पटना, एजेंसियां। बिहार की राजनीति में बड़े बदलाव के संकेतों के बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अहम अपडेट सामने आया है। खबर है कि मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद भी उनकी सुरक्षा में कोई कमी नहीं होगी, बल्कि उनका सुरक्षा घेरा और मजबूत किया जाएगा। मौजूदा समय में उन्हें मुख्यमंत्री होने के नाते SSG सुरक्षा प्राप्त है, लेकिन इस्तीफे के बाद उन्हें Z+ श्रेणी की अतिरिक्त सुरक्षा भी दी जाएगी। इस संबंध में राज्य के गृह विभाग की विशेष शाखा की ओर से आदेश जारी किए जाने की खबर है। सूत्रों के अनुसार सूत्रों के अनुसार, नीतीश कुमार जल्द ही राज्यसभा की सदस्यता ग्रहण कर सकते हैं। रिपोर्ट्स में कहा गया है कि वे 10 अप्रैल को राज्यसभा सांसद के रूप में शपथ ले सकते हैं। इसके लिए उनके 8 या 9 अप्रैल को दिल्ली जाने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, मुख्यमंत्री पद से इस्तीफे की आधिकारिक तारीख अभी स्पष्ट नहीं है, लेकिन बिहार की सियासत में इसे बड़े नेतृत्व परिवर्तन के रूप में देखा जा रहा है। MLC पद छोड़ चुके, अब नजर CM कुर्सी पर नीतीश कुमार पहले ही 30 मार्च को बिहार विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे चुके हैं। यह कदम उनके राज्यसभा जाने की प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि मुख्यमंत्री आवास छोड़ने के बाद वे किसी दूसरे सरकारी आवास में शिफ्ट हो सकते हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने बिहार में सत्ता परिवर्तन की अटकलों को और तेज कर दिया है। चारों सदनों के सदस्य बनने की ओर बड़ा कदम अगर नीतीश कुमार राज्यसभा की शपथ लेते हैं, तो वे उन चुनिंदा नेताओं में शामिल होंगे जो विधानसभा, विधान परिषद, लोकसभा और राज्यसभा—चारों सदनों का हिस्सा रह चुके हैं। फिलहाल, उनकी सुरक्षा और राजनीतिक भूमिका—दोनों को लेकर बिहार में हलचल तेज है।
पटना, एजेंसियां। बिहार के नालंदा में शीतला माता मंदिर भगदड़ मचने से 8 लोगों की मौत हो गईस जबकि दर्जनों लोग घायल हो गए। इस घटना को लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने दुख जताया है। साथ ही मृतकों के लिए मुआवजा देने का ऐलान किया है। नीतीश सरकार ने भगदड़ में मरने वाले श्रद्धालुओं के आश्रितों को 6-6 लाख रुपए मुआवजा देने की घोषणा की है वहीं घायलों को मुफ्त इलाज देने की बात कही है। जानकारी के मुताबिक, मृतकों में 7 महिलाएं हैं। घायलों को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका इलाज चल रही है। शीतला अष्टमी पूजा के दौरान हादसा दरअसल यह हादसा मंदिर में शीतला अष्टमी पूजा के दौरान हुई। शीतला अष्टमी पूजा को लेकर मंदिर परिसर में भारी भीड़ जमा थी। इसी दौरान अचानक धक्का-मुक्की का सिलसिला शुरू हुआ और लोग एक-दूसरे पर गिरते चले गए। भीड़ में दबने के कारण आठ लोगों की मौत हो गई। शीतलाष्टमी मेला लगता है यहा दरअसल इस मंदिर की मान्यता है कि इस पूजा के उपलक्ष्य में शीतलाष्टमी मेला लगता है। मेला के दिन मघड़ा और इसके आसपास के दर्जनों गांवों में चूल्हा नहीं जलता है। लोग एक दिन पहले ही खाना बनाकर दूसरे दिन प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं। शीतला मंदिर के पुजारी ने बताया कि चैत्र कृष्ण पक्ष अष्टमी के दिन यहां देश के कोने-कोने से लोग पूजा अर्चना करने आते हैं। व्रत की विशेषता यह कि इसमें शीतला देवी को भोग लगाने वाला पदार्थ एक दिन पहले ही बना लिया जाता है। बासी भोग लगाने की परंपरा है। चैत्र अष्टी के मौके पर मां शीतला की पूजा-अर्चना के लिए सूबे के विभिन्न जिलों के अलावा झारखंड, बंगाल और उत्तर प्रदेश से भी काफी संख्या में श्रद्धालुओं आते हैं। मघड़ा गांव में काफी पुराना मिट्ठी कुआं है। इसी कुएं के पानी से सप्तमी की शाम में बसिऔरा के लिए भोजन तैयार किया जाता है। प्रसाद में अरवा चावल, चने की दाल, सब्जियां, पुआ, पकवान आदि बनाया जाता है। खास बात यह कि मां शीतला मंदिर में दिन में दीपक नहीं जलते हैं। दूर-दराज़ से आए श्रद्धालु, व्रत-पूजा और वासी भोग की परंपरा निभाने पहुंचे थे। लोगों का कहना है कि इस मंदिर में जाने से चर्म रोग और बच्चों की बीमारियों से निजात मिलता है।
पटना/नालंदा, 31 मार्च 2026: बिहार के नालंदा जिले में स्थित Sheetla Temple में मंगलवार को एक दर्दनाक हादसा हो गया। एक धार्मिक आयोजन के दौरान भारी भीड़ उमड़ने से भगदड़ जैसी स्थिति पैदा हो गई, जिसमें कम से कम 8 महिलाओं की मौत हो गई, जबकि कई अन्य लोग घायल बताए जा रहे हैं। क्या हुआ था घटनास्थल पर? मिली जानकारी के अनुसार, मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पूजा-अर्चना के लिए पहुंचे थे। भीड़ इतनी अधिक हो गई कि हालात बेकाबू हो गए और अचानक अफरा-तफरी मच गई। इसी दौरान कई लोग एक-दूसरे पर गिर पड़े और दबने से यह हादसा हुआ। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी, जिससे स्थिति तेजी से बिगड़ गई। राहत और बचाव कार्य जारी घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और राहत-बचाव कार्य शुरू किया गया। घायलों को तुरंत नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। मौके से सामने आई तस्वीरों में मंदिर परिसर में भारी भीड़ और अफरा-तफरी का माहौल साफ देखा जा सकता है। पहले भी हो चुके हैं ऐसे हादसे धार्मिक स्थलों पर भीड़ प्रबंधन की कमी के कारण इस तरह की घटनाएं पहले भी सामने आती रही हैं। पिछले साल Sri Venkateswara Swamy Temple में भी भगदड़ में 9 लोगों की मौत हो गई थी। बड़ा सवाल: सुरक्षा व्यवस्था पर क्यों उठ रहे सवाल? यह हादसा एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि बड़े धार्मिक आयोजनों में भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम क्यों नहीं किए जाते।
पटना, एजेंसियां। बिहार में मंगलवार सुबह दो लोक सेवकों के खिलाफ आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने छापा मारा है। यह मामला आय से अधिक संपत्ति का बताया जा रहा है। एक तरफ किशनगंज में DSP गौतम कुमार के पटना, पूर्णिया और किशनगंज स्थित उनके कुल 6 ठिकानों पर EOW की छापामारी चल रही है। बताया जा रहा है कि डीएसपी गौतम कुमार पर किशनगंज में आय से 60 प्रतिशत अधिक आय रखने के आरोप हैं। दूसरी ओर सहरसा में DRDO निदेशक वैभव कुमार के छह ठिकानों पर भी आर्थिक अपराध इकाई की छापेमारी चल रही है। वैभव कुमार के सहरसा एवं मुज्जफरपुर स्थित छह ठिकानों पर छापामारी चल रही है। इन पर अपने आय से 70 प्रतिशत से अधिक का आय जमा करने का मामला है। यह पूरी कार्रवाई अपर पुलिस अधीक्षक, वरीय पुलिस अधीक्षक और पुलिस उपाधीक्षक स्तर के अधिकारियों के नेतृत्व में की जा रही है।
पटना, एजेंसियां। बिहार क सीएम नीतीश कुमार ने एमएलसी का पद छोड़ दिया है। वहीं, बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने एमएलए के पद से इस्तीफा दे दिया है। बिहार की राजनीति में एक साथ दो बड़े फैसलों ने हलचल बढ़ा दी है। बीजेपी नेता नितिन नवीन बांकीपुर सीट से विधायक थे। दोनों नेताओं के इस्तीफे के बाद राज्य में सियासी चर्चाएं तेज हो गई हैं और आने वाले दिनों में बड़े बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। दिल्ली जायेंगे नीतीश कुमार नीतीश कुमार हाल ही में राज्यसभा के लिए चुने गए हैं और अब वे राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाएंगे। लंबे समय तक बिहार की राजनीति के केंद्र में रहे नीतीश अब दिल्ली की राजनीति में नई जिम्मेदारी संभालेंगे। वहीं नितिन नवीन को भी पार्टी ने नई भूमिका दी है, जिसके तहत वे आगे काम करेंगे। बिहार में नेतृत्व परिवर्तन की चर्चा नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद बिहार में नेतृत्व परिवर्तन की चर्चा तेज हो गई है। माना जा रहा है कि आने वाले समय में नए मुख्यमंत्री के चयन की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। हालांकि अभी आधिकारिक तौर पर कुछ स्पष्ट नहीं है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे बड़े बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है। चारों सदनों में प्रतिनिधित्व का रिकॉर्ड नीतीश कुमार उन चुनिंदा नेताओं में शामिल हो गए हैं, जिन्होंने देश के चारों सदनों का हिस्सा बनने का गौरव हासिल किया है। 1985 में हरनौत से विधायक बनकर उन्होंने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की थी। 1989 में लोकसभा पहुंचे, फिर 2006 से लगातार विधान परिषद के सदस्य रहे और अब राज्यसभा में नई भूमिका निभाएंगे। इस्तीफे से पहले बैठक इस्तीफे से पहले पटना स्थित मुख्यमंत्री आवास पर जदयू के वरिष्ठ नेताओं के साथ अहम बैठक हुई। इसमें ललन सिंह, संजय कुमार झा, विजय कुमार चौधरी और अशोक चौधरी जैसे नेता शामिल हुए। बैठक में आगे की रणनीति और राजनीतिक हालात पर चर्चा की गई। नितिन नवीन ने दिया भावुक संदेश नितिन नवीन ने अपने इस्तीफे का ऐलान सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर किया। उन्होंने लिखा कि विधायक के रूप में काम करना उनके लिए एक खास अनुभव रहा। उन्होंने कहा कि पार्टी ने उन्हें जो नई जिम्मेदारी दी है, उसके जरिए भी वे बिहार के विकास के लिए काम करते रहेंगे और जनता से उनका रिश्ता हमेशा मजबूत रहेगा। आगे दोनों नेताओं की भूमिका पर नजर इन दोनों बड़े इस्तीफों के बाद बिहार की राजनीति एक नए मोड़ पर खड़ी नजर आ रही है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि राज्यसभा में इन नेताओं की भूमिका क्या होगी और बिहार में नेतृत्व को लेकर क्या फैसला सामने आता है।
गिरिडीह। जिले के गिरिडीह-पचंबा मुख्य मार्ग पर शुक्रवार देर रात एक बड़ा सड़क हादसा होते-होते टल गया, जब बाइक सवार को बचाने के प्रयास में सब्जियों से लदा एक पिकअप वाहन अनियंत्रित होकर पलट गया। यह घटना अंबेडकर चौक के पास हुई। हादसे में राहत की बात यह रही कि वाहन चालक पूरी तरह सक्षित बच गया, लेकिन पिकअप में लदी बड़ी मात्रा में सब्जियां सड़क पर बिखर गईं, जिससे कुछ समय के लिए यातायात बाधित हो गया। टाटा से बेगूसराय जा रहा था पिकअप मिली जानकारी के अनुसार, पिकअप वाहन टाटा से सब्जियां लादकर गिरिडीह के रास्ते बेगूसराय जा रहा था। रात करीब 2 बजे, जब वाहन अंबेडकर चौक के पास पहुंचा, तभी सामने अचानक एक बाइक सवार आ गया। चालक ने टक्कर से बचने के लिए तेजी से वाहन मोड़ा, लेकिन इसी दौरान वाहन का संतुलन बिगड़ गया और पिकअप सड़क पर पलट गया। सड़क पर फैल गई सब्जियां, लगा जाम पिकअप पलटते ही उसमें लदी सब्जियां सड़क पर बिखर गईं, जिससे मुख्य सड़क पर कुछ समय के लिए आवागमन पूरी तरह प्रभावित हो गया। हालांकि देर रात होने के कारण सड़क पर वाहनों की आवाजाही कम थी, जिससे किसी बड़े हादसे की आशंका टल गई। अगर यह घटना व्यस्त समय में होती, तो स्थिति और गंभीर हो सकती थी। स्थानीय लोगों और पुलिस ने संभाला मोर्चा हादसे के बाद आसपास मौजूद दुकानदारों और राहगीरों ने मौके पर पहुंचकर चालक को सुरक्षित बाहर निकाला और सड़क पर फैली सब्जियों को हटाने में मदद की। सूचना मिलते ही नगर थाना की पेट्रोलिंग टीम भी घटनास्थल पर पहुंची। पुलिस ने चालक से पूछताछ की और स्थानीय लोगों के सहयोग से पिकअप वाहन को सड़क किनारे हटवाया। इसके बाद धीरे-धीरे यातायात सामान्य हो सका। चालक सुरक्षित, वाहन और माल को नुकसान इस हादसे में किसी के घायल होने की सूचना नहीं है। हालांकि, वाहन को क्षति पहुंची है और सड़क पर गिरने से सब्जियों का भी काफी नुकसान हुआ है। पुलिस मामले की जानकारी जुटाकर आगे की कार्रवाई में लगी हुई है।
पटना, एजेंसियां। दहेज हत्या के एक गंभीर मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए आरोपी पति को दी गई जमानत रद्द कर दी है। शीर्ष अदालत ने साफ कहा कि ऐसे जघन्य अपराधों में केवल जेल में बिताए समय के आधार पर जमानत देना न्यायसंगत नहीं है। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि हाईकोर्ट का आदेश “मशीनी ढंग” से पारित हुआ, जिसमें मामले की गंभीरता और उपलब्ध तथ्यों पर पर्याप्त विचार नहीं किया गया। सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी को एक सप्ताह के भीतर सरेंडर करने का आदेश दिया है। हाईकोर्ट के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जमानत पर फैसला करते समय अदालतों को केवल यह नहीं देखना चाहिए कि आरोपी कितने समय से जेल में है, बल्कि यह भी देखना चाहिए कि अपराध की प्रकृति कितनी गंभीर है, आरोपी और पीड़िता के बीच क्या संबंध था, घटना कहां और किन परिस्थितियों में हुई, और पोस्टमार्टम जैसी मेडिकल रिपोर्ट क्या संकेत देती है। अदालत ने माना कि दहेज हत्या जैसे मामलों में न्यायिक विवेक का इस्तेमाल बेहद सावधानी से होना चाहिए। क्यों अहम है यह फैसला रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामला एक विवाहित महिला की संदिग्ध मौत से जुड़ा है, जिसकी शादी के कुछ ही समय बाद ससुराल में मौत हो गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में कानूनी धाराओं के तहत एक विशेष वैधानिक अनुमान (statutory presumption) भी लागू होता है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि वह मामले के ट्रायल पर कोई टिप्पणी नहीं कर रही, लेकिन जमानत देने का आधार कानून और तथ्यों पर टिकना चाहिए। न्याय व्यवस्था को दिया स्पष्ट संदेश यह फैसला निचली अदालतों और हाईकोर्ट्स के लिए भी एक महत्वपूर्ण संदेश माना जा रहा है कि गंभीर आपराधिक मामलों में जमानत आदेश संक्षिप्त या औपचारिक तरीके से नहीं दिए जा सकते। सुप्रीम कोर्ट के इस रुख से यह साफ है कि दहेज हत्या जैसे मामलों में अदालतें अब अधिक संवेदनशील और सख्त नजरिया अपनाने की अपेक्षा रखती हैं।
पटना, एजेंसियां। बिहार के मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी और शिवहर जिलों में बिजली बिल बकायेदारों के खिलाफ अब बिजली विभाग ने सख्त रुख अपना लिया है। विभाग ने साफ कर दिया है कि 31 मार्च 2026 तक बकाया बिल जमा नहीं करने वाले उपभोक्ताओं के बिजली कनेक्शन बिना किसी पूर्व सूचना के काट दिए जाएंगे। इस कार्रवाई को लेकर मुजफ्फरपुर सर्किल में विशेष अभियान शुरू कर दिया गया है।बिजली विभाग ने इस अभियान को ‘नो पेमेंट, नो पावर’ नाम दिया है। अधिकारियों का कहना है कि बार-बार अपील और नोटिस के बावजूद बड़ी संख्या में उपभोक्ता बिल भुगतान नहीं कर रहे हैं। ऐसे में अब विभाग ने बकायेदारों के खिलाफ फील्ड स्तर पर सख्त कार्रवाई करने का फैसला लिया है। घर-घर पहुंचेगी टीम, मौके पर ही कटेगा कनेक्शन विद्युत अधीक्षण अभियंता पंकज राजेश के अनुसार, बकाया वसूली के लिए विशेष धावा दल बनाए गए हैं। ये टीमें घर-घर जाकर उपभोक्ताओं की जांच करेंगी और जिनके ऊपर बकाया मिलेगा, उनका मौके पर ही बिजली कनेक्शन काट दिया जाएगा। विभाग ने स्पष्ट किया है कि इस बार किसी तरह की ढिलाई नहीं बरती जाएगी। 12 हजार से ज्यादा कनेक्शन पहले ही कटे विभागीय आंकड़ों के अनुसार, मार्च महीने में अब तक 16.57 करोड़ रुपये की वसूली की जा चुकी है। इसके साथ ही 12,560 उपभोक्ताओं के कनेक्शन पहले ही काटे जा चुके हैं। हालांकि, इसके बावजूद कुल बकाया राशि बढ़कर 137.05 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है, जो बिजली विभाग के लिए गंभीर चिंता का विषय बनी हुई है। 20 हजार से ज्यादा उपभोक्ता डिफॉल्टर डिवीजनवार आंकड़ों में स्थिति और चिंताजनक नजर आ रही है। पूर्वी डिवीजन में 43.42 करोड़ रुपये बकाया हैं और यहां 20 हजार से ज्यादा उपभोक्ता डिफॉल्टर हैं। पश्चिमी डिवीजन में 85.52 करोड़ रुपये का बकाया है। वहीं अर्बन-1 में 4.89 करोड़ और अर्बन-2 में 3.22 करोड़ रुपये का बकाया दर्ज किया गया है। रविवार को भी खुलेंगे बिजली कार्यालय राजस्व वसूली तेज करने के लिए नार्थ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी ने मार्च महीने की सभी छुट्टियां रद्द कर दी हैं। अब रविवार और अन्य अवकाश के दिनों में भी बिजली कार्यालय खुले रहेंगे, ताकि उपभोक्ता आसानी से अपना बिल जमा कर सकें।
Central Board of Secondary Education (CBSE) द्वारा 27 मार्च 2026 को आयोजित की जाने वाली 12वीं बोर्ड की समाजशास्त्र परीक्षा ने बिहार और झारखंड के छात्रों के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। यह दिन रामनवमी के पावन पर्व के साथ पड़ रहा है, जिसके चलते छात्रों, अभिभावकों और शिक्षा जगत में चिंता का माहौल बन गया है। जुलूस और ट्रैफिक जाम से बढ़ेगी मुश्किल रामनवमी के अवसर पर बिहार और झारखंड के कई शहरों में बड़े स्तर पर धार्मिक जुलूस निकाले जाते हैं। ये जुलूस आमतौर पर दोपहर बाद शुरू होकर देर रात तक चलते हैं। ऐसे में परीक्षा समाप्त होने के बाद छात्रों को भारी ट्रैफिक और भीड़ का सामना करना पड़ सकता है। मुख्य सड़कों पर रूट डायवर्जन और कई जगहों पर रास्ते बंद रहने की संभावना है, जिससे छात्रों के घर लौटने में देरी और परेशानी दोनों बढ़ सकती हैं। परिवहन सेवाएं भी होंगी प्रभावित त्योहार के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए कई जगहों पर बस, ऑटो और टेंपो जैसी सार्वजनिक परिवहन सेवाएं सीमित या बंद कर दी जाती हैं। इसका सीधा असर उन छात्रों पर पड़ेगा जो दूरदराज के इलाकों से परीक्षा केंद्र तक आते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों के लिए यह स्थिति और अधिक चुनौतीपूर्ण बन सकती है, क्योंकि उनके पास वैकल्पिक साधनों की कमी होती है। सरकार ने बदली छुट्टी, CBSE पर उठे सवाल Government of Jharkhand ने पहले 26 मार्च को घोषित रामनवमी की छुट्टी को बदलकर 27 मार्च कर दिया है। इस फैसले के बाद यह सवाल और तेज हो गया है कि जब राज्य सरकार ने त्योहार को ध्यान में रखते हुए बदलाव किया, तो CBSE ने परीक्षा तिथि में संशोधन क्यों नहीं किया। BBMKU ने परीक्षा टाली, CBSE पर दबाव बढ़ा धनबाद स्थित Binod Bihari Mahto Koylanchal University (BBMKU) ने छात्रों की सुविधा को देखते हुए 27 मार्च को होने वाली यूजी सेमेस्टर-7 की परीक्षा स्थगित कर दी है। अब यह परीक्षा 28 मार्च 2026 को आयोजित होगी। विश्वविद्यालय के इस फैसले के बाद CBSE के निर्णय पर सवाल और गहरे हो गए हैं। छात्रों और अभिभावकों में बढ़ा मानसिक दबाव छात्रों और उनके अभिभावकों का कहना है कि एक ही दिन परीक्षा और बड़ा त्योहार होने से मानसिक दबाव काफी बढ़ गया है। एक ओर परीक्षा का तनाव है, तो दूसरी ओर सुरक्षित तरीके से परीक्षा केंद्र तक पहुंचने और वापस लौटने की चिंता भी बनी हुई है। कई अभिभावकों ने प्रशासन से मांग की है कि छात्रों के लिए विशेष ट्रैफिक व्यवस्था और सुरक्षा इंतजाम किए जाएं, ताकि उन्हें किसी प्रकार की परेशानी न हो।
बिहार में मैट्रिक परीक्षा 2026 के परिणाम का इंतजार कर रहे लाखों छात्रों के लिए बड़ी खबर है। Bihar School Examination Board ने रिजल्ट जारी करने की अंतिम तैयारियां लगभग पूरी कर ली हैं। ताजा अपडेट के मुताबिक, बोर्ड ने संभावित टॉपर्स को वेरिफिकेशन के लिए पटना कार्यालय बुलाना शुरू कर दिया है, जिससे यह संकेत मिल रहा है कि परिणाम जल्द ही घोषित किया जा सकता है। 30-31 मार्च तक रिजल्ट की उम्मीद सूत्रों के अनुसार, बिहार बोर्ड 10वीं का रिजल्ट 30 या 31 मार्च 2026 को जारी किया जा सकता है। हालांकि बोर्ड की ओर से अभी आधिकारिक तारीख की घोषणा नहीं की गई है, लेकिन वेरिफिकेशन प्रक्रिया शुरू होने के बाद रिजल्ट में ज्यादा देर नहीं होती। टॉपर्स का वेरिफिकेशन क्यों जरूरी हर साल की तरह इस बार भी Bihar School Examination Board टॉपर्स का वेरिफिकेशन कर रहा है। टॉप 20 छात्रों को इंटरव्यू के लिए बुलाया जाता है, जहां उनकी कॉपियों, लिखावट और ज्ञान का मिलान किया जाता है। इस प्रक्रिया का उद्देश्य रिजल्ट में पारदर्शिता बनाए रखना और किसी भी तरह की गड़बड़ी या फर्जीवाड़े को रोकना है। 15 लाख से ज्यादा छात्रों ने दी परीक्षा इस वर्ष मैट्रिक परीक्षा में करीब 15.12 लाख छात्र-छात्राएं शामिल हुए थे। परीक्षाएं 17 फरवरी से 25 फरवरी 2026 के बीच आयोजित की गई थीं। अब सभी छात्रों को अपने परिणाम का बेसब्री से इंतजार है। कहां और कैसे देखें रिजल्ट रिजल्ट जारी होने के बाद छात्र इन आधिकारिक वेबसाइट्स पर जाकर अपना परिणाम देख सकेंगे: bseexam.com biharboardonline.bihar.gov.in secondary.biharboardonline.com results.biharboardonline.com matricbiharboard.com रिजल्ट चेक करने के आसान स्टेप्स: किसी भी आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं “BSEB 10th Result 2026” लिंक पर क्लिक करें रोल नंबर और रोल कोड दर्ज करें सबमिट बटन दबाएं स्क्रीन पर रिजल्ट देखें और डाउनलोड करें छात्रों के लिए अहम सलाह रिजल्ट जारी होने के समय वेबसाइट पर ट्रैफिक अधिक होने की वजह से साइट स्लो हो सकती है। ऐसे में छात्र धैर्य बनाए रखें और केवल आधिकारिक वेबसाइट्स पर ही भरोसा करें।
पटना, एजेंसियां। पटना के चर्चित दुलारचंद यादव हत्याकांड में जेडीयू विधायक अनंत सिंह को बड़ी राहत मिली है। पटना हाई कोर्ट से जमानत मिलने के बाद करीब चार महीने जेल में रहने के पश्चात उन्हें बेऊर जेल से रिहा कर दिया गया। रिहाई के बाद अनंत सिंह ने खुद को निर्दोष बताते हुए पूरे मामले को साजिश करार दिया है। “घटनास्थल से 4 किलोमीटर दूर था” जेल से बाहर आते ही अनंत सिंह ने मीडिया से बातचीत में कहा कि घटना के समय वे मौके पर मौजूद नहीं थे। उन्होंने दावा किया, “हम घटनास्थल से करीब चार किलोमीटर दूर थे, हमें साजिश के तहत फंसाया गया है।” उनके इस बयान से मामले ने नया मोड़ ले लिया है और जांच की दिशा पर सवाल उठने लगे हैं। समर्थकों में जश्न का माहौल रिहाई के बाद अनंत सिंह के समर्थकों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। बाढ़ से लेकर मोकामा तक उनके स्वागत में कार्यकर्ताओं की भीड़ उमड़ पड़ी। जगह-जगह फूल-मालाओं और आतिशबाजी के साथ उनका स्वागत किया गया, जिससे पूरे क्षेत्र में उत्सव जैसा माहौल बन गया। जनता के बीच सक्रिय रहने का भरोसा अनंत सिंह ने कहा कि वे पहले की तरह जनता के बीच सक्रिय रहेंगे और अपने क्षेत्र के विकास के लिए काम करते रहेंगे। उन्होंने खुसरूपुर स्थित बढ़ईया में महारानी स्थान पर पूजा-अर्चना करने की भी बात कही। चार महीने बाद मिली राहत, सियासत गरम करीब चार महीने तक जेल में रहने के बाद मिली जमानत से उनके समर्थकों को बड़ी राहत मिली है। वहीं, इस घटनाक्रम के बाद बिहार की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। अब सबकी नजर इस मामले की आगे की कानूनी प्रक्रिया और इसके संभावित राजनीतिक असर पर टिकी हुई है।
पटना, एजेंसियां। केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान ने अपने चाचा पशुपति पारस से मुलाकात कर बिहार की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। लंबे समय से अलग चल रहे चाचा-भतीजा के बीच यह मुलाकात खगड़िया जिले के शहरबन्नी स्थित पैतृक आवास पर हुई, जहां चिराग पासवान अपने दिवंगत चाचा अर्जुन पासवान को श्रद्धांजलि देने पहुंचे थे। पैर छूकर लिया आशीर्वाद, दिखी नरमी मुलाकात का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें चिराग पासवान अपने चाचा पशुपति पारस के पैर छूकर आशीर्वाद लेते नजर आ रहे हैं। इसके बाद दोनों के बीच कुछ देर बातचीत भी हुई। पशुपति पारस ने भी चिराग के कंधे पर हाथ रखकर स्नेह जताया। यह दृश्य काफी समय बाद देखने को मिला, जिससे रिश्तों में नरमी के संकेत माने जा रहे हैं। सियासी गलियारों में तेज हुई अटकलें इस मुलाकात के बाद राजनीतिक हलकों में यह सवाल उठने लगा है कि क्या पासवान परिवार की दूरियां अब खत्म हो सकती हैं। माना जा रहा है कि इस पहल से दोनों के बीच जमी बर्फ पिघल सकती है और भविष्य में राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं। हालांकि, दोनों नेताओं के बीच क्या बातचीत हुई, इसका खुलासा नहीं हुआ है। कार्यकर्ताओं में उत्साह, एकता की उम्मीद मुलाकात के दौरान चिराग समर्थकों ने नारेबाजी कर माहौल को गर्म रखा। पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच इस मुलाकात को सकारात्मक संकेत के रूप में देखा जा रहा है। कई समर्थकों को उम्मीद है कि परिवार और पार्टी की एकता फिर से स्थापित हो सकती है। परिवारिक कार्यक्रम बना सियासी चर्चा का केंद्र श्रद्धांजलि कार्यक्रम के दौरान चिराग पासवान ने अपनी बड़ी मां राजकुमारी देवी से भी मुलाकात की और उनका हालचाल जाना। हालांकि यह एक पारिवारिक कार्यक्रम था, लेकिन इसने बिहार की राजनीति में संभावित बदलाव की चर्चा को जन्म दे दिया है।
बिहार कैडर के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी संजीव हंस की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई ने उनके खिलाफ एक और प्राथमिकी दर्ज की है। इस बार उन पर एक बिल्डर को फायदा पहुंचाने के बदले करीब 1 करोड़ रुपये की रिश्वत लेने का गंभीर आरोप लगा है। CBI ने 8 आरोपियों के खिलाफ दर्ज किया मामला इस मामले में सीबीआई ने संजीव हंस समेत कुल 8 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है। अन्य आरोपियों में विपुल बंसल, अनुभव अग्रवाल, पुष्पराज बजाज, शादाब खान, देवेंद्र सिंह आनंद, मुकुल बंसल और एक निर्माण कंपनी से जुड़े अज्ञात व्यक्ति का नाम शामिल है। क्या है पूरा मामला? जांच के अनुसार, यह रिश्वत एक बिल्डर के पक्ष में फैसला कराने के लिए ली गई थी। मामला राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग से जुड़ा है, जहां कथित तौर पर अनुकूल आदेश दिलाने के लिए साजिश रची गई। बताया जा रहा है कि इस साजिश के तहत बिल्डर से संपर्क कर एक करोड़ रुपये की रिश्वत तय की गई थी। कैसे हुई डील और भुगतान? जांच में सामने आया है कि इस पूरे नेटवर्क में कई लोगों की भूमिका थी। पहले बैठक कर रिश्वत की रकम तय की गई इसके बाद किस्तों में भुगतान किया गया कुछ रकम बैंक ट्रांजैक्शन के जरिए, जबकि बाकी हवाला के माध्यम से भेजी गई सीबीआई के अनुसार: 16 लाख रुपये बैंक के जरिए ट्रांसफर किए गए 25 लाख रुपये नकद हवाला से दिए गए बाकी 60 लाख रुपये भी हवाला नेटवर्क के जरिए पहुंचाए गए सुनवाई और गिरफ्तारी में दिलाई राहत आरोप है कि संजीव हंस ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए आयोग में सुनवाई की तारीखों को प्रभावित किया। इसके अलावा एक प्रमोटर की गिरफ्तारी टालने में भी मदद की गई। कोड वर्ड और गुप्त नेटवर्क का इस्तेमाल जांच एजेंसी के मुताबिक, आरोपी आपस में बातचीत और लेनदेन के लिए कोड वर्ड का इस्तेमाल करते थे, ताकि किसी को शक न हो। पूरे मामले में आपराधिक साजिश, भ्रष्टाचार निवारण कानून और अन्य धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है। पहले भी विवादों में रहे हैं संजीव हंस बताया जा रहा है कि संजीव हंस पहले भी विभिन्न मामलों को लेकर चर्चा में रहे हैं। ताजा FIR के बाद उनकी कानूनी मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।
सावरकरवाद- पटेलवाद के पोस्टरों से गरमाया माहौल, प्रशासन सतर्क; छात्र राजनीति में तेज हुई वैचारिक टकराहट पटना: बिहार की राजधानी स्थित पटना विश्वविद्यालय इन दिनों एक नए विवाद के केंद्र में है। ‘मनुस्मृति’ जलाने की घटना से शुरू हुआ विवाद अब पोस्टर पॉलिटिक्स में बदल गया है, जिससे पूरे कैंपस का माहौल तनावपूर्ण हो गया है। रातोंरात लगे भड़काऊ पोस्टर रविवार सुबह जब छात्र कैंपस पहुंचे, तो विश्वविद्यालय परिसर की दीवारों पर कई विवादित पोस्टर लगे मिले। इन पोस्टरों में ‘शरियाबाद’ और ‘मीमवाद’ के खिलाफ नारे लिखे गए थे, वहीं ‘अंबेडकरवाद’, ‘सावरकरवाद’ और ‘पटेलवाद’ के समर्थन में संदेश दिए गए थे। इन पोस्टरों ने छात्र-छात्राओं के बीच बहस को और तेज कर दिया है। मनुस्मृति दहन से शुरू हुआ विवाद दरअसल, कुछ दिन पहले मनुस्मृति जलाने की घटना ने पूरे विवाद को जन्म दिया। यह घटना एक कार्यक्रम के दौरान हुई, जहां पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष मनीष यादव ने मंच से मनुस्मृति दहन किया और कुछ बयान दिए। इस घटना को लेकर कैंपस में दो धड़े बन गए-एक पक्ष इसे सामाजिक न्याय का प्रतीक मान रहा है, तो दूसरा इसे भारतीय परंपरा के खिलाफ बता रहा है। पोस्टर अभियान के पीछे छात्र संगठन सूत्रों के अनुसार, यह पोस्टर अभियान अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से जुड़े छात्र नेताओं द्वारा चलाया गया है। बताया जा रहा है कि यह अभियान मनुस्मृति दहन के विरोध में शुरू किया गया। हालांकि, इसको लेकर आधिकारिक तौर पर कोई स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है। UGC मुद्दे ने और बढ़ाया तनाव इस पूरे घटनाक्रम के बीच University Grants Commission (UGC) से जुड़े मुद्दों पर भी छात्र संगठनों का विरोध जारी है। हाल ही में मशाल जुलूस और प्रदर्शन हुए, जिससे पहले से ही माहौल गरम था। अब पोस्टर वॉर ने इस तनाव को और बढ़ा दिया है। प्रशासन और पुलिस अलर्ट विश्वविद्यालय प्रशासन और पुलिस स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोकने के लिए कैंपस में निगरानी बढ़ा दी गई है।
‘बिहार स्पोर्ट्स कॉनक्लेव 2026’ में बड़ा रोडमैप पेश, मनरेगा मॉडल अब देशभर में होगा लागू बिहार अब खेलों के क्षेत्र में बड़ी छलांग लगाने की तैयारी में है। राजधानी पटना में आयोजित बिहार स्पोर्ट्स कॉनक्लेव 2026 में राज्य को ‘स्पोर्ट्स हब’ बनाने का महत्वाकांक्षी खाका पेश किया गया। केंद्रीय खेल राज्य मंत्री रक्षा खडसे और बिहार की खेल मंत्री श्रेयसी सिंह ने साफ संकेत दिया कि आने वाले वर्षों में बिहार खेलों के जरिए विकास और पहचान का नया केंद्र बन सकता है। गांव-गांव खेल मैदान बनाने की योजना कॉनक्लेव में सबसे ज्यादा चर्चा बिहार के ‘विलेज स्पोर्ट्स मॉडल’ की रही। इस मॉडल के तहत मनरेगा के सहयोग से गांव-गांव में खेल मैदान और छोटे स्टेडियम तैयार किए जा रहे हैं। इस पहल की केंद्रीय मंत्री रक्षा खडसे ने सराहना करते हुए कहा कि बिहार का यह मॉडल अब पूरे देश में लागू किया जाएगा। इससे ग्रामीण स्तर पर खेल प्रतिभाओं को निखारने का बड़ा मौका मिलेगा। खेल अब बनेगा रोजगार और पहचान का जरिया सरकार अब खेलों को केवल प्रतियोगिता तक सीमित नहीं रख रही, बल्कि इसे रोजगार, विकास और सामाजिक पहचान से जोड़ने की दिशा में काम कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर बुनियादी ढांचे और नीतिगत समर्थन के जरिए बिहार आने वाले समय में देश के स्पोर्ट्स मैप पर मजबूत उपस्थिति दर्ज करा सकता है। ओलंपिक और कॉमनवेल्थ की मेजबानी की तैयारी खेल मंत्री श्रेयसी सिंह ने केंद्र सरकार से मांग की कि यदि भारत को 2036 ओलंपिक की मेजबानी मिलती है, तो बिहार को भी अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों की मेजबानी का मौका दिया जाए। उन्होंने यह भी प्रस्ताव रखा कि कॉमनवेल्थ गेम्स के कुछ इवेंट्स बिहार में आयोजित किए जा सकते हैं, क्योंकि राज्य में अब अंतरराष्ट्रीय स्तर के स्टेडियम और सुविधाएं विकसित हो रही हैं। खेल इतिहास से भी जुड़ा है बिहार बिहार राज्य खेल प्राधिकरण के महानिदेशक ने बताया कि राज्य का खेलों से जुड़ाव काफी पुराना रहा है। एक समय इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन का मुख्यालय भी बिहार में था और इसके अध्यक्ष जमशेदजी टाटा जैसे प्रतिष्ठित व्यक्ति रहे हैं। दिग्गज खिलाड़ियों ने बढ़ाया उत्साह कॉनक्लेव में अभिनव बिंद्रा और डोला बनर्जी जैसे दिग्गज खिलाड़ियों की मौजूदगी ने कार्यक्रम को खास बना दिया। उनके अनुभवों से युवा खिलाड़ियों को प्रेरणा मिली।
घाटों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम, निजी नावों पर रोक; देव सूर्य मंदिर में भीड़ को देखते हुए खास व्यवस्था आस्था के महापर्व चैती छठ के दूसरे दिन बिहार में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा और ट्रैफिक को लेकर बड़े बदलाव किए हैं। राजधानी पटना से लेकर औरंगाबाद के प्रसिद्ध देव सूर्य मंदिर तक विशेष इंतजाम लागू किए गए हैं। पटना में कड़े सुरक्षा इंतजाम जिला प्रशासन ने शहर के 164 स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया है। करीब 287 दंडाधिकारी और पुलिस पदाधिकारी तैनात किए गए हैं, जो 18 सेक्टरों में विभाजित होकर निगरानी कर रहे हैं। भीड़ नियंत्रण, ट्रैफिक मैनेजमेंट और विधि-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अधिकारियों को विशेष निर्देश दिए गए हैं। नदियों में निजी नावों पर पूरी तरह रोक 22 मार्च की शाम से लेकर 25 मार्च तक नदियों में निजी नावों के संचालन पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। घाटों पर SDRF और NDRF की टीमें, गोताखोर, मेडिकल स्टाफ और ड्रोन कैमरों से निगरानी की जा रही है। आपात स्थिति के लिए जिला नियंत्रण कक्ष और डायल 112 को सक्रिय रखा गया है। जानिए पटना का नया ट्रैफिक प्लान चैती छठ के दौरान ट्रैफिक व्यवस्था में बड़े बदलाव किए गए हैं- अशोक राजपथ के सभी एंट्री प्वाइंट बंद कारगिल चौक से दीदारगंज तक वाहनों का प्रवेश पूरी तरह बंद जेपी गंगा पथ पर आवागमन और पार्किंग पूरी तरह प्रतिबंधित जेपी सेतु पर भारी वाहनों के परिचालन पर रोक दीघा मोड़ से आशियाना मोड़ की ओर गाड़ियों के आवागमन पर रोक सोनपुर, छपरा और हाजीपुर जाने के लिए महात्मा गांधी सेतु का इस्तेमाल करने की सलाह छठ व्रतियों के लिए कुछ विशेष रूट तय किए गए हैं, जबकि आम वाहनों को वैकल्पिक मार्गों से जाने को कहा गया है। देव सूर्य मंदिर, औरंगाबाद में खास व्यवस्था औरंगाबाद स्थित देव सूर्य मंदिर में हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। इस बार भी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने मंदिर के पास वाहनों के प्रवेश पर रोक लगा दी है। मंदिर से पहले ही अलग-अलग जगहों पर पार्किंग की व्यवस्था पार्किंग से मंदिर तक 3-5 KM के लिए प्रशासनिक वाहन उपलब्ध पूरे मार्ग में सिविल वॉलंटियर्स और स्काउट्स तैनात श्रद्धालुओं के लिए जरूरी सलाह प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि घर से निकलने से पहले ट्रैफिक प्लान जरूर देख लें, तय रूट का पालन करें और भीड़भाड़ वाले इलाकों में सावधानी बरतें।
हाई कोर्ट से मिली जमानत के बाद आज रिहाई, समर्थकों में उत्साह; सुरक्षा को लेकर प्रशासन अलर्ट बिहार की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। मोकामा से विधायक और ‘छोटे सरकार’ के नाम से चर्चित अनंत सिंह आज करीब चार महीने बाद जेल से रिहा होने जा रहे हैं। पटना हाई कोर्ट से जमानत मिलने के बाद उनकी रिहाई का रास्ता साफ हो गया है। बताया जा रहा है कि दोपहर 2 बजे के बाद वे बेऊर जेल से बाहर आ सकते हैं। इसको लेकर पटना से लेकर मोकामा तक समर्थकों में जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है। हाई कोर्ट से मिली जमानत पटना हाई कोर्ट के जस्टिस रुद्र प्रकाश मिश्रा की एकलपीठ ने अनंत सिंह को शर्तों के साथ जमानत दी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि अगर वे गवाहों को प्रभावित करने या डराने की कोशिश करते हैं, तो उनकी जमानत रद्द कर दी जाएगी। मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस के बयानों में विरोधाभास सामने आने के बाद उन्हें राहत मिली। रिपोर्ट में मौत का कारण वाहन से कुचलना बताया गया, जबकि उन पर गोली मारने का आरोप था। साथ ही घटनास्थल पर उनकी मौजूदगी भी स्पष्ट नहीं हो पाई। रिहाई के बाद दर्शन-पूजन का कार्यक्रम जेल से निकलने के बाद अनंत सिंह सीधे पटना स्थित अपने ‘मॉल रोड’ आवास जाएंगे। इसके बाद 24 मार्च को बड़हिया के प्रसिद्ध देवी स्थल पर पूजा-अर्चना करने का कार्यक्रम तय किया गया है। उनका काफिला बख्तियारपुर के पुराने मार्ग से होकर गुजरेगा, जहां जगह-जगह स्वागत के लिए तोरण द्वार लगाए गए हैं। पटना से मोकामा तक जश्न का माहौल अनंत सिंह की रिहाई को लेकर उनके समर्थकों ने बड़े स्तर पर तैयारी की है। पटना से मोकामा तक मिठाइयों और दावत का इंतजाम किया गया है। सूत्रों के मुताबिक, विधायक बनने के बाद पहली बार वे अपने क्षेत्र पहुंचेंगे, जिससे कार्यकर्ताओं में खासा उत्साह है। भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। क्या है दुलारचंद यादव हत्याकांड यह मामला 1 नवंबर 2025 का है, जब चुनाव प्रचार के दौरान राजद से जुड़े दुलारचंद यादव की हत्या कर दी गई थी। इस मामले में अनंत सिंह पर गंभीर आरोप लगे थे, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। हालांकि, जेल में रहते हुए भी उन्होंने मोकामा सीट से चुनाव जीतकर अपनी राजनीतिक पकड़ का प्रदर्शन किया।
पटना, एजेंसियां। बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) आज 23 मार्च 2026 को इंटरमीडिएट (12वीं) परीक्षा का परिणाम जारी करने जा रहा है। बोर्ड के अध्यक्ष आनंद किशोर ने जानकारी दी कि परिणाम दोपहर 1:30 बजे घोषित किया जाएगा। इस मौके पर शिक्षा मंत्री सुनील कुमार और अपर मुख्य सचिव डॉ. बी. राजेन्दर भी मौजूद रहेंगे। छात्रों का इंतजार होगा खत्म इस घोषणा के साथ ही लाखों छात्रों का इंतजार आज समाप्त हो जाएगा। परीक्षार्थी अपना रिजल्ट बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर रोल नंबर के माध्यम से आसानी से देख सकेंगे। कितने छात्रों ने दी परीक्षा साल 2026 में बिहार बोर्ड की 10वीं और 12वीं परीक्षाओं में कुल 28.30 लाख से अधिक छात्र-छात्राएं शामिल हुए। इनमें इंटर परीक्षा के लिए लगभग 13.17 लाख परीक्षार्थी पंजीकृत थे, जबकि मैट्रिक (10वीं) परीक्षा में 15 लाख से अधिक छात्रों ने हिस्सा लिया। कब हुई थी इंटर परीक्षा बिहार बोर्ड 12वीं की परीक्षा 2 फरवरी से 13 फरवरी 2026 के बीच आयोजित की गई थी। परीक्षा 1,762 केंद्रों पर दो शिफ्ट में संपन्न हुई। पहली शिफ्ट सुबह 9:30 बजे से दोपहर 12:45 बजे तक और दूसरी शिफ्ट दोपहर 2 बजे से शाम 5:15 बजे तक चली। मैट्रिक रिजल्ट अप्रैल में संभव वहीं, 10वीं (मैट्रिक) परीक्षा 17 फरवरी से 25 फरवरी 2026 तक आयोजित की गई थी। बोर्ड के अनुसार, मैट्रिक के नतीजे अप्रैल 2026 के पहले सप्ताह में जारी किए जा सकते हैं। ऑनलाइन ऐसे चेक करें रिजल्ट छात्र BSEB की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर रोल नंबर और अन्य जरूरी विवरण दर्ज कर अपना परिणाम देख सकते हैं। रिजल्ट जारी होने के बाद वेबसाइट पर ट्रैफिक बढ़ने की संभावना है, इसलिए छात्रों को धैर्य रखने की सलाह दी गई है।
नई तकनीक के सहारे सबूत सुरक्षित, निगरानी विभाग ने तेज की कार्रवाई बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ अब कार्रवाई और तेज होती नजर आ रही है। राज्य के संदिग्ध अधिकारियों और कर्मचारियों पर शिकंजा कसने के लिए निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने करीब 200 आरोपित अफसरों की डिजिटल फाइल तैयार कर ली है। इसका उद्देश्य मामलों की सुनवाई में तेजी लाना और दोषियों को जल्द सजा दिलाना है। तकनीक के सहारे मजबूत हुई जांच भ्रष्टाचार के मामलों में अक्सर सबूतों से छेड़छाड़ और जांच में देरी की शिकायतें आती रही हैं। इन समस्याओं को दूर करने के लिए अब आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। निगरानी विभाग ने लगभग 7 लाख रुपये की लागत से एक विशेष ‘ओपन टेक्स्ट फॉरेंसिक इमेजर’ मशीन को शामिल किया है। यह मशीन जब्त किए गए डिजिटल उपकरणों-जैसे पेन ड्राइव, दस्तावेज और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों-का सटीक क्लोन तैयार करती है। एक बार डेटा इसमें सुरक्षित हो जाने के बाद उसमें किसी तरह का बदलाव संभव नहीं होता, जिससे जांच की विश्वसनीयता बढ़ गई है। 200 अफसरों की तैयार हुई प्रोफाइल इसी तकनीक के माध्यम से अब तक करीब 200 संदिग्ध अफसरों और कर्मचारियों का पूरा डिजिटल रिकॉर्ड तैयार कर लिया गया है। इसमें उनके खिलाफ मौजूद साक्ष्य और केस से जुड़ी सभी जरूरी जानकारियां शामिल हैं। इसके लिए विशेषज्ञों और तकनीशियनों की अलग टीम भी तैनात की गई है, जो डेटा को सुरक्षित रखने और कोर्ट में पेश करने की प्रक्रिया को व्यवस्थित कर रही है। स्पीडी ट्रायल के लिए बनी खास टीम मामलों के त्वरित निपटारे के लिए एसपी स्तर के अधिकारी की अगुवाई में 10 सदस्यों की एक विशेष टीम गठित की गई है। इस टीम में डीएसपी और इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारी भी शामिल हैं। टीम का मुख्य काम मामलों की नियमित निगरानी करना और गवाहों की समय पर उपस्थिति सुनिश्चित करना है, ताकि सुनवाई में देरी न हो। कोर्ट को सौंपी गई आरोपितों की सूची निगरानी विभाग ने 200 आरोपित अफसरों की सूची अदालत को भी सौंप दी है। इससे अब मामलों की सुनवाई में तेजी आने की उम्मीद है। 25 साल में पहली बार इतनी सख्ती गौरतलब है कि वर्ष 2025 में 29 भ्रष्ट अधिकारियों और कर्मचारियों को सजा सुनाई गई, जो पिछले 25 वर्षों में सबसे अधिक है। इसे निगरानी विभाग की सख्त कार्रवाई और बेहतर समन्वय का परिणाम माना जा रहा है।
बिहार की राजनीति में इन दिनों मुख्यमंत्री पद को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा लगातार सम्राट चौधरी को लेकर दिए जा रहे संकेतों ने सियासी गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। सवाल उठ रहा है कि क्या यह महज राजनीतिक संदेश है या इसके पीछे कोई बड़ी रणनीति छिपी है? क्या बीजेपी पर दबाव बनाने की कोशिश? राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नीतीश कुमार के बयान बीजेपी के अंदरूनी समीकरणों को प्रभावित करने की कोशिश हो सकते हैं। अगर बीजेपी सम्राट चौधरी को आगे नहीं बढ़ाती है, तो इससे कुशवाहा वोट बैंक में नाराजगी की आशंका बन सकती है। वहीं अगर उन्हें आगे किया जाता है, तो इसका श्रेय भी नीतीश कुमार ले सकते हैं। ऐसे में दोनों ही परिस्थितियों में जदयू को राजनीतिक लाभ मिलने की संभावना जताई जा रही है। बीजेपी के लिए ‘धर्मसंकट’ की स्थिति यह मामला बीजेपी के लिए असहज स्थिति पैदा कर सकता है। पार्टी खुलकर यह भी नहीं कह पा रही कि उसका मुख्यमंत्री चेहरा कौन होगा। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी फिलहाल चुप्पी साधे हुए है और सही समय का इंतजार कर रही है, ताकि राजनीतिक समीकरणों के अनुसार फैसला लिया जा सके। ‘लव-कुश’ समीकरण साधने की कोशिश? राजनीति के जानकारों का मानना है कि नीतीश कुमार ‘लव-कुश’ (कुर्मी-कुशवाहा) सामाजिक समीकरण को मजबूत करने का संदेश देना चाहते हैं। सम्राट चौधरी को आगे बढ़ाकर वे यह दिखाना चाहते हैं कि इस सामाजिक एकता में उनकी अहम भूमिका है, जो आने वाले चुनावों में निर्णायक साबित हो सकती है। क्या दोहराई जाएगी सुशील कुमार मोदी जैसी कहानी? राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि कहीं सम्राट चौधरी की स्थिति भी दिवंगत सुशील कुमार मोदी जैसी न हो जाए। 2005 के बाद जदयू-भाजपा गठबंधन में सुशील मोदी और नीतीश कुमार की जोड़ी काफी मजबूत मानी जाती थी। लेकिन बाद में पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व के साथ समीकरण बदलने पर सुशील मोदी को राज्य की राजनीति से हटाकर दिल्ली भेज दिया गया था। गृह मंत्री के तौर पर प्रदर्शन पर भी सवाल सम्राट चौधरी को गृह मंत्री बनाए जाने के बाद कानून-व्यवस्था को लेकर कई बार विपक्ष ने सरकार को घेरा है। हालांकि इन मुद्दों पर मुख्यमंत्री की ओर से ज्यादा प्रतिक्रिया नहीं आई, जिससे यह संकेत भी मिलता है कि राजनीतिक समीकरणों के चलते उन्हें फिलहाल खुला समर्थन दिया जा रहा है। आगे क्या? बिहार की राजनीति में यह पूरा घटनाक्रम आने वाले समय में और दिलचस्प हो सकता है। क्या यह रणनीति बीजेपी को दबाव में लाने के लिए है, या फिर गठबंधन की मजबूती दिखाने का प्रयास-इसका जवाब आने वाले दिनों में ही साफ होगा। फिलहाल इतना तय है कि मुख्यमंत्री पद को लेकर सियासी हलचल तेज हो चुकी है और सभी की नजरें अगले बड़े फैसले पर टिकी हैं।
गया: बिहार के गया एयरपोर्ट पर अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स तस्करी का बड़ा मामला सामने आया है। बैंकॉक से आई एक फ्लाइट की जांच के दौरान कस्टम विभाग ने 8.5 किलोग्राम हाई-क्वालिटी मारिजुआना (हाइड्रोपोनिक वीड) बरामद किया है। इस कार्रवाई में एक विदेशी महिला सहित कुल पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया है। बरामद ड्रग्स की अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत करीब 8.5 करोड़ रुपये बताई जा रही है, जिससे इस नेटवर्क की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है। बैंकॉक फ्लाइट से खुला तस्करी का राज यह कार्रवाई उस समय हुई जब बैंकॉक से आई फ्लाइट FD-122 के यात्रियों की नियमित जांच की जा रही थी। जांच के दौरान अधिकारियों को चार अलग-अलग बैग में छिपाकर रखा गया मारिजुआना मिला। गिरफ्तार आरोपियों में थाई नागरिक वासना बोंगको के अलावा राहुल मिश्रा, मो. सलीम, वसीम तैयब मेमन और तबरेज नफासत शामिल हैं। क्या है हाइड्रोपोनिक वीड? हाइड्रोपोनिक वीड मारिजुआना की एक उच्च गुणवत्ता वाली किस्म होती है, जिसे खास तकनीक के जरिए नियंत्रित वातावरण में उगाया जाता है। इसकी पोटेंसी और गुणवत्ता ज्यादा होने के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी मांग काफी अधिक रहती है। इसी वजह से इसकी कीमत भी बेहद ऊंची होती है और तस्करों के लिए यह मुनाफे का बड़ा जरिया बन चुकी है। लावारिस बैगों से भी मिला ड्रग्स डायरेक्टोरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस और कस्टम विभाग की संयुक्त कार्रवाई में इस साल जनवरी से अब तक 60.5 किलोग्राम मारिजुआना जब्त किया जा चुका है, जिसकी कीमत 60 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई है। हाल ही में एयरपोर्ट पर मिले दो लावारिस बैगों की जांच में भी करीब 10 किलोग्राम मारिजुआना बरामद हुआ था। ये बैग 14 मार्च को थाई एयरवेज की फ्लाइट से आए थे, जिन्हें तस्करों ने पकड़ के डर से छोड़ दिया था। पहले भी हो चुकी हैं बड़ी बरामदगी इससे पहले 7 जनवरी को भी अधिकारियों ने 17 किलोग्राम और 28 दिसंबर को एक अन्य मामले में 8.8 किलोग्राम मारिजुआना जब्त किया था। लगातार हो रही इन घटनाओं से यह साफ संकेत मिल रहा है कि गया एयरपोर्ट अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क का अहम ट्रांजिट पॉइंट बनता जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड में लगातार बरामदगी के बाद कस्टम विभाग, डीआरआई और सीआईएसएफ के बीच समन्वय और मजबूत किया गया है। अंतरराष्ट्रीय उड़ानों, खासकर बैंकॉक रूट से आने वाले यात्रियों की जांच अब और सख्ती से की जा रही है। फिलहाल सभी गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है और पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने की कोशिश की जा रही है। जांच से खुल सकते हैं बड़े खुलासे इस मामले ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। आशंका जताई जा रही है कि यह किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स सिंडिकेट का हिस्सा हो सकता है। आने वाले दिनों में जांच के दौरान और भी बड़े खुलासे होने की संभावना है, जिससे इस नेटवर्क के असली सरगनाओं तक पहुंचा जा सके।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
UPSC CSE Result 2025: देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षाओं में से एक Civil Services Examination का अंतिम परिणाम जारी कर दिया गया है। Union Public Service Commission ने शुक्रवार 6 मार्च 2026 को UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 का फाइनल रिजल्ट घोषित किया। इस परीक्षा में अनुज अग्निहोत्री ने पहला स्थान हासिल किया है। परीक्षा में शामिल हुए उम्मीदवार अब आयोग की आधिकारिक वेबसाइट UPSC Official Website पर जाकर फाइनल मेरिट लिस्ट देख सकते हैं। 958 उम्मीदवारों का हुआ चयन यूपीएससी द्वारा जारी फाइनल रिजल्ट के अनुसार इस वर्ष कुल 958 उम्मीदवारों ने सफलता हासिल की है। चयनित उम्मीदवारों की नियुक्ति विभिन्न केंद्रीय सेवाओं में उनकी रैंक और पसंद के आधार पर की जाएगी। फाइनल रिजल्ट उम्मीदवारों के लिखित परीक्षा (Main Exam) और पर्सनैलिटी टेस्ट (Interview) में प्रदर्शन के आधार पर तैयार किया गया है। इन प्रतिष्ठित सेवाओं के लिए होता है चयन यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के माध्यम से देश की कई प्रतिष्ठित सेवाओं के लिए अधिकारियों का चयन किया जाता है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं— भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) भारतीय पुलिस सेवा (IPS) भारतीय विदेश सेवा (IFS) भारतीय राजस्व सेवा (IRS) भारतीय व्यापार सेवा सहित अन्य ग्रुप A और ग्रुप B सेवाएं 979 पदों को भरने का लक्ष्य सिविल सेवा परीक्षा 2025 के माध्यम से केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों में कुल 979 रिक्त पदों को भरा जाना है। ऐसे चेक करें UPSC CSE 2025 का रिजल्ट उम्मीदवार नीचे दिए गए स्टेप्स के माध्यम से अपना रिजल्ट देख सकते हैं— आधिकारिक वेबसाइट upsc.gov.in पर जाएं होमपेज पर “Examination” टैब पर क्लिक करें “Active Examinations” या “What’s New” सेक्शन में जाएं Civil Services Examination Final Result 2025 लिंक पर क्लिक करें मेरिट लिस्ट की PDF खुल जाएगी Ctrl + F दबाकर अपना नाम या रोल नंबर सर्च करें 15 दिन में जारी होगी मार्कशीट यूपीएससी के अनुसार सभी उम्मीदवारों की मार्कशीट रिजल्ट जारी होने के 15 दिनों के भीतर आयोग की वेबसाइट पर अपलोड कर दी जाएगी। उम्मीदवार इसे 30 दिनों तक ऑनलाइन डाउनलोड कर सकेंगे। पिछले साल का कट-ऑफ पिछले वर्ष का अंतिम कट-ऑफ इस प्रकार था— जनरल: 87.98 EWS: 85.92 OBC: 87.28 SC: 79.03 ST: 74.23 आयु सीमा क्या है यूपीएससी की अधिसूचना के अनुसार उम्मीदवार की आयु 1 अगस्त 2024 तक कम से कम 21 वर्ष और अधिकतम 32 वर्ष होनी चाहिए। यानी उम्मीदवार का जन्म 2 अगस्त 1992 से 1 अगस्त 2003 के बीच होना चाहिए। यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा भारत की सबसे कठिन और प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षाओं में से एक मानी जाती है। हर साल लाखों उम्मीदवार इस परीक्षा में शामिल होते हैं, लेकिन तीन चरणों—प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू—को पार कर बहुत कम उम्मीदवार ही अंतिम सूची में जगह बना पाते हैं। UPSC CSE 2025 टॉप-20 उम्मीदवारों की सूची रैंक रोल नंबर नाम 1 1131589 अनुज अग्निहोत्री 2 4000040 राजेश्वरी सुवे एम 3 3512521 अकांश ढुल 4 0834732 राघव झुनझुनवाला 5 0409847 ईशान भटनागर 6 6410067 जिनिया अरोड़ा 7 0818306 ए आर राजा मोहिद्दीन 8 0843487 पक्षल सेक्रेटरी 9 0831647 आस्था जैन 10 1523945 उज्ज्वल प्रियांक 11 1512091 यशस्वी राज वर्धन 12 0840280 अक्षित भारद्वाज 13 7813999 अनन्या शर्मा 14 5402316 सुरभि यादव 15 3507500 सिमरनदीप कौर 16 0867445 मोनिका श्रीवास्तव 17 0829589 चितवन जैन 18 5604518 श्रुति आर 19 0105602 निसार दिशांत अमृतलाल 20 6630448 रवि राज