लक्ज़री सेडान सेगमेंट में एंट्री के लिए तैयार नई Lexus ES
जापान की लग्ज़री कार निर्माता कंपनी Lexus ने घोषणा की है कि उसकी नई पीढ़ी की लग्ज़री सेडान Lexus ES को 20 मार्च 2026 को भारत में लॉन्च किया जाएगा।
नई जनरेशन की यह सेडान पहले से ज्यादा फ्यूचरिस्टिक डिजाइन, बड़ी बॉडी, हाई-टेक इंटीरियर और इलेक्ट्रिफाइड पावरट्रेन के साथ आएगी। कंपनी इसे अपने प्रीमियम सेडान पोर्टफोलियो को और मजबूत बनाने के लिए पेश कर रही है।
भारत में लॉन्च होने के बाद नई Lexus ES का मुकाबला कई लोकप्रिय लग्ज़री सेडान से होगा, जिनमें शामिल हैं:
ये सभी मॉडल भारत के प्रीमियम सेडान सेगमेंट में मजबूत प्रतिस्पर्धा देते हैं, ऐसे में नई Lexus ES के लॉन्च से बाजार में मुकाबला और दिलचस्प होने की उम्मीद है।
नई Lexus ES को कंपनी के अपडेटेड TNGA-K प्लेटफॉर्म पर तैयार किया गया है। इस प्लेटफॉर्म की वजह से कार में बेहतर स्टेबिलिटी, ज्यादा स्पेस और बेहतर ड्राइविंग एक्सपीरियंस मिलने की संभावना है।
इसके साथ ही डिजाइन में भी बड़े बदलाव किए गए हैं, जिससे कार पहले से ज्यादा मॉडर्न और प्रीमियम दिखाई देगी।
नई पीढ़ी की Lexus ES में टेक्नोलॉजी से भरपूर केबिन मिलने की उम्मीद है। इसमें बड़ा डिजिटल इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर, बड़ा टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम, एडवांस कनेक्टेड कार फीचर्स और प्रीमियम इंटीरियर फिनिश दिए जा सकते हैं।
कंपनी इस मॉडल को ऐसे ग्राहकों के लिए तैयार कर रही है जो लग्ज़री के साथ-साथ आधुनिक टेक्नोलॉजी को भी प्राथमिकता देते हैं।
भारत में फिलहाल Lexus ES हाइब्रिड सेडान के रूप में उपलब्ध है। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि नई जनरेशन मॉडल भी इलेक्ट्रिफाइड हाइब्रिड पावरट्रेन के साथ ही आएगा।
ग्लोबल मार्केट में कंपनी इस मॉडल के लिए कई इलेक्ट्रिफाइड इंजन विकल्प पेश कर रही है, जिससे बेहतर माइलेज और कम उत्सर्जन का लाभ मिलेगा।
कुल मिलाकर, नई Lexus ES का भारत में लॉन्च प्रीमियम सेडान सेगमेंट में डिजाइन, टेक्नोलॉजी और हाइब्रिड पावर के लिहाज से बड़ा अपडेट साबित हो सकता है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
Royal Enfield अपनी सबसे आइकॉनिक बाइक Royal Enfield Bullet को अब नए अवतार में लॉन्च करने की तैयारी कर रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक कंपनी जल्द ही भारतीय बाजार में नई Bullet 650 पेश कर सकती है। माना जा रहा है कि यह बाइक जून 2026 के आसपास लॉन्च हो सकती है। यह पहली बार होगा जब Bullet सीरीज में 650cc ट्विन-सिलेंडर इंजन देखने को मिलेगा। लंबे समय से Royal Enfield फैंस इस बाइक का इंतजार कर रहे थे और अब कंपनी इसे क्लासिक डिजाइन के साथ मॉडर्न टेक्नोलॉजी के कॉम्बिनेशन में पेश करने जा रही है। क्लासिक डिजाइन में मिलेगा पावरफुल इंजन नई Bullet 650 अपने पारंपरिक Bullet डीएनए को बरकरार रखेगी। बाइक में: टियरड्रॉप फ्यूल टैंक राउंड हेडलैंप क्लासिक बॉडी स्टाइल टाइगर-आई पायलट लैम्प्स जैसे पुराने Bullet वाले डिजाइन एलिमेंट्स देखने को मिलेंगे। हालांकि बाहरी लुक रेट्रो रहेगा, लेकिन अंदर पूरी तरह मॉडर्न हार्डवेयर दिया जाएगा। मिलेगा 650cc पैरेलल-ट्विन इंजन नई Bullet 650 में कंपनी का मशहूर 647.95cc पैरेलल-ट्विन इंजन दिया जा सकता है। यही इंजन फिलहाल: Royal Enfield Interceptor 650 Royal Enfield Super Meteor 650 जैसी बाइक्स में इस्तेमाल हो रहा है। यह इंजन करीब: 47bhp की पावर 52.3Nm का टॉर्क जनरेट करता है। इसके साथ 6-स्पीड गियरबॉक्स मिलेगा। हाईवे टूरिंग के लिए होगी खास नई Bullet 650 को सिर्फ शहर के इस्तेमाल के लिए नहीं, बल्कि लंबी दूरी की राइडिंग को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है। बाइक में मिल सकते हैं: चौड़ी और आरामदायक सीट ऊंचा हैंडलबार रिलैक्स्ड राइडिंग पोजिशन जिससे हाईवे राइडिंग ज्यादा आरामदायक हो सके। रिपोर्ट्स के अनुसार बाइक का वजन करीब 243 किलोग्राम हो सकता है और इसमें 14.8 लीटर का बड़ा फ्यूल टैंक मिलेगा। फीचर्स में मिलेगा रेट्रो और मॉडर्न का मिश्रण Royal Enfield इस बार क्लासिक डिजाइन के साथ कई नए फीचर्स भी जोड़ सकती है। संभावित फीचर्स: LED हेडलाइट LED टेललाइट सेमी-डिजिटल इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर गियर पोजिशन इंडिकेटर ट्रिप मीटर सर्विस रिमाइंडर USB Type-C चार्जिंग पोर्ट सेफ्टी फीचर्स भी होंगे दमदार सेफ्टी के लिए बाइक में: डुअल-चैनल ABS फ्रंट और रियर डिस्क ब्रेक दिए जा सकते हैं। सस्पेंशन सेटअप में: आगे 43mm टेलिस्कोपिक फोर्क पीछे ट्विन शॉक एब्जॉर्बर मिलने की उम्मीद है। Royal Enfield के लिए क्यों खास है Bullet 650? पिछले कुछ वर्षों में Royal Enfield अपने 650cc पोर्टफोलियो को तेजी से बढ़ा रही है। कंपनी चाहती है कि उसके क्लासिक मॉडल्स भी ज्यादा पावर और मॉडर्न टेक्नोलॉजी के साथ नए ग्राहकों को आकर्षित करें। भारत में प्रीमियम रेट्रो मोटरसाइकिल्स की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में Bullet 650 कंपनी के लिए बड़ा गेमचेंजर साबित हो सकती है। कितनी हो सकती है कीमत? हालांकि कंपनी ने अभी आधिकारिक कीमत का खुलासा नहीं किया है, लेकिन माना जा रहा है कि इसकी एक्स-शोरूम कीमत करीब 3.5 लाख रुपये हो सकती है। लॉन्च के बाद इसका मुकाबला: BSA Gold Star 650 Kawasaki Eliminator जैसी प्रीमियम बाइक्स से हो सकता है।
अगर आप कम बजट में ज्यादा माइलेज देने वाली और फीचर्स से भरपूर डीजल कार खरीदने की सोच रहे हैं, तो Tata Altroz आपके लिए शानदार विकल्प साबित हो सकती है। भारतीय बाजार में डीजल कारों की संख्या लगातार कम हो रही है, लेकिन लंबी दूरी तय करने वाले और रोजाना ज्यादा ड्राइव करने वाले ग्राहकों के बीच डीजल कारों की मांग अब भी बनी हुई है। ऐसे समय में Tata Altroz उन चुनिंदा कारों में शामिल है, जो किफायती कीमत, शानदार माइलेज, प्रीमियम फीचर्स और मजबूत सेफ्टी का बेहतरीन कॉम्बिनेशन देती है। यही वजह है कि इसे भारत की सबसे सस्ती डीजल कारों में गिना जाता है। कीमत कितनी है? Tata Motors की इस प्रीमियम हैचबैक की शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत 6.30 लाख रुपये है। वहीं इसका टॉप वेरिएंट 10.77 लाख रुपये तक जाता है। अगर आप डीजल वेरिएंट खरीदना चाहते हैं, तो इसकी कीमत 8.15 लाख रुपये से शुरू होकर Accomplished S ट्रिम के लिए 10.27 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) तक पहुंचती है। इंजन ऑप्शन्स Tata Altroz तीन इंजन विकल्पों के साथ आती है: 1.2 लीटर पेट्रोल इंजन 88 PS पावर 115 Nm टॉर्क 1.2 लीटर CNG इंजन 73.5 PS पावर 103 Nm टॉर्क 1.5 लीटर डीजल इंजन 90 PS पावर 200 Nm टॉर्क गियरबॉक्स विकल्प कार में सभी इंजन ऑप्शन के साथ 5-स्पीड मैनुअल गियरबॉक्स स्टैंडर्ड मिलता है। इसके अलावा पेट्रोल वेरिएंट में: 5-स्पीड AMT 6-स्पीड DCT का विकल्प भी उपलब्ध है। हालांकि डीजल वेरिएंट केवल 5-स्पीड मैनुअल ट्रांसमिशन के साथ आता है। माइलेज में भी दमदार कंपनी का दावा है कि Altroz डीजल वेरिएंट 23.64 kmpl तक का माइलेज देता है। यही वजह है कि यह कार लंबी दूरी तय करने वालों और रोजाना ज्यादा ड्राइव करने वाले ग्राहकों के लिए काफी किफायती मानी जाती है। फीचर्स और सेफ्टी फीचर्स की बात करें तो Tata Altroz कई प्रीमियम सुविधाओं के साथ आती है, जिनमें शामिल हैं: 10.25 इंच टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम Apple CarPlay और Android Auto सपोर्ट 7 इंच डिजिटल इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर वॉइस कमांड सनरूफ वायरलेस मोबाइल चार्जर 360 डिग्री कैमरा सेफ्टी के मामले में भी यह कार काफी मजबूत मानी जाती है। Global NCAP क्रैश टेस्ट में इसे 5-स्टार सेफ्टी रेटिंग मिल चुकी है, जो इसे अपने सेगमेंट की सबसे सुरक्षित कारों में शामिल करती है।
भारत की सबसे ज्यादा बिकने वाली एसयूवी में शामिल Hyundai Creta अब बड़े बदलावों के दौर से गुजर रही है। Hyundai Motor India ने हाल ही में क्रेटा के कई वेरिएंट्स को बंद कर दिया है, वहीं दूसरी ओर डीलरशिप्स इस एसयूवी पर अब तक के सबसे बड़े डिस्काउंट ऑफर कर रही हैं। ऑटो इंडस्ट्री में इसे लेकर चर्चा तेज हो गई है कि कंपनी जल्द ही क्रेटा का नया फेसलिफ्ट मॉडल लॉन्च करने की तैयारी में है। ऑटो एक्सपर्ट्स का मानना है कि किसी भी मॉडल के फेसलिफ्ट लॉन्च से पहले कंपनियां अक्सर पुराने स्टॉक को क्लियर करने और प्रोडक्शन लाइन को आसान बनाने के लिए इसी तरह की रणनीति अपनाती हैं। ऐसे में क्रेटा को लेकर बाजार में हलचल बढ़ना स्वाभाविक माना जा रहा है। क्रेटा की वेरिएंट लाइन-अप में बड़ा बदलाव हुंडई ने अब क्रेटा की रेंज को सीमित करते हुए केवल सात वेरिएंट्स में उपलब्ध रखा है– E EX EX(O) S(O) SX SX Premium King कई पुराने वेरिएंट्स हटाने के पीछे कंपनी का उद्देश्य प्रोडक्शन को अधिक व्यवस्थित बनाना माना जा रहा है। यह कदम संकेत देता है कि आने वाले समय में अपडेटेड फेसलिफ्ट वर्जन बाजार में उतारा जा सकता है। फीचर्स पर भी पड़ा असर इस बदलाव का सबसे बड़ा असर फीचर लिस्ट पर देखने को मिला है। पहले कुछ मिड-लेवल वेरिएंट्स में मिलने वाला ADAS (Advanced Driver Assistance Systems) अब केवल टॉप-एंड King वेरिएंट तक सीमित हो गया है। यानी अब एडवांस्ड सेफ्टी फीचर्स खरीदने के लिए ग्राहकों को ज्यादा महंगा वेरिएंट चुनना पड़ेगा। इससे उन ग्राहकों पर असर पड़ सकता है जो कम बजट में प्रीमियम सेफ्टी टेक्नोलॉजी चाहते थे। डीलर्स दे रहे भारी डिस्काउंट क्रेटा पर इस समय शानदार ऑफर्स दिए जा रहे हैं, जिसने ग्राहकों का ध्यान खींच लिया है। Hyundai Creta Electric पर ₹1.2 लाख तक का फायदा पेट्रोल और डीजल ICE वर्जन पर ₹70,000 तक की छूट एक्सचेंज बोनस और कॉर्पोरेट ऑफर्स भी कई जगह उपलब्ध हालांकि डिस्काउंट की राशि शहर, डीलर और वेरिएंट के हिसाब से अलग-अलग हो सकती है। ऑटो मार्केट के जानकार इसे “स्टॉक क्लियरिंग एक्सरसाइज” मान रहे हैं, जो अक्सर फेसलिफ्ट मॉडल लॉन्च से पहले देखने को मिलती है। क्या जल्द आएगी नई फेसलिफ्टेड क्रेटा? हालांकि कंपनी ने अभी तक आधिकारिक तौर पर फेसलिफ्ट लॉन्च की पुष्टि नहीं की है, लेकिन मौजूदा घटनाक्रम कई संकेत दे रहे हैं। माना जा रहा है कि नए मॉडल में– अपडेटेड फ्रंट ग्रिल और नई LED लाइटिंग ज्यादा प्रीमियम इंटीरियर नए कनेक्टेड फीचर्स बेहतर ADAS टेक्नोलॉजी अपडेटेड इंफोटेनमेंट सिस्टम जैसे बदलाव देखने को मिल सकते हैं। ग्राहकों के लिए क्या है बेहतर विकल्प? इस समय खरीदारों के सामने दो बड़े विकल्प मौजूद हैं– अभी खरीदें अगर आप बेहतर डील और ज्यादा डिस्काउंट चाहते हैं, तो मौजूदा मॉडल खरीदना फायदे का सौदा हो सकता है। भारी छूट के चलते क्रेटा अभी ज्यादा वैल्यू फॉर मनी साबित हो सकती है। अगर आप लेटेस्ट डिजाइन और नए फीचर्स चाहते हैं, तो फेसलिफ्ट मॉडल का इंतजार करना बेहतर हो सकता है। हालांकि नए मॉडल की कीमत मौजूदा वर्जन से ज्यादा होने की संभावना है। फिलहाल बाजार की स्थिति यही संकेत दे रही है कि आने वाले महीनों में क्रेटा से जुड़ी बड़ी घोषणा देखने को मिल सकती है।