नई दिल्ली, एजेंसियां। प्रोटीन शरीर को मजबूत बनाने, मसल्स को सही तरीके से काम करने और दिनभर ऊर्जा बनाए रखने के लिए बेहद जरूरी पोषक तत्व है। रोज़ाना खाने में इस्तेमाल होने वाली दालें प्रोटीन का बेहतरीन स्रोत होती हैं, लेकिन कुछ दालें दूसरों की तुलना में अधिक प्रोटीन से भरपूर होती हैं।
कुल्थी दाल:
कुल्थी दाल में 100 ग्राम सूखी दाल पर लगभग 22-24 ग्राम प्रोटीन होता है। यह दाल फाइबर, आयरन और कैल्शियम से भी भरपूर होती है, जो वजन घटाने और किडनी की पथरी जैसी समस्याओं के लिए फायदेमंद मानी जाती है।
उड़द दाल:
उड़द दाल प्रोटीन का सबसे समृद्ध स्रोत है। इसमें लगभग 25 ग्राम प्रोटीन प्रति 100 ग्राम पाया जाता है। यह मसल्स को मजबूत बनाने और शरीर को ताकत देने में मदद करती है।
मसूर और मूंग दाल:
मसूर और मूंग दाल भी प्रोटीन से भरपूर होती हैं। हल्की और आसानी से पचने वाली इन दालों को रोज़ाना की डाइट में शामिल करना स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है।
अरहर दाल:
अरहर दाल में लगभग 20-25% प्रोटीन होता है। इसके अलावा यह फाइबर, आयरन, फोलेट और मैग्नीशियम से भरपूर होती है। नियमित सेवन से पाचन बेहतर होता है, ऊर्जा मिलती है और हृदय स्वास्थ्य में सुधार होता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, रोजाना कम से कम एक कटोरी दाल का सेवन करना चाहिए। अलग-अलग दालों को मिलाकर मिक्स दाल बनाना या दाल को अंकुरित रूप में खाना प्रोटीन की गुणवत्ता और पाचन क्षमता दोनों बढ़ाता है।दालों को अपनी डाइट में नियमित शामिल करने से शरीर फिट, स्ट्रॉन्ग और एनर्जेटिक रहता है। सही दाल का चुनाव और संतुलित मात्रा में सेवन लंबे समय तक स्वस्थ जीवन की कुंजी है।
इस प्रकार, कुल्थी, उड़द, मसूर, मूंग और अरहर दालें प्रोटीन और अन्य आवश्यक पोषक तत्वों का बेहतरीन स्रोत हैं, जो आपकी डाइट को मजबूत और संतुलित बनाती हैं।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
UPSC CSE Result 2025: देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षाओं में से एक Civil Services Examination का अंतिम परिणाम जारी कर दिया गया है। Union Public Service Commission ने शुक्रवार 6 मार्च 2026 को UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 का फाइनल रिजल्ट घोषित किया। इस परीक्षा में अनुज अग्निहोत्री ने पहला स्थान हासिल किया है। परीक्षा में शामिल हुए उम्मीदवार अब आयोग की आधिकारिक वेबसाइट UPSC Official Website पर जाकर फाइनल मेरिट लिस्ट देख सकते हैं। 958 उम्मीदवारों का हुआ चयन यूपीएससी द्वारा जारी फाइनल रिजल्ट के अनुसार इस वर्ष कुल 958 उम्मीदवारों ने सफलता हासिल की है। चयनित उम्मीदवारों की नियुक्ति विभिन्न केंद्रीय सेवाओं में उनकी रैंक और पसंद के आधार पर की जाएगी। फाइनल रिजल्ट उम्मीदवारों के लिखित परीक्षा (Main Exam) और पर्सनैलिटी टेस्ट (Interview) में प्रदर्शन के आधार पर तैयार किया गया है। इन प्रतिष्ठित सेवाओं के लिए होता है चयन यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के माध्यम से देश की कई प्रतिष्ठित सेवाओं के लिए अधिकारियों का चयन किया जाता है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं— भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) भारतीय पुलिस सेवा (IPS) भारतीय विदेश सेवा (IFS) भारतीय राजस्व सेवा (IRS) भारतीय व्यापार सेवा सहित अन्य ग्रुप A और ग्रुप B सेवाएं 979 पदों को भरने का लक्ष्य सिविल सेवा परीक्षा 2025 के माध्यम से केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों में कुल 979 रिक्त पदों को भरा जाना है। ऐसे चेक करें UPSC CSE 2025 का रिजल्ट उम्मीदवार नीचे दिए गए स्टेप्स के माध्यम से अपना रिजल्ट देख सकते हैं— आधिकारिक वेबसाइट upsc.gov.in पर जाएं होमपेज पर “Examination” टैब पर क्लिक करें “Active Examinations” या “What’s New” सेक्शन में जाएं Civil Services Examination Final Result 2025 लिंक पर क्लिक करें मेरिट लिस्ट की PDF खुल जाएगी Ctrl + F दबाकर अपना नाम या रोल नंबर सर्च करें 15 दिन में जारी होगी मार्कशीट यूपीएससी के अनुसार सभी उम्मीदवारों की मार्कशीट रिजल्ट जारी होने के 15 दिनों के भीतर आयोग की वेबसाइट पर अपलोड कर दी जाएगी। उम्मीदवार इसे 30 दिनों तक ऑनलाइन डाउनलोड कर सकेंगे। पिछले साल का कट-ऑफ पिछले वर्ष का अंतिम कट-ऑफ इस प्रकार था— जनरल: 87.98 EWS: 85.92 OBC: 87.28 SC: 79.03 ST: 74.23 आयु सीमा क्या है यूपीएससी की अधिसूचना के अनुसार उम्मीदवार की आयु 1 अगस्त 2024 तक कम से कम 21 वर्ष और अधिकतम 32 वर्ष होनी चाहिए। यानी उम्मीदवार का जन्म 2 अगस्त 1992 से 1 अगस्त 2003 के बीच होना चाहिए। यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा भारत की सबसे कठिन और प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षाओं में से एक मानी जाती है। हर साल लाखों उम्मीदवार इस परीक्षा में शामिल होते हैं, लेकिन तीन चरणों—प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू—को पार कर बहुत कम उम्मीदवार ही अंतिम सूची में जगह बना पाते हैं। UPSC CSE 2025 टॉप-20 उम्मीदवारों की सूची रैंक रोल नंबर नाम 1 1131589 अनुज अग्निहोत्री 2 4000040 राजेश्वरी सुवे एम 3 3512521 अकांश ढुल 4 0834732 राघव झुनझुनवाला 5 0409847 ईशान भटनागर 6 6410067 जिनिया अरोड़ा 7 0818306 ए आर राजा मोहिद्दीन 8 0843487 पक्षल सेक्रेटरी 9 0831647 आस्था जैन 10 1523945 उज्ज्वल प्रियांक 11 1512091 यशस्वी राज वर्धन 12 0840280 अक्षित भारद्वाज 13 7813999 अनन्या शर्मा 14 5402316 सुरभि यादव 15 3507500 सिमरनदीप कौर 16 0867445 मोनिका श्रीवास्तव 17 0829589 चितवन जैन 18 5604518 श्रुति आर 19 0105602 निसार दिशांत अमृतलाल 20 6630448 रवि राज
नई दिल्ली,एजेंसियां। गर्मी का मौसम आते ही लोग अपनी डाइट में ठंडी, हल्की और पानी से भरपूर चीजों को शामिल करना शुरू कर देते हैं। इन्हीं में खीरा सबसे ज्यादा पसंद किया जाता है। खीरा शरीर को हाइड्रेट रखने, पाचन सुधारने, वजन कंट्रोल करने और शरीर को ठंडक देने में मदद करता है। लेकिन कई बार लोग इसे ऐसे तरीके से खा लेते हैं, जिससे इसके फायदे कम और नुकसान ज्यादा हो सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, खीरे का गलत सेवन पेट से जुड़ी समस्याओं को बढ़ा सकता है। खासकर कुछ लोग इसे सुबह खाली पेट या रात में ज्यादा मात्रा में खा लेते हैं, जिससे दिक्कतें शुरू हो सकती हैं। खाली पेट या रात में खाने से हो सकती है परेशानी सुबह खाली पेट अधिक मात्रा में खीरा खाने से कुछ लोगों को एसिडिटी, पेट दर्द, गैस या जलन जैसी शिकायत हो सकती है। खीरे में पानी की मात्रा बहुत ज्यादा होती है और इसकी तासीर ठंडी मानी जाती है, जो हर किसी के पाचन तंत्र को सूट नहीं करती। वहीं, रात में खीरा खाना भी कई लोगों के लिए परेशानी पैदा कर सकता है। रात के समय पाचन तंत्र थोड़ा धीमा काम करता है, ऐसे में खीरा ठीक से पच नहीं पाता और ब्लोटिंग, अपच और गैस की समस्या हो सकती है। बिना धोए या बहुत ठंडा खीरा खाना भी सही नहीं खीरे को बिना धोए खाना सबसे बड़ी गलती मानी जाती है। बाजार में मिलने वाली सब्जियों पर अक्सर धूल, गंदगी, बैक्टीरिया और कीटनाशकों के अंश लगे हो सकते हैं। ऐसे में बिना साफ किए खाया गया खीरा पेट के संक्रमण या अन्य समस्याओं का कारण बन सकता है। इसके अलावा, फ्रिज से निकला बहुत ठंडा खीरा तुरंत खाना भी नुकसानदायक हो सकता है। इससे कुछ लोगों को गले में खराश, सर्दी-जुकाम या पाचन संबंधी परेशानी महसूस हो सकती है। इसलिए खीरे को कुछ देर सामान्य तापमान पर रखने के बाद खाना बेहतर माना जाता है। सही तरीका क्या है? खीरे को खाने से पहले अच्छी तरह धोना जरूरी है। चाहें तो इसे हल्के नमक वाले पानी से भी साफ किया जा सकता है। अगर छिलका सख्त या कड़वा लगे तो उसे हटाकर खाना बेहतर होता है। खीरे में हल्का नमक, काली मिर्च या नींबू मिलाकर खाने से स्वाद भी बढ़ता है और पाचन भी बेहतर हो सकता है।
Lancet Maternal Death Report: दुनियाभर में गर्भावस्था और प्रसव से जुड़ी जटिलताओं के कारण होने वाली मातृ मृत्यु को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ गई है। द लैंसेट में प्रकाशित ताज़ा स्टडी के मुताबिक, दुनिया की हर 10 में से एक मां की मौत भारत में होती है, जो एक गंभीर संकेत है। क्या कहती है रिपोर्ट? रिपोर्ट के अनुसार: 2023 में दुनिया भर में करीब 2.4 लाख महिलाओं की मौत गर्भावस्था और प्रसव से जुड़ी वजहों से हुई। इनमें से लगभग 24,700 मौतें भारत में दर्ज की गईं। यानी वैश्विक स्तर पर करीब 10% मातृ मृत्यु भारत से जुड़ी है। हालांकि, आंकड़ों का एक सकारात्मक पहलू भी सामने आया है। 1990 में भारत में मातृ मृत्यु: लगभग 1.19 लाख 2015 में घटकर: 36,900 2023 में और घटकर: 24,700 इसी तरह, मातृ मृत्यु दर (MMR) 1990 में 508 से घटकर 2023 में 116 प्रति 1 लाख जीवित जन्म हो गई है सुधार के बावजूद क्यों बनी हुई है चिंता? विशेषज्ञों का मानना है कि सुधार अभी अधूरा है और देश में असमानता बड़ी समस्या है। केरल और तमिलनाडु जैसे राज्य बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं जबकि उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश में हालात अब भी चुनौतीपूर्ण हैं मातृ मृत्यु के मुख्य कारण स्टडी के मुताबिक, ज्यादातर मौतें ऐसी वजहों से होती हैं जिन्हें रोका जा सकता है: प्रसव के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव हाई ब्लड प्रेशर (प्री-एक्लेम्प्सिया जैसी स्थिति) संक्रमण (Infections) पहले से मौजूद बीमारियां इसके अलावा: समय पर इलाज न मिलना स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में अंतर ग्रामीण-शहरी असमानता भी बड़ी वजहें हैं। कोविड-19 का भी पड़ा असर एक्सपर्ट्स के अनुसार, कोविड-19 महामारी के दौरान मातृ स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हुईं, जिससे हालात और बिगड़े। यही वजह है कि 2015 के बाद सुधार की रफ्तार धीमी पड़ गई। वैश्विक स्थिति भी चिंताजनक 2023 में वैश्विक मातृ मृत्यु दर: 190 प्रति 1 लाख जीवित जन्म जबकि संयुक्त राष्ट्र का लक्ष्य (SDGs): 70 प्रति 1 लाख यानी दुनिया अभी भी लक्ष्य से काफी दूर है।
आज की तेज़ रफ्तार जिंदगी में लोग फिटनेस और डाइट पर तो ध्यान देते हैं, लेकिन सबसे जरूरी चीज़—पानी पीना—अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं। सही हाइड्रेशन सिर्फ प्यास बुझाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शरीर के हर महत्वपूर्ण कार्य—डाइजेशन, ब्रेन फंक्शन, स्किन हेल्थ और एनर्जी लेवल—को सीधे प्रभावित करता है। यह रिपोर्ट बताती है कि कैसे आप सुबह की शुरुआत से लेकर रात तक छोटी-छोटी आदतों के जरिए खुद को पूरी तरह हाइड्रेटेड रख सकते हैं। क्यों जरूरी है रोज़ हाइड्रेटेड रहना? पानी शरीर के लिए एक “नेचुरल फ्यूल” की तरह काम करता है। इसके नियमित सेवन से: शरीर का तापमान नियंत्रित रहता है त्वचा हेल्दी और ग्लोइंग बनती है टॉक्सिन्स बाहर निकलते हैं दिमाग तेज़ और फोकस बेहतर होता है थकान और मांसपेशियों में ऐंठन से बचाव होता है पाचन बेहतर रहता है कितना पानी पीना चाहिए? विशेषज्ञों के अनुसार, औसतन: पुरुष: लगभग 3.7 लीटर प्रतिदिन महिलाएं: लगभग 2.7 लीटर प्रतिदिन हालांकि, भारत जैसे गर्म देशों में या अगर आप एक्सरसाइज करते हैं, तो यह मात्रा और बढ़ सकती है। डिहाइड्रेशन के संकेत पहचानें अगर आप इन लक्षणों को महसूस कर रहे हैं, तो समझिए शरीर को पानी की जरूरत है: मुंह सूखना और होंठ फटना थकान और चिड़चिड़ापन गहरे रंग का यूरिन सिरदर्द या चक्कर ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई सुबह की शुरुआत ऐसे करें रातभर बिना पानी के रहने के बाद शरीर को तुरंत हाइड्रेशन की जरूरत होती है। उठते ही 1–2 गिलास पानी पिएं नींबू पानी लें—यह मेटाबॉलिज्म बढ़ाता है बेड के पास पानी रखें ताकि याद रहे दिनभर हाइड्रेट रहने के स्मार्ट तरीके 1. सिर्फ पानी ही नहीं, ये ड्रिंक्स भी हैं फायदेमंद नारियल पानी नींबू पानी (निंबू पानी) छाछ हर्बल टी ORS (खासकर गर्मियों में) कैफीन और ज्यादा मीठे ड्रिंक्स से दूरी बनाएं। 2. खाने से भी बढ़ाएं हाइड्रेशन कुछ फल और सब्जियां पानी से भरपूर होती हैं: फल: तरबूज, संतरा, अंगूर, खरबूजा सब्जियां: खीरा, टमाटर, लौकी 3. वर्कआउट के दौरान ध्यान रखें एक्सरसाइज से पहले, दौरान और बाद में पानी पिएं इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी पूरी करें केला, नारियल पानी अच्छे विकल्प हैं 4. ऑफिस में अपनाएं ये आसान टिप्स डेस्क पर पानी की बोतल रखें हर ब्रेक में पानी पिएं मोबाइल में रिमाइंडर लगाएं बार-बार कॉफी की जगह पानी लें गर्मी और सर्दी—दोनों में जरूरी है हाइड्रेशन गर्मियों में: थोड़ी-थोड़ी मात्रा में बार-बार पानी पिएं धूप से बचें हल्के कपड़े पहनें सर्दियों में: प्यास कम लगती है, फिर भी पानी पिएं सूप और हर्बल टी लें स्किन ड्रायनेस से बचाव होता है स्किन और एनर्जी के लिए हाइड्रेशन अगर आपकी त्वचा डल लगती है या बार-बार थकान महसूस होती है, तो पानी की कमी इसकी बड़ी वजह हो सकती है। फायदे: स्किन में नेचुरल ग्लो ड्रायनेस कम एनर्जी लेवल बेहतर फाइन लाइन्स कम नजर आती हैं