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Drishyam 3 का बॉक्स ऑफिस पर जलवा, 28 दिनों में बनाया नया वर्ल्डवाइड रिकॉर्ड

anjali kumari जून 18, 2026 0
Drishyam 3
Drishyam 3

तिरुवंतपुरम, एजेंसियां। 'दृश्यम 3' ने बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन करते हुए एक और बड़ी उपलब्धि अपने नाम कर ली है। मोहनलाल  स्टारर इस क्राइम थ्रिलर ने रिलीज के 28 दिनों में दुनियाभर में 241.65 करोड़ रुपये का ग्रॉस कलेक्शन दर्ज कर मलयालम सिनेमा की तीसरी सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बनने का गौरव हासिल किया है।

 

फिल्म ने चौथे बुधवार यानी 28वें दिन भारतीय बॉक्स ऑफिस पर 15 लाख रुपये का नेट कलेक्शन किया। इसके साथ ही भारत में इसकी कुल नेट कमाई 110.13 करोड़ रुपये और ग्रॉस कलेक्शन 129.95 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। वहीं विदेशी बाजारों से फिल्म ने 111.70 करोड़ रुपये की कमाई की। भारत और ओवरसीज की कमाई मिलाकर फिल्म का कुल वर्ल्डवाइड कलेक्शन 241.65 करोड़ रुपये हो गया है।

 

'दृश्यम 3' ने Manjummel Boys का रिकॉर्ड तोड़ा 


इस उपलब्धि के साथ 'दृश्यम 3' ने Manjummel Boys के 241.56 करोड़ रुपये के लाइफटाइम वर्ल्डवाइड कलेक्शन को पीछे छोड़ दिया। अब यह मलयालम सिनेमा की तीसरी सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बन चुकी है। इस सूची में पहले स्थान पर Lokah Chapter 1 (305.17 करोड़ रुपये) और दूसरे स्थान पर L2: Empuraan (268.23 करोड़ रुपये) मौजूद हैं।

 

Jeethu Joseph के निर्देशन में बनी इस फिल्म को 21 मई को सिनेमाघरों में रिलीज किया गया था। फिल्म में मोहनलाल के अलावा Meena, Ansiba Hassan, Esther Anil, Asha Sarath और Siddique ने अहम भूमिकाएं निभाई हैं। करीब 50 करोड़ रुपये के बजट में बनी इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर कई गुना अधिक कमाई कर इसे साल की सबसे सफल मलयालम फिल्मों में शामिल कर दिया है।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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Main Vaapas Aaunga Box Office Collection Day 6: इम्तियाज अली के निर्देशन में बनी फिल्म 'मैन वापस आऊंगा' बॉक्स ऑफिस पर धीमी शुरुआत के बावजूद अब वापसी की कोशिश करती नजर आ रही है। दिलजीत दोसांझ स्टारर इस फिल्म ने रिलीज के छठे दिन पहले दिन से ज्यादा कमाई दर्ज की है, जिससे निर्माताओं को कुछ राहत मिली है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, फिल्म ने बुधवार यानी रिलीज के छठे दिन लगभग 1.80 करोड़ रुपये का नेट कलेक्शन किया। दिलचस्प बात यह है कि फिल्म ने पहले दिन सिर्फ 1.15 करोड़ रुपये से ओपनिंग की थी। इस तरह छठे दिन की कमाई शुरुआती दिन के मुकाबले करीब 50 प्रतिशत अधिक रही। छह दिनों में 10 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार फिल्म का कुल छह दिनों का भारतीय नेट बॉक्स ऑफिस कलेक्शन लगभग 10.25 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। अनुमान है कि पहले सप्ताह के अंत तक फिल्म करीब 12 करोड़ रुपये का कारोबार कर सकती है। दिनवार बॉक्स ऑफिस कलेक्शन दिन कमाई शुक्रवार ₹1.15 करोड़ शनिवार ₹1.85 करोड़ रविवार ₹2.60 करोड़ सोमवार ₹1.20 करोड़ मंगलवार ₹1.65 करोड़ बुधवार ₹1.80 करोड़ कुल ₹10.25 करोड़ पंजाब और दिल्ली-एनसीआर में मिल रहा बेहतर रिस्पॉन्स फिल्म को सबसे अच्छा रिस्पॉन्स ईस्ट पंजाब और दिल्ली-एनसीआर सर्किट से मिल रहा है। इसकी बड़ी वजह दिलजीत दोसांझ की लोकप्रियता और फिल्म का विभाजन (Partition) से जुड़ा भावनात्मक विषय माना जा रहा है। हालांकि ट्रेड विशेषज्ञों का मानना है कि इन क्षेत्रों में भी फिल्म का प्रदर्शन औसत ही कहा जा सकता है। कुछ मल्टीप्लेक्स में अच्छी ऑक्यूपेंसी देखने को मिली है, लेकिन कुल मिलाकर फिल्म अभी भी बड़े स्तर पर दर्शकों को आकर्षित करने में संघर्ष कर रही है। वीकेंड पर होगा असली इम्तिहान फिल्म को बॉक्स ऑफिस पर मजबूत स्थिति में पहुंचने के लिए आने वाले वीकेंड में बड़ी छलांग लगाने की जरूरत होगी। ट्रेड विश्लेषकों के अनुसार, यदि रविवार को फिल्म 4 से 5 करोड़ रुपये तक की कमाई करने में सफल रहती है और इसके बाद भी स्थिर प्रदर्शन बनाए रखती है, तभी इसकी स्थिति बेहतर हो सकती है। लेकिन यह राह आसान नहीं है, क्योंकि जल्द ही 'कॉकटेल 2' रिलीज होने जा रही है, जो लगभग उसी दर्शक वर्ग को आकर्षित करेगी जिसे 'मैन वापस आऊंगा' टारगेट कर रही है। इम्तियाज अली के लिए राहत की खबर पिछली कुछ फिल्मों के बॉक्स ऑफिस प्रदर्शन को देखते हुए इम्तियाज अली के लिए यह फिल्म एक उम्मीद की किरण लेकर आई है। उनकी फिल्मों को आमतौर पर अच्छा संगीत और एक खास दर्शक वर्ग का समर्थन मिलता है, लेकिन कई बार शुरुआती उत्साह के बाद कलेक्शन में गिरावट देखी जाती रही है। इस बार स्थिति उलट है। शुरुआत कमजोर रही, लेकिन फिल्म धीरे-धीरे अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है। हालांकि फिल्म की लागत को देखते हुए सिर्फ यह पॉजिटिव ट्रेंड ही पर्याप्त साबित होगा या नहीं, यह आने वाले दिनों में साफ हो जाएगा।  

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नेटफ्लिक्स पर दस्तक देने को तैयार 'लॉक अप 2' में इस बार कंगना रनौत की जगह फराह खान और रितेश देशमुख थामेंगे जेल की कमान। नई दिल्ली, एजेंसियां। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रियलिटी शो का क्रेज लगातार बढ़ रहा है और अब दर्शकों को एक नए और कड़े इम्तिहान का इंतजार है। 'लॉक अप' का दूसरा सीजन 27 जून, 2026 से नेटफ्लिक्स पर स्ट्रीम होने वाला है। इस सीजन में न केवल मंच बदला है, बल्कि शो के फॉर्मेट में भी कई अहम बदलाव किए गए हैं, जो इसे भारतीय रियलिटी शो के बाजार में एक अलग पहचान देने की कोशिश कर रहे हैं। इस सीजन की सबसे बड़ी चर्चा का विषय इसके नए 'जेलर' हैं। अब तक कंगना रनौत की कड़क आवाज से शो की लगाम संभाली जाती थी, लेकिन अब फराह खान और रितेश देशमुख दर्शकों को अपनी जुगलबंदी से लुभाते दिखेंगे। शो के प्रोमो में इन दोनों का नया अवतार काफी सख्त और चुनौतीपूर्ण लग रहा है, जिससे यह साफ होता है कि इस बार शो का मिजाज काफी अलग और इंटेंस होने वाला है। शो की थीम 'सच या सजा' रखी गई है, जो प्रतियोगियों के लिए मानसिक रूप से काफी दबाव वाली साबित हो सकती है। निर्माताओं ने इस बार 14 चर्चित हस्तियों को एक साथ लॉक करने का फैसला किया है। इनमें सुनीता आहूजा, शिवांगी जोशी, शिल्पा शिंदे, योगेश रावत, आकांक्षा चौधरी, प्रियंका शर्मा, विकास गुप्ता, रश्मि देसाई, पुनीत सुपरस्टार, अर्चना गौतम, उर्वशी ढोलकिया, प्रणीत मोरे, आसिम रियाज, कुशा कपिला और हर्षद चोपड़ा जैसे नाम शामिल हैं। यह शो केवल एक प्रतिस्पर्धा नहीं, बल्कि एक 'सर्वाइवल गेम' है। कंटेस्टेंट्स को न केवल टास्क जीतने होंगे, बल्कि कैमरे के सामने अपने जीवन के उन अंधेरे पहलुओं और गहरे रहस्यों को भी साझा करना होगा जिन्हें वे अब तक छुपाते आए हैं। उदाहरण के तौर पर, शिल्पा शिंदे जैसे सितारों का जुड़ना पहले ही शो को सुर्खियों में ला चुका है, जो उनके पिछले विवादों को देखते हुए एक बड़ा कार्ड माना जा रहा है। रियलिटी शो के जानकारों का मानना है कि 'सच या सजा' का यह नया फॉर्मेट दर्शकों की उत्सुकता को और बढ़ाएगा। लोग अब केवल नाच-गाने या झगड़ों को नहीं, बल्कि हस्तियों की सच्चाई और उनके असली व्यक्तित्व को करीब से देखना चाहते हैं। फराह खान और रितेश देशमुख की जोड़ी के साथ यह शो डिजिटल ओटीटी स्पेस में कितना बड़ा धमाका करता है, यह देखना दिलचस्प होगा।

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Deepshikha जून 15, 2026 0

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