फैशन और ब्यूटी

White Tennis Shoes Trend 2026

समर 2026 में लौट आया 90s का फैशन ट्रेंड! Loafers नहीं, अब White Tennis Shoes बन रहे सबसे बड़े स्टाइल स्टेटमेंट

surbhi मई 11, 2026 0
White 90s tennis shoes paired with denim and summer casual fashion look
White Tennis Shoes Summer Trend 2026

90 के दशक के सफेद टेनिस शूज़ फिर हुए ट्रेंड में

फैशन की दुनिया में पुराने ट्रेंड्स की वापसी कोई नई बात नहीं है, लेकिन समर 2026 में एक ऐसा फुटवियर ट्रेंड वापसी कर रहा है जिसने फैशन प्रेमियों का ध्यान खींच लिया है। इस बार Loafers और भारी Sneakers को छोड़ लोग 90s के क्लासिक White Tennis Shoes यानी Canvas Plimsolls को फिर से अपनाने लगे हैं।

हल्के, सिंपल और मिनिमल डिजाइन वाले ये जूते अब गर्मियों के सबसे बड़े फैशन ट्रेंड के रूप में सामने आ रहे हैं। खास बात यह है कि इन शूज़ को कभी Julia Roberts, Jennifer Aniston और Sarah Jessica Parker जैसी हॉलीवुड स्टार्स ने खूब लोकप्रिय बनाया था।

Prada और Celine जैसे बड़े ब्रांड्स ने बढ़ाया क्रेज

समर और स्प्रिंग 2026 फैशन रनवे में भी White Tennis Shoes की मजबूत वापसी देखने को मिली। लग्जरी फैशन ब्रांड Prada ने अपने Spring/Summer 2026 कलेक्शन में सफेद प्लिमसोल्स को प्रमुखता दी, जबकि Celine के रनवे पर भी इसी तरह के मिनिमल व्हाइट शूज़ नजर आए।

फैशन एक्सपर्ट्स का मानना है कि भारी और chunky sneakers के दौर के बाद लोग अब हल्के और क्लासिक फुटवियर की तरफ लौट रहे हैं।

क्यों पसंद आ रहे हैं ये शूज़?

White Tennis Shoes की सबसे बड़ी खासियत उनका सिंपल और versatile होना है। इन्हें jeans, leggings, shorts और summer dresses के साथ आसानी से पहना जा सकता है। यही वजह है कि यह casual fashion lovers की पहली पसंद बनते जा रहे हैं।

फैशन इंडस्ट्री में बढ़ते “minimalist trend” और 90s nostalgia ने भी इन जूतों की लोकप्रियता बढ़ा दी है। सोशल मीडिया पर भी #90sFashion और #TennisShoesTrend तेजी से वायरल हो रहे हैं।

2000s Indie Sleaze फैशन की भी वापसी

फैशन विशेषज्ञों के मुताबिक 2000s के “Indie Sleaze” स्टाइल की वापसी ने भी White Canvas Shoes को दोबारा ट्रेंड में ला दिया है। उस दौर में ये जूते कॉलेज और स्ट्रीट फैशन का अहम हिस्सा हुआ करते थे।

अब Gen Z और Millennials दोनों ही इस retro look को पसंद कर रहे हैं। खासकर गर्मियों में हल्के और breathable footwear की मांग बढ़ने से इनकी लोकप्रियता और तेजी से बढ़ रही है।

समर फैशन में बनेगा नया स्टाइल आइकन

फैशन जानकारों का कहना है कि आने वाले महीनों में White Tennis Shoes महिलाओं और युवाओं के summer wardrobe का जरूरी हिस्सा बन सकते हैं। ये न सिर्फ आरामदायक हैं बल्कि classic look भी देते हैं।

90s inspired fashion के बढ़ते ट्रेंड के बीच अब साफ है कि समर 2026 में simple white plimsolls फिर से fashion streets पर राज करने वाले हैं।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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दुनिया के सबसे बड़े फैशन इवेंट Met Gala में इस बार भारतीय संस्कृति की अनोखी झलक देखने को मिली। जहां रेड कार्पेट पर हीरे-जवाहरात और ग्लैमरस आउटफिट्स छाए रहते हैं, वहीं इस बार स्टेनलेस स्टील के देसी बर्तन–डिब्बा, कटोरी और कड़छी–हाई फैशन का हिस्सा बनकर सबका ध्यान खींच ले गए। अनन्या बिड़ला का अनोखा लुक इस खास लुक को पेश किया Ananya Birla ने, जिन्हें स्टाइल किया था Rhea Kapoor ने। उन्होंने Robert Wun के कस्टम कूट्योर आउटफिट के साथ एक खास मास्क पहना, जिसे मशहूर भारतीय कलाकार Subodh Gupta ने डिजाइन किया था। बर्तनों से बना ‘कूट्योर मास्क’ इस मास्क की सबसे बड़ी खासियत थी इसका निर्माण–यह स्टेनलेस स्टील और एक्रेलिक से बना था और इसमें रोजमर्रा के भारतीय किचन आइटम्स का इस्तेमाल किया गया था। यह मास्क देखने में एक ‘स्कल’ जैसा लगता था, लेकिन इसकी कॉन्सेप्ट साधारण चीजों को असाधारण बनाना था। अनन्या बिड़ला के मुताबिक, यह मास्क “एक साथ हेलमेट और डिस्गाइज” जैसा है–जो पहचान को छुपाते हुए एक मजबूत विजुअल स्टेटमेंट देता है। आउटफिट में इंडियन इंडस्ट्रियल टच उनके आउटफिट में भी खास भारतीय संदर्भ देखने को मिला: सिल्क-वूल ब्लेज़र पाउडर ब्लू शर्ट (वर्कवेयर इंस्पिरेशन) गन-मेटल ऑर्गेंजा बॉल गाउन स्कर्ट यह लुक भारत की इंडस्ट्रियल विरासत और आम कामकाजी जीवन को दर्शाता है। ‘Fashion is Art’ थीम को दिया नया आयाम इस साल Costume Institute की थीम “Fashion is Art” थी, और इस लुक ने इसे पूरी तरह साकार किया। रोजमर्रा के बर्तनों को कला और फैशन के स्तर तक ले जाना इस थीम की सबसे क्रिएटिव व्याख्या मानी जा रही है। देसी सितारों की मजबूत मौजूदगी Met Gala 2026 में भारतीय और साउथ एशियन सेलेब्रिटीज की मजबूत मौजूदगी देखने को मिली: Karan Johar (मनीष मल्होत्रा कूट्योर) Manish Malhotra Isha Ambani Natasha Poonawalla Simone Ashley यह भारतीय फैशन और आर्ट के लिए एक बड़ा ग्लोबल मंच साबित हुआ। क्या संदेश देता है यह ट्रेंड? यह ट्रेंड दिखाता है कि अब फैशन सिर्फ महंगे कपड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संस्कृति, पहचान और रोजमर्रा की चीजों को भी ग्लोबल स्टेज पर ले जा सकता है। भारतीय कला और शिल्प की यह नई प्रस्तुति अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की रचनात्मक ताकत को उजागर करती है।  

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महंगे प्रोडक्ट्स छोड़ें, अपनाएं ये देसी फेस पैक और पाएं निखार

नई दिल्ली, एजेंसियां। गर्मियों के मौसम में तेज धूप, पसीना और धूल-मिट्टी के कारण त्वचा बेजान और थकी हुई नजर आने लगती है। कई बार सनटैन, जलन और रेडनेस जैसी समस्याएं भी बढ़ जाती हैं। ऐसे में लोग महंगे स्किनकेयर प्रोडक्ट्स का सहारा लेते हैं, लेकिन हर बार ये सुरक्षित या असरदार हों, यह जरूरी नहीं। ऐसे में घर पर बना दही और खीरे का फेस पैक एक आसान, सस्ता और नैचुरल उपाय बन सकता है, जो त्वचा को ठंडक और निखार देता है।   क्यों फायदेमंद है दही और खीरा? दही और खीरा दोनों ही स्किन के लिए बेहद लाभकारी माने जाते हैं। दही में मौजूद लैक्टिक एसिड त्वचा को मुलायम बनाने और डेड स्किन हटाने में मदद करता है। वहीं खीरे में पानी की मात्रा अधिक होती है, जो त्वचा को हाइड्रेट रखता है और ठंडक प्रदान करता है। इन दोनों का संयोजन स्किन को फ्रेश, साफ और ग्लोइंग बनाने में मदद करता है। साथ ही यह सनबर्न और टैनिंग से राहत देने में भी कारगर है।   फेस पैक बनाने का आसान तरीका इस फेस पैक को बनाने के लिए ज्यादा सामग्री की जरूरत नहीं होती। 2 चम्मच ताजा दही लें   आधा खीरा कद्दूकस करके मिलाएं चाहें तो 1 चम्मच शहद भी जोड़ सकते हैं इन सभी चीजों को अच्छी तरह मिलाकर एक स्मूद पेस्ट तैयार कर लें।   लगाने का सही तरीका फेस पैक लगाने से पहले चेहरे को अच्छी तरह साफ कर लें, ताकि धूल और गंदगी हट जाए। इसके बाद तैयार पेस्ट को चेहरे और गर्दन पर समान रूप से लगाएं। इसे करीब 20 मिनट तक सूखने दें। सूखने के बाद ठंडे पानी से हल्के हाथों से मसाज करते हुए धो लें। इससे त्वचा तुरंत साफ और ठंडी महसूस होगी। बेहतर परिणाम के लिए इस फेस पैक का इस्तेमाल हफ्ते में 2–3 बार किया जा सकता है।   क्या मिलेंगे फायदे? इस फेस पैक के नियमित उपयोग से त्वचा को ठंडक मिलती है और सनटैन कम होता है। यह स्किन को मॉइस्चराइज करता है, जिससे चेहरा सॉफ्ट और हेल्दी दिखता है। इसके अलावा यह पिंपल्स और ऑयली स्किन की समस्या को कम करने में भी मदद करता है। अगर आप गर्मियों में बिना ज्यादा खर्च के अपनी त्वचा को हेल्दी और ग्लोइंग बनाना चाहते हैं, तो दही और खीरे का यह फेस पैक एक बेहतरीन विकल्प है। यह प्राकृतिक उपाय न सिर्फ आसान है, बल्कि नियमित उपयोग से आपकी स्किन को ताजगी और निखार भी देता है।

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