पाकिस्तान

Pakistan Foreign Minister Ishaq Dar and Marco Rubio during press briefing on Israel recognition question
इजरायल को मान्यता देने के सवाल पर असहज दिखे पाक विदेश मंत्री, मार्को रुबियो के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस छोड़कर निकले

अमेरिका के आग्रह के बावजूद पाकिस्तान ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि वह फिलहाल इजरायल को मान्यता देने के पक्ष में नहीं है। इस मुद्दे पर वॉशिंगटन में एक प्रेस कार्यक्रम के दौरान उस समय असहज स्थिति बन गई जब एक पत्रकार ने पाकिस्तान के विदेश मंत्री Ishaq Dar से इजरायल को मान्यता देने को लेकर सवाल पूछा। सवाल के तुरंत बाद डार और अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio कार्यक्रम स्थल से निकल गए। रिपोर्टर के सवाल से बढ़ी चर्चा वॉशिंगटन में दोनों नेताओं की बैठक के बाद मीडिया से बातचीत के दौरान एक पत्रकार ने पूछा कि क्या पाकिस्तान इजरायल को मान्यता देने पर विचार कर रहा है। यह सवाल ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump कई मुस्लिम और अरब देशों से इजरायल के साथ संबंध सामान्य बनाने की अपील कर चुके हैं। इस सवाल का सीधा जवाब मौके पर नहीं दिया गया और दोनों नेता वहां से चले गए, जिससे इस मुद्दे पर नई चर्चा शुरू हो गई। पाकिस्तान ने दोहराया अपना पुराना रुख बाद में मीडिया से बातचीत में इशाक डार ने कहा कि फिलिस्तीन और गाजा के मुद्दे पर पाकिस्तान का रुख नहीं बदला है। उन्होंने कहा कि जब तक स्वतंत्र फलस्तीनी राज्य की दिशा में ठोस प्रगति नहीं होती, तब तक पाकिस्तान इजरायल के साथ अपने संबंधों या नीति में किसी बदलाव पर विचार नहीं करेगा। ट्रंप ने की थी मुस्लिम देशों से अपील राष्ट्रपति ट्रंप ने हाल ही में कहा था कि उन्होंने Saudi Arabia, Qatar, Pakistan, Turkey, Egypt और Jordan से सामूहिक रूप से अब्राहम समझौते में शामिल होने और इजरायल के साथ संबंध सामान्य करने का आग्रह किया है। अमेरिका का मानना है कि इससे पश्चिम एशिया में स्थिरता बढ़ेगी और क्षेत्रीय तनाव कम करने में मदद मिलेगी। क्या है अब्राहम समझौता? Abraham Accords ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान शुरू की गई एक कूटनीतिक पहल थी, जिसका उद्देश्य इजरायल और अरब देशों के बीच संबंधों को सामान्य बनाना था। इस समझौते के तहत United Arab Emirates, Bahrain और Morocco ने इजरायल के साथ औपचारिक संबंध स्थापित किए। Sudan ने भी समझौते में शामिल होने की घोषणा की थी, उसने अभी तक पूर्ण राजनयिक संबंध स्थापित नहीं किए हैं। पाकिस्तान ने क्यों ठुकराया प्रस्ताव? पाकिस्तान लंबे समय से यह कहता रहा है कि वह फिलिस्तीनी मुद्दे के स्थायी समाधान और स्वतंत्र फिलिस्तीनी राज्य की स्थापना से पहले इजरायल को मान्यता नहीं देगा। इसी वजह से ट्रंप की अपील के बावजूद इस्लामाबाद ने अब्राहम समझौते में शामिल होने के सुझाव को फिलहाल खारिज कर दिया है। पाकिस्तान और इजरायल के बीच आज भी कोई औपचारिक राजनयिक संबंध नहीं हैं।  

surbhi मई 30, 2026 0
Pakistan Punjab Assembly debate over minority rights, temple and church funding, and welfare issues.
पाकिस्तान में हिंदुओं की अनदेखी पर बढ़ा विवाद, विधानसभा में उठा अल्पसंख्यकों के अधिकारों का मुद्दा

Pakistan के पंजाब प्रांत में अल्पसंख्यक समुदायों की उपेक्षा को लेकर राजनीतिक विवाद गहरा गया है। पंजाब विधानसभा में विधायकों ने सरकार पर आरोप लगाया कि 2025-26 के बजट में चर्चों और मंदिरों के संरक्षण के लिए कोई फंड आवंटित नहीं किया गया, जबकि अल्पसंख्यक बहुल इलाकों के विकास के लिए भी पर्याप्त राशि नहीं रखी गई। सत्तारूढ़ Pakistan Muslim League-Nawaz के सीनेटर Baba Falbus Christopher ने विधानसभा सत्र के दौरान कहा कि पंजाब में चर्चों और मंदिरों की मरम्मत व संरक्षण के लिए “एक भी पैसा” नहीं दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि ईसाई बहुल बस्तियों के विकास के लिए भी लगभग कोई बजट नहीं रखा गया। क्रिस्टोफर ने सरकार से मांग की कि 2026-27 के बजट में अल्पसंख्यक समुदायों के धार्मिक स्थलों और बुनियादी सुविधाओं के लिए पर्याप्त फंड आवंटित किया जाए। हिंदू विधायक ने उठाए सवाल वहीं Pakistan Peoples Party के हिंदू विधायक Basro Ji ने कहा कि दक्षिण पंजाब में बड़ी संख्या में हिंदू आबादी रहती है, लेकिन उनके लिए कोई ठोस कल्याणकारी योजना शुरू नहीं की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि हिंदू इलाकों के विकास के लिए जो सीमित फंड रखा गया था, उसे बाद में वापस ले लिया गया। इससे समुदाय में नाराजगी बढ़ी है। स्पीकर ने भी जताई चिंता बहस के दौरान पंजाब विधानसभा के स्पीकर Malik Muhammad Ahmad Khan ने अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय के कामकाज पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यक समुदाय आज भी: पीने के पानी सफाई स्वास्थ्य सुविधाओं जैसी बुनियादी जरूरतों से वंचित हैं। स्पीकर ने कहा कि विकास निधि का इस्तेमाल सबसे पहले इन जरूरी सुविधाओं पर होना चाहिए। मंत्री रमेश सिंह अरोड़ा की सफाई अल्पसंख्यक मामलों का मंत्रालय संभाल रहे Ramesh Singh Arora ने सरकार का बचाव करते हुए कहा कि अल्पसंख्यकों की समस्याएं 1947 से चली आ रही हैं और उन्हें “रातोंरात खत्म नहीं किया जा सकता।” उन्होंने दावा किया कि Maryam Nawaz सरकार ने पिछले दो वर्षों में अल्पसंख्यक मामलों के विभाग का बजट 300 प्रतिशत तक बढ़ाया है। हालांकि विपक्ष और अल्पसंख्यक प्रतिनिधियों का कहना है कि जमीनी स्तर पर अब भी हालात में ज्यादा सुधार दिखाई नहीं दे रहा। मानवाधिकार संगठनों ने जताई चिंता मानवाधिकार संगठन Minority Rights Group के अनुसार पाकिस्तान में हिंदू, ईसाई, अहमदी, सिख और कलाश जैसे अल्पसंख्यक समुदाय अक्सर गरीबी, भेदभाव और असुरक्षा के माहौल में जीवन बिताते हैं। संगठन का कहना है कि देश की लगभग 4 प्रतिशत आबादी होने के बावजूद इन समुदायों को कई बार “दूसरे दर्जे के नागरिक” जैसा व्यवहार झेलना पड़ता है। लगातार उठते रहे हैं अल्पसंख्यकों से जुड़े मुद्दे पाकिस्तान में लंबे समय से: धार्मिक स्थलों की सुरक्षा जबरन धर्मांतरण सामाजिक भेदभाव सीमित राजनीतिक प्रतिनिधित्व जैसे मुद्दों को लेकर सवाल उठते रहे हैं। अब पंजाब विधानसभा में यह मामला जोर-शोर से उठने के बाद सरकार पर अल्पसंख्यकों के लिए ठोस कदम उठाने का दबाव बढ़ सकता है।  

surbhi मई 12, 2026 0
Etihad Airways reportedly dismisses Pakistani employees in Abu Dhabi amid rising UAE-Pakistan tensions
UAE में पाकिस्तानियों पर कार्रवाई? एतिहाद एयरवेज ने 15 कर्मचारियों को निकाला, 48 घंटे में देश छोड़ने का आदेश

संयुक्त अरब अमीरात और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव के बीच एक बड़ी खबर सामने आई है। यूएई की प्रमुख एयरलाइन एतिहाद एयरवेज ने अबू धाबी में काम कर रहे 15 पाकिस्तानी कर्मचारियों को अचानक नौकरी से निकाल दिया है। 48 घंटे में देश छोड़ने का आदेश रिपोर्ट्स के मुताबिक, निकाले गए कर्मचारियों को बिना किसी पूर्व सूचना के इमिग्रेशन ऑफिस बुलाया गया और 48 घंटे के भीतर देश छोड़ने का आदेश थमा दिया गया। इस फैसले से वहां काम कर रहे पाकिस्तानी समुदाय में चिंता और असमंजस का माहौल बन गया है। बिना नोटिस कार्रवाई पर सवाल बताया जा रहा है कि इस पूरी प्रक्रिया में सामान्य एचआर नियमों का पालन नहीं किया गया। आमतौर पर कंपनियां कर्मचारियों को नोटिस पीरियड देती हैं, लेकिन इस मामले में सीधे निष्कासन और देश छोड़ने का निर्देश दिया गया, जिससे पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं। सीनियर कर्मचारियों पर भी असर निकाले गए लोगों में कई अनुभवी कर्मचारी भी शामिल हैं। रिपोर्ट के अनुसार, एक कर्मचारी पिछले 20 वर्षों से कंपनी में कार्यरत था। सिर्फ 48 घंटे का समय मिलने के कारण कर्मचारियों को आर्थिक और पारिवारिक व्यवस्थाएं संभालने में भारी परेशानी हो रही है। एतिहाद की चुप्पी फिलहाल एतिहाद एयरवेज की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। एविएशन सेक्टर में छंटनी आम बात है, लेकिन इस तरह इमिग्रेशन को शामिल कर त्वरित कार्रवाई असामान्य मानी जा रही है। कूटनीतिक तनाव से जोड़कर देखा जा रहा मामला विशेषज्ञों का मानना है कि यह सिर्फ नौकरी से जुड़ा मामला नहीं, बल्कि यूएई और पाकिस्तान के बीच ठंडे पड़ते रिश्तों का संकेत भी हो सकता है। हाल ही में यूएई द्वारा पाकिस्तान से करीब 3 अरब डॉलर का कर्ज वापस मांगे जाने की खबरों ने भी इस तनाव को और बढ़ाया है। पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति पर असर पाकिस्तान पहले से ही आर्थिक संकट से जूझ रहा है और बड़ी संख्या में उसके नागरिक विदेशों में काम करते हैं। ऐसे में इस तरह की घटनाएं वहां की अर्थव्यवस्था पर भी असर डाल सकती हैं, क्योंकि विदेशी कमाई (remittances) पाकिस्तान के लिए अहम स्रोत है।  

surbhi मई 1, 2026 0
Donald Trump with Modi
Donald Trump ने फिर की Narendra Modi की तारीफ, बोले- “अच्छा काम कर रहे”

अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने एक बार फिर प्रधानमंत्री Narendra Modi की तारीफ करते हुए उन्हें “अच्छा काम करने वाला नेता” बताया है। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और सीजफायर की कोशिशों के बीच दोनों नेताओं के बीच हाल ही में फोन पर बातचीत हुई, जिसे ट्रंप ने “बहुत सकारात्मक” करार दिया। ट्रंप ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उनकी पीएम मोदी के साथ बातचीत काफी अच्छी रही। उन्होंने कहा, “वह मेरे अच्छे मित्र हैं और बहुत अच्छा काम कर रहे हैं।” सीजफायर और मिडिल ईस्ट पर चर्चा राष्ट्रपति ट्रंप के मुताबिक, इस बातचीत में पश्चिम एशिया की स्थिति, खासकर इजरायल और लेबनान के बीच सीजफायर जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। उन्होंने संकेत दिया कि अमेरिका इस क्षेत्र में तनाव कम करने और शांति स्थापित करने के लिए कूटनीतिक प्रयास जारी रखे हुए है। पाकिस्तान दौरे के दिए संकेत ट्रंप ने यह भी कहा कि अगर ईरान के साथ सीजफायर समझौता होता है, तो वह पाकिस्तान का दौरा कर सकते हैं। उन्होंने कहा, “अगर इस्लामाबाद में डील साइन होती है, तो मैं वहां जा सकता हूं।” उन्होंने पाकिस्तान की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि वह शांति प्रक्रिया में अच्छा काम कर रहा है और अमेरिका के साथ सहयोग कर रहा है। कूटनीतिक कोशिशें तेज यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका मिडिल ईस्ट में कई स्तर पर कूटनीतिक प्रयास कर रहा है। इसमें ईरान के साथ बातचीत, इजरायल-लेबनान सीमा पर तनाव कम करना और क्षेत्रीय स्थिरता सुनिश्चित करना शामिल है। ट्रंप ने यह भी उम्मीद जताई कि हिजबुल्लाह जैसे समूह सीजफायर का पालन करेंगे और क्षेत्र में हिंसा कम होगी।  

surbhi अप्रैल 17, 2026 0
Saudi Arabia and Pakistan officials shaking hands after announcing $3 billion financial support to boost reserves.
सऊदी अरब से पाकिस्तान को 3 अरब डॉलर की मदद, सही समय पर मिला बड़ा सहारा

  इस्लामाबाद: पाकिस्तान को आर्थिक मोर्चे पर बड़ी राहत मिली है। सऊदी अरब ने पाकिस्तान को अतिरिक्त 3 अरब डॉलर के डिपॉजिट देने का ऐलान किया है। यह रकम अगले सप्ताह तक मिलने की उम्मीद है और इससे पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूती मिलेगी। वित्त मंत्री ने की पुष्टि पाकिस्तान के वित्त मंत्री मोहम्मद औरंगज़ेब ने वॉशिंगटन डीसी में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इस मदद की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि: सऊदी अरब 3 अरब डॉलर का नया डिपॉजिट देगा पहले से मौजूद 5 अरब डॉलर की राशि को भी 2028 तक बढ़ाया जाएगा इससे देश की आर्थिक स्थिति को स्थिर करने में मदद मिलेगी UAE के पैसे लौटाने के बाद आई राहत हाल ही में संयुक्त अरब अमीरात ने अपने डिपॉजिट वापस ले लिए थे। इससे पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ा सरकार ने इसे सामान्य प्रक्रिया बताया लेकिन बाजार में चिंता बढ़ गई थी ऐसे में सऊदी अरब की मदद को “टाइमली सपोर्ट” माना जा रहा है। कूटनीतिक हलचल के बीच फैसला यह आर्थिक सहायता ऐसे समय पर आई है, जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर है और पाकिस्तान मध्यस्थ की भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा है। हाल ही में: शहबाज शरीफ ने सऊदी नेतृत्व से मुलाकात की शांति वार्ता से पहले दोनों देशों में बातचीत हुई इसके तुरंत बाद आर्थिक सहायता का ऐलान हुआ सैन्य सहयोग भी बढ़ा सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच रक्षा सहयोग भी मजबूत होता दिख रहा है। पाकिस्तान का सैन्य दस्ता सऊदी अरब पहुंचा शाह अब्दुलअज़ीज़ एयर बेस पर तैनाती वायुसेना के लड़ाकू और सपोर्ट विमान शामिल पाकिस्तान के लिए क्यों अहम? पाकिस्तान इस समय आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहा है। विदेशी मुद्रा भंडार सीमित आयात पर दबाव कर्ज का बोझ ऐसे में 3 अरब डॉलर की यह मदद: रुपये को स्थिर करने में मदद करेगी बाजार में भरोसा बढ़ाएगी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्रेडिबिलिटी मजबूत करेगी आगे क्या? यह कदम सिर्फ आर्थिक मदद नहीं, बल्कि क्षेत्रीय रणनीति का हिस्सा भी हो सकता है। फिलहाल, सऊदी अरब की यह मदद पाकिस्तान के लिए बड़ी राहत के रूप में देखी जा रही है, लेकिन लंबे समय तक स्थिरता के लिए उसे आर्थिक सुधारों पर भी जोर देना होगा।  

surbhi अप्रैल 16, 2026 0
Pakistan Army Chief Asim Munir meeting Iranian officials in Tehran for US-Iran peace talks.
US-Iran तनाव के बीच पाकिस्तान एक्टिव: तेहरान पहुंचे आर्मी चीफ आसिम मुनीर, ‘शांति वार्ता 2.0’ की उम्मीद

  तेहरान/इस्लामाबाद: अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव को कम करने के लिए पाकिस्तान ने कूटनीतिक प्रयास तेज कर दिए हैं। इसी क्रम में पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर बुधवार को एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ तेहरान पहुंचे। शांति मिशन पर मुनीर की ईरान यात्रा पाकिस्तान की सेना की मीडिया विंग ISPR के अनुसार, यह दौरा अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव को कम करने की कोशिशों का हिस्सा है। मुनीर के साथ पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी भी मौजूद हैं। इस यात्रा का उद्देश्य दोनों देशों के बीच संभावित दूसरे दौर की वार्ता को आगे बढ़ाना और कूटनीतिक गतिरोध खत्म करना है। शहबाज शरीफ के ताबड़तोड़ विदेश दौरे दूसरी ओर, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ भी सक्रिय भूमिका में नजर आ रहे हैं। वह एक साथ कई अहम देशों के दौरे पर हैं: सऊदी अरब कतर तुर्की इन बैठकों में क्षेत्रीय शांति, सुरक्षा और अमेरिका-ईरान तनाव पर चर्चा की जा रही है। ‘शांति वार्ता 2.0’ की तैयारी सूत्रों के मुताबिक, जल्द ही अमेरिका और ईरान के बीच दूसरे दौर की बातचीत हो सकती है। पाकिस्तान इस प्रक्रिया में मध्यस्थ की भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा है। इसका मकसद है: दोनों देशों के बीच तनाव कम करना स्थायी समाधान की दिशा में बढ़ना मिडिल ईस्ट में युद्ध जैसी स्थिति टालना पहला दौर रहा बेनतीजा इससे पहले इस्लामाबाद में हुई 21 घंटे की वार्ता बिना किसी ठोस नतीजे के खत्म हो गई थी। इसके बाद हालात और तनावपूर्ण हो गए। डोनाल्ड ट्रंप के सख्त रुख और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़े तनाव ने स्थिति को और जटिल बना दिया। आगे क्या? अब पूरी दुनिया की नजर संभावित “शांति वार्ता 2.0” पर टिकी है। अगर यह बातचीत सफल रहती है, तो क्षेत्र में स्थिरता लौट सकती है। वार्ता विफल होने की स्थिति में अमेरिका-ईरान तनाव और गहरा सकता है, जिससे वैश्विक स्तर पर भी असर देखने को मिल सकता है।  

surbhi अप्रैल 16, 2026 0
Pakistan receives financial aid from Saudi Arabia and Qatar amid UAE debt repayment pressure and IMF crisis
पाकिस्तान को सऊदी-कतर से ₹46,500 करोड़ की मदद, UAE का कर्ज चुकाने की तैयारी

पाकिस्तान को बड़ी आर्थिक राहत मिलने जा रही है। सऊदी अरब और कतर मिलकर उसे 5 अरब डॉलर (करीब ₹46,500 करोड़) की वित्तीय मदद देंगे। यह सहायता ऐसे समय पर मिल रही है, जब पाकिस्तान पर UAE का 3.5 अरब डॉलर (करीब ₹29,000 करोड़) का कर्ज चुकाने का दबाव है। सिर्फ 11 दिन में चुकाना है कर्ज रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान को 23 अप्रैल तक UAE का पूरा कर्ज चुकाना है। तय शेड्यूल के अनुसार 11, 17 और 23 अप्रैल को किस्तों में भुगतान किया जाएगा। यानी देश के पास कर्ज चुकाने के लिए बहुत कम समय बचा है। विदेशी मुद्रा संकट में राहत पाकिस्तान की कमजोर विदेशी मुद्रा स्थिति को देखते हुए यह मदद बेहद अहम मानी जा रही है। देश को अप्रैल में कुल करीब 4.8 अरब डॉलर का भुगतान करना है, जिसमें एक बड़ा इंटरनेशनल बॉन्ड भी शामिल है। IMF की शर्तें भी अहम International Monetary Fund (IMF) ने पाकिस्तान के लिए 7 अरब डॉलर का 3 साल का राहत पैकेज शुरू किया है। इसके तहत शर्त रखी गई है कि बड़े कर्जदाता–जैसे चीन, सऊदी अरब और UAE–अपना पैसा कम से कम 3 साल तक पाकिस्तान में ही बनाए रखें। UAE की नई नीति से बढ़ा दबाव हाल ही में UAE ने कर्ज रोलओवर पॉलिसी में बदलाव कर शॉर्ट-टर्म एक्सटेंशन लागू किया है, जिससे पाकिस्तान पर जल्दी भुगतान का दबाव बढ़ गया। इसके बाद पाकिस्तान ने तय समय में कर्ज चुकाने का फैसला लिया। सऊदी-पाक रिश्ते और मजबूत सऊदी अरब पहले भी पाकिस्तान को आर्थिक मदद देता रहा है और 5 अरब डॉलर तक के डिपॉजिट को आगे बढ़ा चुका है। दोनों देशों के बीच आर्थिक और रक्षा सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है। IMF मीटिंग के लिए वॉशिंगटन दौरा पाकिस्तान के वित्त मंत्री Muhammad Aurangzeb 13–18 अप्रैल तक Washington, D.C. में होने वाली IMF और वर्ल्ड बैंक की स्प्रिंग मीटिंग में हिस्सा ले रहे हैं। इस दौरान वे कई देशों और निवेशकों के साथ अहम बैठकों में शामिल होंगे।  

surbhi अप्रैल 13, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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