Weight Loss Tips

Assortment of fiber-rich foods including fruits, vegetables, legumes, seeds and whole grains
फाइबर से भरपूर 13 सुपरफूड्स: बेहतर पाचन, वजन नियंत्रण और स्वस्थ आंतों के लिए डाइट में करें शामिल

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग प्रोटीन पर तो खूब ध्यान देते हैं, लेकिन फाइबर को अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार अधिकांश लोग रोजाना जितना फाइबर लेना चाहिए, उससे काफी कम मात्रा में इसका सेवन करते हैं। फाइबर न सिर्फ पाचन तंत्र को स्वस्थ रखता है, बल्कि दिल की बीमारी, टाइप-2 डायबिटीज, मोटापा और कोलोरेक्टल कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के खतरे को भी कम करने में मदद करता है। फाइबर आंतों में मौजूद अच्छे बैक्टीरिया को पोषण देता है, जिससे शरीर में सूजन कम होती है और संपूर्ण स्वास्थ्य बेहतर बना रहता है। फाइबर क्यों है जरूरी? पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है कब्ज की समस्या कम करता है ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने में मदद करता है लंबे समय तक पेट भरा रखता है वजन नियंत्रण में सहायक होता है हृदय स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है आंतों के अच्छे बैक्टीरिया को बढ़ावा देता है विशेषज्ञों के मुताबिक एक वयस्क व्यक्ति को प्रतिदिन लगभग 30 ग्राम फाइबर लेना चाहिए। फाइबर से भरपूर 13 बेहतरीन खाद्य पदार्थ 1. हरी मटर (Green Peas) उबली हुई एक कप मटर में लगभग 9 ग्राम फाइबर और 8.5 ग्राम प्रोटीन होता है। यह शाकाहारियों के लिए शानदार विकल्प है। 2. नाशपाती (Pear) एक मध्यम आकार की नाशपाती में 6 ग्राम से अधिक फाइबर होता है। यह पाचन को बेहतर बनाने और कब्ज से राहत देने में मदद कर सकती है। 3. सेब (Apple) सेब को छिलके सहित खाने से अधिक फाइबर मिलता है। इसमें विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट भी भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। 4. मसूर दाल (Lentils) एक कप पकी हुई मसूर दाल में लगभग 15.5 ग्राम फाइबर और 18 ग्राम प्रोटीन होता है। 5. प्रीबायोटिक फाइबर वाले खाद्य पदार्थ लहसुन, प्याज, लीक, शतावरी (Asparagus), आर्टिचोक और बीन्स जैसे खाद्य पदार्थ आंतों के अच्छे बैक्टीरिया को बढ़ाने में मदद करते हैं। 6. राई ब्रेड (Pumpernickel Rye Bread) इसकी एक स्लाइस में लगभग 6 ग्राम फाइबर होता है, जो पेट को लंबे समय तक भरा रखने में मदद करता है। 7. ब्लैक बीन्स फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट का बेहतरीन स्रोत। यह आंतों के माइक्रोबायोम को मजबूत बनाने में मदद करता है। 8. रास्पबेरी (Raspberries) फाइबर, विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर यह फल पाचन और इम्युनिटी दोनों के लिए लाभकारी है। 9. साबुत अनाज (Whole Grains) क्विनोआ, जौ, बाजरा, बकव्हीट और स्पेल्ट जैसे साबुत अनाज फाइबर का उत्कृष्ट स्रोत हैं। 10. एवोकाडो (Avocado) स्वस्थ वसा और फाइबर से भरपूर एवोकाडो लंबे समय तक पेट भरा रखने और मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाने में मदद करता है। 11. चिया सीड्स (Chia Seeds) 100 ग्राम चिया सीड्स में लगभग 34 ग्राम फाइबर पाया जाता है। यह वजन नियंत्रण और पाचन दोनों के लिए फायदेमंद है। 12. क्रूसिफेरस सब्जियां ब्रोकली, फूलगोभी, पत्ता गोभी, केल और ब्रसेल्स स्प्राउट्स जैसी सब्जियां घुलनशील और अघुलनशील दोनों प्रकार के फाइबर से भरपूर होती हैं। 13. पॉपकॉर्न बिना ज्यादा तेल के बनाया गया पॉपकॉर्न एक हेल्दी होल ग्रेन स्नैक है और फाइबर का अच्छा स्रोत माना जाता है। क्या फाइबर सप्लीमेंट लेना चाहिए? अगर आपकी डाइट में पर्याप्त फल, सब्जियां, साबुत अनाज और दालें शामिल नहीं हैं, तो डॉक्टर या न्यूट्रिशनिस्ट की सलाह पर फाइबर सप्लीमेंट लिया जा सकता है। हालांकि प्राकृतिक स्रोतों से मिलने वाला फाइबर हमेशा बेहतर माना जाता है।  

surbhi जून 5, 2026 0
Belly Fat Loss
पेट की जिद्दी चर्बी से परेशान? सुबह की ये हेल्दी ड्रिंक्स तेजी से घटा सकती हैं वजन

नई दिल्ली, एजेंसियां। आजकल बढ़ता वजन और पेट की जिद्दी चर्बी लोगों के लिए बड़ी समस्या बनती जा रही है। खराब लाइफस्टाइल, जंक फूड, कम शारीरिक गतिविधि और तनाव के कारण मोटापे के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर दिन की शुरुआत कुछ हेल्दी ड्रिंक्स के साथ की जाए तो वजन कम करने में काफी मदद मिल सकती है। सही डाइट और नियमित व्यायाम के साथ इन ड्रिंक्स को अपनाने से एक महीने में 4 से 5 किलो तक वजन कम किया जा सकता है।   गुनगुना नींबू पानी है सबसे आसान उपाय वजन घटाने के लिए सुबह खाली पेट गुनगुना नींबू पानी पीना सबसे लोकप्रिय घरेलू उपाय माना जाता है। नींबू में विटामिन-सी और एंटीऑक्सिडेंट्स भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, जो शरीर को डिटॉक्स करने में मदद करते हैं। वहीं, गुनगुना पानी पाचन तंत्र को बेहतर बनाता है और शरीर को हाइड्रेट रखता है। विशेषज्ञों का कहना है कि सुबह नींबू पानी पीने से मेटाबॉलिज्म तेज होता है, जिससे कैलोरी तेजी से बर्न होती है और पेट की चर्बी कम करने में मदद मिलती है।   ग्रीन टी भी फैट बर्निंग में कारगर ग्रीन टी को वजन घटाने के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है। इसमें मौजूद कैटेचिन और हल्की मात्रा में कैफीन फैट बर्निंग प्रोसेस को तेज करने का काम करते हैं। नियमित रूप से ग्रीन टी पीने से पेट की चर्बी कम हो सकती है और शरीर अधिक एक्टिव महसूस करता है। सुबह नाश्ते के बाद या वर्कआउट से पहले ग्रीन टी का सेवन करना ज्यादा फायदेमंद माना जाता है।   चिया सीड्स ड्रिंक से लंबे समय तक भरा रहता है पेट चिया सीड्स आजकल हेल्दी डाइट का अहम हिस्सा बन चुके हैं। इनमें फाइबर, प्रोटीन और ओमेगा-3 फैटी एसिड भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। यह पेट को लंबे समय तक भरा रखते हैं, जिससे बार-बार भूख नहीं लगती और ओवरईटिंग से बचाव होता है। इसके लिए रात में एक चम्मच चिया सीड्स पानी में भिगो दें और सुबह उसमें थोड़ा नींबू मिलाकर पिएं। यह ड्रिंक शरीर को हाइड्रेट रखने में भी मदद करती है।   एप्पल साइडर विनेगर भी दे सकता है फायदा एप्पल साइडर विनेगर भी वजन घटाने में मददगार माना जाता है। इसमें मौजूद एसिटिक एसिड भूख को नियंत्रित करने और ब्लड शुगर लेवल को संतुलित रखने में मदद करता है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि एक गिलास पानी में एक से दो चम्मच एप्पल साइडर विनेगर मिलाकर ही पिएं। इसे सीधे पीने से दांतों और पेट को नुकसान हो सकता है।   संतुलित डाइट और एक्सरसाइज भी जरूरी डॉक्टरों का कहना है कि सिर्फ ड्रिंक्स के भरोसे वजन कम नहीं किया जा सकता। बेहतर परिणाम के लिए संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और अनुशासित जीवनशैली भी बेहद जरूरी है।

Anjali Kumari मई 25, 2026 0
Traditional South Indian Kuzhi Paniyaram served with chutney as a healthy fermented breakfast option
R. Madhavan का पसंदीदा South Indian नाश्ता सेहत के लिए फायदेमंद, वजन घटाने में भी कर सकता है मदद

Kuzhi Paniyaram को लेकर फिर बढ़ी चर्चा दक्षिण भारतीय पारंपरिक नाश्ता Kuzhi Paniyaram एक बार फिर चर्चा में है। अभिनेता R. Madhavan ने हाल ही में खुलासा किया कि यह उनकी पसंदीदा ब्रेकफास्ट डिश में से एक है। इसके बाद सेहत विशेषज्ञों और न्यूट्रिशन एक्सपर्ट्स ने भी इस डिश को हेल्दी मॉर्निंग मील बताया है। उनका कहना है कि यह पारंपरिक फर्मेंटेड डिश पाचन सुधारने, गट हेल्थ बेहतर रखने और वजन नियंत्रित करने में मदद कर सकती है। क्या है Kuzhi Paniyaram? Kuzhi Paniyaram चावल और उड़द दाल के फर्मेंटेड बैटर से बनाया जाता है। इसे खास तरह के पैन में पकाया जाता है, जिससे इसका बाहरी हिस्सा कुरकुरा और अंदर से नरम रहता है। यह डिश स्वादिष्ट होने के साथ-साथ पोषण से भी भरपूर मानी जाती है। फर्मेंटेशन कैसे करता है गट हेल्थ बेहतर? विशेषज्ञों के अनुसार इस डिश का सबसे बड़ा फायदा इसका फर्मेंटेशन प्रोसेस है। डॉक्टरों का कहना है कि फर्मेंटेशन जटिल कार्बोहाइड्रेट और प्रोटीन को आंशिक रूप से तोड़ देता है, जिससे खाना आसानी से पच जाता है। यह शरीर में अच्छे बैक्टीरिया के विकास को बढ़ावा देता है, जो पाचन तंत्र को मजबूत बनाने में मदद करते हैं। इसके अलावा उड़द दाल में मौजूद फाइबर कब्ज और ब्लोटिंग जैसी समस्याओं को कम करने में सहायक माना जाता है। वजन घटाने में भी मिल सकती है मदद विशेषज्ञों के मुताबिक Kuzhi Paniyaram वजन नियंत्रित करने में भी मददगार हो सकता है, खासकर जब इसे कम तेल में बनाया जाए। इसमें मौजूद फाइबर और प्रोटीन लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस कराते हैं, जिससे बार-बार भूख लगने की समस्या कम हो सकती है। साथ ही यह ब्लड शुगर लेवल को अचानक बढ़ने से भी रोकने में मदद करता है। पैकेज्ड फूड से बेहतर माने जाते हैं पारंपरिक नाश्ते डॉक्टरों का कहना है कि पारंपरिक भारतीय नाश्ते पैकेज्ड और प्रोसेस्ड ब्रेकफास्ट फूड की तुलना में ज्यादा पौष्टिक होते हैं। जहां पैकेज्ड फूड में अधिक चीनी, मैदा और प्रिजर्वेटिव्स होते हैं, वहीं पारंपरिक व्यंजन प्राकृतिक सामग्री और घरेलू तरीके से बनाए जाते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे नाश्ते ऊर्जा बनाए रखने के साथ पाचन तंत्र पर भी कम दबाव डालते हैं। इन हेल्दी ब्रेकफास्ट विकल्पों को भी माना गया फायदेमंद विशेषज्ञों ने कुछ अन्य पारंपरिक और गट-फ्रेंडली नाश्तों की भी सलाह दी है, जिनमें शामिल हैं: Idli और सांभर Dosa Moong Dal Cheela Besan Chilla Ragi Dosa वेजिटेबल उपमा दही, फल और नट्स Dhokla खानपान में संतुलन जरूरी विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि एसिडिटी, IBS, ब्लोटिंग या डायबिटीज जैसी समस्याओं से जूझ रहे लोगों को अपने शरीर के अनुसार भोजन चुनना चाहिए और बहुत ज्यादा तेल वाला या भारी नाश्ता करने से बचना चाहिए। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि प्राकृतिक सामग्री और फर्मेंटेड फूड्स को डाइट में शामिल करना लंबे समय में बेहतर स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।  

surbhi मई 13, 2026 0
Weight Loss Tips
Weight Loss Tips: लाख कोशिशों के बाद भी नहीं घट रहा वजन? ब्रेकफास्ट में शामिल करें ये 5 हेल्दी चीजें

नई दिल्ली, एजेंसियां। आज के समय में बढ़ता वजन लोगों की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक बन चुका है। कई लोग वजन कम करने के लिए जिम, एक्सरसाइज और डाइटिंग का सहारा लेते हैं, लेकिन इसके बावजूद भी मनचाहा रिजल्ट नहीं मिल पाता। हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक, सिर्फ वर्कआउट ही नहीं बल्कि सही खानपान भी वजन घटाने में अहम भूमिका निभाता है। खासकर सुबह का नाश्ता यानी ब्रेकफास्ट पूरे दिन की फिटनेस और मेटाबॉलिज्म को प्रभावित करता है।   ओट्स से करें दिन की शुरुआत वजन कम करने के लिए ओट्स को बेहद फायदेमंद माना जाता है। इसमें भरपूर मात्रा में फाइबर पाया जाता है, जो पेट को लंबे समय तक भरा रखता है और बार-बार भूख लगने से बचाता है। ओट्स को दूध, फलों या ड्राई फ्रूट्स के साथ खाने से शरीर को जरूरी पोषण भी मिलता है।   डा देता है भरपूर प्रोटीन अगर आप तेजी से वजन घटाना चाहते हैं तो ब्रेकफास्ट में अंडा जरूर शामिल करें। अंडे में मौजूद प्रोटीन शरीर को ऊर्जा देने के साथ-साथ लंबे समय तक भूख नियंत्रित रखने में मदद करता है। उबले अंडे या ऑमलेट दोनों ही हेल्दी विकल्प माने जाते हैं।   दही और फल का हेल्दी कॉम्बिनेशन दही और फलों का मिश्रण वजन कम करने वालों के लिए बेहतरीन ब्रेकफास्ट माना जाता है। दही में मौजूद प्रोबायोटिक्स पाचन तंत्र को मजबूत बनाते हैं, जबकि फल शरीर को विटामिन और मिनरल्स प्रदान करते हैं। पपीता, सेब, केला और बेरी जैसे फल दही के साथ खाने से फायदा मिल सकता है।   स्प्राउट्स से मिलेगा भरपूर पोषण स्प्राउट्स यानी अंकुरित अनाज प्रोटीन और फाइबर का अच्छा स्रोत होते हैं। यह लंबे समय तक पेट भरा रखते हैं और शरीर को जरूरी न्यूट्रिशन भी देते हैं। स्वाद बढ़ाने के लिए इसमें प्याज, टमाटर और नींबू मिलाया जा सकता है।   ग्रीन स्मूदी भी है असरदार पालक, खीरा, सेब और पुदीना से बनी ग्रीन स्मूदी शरीर को डिटॉक्स करने में मदद करती है। इसमें कैलोरी कम और पोषण ज्यादा होता है, जिससे वजन घटाने की प्रक्रिया तेज हो सकती है। नियमित रूप से हेल्दी ब्रेकफास्ट अपनाने से कुछ ही हफ्तों में शरीर में सकारात्मक बदलाव महसूस होने लगते हैं।

Anjali Kumari मई 9, 2026 0
Man with belly fat measuring waist showing need for weight loss and healthy lifestyle
पुरुषों में जिद्दी पेट की चर्बी: कारण, खतरे और कम करने के असरदार तरीके

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में पुरुषों के लिए पेट की जिद्दी चर्बी (Stubborn Belly Fat) एक आम लेकिन गंभीर समस्या बन चुकी है। यह सिर्फ दिखने में ही खराब नहीं लगती, बल्कि कई गंभीर बीमारियों का कारण भी बन सकती है। इस विशेष रिपोर्ट में हम विस्तार से समझते हैं कि यह समस्या क्यों होती है, इसके क्या संकेत हैं, और इसे कम करने के लिए कौन-कौन से वैज्ञानिक और व्यावहारिक उपाय अपनाए जा सकते हैं।   क्या हैं जिद्दी पेट की चर्बी के प्रमुख संकेत? पुरुषों में पेट की चर्बी अक्सर सामान्य डाइट या एक्सरसाइज से भी कम नहीं होती। इसके कुछ प्रमुख लक्षण इस प्रकार हैं: बाहर निकला हुआ पेट: लगातार डाइट और वर्कआउट के बावजूद पेट कम न होना कमर का बढ़ता घेरा: Waist size में लगातार वृद्धि विसरल फैट (Visceral Fat): यह आंतरिक अंगों के आसपास जमा होता है और सबसे खतरनाक माना जाता है BMI का बढ़ना: सामान्य स्तर (18.5–24.9) से अधिक होना पेट में भारीपन या असहजता मेटाबॉलिक सिंड्रोम के लक्षण: हाई ब्लड प्रेशर, हाई कोलेस्ट्रॉल, इंसुलिन रेजिस्टेंस   किन कारणों से बढ़ती है पेट की चर्बी? विशेषज्ञों के अनुसार, इसके पीछे कई कारण जिम्मेदार होते हैं: खराब खानपान: जंक फूड, ज्यादा शुगर और ट्रांस फैट व्यायाम की कमी: बैठकर काम करने वाली जीवनशैली हार्मोनल बदलाव: उम्र बढ़ने के साथ टेस्टोस्टेरोन में कमी तनाव (Stress): ज्यादा कोर्टिसोल हार्मोन चर्बी बढ़ाता है जेनेटिक फैक्टर: कुछ लोगों में यह समस्या वंशानुगत होती है   स्वास्थ्य के लिए कितनी खतरनाक है? पेट की चर्बी को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। इसके गंभीर खतरे हैं: दिल की बीमारियों का बढ़ा जोखिम स्ट्रोक की संभावना टाइप-2 डायबिटीज कुछ कैंसर (कोलन, पैंक्रियास आदि) स्लीप एपनिया जैसी समस्या   कैसे पाएं छुटकारा? अपनाएं ये असरदार उपाय 1. संतुलित डाइट और नियमित एक्सरसाइज हाई प्रोटीन और फाइबर वाली डाइट लें शुगर और प्रोसेस्ड फूड से दूरी बनाएं कार्डियो (जॉगिंग, साइक्लिंग) और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग का कॉम्बिनेशन अपनाएं 2. स्ट्रेस मैनेजमेंट योग, मेडिटेशन और डीप ब्रीदिंग अपनाएं पर्याप्त नींद लें (7–8 घंटे) 3. मेडिकल ट्रीटमेंट (डॉक्टर की सलाह से) कुछ दवाएं जैसे Orlistat या Liraglutide मदद कर सकती हैं लेकिन इनका उपयोग विशेषज्ञ की देखरेख में ही करें 4. सर्जरी (आखिरी विकल्प) लिपोसक्शन या टमी टक केवल गंभीर मामलों में और डॉक्टर की सलाह पर

kalpana मार्च 26, 2026 0
Simple calorie deficit formula for effective weight loss.
वजन घटाने की कोशिश कर रहे हैं? इस सेलिब्रिटी न्यूट्रिशनिस्ट का आसान फॉर्मूला सच में करता है काम

  वजन कम करना कई लोगों के लिए आसान नहीं होता। डाइट प्लान, एक्सरसाइज, इंटरमिटेंट फास्टिंग और अलग-अलग सलाह के बीच लोग अक्सर कंफ्यूज हो जाते हैं। लेकिन सेलिब्रिटी न्यूट्रिशनिस्ट Dr. Siddhant Bhargava के मुताबिक वजन घटाने का सबसे आसान और वैज्ञानिक तरीका है कैलोरी डेफिसिट बनाना। डॉ. सिद्धांत भार्गव बॉलीवुड सितारों जैसे Alia Bhatt, Ananya Panday और Sara Ali Khan के साथ काम कर चुके हैं। वे हेल्दी मील सर्विस प्लेटफॉर्म Food Darzee के सह-संस्थापक भी हैं।   वजन घटाने का असली नियम: कैलोरी डेफिसिट डॉ. सिद्धांत के अनुसार, वजन घटाने का मूल सिद्धांत बेहद सरल है- शरीर जितनी कैलोरी लेता है उससे ज्यादा कैलोरी खर्च करे। इसे ही कैलोरी डेफिसिट कहा जाता है। उदाहरण के लिए: अगर आपका शरीर रोज 2000 कैलोरी खर्च करता है और आप सिर्फ 1600–1700 कैलोरी लेते हैं तो शरीर अतिरिक्त ऊर्जा के लिए स्टोर फैट को जलाना शुरू कर देता है, जिससे धीरे-धीरे वजन कम होने लगता है।   डाइट फॉलो करने से ज्यादा जरूरी है यह समझना डॉ. सिद्धांत बताते हैं कि लोग अक्सर अलग-अलग डाइट ट्रेंड्स के पीछे भागते हैं, जैसे: इंटरमिटेंट फास्टिंग लो-कार्ब डाइट क्रैश डाइट लेकिन असल में इन सभी का उद्देश्य सिर्फ कैलोरी कम करना ही होता है।   कैलोरी डेफिसिट बनाने के दो आसान तरीके 1. कम खाना (Portion Control) खाने की मात्रा थोड़ा कम कर दें और जंक फूड से बचें। 2️. ज्यादा एक्टिव रहना वर्कआउट, वॉकिंग, रनिंग या जिम से ज्यादा कैलोरी बर्न करें। इन दोनों तरीकों में से कोई भी अपनाया जा सकता है, बस शरीर को कम कैलोरी मिलनी चाहिए जितनी वह खर्च करता है।  

surbhi मार्च 16, 2026 0
Popular post
शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Top week

Jamshid Ghomi accused of exporting sensitive US technology to Iran in sanctions case
दुनिया

अमेरिका में ईरान कनेक्शन का खुलासा, प्रतिबंधित टेक्नोलॉजी सप्लाई के आरोप में CEO गिरफ्तार

Deepshikha जून 4, 2026 0