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अंशुला कपूर-रोहन ठक्कर ने लिए सात फेरे, भावुक पलों के बीच नई जिंदगी की शुरुआत

anjali kumari जुलाई 7, 2026 0
Anshula Kapoor Wedding
Anshula Kapoor Wedding

मुंबई, एजेंसियां। मुंबई में 6 जुलाई को निर्माता बोनी कपूर की बेटी और अर्जुन कपूर की बहन अंशुला कपूर ने अपने लॉन्ग-टाइम बॉयफ्रेंड रोहन ठक्कर के साथ शादी के बंधन में बंधकर नई जिंदगी की शुरुआत की। दोनों की शादी मुंबई के ताज होटल में परिवार और करीबी रिश्तेदारों की मौजूदगी में संपन्न हुई। शादी के कई भावुक और खूबसूरत वीडियो तथा तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं।

 

सास ने गले लगाकर दिया आशीर्वाद, भावुक हुए बोनी कपूर


शादी के दौरान सामने आए एक वीडियो में अंशुला और रोहन विवाह संबंधी दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करते नजर आए। इस दौरान रोहन की मां ने दोनों को गले लगाकर आशीर्वाद दिया और बहू अंशुला पर स्नेह लुटाया। वहीं बेटी की शादी के मौके पर बोनी कपूर भी भावुक दिखाई दिए। उन्होंने सोशल मीडिया पर तस्वीरें साझा करते हुए दोनों को नई जिंदगी की शुभकामनाएं दीं और उनके सुखद वैवाहिक जीवन की कामना की।

 

भाई अर्जुन संग भावुक पल भी बना चर्चा का विषय


शादी से पहले आयोजित प्री-वेडिंग समारोह की तस्वीरों में अंशुला कपूर अपने भाई अर्जुन कपूर को गले लगाकर भावुक होती नजर आई थीं। यह तस्वीर सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुई और फैंस ने भाई-बहन के रिश्ते की जमकर सराहना की।

 

डेटिंग ऐप से शुरू हुई थी प्रेम कहानी


अंशुला और रोहन की पहली मुलाकात वर्ष 2022 में एक डेटिंग ऐप के जरिए हुई थी। दोस्ती धीरे-धीरे प्यार में बदली और जुलाई 2025 में रोहन ने न्यूयॉर्क के सेंट्रल पार्क में घुटनों पर बैठकर अंशुला को प्रपोज किया। इसके बाद अक्टूबर 2025 में दोनों ने सगाई की थी। 21 जून से शादी की रस्में शुरू हुई थीं, जबकि मेहंदी, चूड़ा और कलीरे की रस्में 5 जुलाई को संपन्न हुईं। अब शादी के साथ दोनों ने अपने रिश्ते को नया मुकाम दे दिया है।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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Diljit Dosanjh B.N.Tiwari
'सतलुज' विवाद पर FWICE अध्यक्ष का दिलजीत पर निशाना, बोले- विवादित फिल्में क्यों चुनते हैं?

मुंबई, एजेंसियां। अभिनेता और गायक दिलजीत दोसांझ की फिल्म ‘सतलुज’ को ओटीटी प्लेटफॉर्म से हटाए जाने के बाद विवाद लगातार गहराता जा रहा है। इसी बीच फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉइज (FWICE) के अध्यक्ष बी.एन. तिवारी ने अभिनेता की फिल्म चयन पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें ऐसे विषयों पर काम करते समय अधिक जिम्मेदारी और समझदारी दिखानी चाहिए।   बी.एन. तिवारी ने कहा  आईएएनएस से बातचीत में बी.एन. तिवारी ने कहा कि दिलजीत पंजाब के बड़े कलाकार हैं और उनकी लोकप्रियता को देखते हुए उन्हें ऐसे फैसले लेने चाहिए, जिनका समाज और उनकी छवि पर नकारात्मक प्रभाव न पड़े। उनका कहना था कि यदि किसी फिल्म की सामग्री सामाजिक विवाद या कानून-व्यवस्था की स्थिति पैदा कर सकती है, तो उसकी गंभीरता से समीक्षा की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि सिनेमा का उद्देश्य मनोरंजन और सकारात्मक संदेश देना है, इसलिए संवेदनशील विषयों पर विशेष सावधानी जरूरी है।   तिवारी ने सेंसर प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए उन्होंने कहा कि यदि किसी फिल्म को लंबी जांच और समीक्षा के बाद मंजूरी दी जाती है, तो बाद में उस पर दोबारा आपत्ति उठना कई सवाल खड़े करता है। उनके अनुसार, सेंसर बोर्ड को शुरुआती चरण में ही सभी आपत्तियों का समाधान कर देना चाहिए, ताकि फिल्म निर्माताओं को आर्थिक नुकसान का सामना न करना पड़े।   क्या है मामला ? दरअसल, यह फिल्म पंजाब के मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा के जीवन पर आधारित है। फिल्म पहले ‘पंजाब 95’ नाम से सेंसर बोर्ड के पास भेजी गई थी, जहां कथित तौर पर 127 संशोधनों का सुझाव दिया गया था। मेकर्स ने इन बदलावों को स्वीकार नहीं किया और बाद में नए नाम ‘सतलुज’ से इसे ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज कर दिया।   सरकारी सूत्रों के अनुसार, फिल्म को बिना आवश्यक प्रक्रियाओं का पालन किए ओटीटी पर जारी किए जाने और सुरक्षा संबंधी चिंताओं के मद्देनजर प्लेटफॉर्म से हटाने का निर्देश दिया गया। अब फिल्म को लेकर बहस तेज हो गई है और सभी की नजर इस पर है कि आगे निर्माता और संबंधित पक्ष क्या कदम उठाते हैं।

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शो में वाइल्ड कार्ड एंट्री के बाद बढ़ा हाई-वोल्टेज ड्रामा रियलिटी शो Lock Upp 2: Sach Yaa Sazaa में ड्रामा लगातार बढ़ता जा रहा है। शो में वाइल्ड कार्ड कंटेस्टेंट के तौर पर आईं Shilpa Shinde ने आते ही घर का माहौल गर्म कर दिया। उनकी सबसे तीखी बहस Sunita Ahuja के साथ देखने को मिली, जिसमें बात सीधे सुनीता और उनके पति Govinda के रिश्ते तक पहुंच गई। शिल्पा शिंदे ने उठाए शादी और रिश्ते पर सवाल एपिसोड के दौरान शिल्पा शिंदे ने सुनीता आहूजा से उनके वैवाहिक जीवन को लेकर सवाल किए। उन्होंने कहा कि गोविंदा के करोड़ों प्रशंसक हैं और ऐसे में उनके बारे में सार्वजनिक रूप से इस तरह की बातें करना सही नहीं है। शिल्पा ने यह भी पूछा कि क्या सुनीता को अपने फैसलों और बयानों के असर का अंदाजा है। उनकी इस टिप्पणी के बाद दोनों के बीच माहौल अचानक तनावपूर्ण हो गया और बहस तेज हो गई। सुनीता आहूजा का पलटवार शिल्पा के सवालों पर सुनीता आहूजा ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने जवाब देते हुए कहा कि जब किसी व्यक्ति पर वैसी परिस्थिति आती है, तभी वह उसकी तकलीफ समझ सकता है। उन्होंने शिल्पा से उनके निजी जीवन में दखल न देने की बात भी कही। सुनीता की इस प्रतिक्रिया का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और दर्शकों के बीच इस बहस को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। राम कपूर से साझा की नाराजगी बाद में सुनीता आहूजा ने सह-प्रतियोगी Ram Kapoor से बातचीत के दौरान अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि उनके परिवार और निजी रिश्तों पर टिप्पणी करने का अधिकार किसी बाहरी व्यक्ति को नहीं है। सुनीता आहूजा बनीं शो की चर्चित कंटेस्टेंट Lock Upp 2 में सुनीता आहूजा शुरुआत से ही सबसे चर्चित प्रतिभागियों में शामिल रही हैं। शो के दौरान उन्होंने कई बार भावुक पल भी साझा किए हैं। वहीं, बाहर से उन्हें परिवार और करीबी लोगों का समर्थन मिल रहा है। Kashmera Shah सहित कई कलाकार खुलकर उनका समर्थन कर चुके हैं। हालांकि, शिल्पा शिंदे और सुनीता आहूजा के बीच हुई इस तीखी बहस ने शो में नया मोड़ ला दिया है। अब दर्शकों की नजर इस बात पर है कि आने वाले एपिसोड में दोनों के बीच यह टकराव और कितना आगे बढ़ता है।  

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मुंबई, एजेंसियां। फिल्म निर्माता करन जौहर ने फिल्म 'Alpha' की शानदार शुरुआत के बाद अभिनेत्री आलिया भट्ट की जमकर सराहना की है। करन ने कहा कि आलिया ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वह बॉलीवुड की सबसे भरोसेमंद और दमदार अभिनेत्रियों में शामिल हैं। उन्होंने कहा कि महिला प्रधान फिल्मों को लेकर बनी कई धारणाओं को आलिया ने अपने प्रदर्शन और बॉक्स ऑफिस सफलता से गलत साबित किया है।    'आलिया की स्टार पावर पर कोई सवाल नहीं'   करन जौहर ने सोशल मीडिया पर फिल्म की सफलता पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा कि "आलिया भट्ट की स्टार पावर पर कोई सवाल नहीं उठाया जा सकता। उन्होंने हर बार अपनी मेहनत और अभिनय से खुद को साबित किया है।" उन्होंने फिल्म की पूरी टीम को बधाई देते हुए दर्शकों का भी आभार जताया।    'Alpha' को मिल रहा दर्शकों का शानदार रिस्पॉन्स   रिलीज के बाद से 'Alpha' को दर्शकों और समीक्षकों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है। फिल्म ने पहले दो दिनों में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बॉक्स ऑफिस पर मजबूत कमाई दर्ज की है। एक्शन, कहानी और आलिया भट्ट के प्रदर्शन की खास तौर पर सराहना की जा रही है। ट्रेड विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यही रफ्तार जारी रही तो फिल्म पहले वीकेंड में शानदार कारोबार कर सकती है।    महिला प्रधान फिल्मों को मिला नया भरोसा   फिल्म इंडस्ट्री के जानकारों का मानना है कि 'Alpha' की सफलता महिला-केंद्रित फिल्मों के लिए सकारात्मक संकेत है। करन जौहर ने भी कहा कि मजबूत कहानी और दमदार अभिनय के दम पर ऐसी फिल्में दर्शकों का भरोसा जीत रही हैं और बॉक्स ऑफिस पर भी अच्छा प्रदर्शन कर रही हैं।

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