बिहार

बिहार सरकार का सख्त आदेश: राजस्व कर्मचारियों को सोशल मीडिया पर सरकार की नीतियों की आलोचना से रोक

surbhi मार्च 7, 2026 0
Bihar revenue department warns employees against criticizing government on social media
Bihar Government Social Media Warning Revenue Employees

 

आचरण नियमावली के उल्लंघन पर जारी चेतावनी, भविष्य में होगी कड़ी कार्रवाई

बिहार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने सोशल मीडिया पर सरकार की नीतियों की आलोचना करने वाले कर्मचारियों को सख्त चेतावनी दी है। विभाग के प्रधान सचिव सीके अनिल ने सभी अंचल अधिकारियों को पत्र जारी कर स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि ऐसा करने वाले सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

 

आचरण नियमावली का हवाला

पत्र में कहा गया है कि सरकारी सेवक (बिहार सरकारी सेवक (आचरण) नियमावली, 1976) के नियम 10 के अनुसार कोई भी कर्मचारी रेडियो, अखबार, लेख, पत्र या सार्वजनिक मंच पर ऐसा बयान नहीं दे सकता जिससे केंद्र या राज्य सरकार की नीतियों की आलोचना होती हो।

इसके अलावा यह भी स्पष्ट किया गया कि किसी भी सरकारी कर्मचारी को सरकार की पूर्व अनुमति के बिना मीडिया या अखबार से कोई संबंध रखने की अनुमति नहीं है।

 

भूमि सुधार कार्यक्रम पर की गई टिप्पणियां

प्रधान सचिव ने बताया कि पिछले दो महीनों से उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा के नेतृत्व में भूमि सुधार जन कल्याण संवाद कार्यक्रम का आयोजन 12 दिसंबर 2025 से विभिन्न प्रमंडलीय मुख्यालय जिलों में किया गया।

इस दौरान कुछ राजस्व अधिकारियों और कर्मचारियों ने सोशल मीडिया और मीडिया में प्रतिकूल टिप्पणियां कीं, जो सरकारी सेवक के आचरण के खिलाफ हैं।

 

सोशल मीडिया पोस्ट और रील पर भी रोक

निर्देश में स्पष्ट किया गया है कि सरकारी कर्मचारियों द्वारा सोशल मीडिया पर सरकार की नीतियों के खिलाफ पोस्ट, वीडियो या रील जारी करना पूरी तरह प्रतिबंधित है।

राजस्व विभाग ने चेतावनी दी है कि भविष्य में इस तरह की गतिविधियों का कोई भी मामला सामने आने पर संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

सरकार का यह आदेश यह सुनिश्चित करता है कि सरकारी कर्मचारियों द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर किसी भी प्रकार की नीतियों की आलोचना नहीं की जा सके और सरकारी कार्यों में बाधा न आए।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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बिहार पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति 2026-27 के लिए आवेदन शुरू, पात्र छात्र जल्द करें अप्लाई

पटना, एजेंसियां। बिहार सरकार के शिक्षा विभाग ने शैक्षणिक वर्ष 2026-27 के लिए पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति (Post-Matric Scholarship) योजनाओं के तहत ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है। विभाग ने पात्र छात्र-छात्राओं से समय रहते आवेदन करने की अपील की है, ताकि उन्हें छात्रवृत्ति का लाभ बिना किसी परेशानी के मिल सके।   इस वर्ष जिन योजनाओं के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए हैं, उनमें अनुसूचित जाति (SC) प्रवेशिकोत्तर छात्रवृत्ति योजना, अनुसूचित जनजाति (ST) प्रवेशिकोत्तर छात्रवृत्ति योजना, मुख्यमंत्री अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति प्रवेशिकोत्तर छात्रवृत्ति योजना तथा मुख्यमंत्री पिछड़ा वर्ग (BC) एवं अति पिछड़ा वर्ग (EBC) प्रवेशिकोत्तर छात्रवृत्ति योजना शामिल हैं। इन योजनाओं का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा जारी रखने में सहायता प्रदान करना है।   शिक्षा विभाग के अनुसार शिक्षा विभाग के अनुसार, एससी और एसटी वर्ग के छात्र-छात्राओं को आवेदन SC/ST PMS Portal के माध्यम से करना होगा, जबकि बीसी और ईबीसी वर्ग के विद्यार्थियों के लिए अलग PMS Online Portal उपलब्ध कराया गया है। इसके अलावा संबंधित शिक्षण संस्थानों के लिए भी अलग पोर्टल की व्यवस्था की गई है, ताकि आवेदन और सत्यापन की प्रक्रिया सुचारु रूप से पूरी की जा सके।   विभाग ने छात्रों को क्या सलाह दी  विभाग ने छात्रों को सलाह दी है कि आवेदन करने से पहले सभी आवश्यक दस्तावेज तैयार रखें। पोर्टल पर आवेदन प्रक्रिया, पात्रता, आवश्यक प्रमाणपत्र और अन्य दिशा-निर्देश विस्तार से उपलब्ध हैं। आवेदन पत्र भरते समय सभी जानकारी सही और सावधानीपूर्वक दर्ज करने की भी अपील की गई है, ताकि किसी प्रकार की तकनीकी या दस्तावेज संबंधी त्रुटि के कारण आवेदन निरस्त न हो।   शिक्षा विभाग ने सभी योग्य एवं इच्छुक विद्यार्थियों से निर्धारित समय सीमा के भीतर ऑनलाइन आवेदन करने का आग्रह किया है। समय पर आवेदन करने से छात्रवृत्ति की प्रक्रिया तेजी से पूरी होगी और पात्र छात्रों को वित्तीय सहायता का लाभ समय पर मिल सकेगा।

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Bihar Rain Alert: बिहार के 8 जिलों में भारी बारिश और वज्रपात की चेतावनी, IMD ने जारी किया अलर्ट

बिहार में मानसून सक्रिय है, लेकिन पूरे राज्य में बारिश का वितरण समान नहीं है। जहां सीमांचल और उत्तर बिहार के कई जिलों में लगातार बारिश हो रही है, वहीं दक्षिण बिहार के कई हिस्सों में अब भी सामान्य से कम वर्षा दर्ज की गई है। इसी बीच भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने राज्य के कई जिलों के लिए भारी बारिश, तेज हवाओं और वज्रपात को लेकर अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग के अनुसार, आज कई इलाकों में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा, गरज-चमक और भारी बारिश की संभावना है। लोगों से खराब मौसम के दौरान विशेष सतर्कता बरतने की अपील की गई है। इन जिलों में भारी बारिश का अलर्ट मौसम विभाग ने सीमांचल और उत्तर बिहार के कई जिलों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना वाले जिले: कटिहार किशनगंज अररिया मधेपुरा ऑरेंज अलर्ट जारी: पूर्णिया सहरसा सुपौल मधेपुरा मौसम विभाग का कहना है कि 16 और 17 जुलाई को भी राज्य के कई हिस्सों में तेज बारिश का दौर जारी रह सकता है। पटना का मौसम राजधानी पटना में दिनभर बादल छाए रहने की संभावना है। कुछ इलाकों में गरज-चमक के साथ हल्की बारिश हो सकती है। पिछले कुछ दिनों से पटना के लोगों को उमस भरी गर्मी का सामना करना पड़ रहा है। सुबह धूप निकलने के बाद दोपहर तक बादल छाने की संभावना बनी हुई है। आसपास के जिलों में भी मौसम का यही रुख देखने को मिल सकता है। मानसून सक्रिय, लेकिन बारिश असमान मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार बिहार में मानसून सक्रिय है, लेकिन इसकी गति अपेक्षाकृत धीमी है। यही कारण है कि राज्य के अलग-अलग हिस्सों में बारिश का पैटर्न अलग दिखाई दे रहा है। उत्तर बिहार और सीमांचल में लगातार वर्षा से लोगों को गर्मी से राहत मिली है। कई नदियों के जलस्तर में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। दूसरी ओर, दक्षिण बिहार में कम बारिश के कारण किसानों की चिंता बढ़ गई है और खेती प्रभावित हो रही है। पिछले 24 घंटे का मौसम बीते 24 घंटों के दौरान राज्य के कई जिलों में बारिश दर्ज की गई। प्रमुख जिले: बेगूसराय बगहा समस्तीपुर पूर्वी चंपारण पटना के कुछ हिस्से वहीं, बुधवार को राज्य का अधिकतम तापमान 36 से 37 डिग्री सेल्सियस के बीच रहा। कैमूर सबसे गर्म जिला रहा, जहां अधिकतम तापमान 37.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। लोगों के लिए सलाह भारी बारिश और वज्रपात की संभावना को देखते हुए मौसम विभाग ने लोगों से खुले स्थानों, पेड़ों और बिजली के खंभों के पास खड़े होने से बचने की सलाह दी है। तेज बारिश के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचें और मौसम विभाग की ताजा चेतावनियों पर नजर बनाए रखें।  

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चारा घोटाला केस में लालू प्रसाद को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत, जमानत बरकरार

पटना, एजेंसियां। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) सुप्रीमो और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव को चारा घोटाला मामले में सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। मंगलवार को हुई सुनवाई में सर्वोच्च न्यायालय ने उनकी जमानत रद्द करने से इनकार कर दिया। साथ ही अदालत ने झारखंड हाईकोर्ट को निर्देश दिया कि लालू प्रसाद और अन्य आरोपियों की सजा के खिलाफ लंबित अपीलों पर छह महीने के भीतर सुनवाई पूरी की जाए।   ईडी ने जमानत रद्द करने की थी मांग प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर लालू प्रसाद की जमानत रद्द करने और उनकी सजा पर लगी रोक हटाने की मांग की थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस मांग को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने कहा कि लंबे समय से लंबित अपील के बीच इस स्तर पर हस्तक्षेप करना उचित नहीं होगा।   2021 से जमानत पर हैं लालू प्रसाद चारा घोटाला मामले में लालू प्रसाद और अन्य आरोपियों को 2018 में दोषी ठहराया गया था। इसके बाद उन्होंने अपनी सजा के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। अपील पर सुनवाई लंबित रहने के कारण उन्हें वर्ष 2021 में जमानत दी गई थी। उस समय अदालत ने स्पष्ट किया था कि अपील पर अंतिम फैसला आने तक वे जमानत पर रहेंगे।   हाईकोर्ट को सुनवाई जल्द पूरी करने का निर्देश मंगलवार की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मामले को अनावश्यक रूप से लंबित नहीं रखा जाना चाहिए। इसलिए झारखंड हाईकोर्ट को निर्देश दिया गया है कि वह अगले छह महीनों के भीतर लालू प्रसाद और अन्य आरोपियों की अपीलों पर सुनवाई पूरी करे। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से लालू प्रसाद को बड़ी कानूनी राहत मिली है और उनकी जमानत पहले की तरह बरकरार रहेगी। अब सभी की नजरें हाईकोर्ट में होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां अपील पर अंतिम फैसला आने के बाद मामले की आगे की कानूनी दिशा तय होगी।

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