पटना,एजेंसियां। प्रशांत किशोर की कंपनी I-PAC (Indian Political Action Committee) के दफ्तर पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की रेड के बाद एक बार फिर पश्चिम बंगाल के चर्चित कोयला घोटाले की चर्चा तेज हो गई है। यह मामला दरअसल ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ECL) के लीज एरिया से कथित अवैध कोयला खनन, चोरी, तस्करी और उससे कमाए गए पैसे की मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा है। ED ने यह जांच 2020 में CBI द्वारा दर्ज FIR के आधार पर शुरू की थी। एजेंसियों के अनुसार, इस सिंडिकेट का कथित मास्टरमाइंड अनूप माझी उर्फ ‘लाला’ था, जिस पर ECL, CISF, रेलवे और अन्य विभागों के कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से कोयला चोरी कराने के आरोप हैं। जांच में क्या आया सामने ? जांच में यह आरोप सामने आया कि ECL के कुनुस्तोरिया और कजोरा क्षेत्रों से बड़े पैमाने पर कोयला अवैध रूप से निकाला गया और उसे विभिन्न फैक्ट्रियों व कंपनियों तक पहुंचाया गया। CBI और ED की कार्रवाई में कई जगह छापे पड़े, दस्तावेज और डिजिटल सबूत मिले, और कई आरोपियों के नाम सामने आए। ED के मुताबिक अब तक इस केस में 2,742.32 करोड़ रुपये तक की “प्रोसीड्स ऑफ क्राइम” (अपराध से अर्जित रकम) चिन्हित की गई है। एजेंसी ने पहले भी कई संपत्तियां अटैच की हैं और इस मामले में गिरफ्तारी व चार्जशीट की कार्रवाई हो चुकी है। I-PAC का नाम कैसे जुड़ा? ताजा मोड़ तब आया जब ED ने दावा किया कि कोयला तस्करी से जुड़ी काली कमाई का एक हिस्सा हवाला नेटवर्क के जरिए I-PAC तक पहुंचाया गया। रिपोर्टों के मुताबिक, जांच में करीब 20 करोड़ रुपये के कथित ट्रांसफर की बात सामने आई, जिसे गोवा में 2021-22 के दौरान I-PAC के ऑपरेशंस से जोड़ा गया। इसी कड़ी में ED ने I-PAC से जुड़े परिसरों पर तलाशी ली। हालांकि, जांच एजेंसियों के आरोप और कोर्ट में साबित अपराध—दोनों अलग बातें हैं, इसलिए अंतिम सच न्यायिक प्रक्रिया से ही तय होगा। फिलहाल, यह मामला सिर्फ कोयला चोरी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राजनीति, हवाला और चुनावी मैनेजमेंट नेटवर्क तक फैलता दिख रहा है।
पटना, एजेंसियां। बिहार की राजनीति में बड़े बदलाव के संकेतों के बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अहम अपडेट सामने आया है। खबर है कि मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद भी उनकी सुरक्षा में कोई कमी नहीं होगी, बल्कि उनका सुरक्षा घेरा और मजबूत किया जाएगा। मौजूदा समय में उन्हें मुख्यमंत्री होने के नाते SSG सुरक्षा प्राप्त है, लेकिन इस्तीफे के बाद उन्हें Z+ श्रेणी की अतिरिक्त सुरक्षा भी दी जाएगी। इस संबंध में राज्य के गृह विभाग की विशेष शाखा की ओर से आदेश जारी किए जाने की खबर है। सूत्रों के अनुसार सूत्रों के अनुसार, नीतीश कुमार जल्द ही राज्यसभा की सदस्यता ग्रहण कर सकते हैं। रिपोर्ट्स में कहा गया है कि वे 10 अप्रैल को राज्यसभा सांसद के रूप में शपथ ले सकते हैं। इसके लिए उनके 8 या 9 अप्रैल को दिल्ली जाने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, मुख्यमंत्री पद से इस्तीफे की आधिकारिक तारीख अभी स्पष्ट नहीं है, लेकिन बिहार की सियासत में इसे बड़े नेतृत्व परिवर्तन के रूप में देखा जा रहा है। MLC पद छोड़ चुके, अब नजर CM कुर्सी पर नीतीश कुमार पहले ही 30 मार्च को बिहार विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे चुके हैं। यह कदम उनके राज्यसभा जाने की प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि मुख्यमंत्री आवास छोड़ने के बाद वे किसी दूसरे सरकारी आवास में शिफ्ट हो सकते हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने बिहार में सत्ता परिवर्तन की अटकलों को और तेज कर दिया है। चारों सदनों के सदस्य बनने की ओर बड़ा कदम अगर नीतीश कुमार राज्यसभा की शपथ लेते हैं, तो वे उन चुनिंदा नेताओं में शामिल होंगे जो विधानसभा, विधान परिषद, लोकसभा और राज्यसभा—चारों सदनों का हिस्सा रह चुके हैं। फिलहाल, उनकी सुरक्षा और राजनीतिक भूमिका—दोनों को लेकर बिहार में हलचल तेज है।
बिहार में अप्रैल की शुरुआत के साथ ही मौसम ने दोहरा रुख दिखाना शुरू कर दिया है। एक ओर तेज धूप लोगों को झुलसा रही है, तो दूसरी तरफ आसमान में बादलों की आवाजाही से अनिश्चितता बनी हुई है। India Meteorological Department (IMD) के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार राज्य में अगले कुछ दिनों तक गर्मी और उमस लोगों को परेशान करती रहेगी, लेकिन 5 अप्रैल से मौसम में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। 40 डिग्री के करीब पहुंचा तापमान, बढ़ी उमस अप्रैल के शुरुआती दिनों में ही बिहार के कई जिलों में तापमान तेजी से बढ़ रहा है। राजधानी पटना समेत कई शहरों में अधिकतम तापमान 37 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है, जबकि कुछ इलाकों में यह 40 डिग्री के करीब जाने का अनुमान है। हवा में नमी की मात्रा बढ़ने से उमस ने स्थिति और कठिन बना दी है। दोपहर के समय गर्म हवाओं और चिपचिपी गर्मी के कारण सड़कों पर सन्नाटा देखने को मिल रहा है। मौसम की यह अस्थिरता पूर्वी बिहार के ऊपर सक्रिय चक्रवाती सिस्टम के कारण बनी हुई है। 72 घंटे बाद बदलेगा मौसम, बारिश और आंधी का अलर्ट IMD के अनुसार अगले 72 घंटों के भीतर मौसम करवट लेने वाला है। 5 अप्रैल से राज्य के अधिकांश हिस्सों में बादलों का घना जमाव होगा और तेज आंधी, गरज-चमक के साथ बारिश की संभावना है। यह बदलाव जहां आम लोगों को गर्मी से राहत देगा, वहीं तेज हवाएं और बारिश कुछ इलाकों में परेशानी भी बढ़ा सकती हैं। किसानों के लिए चेतावनी मौसम में इस संभावित बदलाव को देखते हुए किसानों के लिए विशेष सतर्कता जरूरी है। विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि कटी हुई फसलों को सुरक्षित स्थान पर रखें और कृषि कार्यों की योजना मौसम के अनुसार बनाएं, ताकि नुकसान से बचा जा सके। मार्च में रिकॉर्ड तोड़ बारिश इस साल मार्च में बिहार में सामान्य से 214% अधिक वर्षा दर्ज की गई, जो एक असामान्य स्थिति है। समस्तीपुर के मोहिउद्दीननगर में 75.4 mm बारिश रिकॉर्ड की गई पूर्णिया में सबसे अधिक वर्षा दर्ज हुई वहीं अरवल, गोपालगंज, रोहतास और सारण में सामान्य से कम बारिश हुई अप्रैल में मौसम का अनोखा मिश्रण मौसम विभाग का अनुमान है कि इस साल अप्रैल में गर्मी और बारिश का अनोखा संगम देखने को मिलेगा। एक ओर तापमान 40 डिग्री के पार जाएगा, तो दूसरी ओर आंधी-तूफान और बारिश की घटनाएं भी सामान्य से ज्यादा हो सकती हैं।
पटना/मोकामा, एजेंसियां। बिहार में बढ़ते अपराध को लेकर मोकामा के बाहुबली विधायक अनंत सिंह का बयान राजनीतिक बहस का नया कारण बन गया है। उन्होंने कहा कि “भगवान भी मुख्यमंत्री बन जाएं तो मर्डर नहीं रुकेगा।” इस बयान के बाद राज्य की कानून-व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। अपराध पर क्या बोले अनंत सिंह अनंत सिंह ने कहा कि बिहार में हत्या की घटनाएं पूरी तरह खत्म होना संभव नहीं है, क्योंकि अधिकतर अपराध आपसी रंजिश, निजी विवाद और दुश्मनी के कारण होते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार हर घर में पुलिस तैनात नहीं कर सकती, इसलिए हर घटना को रोकना संभव नहीं है। पुराने बिहार से की तुलना अपने बयान में उन्होंने मौजूदा बिहार की तुलना पुराने दौर से भी की। उनका कहना था कि पहले राज्य में अपहरण और अपराध का डर ज्यादा था, जबकि अब हालात पहले से बेहतर हैं। उन्होंने कहा कि अगर अब कहीं किडनैपिंग की घटना होती भी है, तो पीड़ित को जल्दी छोड़ दिया जाता है, जो बदलाव का संकेत है। CM चेहरे पर भी खुलकर बोले अनंत सिंह ने राजनीति पर भी बेबाकी से राय रखी। उन्होंने कहा कि जेडीयू से निशांत कुमार और बीजेपी से सम्राट चौधरी अच्छे मुख्यमंत्री बन सकते हैं। हालांकि, उन्होंने नीतीश कुमार की तारीफ करते हुए कहा कि उनके जैसा नेता दूसरा नहीं है और उनके काम को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। दंगल और परिवार की राजनीति उन्होंने अपने गांव नदमा में आयोजित होने वाले महा दंगल का भी जिक्र किया, जिसमें 100 से अधिक पहलवानों के भाग लेने और लाखों लोगों के पहुंचने की उम्मीद जताई। साथ ही संकेत दिए कि अब वे खुद चुनाव नहीं लड़ना चाहते और अपने बड़े बेटे को राजनीति में आगे बढ़ाना चाहते हैं। बयान से बढ़ी सियासी हलचल अनंत सिंह के बयान ने बिहार की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। अब देखना होगा कि विपक्ष और सत्ता पक्ष इस मुद्दे को किस तरह उठाते हैं।
पटना, एजेंसियां। बिहार के नालंदा में शीतला माता मंदिर भगदड़ मचने से 8 लोगों की मौत हो गईस जबकि दर्जनों लोग घायल हो गए। इस घटना को लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने दुख जताया है। साथ ही मृतकों के लिए मुआवजा देने का ऐलान किया है। नीतीश सरकार ने भगदड़ में मरने वाले श्रद्धालुओं के आश्रितों को 6-6 लाख रुपए मुआवजा देने की घोषणा की है वहीं घायलों को मुफ्त इलाज देने की बात कही है। जानकारी के मुताबिक, मृतकों में 7 महिलाएं हैं। घायलों को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका इलाज चल रही है। शीतला अष्टमी पूजा के दौरान हादसा दरअसल यह हादसा मंदिर में शीतला अष्टमी पूजा के दौरान हुई। शीतला अष्टमी पूजा को लेकर मंदिर परिसर में भारी भीड़ जमा थी। इसी दौरान अचानक धक्का-मुक्की का सिलसिला शुरू हुआ और लोग एक-दूसरे पर गिरते चले गए। भीड़ में दबने के कारण आठ लोगों की मौत हो गई। शीतलाष्टमी मेला लगता है यहा दरअसल इस मंदिर की मान्यता है कि इस पूजा के उपलक्ष्य में शीतलाष्टमी मेला लगता है। मेला के दिन मघड़ा और इसके आसपास के दर्जनों गांवों में चूल्हा नहीं जलता है। लोग एक दिन पहले ही खाना बनाकर दूसरे दिन प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं। शीतला मंदिर के पुजारी ने बताया कि चैत्र कृष्ण पक्ष अष्टमी के दिन यहां देश के कोने-कोने से लोग पूजा अर्चना करने आते हैं। व्रत की विशेषता यह कि इसमें शीतला देवी को भोग लगाने वाला पदार्थ एक दिन पहले ही बना लिया जाता है। बासी भोग लगाने की परंपरा है। चैत्र अष्टी के मौके पर मां शीतला की पूजा-अर्चना के लिए सूबे के विभिन्न जिलों के अलावा झारखंड, बंगाल और उत्तर प्रदेश से भी काफी संख्या में श्रद्धालुओं आते हैं। मघड़ा गांव में काफी पुराना मिट्ठी कुआं है। इसी कुएं के पानी से सप्तमी की शाम में बसिऔरा के लिए भोजन तैयार किया जाता है। प्रसाद में अरवा चावल, चने की दाल, सब्जियां, पुआ, पकवान आदि बनाया जाता है। खास बात यह कि मां शीतला मंदिर में दिन में दीपक नहीं जलते हैं। दूर-दराज़ से आए श्रद्धालु, व्रत-पूजा और वासी भोग की परंपरा निभाने पहुंचे थे। लोगों का कहना है कि इस मंदिर में जाने से चर्म रोग और बच्चों की बीमारियों से निजात मिलता है।
पटना/नालंदा, 31 मार्च 2026: बिहार के नालंदा जिले में स्थित Sheetla Temple में मंगलवार को एक दर्दनाक हादसा हो गया। एक धार्मिक आयोजन के दौरान भारी भीड़ उमड़ने से भगदड़ जैसी स्थिति पैदा हो गई, जिसमें कम से कम 8 महिलाओं की मौत हो गई, जबकि कई अन्य लोग घायल बताए जा रहे हैं। क्या हुआ था घटनास्थल पर? मिली जानकारी के अनुसार, मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पूजा-अर्चना के लिए पहुंचे थे। भीड़ इतनी अधिक हो गई कि हालात बेकाबू हो गए और अचानक अफरा-तफरी मच गई। इसी दौरान कई लोग एक-दूसरे पर गिर पड़े और दबने से यह हादसा हुआ। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी, जिससे स्थिति तेजी से बिगड़ गई। राहत और बचाव कार्य जारी घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और राहत-बचाव कार्य शुरू किया गया। घायलों को तुरंत नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। मौके से सामने आई तस्वीरों में मंदिर परिसर में भारी भीड़ और अफरा-तफरी का माहौल साफ देखा जा सकता है। पहले भी हो चुके हैं ऐसे हादसे धार्मिक स्थलों पर भीड़ प्रबंधन की कमी के कारण इस तरह की घटनाएं पहले भी सामने आती रही हैं। पिछले साल Sri Venkateswara Swamy Temple में भी भगदड़ में 9 लोगों की मौत हो गई थी। बड़ा सवाल: सुरक्षा व्यवस्था पर क्यों उठ रहे सवाल? यह हादसा एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि बड़े धार्मिक आयोजनों में भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम क्यों नहीं किए जाते।
पटना, एजेंसियां। बिहार में मंगलवार सुबह दो लोक सेवकों के खिलाफ आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने छापा मारा है। यह मामला आय से अधिक संपत्ति का बताया जा रहा है। एक तरफ किशनगंज में DSP गौतम कुमार के पटना, पूर्णिया और किशनगंज स्थित उनके कुल 6 ठिकानों पर EOW की छापामारी चल रही है। बताया जा रहा है कि डीएसपी गौतम कुमार पर किशनगंज में आय से 60 प्रतिशत अधिक आय रखने के आरोप हैं। दूसरी ओर सहरसा में DRDO निदेशक वैभव कुमार के छह ठिकानों पर भी आर्थिक अपराध इकाई की छापेमारी चल रही है। वैभव कुमार के सहरसा एवं मुज्जफरपुर स्थित छह ठिकानों पर छापामारी चल रही है। इन पर अपने आय से 70 प्रतिशत से अधिक का आय जमा करने का मामला है। यह पूरी कार्रवाई अपर पुलिस अधीक्षक, वरीय पुलिस अधीक्षक और पुलिस उपाधीक्षक स्तर के अधिकारियों के नेतृत्व में की जा रही है।
पटना, एजेंसियां। बिहार क सीएम नीतीश कुमार ने एमएलसी का पद छोड़ दिया है। वहीं, बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने एमएलए के पद से इस्तीफा दे दिया है। बिहार की राजनीति में एक साथ दो बड़े फैसलों ने हलचल बढ़ा दी है। बीजेपी नेता नितिन नवीन बांकीपुर सीट से विधायक थे। दोनों नेताओं के इस्तीफे के बाद राज्य में सियासी चर्चाएं तेज हो गई हैं और आने वाले दिनों में बड़े बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। दिल्ली जायेंगे नीतीश कुमार नीतीश कुमार हाल ही में राज्यसभा के लिए चुने गए हैं और अब वे राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाएंगे। लंबे समय तक बिहार की राजनीति के केंद्र में रहे नीतीश अब दिल्ली की राजनीति में नई जिम्मेदारी संभालेंगे। वहीं नितिन नवीन को भी पार्टी ने नई भूमिका दी है, जिसके तहत वे आगे काम करेंगे। बिहार में नेतृत्व परिवर्तन की चर्चा नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद बिहार में नेतृत्व परिवर्तन की चर्चा तेज हो गई है। माना जा रहा है कि आने वाले समय में नए मुख्यमंत्री के चयन की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। हालांकि अभी आधिकारिक तौर पर कुछ स्पष्ट नहीं है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे बड़े बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है। चारों सदनों में प्रतिनिधित्व का रिकॉर्ड नीतीश कुमार उन चुनिंदा नेताओं में शामिल हो गए हैं, जिन्होंने देश के चारों सदनों का हिस्सा बनने का गौरव हासिल किया है। 1985 में हरनौत से विधायक बनकर उन्होंने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की थी। 1989 में लोकसभा पहुंचे, फिर 2006 से लगातार विधान परिषद के सदस्य रहे और अब राज्यसभा में नई भूमिका निभाएंगे। इस्तीफे से पहले बैठक इस्तीफे से पहले पटना स्थित मुख्यमंत्री आवास पर जदयू के वरिष्ठ नेताओं के साथ अहम बैठक हुई। इसमें ललन सिंह, संजय कुमार झा, विजय कुमार चौधरी और अशोक चौधरी जैसे नेता शामिल हुए। बैठक में आगे की रणनीति और राजनीतिक हालात पर चर्चा की गई। नितिन नवीन ने दिया भावुक संदेश नितिन नवीन ने अपने इस्तीफे का ऐलान सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर किया। उन्होंने लिखा कि विधायक के रूप में काम करना उनके लिए एक खास अनुभव रहा। उन्होंने कहा कि पार्टी ने उन्हें जो नई जिम्मेदारी दी है, उसके जरिए भी वे बिहार के विकास के लिए काम करते रहेंगे और जनता से उनका रिश्ता हमेशा मजबूत रहेगा। आगे दोनों नेताओं की भूमिका पर नजर इन दोनों बड़े इस्तीफों के बाद बिहार की राजनीति एक नए मोड़ पर खड़ी नजर आ रही है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि राज्यसभा में इन नेताओं की भूमिका क्या होगी और बिहार में नेतृत्व को लेकर क्या फैसला सामने आता है।
पटना, एजेंसियां। दहेज हत्या के एक गंभीर मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए आरोपी पति को दी गई जमानत रद्द कर दी है। शीर्ष अदालत ने साफ कहा कि ऐसे जघन्य अपराधों में केवल जेल में बिताए समय के आधार पर जमानत देना न्यायसंगत नहीं है। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि हाईकोर्ट का आदेश “मशीनी ढंग” से पारित हुआ, जिसमें मामले की गंभीरता और उपलब्ध तथ्यों पर पर्याप्त विचार नहीं किया गया। सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी को एक सप्ताह के भीतर सरेंडर करने का आदेश दिया है। हाईकोर्ट के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जमानत पर फैसला करते समय अदालतों को केवल यह नहीं देखना चाहिए कि आरोपी कितने समय से जेल में है, बल्कि यह भी देखना चाहिए कि अपराध की प्रकृति कितनी गंभीर है, आरोपी और पीड़िता के बीच क्या संबंध था, घटना कहां और किन परिस्थितियों में हुई, और पोस्टमार्टम जैसी मेडिकल रिपोर्ट क्या संकेत देती है। अदालत ने माना कि दहेज हत्या जैसे मामलों में न्यायिक विवेक का इस्तेमाल बेहद सावधानी से होना चाहिए। क्यों अहम है यह फैसला रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामला एक विवाहित महिला की संदिग्ध मौत से जुड़ा है, जिसकी शादी के कुछ ही समय बाद ससुराल में मौत हो गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में कानूनी धाराओं के तहत एक विशेष वैधानिक अनुमान (statutory presumption) भी लागू होता है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि वह मामले के ट्रायल पर कोई टिप्पणी नहीं कर रही, लेकिन जमानत देने का आधार कानून और तथ्यों पर टिकना चाहिए। न्याय व्यवस्था को दिया स्पष्ट संदेश यह फैसला निचली अदालतों और हाईकोर्ट्स के लिए भी एक महत्वपूर्ण संदेश माना जा रहा है कि गंभीर आपराधिक मामलों में जमानत आदेश संक्षिप्त या औपचारिक तरीके से नहीं दिए जा सकते। सुप्रीम कोर्ट के इस रुख से यह साफ है कि दहेज हत्या जैसे मामलों में अदालतें अब अधिक संवेदनशील और सख्त नजरिया अपनाने की अपेक्षा रखती हैं।
पटना, एजेंसियां। बिहार के मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी और शिवहर जिलों में बिजली बिल बकायेदारों के खिलाफ अब बिजली विभाग ने सख्त रुख अपना लिया है। विभाग ने साफ कर दिया है कि 31 मार्च 2026 तक बकाया बिल जमा नहीं करने वाले उपभोक्ताओं के बिजली कनेक्शन बिना किसी पूर्व सूचना के काट दिए जाएंगे। इस कार्रवाई को लेकर मुजफ्फरपुर सर्किल में विशेष अभियान शुरू कर दिया गया है।बिजली विभाग ने इस अभियान को ‘नो पेमेंट, नो पावर’ नाम दिया है। अधिकारियों का कहना है कि बार-बार अपील और नोटिस के बावजूद बड़ी संख्या में उपभोक्ता बिल भुगतान नहीं कर रहे हैं। ऐसे में अब विभाग ने बकायेदारों के खिलाफ फील्ड स्तर पर सख्त कार्रवाई करने का फैसला लिया है। घर-घर पहुंचेगी टीम, मौके पर ही कटेगा कनेक्शन विद्युत अधीक्षण अभियंता पंकज राजेश के अनुसार, बकाया वसूली के लिए विशेष धावा दल बनाए गए हैं। ये टीमें घर-घर जाकर उपभोक्ताओं की जांच करेंगी और जिनके ऊपर बकाया मिलेगा, उनका मौके पर ही बिजली कनेक्शन काट दिया जाएगा। विभाग ने स्पष्ट किया है कि इस बार किसी तरह की ढिलाई नहीं बरती जाएगी। 12 हजार से ज्यादा कनेक्शन पहले ही कटे विभागीय आंकड़ों के अनुसार, मार्च महीने में अब तक 16.57 करोड़ रुपये की वसूली की जा चुकी है। इसके साथ ही 12,560 उपभोक्ताओं के कनेक्शन पहले ही काटे जा चुके हैं। हालांकि, इसके बावजूद कुल बकाया राशि बढ़कर 137.05 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है, जो बिजली विभाग के लिए गंभीर चिंता का विषय बनी हुई है। 20 हजार से ज्यादा उपभोक्ता डिफॉल्टर डिवीजनवार आंकड़ों में स्थिति और चिंताजनक नजर आ रही है। पूर्वी डिवीजन में 43.42 करोड़ रुपये बकाया हैं और यहां 20 हजार से ज्यादा उपभोक्ता डिफॉल्टर हैं। पश्चिमी डिवीजन में 85.52 करोड़ रुपये का बकाया है। वहीं अर्बन-1 में 4.89 करोड़ और अर्बन-2 में 3.22 करोड़ रुपये का बकाया दर्ज किया गया है। रविवार को भी खुलेंगे बिजली कार्यालय राजस्व वसूली तेज करने के लिए नार्थ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी ने मार्च महीने की सभी छुट्टियां रद्द कर दी हैं। अब रविवार और अन्य अवकाश के दिनों में भी बिजली कार्यालय खुले रहेंगे, ताकि उपभोक्ता आसानी से अपना बिल जमा कर सकें।
बिहार, एजेंसियां। मुजफ्फरपुर गोलीकांड को लेकर बिहार की राजनीति गरमा गई है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव पीड़ित परिवार से मिलने मुजफ्फरपुर पहुंचे और इस घटना को राज्य की बिगड़ती कानून-व्यवस्था का बड़ा उदाहरण बताया। पटना से रवाना होने से पहले पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि बिहार में पुलिस “आउट ऑफ कंट्रोल” हो चुकी है और सरकार का प्रशासन पर से नियंत्रण खत्म होता दिख रहा है। निर्दोषों को निशाना बना रही पुलिस: तेजस्वी तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि बिहार में कानून-व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। उन्होंने कहा कि अब अपराधियों के बजाय निर्दोष लोग पुलिस कार्रवाई का शिकार हो रहे हैं। मुजफ्फरपुर की घटना का जिक्र करते हुए उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर ऐसी स्थिति क्यों पैदा हो रही है, जहां आम नागरिकों की सुरक्षा ही खतरे में पड़ जाए। ‘क्या नशे में था आरोपी पुलिसकर्मी?’ तेजस्वी ने कहा कि जिस थानेदार या दरोगा पर युवक को गोली मारने का आरोप है, उसके बारे में चर्चा है कि वह शराब के नशे में था। उन्होंने राज्य की शराबबंदी नीति पर तंज कसते हुए पूछा कि अगर बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू है, तो एक पुलिस अधिकारी नशे की हालत में कैसे पाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इस मामले में वरिष्ठ अधिकारियों से बात कर आरोपी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग करेंगे। महंगाई और एलपीजी संकट पर भी घेरा मुजफ्फरपुर रवाना होने से पहले तेजस्वी ने केंद्र और राज्य सरकार पर महंगाई, पेट्रोल-डीजल और एलपीजी संकट को लेकर भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि गलत नीतियों की वजह से आम जनता परेशान है और आने वाले समय में हालात और बिगड़ सकते हैं। ‘यह सिर्फ मुलाकात नहीं, आंदोलन की शुरुआत’ तेजस्वी यादव ने कहा कि उनकी मुजफ्फरपुर यात्रा केवल पीड़ित परिवार से संवेदना जताने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सरकार के खिलाफ एक बड़े राजनीतिक और जन आंदोलन की शुरुआत भी है।
पटना, एजेंसियां। नीतीश कुमार को एक बार फिर जनता दल यूनाइटेड (JDU) का राष्ट्रीय अध्यक्ष निर्विरोध चुना गया है। पार्टी के भीतर हुए इस चुनाव में उनके खिलाफ किसी अन्य नेता ने नामांकन दाखिल नहीं किया, जिसके चलते उन्हें सर्वसम्मति से अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सौंप दी गई। नामांकन प्रक्रिया में नहीं मिला कोई चुनौतीकर्ता पार्टी द्वारा तय समय सीमा के अनुसार अध्यक्ष पद के लिए नामांकन की अंतिम समयसीमा 24 मार्च 2026 को सुबह 11 बजे तक थी। इस दौरान केवल नीतीश कुमार ने ही अपना नामांकन दाखिल किया। किसी अन्य उम्मीदवार के सामने न आने के कारण निर्वाचन अधिकारी अनिल प्रसाद हेगड़े ने उन्हें निर्विरोध विजेता घोषित करने की प्रक्रिया पूरी की। वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में हुआ फैसला इस मौके पर पार्टी के कई बड़े नेता मौजूद रहे। इनमें संजय कुमार झा, राजीव रंजन सिंह (ललन सिंह) और श्रवण कुमार जैसे वरिष्ठ चेहरे शामिल थे। सभी नेताओं ने नीतीश कुमार के नेतृत्व पर भरोसा जताया और पार्टी को आगे बढ़ाने की उम्मीद व्यक्त की। राजनीतिक पृष्ठभूमि और बदलाव गौरतलब है कि दिसंबर 2023 में ललन सिंह के इस्तीफे के बाद नीतीश कुमार ने पार्टी की कमान संभाली थी। उस समय पार्टी महागठबंधन का हिस्सा थी, लेकिन बाद में JDU ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) में वापसी कर ली। इस बदलाव ने बिहार की राजनीति में बड़ा असर डाला। भविष्य की राजनीति पर नजर हाल ही में मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने और राज्यसभा पहुंचने के बाद नीतीश कुमार का यह चयन राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है। साथ ही उनके बेटे निशांत कुमार की राजनीति में एंट्री को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। ऐसे में आने वाले समय में बिहार की राजनीति में नए समीकरण बनने की संभावना जताई जा रही है।
पटना: बिहार के हवाई यात्रियों के लिए होली के बाद का समय बड़ी राहत और सुविधा लेकर आ रहा है। जयप्रकाश नारायण अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा से अब महाराष्ट्र के दो प्रमुख शहरों-नवी मुंबई और पुणे-के लिए सीधी उड़ान सेवा शुरू होने जा रही है। यह कदम न केवल यात्रियों की सुविधा बढ़ाएगा, बल्कि राज्य की आर्थिक और सामाजिक कनेक्टिविटी को भी नई दिशा देगा। नवी मुंबई के लिए पहली नॉन-स्टॉप उड़ान अब तक पटना से नवी मुंबई के लिए सीधी उड़ान नहीं होने के कारण यात्रियों को कनेक्टिंग फ्लाइट्स या लंबी यात्रा का सहारा लेना पड़ता था। लेकिन 29 मार्च से IndiGo इस रूट पर अपनी नॉन-स्टॉप सेवा शुरू करने जा रहा है। यह फ्लाइट सप्ताह के सातों दिन उपलब्ध रहेगी, जिससे यात्रियों को बड़ी सहूलियत मिलेगी। इस नई सेवा के शुरू होने के बाद व्यापार, नौकरी और शिक्षा के सिलसिले में मुंबई क्षेत्र जाने वाले लोगों को अब समय और खर्च दोनों में राहत मिलेगी। यह उड़ान सीधे कनेक्टिविटी का एक नया अध्याय खोलने जा रही है। पुणे के लिए भी सीधी कनेक्टिविटी नवी मुंबई के साथ-साथ पुणे के लिए भी पटना से सीधी उड़ान सेवा 30 मार्च से शुरू हो रही है। पुणे, जो देश का एक प्रमुख शिक्षा और आईटी हब माना जाता है, अब बिहार के यात्रियों के लिए और अधिक सुलभ हो जाएगा। इस फ्लाइट की टाइमिंग खास तौर पर कामकाजी और बिजनेस यात्रियों को ध्यान में रखकर तय की गई है। विमान देर रात करीब 2 बजे पटना पहुंचेगा और उसी दिन वापसी उड़ान पुणे के लिए भरेगा। यह शेड्यूल उन यात्रियों के लिए बेहद उपयोगी होगा जो रात में यात्रा करना पसंद करते हैं या सुबह जल्दी अपने गंतव्य तक पहुंचना चाहते हैं। व्यापार और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा नई उड़ानों के शुरू होने से बिहार और महाराष्ट्र के बीच व्यापारिक गतिविधियों को नई गति मिलने की उम्मीद है। खासकर आईटी, शिक्षा और कॉर्पोरेट सेक्टर से जुड़े लोगों के लिए यह कनेक्टिविटी एक बड़ा अवसर साबित हो सकती है। पटना एयरपोर्ट की लगातार बढ़ती उड़ान सेवाएं इस बात का संकेत हैं कि आने वाले समय में बिहार देश के प्रमुख हवाई नेटवर्क का अहम हिस्सा बनने की ओर बढ़ रहा है।
बिहार की सियासत इन दिनों नए मुख्यमंत्री के नाम को लेकर तेज चर्चाओं के दौर से गुजर रही है। Nitish Kumar द्वारा मुख्यमंत्री पद छोड़ने के संकेत के बाद सत्ता पक्ष में नए चेहरे को लेकर मंथन तेज हो गया है। इस बीच जहां पहले पिछड़ा, अतिपिछड़ा और दलित वर्ग के नेताओं की चर्चा थी, वहीं अब सवर्ण नेताओं के नाम भी रेस में शामिल होने लगे हैं। सवर्ण विधायकों का मजबूत आंकड़ा 2025 के विधानसभा चुनाव में NDA की जीत में सवर्ण विधायकों की अहम भूमिका रही। कुल 69 सवर्ण विधायक चुनकर आए, जिनमें- राजपूत: 32 विधायक भूमिहार: 23 विधायक ब्राह्मण: 12 विधायक कायस्थ: 2 विधायक संख्या बल के आधार पर सवर्ण वर्ग अपनी दावेदारी मजबूत बता रहा है। किन नेताओं के नाम चर्चा में? राजपूत वर्ग से Rajiv Pratap Rudy और जनार्दन सिग्रीवाल के नाम चर्चा में हैं। भूमिहार समुदाय से उपमुख्यमंत्री Vijay Kumar Sinha और रजनीश कुमार का नाम लिया जा रहा है। वहीं ब्राह्मण वर्ग से स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय की दावेदारी की चर्चा है। क्या सवर्ण मुख्यमंत्री बनना संभव है? मानना है कि मौजूदा राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए सवर्ण मुख्यमंत्री बनने की संभावना काफी कम है। उनका कहना है कि बिहार की राजनीति लंबे समय से पिछड़ा, अतिपिछड़ा और दलित वर्ग के इर्द-गिर्द घूमती रही है, ऐसे में रणनीतिक रूप से NDA किसी सवर्ण चेहरे को मुख्यमंत्री बनाने से बच सकती है। राजनीतिक गणित क्या कहता है? विशेषज्ञों के अनुसार, सवर्ण नेताओं को सत्ता में संतुलन बनाए रखने के लिए अन्य महत्वपूर्ण पद दिए जा सकते हैं, लेकिन मुख्यमंत्री पद के लिए सामाजिक समीकरणों को प्राथमिकता दी जाएगी। फिलहाल बिहार की राजनीति में अटकलों का दौर जारी है और अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व और केंद्रीय रणनीति पर निर्भर करेगा।
पटना, एजेंसियां। पटना के चर्चित दुलारचंद यादव हत्याकांड में जेडीयू विधायक अनंत सिंह को बड़ी राहत मिली है। पटना हाई कोर्ट से जमानत मिलने के बाद करीब चार महीने जेल में रहने के पश्चात उन्हें बेऊर जेल से रिहा कर दिया गया। रिहाई के बाद अनंत सिंह ने खुद को निर्दोष बताते हुए पूरे मामले को साजिश करार दिया है। “घटनास्थल से 4 किलोमीटर दूर था” जेल से बाहर आते ही अनंत सिंह ने मीडिया से बातचीत में कहा कि घटना के समय वे मौके पर मौजूद नहीं थे। उन्होंने दावा किया, “हम घटनास्थल से करीब चार किलोमीटर दूर थे, हमें साजिश के तहत फंसाया गया है।” उनके इस बयान से मामले ने नया मोड़ ले लिया है और जांच की दिशा पर सवाल उठने लगे हैं। समर्थकों में जश्न का माहौल रिहाई के बाद अनंत सिंह के समर्थकों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। बाढ़ से लेकर मोकामा तक उनके स्वागत में कार्यकर्ताओं की भीड़ उमड़ पड़ी। जगह-जगह फूल-मालाओं और आतिशबाजी के साथ उनका स्वागत किया गया, जिससे पूरे क्षेत्र में उत्सव जैसा माहौल बन गया। जनता के बीच सक्रिय रहने का भरोसा अनंत सिंह ने कहा कि वे पहले की तरह जनता के बीच सक्रिय रहेंगे और अपने क्षेत्र के विकास के लिए काम करते रहेंगे। उन्होंने खुसरूपुर स्थित बढ़ईया में महारानी स्थान पर पूजा-अर्चना करने की भी बात कही। चार महीने बाद मिली राहत, सियासत गरम करीब चार महीने तक जेल में रहने के बाद मिली जमानत से उनके समर्थकों को बड़ी राहत मिली है। वहीं, इस घटनाक्रम के बाद बिहार की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। अब सबकी नजर इस मामले की आगे की कानूनी प्रक्रिया और इसके संभावित राजनीतिक असर पर टिकी हुई है।
पटना, एजेंसियां। केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान ने अपने चाचा पशुपति पारस से मुलाकात कर बिहार की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। लंबे समय से अलग चल रहे चाचा-भतीजा के बीच यह मुलाकात खगड़िया जिले के शहरबन्नी स्थित पैतृक आवास पर हुई, जहां चिराग पासवान अपने दिवंगत चाचा अर्जुन पासवान को श्रद्धांजलि देने पहुंचे थे। पैर छूकर लिया आशीर्वाद, दिखी नरमी मुलाकात का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें चिराग पासवान अपने चाचा पशुपति पारस के पैर छूकर आशीर्वाद लेते नजर आ रहे हैं। इसके बाद दोनों के बीच कुछ देर बातचीत भी हुई। पशुपति पारस ने भी चिराग के कंधे पर हाथ रखकर स्नेह जताया। यह दृश्य काफी समय बाद देखने को मिला, जिससे रिश्तों में नरमी के संकेत माने जा रहे हैं। सियासी गलियारों में तेज हुई अटकलें इस मुलाकात के बाद राजनीतिक हलकों में यह सवाल उठने लगा है कि क्या पासवान परिवार की दूरियां अब खत्म हो सकती हैं। माना जा रहा है कि इस पहल से दोनों के बीच जमी बर्फ पिघल सकती है और भविष्य में राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं। हालांकि, दोनों नेताओं के बीच क्या बातचीत हुई, इसका खुलासा नहीं हुआ है। कार्यकर्ताओं में उत्साह, एकता की उम्मीद मुलाकात के दौरान चिराग समर्थकों ने नारेबाजी कर माहौल को गर्म रखा। पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच इस मुलाकात को सकारात्मक संकेत के रूप में देखा जा रहा है। कई समर्थकों को उम्मीद है कि परिवार और पार्टी की एकता फिर से स्थापित हो सकती है। परिवारिक कार्यक्रम बना सियासी चर्चा का केंद्र श्रद्धांजलि कार्यक्रम के दौरान चिराग पासवान ने अपनी बड़ी मां राजकुमारी देवी से भी मुलाकात की और उनका हालचाल जाना। हालांकि यह एक पारिवारिक कार्यक्रम था, लेकिन इसने बिहार की राजनीति में संभावित बदलाव की चर्चा को जन्म दे दिया है।
बिहार की राजनीति में एक बार फिर बाहुबली विधायक अनंत सिंह चर्चा के केंद्र में हैं। बेऊर जेल से रिहाई के बाद आज वह अपने विधानसभा क्षेत्र मोकामा में 50 किलोमीटर लंबा मेगा रोड शो कर शक्ति प्रदर्शन करने जा रहे हैं। विधानसभा चुनाव में जीत के बाद यह उनका पहला बड़ा सार्वजनिक कार्यक्रम है, जिसे लेकर समर्थकों में खासा उत्साह देखा जा रहा है। रिहाई के बाद पहला शक्ति प्रदर्शन पटना हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद अनंत सिंह सोमवार को बेऊर जेल से रिहा हुए। जेल से बाहर आते ही समर्थकों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। इसके बाद वह करीब 50 गाड़ियों के काफिले के साथ पटना स्थित अपने आवास पहुंचे, जहां जश्न का माहौल देखने को मिला। उनके स्वागत में आयोजित कार्यक्रम में हजारों समर्थक शामिल हुए। जानकारी के मुताबिक, इस मौके पर भव्य भोज का आयोजन किया गया, जिसमें करीब 15 हजार लोगों के लिए व्यवस्था की गई थी। मोकामा से बड़हिया तक 50 किमी रोड शो आज का कार्यक्रम मोकामा से शुरू होकर बड़हिया स्थित महारानी स्थान मंदिर तक जाएगा। इस दौरान अनंत सिंह रास्ते में विभिन्न स्थानों पर रुककर लोगों का अभिवादन करेंगे और अपने समर्थकों का आभार जताएंगे। पूरे मार्ग पर समर्थकों ने स्वागत के लिए तोरण द्वार, फूल-मालाएं और बैनर-पोस्टर लगाए हैं। यह रोड शो केवल विजय जुलूस नहीं, बल्कि राजनीतिक ताकत का प्रदर्शन भी माना जा रहा है। मंदिर में पूजा के साथ होगा समापन रोड शो का समापन बड़हिया के प्रसिद्ध महारानी स्थान मंदिर में पूजा-अर्चना के साथ होगा। इसे धार्मिक और राजनीतिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। किस मामले में मिली जमानत? अनंत सिंह को अक्टूबर 2025 में दुलारचंद यादव हत्याकांड के मामले में गिरफ्तार किया गया था। उनके वकीलों ने अदालत में तर्क दिया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और गवाहों के बयान गोलीबारी की पुष्टि नहीं करते हैं। इन्हीं आधारों पर उन्हें जमानत मिली। कौन हैं अनंत सिंह? मोकामा से पांच बार विधायक रह चुके हैं जदयू, राजद और निर्दलीय-तीनों रूपों में जीत दर्ज की समर्थकों के बीच “छोटे सरकार” के नाम से लोकप्रिय कई आपराधिक मामलों के कारण विवादों में भी रहे नीतीश कुमार के साथ संबंध समय-समय पर चर्चा में रहे सुरक्षा के कड़े इंतजाम इतने बड़े आयोजन को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं। ट्रैफिक और कानून-व्यवस्था को बनाए रखने के लिए पुलिस बल तैनात किया गया है।
बिहार की राजनीति इन दिनों नए मोड़ पर खड़ी है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के संभावित इस्तीफे और नए चेहरे की चर्चा के बीच सियासी बयानबाज़ी भी तेज हो गई है। इसी क्रम में डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने जहानाबाद में एक कार्यक्रम के दौरान नीतीश कुमार की तुलना महाभारत कालीन मगध सम्राट जरासंध से कर दी। इस बयान ने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है। सम्राट चौधरी ने न सिर्फ नीतीश कुमार को पंडित चाणक्य जैसी रणनीतिक सोच वाला नेता बताया, बल्कि उन्हें चंद्रगुप्त मौर्य और जरासंध जैसी ऐतिहासिक शख्सियतों की श्रेणी में भी रखा। ऐसे में यह समझना जरूरी हो जाता है कि आखिर जरासंध कौन थे और उनकी तुलना का राजनीतिक अर्थ क्या है। कौन थे जरासंध? महाभारत के अनुसार, जरासंध प्राचीन मगध (आज का बिहार) के एक अत्यंत शक्तिशाली और प्रभावशाली सम्राट थे। उनकी राजधानी राजगृह (आज का राजगीर) थी। वे राजा बृहद्रथ के पुत्र थे और अपनी सैन्य शक्ति तथा रणनीति के लिए प्रसिद्ध थे। जरासंध का नाम विशेष रूप से इसलिए भी चर्चित है क्योंकि वे भगवान श्रीकृष्ण के सबसे बड़े विरोधियों में गिने जाते थे। श्रीकृष्ण से दुश्मनी की वजह जरासंध की श्रीकृष्ण से दुश्मनी का मुख्य कारण पारिवारिक संबंध था। दरअसल, वे मथुरा के राजा कंस के ससुर थे। जब श्रीकृष्ण ने कंस का वध किया, तो जरासंध ने इसे व्यक्तिगत अपमान माना और कृष्ण के खिलाफ कई बार युद्ध छेड़ा। कहा जाता है कि जरासंध ने बार-बार मथुरा पर आक्रमण कर श्रीकृष्ण को चुनौती दी और उन्हें काफी समय तक परेशान किया। शक्ति और महत्वाकांक्षा जरासंध सिर्फ एक योद्धा ही नहीं, बल्कि चक्रवर्ती सम्राट बनने की महत्वाकांक्षा रखने वाले शासक थे। उन्होंने 99 राजाओं को बंदी बनाकर रखा था, ताकि एक विशेष यज्ञ के जरिए अपनी सार्वभौमिक सत्ता स्थापित कर सकें। हालांकि, उन्होंने इन राजाओं की हत्या नहीं की थी। कैसे हुई जरासंध की मृत्यु? महाभारत के अनुसार, जरासंध की शक्ति को खत्म करना श्रीकृष्ण के लिए जरूरी हो गया था। इसके लिए उन्होंने भीम को मल्लयुद्ध के लिए आगे किया। राजगीर के अखाड़े में भीम और जरासंध के बीच लंबा और भीषण युद्ध हुआ। अंततः श्रीकृष्ण की रणनीति से भीम ने जरासंध के शरीर के दो हिस्से कर उन्हें विपरीत दिशाओं में फेंक दिया, जिससे उनकी मृत्यु हो गई। इसके बाद उनके पुत्र सहदेव को मगध का राजा बनाया गया। बिहार की राजनीति में जरासंध का जिक्र क्यों? हाल के वर्षों में बिहार की सांस्कृतिक और राजनीतिक पहचान में जरासंध का नाम फिर से प्रमुखता से उभरा है। 2025 में नीतीश कुमार ने राजगीर में 21 फीट ऊंची जरासंध की प्रतिमा का अनावरण किया था। यह स्मारक करीब 15 करोड़ रुपये की लागत से बना है। राजगीर स्थित जरासंध स्मृति पार्क में उनके जीवन और युद्धों को भित्तिचित्रों के माध्यम से दर्शाया गया है। इसके अलावा, राज्य में “जरासंध महोत्सव” का भी आयोजन किया जा रहा है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह ऐतिहासिक पात्र अब राजनीतिक विमर्श का भी हिस्सा बन चुका है। सियासी संकेत क्या हैं? सम्राट चौधरी द्वारा की गई यह तुलना केवल ऐतिहासिक संदर्भ नहीं, बल्कि एक राजनीतिक संकेत भी मानी जा रही है। बिहार में नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों के बीच यह बयान इस ओर इशारा करता है कि सत्ता हस्तांतरण की जमीन तैयार हो रही है। करीब दो दशकों तक मुख्यमंत्री रहे नीतीश कुमार के संभावित पदत्याग के बाद बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
पटना: बिहार की राजधानी पटना से एक बेहद प्रेरणादायक और मानवीय घटना सामने आई है, जहां एक ट्रैफिक कॉन्स्टेबल की सूझबूझ और तत्परता ने एक जवान की जिंदगी बचा ली। बिहार पुलिस द्वारा साझा किए गए इस वीडियो ने सोशल मीडिया पर लोगों का दिल जीत लिया है, और अब हर कोई इस पुलिसकर्मी की सराहना कर रहा है। क्या है पूरा मामला? घटना पटना के मीठापुर बाइपास की है, जहां से गुजर रहे एक CISF जवान को अचानक सांस लेने में दिक्कत हुई और वह सड़क पर ही गिर पड़ा। मौके पर मौजूद लोगों ने तुरंत ट्रैफिक पुलिस को सूचना दी। कुछ ही पलों में एक ट्रैफिक कॉन्स्टेबल वहां पहुंचा और स्थिति की गंभीरता को समझते हुए बिना देर किए CPR (कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन) देना शुरू कर दिया। कैसे बची जवान की जान? वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि जवान लगभग बेहोशी की हालत में था। ट्रैफिक कॉन्स्टेबल ने लगातार CPR देकर उसकी सांसें वापस लाने की कोशिश की। कुछ ही देर में जवान को होश आ गया, जिससे वहां मौजूद लोगों ने राहत की सांस ली। इसके बाद कॉन्स्टेबल ने जवान को निर्देश दिया कि वह सिर नीचे रखे, पैर फैलाए और पानी पीकर खुद को सामान्य करे। उनकी सतर्कता और सही समय पर लिए गए फैसले ने एक बड़ी अनहोनी को टाल दिया। बिहार पुलिस का संदेश इस घटना का वीडियो साझा करते हुए बिहार पुलिस ने लिखा- “बिहार पुलिस सदैव आपके साथ। हर संकट में आपके साथ, हर परिस्थिति में आपके लिए समर्पित। आपकी सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।” सोशल मीडिया पर मिल रही जमकर तारीफ वीडियो वायरल होते ही लोग ट्रैफिक कॉन्स्टेबल की तारीफ करते नहीं थक रहे हैं। एक यूजर ने लिखा, “सैल्यूट इस जज्बे को।” दूसरे ने कहा, “CPR की ट्रेनिंग हर स्कूल-कॉलेज में जरूरी होनी चाहिए।” वहीं एक अन्य यूजर ने लिखा, “वेलडन, बदलता हुआ बिहार।” क्यों खास है यह घटना? यह घटना सिर्फ एक जान बचाने की नहीं, बल्कि आपात स्थिति में सही प्रशिक्षण और त्वरित निर्णय की अहमियत को भी दर्शाती है। अगर हर नागरिक को CPR जैसी जीवन रक्षक तकनीक की जानकारी हो, तो कई जिंदगियां बचाई जा सकती हैं।
पटना: बिहार की राजधानी पटना में करोड़ों की ठगी के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए पुलिस ने कथित मास्टरमाइंड राहुल कालरा और उनकी पत्नी रुचिका कालरा को हरियाणा के गुरुग्राम स्थित एक होटल से गिरफ्तार कर लिया है। दोनों पर कपड़ा धुलाई कंपनी की फ्रेंचाइजी दिलाने के नाम पर करीब 100 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी का आरोप है। विदेश भागने की तैयारी में थे आरोपी पटना पुलिस के मुताबिक, राहुल कालरा और उनकी पत्नी विदेश फरार होने की फिराक में थे। इसी दौरान पुलिस को इनकी लोकेशन मिली और छापेमारी कर दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया। अब ट्रांजिट रिमांड पर उन्हें पटना लाकर पूछताछ की जाएगी। फ्रेंचाइजी के नाम पर करोड़ों की ठगी जांच में सामने आया है कि राहुल कालरा खुद को एक प्रतिष्ठित वॉशिंग (कपड़ा/वाहन धुलाई) कंपनी का संचालक बताकर लोगों को फ्रेंचाइजी देने का झांसा देता था। कई कारोबारियों ने इस झांसे में आकर करोड़ों रुपये निवेश किए, लेकिन: न तो कोई यूनिट स्थापित की गई न मशीनें उपलब्ध कराई गईं और न ही निवेशकों को पैसा वापस मिला पटना समेत कई शहरों में दर्ज केस इस मामले में गांधी मैदान थाना में दो अलग-अलग एफआईआर दर्ज हैं। एक केस साल 2025 में दूसरा जनवरी 2026 में दर्ज हुआ एक पीड़ित ने 1.85 करोड़ रुपये की ठगी की शिकायत दर्ज कराई है। इसके अलावा एसके पुरी थाना में भी मामला दर्ज है। देशभर में फैला था ठगी का नेटवर्क जांच में यह भी सामने आया है कि इस गिरोह ने बिहार के अलावा अन्य राज्यों में भी लोगों को निशाना बनाया। भागलपुर और बेंगलुरु जैसे शहरों में भी निवेशकों से ठगी के मामले सामने आए हैं। पुलिस को शक है कि यह एक बड़ा संगठित नेटवर्क है। कौन है राहुल कालरा? राहुल कालरा पटना के पाटलिपुत्र कॉलोनी में रह चुका है खुद को एक निजी कंपनी का मैनेजिंग डायरेक्टर (MD) बताता था कपड़ा और वाहन धुलाई से जुड़ा कारोबार चलाने का दावा करता था इसी कारोबार की फ्रेंचाइजी के नाम पर लोगों को निवेश के लिए फंसाता था इस पूरे खेल में उसकी पत्नी रुचिका कालरा और अन्य सहयोगियों की भी भूमिका सामने आई है। ठिकाना बदल-बदल कर छिप रहे थे आरोपी गिरफ्तारी से बचने के लिए दोनों लगातार अपना ठिकाना बदल रहे थे। आखिरकार पुलिस को इनकी जानकारी गुरुग्राम के एक होटल में मिली, जहां से उन्हें दबोच लिया गया। पुलिस करेगी बड़ा खुलासा पटना पुलिस इस पूरे मामले का विस्तृत खुलासा करने की तैयारी में है। पूछताछ के बाद ठगी के नेटवर्क और अन्य शामिल लोगों के बारे में और बड़े खुलासे होने की संभावना है।
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मंगलवार को अपनी महत्वाकांक्षी ‘समृद्धि यात्रा’ के तहत कैमूर और रोहतास जिलों के दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वे कई विकास योजनाओं का उद्घाटन करेंगे और चल रही परियोजनाओं की प्रगति का जायजा लेंगे। कैमूर और रोहतास में कार्यक्रम तय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सुबह के समय कैमूर जिले पहुंचेंगे, जहां वे विभिन्न योजनाओं का निरीक्षण करेंगे। इसके बाद दोपहर में उनका कार्यक्रम रोहतास जिले में निर्धारित है, जहां वे विकास कार्यों की समीक्षा के साथ नई परियोजनाओं की शुरुआत करेंगे। जनता से सीधा संवाद करेंगे CM इस यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री दोनों जिलों में जनसभाओं को भी संबोधित करेंगे। इन सभाओं के माध्यम से वे आम लोगों से सीधा संवाद स्थापित करेंगे और सरकार की योजनाओं की जानकारी साझा करेंगे। विकास कार्यों की होगी समीक्षा ‘समृद्धि यात्रा’ का मुख्य उद्देश्य जिलों में चल रही योजनाओं की जमीनी स्थिति का आकलन करना है। नीतीश कुमार अधिकारियों के साथ बैठक कर परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा भी करेंगे और जरूरी दिशा-निर्देश देंगे। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम मुख्यमंत्री के दौरे को लेकर दोनों जिलों में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। प्रशासन ने पहले से ही सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं, ताकि कार्यक्रम शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से संपन्न हो सके। जिलों को मिलेंगी नई योजनाओं की सौगात इस दौरे के दौरान कैमूर और रोहतास जिले को कई नई विकास योजनाओं की सौगात मिलने की उम्मीद है। इससे क्षेत्र के बुनियादी ढांचे और जनसुविधाओं में सुधार आने की संभावना जताई जा रही है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
UPSC CSE Result 2025: देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षाओं में से एक Civil Services Examination का अंतिम परिणाम जारी कर दिया गया है। Union Public Service Commission ने शुक्रवार 6 मार्च 2026 को UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 का फाइनल रिजल्ट घोषित किया। इस परीक्षा में अनुज अग्निहोत्री ने पहला स्थान हासिल किया है। परीक्षा में शामिल हुए उम्मीदवार अब आयोग की आधिकारिक वेबसाइट UPSC Official Website पर जाकर फाइनल मेरिट लिस्ट देख सकते हैं। 958 उम्मीदवारों का हुआ चयन यूपीएससी द्वारा जारी फाइनल रिजल्ट के अनुसार इस वर्ष कुल 958 उम्मीदवारों ने सफलता हासिल की है। चयनित उम्मीदवारों की नियुक्ति विभिन्न केंद्रीय सेवाओं में उनकी रैंक और पसंद के आधार पर की जाएगी। फाइनल रिजल्ट उम्मीदवारों के लिखित परीक्षा (Main Exam) और पर्सनैलिटी टेस्ट (Interview) में प्रदर्शन के आधार पर तैयार किया गया है। इन प्रतिष्ठित सेवाओं के लिए होता है चयन यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के माध्यम से देश की कई प्रतिष्ठित सेवाओं के लिए अधिकारियों का चयन किया जाता है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं— भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) भारतीय पुलिस सेवा (IPS) भारतीय विदेश सेवा (IFS) भारतीय राजस्व सेवा (IRS) भारतीय व्यापार सेवा सहित अन्य ग्रुप A और ग्रुप B सेवाएं 979 पदों को भरने का लक्ष्य सिविल सेवा परीक्षा 2025 के माध्यम से केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों में कुल 979 रिक्त पदों को भरा जाना है। ऐसे चेक करें UPSC CSE 2025 का रिजल्ट उम्मीदवार नीचे दिए गए स्टेप्स के माध्यम से अपना रिजल्ट देख सकते हैं— आधिकारिक वेबसाइट upsc.gov.in पर जाएं होमपेज पर “Examination” टैब पर क्लिक करें “Active Examinations” या “What’s New” सेक्शन में जाएं Civil Services Examination Final Result 2025 लिंक पर क्लिक करें मेरिट लिस्ट की PDF खुल जाएगी Ctrl + F दबाकर अपना नाम या रोल नंबर सर्च करें 15 दिन में जारी होगी मार्कशीट यूपीएससी के अनुसार सभी उम्मीदवारों की मार्कशीट रिजल्ट जारी होने के 15 दिनों के भीतर आयोग की वेबसाइट पर अपलोड कर दी जाएगी। उम्मीदवार इसे 30 दिनों तक ऑनलाइन डाउनलोड कर सकेंगे। पिछले साल का कट-ऑफ पिछले वर्ष का अंतिम कट-ऑफ इस प्रकार था— जनरल: 87.98 EWS: 85.92 OBC: 87.28 SC: 79.03 ST: 74.23 आयु सीमा क्या है यूपीएससी की अधिसूचना के अनुसार उम्मीदवार की आयु 1 अगस्त 2024 तक कम से कम 21 वर्ष और अधिकतम 32 वर्ष होनी चाहिए। यानी उम्मीदवार का जन्म 2 अगस्त 1992 से 1 अगस्त 2003 के बीच होना चाहिए। यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा भारत की सबसे कठिन और प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षाओं में से एक मानी जाती है। हर साल लाखों उम्मीदवार इस परीक्षा में शामिल होते हैं, लेकिन तीन चरणों—प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू—को पार कर बहुत कम उम्मीदवार ही अंतिम सूची में जगह बना पाते हैं। UPSC CSE 2025 टॉप-20 उम्मीदवारों की सूची रैंक रोल नंबर नाम 1 1131589 अनुज अग्निहोत्री 2 4000040 राजेश्वरी सुवे एम 3 3512521 अकांश ढुल 4 0834732 राघव झुनझुनवाला 5 0409847 ईशान भटनागर 6 6410067 जिनिया अरोड़ा 7 0818306 ए आर राजा मोहिद्दीन 8 0843487 पक्षल सेक्रेटरी 9 0831647 आस्था जैन 10 1523945 उज्ज्वल प्रियांक 11 1512091 यशस्वी राज वर्धन 12 0840280 अक्षित भारद्वाज 13 7813999 अनन्या शर्मा 14 5402316 सुरभि यादव 15 3507500 सिमरनदीप कौर 16 0867445 मोनिका श्रीवास्तव 17 0829589 चितवन जैन 18 5604518 श्रुति आर 19 0105602 निसार दिशांत अमृतलाल 20 6630448 रवि राज