अमेरिका के टेक सेक्टर में जारी बड़े पैमाने की छंटनी ने हजारों भारतीय पेशेवरों के सामने गंभीर संकट खड़ा कर दिया है। Meta, Amazon और LinkedIn जैसी कंपनियों में लगातार हो रही layoffs का सबसे ज्यादा असर H-1B वीजा पर काम कर रहे भारतीय इंजीनियरों और सॉफ्टवेयर डेवलपर्स पर पड़ रहा है।
नौकरी जाने के बाद इन पेशेवरों के पास अमेरिका में बने रहने के लिए बेहद सीमित समय बचता है। अमेरिकी इमिग्रेशन नियमों के अनुसार, H-1B वीजा धारकों को नई नौकरी ढूंढने के लिए सिर्फ 60 दिनों का समय मिलता है। ऐसा न होने पर उन्हें देश छोड़ना पड़ सकता है।
अमेरिका में बड़ी संख्या में भारतीय टेक प्रोफेशनल्स H-1B वीजा पर काम करते हैं। यह वीजा सीधे कंपनी से जुड़ा होता है। यानी नौकरी खत्म होते ही कर्मचारी का इमिग्रेशन स्टेटस भी प्रभावित होने लगता है।
ऐसे में सिर्फ नई नौकरी ढूंढना ही चुनौती नहीं होती, बल्कि परिवार, बच्चों की पढ़ाई, होम लोन, हेल्थ इंश्योरेंस और भविष्य की पूरी योजना पर असर पड़ता है।
US Citizenship and Immigration Services (USCIS) के नियमों के अनुसार, नौकरी छूटने के बाद H-1B कर्मचारी को 60 दिनों का ग्रेस पीरियड मिलता है। यह अवधि कर्मचारी के आखिरी कार्य दिवस से शुरू होती है, न कि अंतिम वेतन मिलने की तारीख से।
इस दौरान कर्मचारी:
मौजूदा आर्थिक माहौल और धीमी hiring के कारण यह समय बहुत कम साबित हो रहा है।
कई कर्मचारी समय बढ़ाने के लिए अस्थायी रूप से B-2 टूरिस्ट वीजा में स्विच करने की कोशिश करते हैं। लेकिन हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिकी अधिकारी अब ऐसे आवेदनों की ज्यादा सख्ती से जांच कर रहे हैं और अतिरिक्त दस्तावेज मांगे जा रहे हैं।
Layoffs.fyi के आंकड़ों के मुताबिक, इस साल अब तक टेक इंडस्ट्री में 1.1 लाख से ज्यादा कर्मचारी नौकरी गंवा चुके हैं। इनमें बड़ी संख्या विदेशी कर्मचारियों, खासकर भारतीयों की है।
वित्तीय वर्ष 2025 के अमेरिकी आंकड़े बताते हैं कि H-1B वीजा पाने वालों में भारतीयों की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा रही।
कुछ बड़ी कंपनियां कर्मचारियों को severance package भी दे रही हैं। उदाहरण के तौर पर Meta प्रभावित कर्मचारियों को:
दे रही है। लेकिन इसके बावजूद वीजा को लेकर अनिश्चितता और मानसिक दबाव बना हुआ है।
कभी भारतीय पेशेवरों के लिए अमेरिका करियर ग्रोथ और स्थिर भविष्य का प्रतीक माना जाता था। लेकिन लगातार छंटनी, सख्त इमिग्रेशन नियम और AI आधारित बदलावों ने अब इस सोच को बदलना शुरू कर दिया है।
हालिया सर्वे के अनुसार, अमेरिका में रह रहे लगभग आधे भारतीय पेशेवर नौकरी जाने की स्थिति में भारत लौटने पर विचार कर रहे हैं। वहीं कुछ लोग कनाडा और यूरोप जैसे विकल्पों की ओर भी देख रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह सिर्फ अस्थायी मंदी नहीं है, बल्कि टेक इंडस्ट्री के ढांचे में बड़ा बदलाव है। कंपनियां अब पारंपरिक कोडिंग और सपोर्ट रोल्स कम करके AI और ऑटोमेशन पर ज्यादा निवेश कर रही हैं।
Meta अकेले इस साल AI से जुड़े प्रोजेक्ट्स पर 100 अरब डॉलर से ज्यादा खर्च कर सकती है। इससे कर्मचारियों के बीच यह डर बढ़ रहा है कि आने वाले समय में सामान्य सॉफ्टवेयर और रूटीन इंजीनियरिंग नौकरियां लगातार कम हो सकती हैं।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
भारत में सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुई “Cockroach Janta Party” का असर अब Pakistan तक पहुंच गया है। वहां भी कई कंटेंट क्रिएटर्स और सोशल मीडिया यूजर्स “Cockroach Awami Party” जैसे नामों से नए अकाउंट और पेज बना रहे हैं। यह ट्रेंड खासकर इंस्टाग्राम पर तेजी से फैलता दिखाई दे रहा है। भारत से प्रेरित बताई जा रही नई सोशल मीडिया लहर रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान में सबसे पहले सामने आए पेजों में से एक “Cockroach Awami Party” नाम का इंस्टाग्राम अकाउंट है। इस पेज ने खुले तौर पर स्वीकार किया है कि उसे भारत की “Cockroach Janta Party” से प्रेरणा मिली है। पेज के बायो में लिखा गया है – “हां, हमने कॉपी किया है… लेकिन फर्क किसे पड़ता है, मकसद वही है।” खबर लिखे जाने तक इस अकाउंट के 1,600 से ज्यादा फॉलोअर्स हो चुके थे। लोगो और कंटेंट में भी समानता पाकिस्तान में बने इन पेजों का डिजाइन और लोगो भी भारतीय ट्रेंड से काफी मिलता-जुलता बताया जा रहा है। हालांकि वहां के पेजों में हरे और सफेद रंग का इस्तेमाल किया गया है, जो पाकिस्तान के राष्ट्रीय रंगों से मेल खाते हैं। पहली वायरल रील में लोगों से पूछा जाता है कि वे Pakistan Tehreek-e-Insaf (PTI) या Pakistan Muslim League (N) (PML-N) में से किससे जुड़े हैं। बाद में वीडियो में जवाब आता है – “नहीं, हम तो Cockroach Awami Party से हैं।” कई फर्जी और ट्रेंड आधारित अकाउंट्स सामने आए इंस्टाग्राम पर “Cockroach Awami Party” सर्च करने पर कई नए अकाउंट दिखाई दे रहे हैं। हालांकि अभी ज्यादातर पेजों के फॉलोअर्स काफी कम हैं और यह साफ माना जा रहा है कि इनमें से कई अकाउंट सिर्फ वायरल ट्रेंड का फायदा उठाने के लिए बनाए गए हैं। सोशल मीडिया विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे ट्रेंड अक्सर राजनीतिक व्यंग्य, युवा असंतोष और इंटरनेट मीम कल्चर के मिश्रण से तेजी से फैलते हैं। भारत में कैसे शुरू हुआ था ट्रेंड? भारत में “Cockroach Janta Party” ट्रेंड कथित तौर पर एक विवादित बयान और सोशल मीडिया नाराजगी के बाद शुरू हुआ था। धीरे-धीरे यह मीम और व्यंग्य आधारित डिजिटल मूवमेंट में बदल गया। इंस्टाग्राम पर इससे जुड़े पेजों ने करोड़ों व्यूज और लाखों-करोड़ों फॉलोअर्स हासिल किए, जिसके बाद यह ट्रेंड दूसरे देशों तक भी पहुंचने लगा। सोशल मीडिया पर युवाओं की नई अभिव्यक्ति विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के ट्रेंड यह दिखाते हैं कि दक्षिण एशिया के युवा पारंपरिक राजनीति से अलग इंटरनेट आधारित व्यंग्य और मीम संस्कृति के जरिए अपनी राय व्यक्त कर रहे हैं। अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि पाकिस्तान में “Cockroach Awami Party” जैसे पेज सिर्फ मनोरंजन और मीम तक सीमित रहेंगे या आगे किसी बड़े डिजिटल अभियान का रूप लेंगे।
Donald Trump और Xi Jinping के बीच हालिया बातचीत और रिश्तों में नरमी की चर्चाओं के बीच अमेरिका में चीन के खिलाफ बड़ा कदम उठाया गया है। अमेरिकी संसद में एक नया विधेयक पेश किया गया है, जिसका मकसद चीन की सेना और चीनी कम्युनिस्ट पार्टी से जुड़ी कंपनियों पर तेजी से प्रतिबंध लगाना है। इस कदम को अमेरिका की चीन के खिलाफ रणनीतिक और आर्थिक सख्ती के रूप में देखा जा रहा है। क्या है CCP Sanctions Shot Clock Act? अमेरिका में रिपब्लिकन सांसद Rick Scott और Elise Stefanik ने ‘CCP Sanctions Shot Clock Act’ नाम का विधेयक पेश किया है। इस कानून के तहत अमेरिकी ट्रेजरी विभाग को उन चीनी कंपनियों और व्यक्तियों पर एक साल के भीतर कार्रवाई करनी होगी, जिन्हें अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा माना गया है। यह विधेयक वित्त वर्ष 2026 के National Defense Authorization Act में संशोधन के रूप में लाया गया है। अब तय समय सीमा में लगेगा बैन मौजूदा व्यवस्था में अमेरिकी राष्ट्रपति हर दो साल में उन चीनी कंपनियों और नागरिकों की रिपोर्ट जारी करते हैं, जिन्हें चीन के सैन्य-औद्योगिक नेटवर्क से जुड़ा माना जाता है। लेकिन अभी तक अमेरिकी ट्रेजरी विभाग पर इन संस्थाओं को प्रतिबंधित सूची में डालने की कोई तय समय सीमा नहीं थी। नए प्रस्ताव के अनुसार, राष्ट्रपति की रिपोर्ट आने के बाद ट्रेजरी विभाग को एक साल के भीतर संबंधित कंपनियों और व्यक्तियों को “Non-SDN Chinese Military-Industrial Complex Companies List” में शामिल करना होगा। इसके बाद इस सूची को आधिकारिक रूप से फेडरल रजिस्टर में प्रकाशित किया जाएगा। “कम्युनिस्ट चीन हमारा दुश्मन” सीनेटर रिक स्कॉट ने चीन पर बेहद सख्त बयान दिया। उन्होंने कहा कि चीन की कम्युनिस्ट पार्टी अमेरिका के लिए सीधा खतरा है और अब कार्रवाई में देरी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा, “जो संस्थाएं चीनी सैन्य हितों के लिए काम कर रही हैं, उन्हें अमेरिका में कारोबार करने की अनुमति नहीं मिलनी चाहिए। कम्युनिस्ट चीन हमारा दुश्मन है और अब उसी हिसाब से कार्रवाई का समय आ गया है।” चीन पर आर्थिक निर्भरता घटाने की रणनीति एलिस स्टेफानिक ने कहा कि यह कानून रिपब्लिकन पार्टी की उस बड़ी रणनीति का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य चीन से जुड़ी आर्थिक निर्भरता कम करना है। उन्होंने कहा कि चीन के सैन्य विस्तार और दुर्भावनापूर्ण गतिविधियों से जुड़ी कंपनियों के खिलाफ अमेरिका को तेजी से कार्रवाई करनी होगी। स्टेफानिक के मुताबिक, कांग्रेस पहले ही प्रशासन से ऐसी चीनी कंपनियों की रिपोर्ट मांग चुकी है, लेकिन कार्रवाई की रफ्तार धीमी रही। नया कानून इसी प्रक्रिया को तेज करने के लिए लाया गया है। ट्रंप-शी रिश्तों पर पड़ सकता है असर यह विधेयक ऐसे समय पेश किया गया है जब हाल ही में ट्रंप और शी जिनपिंग के बीच रिश्तों में सुधार की चर्चाएं हो रही थीं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह कानून पास होता है, तो अमेरिका-चीन संबंधों में फिर तनाव बढ़ सकता है। खासकर तकनीक, रक्षा, चिप निर्माण और वैश्विक व्यापार से जुड़ी चीनी कंपनियों पर इसका बड़ा असर पड़ सकता है। वैश्विक बाजार पर भी दिख सकता है असर अमेरिका और चीन दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं हैं। ऐसे में दोनों देशों के बीच बढ़ती सख्ती का असर वैश्विक बाजार, सप्लाई चेन और निवेश माहौल पर भी पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में अमेरिका चीन की सैन्य और टेक कंपनियों पर और ज्यादा आर्थिक दबाव बना सकता है, जिससे दोनों देशों के बीच रणनीतिक प्रतिस्पर्धा और तेज होने की संभावना है।
Giorgia Meloni ने Narendra Modi की मौजूदगी में हिंदी बोलकर सभी का ध्यान खींच लिया। इटली दौरे के दौरान मेलोनी ने हिंदी में कहा— “परिश्रम ही सफलता की कुंजी है।” उनका यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। मेलोनी ने हिंदी में क्या कहा? इटली की प्रधानमंत्री ने कहा कि एक भारतीय शब्द है जो भारत और इटली के रिश्तों को बहुत अच्छी तरह व्यक्त करता है— “परिश्रम”। उन्होंने कहा: “परिश्रम का अर्थ है कड़ी मेहनत। भारत में एक लोकप्रिय कहावत है— परिश्रम ही सफलता की कुंजी है। यानी मेहनत ही सफलता का रास्ता बनाती है।” मेलोनी ने कहा कि भारत और इटली अपने संबंधों को इसी सोच और सहयोग के साथ आगे बढ़ाना चाहते हैं। भारत-इटली रिश्तों को मिली नई दिशा भारत और इटली के बीच हुई द्विपक्षीय वार्ता के बाद दोनों देशों ने अपने संबंधों को “स्पेशल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप” तक बढ़ाने पर सहमति जताई। दोनों नेताओं ने व्यापार, निवेश, स्वच्छ ऊर्जा, नई तकनीक और नवाचार जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने का फैसला किया। पीएम मोदी ने क्या कहा? संयुक्त प्रेस बयान में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि दोनों देशों के बीच रिश्तों को और मजबूत बनाने के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा हुई। प्रधानमंत्री मोदी पांच देशों की यात्रा के अंतिम चरण में रोम पहुंचे थे। मेलोनी से मुलाकात के दौरान उन्हें औपचारिक गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया गया। राष्ट्रपति सर्जियो मटारेला से भी मिले मोदी अपने इटली दौरे के दौरान पीएम मोदी ने Sergio Mattarella से भी मुलाकात की। इस दौरान दोनों नेताओं ने: व्यापार प्रौद्योगिकी स्वच्छ ऊर्जा संस्कृति और नवाचार जैसे क्षेत्रों में साझेदारी को और मजबूत बनाने पर चर्चा की। तेजी से बढ़ा भारत-इटली व्यापार इटली में भारतीय दूतावास के मुताबिक, हाल के वर्षों में दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंध तेजी से मजबूत हुए हैं। साल 2025 में भारत-इटली द्विपक्षीय व्यापार लगभग 14.25 अरब यूरो तक पहुंच गया। इसमें: भारत का निर्यात: 8.55 अरब यूरो इटली का भारत को निर्यात: 5.70 अरब यूरो रहा, जो पिछले वर्ष की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि दर्शाता है। सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो मेलोनी का हिंदी बोलने वाला वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर तेजी से शेयर किया जा रहा है। कई यूजर्स ने इसे भारत-इटली संबंधों की बढ़ती नजदीकी का प्रतीक बताया है।