सामाजिक मुद्दों को छूती है फिल्म, लेकिन असर छोड़ने में रह जाती है पीछे
Kartavya एक ऐसी फिल्म है जो ऑनर किलिंग, ढोंगी बाबाओं की अंधभक्ति और बाल यौन शोषण जैसे गंभीर सामाजिक मुद्दों को उठाने की कोशिश करती है। फिल्म का शुरुआती संवाद – “करम करते हैं, धरम छूटता है…” – इसकी पूरी कहानी की दिशा तय करता नजर आता है। लेकिन समस्या यह है कि फिल्म इन जटिल मुद्दों की गहराई में उतरने की बजाय सतही स्तर पर ही घूमती रह जाती है।
फिल्म का निर्देशन Pulkit ने किया है और उन्होंने कई संवेदनशील विषयों को एक साथ जोड़ने की कोशिश की है, मगर स्क्रीनप्ले कई जगह कमजोर पड़ जाता है।
फिल्म की कहानी हरियाणा के झामली थाने में तैनात ईमानदार पुलिस अफसर पवन के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसका किरदार Saif Ali Khan ने निभाया है।
एक राष्ट्रीय पत्रकार की हत्या के बाद पवन खुद जांच में उतरता है। जांच की कड़ियां इलाके के प्रभावशाली बाबा आनंद श्री तक पहुंचती हैं, जिस पर बाल यौन शोषण जैसे गंभीर आरोप हैं।
इसी बीच पवन के परिवार में भी संकट खड़ा हो जाता है, जब उसका छोटा भाई कथित तौर पर एक अलग जाति की लड़की के साथ भाग जाता है। मामला ऑनर किलिंग तक पहुंच जाता है और पवन खुद कर्तव्य, परिवार और नैतिकता के बीच फंस जाता है।
फिल्म जिन सामाजिक मुद्दों को उठाती है, वे बेहद गंभीर और संवेदनशील हैं। लेकिन निर्देशक इन मुद्दों की भयावहता और गहराई को पूरी ताकत से पर्दे पर नहीं ला पाए।
खासतौर पर बाबा आनंद श्री का किरदार काफी कमजोर लिखा गया है। जहां एक तरफ ऐसे किरदारों में डर, प्रभाव और क्रूरता दिखनी चाहिए थी, वहीं यहां वह असर नजर नहीं आता।
Saurabh Dwivedi का यह अभिनय प्रयास ईमानदार जरूर लगता है, लेकिन अनुभवी कलाकारों के बीच उनका किरदार कमजोर कड़ी बन जाता है।
फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इसकी स्टारकास्ट है।
फिल्म की रफ्तार तेज रखी गई है और बैकग्राउंड स्कोर कई जगह रोमांच बनाए रखता है। हालांकि, कहानी का मुख्य सस्पेंस काफी पहले समझ में आने लगता है, जिससे क्लाइमेक्स का असर कमजोर पड़ जाता है।
अगर आप सामाजिक मुद्दों पर आधारित क्राइम ड्रामा और Saif Ali Khan तथा Sanjay Mishra की एक्टिंग पसंद करते हैं, तो यह फिल्म एक बार देखी जा सकती है।
फिल्म Netflix पर रिलीज हुई है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
इमोशनल पोस्ट में माता-पिता और भाई-भाभी को दिया सफलता का श्रेय Avinash Mishra का वह सपना आखिरकार पूरा हो गया, जिसके लिए उन्होंने करीब 10 साल तक संघर्ष और मेहनत की। Bigg Boss 18 फेम अभिनेता ने मुंबई में अपना नया घर खरीद लिया है और हाल ही में उन्होंने गृह प्रवेश और सत्यनारायण पूजा की तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा कीं। इन तस्वीरों में अविनाश अपने माता-पिता, भाई और भाभी के साथ नजर आ रहे हैं। फैंस और टीवी इंडस्ट्री के कई सितारे उन्हें इस नई शुरुआत के लिए बधाई दे रहे हैं। “10 साल लगे और अब गर्व से कह सकता हूं कि मैंने कर दिखाया” अविनाश मिश्रा ने सोशल मीडिया पर 12 तस्वीरें शेयर करते हुए एक भावुक नोट भी लिखा। उन्होंने कहा: “ॐ नमः शिवाय। आखिरकार, मुंबई में अपना घर! 10 साल लगे और अब मैं गर्व से कह सकता हूं कि मैंने कर दिखाया। 10 साल की कड़ी मेहनत, धैर्य और विश्वास।” उन्होंने अपने संघर्ष के शुरुआती दिनों को याद करते हुए बताया कि जब वह पहली बार मुंबई आए थे, तब उनके मन में सिर्फ सवाल ही सवाल थे। “क्या मैं इस शहर में टिक पाऊंगा?” अविनाश ने लिखा: “जब नया-नया मुंबई आया था, तब सिर्फ सवाल ही सवाल था कि कैसे होगा? क्या होगा? कब होगा? क्या मैं इस शहर में सर्वाइव कर पाऊंगा?” उन्होंने आगे कहा कि इंसान को सिर्फ ईमानदारी से मेहनत करते रहना चाहिए, क्योंकि सही समय आने पर मेहनत जरूर रंग लाती है। माता-पिता और भाई-भाभी को बताया परिवार की रीढ़ Avinash Mishra ने अपनी सफलता का श्रेय अपने परिवार को दिया। उन्होंने कहा: “ये सब मैं अपने मम्मी-पापा के प्यार और सपोर्ट की वजह से कर पाया हूं।” उन्होंने अपने भाई को परिवार की “रीढ़” बताते हुए धन्यवाद कहा और भाभी को परिवार में खुशियां लाने वाला बताया। इंडस्ट्री से भी मिला प्यार अविनाश के इस पोस्ट पर टीवी इंडस्ट्री के कई सितारों ने उन्हें बधाई दी। Shilpa Shirodkar ने लिखा: “आपको बहुत-बहुत बधाई। यह आपके कई सपनों के सच होने की बस शुरुआत है।” फैंस भी लगातार उन्हें मेहनत और संघर्ष का असली उदाहरण बता रहे हैं। ‘खतरों के खिलाड़ी 15’ में आएंगे नजर वर्कफ्रंट की बात करें तो Avinash Mishra जल्द ही Khatron Ke Khiladi के 15वें सीजन में नजर आ सकते हैं। फैंस उन्हें नए अवतार में देखने के लिए उत्साहित हैं।
हिंदी उच्चारण को लेकर ट्रोल हुईं साई पल्लवी Sai Pallavi इन दिनों अपनी हालिया रिलीज फिल्म Ek Din को लेकर चर्चा में हैं। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर खास प्रदर्शन नहीं कर पाई, वहीं अभिनेत्री को हिंदी उच्चारण को लेकर सोशल मीडिया पर आलोचनाओं का सामना भी करना पड़ा। अब खबरें सामने आ रही हैं कि मेगा बजट फिल्म Ramayana के निर्माता उनकी डायलॉग डिलीवरी को लेकर नया फैसला लेने पर विचार कर रहे हैं। मेकर्स डबिंग पर कर रहे विचार मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, फिल्म के निर्माता साई पल्लवी के कुछ संवादों की डबिंग कराने पर विचार कर रहे हैं ताकि भाषा अधिक स्पष्ट और प्रभावी लगे। बताया जा रहा है कि फिल्म में अभिनेत्री सीता का किरदार निभा रही हैं, इसलिए मेकर्स चाहते हैं कि संवादों का उच्चारण दर्शकों को पूरी तरह साफ और भावनात्मक रूप से जुड़ा हुआ महसूस हो। हालांकि, इस पूरे मामले पर अभी तक फिल्म मेकर्स की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। प्रमोशन के दौरान वायरल हुए थे वीडियो Ek Din के प्रमोशन के दौरान सोशल मीडिया पर साई पल्लवी के कई वीडियो वायरल हुए थे। इन वीडियो में कुछ यूजर्स ने उनकी हिंदी को लेकर सवाल उठाए थे। कई लोगों का कहना था कि अभिनेत्री को हिंदी संवाद बोलने में दिक्कत हो रही है। इसके बाद सोशल मीडिया पर बहस शुरू हो गई कि क्या इतनी बड़ी फिल्म में भाषा पर और काम करने की जरूरत है। 4000 करोड़ के बजट में बन रही ‘रामायण’ Ramayana भारतीय सिनेमा की सबसे महंगी फिल्मों में शामिल मानी जा रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार फिल्म का बजट करीब 4000 करोड़ रुपये बताया जा रहा है। फिल्म में Ranbir Kapoor भगवान राम की भूमिका निभाएंगे, जबकि Sai Pallavi सीता के किरदार में नजर आएंगी। इसके अलावा Yash रावण, Ravi Dubey लक्ष्मण और Sunny Deol हनुमान के रोल में दिखाई देंगे। दो पार्ट में रिलीज होगी फिल्म फिल्म को दो भागों में रिलीज करने की तैयारी है। पहला पार्ट दिवाली 2026 पर रिलीज किया जाएगा, जबकि दूसरा भाग 2027 की दिवाली पर सिनेमाघरों में आएगा। फिल्म को लेकर दर्शकों में पहले से ही जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है और अब साई पल्लवी की डबिंग से जुड़ी खबरों ने चर्चा को और तेज कर दिया है।
चेन्नई, एजेंसियां। दक्षिण भारतीय सिनेमा के सुपरस्टार Jr NTR इस बार अपना 43वां जन्मदिन खास अंदाज में मनाने जा रहे हैं। कई वर्षों बाद अभिनेता हैदराबाद में अपने परिवार, दोस्तों और फैंस के साथ जन्मदिन सेलिब्रेट करेंगे। इस खबर के सामने आते ही फैंस के बीच जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। पिछले कुछ वर्षों से लगातार फिल्मों की शूटिंग में व्यस्त रहने के कारण वह शहर में जन्मदिन नहीं मना पा रहे थे, लेकिन इस बार उन्होंने अपने बिजी शेड्यूल से समय निकाला है। NTRxNeel की पहली झलक बढ़ाएगी रोमांच जन्मदिन के जश्न को और खास बनाने के लिए NTRxNeel से जुड़ा बड़ा अपडेट भी सामने आने वाला है। निर्देशक Prashanth Neel के निर्देशन में बन रही इस बहुप्रतीक्षित फिल्म की पहली झलक 19 मई की आधी रात को रिलीज की जाएगी। फैंस लंबे समय से इस प्रोजेक्ट की पहली झलक का इंतजार कर रहे थे। माना जा रहा है कि यह वीडियो फिल्म की दुनिया और जूनियर NTR के किरदार का दमदार परिचय देगा। यह प्रोजेक्ट पहले से ही भारतीय सिनेमा की सबसे चर्चित फिल्मों में शामिल है। ऐसे में जन्मदिन के मौके पर फिल्म से जुड़ा सरप्राइज फैंस के उत्साह को और बढ़ा रहा है। सोशल मीडिया पर भी #NTRBirthday और #NTRxNeel ट्रेंड करने लगे हैं। फैंस के लिए त्योहार जैसा माहौल हर साल जूनियर NTR का जन्मदिन उनके चाहने वालों के लिए किसी त्योहार से कम नहीं होता। इस बार हैदराबाद में विशेष आयोजन, फैन मीट और सेलिब्रेशन की तैयारियां जोरों पर हैं। अभिनेता के घर और शहर के कई इलाकों में सजावट और खास कार्यक्रमों की चर्चा है।