हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि का विशेष महत्व माना जाता है। जब अमावस्या सोमवार के दिन पड़ती है, तो उसे सोमवती अमावस्या कहा जाता है। इस वर्ष सोमवती अमावस्या का महत्व और भी बढ़ गया है, क्योंकि इसका संयोग अधिक मास के साथ बन रहा है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, ऐसा दुर्लभ योग करीब 30 वर्षों बाद बना है।
धार्मिक मान्यता है कि इस दिन किए गए स्नान, दान और पूजा-पाठ से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है और जीवन में सुख-समृद्धि तथा सकारात्मकता का संचार होता है। आइए जानते हैं सोमवती अमावस्या के दिन किए जाने वाले कुछ महत्वपूर्ण उपाय।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सोमवती अमावस्या पर पीपल के वृक्ष की पूजा करना शुभ माना जाता है।
मान्यता है कि इससे पितरों की कृपा प्राप्त होती है और घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है।
अधिक मास भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है। ऐसे में इस दिन तुलसी पूजा का विशेष महत्व बताया गया है।
मान्यता है कि इससे नौकरी और व्यापार में उन्नति के मार्ग खुलते हैं।
सोमवार भगवान शिव का प्रिय दिन माना जाता है। इस दिन शिवलिंग पर—
से अभिषेक करें और बेलपत्र अर्पित करें।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इससे भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है और चंद्रमा की स्थिति मजबूत होने का आशीर्वाद मिलता है।
सोमवती अमावस्या पर पवित्र नदी में स्नान और दान को अत्यंत पुण्यकारी माना गया है।
अपने सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंद लोगों को—
का दान किया जा सकता है।
ऐसी मान्यता है कि इससे आर्थिक स्थिति मजबूत होती है और घर में अन्न की कमी नहीं रहती।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पितरों को दूध और चावल से बनी वस्तुएं प्रिय होती हैं।
कहा जाता है कि इससे पितृ दोष शांत होता है और पुण्य फल की प्राप्ति होती है।
ये सभी उपाय धार्मिक और पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित हैं। अलग-अलग क्षेत्रों और परंपराओं में इनके पालन के तरीके भिन्न हो सकते हैं।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
नई दिल्ली: वैदिक ज्योतिष और अंक ज्योतिष में व्यक्ति के नाम के पहले अक्षर का विशेष महत्व माना जाता है। मान्यता है कि नाम का पहला अक्षर व्यक्ति के स्वभाव, सोच, करियर और रिश्तों के बारे में कई संकेत देता है। अंक ज्योतिष विशेषज्ञों के अनुसार, जिन लोगों का नाम अंग्रेजी के 'G' अक्षर से शुरू होता है, वे मेहनती, आत्मनिर्भर और आकर्षक व्यक्तित्व वाले माने जाते हैं। हालांकि, यह सामान्य ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित जानकारी है और हर व्यक्ति का स्वभाव अलग हो सकता है। G नाम वालों का स्वभाव दिल के साफ और स्पष्टवादी 'G' अक्षर से नाम शुरू होने वाले लोग दिल के साफ माने जाते हैं। इन्हें घुमा-फिराकर बात करना पसंद नहीं होता और ये अपनी बात सीधे और स्पष्ट तरीके से रखना पसंद करते हैं। आकर्षक बोलचाल इनकी आवाज और बात करने का अंदाज लोगों को प्रभावित करता है। यही वजह है कि लोग इनके व्यक्तित्व की ओर जल्दी आकर्षित हो जाते हैं। शांत और थोड़े शर्मीले ये लोग आमतौर पर शांत स्वभाव के होते हैं। इंट्रोवर्ट होने की वजह से इनका दोस्ती का दायरा सीमित रहता है और ये चुनिंदा लोगों के साथ ही सहज महसूस करते हैं। आत्मनिर्भर व्यक्तित्व 'G' नाम वाले लोग दूसरों पर निर्भर रहने के बजाय अपने दम पर आगे बढ़ना पसंद करते हैं। ये अपने फैसले खुद लेना और अपना रास्ता स्वयं बनाना पसंद करते हैं। गुस्से पर नियंत्रण की जरूरत वैसे तो ये लोग शांत रहते हैं, लेकिन जब इन्हें गुस्सा आता है तो वह काफी तेज हो सकता है। ऐसे में इन्हें अपने भावनात्मक संतुलन पर विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है। करियर में कैसे होते हैं G नाम वाले? मेहनत में रखते हैं विश्वास ये लोग सफलता पाने के लिए शॉर्टकट का सहारा नहीं लेते, बल्कि मेहनत और लगन से अपने लक्ष्य तक पहुंचने की कोशिश करते हैं। प्लानिंग के साथ करते हैं काम किसी भी काम को शुरू करने से पहले ये पूरी रणनीति तैयार करते हैं, जिससे सफलता की संभावना बढ़ जाती है। धीरे-धीरे लेकिन मजबूत सफलता करियर की शुरुआत भले ही सामान्य रहे, लेकिन समय के साथ ये लोग अच्छा नाम, सम्मान और आर्थिक स्थिरता हासिल कर सकते हैं। इन क्षेत्रों में मिल सकती है सफलता ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, शिक्षा, मीडिया, क्रिएटिव फील्ड, बिजनेस और प्रशासनिक क्षेत्र इनके लिए अनुकूल माने जाते हैं। कैसी होती है G नाम वालों की लव लाइफ? रिश्तों में वफादार ये लोग अपने रिश्तों को गंभीरता से लेते हैं और अपने पार्टनर के प्रति पूरी ईमानदारी और समर्पण दिखाते हैं। प्यार जाहिर करने में लगाते हैं समय शर्मीले स्वभाव के कारण ये अपने दिल की बात जल्दी नहीं कह पाते। अपनी भावनाओं को व्यक्त करने में इन्हें थोड़ा समय लग सकता है। हर परिस्थिति में निभाते हैं साथ ये अपने साथी की खुशियों और जरूरतों का ध्यान रखते हैं और कठिन समय में भी उनके साथ खड़े रहते हैं। कभी-कभी हो सकते हैं ज्यादा पजेसिव अपने रिश्ते को लेकर ये लोग काफी संवेदनशील होते हैं। कई बार अधिक पजेसिव होने के कारण रिश्तों में छोटी-मोटी नोकझोंक की स्थिति भी बन सकती है।
15 से 21 जून 2026 का सप्ताह करियर और आर्थिक दृष्टि से कई राशियों के लिए सकारात्मक संकेत लेकर आया है। इस दौरान संवाद कौशल, नई योजनाएं और वित्तीय अनुशासन सफलता की कुंजी साबित हो सकते हैं। विशेष रूप से मेष, मिथुन और मकर राशि के जातकों के लिए यह सप्ताह प्रगति और लाभ के अच्छे अवसर लेकर आ रहा है। आइए जानते हैं सभी 12 राशियों का साप्ताहिक आर्थिक और करियर राशिफल। मेष राशि यह सप्ताह आपके लिए काफी शुभ रहने वाला है। नई मीटिंग्स, इंटरव्यू और प्रोफेशनल संपर्कों से लाभ मिल सकता है। कार्यस्थल पर आपके काम की सराहना होगी। अतिरिक्त आय के भी योग बन सकते हैं। हालांकि जोखिम वाले निवेश से दूरी बनाए रखना बेहतर रहेगा। लकी टिप: शॉर्टकट से पैसा कमाने की कोशिश न करें। वृषभ राशि काम की गति थोड़ी धीमी रह सकती है, लेकिन परिणाम आपके पक्ष में रहेंगे। नौकरी में नई जिम्मेदारियां या वेतन वृद्धि को लेकर चर्चा शुरू हो सकती है। खर्चों पर नियंत्रण रखने की जरूरत होगी। लकी टिप: निवेश से पहले पूरी जानकारी जरूर लें। मिथुन राशि सूर्य का आपकी राशि में होना करियर के लिए बेहद शुभ संकेत दे रहा है। प्रेजेंटेशन, इंटरव्यू और नेटवर्किंग में सफलता मिल सकती है। आय बढ़ने की संभावना भी मजबूत है। लकी टिप: नए संपर्क भविष्य में बड़ा लाभ दे सकते हैं। कर्क राशि यह सप्ताह योजना और तैयारी का है। धीरे-धीरे आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और किसी संपत्ति या निवेश से जुड़ी अच्छी खबर मिल सकती है। लकी टिप: जल्दबाजी के बजाय धैर्य से काम लें। सिंह राशि टीमवर्क और सहयोग से सफलता मिलेगी। आपकी नेतृत्व क्षमता लोगों को प्रभावित करेगी। बिजनेस पार्टनरशिप से आर्थिक लाभ के योग बन रहे हैं। लकी टिप: बड़े आर्थिक फैसले सोच-समझकर लें। कन्या राशि नई चीजें सीखने और अनुभवी लोगों से सलाह लेने का समय है। फालतू खर्चों पर नियंत्रण रखने से आर्थिक स्थिति बेहतर होगी। लकी टिप: बजट की समीक्षा जरूर करें। तुला राशि करियर में नए अवसर और प्रशिक्षण के योग बन रहे हैं। रुका हुआ पैसा वापस मिल सकता है और आय में सुधार के संकेत हैं। लकी टिप: टीमवर्क से अधिक सफलता मिलेगी। वृश्चिक राशि रणनीति बनाकर काम करने से लाभ मिलेगा। वरिष्ठों की सलाह आपके लिए फायदेमंद साबित होगी। करियर में पहचान बढ़ेगी। लकी टिप: लोन और निवेश संबंधी मामलों में सावधानी रखें। धनु राशि पार्टनरशिप और क्लाइंट्स के साथ बेहतर तालमेल से सफलता मिलेगी। यात्रा या सलाहकार कार्यों से अतिरिक्त आय हो सकती है। लकी टिप: सप्ताहांत में खर्चों पर विशेष ध्यान दें। मकर राशि यह सप्ताह मकर राशि वालों के लिए बेहद खास साबित हो सकता है। कार्यस्थल पर आपकी मेहनत की सराहना होगी और नई डील या बिजनेस अवसर सामने आ सकते हैं। लकी टिप: भविष्य की बचत और निवेश की योजना बनाएं। कुंभ राशि आपकी रचनात्मक सोच आपको दूसरों से अलग पहचान दिलाएगी। किसी साइड प्रोजेक्ट या प्रतिभा से अतिरिक्त आय होने के संकेत हैं। लकी टिप: बैंकिंग और निवेश से जुड़े काम समय पर निपटाएं। मीन राशि घर और काम के बीच संतुलन बनाना जरूरी होगा। कुछ अतिरिक्त खर्च हो सकते हैं, लेकिन अतिरिक्त आय के स्रोत भी खुल सकते हैं। लकी टिप: भावनाओं में आकर आर्थिक निर्णय न लें।
1665 – न्यू एम्स्टर्डम कानूनी तौर पर ब्रिटेन का हिस्सा बना और योर्क के ड्यूक के नाम पर इसका नाम न्यूयॉर्क रखा गया। 1691 – पोप अलेक्जेंडर (आठवें) के जगह इ न्नोसेंट (बारहवें) पोप बने। 1787 – अमेरिका में सीनेटर के लिए 30 वर्ष की न्यूनतम आयु सीमा कानून पारित हुआ। 1817 - जर्मन आविष्कारक कार्ल ड्रैस मैनेंहिम में अपना बांका घोड़ा ("ड्रेसीन" या लॉफमास्काइन), साइकिल का सबसे प्रारंभिक रूप चलाया। 1830 - फ्रांस ने अल्जीरिया के उपनिवेशीकरण की प्रक्रिया शुरु की थी। 1852 - ताइपिंग विद्रोह: ताइपिंग बलों ने हुनान में प्रवेश किया। 1889 – उत्तरी अायरलैंड के आर्माग में ट्रेन दुर्घटना में 88 लोग मरे। 1926 – ब्राजील ने लीग ऑफ नेशन से बाहर आने का फैसला किया। 1937 – सोवियत यूनियन में आठ आर्मी वालों को मारा गया। 1952 – तत्कालीन सोवियत संघ ने जापान के साथ शांति संधि को अवैध घोषित किया। 1964 – दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद के खिलाफ आंदोलन करने वाले नेता नेल्सन मंडेला को उम्र कैद की सजा। 1968 - यू.एस. में रोज़मरी की बेबी फिल्म का प्रकाशन किया गया। 1975 – इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को चुनावी भ्रष्टाचार में दोषी करार दिया। 1987 - ब्रिटिश चुनावों में मार्गरेट थैचर की तीसरी बार ऐतिहासिक विजय। 1990 - सोवियत संघ के नेताओं ने रूस राज्य की संप्रभुता की घोषणा पर हस्ताक्षर किए। 1991 - रूस में रूसी संघ की संप्रभुता की घोषणा को स्वीकार किया गया। 1991 – बोरिस येल्तसिन तत्कालीन रूसी गणराज्य के राष्ट्रपति बनें। 1994 – दुनिया के सबसे बड़े टिवनजेट विमान बोइंग 777 ने पहली उड़ान भरी। 1998 - भारत और पाकिस्तान को परमाणु परीक्षण के कारण जी-8 के देशों द्वारा ऋण नहीं देने का निर्णय। 1999 - पाकिस्तानी रक्षा बजट में लगभग 11 प्रतिशत की वृद्धि, ईस्ट तिमोर के लिए 'मिशन' हेतु संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्वीकृति। 2001 - सीमा मुद्दे पर भारत-बांग्लादेश वार्ता शुरू। 2002 – विश्व बालश्रम निषेध दिवस की शुरुआत। 2002 - स्वीडन के साथ मैच ड्रा होने के साथ ही अर्जेन्टीना विश्व कप फ़ुटबाल से बाहर। 2004 - सवन्ना (जार्जिया) में समूह-8 सम्मेलन सम्पन्न। 2004 - अमेरिकी राष्ट्रपति बुश ने उत्तरी कोरिया के सर्वोच्च नेता किम जांग द्वितीय के साथ सीधी बातचीत का प्रस्ताव ठुकराया। 2007 - कनाडा में होने वाले जीव विज्ञान ओलम्पियाड में चार भारतीयों का चयन। 2007 - आस्ट्रेलियाई स्कूलों में सिक्ख छात्रों को धार्मिक प्रतीक कृपाण रखने की इजाजत मिली। 2008 - दक्षिणी एशियाई फुटबाल महासंघ वर्ष 2009 हेतु छठी सैफ़ फुटबाल चैम्पियनशिप की मेज़बानी सौंपी। 2008 - प्रख्यात फ़िल्म निदेशक मृणाल सेन को 10वें ओसियाना सिनेफ़ैन फ़िल्म समारोह में पुरस्कृत किया गया। 2016- साइना नेहवाल ने दूसरी बार ऑस्ट्रेलियाई ओपन ख़िताब जीता। 2019 - गुआदलाहारा अंतर्राष्ट्रीय पुस्तक मेले में भारत को गेस्ट ऑफ़ ऑनर चुना गया। 2019 - भारत ने मानवरहित स्क्रैमजेट का किया सफल परीक्षण। 2020 - काशी हिंदू विश्वविद्यालय के पुरातत्व विभाग की टीम ने माटीगांव शिव मंदिर परिसर में खोदाई कराई , खोदाई में मिली गुप्तकालीन भवन की फर्श, दीवार व खंडित मूर्तियां। 2021 - प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने जी-7 शिखर सम्मेलन के पहले आउटरीच सत्र में भाग लिया। 2022 - एनसीपीसीआर ने 12 से 20 जून के दौरान बाल श्रम उन्मूलन सप्ताह शुरु किया। 2022 - 19वीं शांगरी-ला वार्ता दो साल बाद सिंगापुर में सम्पन्न हुई। 2022 - ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ द्वितीय ने थाईलैंड के राजा को पछाड़कर फ्रांस के लुई-चौदहवें के बाद इतिहास में दुनिया के दूसरे सबसे लंबे समय (70 वर्ष) तक राजगद्दी संभालने का रिकॉर्ड बनाया। 2023 - प्रधानमंत्री मोदी ने जी20 विकास मंत्रियों की बैठक को संबोधित किया। 2023 - भारत-यूएई व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते की संयुक्त समिति की पहली बैठक का सफलतापूर्वक समापन हुआ। 2023 - डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में लाला विस्थापन शिविर में मिलिशिया समूह 'कोडेको' द्वारा 23 बच्चों सहित कम से कम 46 लोगों की हत्या कर दी गई। 2023 - नाइजीरिया के उत्तर मध्य क्वारा राज्य में नाइजर नदी में शादी के मेहमानों को ले जा रही नाव पलटने से 106 लोगों की मौत हो गई और 144 लोगों को बचा लिया गया। 2024 - कुवैत में दक्षिणी इलाके की एक इमारत में लगी आग में 42 की मौत हुई (10 से ज्यादा भारतीय बताए जा रहे) व 50 अन्य को अस्पताल में भर्ती कराया गया। 2024 - चंद्रबाबू नायडू आंध्र प्रदेश के CM बने व पवन कल्याण डिप्टी CM बने। 52 साल के मोहन चरण माझी ने ओडिशा के 15वें मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली व दो डिप्टी CM कनक वर्धन सिंहदेव (67) और प्रभाती परिदा (57) ने भी शपथ ली। 12 जून को जन्मे व्यक्ति 1915 - सी के नागराज राव एक भारतीय लेखक, नाटककार, मंच कलाकार, निर्देशक, पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता थे। 1929 – ऐनी फ्रैंक का जन्म। जिसकी डायरी दुनिया में सबसे ज्यादा बिकने वाली किताबों में से एक है। 1932 - ई. श्रीधरन - भारत के प्रसिद्ध सिविल इंजीनियर हैं। कोंकण रेलवे और दिल्ली में मेट्रो रेल का श्रेय इन्हीं को जाता है। 1932 - पद्मिनि - हिन्दी, तमिल और मलयालम चलचित्र अभिनेत्री (मेरा नाम जोकर) (जिस देश में गंगा बहती है)। 1935 - श्यामा - भारतीय सिनेमा की प्रसिद्ध अभिनेत्रियों में से एक थीं। 1947 - बंडारू दत्तात्रेय - भाजपा के वरिष्ठ राजनीतिज्ञों में से एक। 1949 - सुरुज बाई खांडे - छत्तीसगढ़ की प्रसिद्ध भरतरी गायिका थीं। 1957 - गीतांजलि श्री - हिन्दी की जानी मानी कथाकार और उपन्यासकार। 1957 - नरेन्द्र सिंह तोमर - भारतीय जनता पार्टी के प्रसिद्ध राजनीतिज्ञ। 1957 – पाकिस्तान में मशहूर बल्लेबाज जावेद मियांदाद का जन्म हुआ। 12 जून को हुए निधन 1972 - श्री डी.जी तेंदुलकर, महात्मा गाँधी की जीवनी के लेखक। 1976 - गोपीनाथ कविराज, संस्कृत के विद्वान् और महान् दार्शनिक। 1981 - पी बी गजेंद्रगडकर भारत के पूर्व मुख्य सातवें न्यायाधीश थे। 1989 - निलोफर (राजकुमारी) - तुर्की के ओट्टोमन राजसी वंश की आखिरी शहजादी थीं। 1999 - जलागम वेंगल राव - आंध्र प्रदेश के भूतपूर्व मुख्यमंत्री थे। 2000 - पी.एल देशपांडे, मराठी लेखक। 2015 – चंडीगढ़ के प्रसिद्ध 'रॉक गार्डन' के शिल्पकार पद्मश्री नेक चन्द सैनी का निधन। 2017 - सी. नारायण रेड्डी - ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित तेलुगु भाषा के प्रख्यात कवि थे। 2019 - उप्र बार काउंसिल की पहली महिला अध्यक्षा दरवेश यादव की हत्या हुई। 2020 - गुल्ज़ार देह्लवी के नाम से मशहूर पंडित आनंद मोहन ज़ुत्शी, उर्दु साहिती जगत के ऐक प्रमुख शायर थे। 2020 - न्यूजीलैंड के पूर्व क्रिकेटर मैट पूरे (90) का निधन। 2021 - गुजरात आरएसएस के दिग्गज अमृत काडीवाला का कोविड -19 जटिलताओं के बाद निधन हुआ। 2022 - भारत की लंबी दूरी के महान धावक और 2 बार के ओलंपियन हरि चंद (69) का निधन हुआ। 2023 - इटली के पूर्व प्रधानमंत्री सिल्वियो बर्लुस्कोनी (86) का निधन हुआ। 2023 - अमेरिकी मंच , फिल्म और अभिनेता रिचर्ड ट्रीट विलियम्स जूनियर (71) का निधन हुआ। 2023 - कैमरुनियन राजनीतिज्ञ जॉन फ्रू एनडी (81) का निधन हुआ। 2023 - अमेरिकी लेखिका कैरोल हिगिंस क्लार्क (66) का निधन हुआ। 2024 - अमेरिकी बास्केटबॉल खिलाड़ी और कार्यकारी जेरी एलन वेस्ट (86) का निधन हुआ। 12 जून के महत्त्वपूर्ण अवसर एवं उत्सव गुरु श्री हरगोबिंद सिंह जयन्ती (प्राचीनमतानुसार)। हितेश प्रकटोत्सव दिवस। श्री सी. नारायण रेड्डी (ज्ञानपीठ पुरस्कार सम्मानित) स्मृति दिवस। श्री जलागम वेंगल राव स्मृति दिवस। रूस दिवस। विश्व बाल श्रम निषेध दिवस। कृपया ध्यान दें जी यद्यपि इसे तैयार करने में पूरी सावधानी रखने की कोशिश रही है। फिर भी किसी घटना , तिथि या अन्य त्रुटि के लिए IDTV इंद्रधनुष की कोई जिम्मेदारी नहीं है।