आज का सोना-चांदी भाव, 8 जून 2026: पिछले सप्ताह आई तेज गिरावट के बाद सोमवार को सर्राफा बाजार में कुछ राहत देखने को मिली। हालांकि सोने और चांदी की कीमतों में बड़ी तेजी नहीं आई है, लेकिन गिरावट का सिलसिला फिलहाल थमता नजर आ रहा है। बीते तीन दिनों में सोना करीब 35,000 रुपये प्रति 100 ग्राम तक सस्ता हो चुका है, जबकि चांदी में भी भारी कमजोरी दर्ज की गई थी। ऐसे में निवेशकों और खरीदारी की योजना बना रहे लोगों की नजर आज के ताजा भाव पर बनी हुई है।
देश के अधिकांश प्रमुख शहरों में आज 24 कैरेट सोने का भाव लगभग 1,52,720 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया। वहीं 22 कैरेट और 18 कैरेट सोने की कीमतों में भी मामूली नरमी देखने को मिली।
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चांदी की कीमतों में पिछले कुछ दिनों के दौरान बड़ा उतार-चढ़ाव देखने को मिला था। वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता और अमेरिका-ईरान तनाव के चलते चांदी करीब 15,000 रुपये प्रति किलो तक टूट गई थी। आज बाजार में चांदी के भाव लगभग स्थिर बने हुए हैं।
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विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में जारी अनिश्चितता और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण कीमती धातुओं में अभी भी उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। फिलहाल बाजार में स्थिरता के संकेत जरूर हैं, लेकिन आने वाले दिनों में वैश्विक घटनाक्रम कीमतों की दिशा तय करेंगे।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
नई दिल्ली: घरेलू शेयर बाजार में आज सकारात्मक शुरुआत देखने को मिली। शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 400 अंक से अधिक की तेजी के साथ कारोबार करता दिखा, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी50 इंडेक्स 23,300 के स्तर को पार कर गया। सुबह करीब 9:45 बजे सेंसेक्स 430.61 अंक यानी 0.58 फीसदी की बढ़त के साथ 74,349.37 अंक पर कारोबार कर रहा था। वहीं, निफ्टी 114.45 अंक या 0.49 फीसदी चढ़कर 23,356.55 अंक पर पहुंच गया। इस बीच भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 0.2 फीसदी कमजोर होकर 95.54 पर खुला। पिछले कारोबारी सत्र में रुपया 95.35 के स्तर पर बंद हुआ था। रिलायंस इंडस्ट्रीज में सबसे ज्यादा तेजी सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 22 शेयर हरे निशान में खुले। सबसे ज्यादा बढ़त रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों में दर्ज की गई, जो करीब 1.5 फीसदी मजबूत हुए। इसके अलावा इन शेयरों में भी तेजी रही: हिंदुस्तान यूनिलीवर भारत इलेक्ट्रॉनिक्स (BEL) इन्फोसिस ट्रेंट स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) लार्सन एंड टुब्रो (L&T) एचडीएफसी बैंक टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) इन शेयरों में रही कमजोरी दूसरी ओर कुछ प्रमुख शेयरों में गिरावट भी देखने को मिली। इनमें शामिल हैं: बजाज फिनसर्व पावरग्रिड टेक महिंद्रा एचसीएल टेक महिंद्रा एंड महिंद्रा सन फार्मा मारुति सुजुकी मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों का प्रदर्शन ब्रॉडर मार्केट में भी मिश्रित रुख देखने को मिला। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 0.01 फीसदी की बढ़त रही। निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स 0.25 फीसदी मजबूत हुआ। सेक्टरवार प्रदर्शन आज के कारोबार में FMCG सेक्टर सबसे मजबूत रहा। निफ्टी FMCG इंडेक्स में लगभग 1 फीसदी की तेजी दर्ज की गई। इसके अलावा: आईटी सेक्टर में खरीदारी प्राइवेट बैंकिंग शेयरों में मजबूती ऑयल एंड गैस सेक्टर में बढ़त वहीं, मेटल और ऑटो सेक्टर में दबाव देखने को मिला। कच्चे तेल की कीमतों में भी बढ़ोतरी पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतों में हल्की तेजी देखी गई है। ब्रेंट क्रूड 0.65 फीसदी बढ़कर 92.04 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। इंडियन बास्केट की कीमत 1.31 फीसदी बढ़कर 97.19 डॉलर प्रति बैरल हो गई। विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय हालात और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव आने वाले दिनों में भारतीय बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित होने के कारण देश में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की कमी देखने को मिल रही है। इस संकट का असर भारतीय रेलवे की खानपान सेवाओं पर भी पड़ा है। स्थिति से निपटने के लिए इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन (IRCTC) ने कई वर्षों बाद फिर से चलती ट्रेनों में खाना पकाने की व्यवस्था शुरू कर दी है। हालांकि इस बार पारंपरिक गैस चूल्हों की जगह इलेक्ट्रिक इंडक्शन स्टोव का इस्तेमाल किया जा रहा है। क्यों दोबारा शुरू करनी पड़ी पैंट्री कार कुकिंग? पिछले कुछ वर्षों में सुरक्षा कारणों से रेलवे ने चरणबद्ध तरीके से चलती ट्रेनों में खाना पकाने की व्यवस्था बंद कर दी थी और बेस किचन मॉडल अपनाया था। लेकिन एलपीजी की मौजूदा किल्लत के कारण IRCTC को वैकल्पिक व्यवस्था अपनानी पड़ी है। अब LHB पैंट्री कारों में बिजली की मदद से खाना तैयार किया जा रहा है। राजधानी, शताब्दी, दुरंतो और वंदे भारत जैसी अधिकांश प्रीमियम ट्रेनें LHB कोच के साथ संचालित होती हैं। रोजाना 17 लाख यात्रियों को मिलती है फूड सर्विस IRCTC देशभर में करीब 1,400 ट्रेनों में खानपान सेवाएं उपलब्ध कराती है। हर साल लगभग 58 करोड़ यात्रियों को भोजन उपलब्ध कराया जाता है, जबकि प्रतिदिन यह संख्या करीब 17 लाख तक पहुंचती है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, क्लस्टर किचन, बेस किचन और अन्य कैटरिंग सुविधाओं को संचालित करने के लिए प्रतिदिन लगभग 1,000 कमर्शियल LPG सिलेंडरों की आवश्यकता होती है। बड़े स्टेशनों पर भी बढ़ा बिजली का इस्तेमाल IRCTC के CMD संजय कुमार जैन के अनुसार, सभी LHB पैंट्री कारों में पहले से सुरक्षा सुविधाएं मौजूद हैं, इसलिए वहां इंडक्शन आधारित कुकिंग की अनुमति दी गई है। इसके अलावा बड़े रेलवे स्टेशनों पर भी इंडक्शन कुकिंग को बढ़ावा दिया गया है। फ़ूड प्लाजा, रिफ्रेशमेंट रूम और जन आहार आउटलेट संचालकों को माइक्रोवेव और इंडक्शन कुकर के उपयोग के निर्देश दिए गए हैं। वर्तमान में रेलवे किचन में तैयार होने वाले लगभग 60 प्रतिशत भोजन को बिजली की मदद से पकाया जा रहा है। तेल संकट का असर IRCTC की कमाई पर भी बढ़ती इनपुट लागत का असर IRCTC के मुनाफे पर भी दिखाई देने लगा है। वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में कैटरिंग सेगमेंट का EBIT मार्जिन घटकर 6.3 प्रतिशत रह गया, जबकि इससे पहले यह 10.4 प्रतिशत था। विश्लेषकों का मानना है कि यदि लागत का दबाव जारी रहता है तो भविष्य में कीमतों में बदलाव या सेवा मॉडल में सुधार की आवश्यकता पड़ सकती है। हालांकि IRCTC ने स्पष्ट किया है कि कैटरिंग की कीमतें तय करने का अधिकार रेलवे मंत्रालय के पास है। अब भी 341 ट्रेनों में पैंट्री सुविधा नहीं संसदीय आंकड़ों के मुताबिक देश की लंबी दूरी की 341 ट्रेनों में अभी भी पैंट्री कार की सुविधा उपलब्ध नहीं है। मौजूदा संकट ने रेलवे की कैटरिंग व्यवस्था से जुड़ी कई चुनौतियों को भी सामने ला दिया है।
नई दिल्ली: देश के ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में बैंकिंग सेवाओं को लेकर एक नई चिंता सामने आई है। एटीएम उद्योग से जुड़े संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो टियर-2 और टियर-3 शहरों में बड़ी संख्या में एटीएम बंद हो सकते हैं। इसका सीधा असर लाखों ग्राहकों पर पड़ सकता है, जो आज भी नकदी निकासी के लिए एटीएम पर निर्भर हैं। क्या है पूरा मामला? कन्फेडरेशन ऑफ एटीएम इंडस्ट्री (CATMi) ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के समक्ष अपनी चिंता जताते हुए कहा है कि देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक एसबीआई द्वारा टियर-1 शहरों के एटीएम में आवश्यकता से अधिक नकदी भेजी जा रही है। इसके कारण छोटे शहरों और कस्बों में स्थित एटीएम में नकदी की कमी पैदा हो रही है। रिपोर्ट के अनुसार, 5 जून को आरबीआई और एसबीआई के साथ हुई बैठक में एटीएम ऑपरेटर्स ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। उनका कहना है कि छोटे शहरों में नकदी आपूर्ति प्रभावित होने से कई मशीनें लंबे समय तक ऑफलाइन रहती हैं, जिससे ग्राहकों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। एसबीआई नेटवर्क पर सबसे ज्यादा दबाव एसबीआई के पास देश का सबसे बड़ा एटीएम नेटवर्क है। बैंक के लगभग 65,000 एटीएम देशभर में संचालित हैं। इनमें से करीब आधे एटीएम में नकदी प्रबंधन का कार्य बैंक स्वयं करता है। एटीएम उद्योग का दावा है कि नकदी वितरण में असंतुलन के कारण मेट्रो शहरों में पर्याप्त नकदी उपलब्ध है, जबकि छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में नकदी की कमी बढ़ रही है। ऑपरेटर्स को हुआ ₹100 करोड़ से अधिक का नुकसान एटीएम ऑपरेटर्स का कहना है कि मशीनों के बंद रहने से उन्हें ट्रांजैक्शन और इंटरचेंज शुल्क के रूप में होने वाली आय का नुकसान उठाना पड़ रहा है। उद्योग का दावा है कि अब तक उन्हें 100 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हो चुका है। इसी कारण CATMi ने बैंकिंग क्षेत्र से इस नुकसान की भरपाई की मांग की है। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि 20 जून तक स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो कई एटीएम सेवाएं बंद करनी पड़ सकती हैं। क्यों बढ़ रहा है संकट? एटीएम उद्योग पहले से ही आर्थिक दबाव झेल रहा है। ऑपरेटर्स के अनुसार: न्यूनतम मजदूरी में लगभग 60 प्रतिशत तक वृद्धि हुई है। ईंधन की बढ़ती कीमतों से नकदी परिवहन खर्च बढ़ गया है। एटीएम से नकदी निकासी लगातार कम हो रही है। संचालन लागत बढ़ने के बावजूद आय में वृद्धि नहीं हुई है। घट रहा है एटीएम का उपयोग उद्योग के आंकड़ों के मुताबिक जनवरी 2023 में एटीएम से मासिक निकासी का आंकड़ा लगभग 570 मिलियन था, जो सितंबर 2025 तक घटकर 439.5 मिलियन रह गया। इसके साथ ही देश में एटीएम की कुल संख्या भी कम हो रही है। वर्ष 2023-24: 2.53 लाख से अधिक एटीएम वर्ष 2024-25: लगभग 2.51 लाख एटीएम सबसे अधिक कमी ग्रामीण और छोटे शहरों के एटीएम नेटवर्क में दर्ज की गई है। आम लोगों पर क्या होगा असर? यदि बड़ी संख्या में एटीएम बंद होते हैं, तो गांवों और कस्बों में रहने वाले लोगों को नकदी निकालने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ सकती है। इससे वरिष्ठ नागरिकों, किसानों, छोटे व्यापारियों और नकदी आधारित लेनदेन करने वाले लोगों को सबसे ज्यादा परेशानी हो सकती है। फिलहाल उद्योग और बैंकिंग क्षेत्र के बीच समाधान निकालने की कोशिश जारी है, लेकिन आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सभी की नजर बनी रहेगी।