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Gold-Silver Price: भू-राजनीतिक तनाव घटते ही सोना-चांदी हुए सस्ते

abhishek singh जून 19, 2026 0
Gold Silver Price Update
Gold Silver Price

नई दिल्ली, एजेंसियां। वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव कम होने के संकेत मिलते ही सुरक्षित निवेश (सेफ हेवन) माने जाने वाले सोना और चांदी की कीमतों में लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में गिरावट दर्ज की गई। शुक्रवार को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) और अंतरराष्ट्रीय बाजार दोनों में कीमती धातुओं पर दबाव देखने को मिला, जिससे निवेशकों के बीच मुनाफावसूली बढ़ गई।

 

सोने में 2.35 फीसदी, चांदी में 3.58 फीसदी की गिरावट

 

एमसीएक्स पर अगस्त डिलीवरी वाला सोना अपने पिछले बंद भाव 1,49,309 रुपये प्रति 10 ग्राम से गिरकर दिन के दौरान 1,45,800 रुपये तक पहुंच गया। शुरुआती कारोबार में यह करीब 2.35 प्रतिशत की गिरावट के साथ 1,45,802 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार करता दिखाई दिया।


वहीं, जुलाई डिलीवरी वाली चांदी में भी तेज कमजोरी रही। चांदी का भाव 8,515 रुपये यानी 3.58 प्रतिशत टूटकर 2,29,057 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गया। कारोबार के दौरान इसका निचला स्तर 2,28,800 रुपये प्रति किलोग्राम दर्ज किया गया।

 

वैश्विक बाजार में भी दबाव


अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट देखने को मिली। कॉमेक्स गोल्ड करीब 2.4 प्रतिशत फिसलकर 4,141 डॉलर के स्तर पर कारोबार करता नजर आया, जबकि कॉमेक्स सिल्वर में 4.3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह 63.45 डॉलर के आसपास ट्रेड करता दिखा।

 

विशेषज्ञ बोले- लंबी अवधि के निवेशकों के लिए अवसर


बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतियों, डॉलर की मजबूती, तेल की बढ़ती कीमतों और ब्याज दरों को लेकर बनी अनिश्चितता ने कीमती धातुओं पर दबाव बढ़ाया है। हालांकि उनका मानना है कि यह गिरावट बाजार की सामान्य चाल का हिस्सा है, न कि किसी बुनियादी कमजोरी का संकेत।

 

विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय के निवेशकों के लिए सोना अब भी एक महत्वपूर्ण निवेश विकल्प बना हुआ है। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं, केंद्रीय बैंकों की लगातार सोने की खरीद और बढ़ते सरकारी कर्ज को देखते हुए आने वाले वर्षों में कीमती धातुओं की अहमियत बरकरार रह सकती है।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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Reserve Bank of India headquarters with gold bars and foreign exchange reserve charts showing a sharp decline.
Forex Watch: भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में फिर बड़ी गिरावट, सोने के रिजर्व की वैल्यू में भारी कमी

मुंबई: भारत के विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Exchange Reserves) में एक बार फिर बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, 12 जून 2026 को समाप्त सप्ताह के दौरान देश के विदेशी मुद्रा भंडार में लगभग 9.985 अरब डॉलर की कमी आई है। इससे पहले वाले सप्ताह में भी भंडार में 711 मिलियन डॉलर की गिरावट दर्ज की गई थी। इस ताजा गिरावट की सबसे बड़ी वजह सोने की कीमतों में आई कमजोरी मानी जा रही है, जिससे आरबीआई के गोल्ड रिजर्व के मूल्य पर सीधा असर पड़ा। विदेशी मुद्रा भंडार घटकर 671.62 अरब डॉलर पर पहुंचा आरबीआई के आंकड़ों के मुताबिक, भारी गिरावट के बाद भारत का कुल विदेशी मुद्रा भंडार घटकर 671.625 अरब डॉलर रह गया है। गौरतलब है कि 27 फरवरी 2026 को देश का विदेशी मुद्रा भंडार 728.494 अरब डॉलर के रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंचा था। इसके बाद से इसमें उतार-चढ़ाव का दौर जारी है। विदेशी मुद्रा आस्तियों (FCA) में हुई बढ़ोतरी हालांकि कुल भंडार में गिरावट के बीच एक सकारात्मक पहलू भी देखने को मिला। समीक्षा सप्ताह के दौरान भारत की फॉरेन करेंसी एसेट्स (FCA) में 846 मिलियन डॉलर की बढ़ोतरी हुई। इसके बाद FCA का कुल आकार बढ़कर 544.290 अरब डॉलर हो गया है। विदेशी मुद्रा आस्तियां कुल विदेशी मुद्रा भंडार का सबसे बड़ा हिस्सा होती हैं और इनमें डॉलर के अलावा यूरो, पाउंड और जापानी येन जैसी अन्य प्रमुख मुद्राओं में होने वाले उतार-चढ़ाव का भी प्रभाव शामिल होता है। गोल्ड रिजर्व की वैल्यू में 10.75 अरब डॉलर की गिरावट बीते सप्ताह सोने की कीमतों में आई गिरावट का सीधा असर आरबीआई के स्वर्ण भंडार पर पड़ा। गोल्ड रिजर्व की वैल्यू में 10.754 अरब डॉलर की कमी आई। अब देश के गोल्ड रिजर्व का मूल्य घटकर 100.112 अरब डॉलर रह गया है। मार्च 2026 के अंत तक आरबीआई के पास कुल 880.52 टन सोना मौजूद था। देश के कुल विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी लगभग 16.7 प्रतिशत है, इसलिए इसकी कीमतों में बदलाव का सीधा असर कुल रिजर्व पर पड़ता है। SDR और IMF रिजर्व में भी मामूली गिरावट आरबीआई के मुताबिक: विशेष आहरण अधिकार (SDR) में 66 मिलियन डॉलर की कमी आई। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के पास रखे भारत के रिजर्व में 11 मिलियन डॉलर की गिरावट दर्ज की गई। फिलहाल IMF के पास भारत का रिजर्व 4.815 अरब डॉलर है। क्या है विदेशी मुद्रा भंडार? विदेशी मुद्रा भंडार किसी देश की आर्थिक मजबूती का महत्वपूर्ण संकेतक माना जाता है। इसका उपयोग आयात भुगतान, मुद्रा स्थिरता बनाए रखने और वैश्विक आर्थिक झटकों से निपटने के लिए किया जाता है।  

surbhi जून 20, 2026 0
Indian Railways freight wagons carrying fly ash from thermal power plants for industrial and infrastructure projects.

Indian Railways News: अब राख से होगी रेलवे की कमाई, फ्लाई ऐश ढुलाई के लिए तैयार हो रहा बड़ा प्लान

Share Market

लाल निशान पर बंद हुआ बाजार, सेंसेक्स 607 अंक टूटा, निफ्टी 154 अंक फिसला

Falling stock market graph representing the sharp decline in Indian IT shares and investor losses.

IT Stock Crash: आईटी शेयरों में बड़ी गिरावट, निवेशकों के ₹1.35 लाख करोड़ डूबे, टीसीएस और इन्फोसिस पहुंचे 52 हफ्ते के निचले स्तर पर

Passenger aircraft at an airport as airlines maintain high ticket prices despite easing oil market concerns.
होर्मुज खुलने के बावजूद अभी सस्ते नहीं होंगे फ्लाइट टिकट, जानिए क्यों नहीं मिलेगा तुरंत राहत का फायदा

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने और समझौता होने के बाद वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी देखने को मिल रही है। होर्मुज जलडमरूमध्य के सामान्य होने से तेल आपूर्ति में सुधार की उम्मीद भी बढ़ी है, लेकिन इसके बावजूद हवाई यात्रियों को अभी सस्ती फ्लाइट टिकट का इंतजार करना पड़ेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि अगले तीन से चार महीनों तक विमान किराए में बड़ी राहत मिलने की संभावना बेहद कम है। इस तिमाही में किराया घटने की उम्मीद कम एविएशन सेक्टर के जानकारों के मुताबिक अधिकांश एयरलाइंस आने वाले कुछ महीनों के लिए अपनी ऑपरेशनल लागत पहले ही तय कर चुकी हैं। ऐसे में ईंधन की कीमतों में गिरावट का सीधा असर तुरंत टिकटों पर नहीं दिखाई देगा। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि एयर टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों में 10 प्रतिशत कमी भी आती है, तो इसका मतलब यह नहीं कि विमान किराया भी उतना ही घट जाएगा। अभी भी ऊंचे स्तर पर हैं ATF के दाम इजरायल-ईरान संघर्ष शुरू होने से पहले की तुलना में एयर टर्बाइन फ्यूल की कीमतें अभी भी काफी ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। बढ़ती लागत के कारण दुनिया भर की कई एयरलाइंस को उड़ानों में कटौती करने और किराए बढ़ाने पड़े थे। अब जबकि हालात सामान्य होने की दिशा में बढ़ रहे हैं, तब भी ईंधन की कीमतों को पुराने स्तर तक पहुंचने में समय लगेगा। एयरलाइंस का सबसे बड़ा खर्च है ईंधन एविएशन उद्योग में जेट फ्यूल सबसे बड़ा खर्च माना जाता है। नए विमानों वाली एयरलाइंस के कुल संचालन खर्च का 25 से 35 प्रतिशत हिस्सा ATF पर खर्च होता है। पुराने विमानों का संचालन करने वाली कंपनियों के लिए यह खर्च 40 से 50 प्रतिशत तक पहुंच जाता है। यही वजह है कि ईंधन की कीमतों में बदलाव का असर एयरलाइन कंपनियों की लागत पर सीधे पड़ता है। अभी टिकट सस्ते करने का दबाव नहीं युद्ध के दौरान बढ़ी हुई लागत का कुछ हिस्सा एयरलाइंस ने खुद वहन किया, जबकि बाकी भार यात्रियों पर बढ़े हुए किराए के रूप में डाला गया। अब कई एयरलाइंस को टिकट कीमतें घटाने की तत्काल जरूरत महसूस नहीं हो रही है, क्योंकि मौजूदा समय में यात्री ऊंचे किराए पर भी यात्रा करने को तैयार हैं। तेल उत्पादन और सप्लाई चेन को सामान्य होने में लगेगा समय विशेषज्ञों के अनुसार, युद्ध के दौरान खाड़ी क्षेत्र में कई तेल कुओं और संबंधित सुविधाओं को बंद कर दिया गया था। इन्हें दोबारा पूरी क्षमता से शुरू करने, रिफाइनरियों को सक्रिय करने और सप्लाई नेटवर्क को सामान्य बनाने में समय लगेगा। इसके अलावा, सुरक्षा कारणों से दूर चले गए तेल टैंकरों और शिपिंग नेटवर्क को भी पहले जैसी स्थिति में लौटने में कई सप्ताह या महीनों का समय लग सकता है। कब मिल सकती है राहत? अगर वैश्विक हालात स्थिर बने रहते हैं और कच्चे तेल की कीमतों में लगातार गिरावट जारी रहती है, तो वर्ष की अगली तिमाही में हवाई किराए में कुछ राहत देखने को मिल सकती है। हालांकि फिलहाल यात्रियों को महंगे टिकट के साथ ही यात्रा करनी पड़ सकती है।  

surbhi जून 19, 2026 0
Gold and silver jewellery displayed as precious metal prices decline sharply on June 19, 2026.

Gold Silver Price Today 19 June 2026: सोना ₹3,000 से ज्यादा टूटा, चांदी में ₹8,000 तक की गिरावट, जानिए आपके शहर का नया भाव

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Gold-Silver Price: भू-राजनीतिक तनाव घटते ही सोना-चांदी हुए सस्ते

Stock Market

Stock Market: शेयर बाजार में भारी गिरावट: सेंसेक्स 750 अंक से ज्यादा टूटा, निफ्टी 24 हजार के नीचे

Share Market
बढ़त के साथ बंद हुआ शेयर बाजार , सेंसेक्स 254 अंक चढ़ा, निफ्टी 24150 के पार

नई दिल्ली, एजेंसियां। अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सख्त रुख के बावजूद भारतीय शेयर बाजार ने गुरुवार को शानदार वापसी दर्ज की। शुरुआती गिरावट के बाद मजबूत खरीदारी के दम पर बाजार लगातार पांचवें कारोबारी सत्र में बढ़त के साथ बंद हुआ। दिन के अंत में बीएसई सेंसेक्स 254.36 अंक (0.32%) की बढ़त के साथ 77,409.98 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 82.30 अंक (0.34%) चढ़कर 24,168 के स्तर के पार पहुंच गया।   सुबह दबाव में खुला बाजार, दिन में हुई तेज रिकवरी   कारोबार की शुरुआत में बाजार लाल निशान में खुला था, जिसका कारण अमेरिकी फेडरल रिजर्व की सख्त टिप्पणियां और ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी की आशंका रही। हालांकि, जैसे-जैसे दिन आगे बढ़ा, निवेशकों की चौतरफा खरीदारी ने बाजार को मजबूती दी और शुरुआती दबाव पूरी तरह खत्म हो गया।   सेक्टोरल प्रदर्शन रहा मिश्रित लेकिन मजबूत बाजार में अधिकतर सेक्टर हरे निशान में बंद हुए। रियल्टी, हेल्थकेयर, केमिकल्स और फार्मा सेक्टर ने तेजी को सबसे अधिक सपोर्ट दिया। बैंकिंग सेक्टर में भी अच्छी खरीदारी देखने को मिली, जिसने बाजार को स्थिरता प्रदान की। हालांकि, आईटी सेक्टर आज सबसे बड़ा पिछड़ने वाला क्षेत्र रहा, जहां भारी बिकवाली के कारण दबाव बना रहा।   इन स्टॉक्स ने दिखाया दम कुछ प्रमुख शेयरों ने निवेशकों को अच्छा रिटर्न दिया। मैक्स हेल्थकेयर के शेयरों में करीब 6% की तेजी देखी गई, जबकि इंडिगो के शेयरों में भी मजबूत बढ़त दर्ज की गई।   कच्चे तेल में गिरावट से मिला सपोर्ट बाजार की मजबूती का एक बड़ा कारण कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट भी रहा। इससे घरेलू अर्थव्यवस्था को राहत मिली और निवेशकों का भरोसा बढ़ा। सस्ते तेल और चुनिंदा खरीदारी ने बाजार को वैश्विक दबाव से बचाने में अहम भूमिका निभाई। लगातार पांचवें दिन की तेजी इस बात का संकेत है कि घरेलू बाजार की बुनियाद मजबूत बनी हुई है और निवेशक अभी भी भारतीय इक्विटी में भरोसा बनाए हुए हैं।

abhishek singh जून 18, 2026 0
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