देश की सबसे प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा JEE Main 2026 के नतीजों में इस बार भी परिणामों में बिहार ने अपनी प्रतिभा का दमदार प्रदर्शन किया है। National Testing Agency (NTA) द्वारा जारी सेशन 2 के रिजल्ट में कुल 26 छात्रों ने 100 परसेंटाइल हासिल किया, जिनमें बिहार के Shubham Kumar का नाम खास तौर पर सुर्खियों में है।
शुभम ने न सिर्फ सेशन 2 में, बल्कि सेशन 1 में भी 100 परसेंटाइल हासिल कर एक अनोखा रिकॉर्ड बना दिया है। वे दोनों सेशन में परफेक्ट स्कोर पाने वाले बिहार के इकलौते छात्र हैं।
Shubham Kumar बिहार के गया जिले के नादरागंज इलाके के निवासी हैं। उनके पिता शिवकुमार एक हार्डवेयर दुकान चलाते हैं, जबकि उनकी मां कंचन देवी गृहिणी हैं।
साधारण पृष्ठभूमि से आने के बावजूद शुभम ने अपनी मेहनत और लगन से यह मुकाम हासिल किया है।
उनकी बड़ी बहन प्रिय कुमारी IIT Patna से बीटेक कर रही हैं, जिससे घर में पहले से ही पढ़ाई का माहौल रहा।
शुभम का अगला लक्ष्य IIT Bombay से कंप्यूटर साइंस में बीटेक करना है।
IIT बॉम्बे का यह कोर्स हर साल टॉप रैंकर्स की पहली पसंद होता है, जहां से बेहतरीन प्लेसमेंट और ग्लोबल अवसर मिलते हैं।
शुभम ने 10वीं तक बिना किसी ट्यूशन के सिर्फ सेल्फ स्टडी के दम पर पढ़ाई की।
उन्होंने नजरथ अकैडमी से 10वीं और ब्रिटिश इंग्लिश स्कूल, गया से 12वीं पास की। इसके बाद बेहतर तैयारी के लिए वे कोटा गए, जहां उन्होंने जेईई की तैयारी को और धार दी।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
विदेश में उच्च शिक्षा हासिल करने का सपना देखने वाले भारतीय छात्रों के लिए बड़ी खुशखबरी है। यूरोप का खूबसूरत देश Romania अब भारतीय छात्रों को अपने यहां पढ़ने और रिसर्च करने का शानदार मौका दे रहा है। अकादमिक वर्ष 2026-27 के लिए रोमानिया सरकार ने विशेष स्कॉलरशिप की घोषणा की है, जिसके तहत छात्रों को पढ़ाई के साथ-साथ रहने और खाने का खर्च भी दिया जाएगा। यह पहल भारत और रोमानिया के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रम का हिस्सा है। Ministry of Education India के माध्यम से छात्रों का नामांकन किया जाएगा, जबकि अंतिम चयन रोमानिया की सरकार करेगी। कितनी अवधि की होगी स्कॉलरशिप? रोमानिया सरकार कुल 20 महीने की स्कॉलरशिप ऑफर कर रही है। हर छात्र को 3 महीने से 10 महीने तक की अवधि के लिए मौका मिलेगा समर कोर्स (रोमानियाई भाषा, संस्कृति और सभ्यता) के लिए अलग से 2 स्कॉलरशिप भी उपलब्ध हैं ध्यान देने वाली बात यह है कि यह स्कॉलरशिप फुल डिग्री (बैचलर्स/मास्टर्स/पीएचडी) के लिए नहीं, बल्कि एक्सचेंज प्रोग्राम और रिसर्च ट्रेनिंग के लिए है। स्कॉलरशिप में क्या-क्या फायदे मिलेंगे? इस स्कॉलरशिप के तहत छात्रों को कई बड़े लाभ दिए जाएंगे: यूनिवर्सिटी एडमिशन और ट्यूशन फीस पूरी तरह माफ हॉस्टल में रहने की सुविधा, जिसका खर्च सरकार उठाएगी हर महीने 925 लेई (लगभग 20,000 रुपये) का भत्ता बीमारी की स्थिति में मुफ्त मेडिकल सुविधा किन शर्तों को पूरा करना होगा? छात्र के पास रोमानियाई यूनिवर्सिटी का ऑफर लेटर होना जरूरी है बैचलर्स या मास्टर्स एक्सचेंज प्रोग्राम के लिए रोमानियाई भाषा का सर्टिफिकेट अनिवार्य है यह स्कॉलरशिप केवल भारतीय छात्रों के लिए उपलब्ध है कैसे करें आवेदन? इच्छुक छात्र SAKSHAT Portal पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और अंतिम तिथि 15 मई 2026 निर्धारित की गई है।
आज के प्रतिस्पर्धी दौर में हर छात्र का लक्ष्य होता है कि पढ़ाई पूरी होते ही उसे एक सुरक्षित करियर और आकर्षक सैलरी मिले। ऐसे में बीटेक इनफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (BTech IT) एक ऐसा कोर्स बनकर उभरा है, जो युवाओं के लिए हाई पैकेज का मजबूत रास्ता तैयार कर रहा है। डिजिटल क्रांति के इस दौर में आईटी सेक्टर की तेजी से बढ़ती जरूरतों ने इस फील्ड को करियर के लिहाज से बेहद आकर्षक बना दिया है। क्या है BTech IT? BTech IT चार साल का अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम है, जिसमें छात्रों को कंप्यूटर सिस्टम, सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट, डेटा मैनेजमेंट, नेटवर्किंग और नई तकनीकों की गहराई से पढ़ाई कराई जाती है। यह कोर्स छात्रों को इंडस्ट्री-रेडी बनाता है, ताकि वे सीधे प्रोफेशनल दुनिया में कदम रख सकें। क्यों बढ़ रही है IT सेक्टर की मांग? आज लगभग हर क्षेत्र डिजिटल हो चुका है–चाहे बैंकिंग हो, एजुकेशन, हेल्थकेयर या ई-कॉमर्स। कंपनियों को अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म को संभालने और सुरक्षित रखने के लिए स्किल्ड आईटी प्रोफेशनल्स की जरूरत है। इसके अलावा: स्टार्टअप कल्चर का तेजी से विस्तार ऑनलाइन सेवाओं का बढ़ता उपयोग डेटा और साइबर सिक्योरिटी की बढ़ती जरूरत इन सभी कारणों से IT सेक्टर में जॉब के अवसर तेजी से बढ़ रहे हैं, और यही वजह है कि BTech IT ग्रेजुएट्स को हाई पैकेज ऑफर किए जा रहे हैं। किन स्किल्स की होती है जरूरत? सिर्फ डिग्री हासिल करना ही काफी नहीं है। इस फील्ड में सफल होने के लिए कुछ अहम स्किल्स जरूरी हैं: प्रोग्रामिंग लैंग्वेज (Python, Java आदि) लॉजिकल और एनालिटिकल थिंकिंग प्रॉब्लम सॉल्विंग क्षमता टीमवर्क और कम्युनिकेशन स्किल करियर ऑप्शन और सैलरी BTech IT के बाद छात्रों के पास कई आकर्षक करियर विकल्प होते हैं: सॉफ्टवेयर डेवलपर डेटा एनालिस्ट साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट वेब डेवलपर क्लाउड इंजीनियर फ्रेशर्स को शुरुआत में लगभग 4 से 8 लाख रुपये सालाना का पैकेज मिल सकता है, जो अनुभव और स्किल्स के साथ तेजी से बढ़ता है। टॉप कंपनियों में अवसर आईटी सेक्टर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां देश और दुनिया की दिग्गज कंपनियों में काम करने का मौका मिलता है, जैसे TCS, Infosys, Wipro, Google और Microsoft। एडमिशन कैसे लें? BTech IT में दाखिला लेने के लिए छात्रों को एंट्रेंस एग्जाम पास करना होता है: नेशनल लेवल: JEE Main, JEE Advanced स्टेट लेवल: WBJEE, MHT CET, UPSEE योग्यता: 12वीं में फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ्स (PCM) के साथ 50% से 75% अंक (कॉलेज के अनुसार) जरूरी होते हैं।
नई दिल्ली: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड Central Board of Secondary Education ने कक्षा 10वीं की सेकेंड बोर्ड परीक्षा (CBSE 10th May Exam 2026) के लिए List of Candidates (LOC) सबमिशन प्रक्रिया शुरू कर दी है। बोर्ड के आधिकारिक नोटिफिकेशन के अनुसार, स्कूल अब छात्रों का डेटा आधिकारिक वेबसाइट cbse.gov.in पर जाकर जमा कर सकते हैं। यह प्रक्रिया उन छात्रों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है जो मई 2026 में आयोजित होने वाली सेकेंड बोर्ड परीक्षा में शामिल होना चाहते हैं। बोर्ड ने साफ किया है कि LOC सबमिशन विंडो 20 अप्रैल 2026 तक ही खुली रहेगी। परीक्षा और फीस से जुड़ी महत्वपूर्ण तारीखें सीबीएसई द्वारा जारी शेड्यूल के मुताबिक: पहले और दूसरे चरण के लिए परीक्षा शुल्क जमा करने की अंतिम तिथि: 16 अप्रैल से 20 अप्रैल 2026 तीसरे चरण के लिए शुल्क जमा करने की तिथि: 21 और 22 अप्रैल 2026 स्कूलों को निर्धारित समय सीमा के भीतर सभी प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी, ताकि छात्रों की परीक्षा में भागीदारी सुनिश्चित की जा सके। सेकेंड बोर्ड परीक्षा के लिए जारी गाइडलाइंस बोर्ड ने इस बार परीक्षा प्रक्रिया को लेकर कई अहम दिशा-निर्देश जारी किए हैं: जिन छात्रों का नाम पहले फेज की LOC में शामिल नहीं हुआ था, वे अब सेकेंड बोर्ड परीक्षा के लिए आवेदन कर सकते हैं और परीक्षा शुल्क जमा कर सकते हैं। जिन छात्रों का नाम पहले ही दर्ज है, उन्हें केवल परीक्षा शुल्क जमा करना होगा। जो छात्र सेकेंड परीक्षा में शामिल नहीं होना चाहते, वे अपना नाम वापस ले सकते हैं। गणित विषय में बदलाव की सुविधा भी दी गई है। छात्र Mathematics Standard से Mathematics Basic और इसके उलट बदलाव कर सकते हैं। अन्य विषयों में किसी प्रकार का बदलाव मान्य नहीं होगा। किन छात्रों को मिलेगा मौका बोर्ड के अनुसार, जो छात्र मुख्य परीक्षा में उत्तीर्ण हो चुके हैं और अपने अंकों में सुधार करना चाहते हैं, वे तीन विषयों में से किसी भी दो विषयों की पुनः परीक्षा दे सकते हैं, जिनमें विज्ञान, गणित, सामाजिक विज्ञान और भाषाएं शामिल हैं। हालांकि, Essential Repeat (ER) कैटेगरी में आने वाले छात्र इस सेकेंड बोर्ड परीक्षा के लिए पात्र नहीं होंगे। CBSE 10वीं रिजल्ट का प्रदर्शन इस वर्ष कक्षा 10वीं का परिणाम काफी बेहतर रहा है। कुल 23,16,008 छात्रों ने परीक्षा उत्तीर्ण की है और ओवरऑल पास प्रतिशत 93.70 दर्ज किया गया है। लड़कियों का पास प्रतिशत: 94.99 लड़कों का पास प्रतिशत: 92.69 क्षेत्रीय प्रदर्शन में त्रिवेंद्रम और विजयवाड़ा सबसे आगे रहे, जहां पास प्रतिशत 99.79 दर्ज किया गया।