कराकास, एजेंसियां। वेनेजुएला में 24 जून को आए दो शक्तिशाली भूकंपों के बाद हालात अब भी गंभीर बने हुए हैं। संयुक्त राष्ट्र और स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, 50 हजार से अधिक लोग अब भी लापता हैं, जबकि राहत और बचाव दल मलबे में फंसे लोगों की तलाश में लगातार अभियान चला रहे हैं।
ताजा आधिकारिक जानकारी के अनुसार, भूकंप में 1,400 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और हजारों लोग घायल हुए हैं। पहले मृतकों की संख्या 920 बताई गई थी, लेकिन लगातार चल रहे राहत कार्यों के दौरान यह आंकड़ा बढ़ता गया। प्रभावित इलाकों में बड़ी संख्या में इमारतें ढह गई हैं और कई सड़कें तथा संचार सेवाएं क्षतिग्रस्त हो गई हैं।
राहतकर्मी, सेना और स्थानीय स्वयंसेवक राजधानी कराकास और ला गुआइरा सहित सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में मलबा हटाकर जीवित लोगों की तलाश कर रहे हैं। कई स्थानों पर भारी मशीनों की कमी के कारण बचाव कार्य धीमा पड़ा है, जबकि विदेशी राहत दल भी अभियान में शामिल हो चुके हैं।
संयुक्त राष्ट्र, अमेरिका, यूरोपीय देशों और कई लैटिन अमेरिकी देशों ने राहत सामग्री, मेडिकल टीम और खोज एवं बचाव विशेषज्ञ वेनेजुएला भेजे हैं। मानवीय संगठनों का कहना है कि लाखों लोग भोजन, पेयजल, दवाइयों और अस्थायी आश्रय की जरूरत से जूझ रहे हैं।
भूकंप के बाद लगातार आ रहे हल्के झटकों (आफ्टरशॉक) के कारण लोगों में दहशत बनी हुई है। प्रशासन ने नागरिकों से क्षतिग्रस्त इमारतों से दूर रहने और राहत एजेंसियों के निर्देशों का पालन करने की अपील की है। विशेषज्ञों का मानना है कि लापता लोगों की वास्तविक संख्या में बदलाव हो सकता है, क्योंकि राहत अभियान आगे बढ़ने के साथ कई लोगों का पता लगाया जा रहा है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
कराकास, एजेंसियां। वेनेजुएला में 24 जून को आए दो शक्तिशाली भूकंपों के बाद हालात अब भी गंभीर बने हुए हैं। संयुक्त राष्ट्र और स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, 50 हजार से अधिक लोग अब भी लापता हैं, जबकि राहत और बचाव दल मलबे में फंसे लोगों की तलाश में लगातार अभियान चला रहे हैं। मृतकों की संख्या 1,400 के पार ताजा आधिकारिक जानकारी के अनुसार, भूकंप में 1,400 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और हजारों लोग घायल हुए हैं। पहले मृतकों की संख्या 920 बताई गई थी, लेकिन लगातार चल रहे राहत कार्यों के दौरान यह आंकड़ा बढ़ता गया। प्रभावित इलाकों में बड़ी संख्या में इमारतें ढह गई हैं और कई सड़कें तथा संचार सेवाएं क्षतिग्रस्त हो गई हैं। मलबे में जारी है खोज अभियान राहतकर्मी, सेना और स्थानीय स्वयंसेवक राजधानी कराकास और ला गुआइरा सहित सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में मलबा हटाकर जीवित लोगों की तलाश कर रहे हैं। कई स्थानों पर भारी मशीनों की कमी के कारण बचाव कार्य धीमा पड़ा है, जबकि विदेशी राहत दल भी अभियान में शामिल हो चुके हैं। अंतरराष्ट्रीय मदद पहुंचनी शुरू संयुक्त राष्ट्र, अमेरिका, यूरोपीय देशों और कई लैटिन अमेरिकी देशों ने राहत सामग्री, मेडिकल टीम और खोज एवं बचाव विशेषज्ञ वेनेजुएला भेजे हैं। मानवीय संगठनों का कहना है कि लाखों लोग भोजन, पेयजल, दवाइयों और अस्थायी आश्रय की जरूरत से जूझ रहे हैं। आफ्टरशॉक से बढ़ी चिंता भूकंप के बाद लगातार आ रहे हल्के झटकों (आफ्टरशॉक) के कारण लोगों में दहशत बनी हुई है। प्रशासन ने नागरिकों से क्षतिग्रस्त इमारतों से दूर रहने और राहत एजेंसियों के निर्देशों का पालन करने की अपील की है। विशेषज्ञों का मानना है कि लापता लोगों की वास्तविक संख्या में बदलाव हो सकता है, क्योंकि राहत अभियान आगे बढ़ने के साथ कई लोगों का पता लगाया जा रहा है।
Denmark Azaan Ban: डेनमार्क सरकार देशभर में मस्जिदों से लाउडस्पीकर के जरिए अजान के प्रसारण पर प्रतिबंध लगाने की तैयारी कर रही है। सरकार का कहना है कि यह कदम सामाजिक एकीकरण को मजबूत करने और सार्वजनिक जीवन में बढ़ते 'इस्लामीकरण' को लेकर उठाई जा रही चिंताओं के मद्देनजर प्रस्तावित किया जा रहा है। इमिग्रेशन एवं इंटीग्रेशन मंत्री मोर्टेन बॉडस्कोव ने कहा कि डेनमार्क की पहचान स्पष्ट रहनी चाहिए और लोगों को ऐसा महसूस नहीं होना चाहिए कि वे किसी दूसरे देश के माहौल में रह रहे हैं। देशभर में लागू हो सकता है नया कानून डेनमार्क सरकार मस्जिदों से लाउडस्पीकर के जरिए होने वाली अजान पर रोक लगाने के लिए कानूनी ढांचे की समीक्षा फिर से शुरू करने जा रही है। फिलहाल इस तरह के प्रसारण स्थानीय शोर नियंत्रण नियमों के दायरे में आते हैं, लेकिन सरकार अब पूरे देश के लिए एक समान कानून लाने की तैयारी कर रही है। सरकार का कहना है कि प्रस्ताव का उद्देश्य सार्वजनिक जीवन में समान नियम लागू करना और सामाजिक एकीकरण को मजबूत करना है। मंत्री बोले- डेनमार्क की पहचान बनी रहनी चाहिए इमिग्रेशन एवं इंटीग्रेशन मंत्री मोर्टेन बॉडस्कोव ने कहा कि सार्वजनिक स्थानों पर लाउडस्पीकर के जरिए होने वाली धार्मिक घोषणाएं डेनमार्क के सामाजिक वातावरण के अनुरूप नहीं हैं। उन्होंने कहा कि देश के कुछ इलाकों को लेकर लोगों में ऐसी भावना नहीं बननी चाहिए कि वे डेनमार्क में नहीं, बल्कि किसी दूसरे देश के माहौल में रह रहे हैं। मंत्री ने यह भी कहा कि डेनमार्क की छतों पर नमाज की आवाज सुनाई नहीं देनी चाहिए। संसद में पेश होगा प्रस्ताव सरकार संसद में ऐसा प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रही है, जिसमें सार्वजनिक स्थानों पर लाउडस्पीकर के जरिए अजान या अन्य धार्मिक घोषणाओं के प्रसारण पर प्रतिबंध लगाने का प्रावधान होगा। सरकार के मुताबिक यह धार्मिक अभिव्यक्ति पर रोक लगाने का प्रयास नहीं, बल्कि सार्वजनिक व्यवस्था और सामाजिक एकीकरण से जुड़ी व्यापक नीति का हिस्सा है। पहले भी उठ चुके हैं ऐसे प्रस्ताव करीब 60 लाख आबादी वाले डेनमार्क में मुस्लिम समुदाय की हिस्सेदारी लगभग 5 प्रतिशत है। देश में लगभग 100 मस्जिदें हैं। इससे पहले वर्ष 2020 और 2025 में भी इसी तरह के प्रस्ताव सामने आए थे, लेकिन वे संसद से पारित नहीं हो सके। अब सरकार तीसरी बार इस दिशा में पहल कर रही है। कोपेनहेगन में पहले से लागू हैं नियम राजधानी कोपेनहेगन में शोर नियंत्रण संबंधी नियमों के कारण मस्जिदों को खुले लाउडस्पीकर से अजान प्रसारित करने की अनुमति नहीं है। इसी वजह से शहर की प्रमुख मस्जिदों में बाहरी लाउडस्पीकर का उपयोग नहीं किया जाता। आव्रजन और धार्मिक नियमों पर पहले भी रही सख्ती प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिकसेन के नेतृत्व वाली सरकार यूरोप की सबसे सख्त आव्रजन नीतियों में गिनी जाती है। डेनमार्क ने वर्ष 2018 में सार्वजनिक स्थानों पर पूरे चेहरे को ढकने वाले कपड़ों, जैसे बुर्का और नकाब, पर प्रतिबंध लगाया था। अब सरकार इस प्रतिबंध को स्कूलों और विश्वविद्यालयों तक बढ़ाने पर भी विचार कर रही है। कुरान जलाने की घटनाओं के बाद बदला था कानून वर्ष 2023 में सार्वजनिक रूप से कुरान की प्रतियां जलाने की घटनाओं के बाद कई मुस्लिम देशों ने डेनमार्क की आलोचना की थी। इसके बाद अंतरराष्ट्रीय दबाव के बीच सरकार ने धार्मिक ग्रंथों का अपमान करने और उन्हें जलाने पर रोक लगाने वाला कानून लागू किया था। अभी प्रस्ताव पर अंतिम फैसला नहीं फिलहाल लाउडस्पीकर से अजान पर प्रतिबंध का प्रस्ताव विचाराधीन है। सरकार कानूनी समीक्षा कर रही है और किसी भी नए कानून को लागू करने से पहले उसे संसद की मंजूरी लेनी होगी।
काराकस: वेनेजुएला में आए विनाशकारी भूकंपों के बाद हालात अब भी सामान्य नहीं हो पाए हैं। बुधवार को आए दो भीषण भूकंपों से हुई तबाही के बीच शुक्रवार को देश के उत्तरी तट के पास एक और भूकंप दर्ज किया गया। इस नए झटके से किसी बड़े नुकसान की तत्काल सूचना नहीं मिली है, लेकिन पहले से प्रभावित इलाकों में लोगों के बीच दहशत का माहौल बना हुआ है। फिर महसूस हुए भूकंप के झटके यूरोपीय-भूमध्यसागरीय भूकंप विज्ञान केंद्र (EMSC) के अनुसार, शुक्रवार दोपहर उत्तरी वेनेजुएला में 4.9 तीव्रता का भूकंप आया, जिसके झटके राजधानी काराकस, मराकाय और आसपास के कई इलाकों में महसूस किए गए। राहत की बात यह रही कि इस बार किसी बड़े नुकसान या जनहानि की सूचना सामने नहीं आई। वहीं, अमेरिकी भूगर्भ सर्वेक्षण (USGS) ने भी 4.7 तीव्रता के एक अन्य भूकंप की पुष्टि की। एजेंसी के मुताबिक, इसका केंद्र एल लिमोन से लगभग 54 किलोमीटर उत्तर में था और इसकी गहराई करीब 10 किलोमीटर दर्ज की गई। विशेषज्ञ इसे हाल ही में आए बड़े भूकंपों का आफ्टरशॉक मान रहे हैं। दो बड़े भूकंपों में 920 लोगों की मौत बुधवार को वेनेजुएला में कुछ ही सेकंड के अंतराल पर 7.2 और 7.5 तीव्रता के दो शक्तिशाली भूकंप आए थे। इन्हें देश में पिछले एक सदी से अधिक समय में आए सबसे विनाशकारी भूकंपों में गिना जा रहा है। इन भूकंपों से सबसे अधिक तबाही ला ग्वाइरा, काराकस और उत्तरी तटीय राज्यों में हुई। कई बहुमंजिला इमारतें ढह गईं, सड़कें और अन्य महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा। वेनेजुएला की नेशनल असेंबली के अध्यक्ष जॉर्ज रोड्रिग्ज के अनुसार, अब तक 920 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 3,360 से अधिक लोग घायल हुए हैं। 50 हजार से ज्यादा लोग अब भी लापता अधिकारियों के अनुसार, करीब 50 हजार लोग अब भी लापता हैं। राहत और बचाव दल लगातार मलबे में फंसे लोगों की तलाश में जुटे हैं। कई इलाकों में भारी मशीनों और खोजी कुत्तों की मदद से अभियान चलाया जा रहा है। प्रशासन को आशंका है कि मलबे से और शव मिलने के साथ मृतकों का आंकड़ा बढ़ सकता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुंच रही मदद भीषण आपदा के बाद कई देशों ने वेनेजुएला की सहायता के लिए राहत सामग्री और विशेषज्ञ टीमें भेजी हैं। अमेरिका, भारत, मैक्सिको, स्पेन, जर्मनी, स्विट्जरलैंड और कोलंबिया से मेडिकल टीमें, खोज एवं बचाव दल, प्रशिक्षित खोजी कुत्ते, अस्थायी अस्पताल और आपातकालीन राहत सामग्री प्रभावित क्षेत्रों में पहुंच रही है। भारत ने भी मानवीय सहायता के तहत दो C-130 विमान भेजे हैं, जिनमें करीब 35 टन राहत सामग्री पहुंचाई गई है। इसके साथ 60 पैरा फील्ड हॉस्पिटल की 41 सदस्यीय मेडिकल टीम, जिसमें 9 डॉक्टर शामिल हैं, राहत कार्यों के लिए रवाना हुई है। भारत ने दो BHISHMA पोर्टेबल हॉस्पिटल भी सहायता मिशन में भेजे हैं। राहत अभियान सबसे बड़ी प्राथमिकता वेनेजुएला सरकार के सामने फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती मलबे में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालना, घायलों का इलाज करना और लाखों प्रभावित लोगों तक राहत पहुंचाना है। लगातार आ रहे आफ्टरशॉक्स के कारण बचाव कार्यों में भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। अधिकारियों ने लोगों से क्षतिग्रस्त इमारतों से दूर रहने और प्रशासन की सलाह का पालन करने की अपील की है।