नई दिल्ली: देश में बढ़ती गर्मी के बीच Tata Motors ने अपने ग्राहकों के लिए एक बड़ा राहत भरा कदम उठाया है। कंपनी ने देशभर में अपना विशेष Summer Check-Up Camp शुरू कर दिया है, जिसके तहत कार मालिकों को न केवल फ्री में गाड़ी की जांच की सुविधा मिल रही है, बल्कि कई आकर्षक ऑफर्स और डिस्काउंट भी दिए जा रहे हैं। यह कैंप 28 अप्रैल 2026 तक सभी अधिकृत वर्कशॉप्स पर आयोजित किया जा रहा है।
इस कैंप का सबसे बड़ा आकर्षण है 30-पॉइंट फ्री चेक-अप, जिसमें गाड़ी के हर जरूरी हिस्से की बारीकी से जांच की जाती है। इसमें शामिल हैं:
इस तरह की जांच से संभावित खराबियों का पहले ही पता चल जाता है, जिससे लंबी यात्रा या तेज गर्मी में गाड़ी के खराब होने का जोखिम कम हो जाता है।
यह सर्विस कैंप Tata Motors की सभी श्रेणी की गाड़ियों पर लागू है—चाहे वे पेट्रोल-डीजल (ICE), CNG या इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) हों। गर्मी के मौसम में कूलिंग सिस्टम और इंजन पर अधिक दबाव पड़ता है, ऐसे में यह चेक-अप गाड़ी की सुरक्षा और बेहतर प्रदर्शन के लिए बेहद अहम साबित होता है।
कंपनी इस कैंप के दौरान कई फायदे भी दे रही है:
ये ऑफर्स खास तौर पर उन पार्ट्स को समय पर बदलने के लिए प्रेरित करते हैं, जो गर्मी में जल्दी खराब हो सकते हैं—जैसे बेल्ट, फिल्टर और होज।
चूंकि यह कैंप सीमित समय के लिए है, ग्राहकों को सलाह दी जा रही है कि वे जल्द से जल्द अपनी सर्विस स्लॉट बुक करें। अंतिम दिनों में भीड़ बढ़ने की संभावना है, जिससे देरी हो सकती है।
सोशल मीडिया पर कई ग्राहकों ने इस कैंप को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। कई यूजर्स का कहना है कि चेक-अप के बाद उनकी कार की AC कूलिंग और ओवरऑल परफॉर्मेंस में सुधार देखने को मिला है। यह कैंप Tata Nexon, Tata Punch, Tata Tiago, Tata Altroz, Tata Harrier और Tata Safari जैसे लोकप्रिय मॉडलों पर भी लागू है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
नई दिल्ली: भारत की प्रतिष्ठित दोपहिया निर्माता Royal Enfield ने इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए अपनी पहली इलेक्ट्रिक बाइक Flying Flea C6 की झलक पेश कर दी है। यह लॉन्च कंपनी के लिए एक ऐतिहासिक मोड़ माना जा रहा है, क्योंकि दशकों से पेट्रोल इंजन वाली बाइक्स के लिए मशहूर ब्रांड अब EV सेगमेंट में प्रवेश कर चुका है। 1 रुपये में 3 Km: बेहद किफायती रनिंग कॉस्ट Flying Flea C6 की सबसे बड़ी खासियत इसकी कम रनिंग कॉस्ट है। कंपनी के मुताबिक यह बाइक लगभग 1 रुपये में 3 किलोमीटर चल सकती है। IDC के अनुसार इसकी रेंज 154 किलोमीटर बताई जा रही है, जिससे लंबी दूरी की यात्रा भी संभव होगी। बैटरी और चार्जिंग: फास्ट और किफायती इस इलेक्ट्रिक बाइक में 3.91 kWh की बैटरी दी गई है, जिसे लगभग 2 घंटे 16 मिनट में फुल चार्ज किया जा सकता है। चार्जिंग के दौरान करीब 4.6 kWh बिजली खर्च होती है। अगर बिजली की कीमत 10 रुपये प्रति यूनिट मानी जाए, तो एक फुल चार्ज में 50 रुपये से भी कम खर्च आएगा–जो इसे बेहद किफायती बनाता है। कीमत और BaaS मॉडल का विकल्प Royal Enfield ने इस बाइक की एक्स-शोरूम कीमत ₹2.79 लाख तय की है। साथ ही कंपनी ने Battery-as-a-Service (BaaS) मॉडल भी पेश किया है, जिसके तहत ग्राहक इसे करीब ₹1.99 लाख में खरीद सकते हैं। इस मॉडल में बैटरी उपयोग और चार्जिंग विकल्पों को कस्टमाइज करने की सुविधा भी दी गई है। क्लासिक डिजाइन, मॉडर्न टेक्नोलॉजी Flying Flea C6 का डिजाइन कंपनी की क्लासिक विरासत को दर्शाता है, लेकिन इसमें आधुनिक तकनीक का भी बेहतरीन समावेश किया गया है। यह बाइक उन ग्राहकों को ध्यान में रखकर बनाई गई है, जो स्टाइल के साथ-साथ किफायत और पर्यावरण के प्रति जागरूक हैं। EV सेगमेंट में बड़ा दांव Royal Enfield की यह पहल भारतीय EV बाजार में प्रतिस्पर्धा को और तेज कर सकती है। Flying Flea C6 न सिर्फ पारंपरिक बाइक्स को चुनौती देगी, बल्कि इलेक्ट्रिक सेगमेंट में भी नई दिशा तय करने की क्षमता रखती है।
टेक जगत में एक बार फिर Xiaomi के आगामी फ्लैगशिप स्मार्टफोन को लेकर हलचल तेज हो गई है। हालिया लीक के मुताबिक, कंपनी अपने नए प्रीमियम डिवाइस Xiaomi 18 Pro पर काम कर रही है, जिसमें एक खास डेडिकेटेड AI बटन और कुछ सूक्ष्म डिजाइन बदलाव देखने को मिल सकते हैं। डिजाइन में क्या नया? ऑनलाइन सामने आए कथित रेंडर्स से संकेत मिलता है कि फोन के साइड में एक नया फिजिकल बटन दिया जा सकता है, जिस पर AI ब्रांडिंग होगी। यह बटन यूजर्स को एक टैप में कई स्मार्ट फीचर्स एक्सेस करने की सुविधा देगा। बताया जा रहा है कि यह बटन: स्मार्ट होम डिवाइसेज को कंट्रोल करने में मदद करेगा कनेक्टेड कार फीचर्स को मैनेज करेगा और AI आधारित टूल्स जैसे “Xiaomi Miclaw” तक तुरंत पहुंच देगा हालांकि कंपनी ने अभी तक इन फीचर्स की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। कैमरा और सेकेंडरी डिस्प्ले रेंडर में डिवाइस का कैमरा मॉड्यूल भी दिखा है, जिसमें: दो बड़े कैमरा लेंस और पीछे की तरफ सेकेंडरी डिस्प्ले होने की संभावना यह डिजाइन पिछले मॉडल Xiaomi 17 Pro की तरह ही नजर आता है, जिसमें बैक पैनल पर एक छोटा डिस्प्ले दिया गया था। दमदार बैटरी और चार्जिंग रिपोर्ट्स के अनुसार, Xiaomi 18 Pro में: 7,000mAh या उससे बड़ी बैटरी 100W फास्ट चार्जिंग सपोर्ट जैसी हाई-एंड सुविधाएं मिल सकती हैं, जो इसे पावर यूजर्स के लिए बेहद आकर्षक बना सकती हैं। कैमरा स्पेसिफिकेशन (संभावित) लीक्स के मुताबिक फोन में: दो 200MP कैमरे टेलीफोटो और मैक्रो कैपेबिलिटी जैसे एडवांस्ड फीचर्स शामिल हो सकते हैं, जो फोटोग्राफी एक्सपीरियंस को नई ऊंचाई दे सकते हैं। पुराने मॉडल से तुलना पिछला मॉडल Xiaomi 17 Pro सितंबर 2025 में लॉन्च हुआ था, जिसकी शुरुआती कीमत लगभग ₹75,000 थी। इसमें: Snapdragon 8 Elite Gen 5 चिपसेट 6,300mAh बैटरी Leica ट्यून कैमरा सिस्टम जैसे फीचर्स दिए गए थे।
इलेक्ट्रिक व्हीकल मार्केट में अपनी पकड़ मजबूत करते हुए Ola Electric ने नई Ola S1 X+ 5.2 kWh को भारत में लॉन्च कर दिया है। यह स्कूटर दमदार परफॉर्मेंस, लंबी रेंज और एडवांस टेक्नोलॉजी के साथ मिड-प्राइस सेगमेंट में एक मजबूत दावेदार बनकर उभरी है। कंपनी ने इसकी शुरुआती कीमत ₹1,29,999 (एक्स-शोरूम) रखी है, जो 15 अप्रैल 2026 के बाद बढ़ सकती है। 4680 Bharat Cell: Ola की बड़ी टेक्नोलॉजी पहल इस स्कूटर की सबसे खास बात है इसका इन-हाउस विकसित 4680 Bharat Cell बैटरी सिस्टम। Ola Electric का दावा है कि यह तकनीक: ज्यादा लंबी रेंज देती है बैटरी एफिशिएंसी बढ़ाती है EV को आम लोगों के लिए ज्यादा सुलभ बनाती है यह कदम भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को तेजी से बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। परफॉर्मेंस में नहीं कोई समझौता Ola S1 X+ 5.2 kWh को पावर देने के लिए 11 kW का मिड-ड्राइव मोटर दिया गया है, जो शानदार स्पीड और स्मूद राइडिंग अनुभव देता है। मुख्य फीचर्स: टॉप स्पीड: 125 किमी/घंटा रेंज: 320 किमी (सिंगल चार्ज) ब्रेकिंग सिस्टम: Brake-by-Wire + फ्रंट डिस्क ब्रेक इन स्पेसिफिकेशंस के साथ यह स्कूटर अपने सेगमेंट में सबसे पावरफुल विकल्पों में शामिल हो जाती है। Ola के पोर्टफोलियो को मिला नया बूस्ट नई S1 X+ 5.2 kWh के साथ Ola Electric ने अपने प्रोडक्ट लाइनअप को और मजबूत कर दिया है। कंपनी पहले से: S1 Pro+ और S1 Pro जैसे प्रीमियम मॉडल S1 X सीरीज के मास मार्केट स्कूटर्स और Roadster बाइक रेंज ऑफर कर रही है। इस नए मॉडल के आने से मिड-रेंज सेगमेंट में प्रतिस्पर्धा और तेज होने की उम्मीद है। EV मार्केट में बढ़ेगी प्रतिस्पर्धा भारत में इलेक्ट्रिक स्कूटर्स की मांग तेजी से बढ़ रही है और Ola की यह नई पेशकश ग्राहकों को ज्यादा विकल्प देगी। लंबी रेंज, हाई स्पीड और एडवांस फीचर्स के साथ यह स्कूटर खासतौर पर उन यूजर्स को आकर्षित कर सकती है, जो पेट्रोल वाहनों से EV की ओर शिफ्ट करना चाहते हैं।