मुंबई, एजेंसियां। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा है कि भारत की अर्थव्यवस्था की बुनियाद मजबूत बनी हुई है, लेकिन पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और कमजोर दक्षिण-पश्चिम मानसून देश की आर्थिक वृद्धि और महंगाई के लिए सबसे बड़े जोखिम बन सकते हैं। उन्होंने कहा कि RBI इन दोनों मोर्चों पर लगातार नजर बनाए हुए है।
संजय मल्होत्रा ने कहा कि पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने से कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आ सकती है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए तेल महंगा होने का सीधा असर परिवहन लागत, ईंधन और रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर पड़ सकता है। इससे महंगाई बढ़ने और आर्थिक गतिविधियों पर दबाव आने की आशंका है।
RBI गवर्नर ने कहा कि यदि मानसून सामान्य से कमजोर रहता है, तो कृषि उत्पादन प्रभावित हो सकता है। इसका असर खाद्यान्न आपूर्ति, ग्रामीण मांग और उपभोक्ता खर्च पर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र में किसी भी तरह की कमजोरी का प्रभाव समूची अर्थव्यवस्था पर देखने को मिल सकता है।
मल्होत्रा ने कहा कि इन चुनौतियों के बावजूद भारत की आर्थिक स्थिति मजबूत है। सेवा क्षेत्र का अच्छा प्रदर्शन, विदेशी निवेश, निर्यात और घरेलू मांग अर्थव्यवस्था को मजबूती दे रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि रुपया अन्य वैश्विक मुद्राओं की तुलना में अपेक्षाकृत स्थिर बना हुआ है और RBI जरूरत पड़ने पर उचित कदम उठाने के लिए तैयार है।
RBI गवर्नर ने स्पष्ट किया कि केंद्रीय बैंक वैश्विक घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतों और मानसून की प्रगति पर लगातार निगरानी रख रहा है। उन्होंने कहा कि यदि इन जोखिमों का असर महंगाई या आर्थिक वृद्धि पर बढ़ता है, तो RBI समयानुसार आवश्यक नीतिगत कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
मुंबई, एजेंसियां। रिलायंस इंडस्ट्रीज़ के ऑयल-टू-केमिकल्स (O2C) कारोबार ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में शानदार प्रदर्शन किया है। बेहतर रिफाइनिंग मार्जिन और मजबूत परिचालन के दम पर इस कारोबार का राजस्व ₹2 लाख करोड़ के पार पहुंच गया। कंपनी के तिमाही नतीजों में O2C बिजनेस एक बार फिर सबसे बड़े राजस्व स्रोत के रूप में उभरा। रिफाइनिंग और पेट्रोकेमिकल कारोबार से मिली मजबूती रिलायंस को इस तिमाही में वैश्विक बाजार में बेहतर रिफाइनिंग मार्जिन और पेट्रोकेमिकल उत्पादों की मजबूत मांग का फायदा मिला। कंपनी ने कहा कि ऊर्जा बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद उसके एकीकृत रिफाइनिंग और पेट्रोकेमिकल संचालन ने बेहतर प्रदर्शन किया। कच्चे तेल की कीमतों का मिला लाभ विश्लेषकों के अनुसार, पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला। इसका असर रिफाइनिंग कारोबार पर भी पड़ा, लेकिन रिलायंस ने अपनी परिचालन क्षमता और निर्यात प्रदर्शन के दम पर बेहतर कमाई दर्ज की। जियो और रिटेल कारोबार ने भी दिया साथ O2C के अलावा जियो प्लेटफॉर्म्स और रिलायंस रिटेल ने भी कंपनी के समग्र प्रदर्शन को मजबूती दी। जियो के ग्राहकों की संख्या और औसत राजस्व में बढ़ोतरी हुई, जबकि रिटेल कारोबार ने भी मजबूत बिक्री दर्ज की। इससे रिलायंस का कुल तिमाही राजस्व पहली बार ₹3 लाख करोड़ के आंकड़े को पार कर गया। निवेशकों की नजर अगले विस्तार पर बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि O2C कारोबार में लगातार मजबूती और जियो व रिटेल बिजनेस के विस्तार से रिलायंस इंडस्ट्रीज़ की दीर्घकालिक विकास रणनीति को बल मिलेगा। अब निवेशकों की नजर कंपनी की नई ऊर्जा परियोजनाओं और जियो प्लेटफॉर्म्स के संभावित IPO पर बनी हुई है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। भारत का IPO बाजार एक बार फिर तेज़ी पकड़ता दिखाई दे रहा है। हाल ही में SBI फंड्स मैनेजमेंट के आईपीओ को निवेशकों से शानदार प्रतिक्रिया मिलने के बाद अब बाजार की नजर जियो प्लेटफॉर्म्स और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) की संभावित मेगा लिस्टिंग पर टिक गई है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इन दोनों बड़ी कंपनियों की लिस्टिंग भारतीय पूंजी बाजार को नई ऊंचाई दे सकती है। SBI फंड्स IPO से बढ़ा निवेशकों का भरोसा SBI फंड्स मैनेजमेंट के आईपीओ को संस्थागत और खुदरा निवेशकों का मजबूत समर्थन मिला। रिकॉर्ड स्तर पर हुई सब्सक्रिप्शन ने यह संकेत दिया है कि भारतीय शेयर बाजार में निवेशकों का भरोसा कायम है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस सफलता से आने वाले बड़े आईपीओ के लिए भी सकारात्मक माहौल बना है। जियो प्लेटफॉर्म्स की लिस्टिंग पर नजर रिलायंस इंडस्ट्रीज़ की डिजिटल इकाई जियो प्लेटफॉर्म्स की संभावित लिस्टिंग लंबे समय से चर्चा में है। कंपनी ने दूरसंचार, डिजिटल सेवाओं, क्लाउड, AI और फिनटेक जैसे क्षेत्रों में तेजी से विस्तार किया है। यदि कंपनी शेयर बाजार में उतरती है, तो यह भारत के सबसे बड़े आईपीओ में शामिल हो सकती है। NSE IPO को लेकर भी बढ़ी उम्मीदें नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) भी नियामकीय मंजूरियां मिलने के बाद अपने बहुप्रतीक्षित आईपीओ को आगे बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि NSE की लिस्टिंग से भारतीय पूंजी बाजार में निवेशकों की भागीदारी और बढ़ सकती है। पूंजी बाजार को मिल सकती है नई गति विश्लेषकों के अनुसार, यदि जियो प्लेटफॉर्म्स और NSE जैसे बड़े आईपीओ बाजार में आते हैं, तो इससे विदेशी निवेश, घरेलू निवेशकों की भागीदारी और भारतीय शेयर बाजार की वैश्विक साख को बड़ा लाभ मिल सकता है। हालांकि दोनों कंपनियों ने अभी तक आईपीओ की तारीख या आकार को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है।
नई दिल्ली: वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर तेजी देखने को मिली है। अमेरिका में क्रूड ऑयल की इन्वेंट्री (भंडार) उम्मीद से अधिक घटने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट और WTI क्रूड के दाम बढ़ गए हैं। हालांकि, इस बढ़ोतरी का असर फिलहाल भारतीय उपभोक्ताओं पर नहीं पड़ा है। सरकारी तेल कंपनियों ने गुरुवार, 16 जुलाई 2026 को भी देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया। भारत में 25 मई 2026 के बाद से ईंधन की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं और आज लगातार 51वां दिन है, जब पेट्रोल और डीजल के दाम अपरिवर्तित रहे हैं। अमेरिका में क्यों बढ़े कच्चे तेल के दाम? अमेरिका के Energy Information Administration (EIA) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, 10 जुलाई 2026 को समाप्त सप्ताह में देश की क्रूड ऑयल इन्वेंट्री में 5.64 लाख बैरल (564,000 barrels) की कमी दर्ज की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका का कुल क्रूड ऑयल भंडार अब करीब 1.7 मिलियन बैरल पर आ गया है, जो पिछले पांच वर्षों के औसत स्तर से लगभग 6% कम है। इससे बाजार में यह उम्मीद बढ़ी है कि आने वाले समय में अमेरिका अपने तेल भंडार को दोबारा भरने के लिए खरीदारी बढ़ा सकता है। इसी संभावना के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमत गुरुवार सुबह शुरुआती कारोबार में: Brent Crude लगभग 0.34% बढ़कर 85.24 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। WTI Crude करीब 0.52% की तेजी के साथ 80.01 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखाई दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक सप्लाई को लेकर चिंताओं ने भी कच्चे तेल की कीमतों को समर्थन दिया है। भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में नहीं हुआ बदलाव हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम बढ़े हैं, लेकिन भारतीय तेल विपणन कंपनियों ने घरेलू ईंधन कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है। इससे पहले मई 2026 में विधानसभा चुनावों के बाद पेट्रोल और डीजल की कीमतों में चार चरणों में बढ़ोतरी की गई थी। उसके बाद से कीमतें स्थिर बनी हुई हैं। चार महानगरों में पेट्रोल के ताजा दाम (रुपये प्रति लीटर) शहर पेट्रोल दिल्ली ₹102.12 मुंबई ₹111.21 कोलकाता ₹113.51 चेन्नई ₹107.77 चार महानगरों में डीजल के ताजा दाम (रुपये प्रति लीटर) शहर डीजल दिल्ली ₹95.20 मुंबई ₹97.83 कोलकाता ₹99.82 चेन्नई ₹99.55 अन्य प्रमुख शहरों में पेट्रोल-डीजल की कीमत शहर पेट्रोल डीजल नोएडा ₹102.12 ₹97.56 चंडीगढ़ ₹101.51 ₹89.47 लखनऊ ₹101.89 ₹95.36 पटना ₹113.37 ₹99.36 रांची ₹105.26 ₹100.49 भोपाल ₹114.57 ₹99.64 आगे क्या रहेगी नजर? यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी बनी रहती है, तो आने वाले दिनों में घरेलू ईंधन कीमतों पर भी इसका असर देखने को मिल सकता है। फिलहाल तेल कंपनियों ने उपभोक्ताओं को राहत देते हुए पेट्रोल और डीजल के दाम स्थिर रखे हैं।