पटना, एजेंसियां। बिहार बोर्ड ने छात्रों और अभ्यर्थियों की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए नई व्यवस्था शुरू की है। बुधवार को पटना स्थित बिहार बोर्ड कार्यालय में पूछताछ सह शिकायत केंद्र का उद्घाटन किया गया। इस मौके पर बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश और बोर्ड अध्यक्ष आनंद किशोर मौजूद रहे। इस नई पहल का उद्देश्य छात्रों को उनकी समस्याओं का आसान और तेज समाधान उपलब्ध कराना है, ताकि उन्हें छोटी-छोटी शिकायतों के लिए बार-बार कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें। ऑनलाइन ग्रीवांस पोर्टल भी लॉन्च कार्यक्रम के दौरान शिक्षा मंत्री ने ऑनलाइन ग्रीवांस पोर्टल का भी शुभारंभ किया। अब छात्र-छात्राएं घर बैठे अपनी शिकायतें ऑनलाइन दर्ज कर सकेंगे। बोर्ड के अनुसार इस पोर्टल के माध्यम से शिकायतों की मॉनिटरिंग की जाएगी, जिससे मामलों का निपटारा अधिक पारदर्शी और तेजी से हो सकेगा। बोर्ड अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल व्यवस्था लागू होने से शिकायतों के समाधान में देरी कम होगी और छात्रों को बेहतर सुविधा मिलेगी। अलग-अलग काउंटरों की व्यवस्था बिहार बोर्ड ने माध्यमिक और उच्च माध्यमिक छात्रों के लिए अलग-अलग काउंटर बनाए हैं। यहां छात्र रिजल्ट, प्रमाण पत्र, नाम या जन्मतिथि सुधार, पंजीकरण और अन्य शैक्षणिक समस्याओं से जुड़ी शिकायत दर्ज करा सकेंगे। अधिकारियों के मुताबिक इस केंद्र का उद्देश्य छात्रों को एक ही स्थान पर सभी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराना है। इससे छात्रों और अभ्यर्थियों को अलग-अलग विभागों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। सभी जिलों के छात्रों को मिलेगा लाभ बिहार बोर्ड ने बताया कि राज्य के सभी जिलों के छात्र इस सुविधा का लाभ उठा सकेंगे। यदि किसी क्षेत्रीय कार्यालय में समस्या का समाधान नहीं होता है, तो छात्र सीधे पटना स्थित इस शिकायत केंद्र में अपनी बात रख सकेंगे। शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने कहा कि सरकार शिक्षा व्यवस्था को अधिक आधुनिक और छात्रहितैषी बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। नई व्यवस्था से छात्रों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
पटना, एजेंसियां। Bihar State Road Transport Corporation यानी बीएसआरटीसी की बसों में सफर करना जल्द महंगा हो सकता है। डीजल की बढ़ती कीमतों के बाद परिवहन विभाग और बीएसआरटीसी अधिकारियों ने सरकारी बसों के किराये में बढ़ोतरी की तैयारी शुरू कर दी है। जानकारी के अनुसार विभिन्न रूटों पर 10 से 15 प्रतिशत तक किराया बढ़ाया जा सकता है। परिवहन विभाग और बीएसआरटीसी की बैठक शनिवार को परिवहन विभाग और बीएसआरटीसी अधिकारियों के बीच इस मुद्दे को लेकर बैठक हुई। बैठक में बढ़ती परिचालन लागत और डीजल की कीमतों पर चर्चा की गई। अधिकारियों के मुताबिक किराया बढ़ाने पर मौखिक सहमति बन चुकी है। हालांकि अंतिम फैसला क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरण (RTA) द्वारा लिया जाएगा। मंजूरी मिलने के बाद नई दरें लागू कर दी जाएंगी। लंबे समय से उठ रही थी मांग बीएसआरटीसी पिछले साल से किराया बढ़ाने की मांग कर रहा था। निगम का कहना था कि लंबे समय से बस किराये में कोई बदलाव नहीं हुआ है, जबकि ईंधन, रखरखाव और संचालन खर्च लगातार बढ़ रहे हैं। उस समय विभाग की मंजूरी नहीं मिलने के कारण फैसला टल गया था, लेकिन अब डीजल की नई कीमतों ने सरकार को इस दिशा में कदम उठाने के लिए मजबूर कर दिया है। निजी बसों ने पहले ही बढ़ाया किराया डीजल और पेट्रोल की कीमतों में वृद्धि का असर निजी बस सेवाओं पर भी पड़ा है। निजी बस ऑपरेटर पहले ही 20 से 25 प्रतिशत तक किराया बढ़ा चुके हैं। ऑल इंडिया रोड ट्रांसपोर्ट वर्कर्स फेडरेशन ने भी इस मुद्दे पर परिवहन विभाग को ज्ञापन देने का फैसला किया है। यात्रियों पर बढ़ेगा असर यदि प्रस्ताव लागू होता है तो रोजाना सरकारी बसों से सफर करने वाले यात्रियों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। खासकर लंबी दूरी के यात्रियों और नौकरीपेशा लोगों को ज्यादा असर झेलना पड़ सकता है।
पटना,एजेंसियां। बिहार में जनता की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए शुरू हुए ‘सहयोग शिविर’ अभियान में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अधिकारियों को कड़ी चेतावनी दी है। सोनपुर प्रखंड के डुमरी बुजुर्ग पंचायत में आयोजित पहले शिविर में उन्होंने साफ कहा कि यदि 30 दिनों के भीतर शिकायतों का समाधान नहीं हुआ तो संबंधित अधिकारी को सस्पेंड कर दिया जाएगा। 67 शिकायतें, मौके पर समाधान का दावा शिविर में कुल 67 शिकायतें सामने आईं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार जनता के भरोसे पर बनी है और लोगों की समस्याओं का समाधान उसकी प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी शिकायतों का तय समय में निपटारा सुनिश्चित किया जाए। हर महीने पंचायतों में लगेंगे शिविर सम्राट चौधरी ने घोषणा की कि अब हर महीने के पहले और तीसरे मंगलवार को सभी मंत्री अपने-अपने जिलों में सहयोग शिविर लगाएंगे। इसका उद्देश्य पंचायत स्तर पर ही लोगों की समस्याओं का समाधान करना है, ताकि जनता को सरकारी दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें। अस्पतालों के रेफर सिस्टम पर सख्ती मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर भी सख्त रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि जिला और अनुमंडल अस्पतालों से मरीजों को बिना वजह रेफर करने की शिकायतें मिल रही हैं। उन्होंने निर्देश दिया कि 15 अगस्त तक ऐसी व्यवस्था बनाई जाए, जिसमें अनावश्यक रेफर करने पर सिविल सर्जन (CS) के खिलाफ कार्रवाई हो सके। हालांकि गंभीर मरीजों को इससे अलग रखा जाएगा। विकास योजनाओं का भी ऐलान मुख्यमंत्री ने सोनपुर क्षेत्र के विकास को लेकर कई घोषणाएं कीं। उन्होंने कहा कि बाबा हरिहरनाथ के नाम पर नई टाउनशिप बनाई जाएगी। साथ ही पटना के गंगा पथ की तर्ज पर छपरा में ‘गंगा-अंबिका पथ’ का निर्माण किया जाएगा, जिससे यातायात और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।
पटना, एजेंसियां। बिहार में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल विस्तार के बाद पहली कैबिनेट बैठक आयोजित हुई। इस बैठक में कुल 18 अहम प्रस्तावों पर मुहर लगाई गई। सबसे बड़ा फैसला राज्य के सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के महंगाई भत्ते (DA) और महंगाई राहत (DR) को बढ़ाने को लेकर लिया गया। वित्त विभाग के अनुसार, सातवें वेतनमान के तहत वेतन और पेंशन प्राप्त करने वाले कर्मचारियों का महंगाई भत्ता 58 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत कर दिया गया है। वहीं पांचवें वेतनमान के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए DA 474 प्रतिशत से बढ़ाकर 483 प्रतिशत कर दिया गया है। इस फैसले से लाखों कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को सीधा लाभ मिलेगा। पटना मेट्रो और स्वास्थ्य सुविधाओं को मिली मजबूती कैबिनेट बैठक में Patna Metro परियोजना के लिए भी बड़ा फैसला लिया गया। सरकार ने कॉरिडोर-1 और कॉरिडोर-2 के निर्माण हेतु वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए ₹768.12 करोड़ की प्रशासनिक स्वीकृति दी है। स्वास्थ्य विभाग से जुड़े महत्वपूर्ण फैसले के तहत राज्य के विभिन्न मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों के लिए 121 नए एम्बुलेंस खरीदने की मंजूरी दी गई। ALS और BLS श्रेणी के इन एम्बुलेंसों की खरीद पर ₹42.50 करोड़ खर्च होंगे। इससे मरीजों को बेहतर और तेज आपातकालीन स्वास्थ्य सुविधा मिल सकेगी। उद्योग और रोजगार को बढ़ावा देने की तैयारी सरकार ने “मुख्यमंत्री सूक्ष्म एवं लघु उद्योग क्लस्टर विकास योजना” का नाम बदलकर “मुख्यमंत्री सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग क्लस्टर विकास योजना” करने को मंजूरी दी है। इसके तहत उद्योगों के लिए सामान्य सुविधा केंद्र (CFC) स्थापित किए जाएंगे। इसके अलावा पटना जिले के फतुहा में डेयरी उत्पादन इकाई लगाने के लिए ₹97.17 करोड़ के निजी निवेश को स्वीकृति दी गई है। इस परियोजना में फुल क्रीम दूध, दही, छाछ और मक्खन का उत्पादन किया जाएगा। सरकार का दावा है कि इससे करीब 170 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा। कानून-व्यवस्था और निवेश पर भी जोर कैबिनेट ने पूर्वी चंपारण, समस्तीपुर, मधुबनी, वैशाली और सीवान जैसे संवेदनशील जिलों में पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) के पांच नए पदों के सृजन को मंजूरी दी है। सरकार का मानना है कि इससे अपराध नियंत्रण और कानून-व्यवस्था मजबूत होगी। इसके साथ ही बिहार औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन पैकेज (BIIPP) 2025 की अवधि 30 जून 2026 तक बढ़ा दी गई है। सरकार को उम्मीद है कि इससे राज्य में निवेश बढ़ेगा और औद्योगिक विकास को नई गति मिलेगी।
पटना, एजेंसियां। देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG 2026 एक बार फिर विवादों में घिर गई है। पेपर लीक के आरोपों के बाद पूरे देश में हड़कंप मचा हुआ है। केंद्र सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच Central Bureau of Investigation (CBI) को सौंप दी है। महाराष्ट्र के नासिक के बाद अब बिहार से भी गिरफ्तारी होने के बाद जांच और तेज हो गई है। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि बिहार में पकड़े गए आरोपी सीधे तौर पर पेपर लीक में शामिल थे या सॉल्वर गैंग के सदस्य थे। लेकिन पुलिस जांच में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। नालंदा में वाहन जांच से खुला राज इस पूरे मामले का खुलासा बिहार के नालंदा जिले में पुलिस की गाड़ी चेकिंग के दौरान हुआ। राजगीर डीएसपी सुनील कुमार सिंह के मुताबिक, पावापुरी मोड़ के पास दो संदिग्ध गाड़ियों को रोका गया। काले रंग की स्कॉर्पियो में बैठे युवक खुद को एमबीबीएस सेकंड ईयर का छात्र बता रहे थे। तलाशी के दौरान पुलिस को नकदी, कई संदिग्ध दस्तावेज और मोबाइल फोन मिले। मोबाइल की जांच में NEET समेत अन्य परीक्षाओं के एडमिट कार्ड, पैसों के लेन-देन के रिकॉर्ड और कई संदिग्ध चैट सामने आए। पुलिस का दावा है कि समय रहते कार्रवाई होने से कथित सॉल्वर गैंग परीक्षा केंद्र तक नहीं पहुंच पाया। कौन है ‘राजा बाबू’? जांच के दौरान सबसे बड़ा नाम उज्जवल राज उर्फ ‘राजा बाबू’ का सामने आया। पुलिस के मुताबिक वह मुजफ्फरपुर का रहने वाला है और Bhagwan Mahavir Institute of Medical Sciences (BMIMS) का 2022 बैच का छात्र है। पुलिस का कहना है कि राजा बाबू पिछले चार वर्षों से मेडिकल परीक्षाओं में लगातार फेल हो रहा था, लेकिन कॉलेज में बना हुआ था। जांच एजेंसियों को शक है कि वही पूरे नेटवर्क की अहम कड़ी और कथित मास्टरमाइंड हो सकता है। उसके खिलाफ पहले से केस दर्ज है और CBI उसकी तलाश में जुटी हुई है। इस गैंग में और कौन-कौन? राजगीर डीएसपी ने बताया कि गिरफ्तार युवकों में अमन कुमार सिंह और पंकज कुमार शामिल हैं. पुलिस के मुताबिक, पंकज कुमार भी मेडिकल छात्र है और उसे इस नेटवर्क का मुख्य आरोपी माना जा रहा है. वहीं राजा बाबू को मास्टरमाइंड बताया जा रहा है. उसकी गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है. पुलिस का दावा है कि मोबाइल कॉल डिटेल्स से कई अहम सुराग मिले हैं. अभिभावकों, छात्रों और कथित सॉल्वरों के बीच लगातार बातचीत हो रही थी. अब इन सभी लोगों से पूछताछ की जा रही है. राजस्थान से शुरू हुआ था मामला इस पूरे मामले का खुलासा सबसे पहले राजस्थान से हुआ था। वहां पुलिस ने दावा किया कि परीक्षा से पहले छात्रों को 410 सवालों वाला कथित ‘गेस पेपर’ दिया गया था, जिनमें से लगभग 120 सवाल असली परीक्षा में आ गए। 3 मई को आयोजित NEET-UG परीक्षा में देश के 551 शहरों और विदेश के 14 शहरों में करीब 23 लाख छात्र शामिल हुए थे। बिहार कनेक्शन सामने आने के बाद यह मामला अब राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी जांच का विषय बन गया है।
पटना, एजेंसियां। बिहार के पटना जिले के बिहटा इलाके में आधी रात करीब 2 बजे पुलिस और अपराधियों के बीच मुठभेड़ हुई। इस कार्रवाई में दो कुख्यात शार्प शूटर विदेशी राय और पप्पू राय को पुलिस ने गोली मारकर घायल कर दिया। दोनों के पैरों में गोली लगी है और उन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। घटना के बाद इलाके में दहशत फैल गई, जबकि पुलिस ने मौके से हथियार और कारतूस भी बरामद किए हैं। STF की सूचना पर हुई कार्रवाई पुलिस के अनुसार, स्पेशल टास्क फोर्स (STF) को सूचना मिली थी कि बिहटा के आनंदपुर गांव के पास कुछ अपराधी किसी बड़ी वारदात की साजिश रच रहे हैं। सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने इलाके की घेराबंदी की। जैसे ही अपराधियों ने खुद को घिरा हुआ पाया, उन्होंने पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने दोनों अपराधियों को दौड़ाकर गोली मारी, जिससे वे घायल हो गए। हथियार और कारतूस बरामद मुठभेड़ स्थल से अवैध हथियार और कारतूस बरामद किए गए हैं। पुलिस का कहना है कि दोनों अपराधी हत्या और लूट जैसे कई गंभीर मामलों में पहले से वांछित थे। एनकाउंटर के बाद उन्हें तुरंत हिरासत में ले लिया गया। अस्पताल में भर्ती, जांच जारी घायलों को पहले बिहटा के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, लेकिन हालत गंभीर होने पर उन्हें पटना AIIMS रेफर कर दिया गया। फिलहाल दोनों पुलिस की कड़ी निगरानी में हैं। पुलिस अब इनके आपराधिक रिकॉर्ड की जांच कर रही है और इनके गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश में छापेमारी जारी है। राज्य में बढ़ते एनकाउंटर पिछले कुछ महीनों में बिहार में पुलिस की कार्रवाई तेज हुई है। आंकड़ों के मुताबिक, पिछले छह महीनों में लगभग 19 एनकाउंटर की घटनाएं दर्ज की गई हैं। पुलिस का कहना है कि यह अभियान कानून-व्यवस्था मजबूत करने और अपराधियों पर ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत चलाया जा रहा है।
पटना, एजेंसियां। अगर आपने 12वीं पास कर ली है और सरकारी नौकरी की तैयारी करना चाहते हैं, तो बिहार में आपके लिए कई अच्छे अवसर मौजूद हैं। बिहार सरकार और विभिन्न भर्ती आयोग समय-समय पर पुलिस, क्लर्क, स्टेनोग्राफर, होमगार्ड और विधान परिषद जैसे पदों पर भर्तियां निकालते रहते हैं। सही रणनीति और नियमित तैयारी से उम्मीदवार इन नौकरियों में सफलता हासिल कर सकते हैं। BSSC इंटर लेवल भर्ती बिहार कर्मचारी चयन आयोग (BSSC) की सेकंड इंटर लेवल भर्ती 12वीं पास अभ्यर्थियों के लिए सबसे लोकप्रिय भर्तियों में से एक है। इसके तहत लोअर डिवीजन क्लर्क, डाटा एंट्री ऑपरेटर, ऑफिस असिस्टेंट, टाइपिस्ट और फील्ड असिस्टेंट जैसे पदों पर नियुक्तियां होती हैं। चयन प्रक्रिया में लिखित परीक्षा, टाइपिंग या स्किल टेस्ट और दस्तावेज सत्यापन शामिल होता है। बिहार पुलिस भर्ती में सुनहरा मौका बिहार पुलिस में कॉन्स्टेबल, हवलदार और ऑपरेटर सिपाही जैसे पदों पर नियमित भर्तियां निकलती हैं। इसके लिए न्यूनतम योग्यता 12वीं पास रखी जाती है। चयन प्रक्रिया में लिखित परीक्षा, फिजिकल स्टैंडर्ड टेस्ट और फिजिकल एफिशिएंसी टेस्ट शामिल होते हैं। उम्मीदवारों को शारीरिक मानकों को भी पूरा करना जरूरी होता है। स्टेनो और होमगार्ड भर्ती भी अहम विकल्प स्टेनोग्राफी और कंप्यूटर टाइपिंग जानने वाले उम्मीदवार बिहार स्टेनो भर्ती के लिए आवेदन कर सकते हैं। इसमें लिखित परीक्षा और स्किल टेस्ट के जरिए चयन होता है। वहीं बिहार होमगार्ड भर्ती भी युवाओं के लिए बड़ा अवसर मानी जा रही है। चर्चा है कि करीब 13,500 पदों पर भर्ती जल्द आ सकती है। खास बात यह है कि इसमें लिखित परीक्षा नहीं होगी और चयन फिजिकल टेस्ट के आधार पर किया जाएगा। विधान परिषद में भी मिलती हैं नौकरियां बिहार विधान परिषद और विधानसभा में डाटा एंट्री ऑपरेटर, स्टेनोग्राफर और ऑफिस अटेंडेंट जैसे पदों पर इंटर पास उम्मीदवार आवेदन कर सकते हैं। इन भर्तियों के जरिए युवाओं को स्थायी सरकारी नौकरी पाने का अच्छा मौका मिलता है।
पटना, एजेंसियां। बिहार की राजधानी पटना में BPSC TRE-4 भर्ती विज्ञापन जारी करने की मांग को लेकर गुरुवार को बड़ा प्रदर्शन देखने को मिला। हजारों की संख्या में अभ्यर्थी सड़क पर उतर आए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। प्रदर्शन उस समय उग्र हो गया जब अभ्यर्थियों ने पुलिस की बैरिकेडिंग तोड़ने की कोशिश की। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज कर दिया। घटना जेपी गोलंबर के पास हुई, जहां पुलिस और अभ्यर्थियों के बीच काफी देर तक तनावपूर्ण स्थिति बनी रही। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को खदेड़ने के लिए बल प्रयोग किया, जिसमें कई छात्र घायल हो गए। कुछ अभ्यर्थियों को हिरासत में भी लिया गया है। वहीं छात्र नेता दिलीप की गिरफ्तारी की खबर भी सामने आई है। TRE-4 विज्ञापन जारी नहीं होने से नाराज हैं अभ्यर्थी अभ्यर्थियों का कहना है कि BPSC TRE-4 के तहत करीब 46,595 पदों पर भर्ती होनी है, लेकिन अब तक इसका विज्ञापन जारी नहीं किया गया है। प्रदर्शन कर रहे छात्रों का आरोप है कि सरकार और आयोग लगातार केवल आश्वासन दे रहे हैं। छात्र नेता दिलीप ने कहा कि बीपीएससी परीक्षा नियंत्रक ने 16 अप्रैल को एक पॉडकास्ट में कहा था कि TRE-4 का विज्ञापन तीन से चार दिनों के भीतर जारी कर दिया जाएगा, लेकिन अब मई का दूसरा सप्ताह शुरू हो गया है और अभी तक कोई अधिसूचना जारी नहीं हुई। नए शिक्षा मंत्री के सामने पहली बड़ी चुनौती बिहार में नए शिक्षा मंत्री के रूप में मिथिलेश तिवारी ने हाल ही में शपथ ली है। ऐसे में TRE-4 अभ्यर्थियों का आंदोलन उनके लिए पहली बड़ी चुनौती माना जा रहा है। प्रदर्शनकारी जल्द से जल्द भर्ती प्रक्रिया शुरू करने की मांग कर रहे हैं। घटना के बाद इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। प्रशासन की ओर से स्थिति पर नजर रखी जा रही है, जबकि अभ्यर्थियों ने चेतावनी दी है कि मांग पूरी नहीं होने पर आंदोलन और तेज किया जाएगा।
पटना, एजेंसियां। सम्राट चौधरी ने अपने मंत्रिमंडल का विस्तार करते हुए 32 मंत्रियों को शपथ दिलाई। इसके साथ ही बिहार कैबिनेट में कुल 35 पद भर चुके हैं और केवल एक पद खाली बचा है। नए मंत्रिमंडल में सामाजिक और जातीय समीकरणों को ध्यान में रखते हुए विभिन्न वर्गों को प्रतिनिधित्व दिया गया है। EBC को सबसे ज्यादा तवज्जो कैबिनेट में सबसे अधिक ध्यान अति पिछड़ा वर्ग (EBC) पर दिया गया है। EBC कोटे से कुल 9 मंत्री बनाए गए हैं। इनमें रमा निषाद, प्रमोद चंद्रवंशी, रामचंद्र प्रसाद, मदन सहनी, दामोदर रावत, बुलो मंडल और शीला मंडल जैसे नेता शामिल हैं। वहीं OBC और दलित समुदाय से 7-7 नेताओं को मंत्रिमंडल में जगह दी गई है। यादव समाज से रामकृपाल यादव को शामिल किया गया, जबकि दलित चेहरों में लखेंद्र पासवान, नंद किशोर राम, सुनील कुमार, रत्नेश सदा, अशोक चौधरी, संजय पासवान और संतोष कुमार सुमन प्रमुख हैं। सवर्ण समुदाय से कितने मंत्री? सम्राट कैबिनेट में सवर्ण समुदाय से कुल 11 मंत्री शामिल किए गए हैं। इनमें सबसे अधिक 4 मंत्री राजपूत समाज से हैं-संजय टाइगर, श्रेयसी सिंह, लेसी सिंह और संजय सिंह। इसके अलावा भूमिहार और ब्राह्मण समाज को भी प्रतिनिधित्व मिला है। ब्राह्मण समाज से मिथलेश तिवारी और नीतीश मिश्रा को जगह मिली, जबकि भूमिहार समाज से विजय कुमार सिन्हा और इंजीनियर कुमार शैलेन्द्र शामिल हैं। महिलाओं और सहयोगी दलों को भी महत्व नई कैबिनेट में कुल 5 महिला मंत्री बनाई गई हैं। जेडीयू से लेसी सिंह, श्वेता गुप्ता और शीला कुमारी, जबकि भाजपा से रमा निषाद और श्रेयसी सिंह को मौका मिला। एलजेपी (रामविलास), हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा और राष्ट्रीय लोक मोर्चा को भी मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व देकर एनडीए ने राजनीतिक संतुलन साधने की कोशिश की है।
पटना, एजेंसियां। सम्राट चौधरी के CM बनने के 22 दिन बाद आज गुरुवार को कैबिनेट का विस्तार किया गया। मेगा इवेंट में नीतीश के बेटे निशांत कुमार समेत 32 मंत्री सम्राट कैबिनेट में शामिल हुए। नई कैबिनेट में बीजेपी से 15, जेडीयू से 13, LJP(R)-2, HAM और RLM से एक-एक मंत्री हैं। 25 मिनट चले इस कार्यक्रम में एक साथ 5-5 विधायकों ने शपथ ली है। निशांत पहली बार मंत्री बने पहली बार में निशांत कुमार, श्रवण कुमार, विजय सिन्हा, लेसी सिंह, और दिलीप जायसवाल ने शपथ ली। निशांत कुमार पहली बार मंत्री बने हैं। समारोह में PM मोदी भी शामिल हुए। कार्यक्रम के बाद प्रधानमंत्री ने नीतीश कुमार को अपने पास बुलाया। मंच पर उनसे हाथ मिलाया, इस दौरान नीतीश कुमार ने पीएम का कंधा पकड़कर हिला दिया। राष्ट्रगान पहले बजा कार्यक्रम की शुरुआत में सीधे राष्ट्रगान बजाया गया, जबकि प्रोटोकॉल के हिसाब से पहले राष्ट्रगीत वंदे मातरम् बजाया जाना था। दो बार बिहार के स्वास्थ्य मंत्री रहे मंगल पांडेय को इस बार कैबिनेट में जगह नहीं मिली है, खबर है कि पार्टी में उन्हें बड़ी जगह दी जाएगी। मंत्रिमंडल विस्तार से जुड़े हाईलाइट्स JDU से 3 नए चेहरे- निशांत कुमार, बुलो मंडल और श्वेता गुप्ता मंत्री बने हैं। बीजेपी से 5 नए चेहरे- मिथिलेश तिवारी, रामचंद्र पासवान, अरूण शंकर प्रसाद, नंद किशोर राम और इंजीनियर शैलेंद्र मंत्री बने हैं। सम्राट सरकार का जातीय समीकरण EBC- 9, OBC-9, दलित-7, सवर्ण-9 और मुस्लिम-1। सम्राट कैबिनेट में 5 महिला मंत्री, इनमें सबसे ज्यादा जदयू से 3 मंत्री हैं। गांधी मैदान में 3 स्टेज बनाए गए। बीजेपी ऑफिस के बाहर हरे राम-हरे कृष्ण का भजन-कीर्तन। पटना में पोस्टर लगे- भगवामय, अंग, बंग और कलिंग। बीजेपी ने 3 चेहरों को ड्रॉप किया सम्राट कैबिनेट में बीजेपी कोटे से 15 मंत्रियों ने शपथ ली है। इनमें 5 नए चेहरे हैं, वहीं तीन पुराने लोगों को इस बार मौका नहीं मिला। इनमें बीजेपी के सीनियर लीडर मंगल पांडेय, बेगूसराय के बछवाड़ा से विधायक सुरेंद्र मेहता और प. चंपारण से नारायण प्रसाद का नाम शामिल है। मंत्री पद नहीं मिलने के बाद मंगल पांडे को भाजपा संगठन में बड़ी जिम्मेदारी मिलेगी। पूर्व मंत्री नितिन नवीन की टीम में शामिल होंगे। खबर है कि मंगल पांडे को भाजपा का राष्ट्रीय महासचिव बनाया जा सकता है। साथ ही यूपी चुनाव में प्रभारी भी बनाए जा सकते हैं।
पटना, एजेंसियां। बिहार की राजनीति के लिए आज का दिन बेहद अहम है, जब मुख्यमंत्री के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार का कैबिनेट विस्तार किया जाएगा। पटना के गांधी मैदान में दोपहर 12:10 बजे भव्य शपथ ग्रहण समारोह आयोजित होगा, जिसमें कुल 27 विधायक मंत्री पद की शपथ लेंगे। इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सहित कई बड़े नेता मौजूद रहेंगे। बीजेपी कोटे से मंत्री पद के संभावित नाम • ई शैलेंद्र • संजय टाइगर • विजय सिन्हा • नीतीश मिश्रा • श्रेयसी सिंह • दिलीप जायसवाल • अरूण शंकर प्रसाद • प्रमोद चंद्रवंशी • लखेंद्र पासवान • मिथिलेश तिवारी मंत्रिमंडल विस्तार का समीकरण सूत्रों के मुताबिक, बीजेपी और जदयू के बीच मंत्री पद का बंटवारा लगभग बराबरी पर तय किया गया है। संभावित रूप से बीजेपी को 12, जदयू को 11, एलजेपी (आर) को 2, जबकि हम और आरएलएम को एक-एक मंत्री पद मिल सकता है। हालांकि कुछ सीटें फिलहाल खाली रखी जा सकती हैं। राज्य में मुख्यमंत्री समेत अधिकतम 36 मंत्री बनाए जा सकते हैं। पीएम मोदी का मेगा रोड शो शपथ ग्रहण समारोह से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पटना एयरपोर्ट से गांधी मैदान तक मेगा रोड शो करेंगे। उनके स्वागत के लिए पूरे शहर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। इस दौरान हजारों कार्यकर्ताओं और समर्थकों के जुटने की संभावना है। अमित शाह और अन्य नेताओं की मौजूदगी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह बुधवार शाम पटना पहुंचे और उन्होंने पार्टी नेताओं के साथ बैठक की। इसके अलावा भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और एनडीए के कई वरिष्ठ नेता भी इस कार्यक्रम में शामिल होंगे। शपथ ग्रहण समारोह को बिहार की राजनीति में शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है।
पटना, एजेंसियां। बिहार में 7 मई को कैबिनेट का विस्तार हो सकता है। इसमें बीजेपी के 12, जेडीयू के 11, लोजपा (रामविलास) के 2 और RLM–HAM के 1–1 मंत्री शपथ ले सकते हैं। 15 अप्रैल को बनी थी सरकारः बीते 15 अप्रैल को NDA सरकार के नए सीएम के रूप में सम्राट चौधरी ने शपथ ली थी। वह बिहार में भाजपा के पहले मुख्यमंत्री बने। विजय कुमार चौधरी और विजेंद्र प्रसाद यादव ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। गांधी मैदान में होगा शपथ ग्रहण राजधानी पटना के ऐतिहासिक गांधी मैंदान में मंत्रिमंडल विस्तार का आयोजन किया जाएगा। इसमें कई नए चेहरों की एंट्री तय मानी जा रही है। राज्यपाल सय्यद अता हसनैन नए मंत्रियों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाएंगे। इस मौके पर NDA के वरिष्ठ दिग्गज नेता शामिल रहेंगे। तैयारियां जोरो पर हाल ही में सीएम सम्राट चौधरी दिल्ली गए थे। वहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से उनकी मुलाकात हुई थी। हालांकि उससे पहले उन्होंने राज्य के डीप्टी सीएम और पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से भी मुलाकात की थी। नए मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर गांधी मैंदान में तैयारियां जोरों-शोरों से चल रही है। सुरक्षा और प्रोटोकॉल की तैयारियां बखूबी हो रही है।
पटना, एजेंसियां। बिहार नए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शनिवार को पूर्व सीएम नीतीश कुमार से उनके नए आवास 7 सर्कुलर रोड जाकर मुलाकात की। वहां दोनों नेताओं के बीच 25 से 30 मिनट तक बात हुई। इस दौरान मौके पर डिप्टी सीएम विजय कुमार चौधरी भी मौजूद रहे। कैबिनेट विस्तार जल्द राज्य में नए कैबिनेट का विस्तार होना है। अब ऐसे में आज दोनों नेताओं के मुलाकात के बाद प्रदेश की राजनीति में चर्चा तेज हो गई है कि अगले चार-पांच दिनों में सम्राट चौधरी कैबिनेट का विस्तार हो सकता है। माना जा रहा है कि इस दौरान दोनों के बीच राज्य के विकास को लेकर कई मुद्दों पर बात-चीत हुई। हालांकि इससे पहले सीएम सम्राट चौधरी डीप्टी सीएम बिजेंद्र यादव के घर पर पहुंचे उसके बाद नीतीश कुमार से मुलाकात की। सीएम सम्राट आज दिल्ली जा रहे आज शाम साढ़े 6 बजे सीएम सम्राट चौधरी दिल्ली जा रहे हैं। माना जा रहा है कि वहां मुख्यमंत्री की मुलाकाक केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से हो सकती है। इसके अलावा वे भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से भी मुलाकात करेंगे। कैबिनेट विस्तार को लेकर एनडीए घटकों के बीच चर्चा हो सकती है।
पटना, एजेंसियां। बिहार पुलिस ने रेडलाइट एरिया और ऑर्केस्ट्रा पार्टियों के खिलाफ बड़ा एक्शन लिया है। राज्य के सभी जिलों में रेड लाइट एरिया के पैटर्न पर चल रहे ऑर्केस्ट्रा को स्कैन किया जा रहा है। सारण पुलिस की छापेमारी में ऑर्केस्ट्रा से एक बांग्लादेशी लड़की को बरामद किया गया है। सीवान में 450 से ज्यादा ऑर्केस्ट्रा को स्कैन किया जा रहा है। अब तक 21 लड़कियों को बरामद किया गया है, जिनसे जिस्मफरोशी का धंधा कराया जा रहा था। किशनगंज में भी पुलिस की छापेमारी में 5 पुरुषों के साथ 3 महिलाओं को गिरफ्तार किया गया है। सीवान पुलिस ऑर्केस्ट्रा को पूरी तरह से बंद कराने की तैयारी में जुट गई है। पुलिस का एक्शन जारी रहेगा पुलिस अधिकारियों ने दावा किया है कि 15 दिनों में ऑर्केस्ट्रा पर बड़ा एक्शन होगा जिसमें लड़कियों को मुक्त कराया जाएगा। रिपोर्टर को बेचनेवाली एजेंट भी गिरफ्तार सीवान में महिला रिपोर्टर को खरीदने-बेचने वाली एजेंट गुड़िया को भी पुलिस ने गिरफ्तार किया है। रेड लाइट एरिया की अनमैरिड लड़कियों के बच्चों को बेचने वाला चाइल्ड स्पेशलिस्ट डॉक्टर नवीन क्लीनिक बंद करके फरार हो गया है। पुलिस के साथ स्वास्थ्य विभाग की टीम उसकी तलाश में छापेमारी कर रही है।
पटना, एजेंसियां। बुद्ध पूर्णिमा के पावन अवसर पर बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने गयाजी पहुंचकर धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लिया। इस दौरान उन्होंने प्रसिद्ध विष्णुपद मंदिर में पूजा-अर्चना कर राज्य की सुख-शांति और समृद्धि की कामना की। भगवान विष्णु के चरणों में अर्पित की श्रद्धा मुख्यमंत्री ने मंदिर में भगवान श्रीहरि के चरणों में पुष्प अर्पित किए और विधिवत दुग्धाभिषेक किया। उन्होंने राज्य के विकास, खुशहाली और जनता के कल्याण के लिए प्रार्थना की। मंदिर प्रबंधन समिति ने इस मौके पर उन्हें भगवान के चरण चिह्न और शॉल भेंट कर सम्मानित किया। देवघाट और विकास परियोजनाओं का लिया जायजा पूजा के बाद मुख्यमंत्री देवघाट पहुंचे, जहां उन्होंने गयाजी में बने रबर डैम का निरीक्षण किया। इसके साथ ही प्रस्तावित विष्णुपद कॉरिडोर और देवघाट क्षेत्र के विकास कार्यों की समीक्षा की। स्थानीय महिलाओं के स्वयं सहायता समूह ‘जीविका दीदियों’ ने मुख्यमंत्री का गर्मजोशी से स्वागत किया और उनके समर्थन में नारे लगाए। कड़ी सुरक्षा के बीच संपन्न हुआ कार्यक्रम मुख्यमंत्री के दौरे को लेकर पहले से ही व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने Gaya में संवेदनशील स्थानों का निरीक्षण कर सुरक्षा तैयारियों का जायजा लिया। भीड़ नियंत्रण, यातायात प्रबंधन और मंदिर परिसर में विशेष निगरानी के निर्देश दिए गए थे।इसके अलावा Mahabodhi Temple और बोधगया मठ परिसर में भी सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी गई। शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ आयोजन प्रशासन के अनुसार, पूरे कार्यक्रम को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराने के लिए पुख्ता इंतजाम किए गए थे। मुख्यमंत्री का काफिला कार्यक्रम के बाद बोधगया के लिए रवाना हो गया।
पटना, एजेंसियां। बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का पता बदल गया है। शुक्रवार 1 मई को उन्होंने अपना ठिकाना बदल लिया है। दो दशकों तक बिहार की सत्ता का केंद्र रहा 1 अणे मार्ग स्थित सीएम आवास अब खाली हो गया है। पूर्व सीएम का सामान पटना स्थित 7 सर्कुलर रोड आवास में शिफ्ट कर दिया गया है। ट्रक्टर से ढोया गया सामान दरअसल सोशल मीडिया पर इसको लेकर तस्वीरें और वीडियो सामने आयी हैं, जिसमें साफ दिखा कि नीतीश कुमार का सामान ट्रैक्टर से 1 अणे मार्ग स्थित सीएम आवास से 7 सर्कुलर रोड आवास में शिफ्ट किया गया है। जानकारी के मुताबिक, नीतीश कुमार नए आवास का कई बार निरीक्षण कर चुके हैं। नए आवास पर कड़ी सुरक्षा 7 सर्कुलर रोड पटना के VIP और हाई सिक्योरिटी जोन में आता है। पूर्व सीएम के नए आवास गेट पर कड़ी सुरक्षा रहेगी। हर जगह सीसीटीवी कैमरे और पुलिस बल की तैनाती रहेगी। परिसर का हर कोना पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी। बंगले के चारों ओर पेड़-पौधे और हरियाली से घिरा शांत वातावरण है।
पटना, एजेंसियां। पटना के दो प्रमुख संस्थानों पटना चिड़ियाखाना और डेयरी तकनीकी संस्थान से संजय गांधी के नाम को हटा दिया गया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में यह बड़ा फैसला लिया गया। दोनों संस्थानों को मिला नया नाम पटना के मशहूर संजय गांधी जैविक उद्यान' को आधिकारिक तौर पर अब 'पटना जू' के नाम से जाना जाएगा। इसी तरह, संजय गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ डेयरी टेक्नोलॉजी का नाम बदलकर अब 'बिहार स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ डेयरी टेक्नोलॉजी, पटना' कर दिया गया है। देश का चौथा सबसे बड़ा चिड़ियाघर बता दें कि संजय गांधी जैविक उद्यान 1973 में खोला गया था। इसके लिए राजभवन ने 34 एकड़ जमीन दी थी। वर्तमान में लगभग 153 एकड़ में फैले इस उद्यान में 110 प्रजातियों के करीब 800 जीव-जंतु और 300 तरह के पेड़-पौधे मौजूद हैं। बताते चलें कि बड़े चिड़ियाघरों की श्रेणी में पटना जू का स्थान देश में चौथे नंबर पर है। अब इसके संचालन समिति का नाम बदलकर 'पटना जू प्रबंधन एवं विकास सोसाइटी' कर दिया गया है। डेयरी संस्थान का बदला स्वरूप 1980 में कांग्रेस शासनकाल के दौरान स्थापित संजय गांधी गव्य प्रावैधिकी संस्थान अब नए नाम से जाना जाएगा। यह संस्थान डेयरी टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और बिजनेस मैनेजमेंट जैसे विषयों में पेशेवर शिक्षा प्रदान करता है। 1982 में पूसा से शुरू होकर यह संस्थान 1986 में पटना स्थानांतरित हुआ था। वर्तमान में यह संस्थान बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय के अंतर्गत कार्यरत है, जो राज्य में डेयरी शिक्षा का प्रमुख केंद्र है।
पटना, एजेंसियां। बिहार में 18 लाख राशन कार्ड धारकों का नाम कटनेवाला है। इससे पहले 12 लाख अयोग्य राशन कार्ड धारकों का नाम कट चुका है। अब विभाग अगले कुछ दिनों में करीब 18 लाख और नाम काटने की तैयारी में है। सरकार ने यह स्पष्ट किया था कि वैसे लोग जिनके पास चार पहिया वाहन हैं, जो बड़ी कंपनियों में निदेशक के पद पर कार्यरत हैं, या फिर जो इनकम टैक्स भरते हैं, वे राशन कार्ड से राशन नहीं लेंगे। इससे जरुरतमंद लोग वंचित रह जाते हैं, बावजूद इसके लोग गलत तरीके से राशन कार्ड का इस्तेमाल कर रहे थे। इसलिए सरकार द्वारा यह कदम उठाया जा रहा है। इस बाबत खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग द्वारा सभी जिलों को दिशा-निर्देश दे दिए गए हैं। दी सख्त चेतावनी दी गई केंद्र सरकार ने राज्य के 57 लाख परिवारों को संदिग्धों की श्रेणी में डाला था। फिर इन परिवारों की स्थानीय स्तर पर गहन जांच कराई गई। इसमें 55 लाख परिवारों की जांच पूरी हो चुकी है। इस जांच में करीब 36 लाख परिवार अयोग्य पाए गए हैं। इसे लेकर विभाग ने सख्त चेतावनी दी है कि जांच प्रक्रिया में किसी भी तरह की कोताही या लापरवाही नहीं बरती जाएगी। सरकार के इस कदम से व्यव्स्था में पारदर्शिता आएगी।
पटना, एजेंसियां। बिहार में राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं, जहां मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार जल्द ही मंत्रिमंडल विस्तार की तैयारी में है। इस विस्तार में कई नए चेहरों को मौका मिलने की संभावना जताई जा रही है, खासकर भारतीय जनता पार्टी के कुछ युवा और प्रभावशाली विधायकों के नाम चर्चा में हैं। बीजेपी के तीन प्रमुख दावेदार कैबिनेट में शामिल होने की रेस में सबसे चर्चित नामों में Anand Mishra, Kumar Shailendra और Sanjeev Chaurasia शामिल हैं। ये तीनों विधायक अपनी अलग पहचान और राजनीतिक पृष्ठभूमि के कारण पार्टी नेतृत्व की नजर में अहम माने जा रहे हैं। आनंद मिश्रा: प्रशासनिक अनुभव और तेज छवि बक्सर से विधायक आनंद मिश्रा पूर्व आईपीएस अधिकारी रह चुके हैं और असम कैडर में अपनी कड़क कार्यशैली के लिए जाने जाते हैं। ‘एनकाउंटर स्पेशलिस्ट’ की छवि और प्रशासनिक अनुभव उन्हें एक मजबूत दावेदार बनाता है। राजनीति में आने के बाद उन्होंने अपनी लोकप्रियता और संगठनात्मक क्षमता से पार्टी नेतृत्व का ध्यान आकर्षित किया है। कुमार शैलेंद्र: अनुभवी और प्रभावशाली नेता भागलपुर के बिहपुर से विधायक कुमार शैलेंद्र तीन बार चुनाव जीत चुके हैं। उनकी मजबूत पकड़ और क्षेत्र में विकास कार्यों के कारण वे एक अनुभवी नेता के रूप में देखे जाते हैं। राजनीतिक बयानबाजी और स्पष्ट रुख के कारण भी वे अक्सर चर्चा में रहते हैं। संजीव चौरसिया: लगातार जीत और संगठन से जुड़ाव दीघा से विधायक संजीव चौरसिया लगातार तीन चुनाव जीत चुके हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से उनके करीबी संबंध और मजबूत जनाधार उन्हें पार्टी के भीतर एक प्रभावशाली नेता बनाते हैं। कैबिनेट विस्तार से नए समीकरण मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर यह भी माना जा रहा है कि सहयोगी दलों के साथ संतुलन साधने के लिए नए चेहरों को मौका दिया जा सकता है। इससे न केवल सरकार की कार्यशैली में नई ऊर्जा आएगी, बल्कि आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए राजनीतिक समीकरण भी मजबूत होंगे।
पटना, एजेंसियां। बिहार की राजनीति में आज अहम दिन है, जहां नए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने विधानसभा पहुंचते ही आत्मविश्वास से भरा अंदाज दिखाया। सदन में प्रवेश करने से पहले उन्होंने कैमरे के सामने विक्ट्री साइन दिखाया, जिससे उनके समर्थकों में उत्साह देखने को मिला। इसके बाद उन्होंने विधानसभा में विश्वास मत पेश किया। विशेष सत्र में शुरू हुई बहस शुक्रवार सुबह 11 बजे से विधानसभा का विशेष सत्र शुरू हुआ, जिसमें विश्वास मत पर चर्चा हो रही है। बताया जा रहा है कि इस मुद्दे पर करीब 90 मिनट तक बहस चलेगी। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को बहुमत साबित करने के लिए सदन में 122 विधायकों के समर्थन की आवश्यकता है। एनडीए को बहुमत का भरोसा एनडीए गठबंधन के नेताओं और विधायकों ने विश्वास जताया है कि सरकार आसानी से बहुमत हासिल कर लेगी। जेडीयू विधायक श्याम रजक ने इसे मात्र औपचारिकता बताया, जबकि पंकज मिश्रा ने दावा किया कि महागठबंधन के कुछ विधायक भी एनडीए के संपर्क में हैं। अन्य विधायकों ने भी सरकार को मजबूत समर्थन मिलने की बात कही। विपक्ष पर निशाना, समर्थन का दावा एनडीए नेताओं ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि उनके पास कोई ठोस मुद्दा नहीं है। साथ ही यह भी दावा किया गया कि कुछ विपक्षी विधायक सरकार के पक्ष में आ सकते हैं। इससे सदन में राजनीतिक हलचल और तेज हो गई है। सरकार के लिए अहम परीक्षा यह विश्वास मत मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार के लिए पहली बड़ी परीक्षा मानी जा रही है। हालांकि, सदन में एनडीए के पास पर्याप्त संख्या होने के कारण सरकार के बहुमत साबित करने में किसी बड़ी चुनौती की संभावना कम बताई जा रही है। राजनीतिक नजरें परिणाम पर टिकीं अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि सदन में मतदान के दौरान क्या परिणाम सामने आता है। यह सत्र बिहार की आगामी राजनीतिक दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
पटना, एजेंसियां। बिहार की सियासत में एक बार फिर महिलाओं की भागीदारी को लेकर बहस तेज हो गई है। नीतीश कुमार की अगुवाई में बनी जनता दल (यू) की नई राष्ट्रीय टीम में 24 सदस्यों में से सिर्फ 3 महिलाओं को जगह मिली है। यह कुल मिलाकर करीब 12.5 प्रतिशत प्रतिनिधित्व है, जो ‘आधी आबादी’ के अनुपात और 33 प्रतिशत हिस्सेदारी की अपेक्षा से काफी कम है। महिलाओं को सीमित जिम्मेदारी नई टीम में कहकशां परवीन को महासचिव, जबकि रूही तागुंग और निवेदिता कुमारी को सचिव पद की जिम्मेदारी दी गई है। इसके अलावा बाकी अधिकांश पद पुरुष नेताओं को दिए गए हैं। इस स्थिति ने पार्टी के भीतर और बाहर दोनों जगह सवाल खड़े कर दिए हैं, खासकर तब जब जदयू महिला सशक्तिकरण और नारी वंदन जैसे मुद्दों का समर्थन करती रही है। भरोसेमंद नेताओं को अहम जिम्मेदारी पार्टी नेतृत्व ने अपने भरोसेमंद नेताओं को अहम पद सौंपे हैं। संजय झा को एक बार फिर राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया है। वहीं चंद्रेश्वर प्रसाद चंद्रवंशी को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाकर संगठन में अति पिछड़े वर्ग की भागीदारी को मजबूत करने की कोशिश की गई है। नई टीम में पुराने और नए चेहरों का मिश्रण जदयू की इस टीम में कई अनुभवी नेताओं के साथ कुछ नए चेहरों को भी मौका दिया गया है। महासचिव पद पर रमेश सिंह कुशवाहा और सचिव पद पर दयानंद राय, रूही तागुंग और निवेदिता कुमारी जैसे नाम शामिल हैं। प्रतिनिधित्व पर जारी बहस हालांकि, टीम के गठन के बाद महिलाओं की कम भागीदारी को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि राजनीतिक दल महिलाओं को पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं देंगे, तो ‘आधी आबादी’ की भागीदारी का लक्ष्य हासिल करना मुश्किल होगा।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।