Venezuela Oil

Venezuelan Acting President Delcy Rodríguez meets PM Narendra Modi in New Delhi for bilateral talks.
नई दिल्ली: वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज भारत दौरे पर, पीएम मोदी से अहम वार्ता

  वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति Delcy Rodríguez 3 से 7 जून तक भारत की आधिकारिक यात्रा पर हैं। गुरुवार को नई दिल्ली में उनकी प्रधानमंत्री Narendra Modi के साथ द्विपक्षीय बैठक हुई, जिसमें दोनों देशों के संबंधों को नई दिशा देने पर चर्चा हुई। ऊर्जा सुरक्षा और व्यापारिक सहयोग पर केंद्रित रही मोदी-रोड्रिगेज बैठक बैठक में ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार, निवेश, स्वास्थ्य सेवाएं, दवा उद्योग, परिवहन और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर विचार-विमर्श हुआ। दोनों देशों ने आर्थिक साझेदारी को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताई। भारत के लिए राहत की खबर, तेल आपूर्ति में बढ़ सकती है वेनेजुएला की भूमिका दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडार वाले देशों में शामिल वेनेजुएला भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण साझेदार बनता जा रहा है। खाड़ी क्षेत्र में जारी अस्थिरता के बीच नई दिल्ली तेल आयात के स्रोतों में विविधता लाने की रणनीति पर काम कर रही है। नई दिल्ली-कराकास संबंधों को मिलेगा नया बल, निवेश के नए अवसरों पर चर्चा दोनों पक्षों ने व्यापार और निवेश बढ़ाने के साथ-साथ नए आर्थिक अवसरों की पहचान पर भी जोर दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि यह दौरा द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को नई गति दे सकता है। अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद बदला समीकरण, फिर बढ़ा भारत-वेनेजुएला तेल कारोबार भारत 2019 तक वेनेजुएला का प्रमुख तेल खरीदार था, लेकिन अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण आयात में गिरावट आई। हालिया घटनाक्रम के बाद दोनों देशों के बीच तेल व्यापार फिर तेजी से बढ़ रहा है और भारत वेनेजुएला के प्रमुख खरीदारों में शामिल हो गया है। ईरान संकट के बीच भारत को वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत की तलाश पश्चिम एशिया में तनाव और तेल आपूर्ति संबंधी अनिश्चितताओं के बीच वेनेजुएला भारत के लिए एक महत्वपूर्ण विकल्प बनकर उभरा है। भारत अपनी ऊर्जा निर्भरता को केवल खाड़ी देशों तक सीमित नहीं रखना चाहता। भारतीय रिफाइनरियों के लिए उपयुक्त माना जाता है वेनेजुएला का भारी कच्चा तेल ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार भारत की कई बड़ी रिफाइनरियां वेनेजुएला के भारी कच्चे तेल को संसाधित करने में सक्षम हैं। इससे भारत घरेलू जरूरतें पूरी करने के साथ-साथ पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात में भी लाभ उठा सकता है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर से भी हुई विस्तृत बातचीत प्रधानमंत्री से मुलाकात से पहले रोड्रिगेज ने S. Jaishankar के साथ भी बैठक की। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों और सहयोग के नए क्षेत्रों पर चर्चा की। भारत से पुराना जुड़ाव, छठी बार आधिकारिक यात्रा पर आईं रोड्रिगेज डेल्सी रोड्रिगेज इससे पहले विदेश मंत्री, उपराष्ट्रपति और तेल मंत्री के रूप में कई बार भारत का दौरा कर चुकी हैं। जून 2026 की यह उनकी भारत यात्रा कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में पहली आधिकारिक यात्रा है। नई दिल्ली और कराकास के बीच रणनीतिक साझेदारी को मिल सकती है नई रफ्तार उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ हुई इस यात्रा को दोनों देशों के बीच ऊर्जा, व्यापार और निवेश सहयोग को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आने वाले समय में भारत-वेनेजुएला संबंधों के और गहरे होने की संभावना जताई जा रही है।  

Deepshikha जून 4, 2026 0
Venezuela acting President Delcy Rodríguez with oil facilities amid India energy supply discussions
पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर लग सकती है लगाम, भारत दौरे पर आ सकती हैं वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति

होर्मुज जलडमरूमध्य संकट और वैश्विक तेल बाजार में बढ़ती अनिश्चितता के बीच भारत के लिए राहत की उम्मीद दिखाई दे रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति Delcy Rodríguez जल्द भारत दौरे पर आ सकती हैं। इस संभावित दौरे को भारत की ऊर्जा सुरक्षा और सस्ते कच्चे तेल की सप्लाई से जोड़कर देखा जा रहा है। हाल के दिनों में भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हुई है। बीते 10 दिनों में चार बार ईंधन महंगा हो चुका है, जिससे आम लोगों और उद्योगों पर दबाव बढ़ा है। अमेरिका ने दिया सस्ते तेल का संकेत अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने हाल ही में कहा था कि अमेरिका भारत की जरूरत के अनुसार तेल और गैस उपलब्ध कराने को तैयार है। इसी बीच वेनेजुएला से तेल सप्लाई बढ़ाने के संकेत भी सामने आए हैं। उपयोगकर्ता द्वारा दिए गए दावे - जैसे अमेरिका द्वारा Nicolás Maduro की गिरफ्तारी - की कोई आधिकारिक पुष्टि सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है। मौजूदा अंतरराष्ट्रीय रिकॉर्ड्स में मादुरो अभी भी वेनेजुएला के राष्ट्रपति माने जाते हैं। इसलिए इस दावे को सत्यापित जानकारी के तौर पर नहीं देखा जा सकता। भारत के लिए क्यों अहम है वेनेजुएला का तेल? भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऊर्जा उपभोक्ता देश है और अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। होर्मुज संकट के बाद पश्चिम एशिया से सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ी है। ऐसे में वेनेजुएला जैसे वैकल्पिक स्रोत भारत के लिए महत्वपूर्ण हो सकते हैं। वेनेजुएला के पास दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडारों में से एक मौजूद है। यदि भारत को वहां से रियायती दरों पर कच्चा तेल मिलता है, तो घरेलू बाजार में पेट्रोल, डीजल और LPG की कीमतों पर दबाव कम हो सकता है। रूस के तेल को लेकर अमेरिका की नाराजगी रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद भारत द्वारा रूसी तेल खरीद बढ़ाने पर अमेरिका ने पहले चिंता जताई थी। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने पहले भारत की रूस से ऊर्जा खरीद पर तीखी टिप्पणी भी की थी। अब अमेरिका भारत को वैकल्पिक सप्लाई चैन देने की कोशिश करता दिख रहा है, जिसमें वेनेजुएला का तेल अहम भूमिका निभा सकता है। एस जयशंकर ने क्या कहा? भारत के विदेश मंत्री S. Jaishankar ने ऊर्जा सुरक्षा पर कहा कि भारत के लिए कई भरोसेमंद ऊर्जा स्रोत होना जरूरी है। उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक हालात में भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए अलग-अलग स्रोतों पर निर्भरता बढ़ा रहा है। जयशंकर ने यह भी कहा कि ऊर्जा बाजार को बाधित नहीं किया जाना चाहिए और भारत अपनी राष्ट्रीय जरूरतों के अनुसार फैसले लेगा। क्या सस्ता हो सकता है पेट्रोल-डीजल? विशेषज्ञों के अनुसार, यदि भारत को वेनेजुएला या अमेरिका से स्थिर और रियायती तेल सप्लाई मिलती है, तो तेल कंपनियों पर आयात लागत का दबाव कम हो सकता है। घरेलू ईंधन कीमतें केवल कच्चे तेल पर निर्भर नहीं करतीं। इसमें टैक्स, रिफाइनिंग लागत, डॉलर-रुपया विनिमय दर और अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति भी अहम भूमिका निभाती है। इसलिए फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि पेट्रोल-डीजल तुरंत सस्ता हो जाएगा, लेकिन वैकल्पिक तेल स्रोत भारत के लिए राहत जरूर दे सकते हैं।  

surbhi मई 25, 2026 0
US Secretary Marco Rubio speaks on India-US energy partnership amid rising global oil tensions
‘भारत हमारा बेहतरीन दोस्त’, मार्को रूबियो बोले- जितना तेल चाहिए, अमेरिका देने को तैयार

Marco Rubio ने भारत को अमेरिका का “बेहतरीन साझीदार” बताते हुए बड़ा बयान दिया है। अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि अमेरिका भारत को उसकी जरूरत के मुताबिक जितना ईंधन चाहिए, उतना बेचने के लिए तैयार है। रूबियो का यह बयान ऐसे समय आया है जब मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और तेल की कीमतों में उछाल के कारण भारत समेत कई देशों की ऊर्जा सुरक्षा चिंता का विषय बनी हुई है। भारत दौरे को बताया बेहद अहम मार्को रूबियो 23 से 26 मई तक भारत दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वे Kolkata, Agra, Jaipur और New Delhi का दौरा करेंगे। उन्होंने कहा, “भारत हमारे सबसे बेहतरीन सहयोगियों और साझीदारों में से एक है। हम उनके साथ मिलकर बहुत अच्छा काम कर रहे हैं। यह यात्रा बेहद महत्वपूर्ण है।” रूबियो ने यह भी कहा कि इस दौरे के दौरान उन्हें क्वाड देशों के प्रतिनिधियों से मिलने का मौका मिलेगा, जो रणनीतिक रूप से काफी अहम है। क्वाड बैठक पर भी फोकस अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि भारत यात्रा के दौरान कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होगी। उन्होंने बताया कि इस साल के अंत में क्वाड देशों की एक और बड़ी बैठक आयोजित की जाएगी। Quadrilateral Security Dialogue यानी क्वाड में भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं। यह समूह इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सुरक्षा और रणनीतिक सहयोग को लेकर अहम माना जाता है। वेनेजुएला के तेल पर भी नजर रूबियो ने संकेत दिए कि अमेरिका भारत के साथ ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाना चाहता है। उन्होंने कहा कि Venezuela के तेल को लेकर भी कई अवसर मौजूद हैं। उन्होंने जानकारी दी कि वेनेजुएला की अंतरिम राष्ट्रपति Delcy Rodriguez अगले सप्ताह भारत यात्रा पर आ सकती हैं, जहां तेल व्यापार और ऊर्जा सहयोग पर चर्चा हो सकती है। यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिकी रिफाइनरियों में वेनेजुएला के भारी कच्चे तेल की आपूर्ति बढ़ी है। होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान को चेतावनी रूबियो ने Iran को भी कड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि अमेरिका होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण या वहां से गुजरने वाले जहाजों पर किसी तरह का शुल्क लगाने की कोशिश बर्दाश्त नहीं करेगा। Strait of Hormuz दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है, जहां से बड़ी मात्रा में तेल और गैस की सप्लाई होती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ओमान के साथ मिलकर होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर स्थायी टोल व्यवस्था को लेकर चर्चा कर रहा है। अमेरिका ने इसे वैश्विक व्यापार और समुद्री स्वतंत्रता के लिए खतरा बताया है। भारत पर बढ़ते तेल संकट का असर भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयातित तेल और गैस से पूरा करता है। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और तेल कीमतों में उछाल का असर अब भारतीय बाजार पर भी दिखाई देने लगा है। हाल के दिनों में पेट्रोल, डीजल और एलएनजी की कीमतों में तेजी देखी गई है। बढ़ते वित्तीय दबाव के बीच भारत की तेल विपणन कंपनियों ने चार दिनों के भीतर दो बार ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी की। पहले 3 रुपये और बाद में 90 पैसे प्रति लीटर की वृद्धि की गई, जिससे आम लोगों और परिवहन क्षेत्र पर अतिरिक्त बोझ बढ़ा है। भारत-अमेरिका ऊर्जा साझेदारी हो सकती है मजबूत विशेषज्ञों का मानना है कि मार्को रूबियो का बयान भारत-अमेरिका ऊर्जा सहयोग को नई दिशा दे सकता है। अगर अमेरिका भारत को बड़े पैमाने पर तेल और गैस सप्लाई बढ़ाता है, तो इससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत हो सकती है और मध्य पूर्व पर निर्भरता कुछ हद तक कम हो सकती है।  

surbhi मई 22, 2026 0
Massive blackout in Havana as Cuba faces severe diesel and fuel oil shortage crisis
ईंधन संकट से जूझ रहा क्यूबा, डीजल और फ्यूल ऑयल पूरी तरह खत्म; राजधानी में 22 घंटे तक ब्लैकआउट

ऊर्जा मंत्री ने कहा- देश की स्थिति बेहद गंभीर Cuba में ऊर्जा संकट अब चरम पर पहुंच गया है। देश के ऊर्जा मंत्री Vicente de la O Levy ने कहा है कि क्यूबा में डीजल और फ्यूल ऑयल पूरी तरह खत्म हो चुका है। उन्होंने सरकारी मीडिया से बातचीत में बताया कि देश का पावर ग्रिड “क्रिटिकल स्थिति” में पहुंच गया है और ईंधन का कोई रिजर्व नहीं बचा है। हवाना में 20 से 22 घंटे तक बिजली कटौती राजधानी Havana में हालात सबसे ज्यादा खराब बताए जा रहे हैं। कई इलाकों में रोजाना 20 से 22 घंटे तक बिजली गुल रहने की खबर है। लगातार हो रही बिजली कटौती के खिलाफ बुधवार को कई जगहों पर लोगों ने प्रदर्शन भी किया। प्रदर्शनकारियों ने सड़कों पर उतरकर बिजली बहाल करने की मांग की। अस्पताल, स्कूल और पर्यटन व्यवस्था प्रभावित ईंधन संकट का असर अब रोजमर्रा की जिंदगी पर साफ दिखाई देने लगा है। अस्पताल सामान्य तरीके से काम नहीं कर पा रहे हैं, जबकि कई स्कूल और सरकारी दफ्तर बंद करने पड़े हैं। पर्यटन उद्योग, जो क्यूबा की अर्थव्यवस्था का बड़ा आधार माना जाता है, वह भी इस संकट से बुरी तरह प्रभावित हुआ है। अमेरिका के प्रतिबंधों से बढ़ा संकट रिपोर्ट के मुताबिक, क्यूबा आमतौर पर Venezuela और Mexico से तेल आयात करता था। लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump द्वारा ईंधन सप्लाई करने वाले देशों पर टैरिफ की चेतावनी दिए जाने के बाद तेल आपूर्ति लगभग रुक गई। अमेरिका ने हाल के दिनों में क्यूबा के अधिकारियों पर नए प्रतिबंध भी लगाए हैं। वहीं अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने क्यूबा को 100 मिलियन डॉलर की मानवीय सहायता की पेशकश की, जिसे क्यूबा सरकार ने खारिज कर दिया। सौर ऊर्जा पर बढ़ती निर्भरता ऊर्जा मंत्री ने बताया कि क्यूबा फिलहाल घरेलू कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस और रिन्यूएबल एनर्जी के सहारे बिजली व्यवस्था चलाने की कोशिश कर रहा है। पिछले दो वर्षों में देश ने 1300 मेगावॉट सोलर पावर क्षमता स्थापित की है, लेकिन ग्रिड अस्थिरता के कारण उसका पूरा फायदा नहीं मिल पा रहा है।  

surbhi मई 14, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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anjali kumari जून 24, 2026 0