मुंबई, एजेंसियां। इमरान हाशमी की बहुप्रतीक्षित फिल्म 'आवारापन 2' का पहला गाना 'जुनून' रिलीज हो गया है। फिल्म के टीजर के बाद दर्शकों को इस गाने का बेसब्री से इंतजार था। रिलीज के साथ ही 'जुनून' सोशल मीडिया और यूट्यूब पर तेजी से वायरल हो रहा है। गाने को अभिजीत सावंत और मिथुन ने अपनी आवाज दी है, जबकि इसका संगीत भी मिथुन ने तैयार किया है। गीत के बोल शहीद कादरी ने लिखे हैं।
'जुनून' में इमरान हाशमी के साथ दिशा पाटनी और श्रिया सरन की झलक देखने को मिलती है। गाना फिल्म की भावनात्मक और रोमांटिक कहानी की झलक पेश करता है। इमरान हाशमी ने भी अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर गाना साझा करते हुए लिखा, "इस आवारापन के जुनून में होना है तबाह।" उनके इस पोस्ट को भी फैंस का भरपूर प्यार मिल रहा है।
रिलीज के कुछ ही समय में गाने को लाखों व्यूज मिल चुके हैं। सोशल मीडिया पर फैंस लगातार अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। कुछ यूजर्स ने गाने की धुन की तुलना हालिया हिट गीत 'सैयारा' से की, जबकि कई प्रशंसकों ने श्रिया सरन की वापसी और इमरान हाशमी की स्क्रीन प्रेजेंस की जमकर तारीफ की। कई फैंस ने लिखा कि "अक्खा बॉलीवुड एक तरफ और इमरान हाशमी एक तरफ", वहीं कुछ ने फिल्म को पहले दिन से ही सुपरहिट बताया।
'आवारापन 2' 14 अगस्त 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। फिल्म में इमरान हाशमी और दिशा पाटनी मुख्य भूमिकाओं में हैं, जबकि श्रिया सरन भी अहम किरदार निभा रही हैं। रोमांस, एक्शन और इमोशनल ड्रामा से भरपूर इस फिल्म को लेकर दर्शकों में पहले से ही काफी उत्साह है। अब 'जुनून' की सफलता ने फिल्म को लेकर फैंस की उम्मीदें और भी बढ़ा दी हैं।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
मुंबई, एजेंसियां। इमरान हाशमी की बहुप्रतीक्षित फिल्म 'आवारापन 2' का पहला गाना 'जुनून' रिलीज हो गया है। फिल्म के टीजर के बाद दर्शकों को इस गाने का बेसब्री से इंतजार था। रिलीज के साथ ही 'जुनून' सोशल मीडिया और यूट्यूब पर तेजी से वायरल हो रहा है। गाने को अभिजीत सावंत और मिथुन ने अपनी आवाज दी है, जबकि इसका संगीत भी मिथुन ने तैयार किया है। गीत के बोल शहीद कादरी ने लिखे हैं। गाने में दिखी रोमांस और इमोशन की झलक 'जुनून' में इमरान हाशमी के साथ दिशा पाटनी और श्रिया सरन की झलक देखने को मिलती है। गाना फिल्म की भावनात्मक और रोमांटिक कहानी की झलक पेश करता है। इमरान हाशमी ने भी अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर गाना साझा करते हुए लिखा, "इस आवारापन के जुनून में होना है तबाह।" उनके इस पोस्ट को भी फैंस का भरपूर प्यार मिल रहा है। फैंस ने दिए शानदार रिएक्शन रिलीज के कुछ ही समय में गाने को लाखों व्यूज मिल चुके हैं। सोशल मीडिया पर फैंस लगातार अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। कुछ यूजर्स ने गाने की धुन की तुलना हालिया हिट गीत 'सैयारा' से की, जबकि कई प्रशंसकों ने श्रिया सरन की वापसी और इमरान हाशमी की स्क्रीन प्रेजेंस की जमकर तारीफ की। कई फैंस ने लिखा कि "अक्खा बॉलीवुड एक तरफ और इमरान हाशमी एक तरफ", वहीं कुछ ने फिल्म को पहले दिन से ही सुपरहिट बताया। 14 अगस्त को सिनेमाघरों में रिलीज होगी फिल्म 'आवारापन 2' 14 अगस्त 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। फिल्म में इमरान हाशमी और दिशा पाटनी मुख्य भूमिकाओं में हैं, जबकि श्रिया सरन भी अहम किरदार निभा रही हैं। रोमांस, एक्शन और इमोशनल ड्रामा से भरपूर इस फिल्म को लेकर दर्शकों में पहले से ही काफी उत्साह है। अब 'जुनून' की सफलता ने फिल्म को लेकर फैंस की उम्मीदें और भी बढ़ा दी हैं।
6 से 12 जुलाई 2026 के बीच थिएटर और OTT पर मिलेगा भरपूर मनोरंजन अगर आप इस सप्ताह नई हॉलीवुड फिल्में और वेब सीरीज देखने का प्लान बना रहे हैं, तो 6 से 12 जुलाई 2026 के बीच कई बड़ी रिलीज़ आपका इंतजार कर रही हैं। सिनेमाघरों में डिज्नी की बहुप्रतीक्षित लाइव-एक्शन फिल्म Moana रिलीज़ होने जा रही है, वहीं OTT पर ड्रामा, हॉरर, कॉमेडी और क्राइम से भरपूर कई नए शो और फिल्में भी दस्तक देंगी। यहां जानिए इस सप्ताह की प्रमुख हॉलीवुड रिलीज़। Moana रिलीज़ डेट: 10 जुलाई 2026 (सिनेमाघर) स्टार कास्ट: Catherine Laga'aia, Dwayne Johnson डिज्नी की इस लाइव-एक्शन फिल्म में मोआना अपने द्वीप को बचाने के लिए समुद्र की रोमांचक यात्रा पर निकलती है। इस सफर में उसकी मदद माउई करता है। The Invite रिलीज़ डेट: 10 जुलाई 2026 (सिनेमाघर) स्टार कास्ट: Seth Rogen, Olivia Wilde, Penélope Cruz, Edward Norton एक पति-पत्नी अपने पड़ोसियों को डिनर पर बुलाते हैं, लेकिन यह मुलाकात धीरे-धीरे कई मजेदार और चौंकाने वाली घटनाओं में बदल जाती है। Evil Dead Burn रिलीज़ डेट: 10 जुलाई 2026 (सिनेमाघर) हॉरर फ्रेंचाइज़ी की नई फिल्म में एक महिला अपने पति की मौत के बाद ससुराल पहुंचती है, जहां उसका परिवार एक-एक कर दुष्ट आत्माओं के कब्जे में आने लगता है। I'm Not Afraid OTT: Netflix रिलीज़ डेट: 8 जुलाई 2026 एक 10 वर्षीय लड़के की कहानी, जो एक भयावह रहस्य का पता लगाने के बाद जीवन और संघर्ष की कठोर सच्चाइयों का सामना करता है। Nothing to Lose OTT: Netflix रिलीज़ डेट: 8 जुलाई 2026 यह भावनात्मक ड्रामा एक मां की कहानी दिखाता है, जो अपने बीमार बेटे की जान बचाने के लिए हर संभव कोशिश करती है। Trying OTT: Apple TV+ रिलीज़ डेट: 8 जुलाई 2026 लोकप्रिय कॉमेडी-ड्रामा सीरीज का पांचवां सीजन निक्की और जेसन के परिवार में नए उतार-चढ़ाव और चुनौतियों को दिखाता है। Little House on the Prairie OTT: Netflix रिलीज़ डेट: 9 जुलाई 2026 यह ऐतिहासिक ड्रामा इंगॉल्स परिवार की नई जिंदगी बसाने के संघर्ष और साहस की कहानी पेश करता है। The Westies OTT: Prime Video रिलीज़ डेट: 12 जुलाई 2026 1980 के दशक के न्यूयॉर्क की पृष्ठभूमि पर आधारित यह क्राइम ड्रामा आयरिश-अमेरिकी गैंग की सत्ता और संघर्ष की कहानी दिखाता है। इस सप्ताह क्या देखें? यदि आपको एडवेंचर पसंद है तो Moana बेहतरीन विकल्प हो सकती है। हॉरर के शौकीनों के लिए Evil Dead Burn, जबकि परिवार और ड्रामा पसंद करने वालों के लिए Trying Season 5, Nothing to Lose और Little House on the Prairie अच्छे विकल्प हैं। वहीं क्राइम थ्रिलर देखने वालों के लिए The Westies खास साबित हो सकती है।
मुंबई, एजेंसियां। बॉलीवुड के ऊर्जा से भरपूर और बहुमुखी अभिनेता रणवीर सिंह आज अपना 41वां जन्मदिन मना रहे हैं। 6 जुलाई 1985 को मुंबई में जन्मे रणवीर सिंह ने अपनी मेहनत, अलग अंदाज और दमदार अभिनय के दम पर हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में खास पहचान बनाई है। आज वे बॉलीवुड के सबसे सफल सितारों में गिने जाते हैं, लेकिन फिल्मों में आने से पहले उनका सफर संघर्ष और छोटे-छोटे कामों से होकर गुजरा। रणवीर का पूरा नाम रणवीर सिंह भावनानी है। फिल्मों में कदम रखने के बाद उन्होंने अपने नाम से 'भावनानी' सरनेम हटा दिया। उनका बॉलीवुड के कपूर परिवार से भी खास रिश्ता है। अभिनेत्री सोनम कपूर उनकी कजिन हैं, जबकि अभिनेता अनिल कपूर उनके रिश्ते में मौसा लगते हैं। पढ़ाई पूरी कर किया नौकरी का सफर रणवीर ने मुंबई के लर्नर्स एकेडमी स्कूल से शुरुआती शिक्षा प्राप्त की। इसके बाद वे अमेरिका की इंडियाना यूनिवर्सिटी गए, जहां से टेलीकम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री हासिल की। अभिनय की दुनिया में आने से पहले उन्होंने अमेरिका में एक कैफे में पार्ट-टाइम सर्वर के रूप में काम किया। भारत लौटने के बाद मुंबई की एक विज्ञापन एजेंसी में कॉपीराइटर की नौकरी भी की। हालांकि उनका सपना हमेशा अभिनेता बनने का ही था। 'बैंड बाजा बारात' से चमकी किस्मत कई ऑडिशन देने के बाद रणवीर को यशराज फिल्म्स की फिल्म 'बैंड बाजा बारात' में मुख्य भूमिका मिली। साल 2010 में रिलीज हुई इस फिल्म में अनुष्का शर्मा के साथ उनकी जोड़ी को दर्शकों ने खूब पसंद किया और यहीं से उनका बॉलीवुड सफर शुरू हुआ। इसके बाद रणवीर ने एक के बाद एक कई सफल फिल्मों में दमदार अभिनय किया और खुद को इंडस्ट्री के भरोसेमंद सितारों में शामिल कर लिया। हाल के वर्षों में रिलीज हुई 'धुरंधर' और 'धुरंधर 2' ने उनके करियर को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। खासतौर पर 'धुरंधर 2' की शानदार सफलता ने रणवीर की लोकप्रियता को और मजबूत किया। आज वे अपनी अभिनय क्षमता, अलग अंदाज और शानदार स्क्रीन प्रेजेंस के कारण करोड़ों प्रशंसकों के पसंदीदा अभिनेता बने हुए हैं।