मध्य अमेरिकी देश Honduras में गुरुवार को हुई दो बड़ी हिंसक घटनाओं ने पूरे देश को हिला दिया। कुछ ही घंटों के अंतराल में हुए दो अलग-अलग हमलों में बंदूकधारियों ने खेतों में काम कर रहे मजदूरों और गैंग विरोधी अभियान पर निकले पुलिसकर्मियों को निशाना बनाया। इन हमलों में कम से कम 25 लोगों की मौत हो गई, जिनमें 19 मजदूर और 6 पुलिस अधिकारी शामिल हैं।
पहला हमला उत्तरी होंडुरास के Trujillo इलाके में हुआ। यहां एक प्लांटेशन (खेती क्षेत्र) में काम कर रहे मजदूरों पर अज्ञात बंदूकधारियों ने अचानक हमला कर दिया। अधिकारियों के मुताबिक हमलावरों ने अंधाधुंध फायरिंग की, जिसमें कम से कम 19 मजदूरों की मौके पर ही मौत हो गई।
स्थानीय प्रशासन ने बताया कि यह इलाका लंबे समय से जमीन विवाद, अवैध कब्जों और ड्रग तस्करी से जुड़ी हिंसा के लिए बदनाम रहा है। हमले के बाद पूरे इलाके में दहशत फैल गई।
दूसरा हमला Omoa नगर पालिका में हुआ, जो ग्वाटेमाला सीमा के पास स्थित है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, गैंग विरोधी ऑपरेशन पर जा रही पुलिस टीम पर घात लगाकर हमला किया गया।
इस हमले में एक वरिष्ठ अधिकारी समेत 6 पुलिसकर्मियों की मौत हो गई। बताया गया कि पुलिस दल राजधानी Tegucigalpa से ऑपरेशन के लिए रवाना हुआ था, तभी रास्ते में हमलावरों ने उन्हें निशाना बनाया।
होंडुरास लंबे समय से गैंग वॉर, अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी और संगठित अपराध की समस्या से जूझ रहा है। हालांकि हाल के वर्षों में हत्या की दर में कुछ गिरावट दर्ज की गई है, लेकिन हिंसा की घटनाएं अब भी गंभीर चुनौती बनी हुई हैं।
मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि अपराध से निपटने के लिए सरकार की सख्त सैन्य रणनीति के बावजूद हालात पूरी तरह नियंत्रण में नहीं आ सके हैं। कई संगठनों ने सुरक्षा बलों पर मानवाधिकार उल्लंघन के आरोप भी लगाए हैं।
गैर-सरकारी संगठन Global Witness के अनुसार, होंडुरास पर्यावरण कार्यकर्ताओं के लिए दुनिया के सबसे खतरनाक देशों में शामिल है। रिपोर्ट के मुताबिक 2024 में यहां पांच पर्यावरण कार्यकर्ताओं की हत्या हुई, जबकि पिछले वर्ष यह संख्या 18 थी।
लगातार बढ़ती हिंसा ने एक बार फिर होंडुरास की कानून-व्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
कैलिफोर्निया: अमेरिकी आव्रजन एवं सीमा शुल्क प्रवर्तन एजेंसी (ICE) ने जर्मनी में हत्या के प्रयास के मामले में वांछित एक भारतीय नागरिक को कैलिफोर्निया से गिरफ्तार किया है। अधिकारियों के अनुसार, 40 वर्षीय संदीप सिंह अवैध रूप से अमेरिका में रह रहा था और उसके खिलाफ जर्मनी में गिरफ्तारी वारंट जारी था। कैलिफोर्निया के फेयरफील्ड से दबोचा गया आरोपी ICE की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, संदीप सिंह को कैलिफोर्निया के फेयरफील्ड इलाके से हिरासत में लिया गया। जांच एजेंसियों का कहना है कि वह जर्मनी में हत्या के प्रयास के एक मामले में वांछित था और लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी में था। मैक्सिको के रास्ते अवैध रूप से पहुंचा था अमेरिका अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, संदीप सिंह वर्ष 2023 में मैक्सिको सीमा के रास्ते गैरकानूनी तरीके से अमेरिका में दाखिल हुआ था। बाद में जांच के दौरान उसके खिलाफ जर्मनी में दर्ज गंभीर आपराधिक मामले और गिरफ्तारी वारंट की जानकारी सामने आई। फिलहाल उसे हिरासत में रखा गया है और उसे जर्मनी भेजने तथा अमेरिका से निष्कासन की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जर्मनी में हत्या के प्रयास के मामले में वांछित अमेरिकी एजेंसियों ने पुष्टि की है कि जर्मनी में संदीप सिंह के खिलाफ हत्या के प्रयास का मामला दर्ज है। मामले से जुड़े आरोपों और घटना के विस्तृत विवरण को अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है। अवैध प्रवासियों पर कार्रवाई तेज हाल के महीनों में ICE ने आपराधिक मामलों में वांछित और अवैध रूप से अमेरिका में रह रहे विदेशी नागरिकों के खिलाफ अभियान तेज किया है। इसी अभियान के तहत कई भारतीय नागरिकों के खिलाफ भी कार्रवाई की गई है। न्यू जर्सी और लॉस एंजिलिस में भी भारतीय नागरिक गिरफ्तार हाल ही में न्यू जर्सी के नेवार्क में उबैदुल्लाह अब्दुलराशिद रेडियोवाला नामक भारतीय नागरिक को भी हिरासत में लिया गया था। उस पर हत्या के प्रयास और जबरन वसूली जैसे गंभीर आरोप हैं। वहीं, कैलिफोर्निया के लॉस एंजिलिस में परमिंदरपाल सिंह नामक भारतीय नागरिक को गिरफ्तार किया गया था। अधिकारियों के अनुसार, उसके खिलाफ लूटपाट और हिंसक हमलों से जुड़े कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। आगे की कानूनी कार्रवाई जारी अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि संदीप सिंह के मामले में कानूनी प्रक्रिया जारी है। अदालत और संबंधित एजेंसियां यह तय करेंगी कि उसे जर्मनी को सौंपा जाएगा या अन्य कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल वह अमेरिकी अधिकारियों की हिरासत में है और मामले की जांच जारी है।
ओटावा: कनाडा की प्रमुख एयरलाइन एयर कनाडा के एक पूर्व पायलट को कथित लाइसेंस धोखाधड़ी के मामले में गिरफ्तार किया गया है। आरोप है कि उसने कैप्टन के लिए आवश्यक वैध लाइसेंस के बिना लगभग 17 वर्षों तक 900 से अधिक घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का संचालन किया। आरोपी पायलट जेफ्री वॉल पर आरोप है कि वर्ष 2009 से 2025 के बीच उन्होंने बोइंग 767, 777 और 787 जैसे बड़े यात्री विमानों का संचालन किया, जबकि उनके पास एयरलाइन ट्रांसपोर्ट पायलट लाइसेंस (ATPL-A) नहीं था, जो कैप्टन के पद के लिए अनिवार्य माना जाता है। 900 से अधिक उड़ानें, लाखों डॉलर की कमाई जांच एजेंसियों के अनुसार, जेफ्री वॉल ने अपने कार्यकाल के दौरान सैकड़ों उड़ानों का संचालन किया और वेतन एवं अन्य लाभों के रूप में 20 लाख अमेरिकी डॉलर से अधिक की राशि अर्जित की। अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने अपनी योग्यता और लाइसेंस संबंधी जानकारी को गलत तरीके से प्रस्तुत कर लंबे समय तक एयरलाइन और नियामक संस्थाओं को गुमराह किया। कमर्शियल लाइसेंस था, लेकिन कैप्टन बनने की अनुमति नहीं जांच में सामने आया है कि जेफ्री वॉल पूरी तरह से बिना योग्यता वाले पायलट नहीं थे। उनके पास कमर्शियल पायलट लाइसेंस मौजूद था, जिसके आधार पर वे व्यावसायिक विमान उड़ा सकते थे। 2009 में कैप्टन पद पर पदोन्नति मिलने के बाद भी उन्होंने आवश्यक उच्च स्तरीय ATPL-A लाइसेंस हासिल नहीं किया। पील रीजनल पुलिस के डिप्टी चीफ मिलिनोविच ने कहा कि यह मामला ऐसा है जैसे किसी सामान्य चिकित्सक को मस्तिष्क सर्जरी करने की अनुमति मिल जाए। उन्होंने कहा कि पेशेवर पदों के लिए निर्धारित मानकों का पालन करना सुरक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। रूटीन जांच में सामने आया बड़ा फर्जीवाड़ा इस मामले का खुलासा 2025 में दस्तावेजों की नियमित समीक्षा के दौरान हुआ। लाइसेंस संबंधी रिकॉर्ड में विसंगतियां मिलने के बाद एयर कनाडा ने मामले की जानकारी विमानन नियामक संस्थाओं को दी। इसके बाद ‘प्रोजेक्ट इकारस’ नाम से आपराधिक और नियामकीय जांच शुरू की गई। जांच शुरू होने से पहले ही जेफ्री वॉल ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली थी। एयर कनाडा बोली- सुरक्षा से कोई समझौता नहीं हुआ एयर कनाडा ने स्पष्ट किया है कि इस पूरे मामले के बावजूद यात्रियों की सुरक्षा प्रभावित नहीं हुई। एयरलाइन के अनुसार, सभी पायलटों को हर छह महीने में अनिवार्य प्रशिक्षण और नियमित दक्षता परीक्षण से गुजरना पड़ता है। कंपनी ने कहा कि उचित लाइसेंसिंग विमानन सुरक्षा प्रणाली का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और इस मामले को पूरी गंभीरता के साथ लिया जा रहा है। कई आपराधिक मामलों का सामना करेंगे जेफ्री वॉल मामले में ट्रांसपोर्ट कनाडा ने जेफ्री वॉल पर भारी जुर्माना लगाया है। इसके अलावा उन पर धोखाधड़ी, जाली दस्तावेजों के इस्तेमाल और फर्जी मुहर रखने सहित सात आपराधिक आरोप लगाए गए हैं। अदालत ने उन्हें 29 जून 2026 को पेश होने का निर्देश दिया है। यदि आरोप साबित होते हैं तो उन्हें कड़ी कानूनी कार्रवाई और सजा का सामना करना पड़ सकता है। विमानन उद्योग में उठे निगरानी व्यवस्था पर सवाल इस मामले ने कनाडा के विमानन क्षेत्र में लाइसेंस सत्यापन और निगरानी व्यवस्था को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इतने लंबे समय तक एक पायलट द्वारा आवश्यक लाइसेंस के बिना कैप्टन के रूप में उड़ान भरना नियामकीय प्रक्रियाओं की गंभीर खामी को दर्शाता है।
वॉशिंगटन/तेहरान: पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ की सख्त चेतावनी के कुछ घंटों बाद अमेरिकी सेना ने ईरान के कई रणनीतिक ठिकानों पर सैन्य कार्रवाई की। हमलों के बाद दक्षिणी ईरान के विभिन्न क्षेत्रों में विस्फोटों की खबरें सामने आई हैं, जबकि तेहरान ने जवाबी कदम उठाते हुए होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने की घोषणा कर दी है। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, सिरिक, मिनाब, बंदर अब्बास, क़ेश्म द्वीप और गोर्गान समेत कई इलाकों में विस्फोटों की आवाजें सुनी गईं। हालात की गंभीरता को देखते हुए ईरान ने कई संवेदनशील क्षेत्रों में अपने एयर डिफेंस सिस्टम सक्रिय कर दिए हैं और सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। ट्रंप प्रशासन की चेतावनी के बाद हुई कार्रवाई अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने पहले ही संकेत दिया था कि यदि ईरान अपने रवैये में बदलाव नहीं करता, तो उसके महत्वपूर्ण सैन्य और रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया जाएगा। अमेरिकी हमले उसी चेतावनी के बाद किए गए, जिससे दोनों देशों के बीच टकराव और गहरा गया है। ईरान ने बंद किया होर्मुज स्ट्रेट अमेरिकी हमलों के बाद ईरान के संयुक्त सैन्य कमान ने गुरुवार को घोषणा की कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज स्ट्रेट को तत्काल प्रभाव से बंद किया जा रहा है। सैन्य अधिकारियों ने कहा कि अब इस समुद्री मार्ग से किसी भी तेल टैंकर या व्यावसायिक जहाज को गुजरने की अनुमति नहीं दी जाएगी। ईरान ने चेतावनी दी कि प्रतिबंध के बावजूद इस मार्ग का इस्तेमाल करने की कोशिश करने वाले जहाजों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। घोषणा के कुछ समय बाद ईरानी मीडिया ने दावा किया कि होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने का प्रयास कर रहे दो जहाजों को इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने रोक दिया। अमेरिका ने किया ईरानी दावों का खंडन अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने ईरान के दावों को खारिज करते हुए कहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री यातायात जारी है और अंतरराष्ट्रीय नौवहन गतिविधियों पर फिलहाल कोई व्यापक असर नहीं पड़ा है। वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है असर विशेषज्ञों का मानना है कि यदि होर्मुज स्ट्रेट में तनाव लगातार बढ़ता है, तो इसका सीधा प्रभाव वैश्विक तेल आपूर्ति और ऊर्जा बाजारों पर पड़ सकता है। दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल इसी समुद्री मार्ग से होकर गुजरता है। ऐसे में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता सैन्य टकराव अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के लिए भी चिंता का विषय बन गया है। फिलहाल दोनों देशों की ओर से आक्रामक बयानबाजी जारी है और क्षेत्रीय हालात पर दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं।