पटना,एजेंसियां। प्रशांत किशोर की कंपनी I-PAC (Indian Political Action Committee) के दफ्तर पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की रेड के बाद एक बार फिर पश्चिम बंगाल के चर्चित कोयला घोटाले की चर्चा तेज हो गई है। यह मामला दरअसल ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ECL) के लीज एरिया से कथित अवैध कोयला खनन, चोरी, तस्करी और उससे कमाए गए पैसे की मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा है। ED ने यह जांच 2020 में CBI द्वारा दर्ज FIR के आधार पर शुरू की थी। एजेंसियों के अनुसार, इस सिंडिकेट का कथित मास्टरमाइंड अनूप माझी उर्फ ‘लाला’ था, जिस पर ECL, CISF, रेलवे और अन्य विभागों के कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से कोयला चोरी कराने के आरोप हैं। जांच में क्या आया सामने ? जांच में यह आरोप सामने आया कि ECL के कुनुस्तोरिया और कजोरा क्षेत्रों से बड़े पैमाने पर कोयला अवैध रूप से निकाला गया और उसे विभिन्न फैक्ट्रियों व कंपनियों तक पहुंचाया गया। CBI और ED की कार्रवाई में कई जगह छापे पड़े, दस्तावेज और डिजिटल सबूत मिले, और कई आरोपियों के नाम सामने आए। ED के मुताबिक अब तक इस केस में 2,742.32 करोड़ रुपये तक की “प्रोसीड्स ऑफ क्राइम” (अपराध से अर्जित रकम) चिन्हित की गई है। एजेंसी ने पहले भी कई संपत्तियां अटैच की हैं और इस मामले में गिरफ्तारी व चार्जशीट की कार्रवाई हो चुकी है। I-PAC का नाम कैसे जुड़ा? ताजा मोड़ तब आया जब ED ने दावा किया कि कोयला तस्करी से जुड़ी काली कमाई का एक हिस्सा हवाला नेटवर्क के जरिए I-PAC तक पहुंचाया गया। रिपोर्टों के मुताबिक, जांच में करीब 20 करोड़ रुपये के कथित ट्रांसफर की बात सामने आई, जिसे गोवा में 2021-22 के दौरान I-PAC के ऑपरेशंस से जोड़ा गया। इसी कड़ी में ED ने I-PAC से जुड़े परिसरों पर तलाशी ली। हालांकि, जांच एजेंसियों के आरोप और कोर्ट में साबित अपराध—दोनों अलग बातें हैं, इसलिए अंतिम सच न्यायिक प्रक्रिया से ही तय होगा। फिलहाल, यह मामला सिर्फ कोयला चोरी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राजनीति, हवाला और चुनावी मैनेजमेंट नेटवर्क तक फैलता दिख रहा है।
पटना, एजेंसियां। बिहार की राजनीति में बड़े बदलाव के संकेतों के बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अहम अपडेट सामने आया है। खबर है कि मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद भी उनकी सुरक्षा में कोई कमी नहीं होगी, बल्कि उनका सुरक्षा घेरा और मजबूत किया जाएगा। मौजूदा समय में उन्हें मुख्यमंत्री होने के नाते SSG सुरक्षा प्राप्त है, लेकिन इस्तीफे के बाद उन्हें Z+ श्रेणी की अतिरिक्त सुरक्षा भी दी जाएगी। इस संबंध में राज्य के गृह विभाग की विशेष शाखा की ओर से आदेश जारी किए जाने की खबर है। सूत्रों के अनुसार सूत्रों के अनुसार, नीतीश कुमार जल्द ही राज्यसभा की सदस्यता ग्रहण कर सकते हैं। रिपोर्ट्स में कहा गया है कि वे 10 अप्रैल को राज्यसभा सांसद के रूप में शपथ ले सकते हैं। इसके लिए उनके 8 या 9 अप्रैल को दिल्ली जाने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, मुख्यमंत्री पद से इस्तीफे की आधिकारिक तारीख अभी स्पष्ट नहीं है, लेकिन बिहार की सियासत में इसे बड़े नेतृत्व परिवर्तन के रूप में देखा जा रहा है। MLC पद छोड़ चुके, अब नजर CM कुर्सी पर नीतीश कुमार पहले ही 30 मार्च को बिहार विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे चुके हैं। यह कदम उनके राज्यसभा जाने की प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि मुख्यमंत्री आवास छोड़ने के बाद वे किसी दूसरे सरकारी आवास में शिफ्ट हो सकते हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने बिहार में सत्ता परिवर्तन की अटकलों को और तेज कर दिया है। चारों सदनों के सदस्य बनने की ओर बड़ा कदम अगर नीतीश कुमार राज्यसभा की शपथ लेते हैं, तो वे उन चुनिंदा नेताओं में शामिल होंगे जो विधानसभा, विधान परिषद, लोकसभा और राज्यसभा—चारों सदनों का हिस्सा रह चुके हैं। फिलहाल, उनकी सुरक्षा और राजनीतिक भूमिका—दोनों को लेकर बिहार में हलचल तेज है।
पटना/मोकामा, एजेंसियां। बिहार में बढ़ते अपराध को लेकर मोकामा के बाहुबली विधायक अनंत सिंह का बयान राजनीतिक बहस का नया कारण बन गया है। उन्होंने कहा कि “भगवान भी मुख्यमंत्री बन जाएं तो मर्डर नहीं रुकेगा।” इस बयान के बाद राज्य की कानून-व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। अपराध पर क्या बोले अनंत सिंह अनंत सिंह ने कहा कि बिहार में हत्या की घटनाएं पूरी तरह खत्म होना संभव नहीं है, क्योंकि अधिकतर अपराध आपसी रंजिश, निजी विवाद और दुश्मनी के कारण होते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार हर घर में पुलिस तैनात नहीं कर सकती, इसलिए हर घटना को रोकना संभव नहीं है। पुराने बिहार से की तुलना अपने बयान में उन्होंने मौजूदा बिहार की तुलना पुराने दौर से भी की। उनका कहना था कि पहले राज्य में अपहरण और अपराध का डर ज्यादा था, जबकि अब हालात पहले से बेहतर हैं। उन्होंने कहा कि अगर अब कहीं किडनैपिंग की घटना होती भी है, तो पीड़ित को जल्दी छोड़ दिया जाता है, जो बदलाव का संकेत है। CM चेहरे पर भी खुलकर बोले अनंत सिंह ने राजनीति पर भी बेबाकी से राय रखी। उन्होंने कहा कि जेडीयू से निशांत कुमार और बीजेपी से सम्राट चौधरी अच्छे मुख्यमंत्री बन सकते हैं। हालांकि, उन्होंने नीतीश कुमार की तारीफ करते हुए कहा कि उनके जैसा नेता दूसरा नहीं है और उनके काम को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। दंगल और परिवार की राजनीति उन्होंने अपने गांव नदमा में आयोजित होने वाले महा दंगल का भी जिक्र किया, जिसमें 100 से अधिक पहलवानों के भाग लेने और लाखों लोगों के पहुंचने की उम्मीद जताई। साथ ही संकेत दिए कि अब वे खुद चुनाव नहीं लड़ना चाहते और अपने बड़े बेटे को राजनीति में आगे बढ़ाना चाहते हैं। बयान से बढ़ी सियासी हलचल अनंत सिंह के बयान ने बिहार की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। अब देखना होगा कि विपक्ष और सत्ता पक्ष इस मुद्दे को किस तरह उठाते हैं।
पटना, एजेंसियां। बिहार के नालंदा में शीतला माता मंदिर भगदड़ मचने से 8 लोगों की मौत हो गईस जबकि दर्जनों लोग घायल हो गए। इस घटना को लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने दुख जताया है। साथ ही मृतकों के लिए मुआवजा देने का ऐलान किया है। नीतीश सरकार ने भगदड़ में मरने वाले श्रद्धालुओं के आश्रितों को 6-6 लाख रुपए मुआवजा देने की घोषणा की है वहीं घायलों को मुफ्त इलाज देने की बात कही है। जानकारी के मुताबिक, मृतकों में 7 महिलाएं हैं। घायलों को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका इलाज चल रही है। शीतला अष्टमी पूजा के दौरान हादसा दरअसल यह हादसा मंदिर में शीतला अष्टमी पूजा के दौरान हुई। शीतला अष्टमी पूजा को लेकर मंदिर परिसर में भारी भीड़ जमा थी। इसी दौरान अचानक धक्का-मुक्की का सिलसिला शुरू हुआ और लोग एक-दूसरे पर गिरते चले गए। भीड़ में दबने के कारण आठ लोगों की मौत हो गई। शीतलाष्टमी मेला लगता है यहा दरअसल इस मंदिर की मान्यता है कि इस पूजा के उपलक्ष्य में शीतलाष्टमी मेला लगता है। मेला के दिन मघड़ा और इसके आसपास के दर्जनों गांवों में चूल्हा नहीं जलता है। लोग एक दिन पहले ही खाना बनाकर दूसरे दिन प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं। शीतला मंदिर के पुजारी ने बताया कि चैत्र कृष्ण पक्ष अष्टमी के दिन यहां देश के कोने-कोने से लोग पूजा अर्चना करने आते हैं। व्रत की विशेषता यह कि इसमें शीतला देवी को भोग लगाने वाला पदार्थ एक दिन पहले ही बना लिया जाता है। बासी भोग लगाने की परंपरा है। चैत्र अष्टी के मौके पर मां शीतला की पूजा-अर्चना के लिए सूबे के विभिन्न जिलों के अलावा झारखंड, बंगाल और उत्तर प्रदेश से भी काफी संख्या में श्रद्धालुओं आते हैं। मघड़ा गांव में काफी पुराना मिट्ठी कुआं है। इसी कुएं के पानी से सप्तमी की शाम में बसिऔरा के लिए भोजन तैयार किया जाता है। प्रसाद में अरवा चावल, चने की दाल, सब्जियां, पुआ, पकवान आदि बनाया जाता है। खास बात यह कि मां शीतला मंदिर में दिन में दीपक नहीं जलते हैं। दूर-दराज़ से आए श्रद्धालु, व्रत-पूजा और वासी भोग की परंपरा निभाने पहुंचे थे। लोगों का कहना है कि इस मंदिर में जाने से चर्म रोग और बच्चों की बीमारियों से निजात मिलता है।
पटना, एजेंसियां। बिहार में मंगलवार सुबह दो लोक सेवकों के खिलाफ आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने छापा मारा है। यह मामला आय से अधिक संपत्ति का बताया जा रहा है। एक तरफ किशनगंज में DSP गौतम कुमार के पटना, पूर्णिया और किशनगंज स्थित उनके कुल 6 ठिकानों पर EOW की छापामारी चल रही है। बताया जा रहा है कि डीएसपी गौतम कुमार पर किशनगंज में आय से 60 प्रतिशत अधिक आय रखने के आरोप हैं। दूसरी ओर सहरसा में DRDO निदेशक वैभव कुमार के छह ठिकानों पर भी आर्थिक अपराध इकाई की छापेमारी चल रही है। वैभव कुमार के सहरसा एवं मुज्जफरपुर स्थित छह ठिकानों पर छापामारी चल रही है। इन पर अपने आय से 70 प्रतिशत से अधिक का आय जमा करने का मामला है। यह पूरी कार्रवाई अपर पुलिस अधीक्षक, वरीय पुलिस अधीक्षक और पुलिस उपाधीक्षक स्तर के अधिकारियों के नेतृत्व में की जा रही है।
पटना, एजेंसियां। बिहार क सीएम नीतीश कुमार ने एमएलसी का पद छोड़ दिया है। वहीं, बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने एमएलए के पद से इस्तीफा दे दिया है। बिहार की राजनीति में एक साथ दो बड़े फैसलों ने हलचल बढ़ा दी है। बीजेपी नेता नितिन नवीन बांकीपुर सीट से विधायक थे। दोनों नेताओं के इस्तीफे के बाद राज्य में सियासी चर्चाएं तेज हो गई हैं और आने वाले दिनों में बड़े बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। दिल्ली जायेंगे नीतीश कुमार नीतीश कुमार हाल ही में राज्यसभा के लिए चुने गए हैं और अब वे राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाएंगे। लंबे समय तक बिहार की राजनीति के केंद्र में रहे नीतीश अब दिल्ली की राजनीति में नई जिम्मेदारी संभालेंगे। वहीं नितिन नवीन को भी पार्टी ने नई भूमिका दी है, जिसके तहत वे आगे काम करेंगे। बिहार में नेतृत्व परिवर्तन की चर्चा नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद बिहार में नेतृत्व परिवर्तन की चर्चा तेज हो गई है। माना जा रहा है कि आने वाले समय में नए मुख्यमंत्री के चयन की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। हालांकि अभी आधिकारिक तौर पर कुछ स्पष्ट नहीं है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे बड़े बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है। चारों सदनों में प्रतिनिधित्व का रिकॉर्ड नीतीश कुमार उन चुनिंदा नेताओं में शामिल हो गए हैं, जिन्होंने देश के चारों सदनों का हिस्सा बनने का गौरव हासिल किया है। 1985 में हरनौत से विधायक बनकर उन्होंने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की थी। 1989 में लोकसभा पहुंचे, फिर 2006 से लगातार विधान परिषद के सदस्य रहे और अब राज्यसभा में नई भूमिका निभाएंगे। इस्तीफे से पहले बैठक इस्तीफे से पहले पटना स्थित मुख्यमंत्री आवास पर जदयू के वरिष्ठ नेताओं के साथ अहम बैठक हुई। इसमें ललन सिंह, संजय कुमार झा, विजय कुमार चौधरी और अशोक चौधरी जैसे नेता शामिल हुए। बैठक में आगे की रणनीति और राजनीतिक हालात पर चर्चा की गई। नितिन नवीन ने दिया भावुक संदेश नितिन नवीन ने अपने इस्तीफे का ऐलान सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर किया। उन्होंने लिखा कि विधायक के रूप में काम करना उनके लिए एक खास अनुभव रहा। उन्होंने कहा कि पार्टी ने उन्हें जो नई जिम्मेदारी दी है, उसके जरिए भी वे बिहार के विकास के लिए काम करते रहेंगे और जनता से उनका रिश्ता हमेशा मजबूत रहेगा। आगे दोनों नेताओं की भूमिका पर नजर इन दोनों बड़े इस्तीफों के बाद बिहार की राजनीति एक नए मोड़ पर खड़ी नजर आ रही है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि राज्यसभा में इन नेताओं की भूमिका क्या होगी और बिहार में नेतृत्व को लेकर क्या फैसला सामने आता है।
पटना, एजेंसियां। दहेज हत्या के एक गंभीर मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए आरोपी पति को दी गई जमानत रद्द कर दी है। शीर्ष अदालत ने साफ कहा कि ऐसे जघन्य अपराधों में केवल जेल में बिताए समय के आधार पर जमानत देना न्यायसंगत नहीं है। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि हाईकोर्ट का आदेश “मशीनी ढंग” से पारित हुआ, जिसमें मामले की गंभीरता और उपलब्ध तथ्यों पर पर्याप्त विचार नहीं किया गया। सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी को एक सप्ताह के भीतर सरेंडर करने का आदेश दिया है। हाईकोर्ट के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जमानत पर फैसला करते समय अदालतों को केवल यह नहीं देखना चाहिए कि आरोपी कितने समय से जेल में है, बल्कि यह भी देखना चाहिए कि अपराध की प्रकृति कितनी गंभीर है, आरोपी और पीड़िता के बीच क्या संबंध था, घटना कहां और किन परिस्थितियों में हुई, और पोस्टमार्टम जैसी मेडिकल रिपोर्ट क्या संकेत देती है। अदालत ने माना कि दहेज हत्या जैसे मामलों में न्यायिक विवेक का इस्तेमाल बेहद सावधानी से होना चाहिए। क्यों अहम है यह फैसला रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामला एक विवाहित महिला की संदिग्ध मौत से जुड़ा है, जिसकी शादी के कुछ ही समय बाद ससुराल में मौत हो गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में कानूनी धाराओं के तहत एक विशेष वैधानिक अनुमान (statutory presumption) भी लागू होता है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि वह मामले के ट्रायल पर कोई टिप्पणी नहीं कर रही, लेकिन जमानत देने का आधार कानून और तथ्यों पर टिकना चाहिए। न्याय व्यवस्था को दिया स्पष्ट संदेश यह फैसला निचली अदालतों और हाईकोर्ट्स के लिए भी एक महत्वपूर्ण संदेश माना जा रहा है कि गंभीर आपराधिक मामलों में जमानत आदेश संक्षिप्त या औपचारिक तरीके से नहीं दिए जा सकते। सुप्रीम कोर्ट के इस रुख से यह साफ है कि दहेज हत्या जैसे मामलों में अदालतें अब अधिक संवेदनशील और सख्त नजरिया अपनाने की अपेक्षा रखती हैं।
पटना, एजेंसियां। नीतीश कुमार को एक बार फिर जनता दल यूनाइटेड (JDU) का राष्ट्रीय अध्यक्ष निर्विरोध चुना गया है। पार्टी के भीतर हुए इस चुनाव में उनके खिलाफ किसी अन्य नेता ने नामांकन दाखिल नहीं किया, जिसके चलते उन्हें सर्वसम्मति से अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सौंप दी गई। नामांकन प्रक्रिया में नहीं मिला कोई चुनौतीकर्ता पार्टी द्वारा तय समय सीमा के अनुसार अध्यक्ष पद के लिए नामांकन की अंतिम समयसीमा 24 मार्च 2026 को सुबह 11 बजे तक थी। इस दौरान केवल नीतीश कुमार ने ही अपना नामांकन दाखिल किया। किसी अन्य उम्मीदवार के सामने न आने के कारण निर्वाचन अधिकारी अनिल प्रसाद हेगड़े ने उन्हें निर्विरोध विजेता घोषित करने की प्रक्रिया पूरी की। वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में हुआ फैसला इस मौके पर पार्टी के कई बड़े नेता मौजूद रहे। इनमें संजय कुमार झा, राजीव रंजन सिंह (ललन सिंह) और श्रवण कुमार जैसे वरिष्ठ चेहरे शामिल थे। सभी नेताओं ने नीतीश कुमार के नेतृत्व पर भरोसा जताया और पार्टी को आगे बढ़ाने की उम्मीद व्यक्त की। राजनीतिक पृष्ठभूमि और बदलाव गौरतलब है कि दिसंबर 2023 में ललन सिंह के इस्तीफे के बाद नीतीश कुमार ने पार्टी की कमान संभाली थी। उस समय पार्टी महागठबंधन का हिस्सा थी, लेकिन बाद में JDU ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) में वापसी कर ली। इस बदलाव ने बिहार की राजनीति में बड़ा असर डाला। भविष्य की राजनीति पर नजर हाल ही में मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने और राज्यसभा पहुंचने के बाद नीतीश कुमार का यह चयन राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है। साथ ही उनके बेटे निशांत कुमार की राजनीति में एंट्री को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। ऐसे में आने वाले समय में बिहार की राजनीति में नए समीकरण बनने की संभावना जताई जा रही है।
पटना: बिहार के हवाई यात्रियों के लिए होली के बाद का समय बड़ी राहत और सुविधा लेकर आ रहा है। जयप्रकाश नारायण अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा से अब महाराष्ट्र के दो प्रमुख शहरों-नवी मुंबई और पुणे-के लिए सीधी उड़ान सेवा शुरू होने जा रही है। यह कदम न केवल यात्रियों की सुविधा बढ़ाएगा, बल्कि राज्य की आर्थिक और सामाजिक कनेक्टिविटी को भी नई दिशा देगा। नवी मुंबई के लिए पहली नॉन-स्टॉप उड़ान अब तक पटना से नवी मुंबई के लिए सीधी उड़ान नहीं होने के कारण यात्रियों को कनेक्टिंग फ्लाइट्स या लंबी यात्रा का सहारा लेना पड़ता था। लेकिन 29 मार्च से IndiGo इस रूट पर अपनी नॉन-स्टॉप सेवा शुरू करने जा रहा है। यह फ्लाइट सप्ताह के सातों दिन उपलब्ध रहेगी, जिससे यात्रियों को बड़ी सहूलियत मिलेगी। इस नई सेवा के शुरू होने के बाद व्यापार, नौकरी और शिक्षा के सिलसिले में मुंबई क्षेत्र जाने वाले लोगों को अब समय और खर्च दोनों में राहत मिलेगी। यह उड़ान सीधे कनेक्टिविटी का एक नया अध्याय खोलने जा रही है। पुणे के लिए भी सीधी कनेक्टिविटी नवी मुंबई के साथ-साथ पुणे के लिए भी पटना से सीधी उड़ान सेवा 30 मार्च से शुरू हो रही है। पुणे, जो देश का एक प्रमुख शिक्षा और आईटी हब माना जाता है, अब बिहार के यात्रियों के लिए और अधिक सुलभ हो जाएगा। इस फ्लाइट की टाइमिंग खास तौर पर कामकाजी और बिजनेस यात्रियों को ध्यान में रखकर तय की गई है। विमान देर रात करीब 2 बजे पटना पहुंचेगा और उसी दिन वापसी उड़ान पुणे के लिए भरेगा। यह शेड्यूल उन यात्रियों के लिए बेहद उपयोगी होगा जो रात में यात्रा करना पसंद करते हैं या सुबह जल्दी अपने गंतव्य तक पहुंचना चाहते हैं। व्यापार और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा नई उड़ानों के शुरू होने से बिहार और महाराष्ट्र के बीच व्यापारिक गतिविधियों को नई गति मिलने की उम्मीद है। खासकर आईटी, शिक्षा और कॉर्पोरेट सेक्टर से जुड़े लोगों के लिए यह कनेक्टिविटी एक बड़ा अवसर साबित हो सकती है। पटना एयरपोर्ट की लगातार बढ़ती उड़ान सेवाएं इस बात का संकेत हैं कि आने वाले समय में बिहार देश के प्रमुख हवाई नेटवर्क का अहम हिस्सा बनने की ओर बढ़ रहा है।
पटना: बिहार की राजधानी पटना से एक बेहद प्रेरणादायक और मानवीय घटना सामने आई है, जहां एक ट्रैफिक कॉन्स्टेबल की सूझबूझ और तत्परता ने एक जवान की जिंदगी बचा ली। बिहार पुलिस द्वारा साझा किए गए इस वीडियो ने सोशल मीडिया पर लोगों का दिल जीत लिया है, और अब हर कोई इस पुलिसकर्मी की सराहना कर रहा है। क्या है पूरा मामला? घटना पटना के मीठापुर बाइपास की है, जहां से गुजर रहे एक CISF जवान को अचानक सांस लेने में दिक्कत हुई और वह सड़क पर ही गिर पड़ा। मौके पर मौजूद लोगों ने तुरंत ट्रैफिक पुलिस को सूचना दी। कुछ ही पलों में एक ट्रैफिक कॉन्स्टेबल वहां पहुंचा और स्थिति की गंभीरता को समझते हुए बिना देर किए CPR (कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन) देना शुरू कर दिया। कैसे बची जवान की जान? वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि जवान लगभग बेहोशी की हालत में था। ट्रैफिक कॉन्स्टेबल ने लगातार CPR देकर उसकी सांसें वापस लाने की कोशिश की। कुछ ही देर में जवान को होश आ गया, जिससे वहां मौजूद लोगों ने राहत की सांस ली। इसके बाद कॉन्स्टेबल ने जवान को निर्देश दिया कि वह सिर नीचे रखे, पैर फैलाए और पानी पीकर खुद को सामान्य करे। उनकी सतर्कता और सही समय पर लिए गए फैसले ने एक बड़ी अनहोनी को टाल दिया। बिहार पुलिस का संदेश इस घटना का वीडियो साझा करते हुए बिहार पुलिस ने लिखा- “बिहार पुलिस सदैव आपके साथ। हर संकट में आपके साथ, हर परिस्थिति में आपके लिए समर्पित। आपकी सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।” सोशल मीडिया पर मिल रही जमकर तारीफ वीडियो वायरल होते ही लोग ट्रैफिक कॉन्स्टेबल की तारीफ करते नहीं थक रहे हैं। एक यूजर ने लिखा, “सैल्यूट इस जज्बे को।” दूसरे ने कहा, “CPR की ट्रेनिंग हर स्कूल-कॉलेज में जरूरी होनी चाहिए।” वहीं एक अन्य यूजर ने लिखा, “वेलडन, बदलता हुआ बिहार।” क्यों खास है यह घटना? यह घटना सिर्फ एक जान बचाने की नहीं, बल्कि आपात स्थिति में सही प्रशिक्षण और त्वरित निर्णय की अहमियत को भी दर्शाती है। अगर हर नागरिक को CPR जैसी जीवन रक्षक तकनीक की जानकारी हो, तो कई जिंदगियां बचाई जा सकती हैं।
पटना: बिहार की राजधानी पटना में करोड़ों की ठगी के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए पुलिस ने कथित मास्टरमाइंड राहुल कालरा और उनकी पत्नी रुचिका कालरा को हरियाणा के गुरुग्राम स्थित एक होटल से गिरफ्तार कर लिया है। दोनों पर कपड़ा धुलाई कंपनी की फ्रेंचाइजी दिलाने के नाम पर करीब 100 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी का आरोप है। विदेश भागने की तैयारी में थे आरोपी पटना पुलिस के मुताबिक, राहुल कालरा और उनकी पत्नी विदेश फरार होने की फिराक में थे। इसी दौरान पुलिस को इनकी लोकेशन मिली और छापेमारी कर दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया। अब ट्रांजिट रिमांड पर उन्हें पटना लाकर पूछताछ की जाएगी। फ्रेंचाइजी के नाम पर करोड़ों की ठगी जांच में सामने आया है कि राहुल कालरा खुद को एक प्रतिष्ठित वॉशिंग (कपड़ा/वाहन धुलाई) कंपनी का संचालक बताकर लोगों को फ्रेंचाइजी देने का झांसा देता था। कई कारोबारियों ने इस झांसे में आकर करोड़ों रुपये निवेश किए, लेकिन: न तो कोई यूनिट स्थापित की गई न मशीनें उपलब्ध कराई गईं और न ही निवेशकों को पैसा वापस मिला पटना समेत कई शहरों में दर्ज केस इस मामले में गांधी मैदान थाना में दो अलग-अलग एफआईआर दर्ज हैं। एक केस साल 2025 में दूसरा जनवरी 2026 में दर्ज हुआ एक पीड़ित ने 1.85 करोड़ रुपये की ठगी की शिकायत दर्ज कराई है। इसके अलावा एसके पुरी थाना में भी मामला दर्ज है। देशभर में फैला था ठगी का नेटवर्क जांच में यह भी सामने आया है कि इस गिरोह ने बिहार के अलावा अन्य राज्यों में भी लोगों को निशाना बनाया। भागलपुर और बेंगलुरु जैसे शहरों में भी निवेशकों से ठगी के मामले सामने आए हैं। पुलिस को शक है कि यह एक बड़ा संगठित नेटवर्क है। कौन है राहुल कालरा? राहुल कालरा पटना के पाटलिपुत्र कॉलोनी में रह चुका है खुद को एक निजी कंपनी का मैनेजिंग डायरेक्टर (MD) बताता था कपड़ा और वाहन धुलाई से जुड़ा कारोबार चलाने का दावा करता था इसी कारोबार की फ्रेंचाइजी के नाम पर लोगों को निवेश के लिए फंसाता था इस पूरे खेल में उसकी पत्नी रुचिका कालरा और अन्य सहयोगियों की भी भूमिका सामने आई है। ठिकाना बदल-बदल कर छिप रहे थे आरोपी गिरफ्तारी से बचने के लिए दोनों लगातार अपना ठिकाना बदल रहे थे। आखिरकार पुलिस को इनकी जानकारी गुरुग्राम के एक होटल में मिली, जहां से उन्हें दबोच लिया गया। पुलिस करेगी बड़ा खुलासा पटना पुलिस इस पूरे मामले का विस्तृत खुलासा करने की तैयारी में है। पूछताछ के बाद ठगी के नेटवर्क और अन्य शामिल लोगों के बारे में और बड़े खुलासे होने की संभावना है।
68.41 करोड़ की लागत से तैयार होगा आधुनिक बाजार, ई-नाम से जुड़कर देश-विदेश तक पहुंचेगा उत्पाद पटना: बिहार के किसानों के लिए बड़ी राहत की खबर है। राजधानी पटना के मुसल्लहपुर कृषि उत्पादन बाजार प्रांगण को अब हाईटेक मंडी के रूप में विकसित किया जा रहा है। इस परियोजना के पूरा होने के बाद किसानों और व्यापारियों को आधुनिक सुविधाओं से लैस एक सुव्यवस्थित बाजार मिलेगा। 68 करोड़ से होगा आधुनिकरण कृषि विभाग की ओर से इस प्रोजेक्ट के लिए 68.41 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है। निर्माण कार्य बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड के जरिए कराया जा रहा है। इस हाईटेक मंडी में पेयजल, शौचालय, बिजली, सुरक्षा, ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म और गोदाम जैसी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। ई-नाम से जुड़ेगा बाजार इस मंडी को ई-नाम (e-NAM) प्लेटफॉर्म से जोड़ा जाएगा, जिससे किसानों को अपने उत्पाद देश और विदेश की मंडियों में बेचने का मौका मिलेगा। इससे उन्हें फसल का बेहतर मूल्य मिलने की संभावना बढ़ेगी और बिचौलियों पर निर्भरता भी कम होगी। किसानों और व्यापारियों को मिलेंगी खास सुविधाएं मंडी के आधुनिकीकरण के बाद यहां- कोल्ड स्टोरेज की सुविधा संतरा भंडारण के लिए विशेष चैंबर प्रदर्शनी हॉल जैसी आधुनिक व्यवस्थाएं उपलब्ध कराने की योजना है। इसके अलावा किसानों की गाड़ियों के आवागमन को आसान बनाने के लिए भी विशेष मांगें उठाई गई हैं। निर्माण कार्य 2026 के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य निर्माण एजेंसी के अनुसार, इस परियोजना को साल 2026 के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके बाद यह मंडी पूरी तरह आधुनिक स्वरूप में काम करने लगेगी। जमीन सीमांकन में आ रही दिक्कत हालांकि, बाजार परिसर के लगभग तीन-चौथाई हिस्से का सीमांकन अब तक पूरा नहीं हुआ है, जिससे चहारदीवारी निर्माण का काम शुरू नहीं हो सका है। प्रशासन ने संबंधित अधिकारियों को जल्द इस प्रक्रिया को पूरा करने का निर्देश दिया है।
सावरकरवाद- पटेलवाद के पोस्टरों से गरमाया माहौल, प्रशासन सतर्क; छात्र राजनीति में तेज हुई वैचारिक टकराहट पटना: बिहार की राजधानी स्थित पटना विश्वविद्यालय इन दिनों एक नए विवाद के केंद्र में है। ‘मनुस्मृति’ जलाने की घटना से शुरू हुआ विवाद अब पोस्टर पॉलिटिक्स में बदल गया है, जिससे पूरे कैंपस का माहौल तनावपूर्ण हो गया है। रातोंरात लगे भड़काऊ पोस्टर रविवार सुबह जब छात्र कैंपस पहुंचे, तो विश्वविद्यालय परिसर की दीवारों पर कई विवादित पोस्टर लगे मिले। इन पोस्टरों में ‘शरियाबाद’ और ‘मीमवाद’ के खिलाफ नारे लिखे गए थे, वहीं ‘अंबेडकरवाद’, ‘सावरकरवाद’ और ‘पटेलवाद’ के समर्थन में संदेश दिए गए थे। इन पोस्टरों ने छात्र-छात्राओं के बीच बहस को और तेज कर दिया है। मनुस्मृति दहन से शुरू हुआ विवाद दरअसल, कुछ दिन पहले मनुस्मृति जलाने की घटना ने पूरे विवाद को जन्म दिया। यह घटना एक कार्यक्रम के दौरान हुई, जहां पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष मनीष यादव ने मंच से मनुस्मृति दहन किया और कुछ बयान दिए। इस घटना को लेकर कैंपस में दो धड़े बन गए-एक पक्ष इसे सामाजिक न्याय का प्रतीक मान रहा है, तो दूसरा इसे भारतीय परंपरा के खिलाफ बता रहा है। पोस्टर अभियान के पीछे छात्र संगठन सूत्रों के अनुसार, यह पोस्टर अभियान अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से जुड़े छात्र नेताओं द्वारा चलाया गया है। बताया जा रहा है कि यह अभियान मनुस्मृति दहन के विरोध में शुरू किया गया। हालांकि, इसको लेकर आधिकारिक तौर पर कोई स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है। UGC मुद्दे ने और बढ़ाया तनाव इस पूरे घटनाक्रम के बीच University Grants Commission (UGC) से जुड़े मुद्दों पर भी छात्र संगठनों का विरोध जारी है। हाल ही में मशाल जुलूस और प्रदर्शन हुए, जिससे पहले से ही माहौल गरम था। अब पोस्टर वॉर ने इस तनाव को और बढ़ा दिया है। प्रशासन और पुलिस अलर्ट विश्वविद्यालय प्रशासन और पुलिस स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोकने के लिए कैंपस में निगरानी बढ़ा दी गई है।
पटना, एजेंसियां। जम्मू-कश्मीर में आतंकवादियों के साथ हुई मुठभेड़ में बिहार के समस्तीपुर जिले के लोदीपुर गांव के निवासी, भारतीय सेना के जवान सीताराम राय शहीद हो गए। बुधवार सुबह ड्यूटी पर जाने से पहले उन्होंने अपनी पत्नी सुमन राय से वीडियो कॉल के माध्यम से बात की थी और ड्यूटी के लिए निकलने की सूचना दी थी। कुछ ही घंटों बाद परिवार को उनकी घायल होने की खबर मिली और तत्पश्चात शहीद होने की सूचना ने पूरे परिवार और गांव को झकझोर दिया। सीताराम राय के दोस्त सरबेंदु ने बताया सीताराम राय के दोस्त सरबेंदु ने बताया कि सुबह करीब 11 बजे पत्नी को सेना यूनिट से फोन आया कि उन्हें गोली लगी है। इसके कुछ समय बाद ही शहीद होने की पुष्टि हुई। इस दुखद खबर के बाद परिवार में गम छा गया।जवान का पार्थिव शरीर जैसे ही पैतृक गांव पहुंचा, पूरे गांव में शोक और गर्व का मिश्रित माहौल देखने को मिला। अंतिम दर्शन के लिए भारी संख्या में लोग जुटे और “भारत माता की जय” व “वंदे मातरम” के नारों से गांव गूंज उठा। मौके पर स्थानीय विधायक रणविजय साहू भी पहुंचे और शहीद को श्रद्धांजलि दी। संघर्ष और मेहनत की मिसाल है सीताराम राय का परिवार संघर्ष और मेहनत की मिसाल है। उनके पिता कोलकाता में ठेला चलाकर परिवार का पालन-पोषण करते थे और अपनी मेहनत से बेटे को सेना में भेजा। सीताराम राय ने साल 2002 में इंडियन आर्मी में सिपाही के पद पर भर्ती लिया और तब से कई ऑपरेशन में हिस्सा ले चुके थे।उनकी शहादत ने न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे गांव और देशवासियों के दिलों में गर्व और सम्मान का भाव पैदा किया है। स्थानीय लोग शहीद के साहस और समर्पण को याद करते हुए उन्हें सलाम कर रहे हैं। उनके योगदान और बलिदान को हमेशा याद रखा जाएगा।
जहानाबाद में CBI को मिला विरोध पटना के चर्चित हॉस्टल कांड में जांच कर रही केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की टीम को एक बार फिर निराशा हाथ लगी। टीम जब जहानाबाद जिले के रतनी स्थित छात्रा के पैतृक गांव पहुंची, तो परिजनों ने दरवाजा खोलने से साफ इनकार कर दिया। करीब 20 मिनट तक इंतजार करने के बाद अधिकारियों को बिना किसी बातचीत के ही लौटना पड़ा। शंभू गर्ल्स हॉस्टल से जुड़ा है मामला यह मामला शंभू गर्ल्स हॉस्टल से जुड़ा है, जहां रहकर छात्रा NEET की तैयारी कर रही थी। उसकी संदिग्ध मौत के बाद से ही यह केस लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। मौत के पीछे की वजह अब तक साफ नहीं हो सकी है, जिससे कई सवाल खड़े हो रहे हैं। DSP के नेतृत्व में पहुंची थी टीम गुरुवार को CBI की तीन सदस्यीय टीम, डीएसपी विभा कुमारी के नेतृत्व में गांव पहुंची थी। टीम का मकसद परिजनों से बातचीत कर कुछ अहम जानकारी जुटाना था, लेकिन परिवार ने सहयोग से इनकार कर दिया। परिजनों का कहना है कि कई बार पूछताछ के बावजूद जांच किसी नतीजे तक नहीं पहुंची है, जिससे उनका भरोसा कमजोर हो गया है। मां की हालत गंभीर, बात करने की स्थिति में नहीं परिवार के अनुसार, बेटी की मौत के बाद उसकी मां की हालत बेहद खराब है। वह मानसिक और शारीरिक रूप से कमजोर हो चुकी हैं और बार-बार बेहोश हो जाती हैं। ऐसे में परिवार ने उन्हें किसी भी तरह की पूछताछ से दूर रखने का फैसला किया है। पिता से भी नहीं हो सकी मुलाकात गांव से लौटने के बाद CBI टीम शकूराबाद थाना पहुंची और फिर छात्रा के पिता के कार्यस्थल प्लस टू प्रवेशिका विद्यालय शकूराबाद भी गई। लेकिन यहां भी टीम को निराशा मिली, क्योंकि पिता कुछ ही मिनट पहले वहां से निकल चुके थे। जांच में आ रही बाधाएं, बढ़ी उलझन इस मामले में CBI लगातार सच्चाई तक पहुंचने की कोशिश कर रही है, लेकिन परिजनों का सहयोग न मिलना और अब तक किसी बड़े खुलासे या गिरफ्तारी का न होना जांच को और जटिल बना रहा है।
पटना, एजेंसियां। बिहार की राजनीति से जुड़ी बड़ी खबर में अनंत सिंह को दुलारचंद यादव हत्याकांड में कोर्ट से जमानत मिल गई है। जदयू के मोकामा विधायक अनंत सिंह फिलहाल पटना के बेउर जेल में बंद थे और अब उनके जल्द रिहा होने की संभावना जताई जा रही है। माना जा रहा है कि वे गुरुवार शाम या अगले दिन तक जेल से बाहर आ सकते हैं। क्या है पूरा मामला? यह मामला पिछले साल नवंबर में हुए विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान का है। मोकामा के टाल क्षेत्र में Dularchand Yadav की हत्या कर दी गई थी। दुलारचंद यादव Jan Suraaj Party से जुड़े कार्यकर्ता थे और चुनाव प्रचार में सक्रिय थे। इस घटना के बाद पुलिस ने अनंत सिंह को गिरफ्तार किया था। चुनाव के दौरान हुए इस हत्याकांड ने राज्य की राजनीति में बड़ा विवाद खड़ा कर दिया था। जेल में रहते हुए जीता चुनाव गिरफ्तारी के बावजूद अनंत सिंह ने मोकामा विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की। उन्होंने राजद उम्मीदवार वीणा सिंह को 28,206 वोटों से हराया। अनंत सिंह को 91,416 वोट मिले, जबकि वीणा सिंह को 63,210 वोट प्राप्त हुए। राजनीतिक भविष्य पर संकेत हाल ही में Nitish Kumar के नेतृत्व वाली सरकार के बीच अनंत सिंह ने राजनीति को लेकर बड़ा बयान दिया था। राज्यसभा चुनाव के दौरान उन्होंने कहा कि अगर नीतीश कुमार मुख्यमंत्री नहीं रहते हैं, तो वे चुनाव नहीं लड़ेंगे। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे पूरी तरह राजनीति से संन्यास नहीं लेंगे और जनता की सेवा जारी रखेंगे।
पटना: बिहार की राजधानी पटना में इन दिनों घरेलू LPG गैस को लेकर अफरातफरी का माहौल देखने को मिल रहा है। अचानक बढ़ी बुकिंग और सीमित आपूर्ति के कारण गैस सिलेंडरों का बैकलॉग 1.80 लाख से ज्यादा पहुंच गया है। हालांकि प्रशासन ने साफ किया है कि यह स्थिति अस्थायी है और जल्द ही सामान्य हो जाएगी। अफवाहों से बढ़ी ‘पैनिक बुकिंग’ जानकारी के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल और गैस सप्लाई में कमी की खबरों के बाद लोगों में डर फैल गया। इसी वजह से बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं ने एक साथ गैस बुक कराना शुरू कर दिया। हालात यह हो गए कि जिन लोगों को तत्काल सिलेंडर की जरूरत नहीं थी, वे भी बुकिंग कराने लगे, जिससे सिस्टम पर अतिरिक्त दबाव बन गया। सप्लाई से ज्यादा हो रही बुकिंग पटना में रोजाना करीब 32 हजार गैस सिलेंडरों की सप्लाई हो रही है, जबकि बुकिंग का आंकड़ा 40 हजार के आसपास पहुंच गया है। कुछ दिन पहले यह संख्या 50 हजार से भी ऊपर चली गई थी। इस असंतुलन के कारण महज 12 दिनों में बैकलॉग बढ़कर 1.84 लाख से अधिक हो गया। पटना का गैस गणित समझिए राजधानी में कुल 136 गैस एजेंसियां हैं, जो करीब 16.65 लाख उपभोक्ताओं को सेवा देती हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, एक दिन में औसतन 33,603 सिलेंडर की खपत होती है। लेकिन हाल के दिनों में बुकिंग की संख्या अचानक बढ़ने से वितरण व्यवस्था प्रभावित हो गई। प्रशासन ने की संयम बरतने की अपील पटना के जिलाधिकारी Dr. Chandrashekhar Singh Tyagarajan और एडीएम सप्लाई Ravindra Kumar Diwakar ने स्थिति की समीक्षा की है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे बिना जरूरत गैस बुक न करें और अफवाहों पर ध्यान न दें। अधिकारियों का कहना है कि अगर बुकिंग का दबाव कम हुआ तो अगले 7 से 10 दिनों में स्थिति पूरी तरह सामान्य हो सकती है। क्या सच में खत्म हो रही है गैस? प्रशासन ने साफ तौर पर कहा है कि पटना में गैस की कोई स्थायी कमी नहीं है। मौजूदा संकट सिर्फ ‘पैनिक बुकिंग’ का नतीजा है, न कि सप्लाई की असली समस्या।
पटना, एजेंसियां। नवादा में देर रात एक दर्दनाक सड़क हादसे में एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि चार अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। यह दुर्घटना मुफस्सिल थाना क्षेत्र के केंदुआ मोड़ के पास राष्ट्रीय राजमार्ग-20 (NH-20) पर हुई। टक्कर इतनी भीषण थी कि स्कॉर्पियो गाड़ी पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। जानकारी के अनुसार जानकारी के अनुसार, स्कॉर्पियो में सवार पांच लोग रजरप्पा मंदिर से पूजा कर लौट रहे थे। इसी दौरान एक तेज रफ्तार डंपर पीछे की ओर आते हुए स्कॉर्पियो से टकरा गया। बताया जा रहा है कि दोनों वाहन तेज गति में थे, जिसके कारण हादसा बेहद गंभीर हो गया।इस दुर्घटना में मनोज कुमार नामक व्यक्ति की मौके पर ही मौत हो गई। वे स्कॉर्पियो की आगे की सीट पर बैठे थे। वहीं, घायलों में ज्योति कुमारी की हालत बेहद नाजुक बताई जा रही है। इसके अलावा एक बच्चा, एक बुजुर्ग और एक युवक भी गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिनका इलाज अस्पताल में चल रहा है। स्थानीय लोगों का क्या हैं कहना? हादसे के बाद स्थानीय लोगों ने तुरंत मौके पर पहुंचकर स्कॉर्पियो में फंसे यात्रियों को बाहर निकाला और उन्हें अस्पताल पहुंचाया। डॉक्टरों ने एक व्यक्ति को मृत घोषित कर दिया, जबकि अन्य चार का इलाज जारी है।स्थानीय लोगों का कहना है कि NH-20 पर जगह-जगह धर्म कांटे (वेब्रिज) होने के कारण वाहन अक्सर तेज गति में पीछे की ओर आते हैं, जिससे इस तरह की दुर्घटनाएं बार-बार होती रहती हैं। उन्होंने प्रशासन से सड़क सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है।
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन अलर्ट, सुरक्षा और सुविधाओं के व्यापक इंतजाम बिहार की राजधानी पटना में रामनवमी को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। इस साल 27 मार्च को पड़ने वाले इस पावन पर्व पर महावीर मंदिर में लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। इसी को ध्यान में रखते हुए मंदिर प्रबंधन और जिला प्रशासन ने व्यापक व्यवस्थाएं की हैं। रात 2 बजे खुलेंगे मंदिर के पट, होगी विशेष आरती रामनवमी के अवसर पर 27 मार्च को महावीर मंदिर के पट रात 2 बजे ही खोल दिए जाएंगे। इसके बाद करीब 15 मिनट तक भगवान बजरंगबली की विशेष आरती होगी। आरती के बाद श्रद्धालुओं के लिए दर्शन और प्रसाद चढ़ाने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। माना जा रहा है कि देर रात तक भक्तों का आना-जाना जारी रहेगा। श्रद्धालुओं के लिए विशेष सुविधाएं भीड़ को नियंत्रित करने और श्रद्धालुओं को सुविधा देने के लिए प्रशासन ने कई इंतजाम किए हैं: लंबी कतारों के लिए बैरिकेडिंग धूप से बचाव के लिए छावनी पेयजल और शर्बत की व्यवस्था मोबाइल शौचालय मेडिकल कैंप एलईडी स्क्रीन के जरिए लाइव पूजा प्रसारण महिला-पुरुष के लिए अलग लाइन, बाहर लगेंगे काउंटर भारी भीड़ को देखते हुए महिला और पुरुष श्रद्धालुओं के लिए अलग-अलग लाइन बनाई जाएगी। ये कतार वीर कुंवर सिंह पार्क से लेकर महावीर मंदिर तक जाएगी। मंदिर परिसर के बाहर से लेकर पार्क तक 15 नैवेद्यम लड्डू काउंटर लगाए जाएंगे। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए मंदिर के अंदर कोई काउंटर नहीं रखा जाएगा। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम रामनवमी के दौरान सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी रहेगी। पुलिस बल के साथ-साथ करीब 100 से 120 प्राइवेट सिक्योरिटी गार्ड्स तैनात किए जाएंगे। प्रशासन ने भीड़ प्रबंधन को लेकर विशेष रणनीति तैयार की है। 24 हजार किलो नैवेद्यम लड्डू का लक्ष्य महावीर मंदिर के प्रसिद्ध नैवेद्यम लड्डू की मांग को देखते हुए बड़े पैमाने पर तैयारी की गई है। शुरुआत में 18 हजार किलो लड्डू तैयार रखा जाएगा। जरूरत पड़ने पर 6 हजार किलो अतिरिक्त लड्डू बनाए जाएंगे। इस तरह कुल 24 हजार किलो नैवेद्यम लड्डू की व्यवस्था का लक्ष्य रखा गया है। आस्था और व्यवस्था का संगम पटना में रामनवमी का पर्व हर साल विशेष उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस बार भी प्रशासन और मंदिर प्रबंधन श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए तैयारियों में जुटे हैं, ताकि भक्तों को किसी तरह की परेशानी न हो और वे शांतिपूर्ण माहौल में पूजा-अर्चना कर सकें।
पटना: बिहार की राजधानी पटना में इस बार रामनवमी को लेकर जोरदार तैयारियां की जा रही हैं। 27 मार्च को निकलने वाली भव्य शोभायात्रा को लेकर शहर के अलग-अलग इलाकों में उत्साह चरम पर है। इस बार 52 आकर्षक झांकियां शोभायात्रा का मुख्य केंद्र होंगी, जिनमें भगवान श्रीराम के जीवन से जुड़े प्रेरक प्रसंगों को दर्शाया जाएगा। 52 झांकियों से सजेगी भव्य शोभायात्रा रामनवमी के अवसर पर पटना में निकलने वाली शोभायात्रा हर साल की तरह इस बार भी भव्य होगी। विभिन्न मोहल्लों से निकलने वाली 52 झांकियां धार्मिक और सांस्कृतिक संदेश देंगी। देश के अलग-अलग हिस्सों से कलाकार भी इसमें हिस्सा लेंगे, जिससे आयोजन का स्वरूप और भव्य हो गया है। देशभर की सांस्कृतिक झलक दिखेगी आयोजन को खास बनाने के लिए मुंबई की बैंड पार्टी, झारखंड की नृत्य मंडली, काशी से गंगा आरती की टीम और सिख समुदाय के निहंग भी शामिल होंगे। इससे यह आयोजन सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक एकता का भी प्रतीक बनता जा रहा है। डाकबंगला चौराहे के नाम बदलने की मांग तेज इस बीच पटना के प्रमुख स्थल डाकबंगला चौराहा का नाम बदलकर ‘श्री राम चौक’ करने की मांग भी जोर पकड़ रही है। भाजपा नेता नितिन नवीन ने कहा कि यह सिर्फ नाम परिवर्तन नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं की आस्था और शहर की सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा विषय है। उन्होंने बताया कि इस प्रस्ताव को आगे बढ़ाने और सरकारी अभिलेखों में दर्ज कराने की कोशिश की जाएगी। दो लाख राम ध्वज से सजेगा शहर रामनवमी शोभायात्रा अभिनंदन समिति के अध्यक्ष सरदार जगजीवन सिंह बबलू के अनुसार, इस बार पूरे शहर को खास तरीके से सजाया जाएगा। प्रमुख चौक-चौराहों पर करीब दो लाख राम ध्वज लगाए जाएंगे, वहीं एक लाख विक्रम संवत कैलेंडर भी वितरित किए जाएंगे। आकर्षक लाइटिंग और महिलाओं की भागीदारी डाकबंगला क्षेत्र को बंगाल के चंदन नगर की प्रसिद्ध लाइटिंग से सजाया जाएगा, जो इस आयोजन को और भव्य बनाएगा। साथ ही इस बार शोभायात्रा में महिलाओं की भागीदारी भी बड़ी संख्या में देखने को मिलेगी। पटना की नई पहचान बनाने की कोशिश नितिन नवीन ने कहा कि जिस तरह महाराष्ट्र की पहचान गणेश उत्सव और पश्चिम बंगाल की दुर्गा पूजा से जुड़ी है, उसी तरह पटना की पहचान भी रामनवमी महोत्सव से स्थापित करने का प्रयास किया जा रहा है। सांस्कृतिक और धार्मिक एकता का संदेश पटना में होने वाला यह आयोजन अब केवल एक धार्मिक पर्व नहीं रह गया है, बल्कि यह सांस्कृतिक समरसता और एकता का प्रतीक बनता जा रहा है। हर साल बढ़ती भागीदारी इस बात का संकेत है कि रामनवमी महोत्सव पटना की पहचान बनने की ओर तेजी से बढ़ रहा है।
पटना: राजधानी पटना को आधुनिक और टेक्नोलॉजी से लैस शहर बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। पटना नगर निगम की सशक्त स्थायी समिति की बैठक में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 2914 करोड़ रुपये का बजट पारित किया गया। यह बैठक मेयर सीता साहू की अध्यक्षता में आयोजित हुई, जिसमें शहर की सुविधाओं को बेहतर बनाने और डिजिटल तकनीक के उपयोग पर विशेष जोर दिया गया। स्मार्ट टेक्नोलॉजी से बदलेगा पटना का चेहरा इस बजट की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे ‘स्मार्ट सिटी’ की अवधारणा के अनुरूप तैयार किया गया है। अब पटना की सड़कों पर लगी स्ट्रीट लाइटें खुद-ब-खुद जलेंगी और बुझेंगी। इसके लिए IoT आधारित सेंसर तकनीक का उपयोग किया जाएगा, जिससे अंधेरा होते ही लाइटें अपने आप चालू हो जाएंगी और सुबह होते ही बंद हो जाएंगी। सेंसर लाइट और सेंट्रल कमांड सेंटर की व्यवस्था नगर आयुक्त यशपाल मीणा के अनुसार, शहर की मौजूदा करीब 82 हजार स्ट्रीट लाइटों को चरणबद्ध तरीके से स्मार्ट लाइट में बदला जाएगा। नई कॉलोनियों और गलियों को भी इस नेटवर्क से जोड़ने के लिए सर्वे कराया जाएगा। इन सभी लाइटों की निगरानी एक सेंट्रलाइज्ड कमांड सेंटर से होगी, जहां से खराबी की तुरंत जानकारी मिल सकेगी और मरम्मत में तेजी आएगी। पैदल यात्रियों के लिए ‘डिमांड लाइट’ सिस्टम बजट में आम लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ‘डिमांड ट्रैफिक लाइट’ सिस्टम लागू करने का प्रस्ताव है। इसके तहत सड़क पार करने के लिए पैदल यात्री को केवल एक बटन दबाना होगा, जिसके बाद सिग्नल लाल हो जाएगा और वाहनों की आवाजाही रुक जाएगी। हालांकि, ट्रैफिक जाम से बचने के लिए इस सुविधा के उपयोग के बीच 20 मिनट का अंतर रखा गया है। जीआईएस मैपिंग से बढ़ेगा नगर निगम का राजस्व नगर निगम को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए शहर की सभी संपत्तियों की GIS मैपिंग कराई जाएगी। इससे होल्डिंग टैक्स की चोरी पर रोक लगेगी और राजस्व में इजाफा होगा। इस वित्तीय वर्ष में होल्डिंग टैक्स से 137 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य तय किया गया है। अन्य सुविधाएं भी होंगी बेहतर इस बजट में आम लोगों की सुविधाओं का भी ध्यान रखा गया है। शहर के सभी छह अंचलों में शव वाहन की व्यवस्था की जाएगी, जिससे जरूरतमंद परिवारों को आसानी से सेवा मिल सके। इसके अलावा, पटना में प्रवेश करने वाले सात प्रमुख मार्गों पर आकर्षक प्रवेश द्वार भी बनाए जाएंगे। आधुनिक पटना की ओर बड़ा कदम कुल मिलाकर, पटना नगर निगम का यह बजट शहर को तकनीकी रूप से उन्नत और नागरिकों के लिए अधिक सुविधाजनक बनाने की दिशा में एक अहम पहल माना जा रहा है। आने वाले समय में इसका असर शहर की यातायात व्यवस्था, सुरक्षा और जीवनशैली पर साफ तौर पर दिखाई देगा।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
UPSC CSE Result 2025: देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षाओं में से एक Civil Services Examination का अंतिम परिणाम जारी कर दिया गया है। Union Public Service Commission ने शुक्रवार 6 मार्च 2026 को UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 का फाइनल रिजल्ट घोषित किया। इस परीक्षा में अनुज अग्निहोत्री ने पहला स्थान हासिल किया है। परीक्षा में शामिल हुए उम्मीदवार अब आयोग की आधिकारिक वेबसाइट UPSC Official Website पर जाकर फाइनल मेरिट लिस्ट देख सकते हैं। 958 उम्मीदवारों का हुआ चयन यूपीएससी द्वारा जारी फाइनल रिजल्ट के अनुसार इस वर्ष कुल 958 उम्मीदवारों ने सफलता हासिल की है। चयनित उम्मीदवारों की नियुक्ति विभिन्न केंद्रीय सेवाओं में उनकी रैंक और पसंद के आधार पर की जाएगी। फाइनल रिजल्ट उम्मीदवारों के लिखित परीक्षा (Main Exam) और पर्सनैलिटी टेस्ट (Interview) में प्रदर्शन के आधार पर तैयार किया गया है। इन प्रतिष्ठित सेवाओं के लिए होता है चयन यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के माध्यम से देश की कई प्रतिष्ठित सेवाओं के लिए अधिकारियों का चयन किया जाता है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं— भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) भारतीय पुलिस सेवा (IPS) भारतीय विदेश सेवा (IFS) भारतीय राजस्व सेवा (IRS) भारतीय व्यापार सेवा सहित अन्य ग्रुप A और ग्रुप B सेवाएं 979 पदों को भरने का लक्ष्य सिविल सेवा परीक्षा 2025 के माध्यम से केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों में कुल 979 रिक्त पदों को भरा जाना है। ऐसे चेक करें UPSC CSE 2025 का रिजल्ट उम्मीदवार नीचे दिए गए स्टेप्स के माध्यम से अपना रिजल्ट देख सकते हैं— आधिकारिक वेबसाइट upsc.gov.in पर जाएं होमपेज पर “Examination” टैब पर क्लिक करें “Active Examinations” या “What’s New” सेक्शन में जाएं Civil Services Examination Final Result 2025 लिंक पर क्लिक करें मेरिट लिस्ट की PDF खुल जाएगी Ctrl + F दबाकर अपना नाम या रोल नंबर सर्च करें 15 दिन में जारी होगी मार्कशीट यूपीएससी के अनुसार सभी उम्मीदवारों की मार्कशीट रिजल्ट जारी होने के 15 दिनों के भीतर आयोग की वेबसाइट पर अपलोड कर दी जाएगी। उम्मीदवार इसे 30 दिनों तक ऑनलाइन डाउनलोड कर सकेंगे। पिछले साल का कट-ऑफ पिछले वर्ष का अंतिम कट-ऑफ इस प्रकार था— जनरल: 87.98 EWS: 85.92 OBC: 87.28 SC: 79.03 ST: 74.23 आयु सीमा क्या है यूपीएससी की अधिसूचना के अनुसार उम्मीदवार की आयु 1 अगस्त 2024 तक कम से कम 21 वर्ष और अधिकतम 32 वर्ष होनी चाहिए। यानी उम्मीदवार का जन्म 2 अगस्त 1992 से 1 अगस्त 2003 के बीच होना चाहिए। यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा भारत की सबसे कठिन और प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षाओं में से एक मानी जाती है। हर साल लाखों उम्मीदवार इस परीक्षा में शामिल होते हैं, लेकिन तीन चरणों—प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू—को पार कर बहुत कम उम्मीदवार ही अंतिम सूची में जगह बना पाते हैं। UPSC CSE 2025 टॉप-20 उम्मीदवारों की सूची रैंक रोल नंबर नाम 1 1131589 अनुज अग्निहोत्री 2 4000040 राजेश्वरी सुवे एम 3 3512521 अकांश ढुल 4 0834732 राघव झुनझुनवाला 5 0409847 ईशान भटनागर 6 6410067 जिनिया अरोड़ा 7 0818306 ए आर राजा मोहिद्दीन 8 0843487 पक्षल सेक्रेटरी 9 0831647 आस्था जैन 10 1523945 उज्ज्वल प्रियांक 11 1512091 यशस्वी राज वर्धन 12 0840280 अक्षित भारद्वाज 13 7813999 अनन्या शर्मा 14 5402316 सुरभि यादव 15 3507500 सिमरनदीप कौर 16 0867445 मोनिका श्रीवास्तव 17 0829589 चितवन जैन 18 5604518 श्रुति आर 19 0105602 निसार दिशांत अमृतलाल 20 6630448 रवि राज