पहले भी हो चुके हैं आत्मदाह तिब्बत से जुड़े संगठनों के अनुसार, वर्ष 2009 से अब तक 150 से अधिक तिब्बती चीन के शासन के विरोध में आत्मदाह कर चुके हैं। इनमें बौद्ध भिक्षु, साध्वियां, छात्र, किसान और आम नागरिक शामिल रहे हैं। तिब्बती संगठनों का कहना है कि ऐसे विरोध प्रदर्शन धार्मिक स्वतंत्रता, सांस्कृतिक पहचान की रक्षा, तिब्बती भाषा के संरक्षण और दलाई लामा की तिब्बत वापसी जैसी मांगों से जुड़े रहे हैं। वहीं, चीन का आरोप है कि इन घटनाओं के पीछे निर्वासित तिब्बती नेतृत्व लोगों को उकसाता है। दूसरी ओर, निर्वासित तिब्बती प्रशासन इन आरोपों को खारिज करते हुए कहता है कि लोग चीन की नीतियों और बढ़ते सरकारी दबाव के विरोध में ऐसा कदम उठाते हैं। जांच जारी न्यूयॉर्क पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। अधिकारी आत्मदाह के पीछे की परिस्थितियों, घटनास्थल से मिले दस्तावेजों और उपलब्ध वीडियो फुटेज की जांच कर रहे हैं। फिलहाल घटना के कारणों को लेकर कोई आधिकारिक निष्कर्ष जारी नहीं किया गया है।  

Deepshikha जुलाई 3, 2026 0
Syria Suicide Blast
सीरिया की राजधानी दमिश्क में कैफे के बाहर आत्मघाती विस्फोट, 9 लोगों की मौत, कई घायल

दमिश्क, एजेंसियां। सीरिया की राजधानी दमिश्क में गुरुवार देर शाम एक व्यस्त कैफे के बाहर हुए आत्मघाती विस्फोट में कम से कम 9 लोगों की मौत हो गई, जबकि 20 से अधिक लोग घायल हुए हैं। विस्फोट के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई और सुरक्षा बलों ने पूरे क्षेत्र को घेर लिया। घायलों को तत्काल नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।   कैफे के बाहर खुद को उड़ाया   प्रारंभिक जांच के अनुसार, हमलावर ने भीड़भाड़ वाले इलाके में स्थित एक कैफे के बाहर खुद को विस्फोटकों से उड़ा लिया। धमाका इतना तेज था कि आसपास की कई दुकानों और वाहनों को भी नुकसान पहुंचा। राहत एवं बचाव दल ने मौके पर पहुंचकर घायलों को बाहर निकाला।   जांच एजेंसियां जुटीं   सीरियाई सुरक्षा एजेंसियों ने विस्फोट के बाद जांच शुरू कर दी है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, हमले के पीछे किसी आतंकी संगठन का हाथ होने की आशंका जताई जा रही है, हालांकि अभी तक किसी संगठन ने इसकी जिम्मेदारी नहीं ली है।   सरकार ने सुरक्षा बढ़ाई   घटना के बाद दमिश्क और आसपास के संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। अतिरिक्त सुरक्षाबलों की तैनाती की गई है और प्रमुख सार्वजनिक स्थलों पर तलाशी अभियान चलाया जा रहा है।   अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने जताई चिंता   संयुक्त राष्ट्र सहित कई देशों ने इस हमले की निंदा करते हुए निर्दोष नागरिकों पर हुए हमले को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने आतंकवाद के खिलाफ संयुक्त प्रयासों को और मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया है।

abhishek singh जुलाई 3, 2026 0
Rescue teams search through collapsed buildings in Venezuela after devastating earthquakes, while emergency workers and medical personnel continue relief operations in heavily affected areas.
वेनेजुएला में भूकंप से भारी तबाही: 1,900 से अधिक मौतें, लगभग 59 हजार इमारतें क्षतिग्रस्त; भारत ने बढ़ाई राहत सहायता

काराकास: दक्षिण अमेरिकी देश Venezuela में आए भीषण भूकंपों के बाद राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी है। प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार अब तक 1,943 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 58,870 से अधिक इमारतें क्षतिग्रस्त या पूरी तरह नष्ट हो गई हैं। अधिकारियों का कहना है कि मलबा हटाने का कार्य जारी होने के कारण मृतकों की संख्या बढ़ सकती है। हजारों मौतों की आशंका अमेरिकी United States Geological Survey के आकलन के अनुसार, प्रभावित क्षेत्रों में वास्तविक नुकसान और मृतकों की संख्या अभी और बढ़ सकती है। संयुक्त राष्ट्र के वेनेजुएला स्थित मानवीय समन्वयक Gianluca Rampolla ने बताया कि संभावित बढ़ती मृत्यु संख्या को देखते हुए सरकार और संयुक्त राष्ट्र लगभग 10,000 बॉडी बैग की व्यवस्था करने की तैयारी कर रहे हैं। राहत कार्यों में संसाधनों की कमी भूकंप से सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में से एक La Guaira में राहत अभियान जारी है। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार कई स्थानों पर ईंधन और भारी मशीनों की कमी के कारण मलबा हटाने का काम प्रभावित हो रहा है। भारत का 'ऑपरेशन अमिस्ताद' भारत ने प्रभावित लोगों की सहायता के लिए ऑपरेशन अमिस्ताद (Operation Amistad) के तहत चिकित्सा सहायता अभियान शुरू किया है। भारतीय मेडिकल टीमें प्रभावित इलाकों में घायलों का उपचार कर रही हैं और आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करा रही हैं। S. Jaishankar ने डॉक्टर्स डे के अवसर पर वेनेजुएला में तैनात भारतीय चिकित्सा दलों की सराहना करते हुए उनके मानवीय योगदान को प्रेरणादायक बताया। विदेश मंत्रालय ने साझा किए राहत कार्य Ministry of External Affairs के प्रवक्ता Randhir Jaiswal ने सोशल मीडिया पर वीडियो और तस्वीरें साझा कीं, जिनमें भारतीय फील्ड हॉस्पिटल की टीमें प्रभावित लोगों को चिकित्सा सहायता देती दिखाई दे रही हैं। साझा किए गए वीडियो में स्थानीय नागरिकों ने भी भारतीय मेडिकल टीमों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि कठिन समय में भारत की सहायता उनके लिए बेहद महत्वपूर्ण रही है। नासा का आकलन NASA के शोधकर्ताओं के अनुसार, हालिया दोहरे भूकंपों से वेनेजुएला के मध्य और उत्तरी हिस्सों में करीब 58,870 इमारतें क्षतिग्रस्त या पूरी तरह नष्ट हो चुकी हैं। राहत एजेंसियां अभी भी खोज एवं बचाव, चिकित्सा सहायता और पुनर्वास कार्यों में जुटी हुई हैं, जबकि प्रभावित क्षेत्रों में हालात सामान्य होने में अभी समय लग सकता है।  

Deepshikha जुलाई 2, 2026 0
Venezuela Earthquake
वेनेजुएला में भूकंप के बाद राहत अभियान जारी, 50 हजार से अधिक लोग अब भी लापता

कराकास, एजेंसियां। वेनेजुएला में 24 जून को आए दो शक्तिशाली भूकंपों के बाद हालात अब भी गंभीर बने हुए हैं। संयुक्त राष्ट्र और स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, 50 हजार से अधिक लोग अब भी लापता हैं, जबकि राहत और बचाव दल मलबे में फंसे लोगों की तलाश में लगातार अभियान चला रहे हैं।   मृतकों की संख्या 1,400 के पार   ताजा आधिकारिक जानकारी के अनुसार, भूकंप में 1,400 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और हजारों लोग घायल हुए हैं। पहले मृतकों की संख्या 920 बताई गई थी, लेकिन लगातार चल रहे राहत कार्यों के दौरान यह आंकड़ा बढ़ता गया। प्रभावित इलाकों में बड़ी संख्या में इमारतें ढह गई हैं और कई सड़कें तथा संचार सेवाएं क्षतिग्रस्त हो गई हैं।   मलबे में जारी है खोज अभियान   राहतकर्मी, सेना और स्थानीय स्वयंसेवक राजधानी कराकास और ला गुआइरा सहित सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में मलबा हटाकर जीवित लोगों की तलाश कर रहे हैं। कई स्थानों पर भारी मशीनों की कमी के कारण बचाव कार्य धीमा पड़ा है, जबकि विदेशी राहत दल भी अभियान में शामिल हो चुके हैं।   अंतरराष्ट्रीय मदद पहुंचनी शुरू   संयुक्त राष्ट्र, अमेरिका, यूरोपीय देशों और कई लैटिन अमेरिकी देशों ने राहत सामग्री, मेडिकल टीम और खोज एवं बचाव विशेषज्ञ वेनेजुएला भेजे हैं। मानवीय संगठनों का कहना है कि लाखों लोग भोजन, पेयजल, दवाइयों और अस्थायी आश्रय की जरूरत से जूझ रहे हैं।   आफ्टरशॉक से बढ़ी चिंता   भूकंप के बाद लगातार आ रहे हल्के झटकों (आफ्टरशॉक) के कारण लोगों में दहशत बनी हुई है। प्रशासन ने नागरिकों से क्षतिग्रस्त इमारतों से दूर रहने और राहत एजेंसियों के निर्देशों का पालन करने की अपील की है। विशेषज्ञों का मानना है कि लापता लोगों की वास्तविक संख्या में बदलाव हो सकता है, क्योंकि राहत अभियान आगे बढ़ने के साथ कई लोगों का पता लगाया जा रहा है।

abhishek singh जून 28, 2026 0
Indian Ambassador addresses the UN Security Council, criticizing Pakistan over terrorism and Afghanistan-related issues.
UNSC में भारत का पाकिस्तान पर बड़ा हमला, कहा- अफगानिस्तान में नागरिकों की मौत पर जवाबदेही से नहीं बच सकता इस्लामाबाद

  संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में अफगानिस्तान की स्थिति पर हुई बैठक के दौरान भारत ने पाकिस्तान को कड़े शब्दों में घेरा। भारत ने पाकिस्तान पर राज्य प्रायोजित दुष्प्रचार फैलाने, आतंकवाद के मुद्दे पर झूठा नैरेटिव गढ़ने और अफगानिस्तान में सैन्य अभियानों के दौरान नागरिकों की मौतों पर जवाबदेही से बचने का आरोप लगाया। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत परवथानेनी हरीश ने कहा कि पाकिस्तान अपने यहां सक्रिय आतंकी संगठनों की जिम्मेदारी स्वीकार करने के बजाय भारत विरोधी प्रचार के जरिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय को गुमराह करने की कोशिश कर रहा है। 'फितना अल हिंदुस्तान' शब्दावली पर भारत की आपत्ति अपने संबोधन में हरीश ने पाकिस्तान द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे "फितना अल हिंदुस्तान" शब्द को भ्रामक बताते हुए कहा कि इसका उद्देश्य तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करना है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान बिना किसी ठोस साक्ष्य के अपने देश में सक्रिय उग्रवादी संगठनों को भारत से जोड़ने का प्रयास करता रहा है। भारत ने कहा कि धार्मिक शब्दावली का इस्तेमाल कर गलत सूचना फैलाना एक सुनियोजित दुष्प्रचार अभियान का हिस्सा है, जिसका मकसद वास्तविक समस्याओं से ध्यान भटकाना है। 'नफरत की फैक्ट्री' चला रहा पाकिस्तान भारत ने पाकिस्तान के प्रचार तंत्र को "नफरत की फैक्ट्री" करार देते हुए कहा कि वहां का सत्ता प्रतिष्ठान लंबे समय से भारत विरोधी माहौल तैयार करता रहा है। हरीश ने कहा कि पाकिस्तान अपनी जनता का ध्यान राजनीतिक अस्थिरता, आर्थिक चुनौतियों और आंतरिक सुरक्षा समस्याओं से हटाकर बाहरी खतरों की ओर मोड़ने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने पाकिस्तान में सेना के बढ़ते प्रभाव और नागरिक संस्थाओं पर उसके बढ़ते नियंत्रण पर भी सवाल उठाए। अफगानिस्तान में सैन्य अभियानों को लेकर घेरा भारत ने अफगानिस्तान के भीतर पाकिस्तान द्वारा की गई सैन्य कार्रवाइयों को लेकर भी गंभीर चिंता व्यक्त की। भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि किसी भी सैन्य अभियान को आतंकवाद विरोधी कार्रवाई बताकर नागरिकों की मौत को उचित नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने कहा कि निर्दोष नागरिकों की हत्या, बच्चों का अनाथ होना और आम लोगों का घायल होना किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। भारत ने पाकिस्तान पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि एक ओर वह इस्लामी एकजुटता की बात करता है और दूसरी ओर रमजान जैसे पवित्र महीने में भी हवाई हमले करता है। UNAMA रिपोर्ट का हवाला, सैकड़ों नागरिकों की मौत भारत ने संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन इन अफगानिस्तान (UNAMA) की रिपोर्टों का उल्लेख करते हुए कहा कि पाकिस्तानी सैन्य कार्रवाइयों का सबसे बड़ा खामियाजा अफगान नागरिकों को भुगतना पड़ा है। सुरक्षा परिषद में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार इन हमलों में 372 नागरिकों की मौत हुई, जबकि 397 अन्य घायल हुए। भारत ने उन रिपोर्टों का भी जिक्र किया जिनमें काबुल स्थित एक नशामुक्ति अस्पताल पर हमले और भारी जनहानि की बात कही गई थी। आतंकवाद पर भारत का दो टूक संदेश क्षेत्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर भारत ने स्पष्ट किया कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में किसी प्रकार का भेदभाव नहीं होना चाहिए। हरीश ने लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) का नाम लेते हुए कहा कि इन संगठनों के खिलाफ वैश्विक स्तर पर समन्वित कार्रवाई जरूरी है। उन्होंने आईएसआईएल और अल-कायदा जैसे अंतरराष्ट्रीय आतंकी संगठनों के खिलाफ भी सामूहिक प्रयासों पर जोर दिया। अफगानिस्तान के खिलाफ 'ट्रेड एंड ट्रांजिट टेररिज्म' का आरोप भारत ने पाकिस्तान पर अफगानिस्तान के खिलाफ आर्थिक और रणनीतिक दबाव बनाने का आरोप भी लगाया। हरीश ने कहा कि समुद्र तक सीधी पहुंच न रखने वाले अफगानिस्तान के लिए व्यापार और पारगमन मार्गों को बाधित करना अंतरराष्ट्रीय नियमों और संयुक्त राष्ट्र की भावना के विपरीत है। उन्होंने इसे "ट्रेड एंड ट्रांजिट टेररिज्म" करार देते हुए कहा कि किसी भूमिबद्ध देश की भौगोलिक कमजोरियों का इस तरह इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। भारत ने गिनाई अफगानिस्तान के लिए अपनी मदद भारत ने अपने संबोधन में अफगानिस्तान के लिए जारी मानवीय सहायता का भी जिक्र किया। भारत ने बताया कि वह अब तक 50 हजार टन से अधिक गेहूं, 420 टन दवाइयां और वैक्सीन अफगानिस्तान को उपलब्ध करा चुका है। हाल के भूकंपों के दौरान भी भारत ने राहत सामग्री भेजी थी। भारत जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित अफगान बच्चों के इलाज में भी सहयोग कर रहा है और स्थानीय स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत बनाने के प्रयासों में शामिल है। हजारों छात्रों को मिली छात्रवृत्ति शिक्षा क्षेत्र में योगदान का उल्लेख करते हुए भारत ने बताया कि वर्ष 2023 से अब तक लगभग 3,000 अफगान छात्रों को छात्रवृत्ति प्रदान की गई है। इनमें करीब 1,000 छात्राएं शामिल हैं। भारत ने भविष्य में महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों और शिक्षा कार्यक्रमों के लिए अतिरिक्त सहायता देने की भी प्रतिबद्धता जताई। क्रिकेट कूटनीति का भी किया जिक्र अपने संबोधन के अंत में भारत ने अफगानिस्तान के साथ सांस्कृतिक और जनस्तरीय संबंधों का उल्लेख किया। हरीश ने कहा कि इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) में अफगान खिलाड़ियों का प्रदर्शन दोनों देशों के लोगों को जोड़ने का काम करता है। उन्होंने कहा कि भारत भविष्य में द्विपक्षीय क्रिकेट श्रृंखला आयोजित करने की दिशा में भी प्रयास कर रहा है, जिससे दोनों देशों के बीच संबंध और मजबूत हो सकें। अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान को घेरने की रणनीति जारी UNSC में भारत का यह बयान ऐसे समय आया है जब पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच संबंध लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं। भारत ने स्पष्ट संकेत दिया है कि वह आतंकवाद, दुष्प्रचार और नागरिकों के खिलाफ हिंसा जैसे मुद्दों पर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान को जवाबदेह ठहराने का प्रयास जारी रखेगा।  

Deepshikha जून 9, 2026 0
UN General Assembly voting session electing new non-permanent members to the UN Security Council.
UNSC चुनाव में बदला वैश्विक समीकरण, किर्गिस्तान की ऐतिहासिक एंट्री; जर्मनी को झटका

  संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के 2026 चुनाव परिणामों ने वैश्विक कूटनीति में बदलते समीकरणों की झलक दिखाई है। जहां मध्य एशिया के देश किर्गिस्तान ने पहली बार सुरक्षा परिषद में जगह बनाकर इतिहास रचा, वहीं यूरोप की प्रमुख शक्तियों में शामिल जर्मनी को अप्रत्याशित हार का सामना करना पड़ा। इन नतीजों ने संयुक्त राष्ट्र के भीतर बदलते राजनीतिक रुझानों और वैश्विक समर्थन के नए पैटर्न पर चर्चा तेज कर दी है। पांच नए देशों को मिली सुरक्षा परिषद में जगह 3 जून 2026 को संयुक्त राष्ट्र महासभा में हुए मतदान के बाद 2027-28 कार्यकाल के लिए पांच नए अस्थायी सदस्य चुने गए। इनमें शामिल हैं: किर्गिस्तान पुर्तगाल ऑस्ट्रिया जिम्बाब्वे त्रिनिदाद और टोबैगो ये देश 1 जनवरी 2027 से अपना दो वर्षीय कार्यकाल शुरू करेंगे और वर्तमान सदस्यों की जगह लेंगे जिनका कार्यकाल दिसंबर 2026 में समाप्त हो रहा है। किर्गिस्तान ने रचा नया इतिहास इस चुनाव का सबसे उल्लेखनीय परिणाम किर्गिस्तान की जीत रही। स्वतंत्रता प्राप्ति और संयुक्त राष्ट्र सदस्यता के तीन दशक से अधिक समय बाद पहली बार देश को सुरक्षा परिषद में प्रतिनिधित्व मिला है। एशिया-प्रशांत समूह की सीट के लिए हुए मुकाबले में किर्गिस्तान को कई दौर की मतदान प्रक्रिया के बाद सफलता मिली। इसे देश की सक्रिय कूटनीति और वैश्विक स्तर पर बढ़ती स्वीकार्यता का संकेत माना जा रहा है। किर्गिस्तान लंबे समय से यह मुद्दा उठाता रहा है कि छोटे, पर्वतीय और भू-आवेष्ठित देशों को भी वैश्विक निर्णय प्रक्रिया में पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। जर्मनी की हार बनी सबसे बड़ी चर्चा चुनाव में सबसे बड़ा राजनीतिक झटका जर्मनी को लगा। पश्चिमी यूरोपीय और अन्य देशों के समूह की दो सीटों के लिए हुए मुकाबले में पुर्तगाल और ऑस्ट्रिया सफल रहे, जबकि जर्मनी आवश्यक समर्थन जुटाने में पीछे रह गया। यह परिणाम इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि जर्मनी संयुक्त राष्ट्र के प्रमुख वित्तीय योगदानकर्ताओं में शामिल है और अतीत में कई बार सुरक्षा परिषद का सदस्य रह चुका है। अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर रुख बना चर्चा का विषय विश्लेषकों का मानना है कि हाल के वर्षों में यूक्रेन युद्ध, गाजा संकट और अन्य अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर जर्मनी की स्पष्ट विदेश नीति का असर मतदान पर पड़ा हो सकता है। आधिकारिक तौर पर किसी एक कारण की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन चुनाव परिणामों ने यह संकेत दिया है कि संयुक्त राष्ट्र में समर्थन हासिल करना केवल आर्थिक शक्ति या राजनीतिक प्रभाव से संभव नहीं है। भारत के लिए क्या संकेत? इन नतीजों को भारत के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारत लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में व्यापक सुधार और स्थायी सदस्यता के विस्तार की मांग करता रहा है। भारत, जर्मनी, जापान और ब्राजील का जी-4 समूह सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता के लिए अभियान चलाता रहा है। ऐसे में जर्मनी का अस्थायी सीट हासिल न कर पाना यह दर्शाता है कि संयुक्त राष्ट्र में समर्थन जुटाने की चुनौती लगातार बढ़ रही है। भारत ने सभी विजेता देशों को बधाई देते हुए उनके साथ सहयोग जारी रखने की बात कही है। सुरक्षा परिषद की संरचना को समझिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में कुल 15 सदस्य होते हैं। इनमें पांच स्थायी सदस्य शामिल हैं: United States Russia China United Kingdom France इन पांच देशों के पास वीटो शक्ति होती है। शेष 10 सदस्य दो वर्ष के लिए चुने जाते हैं और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व के आधार पर उनका चुनाव संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा किया जाता है। बदलती वैश्विक राजनीति का संकेत 2026 के चुनाव परिणाम यह दर्शाते हैं कि संयुक्त राष्ट्र में शक्ति संतुलन और समर्थन के पारंपरिक समीकरण बदल रहे हैं। छोटे और उभरते देशों की भूमिका बढ़ रही है, जबकि बड़े देशों को भी व्यापक कूटनीतिक समर्थन सुनिश्चित करने के लिए अधिक प्रयास करने पड़ रहे हैं। सुरक्षा परिषद के ये नतीजे आने वाले वर्षों में वैश्विक कूटनीति और संयुक्त राष्ट्र सुधार की बहस को नई दिशा दे सकते हैं।  

Deepshikha जून 4, 2026 0
Benjamin Netanyahu speaks on expanding Israeli military control over large parts of Gaza amid ongoing conflict
गाजा के 70% हिस्से पर कब्जे की तैयारी में इजराइल, नेतन्याहू बोले- धीरे-धीरे बढ़ाएंगे नियंत्रण

इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने गाजा पट्टी के 70 प्रतिशत हिस्से पर सैन्य नियंत्रण स्थापित करने का संकेत देकर पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ा दिया है। वेस्ट बैंक में आयोजित एक कॉन्फ्रेंस के दौरान नेतन्याहू ने कहा कि इजराइली सेना धीरे-धीरे गाजा के बड़े हिस्से को अपने नियंत्रण में ले रही है और अब सैन्य दबाव को और बढ़ाया जाएगा। नेतन्याहू बोले- “एक-एक कदम आगे बढ़ेंगे” कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए नेतन्याहू ने कहा, “हम इस समय हमास को दबा रहे हैं। पहले हम गाजा के 50 प्रतिशत हिस्से को नियंत्रित कर रहे थे, अब यह बढ़कर 60 प्रतिशत हो चुका है।” उन्होंने आगे कहा कि उन्होंने सैन्य नियंत्रण को और बढ़ाने का आदेश दिया है। इसी दौरान भीड़ में मौजूद कुछ लोगों ने “100 प्रतिशत” कब्जे की मांग करते हुए नारे लगाए। इस पर नेतन्याहू ने जवाब दिया, “एक-एक कदम आगे बढ़ते हैं। पहले 70 प्रतिशत तक पहुंचते हैं। फिलहाल वहीं से शुरुआत करते हैं।” सीजफायर समझौते के खिलाफ माना जा रहा कदम विशेषज्ञों और अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों का मानना है कि इजराइल का यह कदम अक्टूबर 2025 में हुए युद्धविराम समझौते की शर्तों के विपरीत है। समझौते के तहत इजराइली सेना को एक तय “येलो लाइन” के पीछे हटना था। उस समय गाजा का लगभग 53 प्रतिशत हिस्सा इजराइली नियंत्रण में माना जा रहा था। हालांकि हमास का आरोप है कि इजराइल धीरे-धीरे इस सीमा को आगे बढ़ा रहा है और अब गाजा के लगभग 60 से 64 प्रतिशत हिस्से पर उसका नियंत्रण हो चुका है। शांति वार्ता ठप, दोनों पक्ष आमने-सामने इजराइल और हमास के बीच जारी शांति योजना के अगले चरण में हमास के हथियार छोड़ने और इजराइली सेना की वापसी का प्रस्ताव शामिल है। लेकिन दोनों पक्षों के बीच बातचीत फिलहाल पूरी तरह ठप पड़ी हुई है। इजराइल का कहना है कि वह हमास को पूरी तरह कमजोर किए बिना पीछे नहीं हटेगा, जबकि हमास इजराइली सैन्य कार्रवाई को युद्धविराम समझौते का उल्लंघन बता रहा है। गाजा में मानवीय संकट और गहरा सकता है विशेषज्ञों का कहना है कि अगर इजराइल गाजा के 70 प्रतिशत हिस्से पर नियंत्रण स्थापित कर लेता है, तो वहां मानवीय संकट और गंभीर हो सकता है। द गार्डियन की रिपोर्ट के मुताबिक, ऐसी स्थिति में गाजा की करीब 22 लाख आबादी को कुल जमीन के एक-तिहाई से भी कम हिस्से में रहने को मजबूर होना पड़ सकता है। युद्ध, बमबारी और लगातार विस्थापन के कारण गाजा के ज्यादातर इलाके पहले ही तबाह हो चुके हैं। “हर खाली जगह पर टेंट लगे हैं” यूरोपियन काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस के विजिटिंग फेलो मुहम्मद शेहादा ने कहा कि हालात पहले से ही बेहद खराब हैं। उन्होंने कहा, “हर खाली जगह पर विस्थापित परिवारों के टेंट लगे हुए हैं। अगर इलाका और छोटा हो गया, तो बड़ी संख्या में लोगों के पास रहने की जगह नहीं बचेगी।” सीजफायर के बाद भी जारी हैं हमले इजराइल और हमास के बीच अक्टूबर 2025 में युद्धविराम लागू हुआ था, लेकिन इसके बावजूद गाजा में सैन्य कार्रवाई पूरी तरह नहीं रुकी। गाजा के स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, सीजफायर लागू होने के बाद से अब तक करीब 900 फिलिस्तीनी मारे जा चुके हैं। इजराइली सेना ने “येलो लाइन” के आसपास के बड़े इलाके को नो-मैन्स-लैंड घोषित कर दिया है, जहां किसी भी गतिविधि को खतरा मानते हुए कार्रवाई की जा रही है। संयुक्त राष्ट्र ने भी जताई चिंता संयुक्त राष्ट्र की हालिया ब्रीफिंग में उत्तरी गाजा के जबालिया इलाके में इजराइली टैंकों की बढ़ती आवाजाही और ड्रोन हमलों को लेकर चिंता जताई गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, क्षेत्र में किसी भी संदिग्ध हलचल को निशाना बनाया जा रहा है, जिससे आम नागरिकों में भय और असुरक्षा बढ़ रही है। अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ने की संभावना गाजा में बढ़ती सैन्य कार्रवाई और संभावित क्षेत्रीय कब्जे की रणनीति को लेकर इजराइल पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ सकता है। मानवाधिकार संगठनों और कई देशों ने पहले भी गाजा में नागरिकों की स्थिति को लेकर चिंता जताई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर स्थिति इसी तरह आगे बढ़ती रही, तो पश्चिम एशिया में संघर्ष और अधिक व्यापक रूप ले सकता है।  

surbhi मई 29, 2026 0
Lalu yadav news
आज सिंगापुर जायेंगे लालू यादव, क्या रोहिणी आचार्य की पार्टी में वापसी होगी?

पटना, एजेंसियां। राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव शुक्रवार 29 मई को रात 11 बजे सिंगापुर के लिए रवाना होंगे। वे दिल्ली से सिंगापुर के लिए फ्लाईट पकड़ेंगे। जानकारी के अनुसार लालू प्रसाद रूटीन हेल्थ चेकअप के लिए सिंगापुर जा रहे हैं। उनकी एक बेटी रोहिणी आचार्य सिंगापुर में ही रहती है। लालू प्रसाद  10 जून तक भारत लौट आयेंगे। 11 जून को लालू प्रसाद का जन्मदिन है, लिहाजा उनकी वापसी की तारीख 10 जून मानी जा रही है। रोहिणी की वापसी का प्रयास करेंगे चर्चा है कि सिंगापुर यात्रा के दौरान लालू प्रसाद अपनी पुत्री रोहिणी आचार्य को वापस पार्टी में लाने का भी प्रयास करेंगे। बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान रोहिणी आचार्य पार्टी से और अपने भाई तेजस्वी यादव से नाराज हो गयीं थी। लालू प्रसाद रोहिणी को राजद में संगठन के किसी पद की जिम्मेदारी दी जा सकती है। इधर, एक चर्चा यह भी है कि लालू प्रसाद के बडे बेटे तेजप्रताप यादव को पार्टी में वापस लाया जायेगा। उन्हें बिहार विधान परिषद में एमएसली बनाया जा सकता है। सन आफ लालू प्रसाद ने की पुष्टि इधर, लालू प्रसाद के बेहद करीबी और सन आफ लालू प्रसाद के नाम से चर्चित राजद नेता इरफान अहमद अंसारी ने लालू प्रसाद के सिंगापुर जाने की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि रोहिणी आचार्या को पार्टी में वापस लाया जा रहा है।

Unknown मई 29, 2026 0
India addresses UN Security Council and criticizes Pakistan over cross-border terrorism
UN में भारत ने पाकिस्तान को घेरा, आतंकवाद पर सुनाई खरी-खरी

भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में एक बार फिर पाकिस्तान को आतंकवाद के मुद्दे पर घेरा है। भारत ने साफ कहा कि पाकिस्तान को यह समझना होगा कि सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा देने के परिणाम भुगतने पड़ते हैं। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि Harish Parvathaneni ने पाकिस्तान की टिप्पणियों को निराधार और अनुचित बताया। भारत ने कहा- आतंक से बचाव का पूरा अधिकार सुरक्षा परिषद की बैठक में भारत ने कहा कि देश को सीमा पार आतंकवाद से अपनी रक्षा करने का पूरा अधिकार है। हरीश पर्वतनेनी ने कहा कि पाकिस्तान लंबे समय से आतंकवाद का इस्तेमाल भारत को कमजोर करने के लिए करता आया है। उन्होंने कहा कि यह संयुक्त राष्ट्र चार्टर की भावना के खिलाफ है। पाकिस्तान ने उठाया कश्मीर और सिंधु जल संधि का मुद्दा बैठक के दौरान पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री Ishaq Dar ने जम्मू-कश्मीर और सिंधु जल संधि का मुद्दा उठाया। इसके जवाब में भारत ने पाकिस्तान के आतंकवाद समर्थन के पुराने रिकॉर्ड को सामने रखा। भारत ने अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले का भी जिक्र किया, जिसमें 26 नागरिकों की मौत हुई थी। भारत ने TRF और लश्कर का लिया नाम भारत ने कहा कि पहलगाम हमले की जिम्मेदारी पाकिस्तान आधारित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के मुखौटा संगठन TRF ने ली थी। भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि पाकिस्तान की ओर से आतंकवादी संगठनों को समर्थन देना क्षेत्रीय शांति के लिए बड़ा खतरा है। सुरक्षा परिषद की बैठक में चीन भी मौजूद यह बैठक संयुक्त राष्ट्र चार्टर के उद्देश्यों और अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को मजबूत करने के मुद्दे पर आयोजित की गई थी। मई महीने के लिए सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता कर रहे Wang Yi ने बैठक की अध्यक्षता की। भारत ने पाकिस्तान के पुराने रिकॉर्ड की याद दिलाई भारत ने कहा कि पाकिस्तान ने कई बार भारत के खिलाफ आक्रामक रवैया अपनाया है और लगातार सीमा पार आतंकवाद को समर्थन दिया है। भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि स्वतंत्र भारत की शुरुआत ही पाकिस्तान की आक्रामकता का सामना करते हुए हुई थी। दुनिया के सामने पाकिस्तान को किया बेनकाब भारत ने संयुक्त राष्ट्र में कहा कि पाकिस्तान की आतंकवाद पर दोहरी नीति अब दुनिया से छिपी नहीं है। भारतीय पक्ष ने साफ कहा कि शांति और स्थिरता की बात करने वाला पाकिस्तान खुद आतंकवाद को बढ़ावा देता रहा है और उसे अब अपनी नीतियों की जिम्मेदारी लेनी होगी।  

surbhi मई 27, 2026 0
Taliban faces global criticism after Afghanistan introduces controversial marriage law affecting girls and women
अफगानिस्तान में तालिबान का नया विवाह कानून विवादों में, UN ने जताई ‘गंभीर चिंता’

Taliban सरकार द्वारा जारी नए विवाह संबंधी कानून को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तीखी आलोचना हो रही है। संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि इस कानून से बाल विवाह को कानूनी मान्यता मिलने का खतरा बढ़ गया है और इससे महिलाओं व लड़कियों के अधिकार और कमजोर होंगे। क्या है नया तालिबानी आदेश? अफगानिस्तान के न्याय मंत्रालय ने हाल ही में डिक्री नंबर 18 जारी की है, जिसका शीर्षक “पति-पत्नी के न्यायिक अलगाव” रखा गया है। इसमें विवाह, तलाक और वैवाहिक विवादों से जुड़े नियम तय किए गए हैं। सबसे विवादित प्रावधान यह है कि “युवावस्था” में पहुंच चुकी लड़की की चुप्पी को भी शादी के लिए उसकी सहमति माना जा सकता है। आलोचकों का कहना है कि इससे कम उम्र की लड़कियों की शादी को वैधता मिल सकती है और उनकी स्वतंत्र इच्छा को नजरअंदाज किया जा सकता है। UNAMA ने क्या कहा? United Nations Assistance Mission in Afghanistan (UNAMA) ने बयान जारी कर कहा कि इस कानून में उन लड़कियों के तलाक का भी जिक्र है जो कम उम्र में शादीशुदा हैं और अब युवावस्था में पहुंच चुकी हैं। संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि यह संकेत देता है कि तालिबान सरकार बाल विवाह को कानूनी रूप से स्वीकार कर रही है। UNAMA ने कहा कि यह कानून “पूर्ण और स्वतंत्र सहमति” के सिद्धांत को कमजोर करता है और बच्चों के हितों की रक्षा करने में विफल है। कानून में और क्या प्रावधान हैं? तालिबानी आदेश के मुताबिक, यदि किसी पिता या दादा ने किसी नाबालिग लड़की या लड़के की शादी बिना दहेज, बहुत कम दहेज या “गलत तरीके” से कर दी हो, तो ऐसी शादी को अमान्य घोषित किया जा सकता है। कानून में यह भी कहा गया है कि अगर किसी लड़की की शादी ऐसे व्यक्ति से कर दी गई हो जो उसके साथ खराब व्यवहार करता हो या बुरे फैसलों के लिए बदनाम हो, तो लड़की युवावस्था में पहुंचने के बाद अदालत में शादी रद्द कराने की मांग कर सकती है। आलोचना उस प्रावधान को लेकर ज्यादा हो रही है जिसमें कहा गया है कि अगर कोई महिला तलाक मांगती है और पति इनकार कर देता है, तो कई मामलों में पति की बात को प्राथमिकता दी जा सकती है, क्योंकि महिला के पास गवाह जुटाना मुश्किल होगा। तालिबान ने आरोपों को किया खारिज तालिबान सरकार ने संयुक्त राष्ट्र और मानवाधिकार संगठनों की आलोचना को खारिज करते हुए कहा है कि यह कानून इस्लामी सिद्धांतों के अनुरूप है। तालिबान का दावा है कि अफगानिस्तान में लड़कियों की जबरन शादी पहले से प्रतिबंधित है और नया आदेश केवल वैवाहिक मामलों के न्यायिक नियम तय करने के लिए लाया गया है। लेकिन अंतरराष्ट्रीय संगठनों का कहना है कि व्यवहारिक रूप से यह कानून पुरुष अभिभावकों और पतियों को अधिक अधिकार देता है, जबकि लड़कियों की स्वतंत्र सहमति कमजोर पड़ती है। अफगानिस्तान में महिलाओं की स्थिति लगातार खराब Afghanistan में 2021 में तालिबान की सत्ता वापसी के बाद महिलाओं और लड़कियों पर कई कड़े प्रतिबंध लगाए गए हैं। लड़कियों की उच्च शिक्षा पर रोक, महिलाओं के कई नौकरियों में काम करने पर पाबंदी और सार्वजनिक जीवन में उनकी भागीदारी सीमित करने जैसे फैसले पहले ही वैश्विक आलोचना का कारण बन चुके हैं। वर्तमान में अफगानिस्तान में महिलाओं को स्कूल, कॉलेज, कई सरकारी और निजी नौकरियों, जिम, ब्यूटी सैलून और यहां तक कि कई सार्वजनिक पार्कों तक में प्रवेश से रोका जा चुका है। मानवाधिकार संगठनों की चेतावनी मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि किसी लड़की की “चुप्पी” को उसकी सहमति मानना बेहद खतरनाक सिद्धांत है। विशेषज्ञों के अनुसार, इससे परिवारों और स्थानीय दबाव के जरिए कम उम्र की लड़कियों की जबरन शादी आसान हो सकती है। उनका कहना है कि विवाह के लिए स्पष्ट और स्वतंत्र सहमति अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून का मूल आधार है।  

surbhi मई 22, 2026 0
Indian diplomat addresses UNSC while criticizing Pakistan over terrorism and Afghanistan violence allegations
UN में भारत ने पाकिस्तान को घेरा, अफगानिस्तान में हिंसा और आतंकवाद पर उठाए सवाल

भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में पाकिस्तान को आतंकवाद, सीमा पार हिंसा और अफगानिस्तान में नागरिकों पर हमलों को लेकर कड़ी फटकार लगाई। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि हरीश पर्वतनेनी ने कहा कि पाकिस्तान का इतिहास “नरसंहार और हिंसा से कलंकित” रहा है और उसे भारत के आंतरिक मामलों पर टिप्पणी करने का कोई अधिकार नहीं है। UNSC की खुली बहस में भारत का कड़ा बयान सशस्त्र संघर्ष में नागरिकों की सुरक्षा पर आयोजित UNSC की वार्षिक खुली बहस में बोलते हुए भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि संघर्ष के दौरान नागरिकों की सुरक्षा अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखने का अहम हिस्सा है। उन्होंने कहा कि भारत संयुक्त राष्ट्र चार्टर के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराता है और नागरिकों की मौत, विस्थापन, अस्पतालों व स्कूलों पर हमलों को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त करता है। ड्रोन और नई तकनीकों के दुरुपयोग पर चिंता हरीश पर्वतनेनी ने कहा कि शहरी इलाकों में मिसाइलों, बमों और विस्फोटक हथियारों का इस्तेमाल नागरिकों के लिए बड़ा खतरा बनता जा रहा है। उन्होंने ड्रोन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित हथियारों के बढ़ते इस्तेमाल पर भी चिंता जताई। भारत ने कहा कि AI और स्वायत्त सैन्य तकनीकों का उपयोग अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवीय सिद्धांतों के दायरे में होना चाहिए। पाकिस्तान पर आतंकवाद को बढ़ावा देने का आरोप भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि भारत दशकों से सीमा पार आतंकवाद का शिकार रहा है। उन्होंने कहा कि जो देश आतंकवाद को समर्थन देते हैं, उन्हें जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। भारत ने दोहराया कि आतंकवाद किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं है और किसी भी बहाने से नागरिकों पर हमलों को सही नहीं ठहराया जा सकता। अफगानिस्तान में हिंसा का मुद्दा उठाया पाकिस्तान द्वारा भारत के आंतरिक मामलों का मुद्दा उठाए जाने पर भारत ने कड़ा जवाब देते हुए कहा कि यह विडंबना है कि हिंसा और नरसंहार के आरोपों से घिरा देश भारत पर टिप्पणी कर रहा है। भारत ने संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन अफगानिस्तान की रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया कि 2026 के शुरुआती तीन महीनों में पाकिस्तान की सीमा पार कार्रवाई में अफगानिस्तान में बड़ी संख्या में नागरिक हताहत हुए। भारतीय दूत के अनुसार, UNAMA दस्तावेजों में दर्ज 95 घटनाओं में से 94 घटनाओं के लिए पाकिस्तानी सुरक्षा बलों को जिम्मेदार बताया गया है। अस्पताल पर हमले का भी जिक्र भारत ने आरोप लगाया कि रमजान के दौरान काबुल के ओमिद एडिक्शन ट्रीटमेंट हॉस्पिटल पर पाकिस्तान ने हवाई हमला किया था। भारत के मुताबिक, इस हमले में 269 नागरिकों की मौत हुई और 122 घायल हुए। भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि अस्पताल को किसी भी स्थिति में सैन्य लक्ष्य नहीं माना जा सकता। 1971 के घटनाक्रम की दिलाई याद भारत ने 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के दौरान पाकिस्तान की सेना पर लगे अत्याचारों का भी जिक्र किया। हरीश पर्वतनेनी ने कहा कि ‘ऑपरेशन सर्चलाइट’ के दौरान बड़े पैमाने पर मानवाधिकार उल्लंघन हुए थे। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान का रिकॉर्ड उसकी आंतरिक विफलताओं और हिंसक नीतियों को दर्शाता है। नागरिकों की सुरक्षा पर भारत का जोर अपने संबोधन के अंत में भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से सशस्त्र संघर्षों में नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आह्वान किया। भारत ने कहा कि वैश्विक शांति बनाए रखने के लिए आतंकवाद और नागरिकों पर हमलों के खिलाफ एकजुट कार्रवाई जरूरी है।  

surbhi मई 21, 2026 0
Indian representative Harish Parvathaneni speaking at UNSC, strongly responding to Pakistan over Kashmir remarks.
UNSC में भारत का पाकिस्तान पर तीखा पलटवार, कहा- हिंसा का इतिहास रखने वाला कश्मीर पर न दे उपदेश

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में जम्मू-कश्मीर मुद्दे को उठाने पर भारत ने पाकिस्तान को कड़ा जवाब दिया है। भारत के स्थायी प्रतिनिधि हरीश पर्वथनेनी ने कहा कि जिस देश का इतिहास नरसंहार, आतंकवाद और हिंसा से जुड़ा रहा हो, उसे भारत के आंतरिक मामलों पर अंतरराष्ट्रीय मंच से टिप्पणी करने का कोई अधिकार नहीं है। सशस्त्र संघर्ष में नागरिकों की सुरक्षा पर आयोजित UNSC की खुली बहस के दौरान पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर का मुद्दा उठाया था। इसके जवाब में भारत ने पाकिस्तान पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया और कहा कि वह अपनी घरेलू विफलताओं से ध्यान हटाने के लिए सीमा पार हिंसा और उकसावे का सहारा लेता रहा है। भारत ने पाकिस्तान को बताया पाखंडी हरीश पर्वथनेनी ने कहा कि पाकिस्तान एक ओर अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवाधिकारों की बात करता है, जबकि दूसरी ओर मासूम नागरिकों को निशाना बनाने का इतिहास रखता है। उन्होंने आरोप लगाया कि रमजान के महीने में पाकिस्तान ने काबुल स्थित ओमिद नशा मुक्ति अस्पताल पर हवाई हमला किया था, जिसमें बड़ी संख्या में आम नागरिक मारे गए और घायल हुए। भारत के प्रतिनिधि के मुताबिक, यह हमला तरावीह की नमाज के बाद हुआ था, जब मरीज मस्जिद से बाहर निकल रहे थे। उन्होंने कहा कि किसी अस्पताल को सैन्य ठिकाना बताकर हमला करना बेहद अमानवीय और कायराना कृत्य है। 1971 का भी किया जिक्र भारत ने संयुक्त राष्ट्र में 1971 के ऑपरेशन सर्चलाइट का भी उल्लेख किया। पर्वथनेनी ने कहा कि उस दौरान पाकिस्तान की सेना पर बड़े पैमाने पर अत्याचार और महिलाओं के साथ सामूहिक दुष्कर्म के आरोप लगे थे। उन्होंने कहा कि ऐसे रिकॉर्ड रखने वाला देश अगर मानवाधिकारों और कश्मीर पर भाषण देता है तो यह पूरी तरह विडंबनापूर्ण है। भारत ने दोहराया कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न और आंतरिक हिस्सा है तथा पाकिस्तान द्वारा इसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाना अनुचित है। UNSC में बढ़ा तनाव भारत और पाकिस्तान के बीच संयुक्त राष्ट्र में हुई यह तीखी बहस ऐसे समय में सामने आई है जब क्षेत्रीय सुरक्षा और सीमा पार आतंकवाद को लेकर दोनों देशों के बीच तनाव लगातार बना हुआ है। भारत ने स्पष्ट संकेत दिया कि वह अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान के आरोपों का मजबूती से जवाब देता रहेगा।  

surbhi मई 21, 2026 0
Iran US tensions rise as talks stall despite ceasefire and ongoing naval blockade
ईरान ने अमेरिका पर साधा निशाना: बातचीत फेल होने के 3 बड़े कारण गिनाए

  सीजफायर के बावजूद बातचीत अटकी, बढ़ा कूटनीतिक तनाव Iran और United States के बीच जारी तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने साफ कहा है कि दोनों देशों के बीच बातचीत आगे नहीं बढ़ पा रही है और इसके पीछे अमेरिका की नीतियां जिम्मेदार हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए अमेरिका पर “दोहरी नीति” अपनाने का आरोप लगाया और कहा कि दुनिया अब इन विरोधाभासी बयानों और कार्रवाइयों को देख रही है। बातचीत में रुकावट के 3 बड़े कारण ईरान ने बातचीत के असफल रहने के पीछे तीन मुख्य वजहें बताई हैं: वायदों का उल्लंघन (Breach of commitments) समुद्री नाकेबंदी (Naval blockade) लगातार धमकियां (Threats) Masoud Pezeshkian ने कहा कि ईरान कभी भी बातचीत के खिलाफ नहीं रहा, लेकिन मौजूदा हालात में भरोसे की कमी सबसे बड़ी बाधा बन गई है। ट्रंप के सीजफायर विस्तार के बाद टली बातचीत रिपोर्ट्स के अनुसार, इस सप्ताह Pakistan में अमेरिका-ईरान के बीच वार्ता होने वाली थी, लेकिन Donald Trump द्वारा सीजफायर बढ़ाने के ऐलान के बाद इसे फिलहाल टाल दिया गया। अमेरिका का कहना है कि ईरान को एक संयुक्त प्रस्ताव तैयार करने के लिए अतिरिक्त समय दिया गया है। तनाव बरकरार: जहाज जब्ती और नाकेबंदी जारी सीजफायर के बावजूद दोनों देशों के बीच तनाव कम नहीं हुआ है। ईरान ने हाल ही में तीन जहाजों को जब्त किया, जबकि अमेरिका ने Strait of Hormuz के पास अपनी नौसैनिक नाकेबंदी जारी रखी है। व्हाइट हाउस की ओर से साफ किया गया है कि ईरान के प्रस्ताव पर कोई तय समयसीमा नहीं दी गई है और आगे की रणनीति राष्ट्रपति के निर्णय पर निर्भर करेगी। नाकेबंदी हटाने पर टिकी अगली बातचीत United Nations में ईरान के प्रतिनिधि ने संकेत दिया है कि यदि अमेरिका नाकेबंदी हटाता है, तो अगली वार्ता जल्द हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा हालात में भरोसे की बहाली और ठोस कदम ही दोनों देशों को बातचीत की टेबल तक वापस ला सकते हैं।  

surbhi अप्रैल 23, 2026 0
Donald Trump addressing media about restarting Iran peace talks in Islamabad amid Middle East tensions.
Donald Trump का बड़ा बयान: “फिर इस्लामाबाद जाना चाहते हैं” – ईरान वार्ता दोबारा शुरू होने के संकेत

वॉशिंगटन/इस्लामाबाद: ईरान संकट के बीच कूटनीतिक हल की कोशिशें तेज होती दिख रही हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने संकेत दिया है कि ईरान के साथ रुकी हुई बातचीत इस हफ्ते फिर से शुरू हो सकती है, और इसके लिए अमेरिका दोबारा Islamabad जाने पर विचार कर रहा है। इस्लामाबाद वार्ता फिर शुरू होने की उम्मीद न्यूयॉर्क पोस्ट को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा, “आपको वहीं (इस्लामाबाद) रुकना चाहिए, क्योंकि अगले दो दिनों में कुछ हो सकता है… हमारा झुकाव भी वहीं जाने का है।” गौरतलब है कि पिछले शनिवार को Islamabad में हुई अमेरिका-ईरान वार्ता बिना किसी नतीजे के खत्म हो गई थी, जिसके बाद तनाव और बढ़ गया। होर्मुज स्ट्रेट की नाकाबंदी से बढ़ा दबाव वार्ता विफल होने के बाद अमेरिका ने Strait of Hormuz पर नाकाबंदी लागू कर दी। अमेरिकी सेना के मुताबिक, नाकाबंदी के पहले 24 घंटों में इस अहम समुद्री मार्ग से कोई जहाज़ नहीं गुजरा, जिससे वैश्विक सप्लाई चेन पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई। युद्धविराम पर संकट मौजूदा गतिरोध ने अगले सप्ताह समाप्त होने जा रहे दो हफ्ते के युद्धविराम पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, अब बातचीत दोबारा शुरू होने की संभावना ने हालात में कुछ उम्मीद जगाई है। संयुक्त राष्ट्र की प्रतिक्रिया संयुक्त राष्ट्र महासचिव António Guterres ने कहा कि बातचीत फिर से शुरू होने की “काफी ज्यादा संभावना” है। खाड़ी देशों, Pakistan और Iran के अधिकारियों ने भी संकेत दिए हैं कि दोनों पक्षों की टीमें इस हफ्ते के अंत तक फिर से पाकिस्तान लौट सकती हैं, हालांकि अभी तारीख तय नहीं हुई है। तेल बाजार को राहत वार्ता दोबारा शुरू होने की उम्मीद से वैश्विक तेल बाजार में कुछ राहत देखने को मिली। मंगलवार को अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गईं, जिससे निवेशकों को थोड़ी राहत मिली।  

surbhi अप्रैल 15, 2026 0
Former UN diplomat Mohammad Safa speaking after resignation warning about possible nuclear threat in Iran
कौन हैं मोहम्मद साफा? UN से इस्तीफा देकर ईरान पर ‘न्यूक्लियर अटैक’ की आशंका जताने से मचा हड़कंप

अंतरराष्ट्रीय राजनीति में उस समय हलचल मच गई जब Mohammad Safa नाम के एक पूर्व राजनयिक ने संयुक्त राष्ट्र से इस्तीफा देते हुए ईरान पर संभावित परमाणु हमले का दावा कर दिया। उनके इस सनसनीखेज बयान ने वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ा दी है, हालांकि अभी तक इन दावों की कोई स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। कौन हैं मोहम्मद साफा? मोहम्मद साफा United Nations से जुड़े रहे एक वरिष्ठ राजनयिक हैं। वह Patriotic Vision Organization (PVA) के मुख्य प्रतिनिधि के रूप में कार्यरत थे, जिसे संयुक्त राष्ट्र की आर्थिक और सामाजिक परिषद (ECOSOC) में विशेष सलाहकार का दर्जा प्राप्त है। साफा पिछले एक दशक से अधिक समय से इस संगठन से जुड़े थे और 2013 से इसके एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर के रूप में काम कर रहे थे। इस्तीफा और गंभीर आरोप साफा ने अपने इस्तीफे के साथ एक खुला पत्र जारी करते हुए आरोप लगाया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कुछ “पावरफुल लॉबी” ऐसे फैसलों को प्रभावित कर रही हैं, जिनके परिणाम विनाशकारी हो सकते हैं। उन्होंने दावा किया कि Iran में संभावित परमाणु हथियारों के इस्तेमाल की एक “गुप्त तैयारी” चल रही है। उनका कहना है कि उन्होंने यह जानकारी दुनिया को आगाह करने के लिए सार्वजनिक की और इसी वजह से अपना पद छोड़ दिया। ‘मानवता के खिलाफ अपराध’ से दूरी का दावा अपने बयान में साफा ने कहा कि वह किसी भी ऐसी प्रक्रिया का हिस्सा नहीं बनना चाहते थे, जो मानवता के खिलाफ अपराध की ओर ले जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर समय रहते इस स्थिति को नहीं रोका गया, तो इसके गंभीर और वैश्विक परिणाम हो सकते हैं। धमकियों और दबाव का आरोप साफा ने यह भी दावा किया कि अलग विचार रखने के कारण उन्हें आलोचना, सेंसरशिप और यहां तक कि धमकियों का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि यह निर्णय उन्होंने काफी सोच-विचार के बाद लिया है। अभी तक नहीं हुई पुष्टि गौरतलब है कि साफा के इन दावों की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और न ही United Nations की ओर से इस पर कोई प्रतिक्रिया आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर बिना पुष्टि के दावों को सावधानी से देखने की जरूरत है।  

surbhi मार्च 31, 2026 0
India criticizes Pakistan at United Nations Security Council over Afghanistan airstrikes and terrorism
UN में भारत का पाकिस्तान पर तीखा प्रहार, अफगानिस्तान पर हमलों और आतंकवाद को लेकर घेरा

  संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अफगानिस्तान की स्थिति पर हुई अहम बैठक के दौरान भारत ने पाकिस्तान पर तीखा हमला बोला और अफगानिस्तान पर किए गए हवाई हमलों की कड़ी निंदा की। भारत ने कहा कि रमजान जैसे पवित्र महीने में ऐसे हमले करना और साथ ही इस्लामी एकजुटता की बातें करना गंभीर पाखंड है। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि P. Harish ने बैठक में कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून और इस्लामी एकजुटता की बात करने वाले देश अगर रमजान के दौरान नागरिकों पर हवाई हमले करते हैं, तो यह दोहरे मानदंड को दर्शाता है। उन्होंने बिना सीधे नाम लिए स्पष्ट संकेत दिया कि भारत की टिप्पणी Pakistan की कार्रवाई की ओर है।   नागरिकों की मौत पर जताई कड़ी चिंता भारत ने कहा कि अफगानिस्तान में हालिया हमलों में बड़ी संख्या में निर्दोष नागरिकों की जान गई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 6 मार्च 2026 तक करीब 185 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें लगभग 55 प्रतिशत महिलाएं और बच्चे शामिल हैं। भारत ने इन हमलों को अंतरराष्ट्रीय कानून, United Nations चार्टर और किसी भी देश की संप्रभुता के सिद्धांत का स्पष्ट उल्लंघन बताया।   आतंकवाद को लेकर पाकिस्तान पर गंभीर आरोप अपने संबोधन में P. Harish ने कहा कि आतंकवाद आज भी वैश्विक शांति और सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बना हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ देश आतंकवादी संगठनों का इस्तेमाल पड़ोसी देशों के खिलाफ रणनीतिक हथियार के रूप में करते हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि आतंकवादी संगठनों जैसे ISIS, Al-Qaeda, Lashkar-e-Taiba और Jaish-e-Mohammed के साथ-साथ इनके सहयोगी और प्रॉक्सी संगठनों के खिलाफ संयुक्त कार्रवाई की जरूरत है। भारत ने हाल ही में हुए एक आतंकी हमले का भी जिक्र किया, जिसमें The Resistance Front ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में धार्मिक आधार पर हमला किया था। इस हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी।   अफगानिस्तान की स्थिति पर संयुक्त राष्ट्र की चिंता इस बैठक में अफगानिस्तान की स्थिति पर संयुक्त राष्ट्र के प्रतिनिधियों ने भी चिंता जताई। अफगानिस्तान के लिए संयुक्त राष्ट्र महासचिव के उप विशेष प्रतिनिधि Georgette Gagnon ने कहा कि पाकिस्तान के साथ बढ़ते तनाव का असर अफगानिस्तान की अर्थव्यवस्था और आम लोगों के जीवन पर गंभीर रूप से पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि सीमा बंद होने के कारण अफगानिस्तान के व्यापार पर भारी असर पड़ा है। फिलहाल ईरान के रास्ते व्यापार जारी है, लेकिन क्षेत्र में बढ़ते युद्ध और अस्थिरता के कारण वह भी प्रभावित हो रहा है। इससे आवश्यक वस्तुओं की कीमतें बढ़ने लगी हैं और पहले से कमजोर अफगान अर्थव्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है। संयुक्त राष्ट्र अधिकारियों के अनुसार, अफगानिस्तान की दो प्रमुख सीमाओं पर बढ़ती अस्थिरता पूरे क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता के लिए गंभीर चुनौती बन सकती है।  

surbhi मार्च 10, 2026 0
Popular post
शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Top week

Bihar Assistant Professor
जॉब्स

बिहार में असिस्टेंट प्रोफेसर बनने के नियम बदले, जानिए कब जरूरी होगा NET ?

abhishek singh जुलाई 2, 2026 0