प्रसिद्ध पार्श्व गायिका Asha Bhosle के निधन के बाद पूरे देश में शोक की लहर है। राजनीतिक हस्तियों से लेकर फिल्मी सितारों तक, हर कोई उन्हें श्रद्धांजलि दे रहा है। इसी बीच अभिनेत्री Athiya Shetty की एक बड़ी चूक सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गई है।
अथिया शेट्टी ने इंस्टाग्राम स्टोरी के जरिए Asha Bhosle को श्रद्धांजलि दी, लेकिन गलती से उनकी जगह उनकी बड़ी बहन Lata Mangeshkar की तस्वीर शेयर कर दी। गौरतलब है कि Lata Mangeshkar का निधन साल 2022 में हो चुका है।
हालांकि, अभिनेत्री ने अपनी गलती का एहसास होते ही पोस्ट डिलीट कर दिया, लेकिन तब तक इसका स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो चुका था।
इस चूक के बाद Athiya Shetty को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर जमकर आलोचना का सामना करना पड़ा। कई यूजर्स ने उनकी जानकारी पर सवाल उठाए, तो कुछ ने इसे “बेहद शर्मनाक” बताया।
एक यूजर ने लिखा कि क्या किसी को उन्हें बताना चाहिए कि लता मंगेशकर का कई साल पहले निधन हो चुका है। वहीं कुछ अन्य यूजर्स ने कड़ी भाषा का इस्तेमाल करते हुए उन्हें ट्रोल किया।
सोशल मीडिया पर यह मामला तेजी से फैल गया और कई लोगों ने इसे संवेदनशील मौके पर की गई बड़ी लापरवाही बताया। हालांकि, अभी तक Athiya Shetty की ओर से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
यह घटना एक बार फिर यह दिखाती है कि सार्वजनिक मंचों पर की गई छोटी सी गलती भी बड़े विवाद का रूप ले सकती है, खासकर जब मामला किसी सम्मानित हस्ती से जुड़ा हो।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
चेन्नई, एजेंसियां। Dacoit Ek Prem Katha एक एक्शन-रोमांटिक फिल्म के तौर पर बड़े दावों के साथ सिनेमाघरों में रिलीज हुई, लेकिन यह दर्शकों की उम्मीदों पर खरी नहीं उतर पाती। निर्देशक Shenil Dev की यह फिल्म एक दिलचस्प कॉन्सेप्ट के बावजूद कमजोर कहानी और ढीले स्क्रीनप्ले की वजह से प्रभाव छोड़ने में असफल रहती है। कहानी: प्यार, बदले और रहस्यों का मिश्रण फिल्म की कहानी हरि (Adivi Sesh) के इर्द-गिर्द घूमती है, जो हत्या और रेप के आरोप में 10 साल से जेल में है। वह अपनी प्रेमिका जूलिएट (Mrunal Thakur) की गवाही के कारण सजा काट रहा है। जेल से भागने के बाद उसका मकसद जूलिएट से बदला लेना होता है, लेकिन मुलाकात के बाद उसकी नफरत फिर से प्यार में बदलने लगती है। कहानी में कुछ ट्विस्ट आते हैं, जो इसे एक इमोशनल मोड़ देने की कोशिश करते हैं। स्क्रीनप्ले और लॉजिक की बड़ी कमी फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी इसका स्क्रीनप्ले है। कोविड काल की पृष्ठभूमि पर बनी यह कहानी अस्पतालों में भ्रष्टाचार दिखाने की कोशिश करती है, लेकिन दर्शकों को भावनात्मक रूप से जोड़ नहीं पाती। लव स्टोरी में भी गहराई की कमी है और मुख्य किरदारों के बीच मजबूत बॉन्डिंग नहीं बन पाती। डकैती के सीन अवास्तविक लगते हैं, जहां बिना ठोस योजना के किरदार आसानी से सुरक्षा और पुलिस को चकमा देते दिखते हैं। अभिनय और तकनीकी पक्ष अदिवि शेष ने प्रयास तो अच्छा किया है, लेकिन कई जगह उनका अभिनय ओवर लगता है। मृणाल ठाकुर खासकर सेकेंड हाफ में प्रभाव छोड़ती हैं। Anurag Kashyap और Prakash Raj जैसे कलाकार भी कमजोर लेखन के कारण सीमित रह जाते हैं। फिल्म का बैकग्राउंड म्यूजिक और तकनीकी पहलू ठीक-ठाक हैं, जबकि अंतिम 20 मिनट थोड़े दिलचस्प बन पड़ते हैं।
मुंबई: अदिवी शेष और मृणाल ठाकुर की एक्शन-थ्रिलर फिल्म ‘डकैत’ ने सिनेमाघरों में अपने पहले तीन दिन पूरे कर लिए हैं, लेकिन तीसरे दिन इसकी कमाई में बढ़त नहीं दिखी। फिल्म को दर्शकों से ठीक-ठाक रिस्पॉन्स मिल रहा है, बावजूद इसके बॉक्स ऑफिस पर इसकी रफ्तार अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच सकी है। Sacnilk के आंकड़ों के अनुसार, फिल्म ने रविवार को भारत में 6.40 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया, जो शनिवार के मुकाबले थोड़ा कम है। इसके साथ ही फिल्म का कुल भारतीय नेट कलेक्शन 19.80 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। ‘धुरंधर 2’ से मिली कड़ी टक्कर फिल्म ‘डकैत’ की कमाई पर Dhurandhar 2 का सीधा असर देखने को मिल रहा है। Ranbir Singh स्टारर इस फिल्म की मजबूत पकड़ के कारण दर्शकों की संख्या बंट गई है, जिससे ‘डकैत’ की कमाई प्रभावित हुई है। वर्ल्डवाइड कलेक्शन में दिखी मजबूती हालांकि घरेलू बॉक्स ऑफिस पर दबाव के बावजूद फिल्म का प्रदर्शन अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेहतर नजर आ रहा है। तीसरे दिन विदेशों में फिल्म ने 2.25 करोड़ रुपये का कारोबार किया। ओवरसीज ग्रॉस: 11.65 करोड़ रुपये वर्ल्डवाइड कलेक्शन: 34.77 करोड़ रुपये यह आंकड़े बताते हैं कि फिल्म को विदेशों में भी अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है, जो इसके कुल कलेक्शन को सहारा दे रहा है। कहानी और स्टारकास्ट ने खींचा ध्यान ‘डकैत’ एक ऐसी कहानी पेश करती है, जिसमें एक्शन के साथ इमोशन का भी गहरा तड़का है। फिल्म में Adivi Sesh एक अपराधी की भूमिका में नजर आते हैं, जो अपने साथ हुए धोखे का बदला लेना चाहता है। वहीं Mrunal Thakur उनकी पुरानी साथी के किरदार में हैं। कहानी में ट्विस्ट तब आता है जब हालात दोनों को दोबारा साथ आने पर मजबूर कर देते हैं और वे मिलकर कई बड़ी चोरियों को अंजाम देते हैं। फिल्म में Prakash Raj, Anurag Kashyap और Atul Kulkarni जैसे दमदार कलाकार भी नजर आ रहे हैं, जिन्होंने अपने अभिनय से फिल्म को मजबूती दी है। आगे क्या? ट्रेड एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले दिनों में वीकडे कलेक्शन फिल्म की असली परीक्षा होगी। अगर फिल्म वर्ड-ऑफ-माउथ से मजबूत पकड़ बना पाती है, तो यह बॉक्स ऑफिस पर लंबी रेस में टिक सकती है।
मुंबई,एजेंसियां। फिल्म धुरंधर 2 की सफलता के बाद जहां रणवीर सिंह की जमकर तारीफ हो रही है, वहीं दीपिका पादुकोण की चुप्पी सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई थी। फैंस लगातार यह सवाल उठा रहे थे कि दीपिका ने अब तक फिल्म या रणवीर के प्रदर्शन को लेकर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया क्यों नहीं दी। सोशल मीडिया पर उठे सवाल, ट्रोलिंग भी हुई फिल्म के हिट होने के बाद से ही सोशल मीडिया पर दीपिका को लेकर तरह-तरह के कमेंट सामने आ रहे थे। कई यूजर्स यह सवाल कर रहे थे कि जब पूरी इंडस्ट्री रणवीर की तारीफ कर रही है, तो दीपिका की ओर से कोई प्रतिक्रिया क्यों नहीं आई। इसी वजह से उन्हें ट्रोलिंग का भी सामना करना पड़ा। पोस्ट पर रिएक्शन देकर तोड़ी चुप्पी इन तमाम सवालों के बीच दीपिका ने सीधे बयान देने के बजाय एक अलग तरीका अपनाया। उन्होंने रणवीर सिंह की तारीफ से जुड़े एक पोस्ट पर प्रतिक्रिया दी, जिसे उनके जवाब के रूप में देखा जा रहा है। इस कदम के बाद सोशल मीडिया पर उनकी चुप्पी को लेकर चल रही बहस को नया मोड़ मिल गया। पहले भी उठ चुका है मुद्दा यह पहली बार नहीं है जब दीपिका की चुप्पी चर्चा में आई हो। इससे पहले भी जब उन्होंने किसी अन्य फिल्म से जुड़ा पोस्ट साझा किया था, तब यूजर्स ने उनसे धुरंधर 2 को लेकर प्रतिक्रिया न देने पर सवाल उठाए थे। उस समय भी कमेंट सेक्शन में इस मुद्दे पर काफी बहस देखने को मिली थी। रणवीर की फिल्म को मिल रही जबरदस्त प्रतिक्रिया गौरतलब है कि धुरंधर 2 बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन कर रही है और रणवीर सिंह के अभिनय को दर्शकों और समीक्षकों दोनों से सराहना मिल रही है। ऐसे में दीपिका की प्रतिक्रिया को लेकर फैंस की दिलचस्पी और भी बढ़ गई थी।