बिहार न्यूज

Clash between GRP and excise team at Katihar Junction with injured constable and chaos on platform
कटिहार जंक्शन पर ‘खाकी vs खाकी’: GRP और मद्य निषेध टीम में भिड़ंत, सिपाही घायल, वीडियो वायरल

स्टेशन पर मचा हड़कंप कटिहार जंक्शन पर शुक्रवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब दो सरकारी विभागों के जवान आपस में ही भिड़ गए। जीआरपी और मद्य निषेध विभाग के बीच हुई इस झड़प में एक सिपाही घायल हो गया। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। शराब तस्करी की सूचना पर पहुंची थी टीम मद्य निषेध विभाग की टीम को गुप्त सूचना मिली थी कि बंगाल के रास्ते आने वाली ट्रेन में शराब की बड़ी खेप लाई जा रही है। इसी सूचना के आधार पर टीम कटिहार स्टेशन पर छापेमारी के लिए पहुंची थी। बताया जा रहा है कि जैसे ही टीम प्लेटफॉर्म पर कार्रवाई शुरू करने लगी, तभी जीआरपी के जवान वहां पहुंच गए। बहस से शुरू हुई मारपीट प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दोनों पक्षों के बीच पहले कहासुनी हुई, जो देखते ही देखते हाथापाई में बदल गई। आरोप है कि जीआरपी के जवानों ने मद्य निषेध टीम के काम में हस्तक्षेप किया और फिर मामला हिंसक झड़प तक पहुंच गया। वीडियो वायरल, जांच के आदेश घटना के दौरान मौजूद लोगों ने पूरी झड़प का वीडियो बना लिया, जो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए अधिकारियों ने जांच के आदेश दे दिए हैं और रिपोर्ट तलब की गई है। सिपाही देव शंकर कुमार घायल इस झगड़े में मद्य निषेध विभाग के सिपाही देव शंकर कुमार घायल हो गए। उन्हें इलाज के लिए कटिहार सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज चल रहा है। आरोप-प्रत्यारोप का दौर मद्य निषेध विभाग का आरोप है कि जीआरपी जानबूझकर उनकी कार्रवाई में बाधा डालती है और इसी कारण यह विवाद हुआ। विभाग के एक अधिकारी ने कहा कि वे तस्करों को पकड़ने पहुंचे थे, लेकिन उन्हें अपने ही वर्दीधारी साथियों के विरोध का सामना करना पड़ा। पुलिस महकमे पर उठे सवाल इस घटना ने पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आमतौर पर कानून-व्यवस्था संभालने वाली ‘खाकी’ का इस तरह आपस में भिड़ना व्यवस्था की बड़ी खामी को उजागर करता है।  

surbhi मार्च 20, 2026 0
UltraTech Cement plant construction site in Banka Bihar with industrial setup and workers
बांका में लगेगी अल्ट्राटेक सीमेंट की मेगा फैक्ट्री: 1200 करोड़ निवेश से हजारों रोजगार के खुलेंगे अवसर

बिहार के औद्योगिक विकास को मिला बड़ा बूस्ट बिहार में औद्योगिक विकास को नई गति मिलने जा रही है। देश की दिग्गज कंपनी अल्ट्राटेक सीमेंट ने राज्य में अपनी नई निर्माण इकाई स्थापित करने का फैसला लिया है। यह मेगा प्रोजेक्ट न केवल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करेगा, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेगा। बांका के कटोरिया में बनेगा प्लांट यह फैक्ट्री बांका जिले के कटोरिया औद्योगिक क्षेत्र में स्थापित की जाएगी। करीब 59.47 एकड़ जमीन पर बनने वाला यह प्लांट क्षेत्र के औद्योगिक नक्शे को बदलने की क्षमता रखता है। इस परियोजना को राज्य सरकार से मंजूरी मिल चुकी है, जिससे स्थानीय स्तर पर विकास की उम्मीदें और बढ़ गई हैं। 1200 करोड़ का निवेश, 1000 को सीधा रोजगार अल्ट्राटेक सीमेंट इस प्रोजेक्ट पर लगभग 1200 करोड़ रुपए का निवेश करेगी। इस बड़े निवेश से करीब 1000 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलने की संभावना है, जबकि अप्रत्यक्ष रूप से हजारों लोगों को काम मिलेगा। लॉजिस्टिक्स, ट्रांसपोर्ट, निर्माण और छोटे व्यवसायों को भी इस फैक्ट्री के जरिए नई रफ्तार मिलेगी। बांका बनेगा नया इंडस्ट्रियल हब कटोरिया औद्योगिक क्षेत्र में इस फैक्ट्री के लगने से बांका और आसपास के इलाकों में औद्योगिक गतिविधियां तेज होंगी। लंबे समय से निवेश की प्रतीक्षा कर रहे इस क्षेत्र के लिए यह प्रोजेक्ट एक बड़ा टर्निंग पॉइंट माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, सीमेंट उद्योग किसी भी क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों को कई गुना बढ़ाने का काम करता है। सरकार की नीतियों का असर दिखा उद्योग मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल के निर्देश पर प्रोजेक्ट को हरी झंडी दी गई। वहीं उद्योग विभाग और बियाडा की ओर से दी जा रही सुविधाओं ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया है। सरकार का फोकस इंफ्रास्ट्रक्चर और रोजगार सृजन पर है, जिसका असर अब जमीन पर दिखने लगा है। निवेश के लिए तैयार हो रहा बिहार राज्य में लगातार बेहतर होती नीतियां और निवेश के अनुकूल माहौल यह संकेत दे रहे हैं कि बिहार अब उद्योगों के लिए एक आकर्षक गंतव्य बनता जा रहा है। अल्ट्राटेक सीमेंट का यह निवेश ‘औद्योगिक बिहार’ के सपने को साकार करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। क्या होगा आम लोगों को फायदा? इस प्रोजेक्ट से स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा, छोटे व्यापारियों की आय बढ़ेगी और क्षेत्र का समग्र विकास होगा।  

surbhi मार्च 20, 2026 0
Power plants and solar panels in Bihar highlighting ₹81,000 crore energy infrastructure investment plan
बिहार बनेगा पावर हब: 81,000 करोड़ के निवेश से ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर होगा अपग्रेड, रिन्यूएबल पर भी बड़ा फोकस

ऊर्जा क्षेत्र में बिहार की बड़ी छलांग बिहार अब ऊर्जा सेक्टर में तेजी से उभरता हुआ निवेश केंद्र बनता जा रहा है। भारत इलेक्ट्रिसिटी समिट 2026 में ‘फोकस स्टेट’ के रूप में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराते हुए राज्य ने यह साफ संकेत दिया कि आने वाले वर्षों में यहां ऊर्जा क्षेत्र में बड़े स्तर पर बदलाव देखने को मिलेगा। 5 साल में 81,000 करोड़ का निवेश राज्य सरकार ने अगले पांच वर्षों में ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर को आधुनिक बनाने के लिए करीब 81,000 करोड़ रुपए निवेश करने की योजना बनाई है। यह निवेश अलग-अलग सेक्टर में किया जाएगा, जिससे बिजली उत्पादन से लेकर सप्लाई तक की पूरी व्यवस्था मजबूत होगी। पावर जेनरेशन: 38,950 करोड़ रुपए ट्रांसमिशन सिस्टम: 16,194 करोड़ रुपए डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क: 22,951 करोड़ रुपए मेंटेनेंस और रख-रखाव: 3,346 करोड़ रुपए इस व्यापक योजना का मकसद राज्य में बिजली आपूर्ति को अधिक विश्वसनीय और सुचारु बनाना है। रिन्यूएबल एनर्जी में बड़ा लक्ष्य बिहार ने रिन्यूएबल एनर्जी पॉलिसी 2025 के तहत वर्ष 2030 तक 24 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य तय किया है। साथ ही 6.1 गीगावाट की एनर्जी स्टोरेज क्षमता विकसित करने की भी योजना है। निवेशकों को आकर्षित करने के लिए सरकार कई सुविधाएं दे रही है, जैसे- ट्रांसमिशन शुल्क में छूट ऊर्जा बैंकिंग की सुविधा सिंगल विंडो क्लीयरेंस कार्बन क्रेडिट के प्रावधान ये सभी पहल बिहार को ग्रीन एनर्जी के क्षेत्र में मजबूत खिलाड़ी बनाने की दिशा में अहम कदम माने जा रहे हैं। 20 साल में दिखा बड़ा बदलाव समिट के दौरान राज्य के ऊर्जा क्षेत्र में पिछले दो दशकों में हुए बदलावों को भी सामने रखा गया। 2005 में जहां केवल 700 मेगावाट बिजली उपलब्ध थी, वहीं अब मांग 8,700 मेगावाट से ज्यादा हो चुकी है। राज्य में करीब 2.2 करोड़ उपभोक्ता बिजली नेटवर्क से जुड़ चुके हैं। वितरण कंपनियां, जो 2021 में 1,942 करोड़ के घाटे में थीं, अब 2025 तक करीब 2,000 करोड़ के मुनाफे में पहुंच गई हैं। निवेशकों के लिए क्यों खास है बिहार? ऊर्जा क्षेत्र में सुधार, पारदर्शी नीतियां और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर के चलते बिहार अब निवेशकों के लिए एक भरोसेमंद गंतव्य बनकर उभर रहा है। सरकार की योजनाएं साफ संकेत देती हैं कि आने वाले समय में राज्य न सिर्फ अपनी जरूरतें पूरी करेगा, बल्कि ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में भी तेजी से आगे बढ़ेगा। क्या बदलेगा आम लोगों के लिए? इस बड़े निवेश का सीधा फायदा आम उपभोक्ताओं को मिलेगा। बिजली आपूर्ति अधिक स्थिर होगी, कटौती में कमी आएगी और ग्रामीण क्षेत्रों तक बेहतर कनेक्टिविटी सुनिश्चित की जा सकेगी।  

surbhi मार्च 20, 2026 0
CBI team outside closed house in Jehanabad village during Patna hostel case investigation
पटना हॉस्टल कांड में नई पेचीदगी: गांव पहुंची CBI टीम लौटी खाली हाथ, परिजनों ने नहीं खोला दरवाजा

जहानाबाद में CBI को मिला विरोध पटना के चर्चित हॉस्टल कांड में जांच कर रही केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की टीम को एक बार फिर निराशा हाथ लगी। टीम जब जहानाबाद जिले के रतनी स्थित छात्रा के पैतृक गांव पहुंची, तो परिजनों ने दरवाजा खोलने से साफ इनकार कर दिया। करीब 20 मिनट तक इंतजार करने के बाद अधिकारियों को बिना किसी बातचीत के ही लौटना पड़ा। शंभू गर्ल्स हॉस्टल से जुड़ा है मामला यह मामला शंभू गर्ल्स हॉस्टल से जुड़ा है, जहां रहकर छात्रा NEET की तैयारी कर रही थी। उसकी संदिग्ध मौत के बाद से ही यह केस लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। मौत के पीछे की वजह अब तक साफ नहीं हो सकी है, जिससे कई सवाल खड़े हो रहे हैं। DSP के नेतृत्व में पहुंची थी टीम गुरुवार को CBI की तीन सदस्यीय टीम, डीएसपी विभा कुमारी के नेतृत्व में गांव पहुंची थी। टीम का मकसद परिजनों से बातचीत कर कुछ अहम जानकारी जुटाना था, लेकिन परिवार ने सहयोग से इनकार कर दिया। परिजनों का कहना है कि कई बार पूछताछ के बावजूद जांच किसी नतीजे तक नहीं पहुंची है, जिससे उनका भरोसा कमजोर हो गया है। मां की हालत गंभीर, बात करने की स्थिति में नहीं परिवार के अनुसार, बेटी की मौत के बाद उसकी मां की हालत बेहद खराब है। वह मानसिक और शारीरिक रूप से कमजोर हो चुकी हैं और बार-बार बेहोश हो जाती हैं। ऐसे में परिवार ने उन्हें किसी भी तरह की पूछताछ से दूर रखने का फैसला किया है। पिता से भी नहीं हो सकी मुलाकात गांव से लौटने के बाद CBI टीम शकूराबाद थाना पहुंची और फिर छात्रा के पिता के कार्यस्थल प्लस टू प्रवेशिका विद्यालय शकूराबाद भी गई। लेकिन यहां भी टीम को निराशा मिली, क्योंकि पिता कुछ ही मिनट पहले वहां से निकल चुके थे। जांच में आ रही बाधाएं, बढ़ी उलझन इस मामले में CBI लगातार सच्चाई तक पहुंचने की कोशिश कर रही है, लेकिन परिजनों का सहयोग न मिलना और अब तक किसी बड़े खुलासे या गिरफ्तारी का न होना जांच को और जटिल बना रहा है।  

surbhi मार्च 20, 2026 0
Damaged window of Vande Bharat Express after stone pelting incident in Muzaffarpur Bihar
बिहार में वंदे भारत एक्सप्रेस पर फिर हमला: मुजफ्फरपुर में पत्थरबाजी, कोच का शीशा टूटा, CCTV खंगाल रही पुलिस

मुजफ्फरपुर में फिर निशाने पर वंदे भारत बिहार में एक बार फिर हाई-स्पीड ट्रेन वंदे भारत एक्सप्रेस बदमाशों के निशाने पर आ गई। इस बार घटना मुजफ्फरपुर जिले में सामने आई है, जहां अज्ञात लोगों ने चलती ट्रेन पर पत्थर फेंक दिए। राहत की बात यह रही कि इस हमले में कोई यात्री घायल नहीं हुआ, लेकिन ट्रेन की खिड़की का शीशा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। कांटी–मोतीपुर के बीच हुई घटना जानकारी के अनुसार, गाड़ी संख्या 26501 गोरखपुर-पाटलिपुत्र वंदे भारत एक्सप्रेस गुरुवार शाम मुजफ्फरपुर-गोरखपुर रेलखंड पर चल रही थी। इसी दौरान कांटी और मोतीपुर के बीच असामाजिक तत्वों ने ट्रेन को निशाना बनाते हुए पत्थरबाजी की। इस हमले में कोच C-5 की खिड़की का कांच पूरी तरह टूट गया। बताया जा रहा है कि सुरक्षा कवच वाला शीशा भी इस हमले को नहीं झेल सका। पुलिस और RPF जांच में जुटी घटना के बाद मामले को लेकर रेलवे सुरक्षा बल (RPF) ने बापूधाम मोतिहारी में अज्ञात आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। पुलिस और रेलवे सुरक्षा एजेंसियां मिलकर पूरे मामले की जांच कर रही हैं। ट्रेन में मौजूद स्कॉर्ट टीम, गार्ड और ट्रेन मैनेजर से पूछताछ की गई है। साथ ही घटनास्थल के आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है ताकि आरोपियों की पहचान की जा सके। बताया जा रहा है कि कपरपुरा और कांटी इलाके में सर्च ऑपरेशन भी चलाया जा रहा है। यात्रियों में बढ़ी दहशत इस घटना के बाद यात्रियों के बीच डर और असुरक्षा का माहौल बन गया है। वंदे भारत एक्सप्रेस देश की सबसे आधुनिक और तेज ट्रेनों में शामिल है, ऐसे में उस पर बार-बार हो रहे हमले सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहे हैं। पहले भी हो चुकी हैं ऐसी घटनाएं यह पहली बार नहीं है जब वंदे भारत ट्रेन पर पत्थरबाजी की घटना सामने आई हो। इससे पहले भी बिहार के अलग-अलग हिस्सों में इस तरह की वारदातें हो चुकी हैं। बार-बार हो रही ऐसी घटनाएं रेलवे प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही हैं।  

surbhi मार्च 20, 2026 0
High electricity demand in Bihar with power lines and transformers amid rising summer heat and energy consumption
बिहार में बिजली की रिकॉर्ड मांग: गर्मी और गैस संकट ने बढ़ाया लोड, पटना बना ‘पावर हब’

पटना: बिहार में मार्च की शुरुआत के साथ ही गर्मी का असर अब बिजली खपत पर साफ दिखाई देने लगा है। बढ़ते तापमान और LPG संकट के कारण राज्य में बिजली की मांग ने इस बार रिकॉर्ड स्तर छू लिया है। आंकड़ों के मुताबिक, 18 मार्च को जहां पिछले साल 405 मेगावाट बिजली की खपत दर्ज की गई थी, वहीं इस साल यह बढ़कर 517 मेगावाट तक पहुंच गई है। यानी इस बार खपत में तेज उछाल देखने को मिल रहा है। गर्मी बढ़ते ही बढ़ी बिजली की खपत मार्च में ही तापमान बढ़ने के कारण लोगों ने पंखे, कूलर और एसी का इस्तेमाल शुरू कर दिया है। आमतौर पर यह स्तर महीने के अंत में देखने को मिलता था, लेकिन इस बार पहले ही खपत 500 मेगावाट के पार पहुंच गई है। बिजली कंपनियों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह आंकड़ा और तेजी से बढ़ सकता है। गैस संकट ने बढ़ाया दबाव बढ़ती बिजली खपत के पीछे एक बड़ा कारण रसोई गैस की कमी भी है। LPG सिलेंडर की अनियमित आपूर्ति के चलते कई घरों में लोग खाना बनाने के लिए इंडक्शन चूल्हों और अन्य इलेक्ट्रिक उपकरणों का इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे घरेलू बिजली उपयोग में अचानक बढ़ोतरी हुई है, जिसने सिस्टम पर अतिरिक्त दबाव डाल दिया है। पटना बना सबसे बड़ा खपत केंद्र पूरे बिहार में इस समय करीब 4900 मेगावाट बिजली की खपत हो रही है। इसमें अकेले पटना जिला 600 से 650 मेगावाट खपत के साथ सबसे आगे है। अन्य शहरों में मुजफ्फरपुर में 210 मेगावाट, गया में 243 मेगावाट और पूर्णिया में 128 मेगावाट की औसत खपत दर्ज की जा रही है। इंडक्शन और इलेक्ट्रिक उपकरणों का बढ़ता चलन गैस संकट के कारण पटना समेत कई शहरों में इंडक्शन चूल्हा और इलेक्ट्रिक ओवन का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। इसके साथ ही घरों में कूलर और एसी भी पूरे समय चल रहे हैं, जिससे बिजली की मांग और बढ़ गई है। बिजली कंपनियों का अनुमान है कि इस साल अधिकतम खपत 1000 मेगावाट के आंकड़े को भी पार कर सकती है। ‘जीरो ट्रिपिंग’ पर फोकस ऊर्जा विभाग ने बढ़ती मांग को देखते हुए सभी जिलों में मेंटेनेंस कार्य तेज कर दिया है। ऊर्जा सचिव मनोज कुमार सिंह ने निर्देश दिया है कि 31 मार्च तक सभी जरूरी मरम्मत कार्य पूरे कर लिए जाएं। साथ ही इंजीनियरों को ‘जीरो ट्रिपिंग’ सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि तकनीकी खराबियों से बिजली आपूर्ति प्रभावित न हो। सिस्टम को दुरुस्त करने में जुटी टीमें बिजली आपूर्ति को सुचारु बनाए रखने के लिए ट्रांसमिशन लाइन और ट्रांसफार्मरों की लगातार जांच की जा रही है। ग्रिड की स्थिरता और वोल्टेज सुधार पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उद्देश्य साफ है-गर्मी के चरम पर पहुंचने से पहले ही व्यवस्था को मजबूत कर लिया जाए, ताकि लोगों को बिजली कटौती का सामना न करना पड़े। आने वाले दिनों में बढ़ सकती है चुनौती बिजली खपत में यह तेजी आने वाले समय में बड़ी चुनौती बन सकती है। अगर गर्मी और बढ़ी और गैस संकट जारी रहा, तो मांग और बढ़ने की संभावना है। ऐसे में उपभोक्ताओं से भी अपील की गई है कि वे पीक ऑवर्स में बिजली का संयम से उपयोग करें, ताकि सिस्टम पर अतिरिक्त दबाव कम किया जा सके।  

surbhi मार्च 20, 2026 0
Popular post
शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Top week

Crowd chaos at Nalanda Sheetla Temple during religious event causing stampede-like situation and casualties
बिहार

नालंदा मंदिर हादसा: भीड़ ने ली 8 महिलाओं की जान, धार्मिक आयोजन में मची भगदड़ जैसी स्थिति

surbhi मार्च 31, 2026 0