बिहार

JMM Worried After Nitish Move

नीतीश के राजनीतिक घटनाक्रम से झारखंड में हलचल, हेमंत सोरेन की रणनीति पर मंथन

surbhi मार्च 6, 2026 0
Nitish Kumar and Hemant Soren political developments in Bihar and Jharkhand
Nitish Kumar Move Triggers Concern for Hemant Soren and JMM

 

Bihar Politics: बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की अटकलों के बीच झारखंड की राजनीति में भी हलचल तेज हो गई है। इन घटनाक्रमों के बाद झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के भीतर चिंता का माहौल बताया जा रहा है। पार्टी को आशंका है कि यदि वह एनडीए (NDA) में शामिल होती है तो मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की राजनीतिक स्थिति कमजोर हो सकती है।

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि बिहार की मौजूदा परिस्थितियों ने झारखंड में भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं। इसी वजह से झामुमो अब अपने राजनीतिक कदमों को लेकर सतर्क नजर आ रही है।

बिहार की सियासत से झारखंड में बढ़ी हलचल

पिछले कुछ दिनों से यह अटकलें लगाई जा रही थीं कि झारखंड मुक्ति मोर्चा भविष्य में एनडीए का हिस्सा बन सकता है। हालांकि बिहार में राजनीतिक घटनाक्रम और नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की चर्चाओं के बाद झामुमो के भीतर इस फैसले को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है।

बताया जा रहा है कि झामुमो नेतृत्व अब इस बात पर विचार कर रहा है कि अगर एनडीए में शामिल हुए तो पार्टी की राजनीतिक स्वतंत्रता और नेतृत्व की स्थिति पर क्या असर पड़ेगा।

नीतीश कुमार के उदाहरण से बढ़ी चिंता

झामुमो के रणनीतिकारों के बीच यह चर्चा है कि करीब दो दशकों तक बिहार की राजनीति में प्रभाव रखने वाले नेता नीतीश कुमार को भी अब राज्यसभा भेजे जाने की चर्चा हो रही है। पार्टी के भीतर इसे एक बड़े राजनीतिक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।

कुछ नेताओं का मानना है कि अगर इतने अनुभवी नेता भी अपनी मुख्यमंत्री की कुर्सी नहीं बचा पाए तो एनडीए में जाने के बाद छोटे सहयोगी दलों की स्थिति कमजोर हो सकती है।

भाजपा पर ‘राजनीतिक दबाव’ का आरोप

झारखंड मुक्ति मोर्चा के केंद्रीय महासचिव विनोद पांडेय ने बिहार के घटनाक्रम को लेकर भाजपा पर आरोप लगाते हुए कहा कि यह एक तरह का राजनीतिक दबाव है। उनका कहना है कि इस तरह की परिस्थितियों से क्षेत्रीय दलों को सावधान रहना चाहिए।

पार्टी में टूट का भी डर

झामुमो के अंदर यह आशंका भी जताई जा रही है कि अगर पार्टी एनडीए में शामिल होती है तो भविष्य में आंतरिक मतभेद या टूट की स्थिति बन सकती है। पार्टी के कुछ नेता अन्य राज्यों में हुए राजनीतिक घटनाक्रमों—जैसे महाराष्ट्र में शिवसेना और एनसीपी के विभाजन—का उदाहरण भी दे रहे हैं।

कांग्रेस और राजद से रिश्ते मजबूत करने की रणनीति

इन राजनीतिक परिस्थितियों के बीच यह भी संकेत मिल रहे हैं कि झामुमो फिलहाल एनडीए में जाने के बजाय कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के साथ अपने संबंध मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ा सकती है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बिहार और झारखंड की सियासत आने वाले समय में नए समीकरणों के साथ आगे बढ़ सकती है।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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BPSC इंटरव्यू पैनल में अब एक वरिष्ठ IAS या IPS अफसर होगा मौजूद

पटना, एजेंसियां। बिहार लोक सेवा आयोग यानी BPSC  ने चयन प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया है। BPSC इंटरव्यू पैनल में अब कम से कम एक IAS या IPS अफसर की मौजूदगी जरूरी होगी। अब हर इंटरव्यू बोर्ड में कम-से-कम एक वरिष्ठ IAS या IPS अधिकारी मौजूद रहेगा। पहले इंटरव्यू पैनल में शिक्षाविद और विशेषज्ञ बैठते थे, लेकिन अब इसमें बदलाव करते हुए IAS और IPS अधिकारियों को भी शामिल करने का फैसला लिया जा रहा है।  नई व्यवस्था के तहत फील्ड में तैनात अधिकारी अभ्यर्थियों की सिर्फ अकादमिक जानकारी नहीं, बल्कि उनकी निर्णय लेने की क्षमता, मानसिक मजबूती और प्रशासनिक समझ का आकलन करेंगे।  70वीं सिविल परीक्षा से नया बदलाव लागू  यह बदलाव वर्तमान में चल रही 70वीं संयुक्त मुख्य परीक्षा (CCE) के इंटरव्यू से ही लागू कर दिया गया है। ये अधिकारी अभ्यर्थियों की बॉडी लैंग्वेज, स्ट्रेस मैनेजमेंट और एथिकल वैल्यूज का भी मूल्यांकन करेंगे जिससे इंटरव्यू प्रक्रिया अधिक प्रोफेशनल और पारदर्शी बनेगी। हाल में कई बदलाव हुए  BPSC ने 2023 से 2026 के बीच चयन प्रक्रिया में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। इस अवधि में इंटीग्रेटेड प्रीलिम्स की शुरुआत, नेगेटिव मार्किंग का लागू होना और मुख्य परीक्षा में 300 अंकों का निबंध जोड़ना जैसे बड़े फैसले लिए गए हैं। इसके साथ ही वैकल्पिक विषय (Optional) को अब केवल क्वालिफाइंग कर दिया गया है, यानी इसके अंक अंतिम मेरिट में नहीं जोड़े जाएंगे। नई व्यवस्था के तहत अब सामान्य अध्ययन (GS) और निबंध ही चयन का मुख्य आधार होंगे। पक्षपात और बाहरी हस्तक्षेप की संभावना कम होगी इन सुधारों का उद्देश्य परीक्षा प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष और मेरिट आधारित बनाना है। साथ ही, विषयों के बीच अंक असंतुलन की समस्या को भी खत्म करने की कोशिश की गई है। इंटरव्यू प्रक्रिया में भी बदलाव करते हुए वरिष्ठ अधिकारियों को पैनल में शामिल किया गया है, जिससे पक्षपात और बाहरी हस्तक्षेप की संभावना कम होगी। इससे खासतौर पर ग्रामीण पृष्ठभूमि के प्रतिभाशाली अभ्यर्थियों को लाभ मिलने की उम्मीद है।

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कोयला घोटाला जांच I-PAC कार्यालय पर प्रवर्तन निदेशालय की छापेमारी
प्रशांत किशोर की कंपनी I-PAC पर ED रेड, जानें क्या है पूरा कोयला घोटाला

पटना,एजेंसियां। प्रशांत किशोर की कंपनी I-PAC (Indian Political Action Committee) के दफ्तर पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की रेड के बाद एक बार फिर पश्चिम बंगाल के चर्चित कोयला घोटाले की चर्चा तेज हो गई है। यह मामला दरअसल ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ECL) के लीज एरिया से कथित अवैध कोयला खनन, चोरी, तस्करी और उससे कमाए गए पैसे की मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा है। ED ने यह जांच 2020 में CBI द्वारा दर्ज FIR के आधार पर शुरू की थी। एजेंसियों के अनुसार, इस सिंडिकेट का कथित मास्टरमाइंड अनूप माझी उर्फ ‘लाला’ था, जिस पर ECL, CISF, रेलवे और अन्य विभागों के कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से कोयला चोरी कराने के आरोप हैं।   जांच में क्या आया सामने ? जांच में यह आरोप सामने आया कि ECL के कुनुस्तोरिया और कजोरा क्षेत्रों से बड़े पैमाने पर कोयला अवैध रूप से निकाला गया और उसे विभिन्न फैक्ट्रियों व कंपनियों तक पहुंचाया गया। CBI और ED की कार्रवाई में कई जगह छापे पड़े, दस्तावेज और डिजिटल सबूत मिले, और कई आरोपियों के नाम सामने आए। ED के मुताबिक अब तक इस केस में 2,742.32 करोड़ रुपये तक की “प्रोसीड्स ऑफ क्राइम” (अपराध से अर्जित रकम) चिन्हित की गई है। एजेंसी ने पहले भी कई संपत्तियां अटैच की हैं और इस मामले में गिरफ्तारी व चार्जशीट की कार्रवाई हो चुकी है।   I-PAC का नाम कैसे जुड़ा? ताजा मोड़ तब आया जब ED ने दावा किया कि कोयला तस्करी से जुड़ी काली कमाई का एक हिस्सा हवाला नेटवर्क के जरिए I-PAC तक पहुंचाया गया। रिपोर्टों के मुताबिक, जांच में करीब 20 करोड़ रुपये के कथित ट्रांसफर की बात सामने आई, जिसे गोवा में 2021-22 के दौरान I-PAC के ऑपरेशंस से जोड़ा गया। इसी कड़ी में ED ने I-PAC से जुड़े परिसरों पर तलाशी ली। हालांकि, जांच एजेंसियों के आरोप और कोर्ट में साबित अपराध—दोनों अलग बातें हैं, इसलिए अंतिम सच न्यायिक प्रक्रिया से ही तय होगा। फिलहाल, यह मामला सिर्फ कोयला चोरी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राजनीति, हवाला और चुनावी मैनेजमेंट नेटवर्क तक फैलता दिख रहा है।

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नालंदा के शीतला माता मंदिर में भगदड़, 8 मरे, CM नीतीश ने जताया शोक, मृतकों के परिजनों को मिलेंगे 6-6 लाख

पटना, एजेंसियां। बिहार के नालंदा में शीतला माता मंदिर भगदड़ मचने से 8 लोगों की मौत हो गईस जबकि दर्जनों लोग घायल हो गए। इस घटना को लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने दुख जताया है। साथ ही मृतकों के लिए मुआवजा देने का ऐलान किया है। नीतीश सरकार ने भगदड़ में मरने वाले श्रद्धालुओं के आश्रितों को 6-6 लाख रुपए मुआवजा देने की घोषणा की है वहीं घायलों को मुफ्त इलाज देने की बात कही है। जानकारी के मुताबिक, मृतकों में 7 महिलाएं हैं। घायलों को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका इलाज चल रही है।  शीतला अष्टमी पूजा के दौरान हादसा दरअसल यह हादसा मंदिर में शीतला अष्टमी पूजा के दौरान हुई। शीतला अष्टमी पूजा को लेकर मंदिर परिसर में भारी भीड़ जमा थी। इसी दौरान अचानक धक्का-मुक्की का सिलसिला शुरू हुआ और लोग एक-दूसरे पर गिरते चले गए। भीड़ में दबने के कारण आठ लोगों की मौत हो गई। शीतलाष्टमी मेला लगता है यहा दरअसल इस मंदिर की मान्यता है कि इस पूजा के उपलक्ष्य में शीतलाष्टमी मेला लगता है। मेला के दिन मघड़ा और इसके आसपास के दर्जनों गांवों में चूल्हा नहीं जलता है। लोग एक दिन पहले ही खाना बनाकर दूसरे दिन प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं। शीतला मंदिर के पुजारी ने बताया कि चैत्र कृष्ण पक्ष अष्टमी के दिन यहां देश के कोने-कोने से लोग पूजा अर्चना करने आते हैं। व्रत की विशेषता यह कि इसमें शीतला देवी को भोग लगाने वाला पदार्थ एक दिन पहले ही बना लिया जाता है। बासी भोग लगाने की परंपरा है। चैत्र अष्टी के मौके पर मां शीतला की पूजा-अर्चना के लिए सूबे के विभिन्न जिलों के अलावा झारखंड, बंगाल और उत्तर प्रदेश से भी काफी संख्या में श्रद्धालुओं आते हैं। मघड़ा गांव में काफी पुराना मिट्ठी कुआं है। इसी कुएं के पानी से सप्तमी की शाम में बसिऔरा के लिए भोजन तैयार किया जाता है। प्रसाद में अरवा चावल, चने की दाल, सब्जियां, पुआ, पकवान आदि बनाया जाता है। खास बात यह कि मां शीतला मंदिर में दिन में दीपक नहीं जलते हैं। दूर-दराज़ से आए श्रद्धालु, व्रत-पूजा और वासी भोग की परंपरा निभाने पहुंचे थे। लोगों का कहना है कि इस मंदिर में जाने से चर्म रोग और बच्चों की बीमारियों से निजात मिलता है।

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