United States के व्यापार प्रतिनिधि Jamieson Greer ने दावा किया है कि China ने अमेरिका को भरोसा दिया है कि वह Iran की मदद नहीं करेगा। एबीसी न्यूज को दिए इंटरव्यू में ग्रीर ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump का मुख्य फोकस इस बात पर था कि चीन, ईरान के समर्थन में कोई कदम न उठाए। ग्रीर ने कहा, “हमें चीन की ओर से इसकी प्रतिबद्धता मिली है और उन्होंने इसकी पुष्टि भी की है।” होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी बयान ग्रीर ने स्पष्ट किया कि अमेरिका ने चीन से Strait of Hormuz को दोबारा खोलने के लिए किसी सैन्य हस्तक्षेप की मांग नहीं की थी। उन्होंने कहा कि चीन खुद भी इस रणनीतिक समुद्री मार्ग को खुला रखना चाहता है, क्योंकि इसका असर वैश्विक व्यापार और ऊर्जा सप्लाई पर पड़ता है। ग्रीर के मुताबिक, “राष्ट्रपति ट्रंप चीन की सैन्य मदद नहीं चाहते। अमेरिका सिर्फ यह सुनिश्चित करना चाहता है कि चीन, अमेरिका द्वारा उठाए जा रहे कदमों में बाधा न बने।” ट्रंप-शी जिनपिंग बातचीत में टैरिफ मुद्दा नहीं उठा हाल के महीनों में अमेरिका और चीन के बीच व्यापारिक तनाव और टैरिफ विवाद चर्चा में रहे हैं। हालांकि ट्रंप ने पत्रकारों से कहा कि उनकी और Xi Jinping के बीच हुई बातचीत में टैरिफ का मुद्दा नहीं उठा। ग्रीर ने इस पर कहा कि व्यापार वार्ता जरूर हुई थी, लेकिन वह शीर्ष नेताओं के स्तर पर नहीं थी। उन्होंने बताया कि अमेरिका की ओर से उन्होंने, वित्त मंत्री Scott Bessent और उनकी टीम ने चीनी अधिकारियों के साथ टैरिफ समेत कई मुद्दों पर चर्चा की। ‘बोर्ड ऑफ ट्रेड’ बनाने पर विचार ग्रीर ने यह भी बताया कि अमेरिका और चीन के बीच व्यापारिक नियमों और विवादों को व्यवस्थित करने के लिए ‘बोर्ड ऑफ ट्रेड’ बनाने पर विचार किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि चीन ने कई अमेरिकी मीट निर्यात इकाइयों से आयात फिर शुरू करने, कुछ बायोटेक मामलों की समीक्षा करने और 200 Boeing विमानों की खरीद पर सहमति जताई है। हालांकि चीन की ओर से अब तक इन समझौतों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। रणनीतिक स्थिरता बनाए रखने पर जोर ग्रीर ने कहा कि अमेरिका और चीन के बीच कई “ठोस कदम” पहले ही शुरू हो चुके हैं और सबसे अहम बात यह है कि दोनों देशों के बीच रणनीतिक स्थिरता बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान, होर्मुज जलडमरूमध्य और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका-चीन संबंध आने वाले समय में वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर डाल सकते हैं।
Donald Trump ने Iran को लेकर एक बार फिर सख्त चेतावनी दी है। परमाणु कार्यक्रम, आर्थिक प्रतिबंधों और क्षेत्रीय तनाव को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच जारी टकराव के बीच ट्रंप ने कहा कि “ईरान के लिए घड़ी की टिक-टिक शुरू हो चुकी है” और उसे जल्द फैसला लेना होगा। ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर लिखा, “उन्हें बहुत तेजी से कदम उठाने होंगे, वरना वहां कुछ भी बाकी नहीं बचेगा। समय सबसे महत्वपूर्ण है।” फिर बढ़ा सैन्य कार्रवाई का खतरा ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु वार्ता दोबारा शुरू करने को लेकर गतिरोध बना हुआ है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि अमेरिका एक सप्ताह के भीतर ईरान के खिलाफ नई सैन्य कार्रवाई पर विचार कर सकता है। रिपोर्ट्स के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप मंगलवार को अपने शीर्ष सुरक्षा सलाहकारों के साथ व्हाइट हाउस के सिचुएशन रूम में अहम बैठक कर सकते हैं, जिसमें ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य विकल्पों पर चर्चा होगी। नेतन्याहू से हुई लंबी बातचीत सूत्रों के मुताबिक, ट्रंप ने हाल ही में Benjamin Netanyahu से करीब आधे घंटे तक बातचीत की। चर्चा में ईरान और मिडिल ईस्ट की सुरक्षा स्थिति पर विचार किया गया। बताया जा रहा है कि नेतन्याहू ने ट्रंप से कहा कि इजरायली सेना किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार है। अमेरिका की नई शर्तें ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ने वार्ता फिर से शुरू करने के लिए कई नई शर्तें रखी हैं। इनमें शामिल हैं: 400 किलोग्राम समृद्ध यूरेनियम अमेरिका को सौंपना केवल एक परमाणु केंद्र संचालित रखना युद्ध मुआवजे की मांग वापस लेना अधिकांश फ्रीज विदेशी संपत्तियों पर दावा छोड़ना क्षेत्रीय संघर्ष को वार्ता प्रक्रिया पूरी होने तक समाप्त न करना ईरान ने भी रखीं अपनी शर्तें ईरान ने भी बातचीत के लिए अपनी शर्तें सामने रखी हैं। तेहरान का कहना है कि वह तभी बातचीत करेगा जब: क्षेत्र में सैन्य कार्रवाई बंद हो ईरान पर लगे आर्थिक प्रतिबंध हटाए जाएं विदेशों में फ्रीज ईरानी संपत्तियां जारी की जाएं युद्ध में हुए नुकसान का मुआवजा मिले Strait of Hormuz पर उसकी संप्रभुता को मान्यता दी जाए अब तक अमेरिका ने इन मांगों को स्वीकार नहीं किया है। युद्ध और संघर्षविराम के बाद भी तनाव बरकरार दोनों देशों के बीच संघर्ष 28 फरवरी को उस समय शुरू हुआ था जब अमेरिका और इजरायल ने मिलकर तेहरान समेत कई इलाकों पर हमले किए थे। इसके बाद कई हफ्तों तक संघर्ष जारी रहा और 8 अप्रैल को दोनों पक्षों के बीच संघर्षविराम पर सहमति बनी। सीजफायर के बावजूद धमकियों, आरोपों और सैन्य गतिविधियों का सिलसिला जारी है। ईरानी राष्ट्रपति ने अमेरिका-इजरायल पर लगाए आरोप Masoud Pezeshkian ने अमेरिका और इजरायल पर ईरान को अस्थिर करने की कोशिश का आरोप लगाया है। पाकिस्तान के आंतरिक मंत्री मोहसिन नकवी के साथ बैठक के दौरान उन्होंने कहा कि पड़ोसी देशों ने अपनी जमीन का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ नहीं होने दिया। उन्होंने पाकिस्तान, अफगानिस्तान और इराक का आभार भी जताया। होर्मुज स्ट्रेट बना विवाद का केंद्र मिडिल ईस्ट तनाव के बीच होर्मुज स्ट्रेट सबसे संवेदनशील मुद्दा बन गया है। ईरान ने इस समुद्री मार्ग पर निगरानी बढ़ा दी है, जबकि अमेरिका ने क्षेत्र में नौसैनिक गतिविधियां तेज कर दी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर तनाव और बढ़ा तो इसका असर वैश्विक तेल सप्लाई और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर गंभीर रूप से पड़ सकता है।
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के दौरान पाकिस्तान की भूमिका को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पाकिस्तान ने संघर्ष के दौरान चुपचाप ईरानी सैन्य और निगरानी विमानों को अपने एयरबेस पर शरण दी। इस खुलासे के बाद पाकिस्तान की विदेश नीति और उसकी विश्वसनीयता पर सवाल उठने लगे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी अधिकारियों ने आरोप लगाया है कि ईरान के कुछ विमान पाकिस्तान के नूर खान एयरबेस पर तैनात किए गए थे। इनमें ईरानी वायु सेना का RC-130 विमान भी शामिल बताया गया, जो टोही और खुफिया जानकारी जुटाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। यह विमान प्रसिद्ध लॉकहीड C-130 हरक्यूलिस का विशेष सैन्य संस्करण माना जाता है। पाकिस्तान ने आरोपों से किया इनकार हालांकि Pakistan ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि एयरबेस पर मौजूद विमान राजनयिक और प्रशासनिक अधिकारियों से जुड़े थे, जो संघर्ष विराम वार्ता के दौरान वहां पहुंचे थे। इस्लामाबाद ने दावा किया कि इन विमानों की कोई सैन्य भूमिका नहीं थी और मीडिया रिपोर्ट भ्रामक अटकलों पर आधारित है। लेकिन अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान की भूमिका पर बहस तेज हो गई है। आलोचकों का कहना है कि एक ओर पाकिस्तान खुद को मध्यस्थ और निष्पक्ष देश के रूप में पेश कर रहा था, वहीं दूसरी ओर वह ईरान को अप्रत्यक्ष मदद भी पहुंचा रहा था। पाकिस्तान के पुराने रिकॉर्ड पर फिर उठे सवाल इस विवाद के बाद पाकिस्तान के अतीत को भी याद किया जा रहा है। पूर्व ISI प्रमुख Hamid Gul का वह चर्चित बयान फिर चर्चा में है जिसमें उन्होंने कहा था कि ISI ने पहले अमेरिका की मदद से सोवियत संघ को हराया और फिर अमेरिका को भी अफगानिस्तान में मात दी। विशेषज्ञों का मानना है कि अफगानिस्तान में तालिबान की वापसी और अमेरिकी सेना की वापसी के बाद भी अमेरिका पाकिस्तान की रणनीति को पूरी तरह समझ नहीं पाया है। कई विश्लेषकों का कहना है कि पाकिस्तान लंबे समय से अलग-अलग वैश्विक शक्तियों के बीच संतुलन बनाकर अपनी रणनीतिक स्थिति मजबूत करता रहा है। ट्रंप के करीबी नेता ने जताई चिंता इस मामले ने अमेरिकी राजनीति में भी हलचल बढ़ा दी है। अमेरिकी सीनेटर Lindsey Graham ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अगर यह रिपोर्ट सही साबित होती है तो अमेरिका को ईरान और अन्य पक्षों के बीच मध्यस्थ के रूप में पाकिस्तान की भूमिका का पुनर्मूल्यांकन करना पड़ेगा। उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान के कुछ रक्षा अधिकारियों के इजरायल विरोधी बयानों को देखते हुए ऐसे आरोप पूरी तरह चौंकाने वाले नहीं हैं। क्षेत्रीय राजनीति में बढ़ सकता है असर विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन आरोपों की पुष्टि होती है तो इसका असर अमेरिका-पाकिस्तान संबंधों, मध्य पूर्व की कूटनीति और क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरणों पर पड़ सकता है। फिलहाल पाकिस्तान इन दावों को गलत बता रहा है, लेकिन इस मुद्दे ने एक बार फिर उसकी विदेश नीति और रणनीतिक विश्वसनीयता पर वैश्विक बहस छेड़ दी है।
वाशिंगटन, एजेंसियां। अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव एक बार फिर तेज हो गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के शांति प्रस्ताव पर ईरान की प्रतिक्रिया को अमेरिका द्वारा खारिज किए जाने के बाद तेहरान ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। ईरान की सरकारी मीडिया ने अमेरिकी योजना को “ट्रंप के लालच के आगे ईरान के आत्मसमर्पण” जैसा बताया। ईरान ने अमेरिका पर लगाया दबाव की राजनीति का आरोप ईरान के सरकारी मीडिया संस्थान Islamic Republic of Iran Broadcasting (IRIB) ने कहा कि अमेरिका का प्रस्ताव पूरी तरह एकतरफा था और इसका उद्देश्य ईरान की संप्रभुता को कमजोर करना था। तेहरान ने साफ कहा कि वह किसी भी कीमत पर अपने “मौलिक अधिकारों” से समझौता नहीं करेगा। ईरानी अधिकारियों ने यह भी कहा कि “यहां कोई भी ट्रंप को खुश करने के लिए प्रस्ताव तैयार नहीं करता। ईरान की प्रमुख मांगें रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने अपने जवाब में कई शर्तें रखीं। इनमें युद्ध में हुए नुकसान की भरपाई, अमेरिकी प्रतिबंधों को पूरी तरह हटाना, ईरानी संपत्तियों को अनफ्रीज करना और तेल निर्यात की अनुमति शामिल है। इसके अलावा, ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अमेरिकी नाकाबंदी खत्म करने, लेबनान में युद्धविराम और युद्ध के बाद 30 दिनों की वार्ता का प्रस्ताव भी दिया। ट्रंप ने बताया “पूरी तरह अस्वीकार्य” राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के जवाब को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर कहा कि ईरान का रुख अमेरिका के लिए “पूरी तरह अस्वीकार्य” है। ट्रंप ने आरोप लगाया कि ईरान पिछले 47 वर्षों से अमेरिका और दुनिया को केवल “देरी की रणनीति” से गुमराह करता रहा है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अब ईरान “और ज्यादा नहीं हंस पाएगा।”
Middle East Conflict: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को एक बार फिर कड़ी चेतावनी दी है. ट्रंप ने कहा है कि अगर ईरान अमेरिका की शर्तों को नहीं मानता और होर्मुज स्ट्रेट को नहीं खोलता, तो उस पर पहले से ज्यादा तीव्र और ताकतवर बमबारी की जाएगी. डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर लिखा कि यदि ईरान तय शर्तों को स्वीकार कर लेता है, तो अमेरिकी सैन्य अभियान “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” को समाप्त कर दिया जाएगा और होर्मुज स्ट्रेट को ईरान सहित सभी देशों के लिए फिर से खोल दिया जाएगा. ट्रंप बोले- नहीं माने तो बरसेंगे बम ट्रंप ने अपने पोस्ट में साफ कहा कि अगर ईरान समझौते पर सहमत नहीं होता है, तो अमेरिका की सैन्य कार्रवाई और ज्यादा आक्रामक होगी. उन्होंने कहा कि अमेरिका किसी भी कीमत पर वैश्विक समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति को बाधित नहीं होने देगा. उन्होंने लिखा कि “अगर ईरान सहमत नहीं होता, तो बमबारी पहले से कहीं अधिक ताकतवर होगी.” ट्रंप के इस बयान के बाद मिडिल ईस्ट में तनाव और बढ़ गया है. ईरान ने भी दी चेतावनी ट्रंप का यह बयान ईरानी संसद अध्यक्ष एमबी गालिबफ की टिप्पणी के बाद आया है. गालिबफ ने कहा था कि होर्मुज स्ट्रेट को लेकर “नया समीकरण” तैयार हो रहा है और अमेरिका की नाकाबंदी नीति उसके लिए भारी साबित होगी. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि अमेरिका और उसके सहयोगियों ने युद्धविराम का उल्लंघन कर क्षेत्र में तनाव बढ़ाया है. ईरान ने आरोप लगाया कि नाकाबंदी की वजह से जहाजों, तेल और गैस आपूर्ति की सुरक्षा प्रभावित हुई है. प्रोजेक्ट फ्रीडम अस्थायी रूप से रोका गया इस बीच ट्रंप प्रशासन ने होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की सुरक्षित निकासी के लिए शुरू किये गये “प्रोजेक्ट फ्रीडम” को फिलहाल अस्थायी रूप से रोक दिया है. ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका और ईरान के बीच “पूर्ण और अंतिम समझौते” को लेकर बातचीत में कुछ प्रगति हुई है. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान समेत कई देशों के अनुरोध और कूटनीतिक प्रयासों को देखते हुए यह फैसला लिया गया. हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि समुद्री नाकाबंदी अभी भी जारी रहेगी. पाकिस्तान ने ट्रंप को कहा धन्यवाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने ट्रंप के फैसले का स्वागत किया है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि ट्रंप का यह कदम क्षेत्रीय शांति और स्थिरता को बढ़ावा देगा. शहबाज शरीफ ने कहा कि पाकिस्तान हमेशा कूटनीति और संवाद के जरिए विवादों के समाधान का समर्थन करता है. उन्होंने उम्मीद जतायी कि अमेरिका और ईरान के बीच जारी बातचीत से स्थायी शांति का रास्ता निकलेगा. होर्मुज स्ट्रेट क्यों अहम? होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक माना जाता है. वैश्विक तेल और गैस सप्लाई का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है. ऐसे में यहां बढ़ता तनाव पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा बाजार पर असर डाल सकता है.
वाशिंगटन/ तेहरान, एजेंसियां। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने की अपील की है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव António Guterres ने कहा कि इस अहम समुद्री मार्ग पर जहाजों की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित की जानी चाहिए। उन्होंने सभी पक्षों से आग्रह किया कि “स्ट्रेट खोलें, जहाजों को गुजरने दें, कोई टोल नहीं और कोई भेदभाव नहीं हो।” उन्होंने इसे वैश्विक अर्थव्यवस्था और मानवीय जरूरत दोनों के लिए जरूरी बताया। ईरान ने रखी शर्त, अमेरिका से मांगा नाकेबंदी खत्म करने का भरोसा Iran ने संकेत दिया है कि वह Strait of Hormuz को खोलने के लिए तैयार है, लेकिन इसके लिए उसने अमेरिका के सामने शर्त रखी है। ईरान ने कहा है कि यदि अमेरिका उसकी नाकेबंदी खत्म करे और मौजूदा संघर्ष को समाप्त करने की दिशा में कदम उठाए, तो वह जलडमरूमध्य को फिर से खोल सकता है। साथ ही ईरान ने यह भी सुझाव दिया कि उसके परमाणु कार्यक्रम से जुड़े मुद्दों पर बातचीत बाद में की जा सकती है। ट्रंप प्रशासन ने प्रस्ताव पर शुरू की चर्चा Donald Trump ने अपने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों के साथ इस प्रस्ताव पर चर्चा की है। व्हाइट हाउस की ओर से कहा गया है कि इस मुद्दे पर विचार-विमर्श जारी है, लेकिन फिलहाल कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। प्रशासन का कहना है कि राष्ट्रपति जल्द ही इस पर अपनी स्थिति स्पष्ट करेंगे। वैश्विक व्यापार और तेल आपूर्ति पर असर होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक है, जहां से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल गुजरता है। इसके बंद होने से वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ सकता है। ऐसे में संयुक्त राष्ट्र की यह अपील अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
इस्लामाबाद पहुंचा ईरानी प्रतिनिधिमंडल ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच कूटनीतिक हल तलाशने की कोशिशें तेज हो गई हैं। ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi शुक्रवार को एक वरिष्ठ प्रतिनिधिमंडल के साथ इस्लामाबाद पहुंचे। हालांकि, तेहरान ने स्पष्ट कर दिया है कि इस बार अमेरिका के साथ कोई सीधी बातचीत नहीं होगी। अराघची अपने दौरे के दौरान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif, सेना प्रमुख Asim Munir और विदेश मंत्री Ishaq Dar से मुलाकात करेंगे। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmaeil Baqaei ने कहा कि पाकिस्तान ही तेहरान की चिंताओं और प्रस्तावों को वॉशिंगटन तक पहुंचाएगा। हॉर्मुज और परमाणु मुद्दे पर टिकी निगाहें दूसरी ओर, अमेरिका भी वार्ता को फिर से शुरू करने की तैयारी कर रहा है। अमेरिकी विशेष दूत Steve Witkoff और Jared Kushner के जल्द इस्लामाबाद पहुंचने की संभावना है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने कहा है कि ईरान अमेरिकी मांगों को ध्यान में रखते हुए एक नया प्रस्ताव तैयार कर रहा है। अमेरिका की प्रमुख शर्तों में ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर नियंत्रण और Strait of Hormuz में जहाजों की निर्बाध आवाजाही शामिल है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य में जारी तनाव ने वैश्विक तेल बाजारों और समुद्री व्यापार को प्रभावित किया है। ऐसे में पाकिस्तान की मध्यस्थता से दोनों देशों के बीच जमी बर्फ पिघलने की उम्मीद बढ़ गई है।
अमेरिका-ईरान तनाव के बीच बयानबाजी तेज अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर एक बार फिर सख्त बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि वह परमाणु हथियारों का इस्तेमाल करने के पक्ष में नहीं हैं, लेकिन साथ ही यह भी चेतावनी दी कि ईरान के पास शांति समझौते के लिए “बहुत कम समय बचा है”। यह बयान ऐसे समय आया है जब मध्य पूर्व में अमेरिका ने अपनी सैन्य मौजूदगी और बढ़ा दी है। ट्रंप का दावा: “पारंपरिक तरीके से ईरान को भारी नुकसान” व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ने बिना परमाणु हथियारों के ही ईरान को काफी नुकसान पहुंचाया है। उनके अनुसार, ईरान की सैन्य क्षमता पहले ही “काफी हद तक कमजोर” हो चुकी है और अब स्थिति और बिगड़ सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि परमाणु हथियारों का इस्तेमाल किसी भी देश के लिए पूरी तरह गलत है और इसे कभी भी अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। “टिक-टॉक का समय शुरू हो चुका है”: ट्रंप की चेतावनी ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लिखा कि ईरान के लिए “समय तेजी से खत्म हो रहा है”। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका की स्थिति मजबूत है और ईरान की सैन्य और नेतृत्व संरचना पहले से कमजोर हो चुकी है। उनके अनुसार, अमेरिका का दबाव लगातार बढ़ रहा है और ईरान के पास समझौता करने के अलावा ज्यादा विकल्प नहीं हैं। मध्य पूर्व में अमेरिकी नौसैनिक ताकत में इजाफा रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका ने क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ाते हुए तीसरा विमानवाहक पोत (aircraft carrier) भी तैनात कर दिया है। इससे क्षेत्र में अमेरिकी नौसेना की ताकत और बढ़ गई है। पहले से ही दो बड़े विमानवाहक पोत मध्य पूर्व और आसपास के क्षेत्रों में सक्रिय हैं, जिससे तनावपूर्ण स्थिति और गंभीर हो गई है। ईरान-हॉर्मुज स्ट्रेट विवाद से बढ़ी चिंता मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान और अमेरिका के बीच तनाव का बड़ा केंद्र स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज बना हुआ है, जो वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का अहम मार्ग है। स्थिति इतनी संवेदनशील हो गई है कि इस समुद्री मार्ग से होने वाली व्यापारिक गतिविधियों पर भी असर पड़ा है। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि इस क्षेत्र में सुरक्षा खतरे बढ़ गए हैं। सैन्य टकराव की आशंका, लेकिन कूटनीति अभी भी अधर में ईरान और अमेरिका के बीच संभावित शांति वार्ता की कोशिशें फिलहाल अनिश्चित हैं। दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संवाद कमजोर स्थिति में बताया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर बातचीत दोबारा शुरू नहीं होती, तो यह तनाव आगे चलकर बड़े सैन्य टकराव में बदल सकता है। युद्ध की नहीं, लेकिन दबाव की राजनीति तेज ट्रंप के बयान और अमेरिका की बढ़ती सैन्य गतिविधियों ने मध्य पूर्व की स्थिति को और जटिल बना दिया है। हालांकि उन्होंने परमाणु हथियारों के इस्तेमाल से इनकार किया है, लेकिन उनके बयानों से साफ है कि दबाव की रणनीति तेज हो चुकी है। अब दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या यह तनाव कूटनीति की ओर बढ़ेगा या फिर टकराव और गहरा होगा।
फांसी टलने का दावा, ट्रंप ने जताई ‘सराहना’ Donald Trump ने दावा किया है कि Iran में जिन 8 महिला प्रदर्शनकारियों को फांसी दी जानी थी, उनकी सजा रोक दी गई है। ट्रंप ने कहा कि यह फैसला उनके अनुरोध के बाद लिया गया और उन्होंने इसे “अच्छी खबर” बताते हुए ईरान के इस कदम की सराहना की। उन्होंने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि इन महिलाओं में से चार को रिहा किया जाएगा, जबकि बाकी को एक महीने की सजा दी जाएगी। ईरान का पलटवार: ‘पूरी तरह झूठा दावा’ ट्रंप के इस बयान पर ईरान ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। ईरानी न्यायपालिका से जुड़े मीडिया ने इस दावे को पूरी तरह गलत बताया और कहा कि ऐसी किसी फांसी की योजना ही नहीं थी। ईरान ने आरोप लगाया कि Donald Trump युद्ध के बीच “झूठी उपलब्धियां” गिनाने की कोशिश कर रहे हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भ्रम फैलाया जा रहा है। पहले की अपील और कूटनीतिक संकेत गौरतलब है कि एक दिन पहले ही ट्रंप ने इन महिलाओं को नुकसान न पहुंचाने की अपील की थी और इसे बातचीत की शुरुआत के लिए सकारात्मक कदम बताया था। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के बयान कूटनीतिक दबाव बनाने और वैश्विक संदेश देने की रणनीति का हिस्सा हो सकते हैं। सीजफायर के बावजूद तनाव कायम हाल ही में Donald Trump ने ईरान के साथ सीजफायर की अवधि बढ़ाने का ऐलान किया था, लेकिन साथ ही समुद्री नाकेबंदी जारी रखने की बात भी कही। वहीं, ईरान ने भी खाड़ी क्षेत्र में जहाजों को जब्त करने जैसी कार्रवाई जारी रखी है, जिससे दोनों देशों के बीच तनाव कम होने के बजाय और बढ़ता दिख रहा है। कौन हैं ये महिलाएं? हालांकि ट्रंप ने इन महिलाओं के नाम सार्वजनिक नहीं किए, लेकिन कुछ रिपोर्ट्स में गोलनाज नराघी, वीनस हुसैनीनेजाद और बीटा हेम्मती जैसे नाम सामने आए हैं। हालांकि इनकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
ईरान के जवाब का इंतजार, दौरा फिलहाल स्थगित अमेरिका के उपराष्ट्रपति JD Vance की पाकिस्तान यात्रा फिलहाल टाल दी गई है। यह दौरा ईरान के साथ न्यूक्लियर डील को लेकर अहम बातचीत के लिए प्रस्तावित था, लेकिन तेहरान की ओर से अमेरिकी प्रस्तावों पर कोई जवाब नहीं मिलने के कारण इसे रोक दिया गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, वेंस को मंगलवार सुबह इस्लामाबाद के लिए रवाना होना था, जहां बुधवार को वार्ता होनी थी। हालांकि, अब यह यात्रा अनिश्चितकाल के लिए टल गई है। सीजफायर की समयसीमा के बीच बढ़ा दबाव यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्धविराम समाप्त होने के करीब था। इसी बीच Donald Trump ने सीजफायर बढ़ाने का ऐलान कर दिया, ताकि बातचीत के लिए और समय मिल सके। अमेरिका का कहना है कि वह अभी भी कूटनीतिक समाधान चाहता है, लेकिन सैन्य विकल्पों को पूरी तरह खारिज नहीं किया गया है। क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी भी बरकरार है। ईरान ने ठुकराया दबाव, बातचीत पर सवाल ईरान की ओर से इस पूरे घटनाक्रम पर सख्त प्रतिक्रिया सामने आई है। वरिष्ठ नेताओं ने साफ कहा है कि “धमकी के साए में बातचीत संभव नहीं है।” ईरानी अधिकारियों ने सीजफायर बढ़ाने के फैसले को एक “रणनीतिक चाल” बताया और इसे समय खरीदने की कोशिश करार दिया। वहीं, सरकारी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने इस्लामाबाद में होने वाली संभावित वार्ता में हिस्सा नहीं लिया। आगे क्या? अनिश्चितता के बीच टिकी निगाहें फिलहाल अमेरिका यह संकेत मिलने का इंतजार कर रहा है कि ईरान के वार्ताकार समझौते के लिए पूरी तरह अधिकृत हैं या नहीं। अगर स्थिति स्पष्ट होती है, तो JD Vance की पाकिस्तान यात्रा दोबारा तय की जा सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस गतिरोध के चलते क्षेत्र में तनाव फिर बढ़ सकता है और कूटनीतिक समाधान की राह और कठिन हो सकती है।
मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच ईरान और अमेरिका के बीच शांति वार्ता के विफल होने के बाद हालात और संवेदनशील हो गए हैं। पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में हुई बातचीत बिना किसी समझौते के समाप्त हो गई, जिससे दोनों देशों के बीच जारी युद्धविराम पर भी खतरा मंडराने लगा है। युद्धविराम पर संकट, सैन्य गतिविधियां तेज अमेरिकी सेना ने ईरानी बंदरगाहों से आने-जाने वाले जहाजों की निगरानी और संभावित नाकेबंदी के संकेत दिए हैं। इसके जवाब में ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में कड़ी प्रतिक्रिया की चेतावनी दी है। बढ़ती सैन्य गतिविधियों के बीच किसी भी समय हालात बिगड़ने की आशंका जताई जा रही है। आम लोगों में डर और अनिश्चितता ईरान के शहर करज और राजधानी तेहरान में रहने वाले लोगों के बीच गहरी चिंता देखी जा रही है। एक स्थानीय युवक ने कहा कि उसे उम्मीद थी कि बातचीत से हल निकलेगा, लेकिन अब उसे लगता है कि युद्ध कभी भी दोबारा शुरू हो सकता है। वहीं, एक युवती ने उम्मीद जताई कि हालात जल्द सामान्य होंगे और बातचीत के जरिए समाधान निकलेगा। इंटरनेट बंदी से बढ़ी मुश्किलें ईरान में पिछले कई हफ्तों से इंटरनेट सेवाएं बाधित हैं, जिससे लोग बाहरी दुनिया से कट गए हैं। सरकार का कहना है कि यह कदम साइबर हमलों से बचाव के लिए उठाया गया है, लेकिन आम नागरिकों और व्यवसायों को इससे भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है। कंटेंट क्रिएटर और छोटे कारोबारी खासतौर पर प्रभावित हुए हैं। एक स्थानीय नागरिक ने कहा, “कोई भी इस संघर्ष में नहीं जीत रहा है, लेकिन आम लोगों की जिंदगी जरूर मुश्किल हो गई है।” आर्थिक संकट और भविष्य की चिंता युद्ध और प्रतिबंधों के कारण ईरान की अर्थव्यवस्था पहले से ही दबाव में है। लोगों का कहना है कि भले ही युद्ध खत्म हो जाए, लेकिन कमजोर आर्थिक स्थिति के चलते जीवन आसान नहीं होगा। कुछ नागरिकों का मानना है कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप घरेलू राजनीतिक कारणों से सख्त रुख अपनाए हुए हैं, जिससे समझौते की संभावना और कम हो गई है। शांति वार्ता के अगले दौर की कोई तारीख तय नहीं हुई है। ऐसे में ईरान के लोग अनिश्चितता, डर और उम्मीद के बीच जी रहे हैं। अगर जल्द कोई समाधान नहीं निकला, तो क्षेत्र में तनाव और बढ़ सकता है।
तेहरान: ईरान में इंटरनेट बंदी का सिलसिला लगातार जारी है। इंटरनेट मॉनिटरिंग संस्था NetBlocks के मुताबिक, देश में पिछले 47 दिनों से इंटरनेट लगभग पूरी तरह ठप है, जिससे करीब 9.3 करोड़ लोग दुनिया से कट गए हैं। 1104 घंटे का रिकॉर्ड, टूटा सूडान का आंकड़ा ईरान में यह इंटरनेट शटडाउन अब तक का सबसे लंबा माना जा रहा है। कुल अवधि: लगभग 47 दिन (1104 घंटे) प्रभावित आबादी: 93 मिलियन से अधिक पिछला रिकॉर्ड: सूडान (2019 में 37 दिन) इस तरह ईरान ने सूडान का पुराना रिकॉर्ड भी तोड़ दिया है। प्रदर्शन और हमलों के बाद सख्ती रिपोर्ट्स के अनुसार: जनवरी 2026 में देश में विरोध प्रदर्शन शुरू हुए इसके बाद सरकार ने इंटरनेट सेवाएं सीमित करनी शुरू की फरवरी में अमेरिका और इजरायल से जुड़े हमलों के बाद पाबंदियां और कड़ी कर दी गईं संचार व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित लगातार इंटरनेट बंद रहने से: लोगों की आपसी बातचीत लगभग ठप अंतरराष्ट्रीय प्लेटफॉर्म्स तक पहुंच बंद सूचना का गंभीर संकट हालांकि, देश के भीतर कुछ लोकल नेटवर्क सीमित रूप से काम कर रहे हैं, लेकिन वैश्विक कनेक्टिविटी लगभग खत्म हो चुकी है। डिजिटल सेंसरशिप का बड़ा उदाहरण इतने लंबे समय तक इंटरनेट बंद रहना सरकारी सेंसरशिप का एक बड़ा उदाहरण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम: आंतरिक हालात को नियंत्रित करने सूचना के प्रवाह को रोकने और विरोध प्रदर्शनों को दबाने के लिए उठाया गया शांति वार्ता पर टिकी नजर इस बीच अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बना हुआ है। 14 दिन का सीजफायर 22 अप्रैल को खत्म हो सकता है इस्लामाबाद में हुई पिछली वार्ता बेनतीजा रही नए दौर की बातचीत की संभावना जताई जा रही है डोनाल्ड ट्रंप ने भी संकेत दिए हैं कि दोनों देशों के बीच जल्द ही फिर से वार्ता हो सकती है। क्या आगे भी रहेगा ब्लैकआउट? ईरान में इंटरनेट बहाली को लेकर फिलहाल कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है। जिस तरह से आंतरिक स्थिति और अंतरराष्ट्रीय तनाव जारी है, उससे यह साफ है कि इंटरनेट प्रतिबंध अभी कुछ और समय तक जारी रह सकता है।
वॉशिंगटन: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने कड़ा रुख अपनाते हुए साफ कर दिया है कि ईरानी तेल ले जा रहे चीनी जहाजों को रोका जाएगा। यह कार्रवाई वैश्विक ऊर्जा सप्लाई के सबसे अहम रास्ते Strait of Hormuz पर लागू की जा रही है। 10,000 सैनिक और नेवल शिप्स तैनात अमेरिकी सेना ने नाकाबंदी को लागू करने के लिए: 10,000 से ज्यादा सैनिक करीब 12 नौसैनिक जहाज (Naval Ships) तैनात किए हैं। सेना के अनुसार, नाकाबंदी के पहले 24 घंटों में एक भी जहाज होर्मुज स्ट्रेट पार नहीं कर पाया। 6 व्यापारिक जहाजों को वापस लौटने का आदेश दिया गया हालांकि कुछ रिपोर्ट्स में 4 जहाजों के गुजरने का दावा भी किया गया हर देश के जहाजों पर लागू नियम अमेरिका की यह कार्रवाई: ईरान के बंदरगाहों में जाने या निकलने वाले सभी जहाजों पर लागू जहाज किसी भी देश का हो, नियम समान रहेगा बातचीत की कोशिश भी जारी तनाव के बीच कूटनीतिक प्रयास भी जारी हैं: वॉशिंगटन में लेबनान-इजराइल सीजफायर पर पहले दौर की बातचीत हुई इसे सकारात्मक बताया गया, अगली बैठक की तैयारी जारी 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स 1. छूट खत्म होने की चेतावनी अमेरिकी ट्रेजरी ने कहा कि ईरानी तेल बिक्री पर दी गई अस्थायी छूट जल्द खत्म होगी। 2. यूरोप का अलग मिशन यूरोपीय देश होर्मुज में जहाजों की आवाजाही बहाल करने के लिए नया अंतरराष्ट्रीय मिशन बना रहे हैं–खास बात, इसमें अमेरिका शामिल नहीं है। 3. कनाडा की मदद Canada ने Lebanon के लिए 40 मिलियन डॉलर की सहायता का ऐलान किया। 4. हिजबुल्लाह के हमले Hezbollah ने दावा किया कि उसने 24 घंटे में 34 हमले किए, जिनमें Israel के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। 5. ट्रंप का बयान अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने कहा कि ईरान के साथ बातचीत अगले 2 दिनों में फिर शुरू हो सकती है। होर्मुज स्ट्रेट पर अमेरिकी नाकाबंदी ने वैश्विक तेल सप्लाई और समुद्री व्यापार को सीधे प्रभावित किया है। जहां एक ओर सैन्य दबाव बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर कूटनीतिक बातचीत की कोशिशें भी जारी हैं–आने वाले दिनों में हालात किस दिशा में जाएंगे, इस पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है।
मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच Strait of Hormuz एक बार फिर वैश्विक चिंता का केंद्र बन गया है। अमेरिका द्वारा ईरान से जुड़े बंदरगाहों पर नाकेबंदी की घोषणा के बाद दुनिया भर के तेल बाजार में अनिश्चितता गहरा गई है। यह जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम ऊर्जा मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल और गैस का लगभग 20% परिवहन होता है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती बयानबाजी और सैन्य चेतावनियों ने इस क्षेत्र को बेहद संवेदनशील बना दिया है। United States Central Command ने स्पष्ट किया है कि यह नाकेबंदी ईरानी बंदरगाहों में आने-जाने वाले जहाजों पर लागू होगी, हालांकि “न्यूट्रल ट्रांजिट” को रोका नहीं जाएगा। तेल कीमतों में उतार-चढ़ाव सोमवार को कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला, जबकि मंगलवार को हल्की गिरावट दर्ज की गई। भारतीय समयानुसार सुबह करीब 8:30 बजे ब्रेंट क्रूड 1.24% गिरकर 98.13 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह नाकेबंदी पूरी तरह लागू होती है, तो तेल कीमतें 100 डॉलर के पार स्थिर हो सकती हैं, जिससे वैश्विक महंगाई पर दबाव बढ़ेगा। ईरान की कड़ी चेतावनी अमेरिकी कदम के जवाब में Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) ने सख्त रुख अपनाते हुए चेतावनी दी है कि जलडमरूमध्य के पास आने वाले किसी भी विदेशी सैन्य जहाज को युद्धविराम का उल्लंघन माना जाएगा। ईरान ने साफ किया है कि जरूरत पड़ने पर वह निर्णायक सैन्य कार्रवाई से पीछे नहीं हटेगा। जहाजों की आवाजाही में भारी गिरावट तनाव के कारण होर्मुज मार्ग पर शिपिंग ट्रैफिक में भारी गिरावट दर्ज की गई है: सामान्य समय की तुलना में जहाजों की आवाजाही लगभग 90% तक कम खाड़ी क्षेत्र में 187 टैंकरों में 17.2 करोड़ बैरल तेल मौजूद युद्धविराम के बाद केवल 58 जहाज ही इस मार्ग से गुजर पाए टैंकर कंपनियां जोखिम से बचने के लिए वैकल्पिक मार्ग तलाश रही हैं, जिससे सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ रहा है। तेल सप्लाई पर संकट के संकेत ईरान के तेल निर्यात पर असर पड़ना तय माना जा रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार: मार्च में ईरान ने 18.4 लाख बैरल प्रतिदिन निर्यात किया अप्रैल में यह घटकर 17.1 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया साथ ही, लगभग 18 करोड़ बैरल तेल पहले से समुद्र में स्टोरेज के रूप में मौजूद है, जो आपूर्ति संकट को कुछ समय तक संभाल सकता है, लेकिन स्थिति लंबी खिंचने पर जोखिम बढ़ जाएगा। भारत पर क्या होगा असर? भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए आयात पर काफी निर्भर है। ऐसे में होर्मुज में किसी भी तरह की बाधा का सीधा असर देश पर पड़ सकता है: कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से पेट्रोल-डीजल महंगे हो सकते हैं महंगाई दर में बढ़ोतरी की आशंका चालू खाता घाटा (Current Account Deficit) बढ़ सकता है रुपया कमजोर पड़ सकता है हालांकि हाल ही में अमेरिकी प्रतिबंधों में कुछ ढील के बाद भारत को ईरानी तेल आयात का मौका मिला था, लेकिन मौजूदा संकट इस सप्लाई को फिर से प्रभावित कर सकता है। एशिया पर सबसे ज्यादा दबाव होर्मुज से गुजरने वाला अधिकांश तेल एशियाई देशों–खासकर चीन और भारत–को जाता है। ऐसे में यह संकट एशिया की अर्थव्यवस्थाओं पर सबसे ज्यादा असर डाल सकता है।
मिडिल ईस्ट अपडेट: ईरान और अमेरिका के बीच दो हफ्तों के सीजफायर के बावजूद होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में तनाव बना हुआ है। ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने इस अहम समुद्री मार्ग से गुजरने वाले जहाजों की संख्या सीमित कर दी है। हर दिन सिर्फ 15 जहाजों को अनुमति हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान अब रोजाना केवल 15 जहाजों को ही होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने की इजाजत देगा। ईरान के उप विदेश मंत्री सईद खतीबजादा ने साफ किया है कि: हर जहाज को ईरानी अथॉरिटी से मंजूरी लेनी होगी सुरक्षित मार्ग के लिए सेना के साथ तालमेल जरूरी होगा जमीनी हकीकत: लगभग ठप पड़ा ट्रैफिक रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले 24 घंटों में: सिर्फ 1 ऑयल टैंकर 5 ड्राई बल्क कैरियर और 2 ईरानी टैंकर ही इस रास्ते से गुजर पाए हैं। अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी (ADNOC) के प्रमुख सुल्तान अल जाबेर ने कहा कि इस तरह की शर्तों के साथ दी गई अनुमति को “फ्री पैसेज” नहीं कहा जा सकता, यानी रास्ता लगभग बंद जैसा ही है। इस्लामाबाद में होगी अहम वार्ता सीजफायर के बाद अब ईरान और अमेरिका के बीच इस्लामाबाद में शांति वार्ता होने जा रही है। ईरान ने 10 शर्तें रखी हैं (जैसे प्रतिबंधों में ढील, होर्मुज पर नियंत्रण) अमेरिका ने 15 पॉइंट प्लान पेश किया है दोनों के बीच मतभेद अभी भी बने हुए हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान भविष्य में जहाजों से उनके प्रकार और कार्गो के आधार पर फीस वसूलने की योजना बना रहा है। ट्रंप की चेतावनी, सेना तैनात अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान होर्मुज को खोलने पर सहमत हो गया है। हालांकि उन्होंने चेतावनी दी कि: जब तक ठोस समझौता नहीं होता, अमेरिकी सेना क्षेत्र में तैनात रहेगी वहीं ईरान की सुप्रीम काउंसिल ने इस दावे को गलत बताते हुए कहा कि अमेरिका ने होर्मुज पर ईरान के नियंत्रण को स्वीकार किया है। तेल बाजार पर असर इस पूरे तनाव का असर ग्लोबल मार्केट पर भी दिख रहा है। कच्चे तेल की कीमतें 3.6% बढ़कर 98.16 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई हैं सीजफायर पर खतरा ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर सीजफायर का उल्लंघन हुआ तो कड़ा जवाब दिया जाएगा। विवाद की एक बड़ी वजह यह है कि: ईरान चाहता है कि लेबनान में इजरायल के हमले भी रोके जाएं लेकिन इजरायल ने साफ कर दिया है कि वह हिजबुल्लाह पर कार्रवाई जारी रखेगा अमेरिका भी इजरायल के इस रुख का समर्थन कर रहा है, जिससे शांति समझौता कमजोर पड़ता दिख रहा है।
US-Iran Ceasefire: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले तेल टैंकरों पर कथित शुल्क वसूली को लेकर ईरान पर कड़ा रुख अपनाया है। ट्रंप ने साफ कहा है कि यदि ईरान इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से गुजरने वाले जहाजों से फीस वसूल रहा है, तो उसे तुरंत बंद करना होगा। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर पोस्ट करते हुए कहा कि ऐसी रिपोर्ट्स सामने आ रही हैं, जिनमें ईरान द्वारा टैंकरों से शुल्क लेने की बात कही गई है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यह कदम पूरी तरह अस्वीकार्य है और इसे तुरंत रोका जाना चाहिए। उन्होंने यह भी दोहराया कि होर्मुज स्ट्रेट को खुला रखना अमेरिका-ईरान के बीच हुए दो हफ्तों के युद्धविराम समझौते की अहम शर्त है। ट्रंप के मुताबिक, इस मार्ग से तेल की आपूर्ति हर हाल में जारी रहेगी - चाहे ईरान की मदद से या उसके बिना। ‘ईरान कर रहा बेहद खराब काम’ ट्रंप ने ईरान के व्यवहार पर सवाल उठाते हुए कहा कि वह समझौते के अनुरूप काम नहीं कर रहा है। उन्होंने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट से तेल की आवाजाही को संभालने में ईरान विफल रहा है और उसका रवैया “बेहद खराब” है। उन्होंने इस स्थिति को “शर्मनाक” बताते हुए कहा कि अगर ईरान समझौते का पालन नहीं करता है, तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। क्या टैंकरों से वसूला जा रहा टोल? दरअसल, कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि ईरान होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों से उनकी श्रेणी और सामान के आधार पर शुल्क लेने की योजना बना रहा है। इसी मुद्दे पर ट्रंप ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है और इसे तुरंत बंद करने की मांग की है। अमेरिकी सेना रहेगी तैनात ट्रंप ने पहले ही चेतावनी दी थी कि जब तक स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो जाती, तब तक अमेरिकी सेना क्षेत्र में तैनात रहेगी। उन्होंने कहा कि ईरान को समझौता तोड़ने की कोशिश नहीं करनी चाहिए और स्ट्रेट को पूरी तरह सुरक्षित और खुला रखना होगा। इस्लामाबाद में शांति वार्ता की तैयारी इसी बीच, पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता की तैयारी चल रही है। दोनों देशों ने फिलहाल दो हफ्तों के अस्थायी सीजफायर पर सहमति जताई है, लेकिन शर्तों को लेकर मतभेद अभी भी बने हुए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने प्रतिबंधों में राहत समेत 10 मांगें रखी हैं, जबकि अमेरिका ने 15 बिंदुओं वाला प्रस्ताव दिया है। होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण और संभावित शुल्क वसूली इस वार्ता का सबसे बड़ा विवादित मुद्दा बना हुआ है।
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। खबर है कि अमेरिका अपने गिराए गए फाइटर जेट के पायलटों की तलाश के लिए C-130 हरक्यूलिस विमान का इस्तेमाल कर रहा है। लो-फ्लाइट में दिखा हरक्यूलिस विमान सोशल मीडिया पर सामने आए एक वीडियो में: C-130 हरक्यूलिस विमान ईरान के ऊपर बेहद कम ऊंचाई पर उड़ता नजर आ रहा है विमान फ्लेयर छोड़ते हुए दिखाई दे रहा है फ्लेयर का इस्तेमाल आमतौर पर मिसाइल से बचाव के लिए किया जाता है। ये गर्म चिंगारियां मिसाइल को भ्रमित कर देती हैं, जिससे वह असली विमान के बजाय फ्लेयर की ओर मुड़ जाती है। एक पायलट को बचाने का दावा इजराइल के एक अधिकारी ने दावा किया है कि एक अमेरिकी पायलट को सुरक्षित बचा लिया गया है वहीं, दूसरे पायलट की तलाश अभी भी जारी है हालांकि, इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है किस जेट को मार गिराने का दावा? ईरान ने दावा किया था कि उसने अमेरिकी F-35 फाइटर जेट को गिराया है कुछ रिपोर्ट्स में इसे F-15E भी बताया जा रहा है इस पर भी अभी तक स्पष्टता नहीं है पायलट को पकड़ने पर इनाम ईरान ने अमेरिकी पायलट को पकड़ने पर 10 बिलियन ईरानी तोमान (करीब 55 लाख रुपये) का इनाम घोषित किया है सरकारी मीडिया के जरिए नागरिकों से पायलट को पकड़कर अधिकारियों को सौंपने की अपील की गई है बढ़ता तनाव यह पूरा घटनाक्रम अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते टकराव को और गंभीर बना सकता है। रेस्क्यू ऑपरेशन पायलट की तलाश इनाम की घोषणा इन सबने हालात को और संवेदनशील बना दिया है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।