बॉलीवुड स्टार Ranveer Singh की फिल्म Dhurandhar 2 ने रिलीज के तीसरे हफ्ते में भले ही कमाई में हल्की गिरावट दर्ज की हो, लेकिन बॉक्स ऑफिस पर इसका दबदबा अब भी बरकरार है। फिल्म लगातार रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन करते हुए दर्शकों के बीच छाई हुई है।
‘धुरंधर 2’ ने भारत में अब तक लगभग ₹1041.27 करोड़ (नेट) का कलेक्शन कर लिया है, जबकि इसका ग्रॉस कलेक्शन ₹1246.67 करोड़ तक पहुंच चुका है।
वहीं, फिल्म का वर्ल्डवाइड कलेक्शन 1600 करोड़ रुपये के पार जा चुका है, जिससे यह भारतीय सिनेमा की सबसे बड़ी ब्लॉकबस्टर फिल्मों में शामिल हो गई है।
फिल्म ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए Baahubali 2: The Conclusion को पीछे छोड़ दिया है।
इसके साथ ही ‘धुरंधर 2’ अब भारत की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्मों की लिस्ट में दूसरे स्थान पर पहुंच गई है। अब इसका अगला लक्ष्य Pushpa 2: The Rule का रिकॉर्ड तोड़ना है।
फिल्म की कहानी जस्किरत सिंह रंगी के हमजा अली माजरी बनने के सफर को दर्शाती है, जिसमें देशभक्ति, एक्शन और इमोशन का जबरदस्त मिश्रण देखने को मिलता है।
फिल्म में R. Madhavan, Sanjay Dutt और Sara Arjun जैसे कलाकारों ने भी अपनी शानदार एक्टिंग से फिल्म को मजबूती दी है।
तीसरे हफ्ते में गिरावट के बावजूद फिल्म की पकड़ मजबूत बनी हुई है। दर्शकों का जबरदस्त रिस्पॉन्स यह संकेत देता है कि ‘धुरंधर 2’ आने वाले दिनों में भी नए रिकॉर्ड बना सकती है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
मुंबई: लंबे समय बाद फिल्मों में वापसी कर रहे अभिनेता इमरान खान ने पहली बार अपनी पूर्व पत्नी अवंतिका मलिक से अलगाव को लेकर खुलकर बात की है। अभिनेता ने कहा कि उनका रिश्ता एक ऐसे दौर में पहुंच गया था, जहां उसे जारी रखना स्वस्थ नहीं रह गया था। वहीं, उनकी मौजूदा पार्टनर लेखा वॉशिंगटन ने भी उन्हें मिले 'होमब्रेकर' जैसे टैग्स पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। इमरान खान बोले- अलग होना आसान नहीं था, लेकिन जरूरी था एक इंटरव्यू में इमरान खान ने बताया कि शादी टूटने का फैसला दर्द और मुश्किलों से भरा था, लेकिन उन्होंने इसे अपनी बेटी और परिवार के भविष्य को ध्यान में रखते हुए लिया। उन्होंने कहा कि किसी अस्वस्थ रिश्ते को बनाए रखना और उसी माहौल को अपने बच्चे के सामने उदाहरण के रूप में पेश करना सही नहीं होता। उनके अनुसार, उन्होंने दो कठिन विकल्पों में से कम नुकसान वाले रास्ते को चुना। सार्वजनिक जीवन से दूर रहने की वजह भी बताई इमरान खान ने कहा कि वह लंबे समय तक लाइमलाइट से दूर रहे और उन्हें कभी यह महसूस नहीं हुआ कि उन्हें अपनी निजी जिंदगी के बारे में लोगों को सफाई देने की जरूरत है। हालांकि, अब जब वह दोबारा सार्वजनिक जीवन और फिल्मों में सक्रिय हो रहे हैं, तो उन्हें लगा कि कुछ बातों को स्पष्ट करना जरूरी है। 2011 में हुई थी शादी, 2019 में हुए अलग इमरान खान और अवंतिका मलिक ने साल 2011 में शादी की थी। दोनों की एक बेटी इमारा है। साल 2019 में दोनों अलग हो गए थे। अपनी बेटी के बारे में बात करते हुए अभिनेता भावुक नजर आए। उन्होंने इमारा को अपनी जिंदगी की "लाइटहाउस" यानी मार्गदर्शक रोशनी बताया। इमरान ने कहा कि मुश्किल दौर में उनकी बेटी ही वह वजह थीं, जिसने उन्हें आगे बढ़ने की ताकत दी। लेखा वॉशिंगटन ने 'होमब्रेकर' कहे जाने पर दिया जवाब इमरान खान की गर्लफ्रेंड और कलाकार लेखा वॉशिंगटन ने भी उन आलोचनाओं पर प्रतिक्रिया दी, जिनमें उन्हें 'होमब्रेकर' कहा जाता है। लेखा ने कहा कि महिलाओं को नियंत्रित करने और छोटा दिखाने के लिए अक्सर ऐसे लेबल इस्तेमाल किए जाते हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि ये शब्द उन्हें परिभाषित नहीं करते और लोग किसी रिश्ते की वास्तविक परिस्थितियों को जाने बिना फैसला नहीं कर सकते। फिल्मों में वापसी को लेकर चर्चा में हैं इमरान करीब एक दशक तक फिल्मों से दूरी बनाने के बाद इमरान खान अब एक नए प्रोजेक्ट के साथ वापसी कर रहे हैं। यह प्रोजेक्ट अभिनेता आमिर खान के समर्थन से तैयार किया जा रहा है, जिसकी वजह से अभिनेता एक बार फिर सुर्खियों में हैं।
फिल्म 'Obsession' भारतीय बॉक्स ऑफिस पर लगातार उम्मीदों से बेहतर प्रदर्शन कर रही है। आमतौर पर किसी फिल्म की कमाई शुक्रवार से सोमवार के बीच 30 से 50 प्रतिशत तक गिर जाती है, लेकिन 'Obsession' का ट्रेंड बिल्कुल अलग दिखाई दे रहा है। फिल्म ने दूसरे सोमवार को लगभग 4.15 करोड़ रुपये की कमाई की, जो इसके दूसरे शुक्रवार के 4 करोड़ रुपये के कलेक्शन से भी अधिक रही। इतना ही नहीं, यह कमाई पहले सोमवार के मुकाबले करीब 70 प्रतिशत ज्यादा है, जो किसी भी फिल्म के लिए बेहद शानदार माना जाता है। 11 दिनों में 46.75 करोड़ रुपये का कारोबार फिल्म का कुल बॉक्स ऑफिस कलेक्शन अब 11 दिनों में लगभग 46.75 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। उम्मीद की जा रही है कि डिस्काउंट मंगलवार के कारण फिल्म 50 करोड़ रुपये का आंकड़ा आसानी से पार कर लेगी। अगर मौजूदा ट्रेंड जारी रहता है तो दूसरे सप्ताह के अंत तक फिल्म का कुल कारोबार करीब 58 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। 80 करोड़ का आंकड़ा लगभग तय, 100 करोड़ की उम्मीद भी जगी ट्रेड एक्सपर्ट्स का मानना है कि फिल्म आराम से 80 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर सकती है और 90 करोड़ रुपये तक पहुंचने की भी मजबूत संभावना है। दूसरे सोमवार की मजबूत पकड़ के बाद अब 100 करोड़ क्लब में शामिल होने की उम्मीद भी बढ़ गई है। हालांकि जून महीने में कई बड़ी बॉलीवुड और हॉलीवुड फिल्मों की रिलीज होने वाली है, जिससे 'Obsession' को कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ सकता है। उम्मीदों से कहीं बेहतर रहा प्रदर्शन फिल्म ने अब तक जो प्रदर्शन किया है, वह शुरुआती अनुमानों से कहीं अधिक है। रिलीज से पहले किसी ने भी इतनी लंबी और मजबूत बॉक्स ऑफिस दौड़ की उम्मीद नहीं की थी। 'Obsession' का दिनवार बॉक्स ऑफिस कलेक्शन दिन कमाई प्रीव्यू ₹0.55 करोड़ पहला शुक्रवार ₹1.60 करोड़ पहला शनिवार ₹3.25 करोड़ पहला रविवार ₹3.75 करोड़ पहला सोमवार ₹2.50 करोड़ पहला मंगलवार ₹3.40 करोड़ पहला बुधवार ₹3.40 करोड़ पहला गुरुवार ₹3.40 करोड़ दूसरा शुक्रवार ₹4.00 करोड़ दूसरा शनिवार ₹8.00 करोड़ दूसरा रविवार ₹8.75 करोड़ दूसरा सोमवार ₹4.15 करोड़ कुल कलेक्शन ₹46.75 करोड़
मुंबई, एजेंसियां। बॉलीवुड अभिनेता राजकुमार राव और निर्माता दिनेश विजान एक बार फिर साथ काम करने जा रहे हैं। मैडॉक फिल्म्स ने अपनी नई बायोग्राफिकल फिल्म Prahaar: The Ujjwal Nikam Story की रिलीज डेट का आधिकारिक एलान कर दिया है। फिल्म 7 अगस्त 2026 को देशभर के सिनेमाघरों में रिलीज होगी। इस घोषणा के बाद फिल्म को लेकर दर्शकों के बीच उत्सुकता बढ़ गई है। मशहूर वकील उज्ज्वल निकम के जीवन पर आधारित है फिल्म ‘प्रहार- द उज्ज्वल निकम स्टोरी’ एक बायोग्राफिकल ड्रामा फिल्म है, जो देश के चर्चित सरकारी वकील और विशेष लोक अभियोजक Ujjwal Nikam के जीवन और उनके कानूनी सफर पर आधारित है। फिल्म में राजकुमार राव मुख्य भूमिका निभाते नजर आएंगे। माना जा रहा है कि यह फिल्म न्याय व्यवस्था, कानूनी संघर्ष और देश के चर्चित मामलों को बड़े पर्दे पर पेश करेगी। वामिका गब्बी, जयदीप अहलावत और सिकंदर खेर भी आएंगे नजर फिल्म में राजकुमार राव के अलावा Wamiqa Gabbi, Jaideep Ahlawat और Sikandar Kher भी अहम भूमिकाओं में दिखाई देंगे। मजबूत स्टारकास्ट के कारण फिल्म को लेकर उम्मीदें और बढ़ गई हैं। अविनाश अरुण संभालेंगे निर्देशन की कमान फिल्म का निर्देशन अविनाश अरुण कर रहे हैं, जो अपने संवेदनशील और प्रभावशाली निर्देशन के लिए जाने जाते हैं। वहीं मैडॉक फिल्म्स के बैनर तले बनने वाली इस फिल्म से एक बार फिर दिनेश विजन और राजकुमार राव की सफल साझेदारी देखने को मिलेगी। अगस्त में बड़े पर्दे पर होगी कानूनी संघर्ष की कहानी ट्रेड विश्लेषकों के अनुसार, ‘प्रहार’ सिर्फ एक बायोपिक नहीं बल्कि एक प्रेरणादायक कहानी होगी, जिसमें न्याय के लिए लड़े गए संघर्षों को दर्शाया जाएगा। दमदार कलाकारों और मजबूत विषयवस्तु के साथ यह फिल्म अगले साल अगस्त में दर्शकों के बीच पहुंचेगी और बॉक्स ऑफिस पर बड़ी चर्चा बटोर सकती है।