आज की तेज रफ्तार जिंदगी में तनाव लगभग हर व्यक्ति की दिनचर्या का हिस्सा बन गया है। लंबे समय तक घर से काम करना, लगातार स्क्रीन के सामने बैठना और भागदौड़ भरी जीवनशैली हमारे शरीर और दिमाग दोनों पर दबाव डालती है। ऐसे में कई लोग तनाव से राहत पाने के लिए महंगे स्पा या थेरेपी का सहारा लेते हैं।
हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि कुछ सरल योगासन नियमित रूप से करने से भी शरीर और मन को वही सुकून मिल सकता है, जो एक महंगे स्पा से मिलता है। योग न केवल मानसिक तनाव को कम करता है बल्कि शरीर की मांसपेशियों में जमी थकान को भी दूर करता है।
योग एक प्राचीन अभ्यास है जो शरीर, मन और सांस के बीच संतुलन स्थापित करता है। जब हम योग करते हैं तो शरीर में कॉर्टिसोल (तनाव बढ़ाने वाला हार्मोन) का स्तर कम होने लगता है। इससे मन शांत होता है और मानसिक स्पष्टता बढ़ती है।
इसके अलावा योगासन करने से शरीर की मांसपेशियों में जकड़न कम होती है, रक्त संचार बेहतर होता है और नींद की गुणवत्ता भी सुधरती है। यही कारण है कि नियमित योग अभ्यास तनाव प्रबंधन के लिए बेहद प्रभावी माना जाता है।
नीचे दिए गए 5 सरल योगासन घर पर ही किए जा सकते हैं, जो तनाव और चिंता को कम करने में मददगार साबित हो सकते हैं।
बालासन एक बेहद आरामदायक योग मुद्रा है, जो मन को तुरंत शांत करने में मदद करती है।
कैसे करें:
फायदा:
यह आसन पीठ, कंधों और गर्दन की थकान दूर करता है और मानसिक तनाव कम करता है।
यह आसन रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाता है और शरीर में जमा तनाव को कम करता है।
कैसे करें:
फायदा:
यह आसन रीढ़ को आराम देता है और लंबे समय तक बैठने से होने वाले तनाव को कम करता है।
यह आसन पूरे शरीर को स्ट्रेच करता है और दिमाग को शांत करता है।
कैसे करें:
फायदा:
इससे मस्तिष्क में रक्त संचार बढ़ता है और मानसिक तनाव कम होता है।
दिनभर की थकान और तनाव दूर करने के लिए यह बेहद सरल और प्रभावी आसन है।
कैसे करें:
फायदा:
यह आसन शरीर को गहरा आराम देता है और दिमाग को शांत करता है।
योग सत्र के अंत में किया जाने वाला यह आसन पूर्ण विश्राम के लिए जाना जाता है।
कैसे करें:
फायदा:
यह आसन शरीर और मन को पूरी तरह रिलैक्स करता है और तनाव व चिंता को कम करता है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
EuroPCR 2026 में पेश किए गए एक बड़े अंतरराष्ट्रीय अध्ययन में सामने आया है कि लेफ्ट मेन कोरोनरी आर्टरी डिजीज से पीड़ित मरीजों में स्टेंट आधारित इलाज (पीसीआई) और बायपास सर्जरी (सीएबीजी) दोनों से लंबे समय में लगभग समान जीवन लाभ मिला है। इस रिसर्च को हृदय रोग उपचार के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है। क्या है लेफ्ट मेन कोरोनरी आर्टरी डिजीज? लेफ्ट मेन कोरोनरी आर्टरी हृदय की सबसे महत्वपूर्ण धमनियों में से एक होती है, जो दिल के बड़े हिस्से तक रक्त पहुंचाने का काम करती है। इस धमनी में रुकावट आने पर हार्ट अटैक और जानलेवा जटिलताओं का खतरा काफी बढ़ जाता है। अब तक ऐसी स्थिति में बायपास सर्जरी को सबसे भरोसेमंद इलाज माना जाता था। लेकिन आधुनिक ड्रग-एल्यूटिंग स्टेंट तकनीक आने के बाद अब स्टेंट आधारित इलाज भी मजबूत विकल्प के रूप में उभर रहा है। चार बड़ी स्टडी के आंकड़ों का विश्लेषण यह अध्ययन चार बड़े अंतरराष्ट्रीय ट्रायल – सिंटैक्स, प्रीकॉम्बैट, नोबल और एक्सेल – के आंकड़ों पर आधारित था। शोधकर्ताओं ने कुल 4,394 मरीजों के लंबे समय तक के परिणामों का विश्लेषण किया। इसमें 10 साल तक के फॉलो-अप डेटा को शामिल किया गया, ताकि यह समझा जा सके कि स्टेंट या बायपास सर्जरी में कौन-सा इलाज लंबे समय में अधिक फायदेमंद है। दोनों इलाजों में मृत्यु दर लगभग समान रिसर्च के अनुसार स्टेंट आधारित इलाज कराने वाले मरीजों में कुल मृत्यु दर 23.5 प्रतिशत रही, जबकि बायपास सर्जरी कराने वाले मरीजों में यह 23.1 प्रतिशत दर्ज की गई। यानी दोनों उपचारों के बीच लंबे समय के परिणामों में कोई बड़ा अंतर नहीं पाया गया। अध्ययन में यह भी सामने आया कि अलग-अलग जोखिम स्तर और बीमारी की गंभीरता वाले मरीजों में भी दोनों प्रक्रियाओं के नतीजे लगभग समान रहे। बायपास सर्जरी का मजबूत विकल्प बन सकता है स्टेंट विशेषज्ञों का मानना है कि यह अध्ययन साबित करता है कि सही मरीजों के लिए स्टेंट आधारित इलाज अब बायपास सर्जरी का सुरक्षित और प्रभावी विकल्प बन सकता है। खासकर उन मरीजों के लिए जो सर्जरी से बचना चाहते हैं या जिनके लिए ऑपरेशन ज्यादा जोखिम भरा हो सकता है। हालांकि डॉक्टरों ने यह भी कहा कि इलाज का फैसला हृदय रोग विशेषज्ञों और सर्जनों की संयुक्त टीम की सलाह से ही लिया जाना चाहिए। भविष्य में बदल सकती हैं इलाज की गाइडलाइन इस अध्ययन के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले समय में लेफ्ट मेन कोरोनरी आर्टरी डिजीज के इलाज से जुड़ी अंतरराष्ट्रीय गाइडलाइंस में स्टेंट आधारित इलाज की भूमिका और मजबूत हो सकती है। शोधकर्ताओं के अनुसार भविष्य की रिसर्च यह तय करने में मदद करेगी कि किन मरीजों को स्टेंट से अधिक लाभ होगा और किन्हें बायपास सर्जरी की जरूरत पड़ेगी।
नई दिल्ली, एजेंसियां। आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी, घंटों बैठकर काम करना और गलत खानपान की वजह से पेट निकलना एक आम समस्या बन गया है। बढ़ती तोंद न सिर्फ शरीर की फिटनेस और लुक को प्रभावित करती है, बल्कि कई गंभीर बीमारियों का खतरा भी बढ़ा सकती है। विशेषज्ञों के मुताबिक, पेट के आसपास जमा अतिरिक्त चर्बी से Type 2 Diabetes, हाई ब्लड प्रेशर और हार्ट डिजीज जैसी समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है। ऐसे में लोग वजन कम करने के लिए जिम, डाइटिंग और कई तरह के उपाय अपनाते हैं, लेकिन हर किसी के पास इसके लिए समय या बजट नहीं होता। योग को पेट की चर्बी कम करने का एक आसान और असरदार तरीका माना जाता है। नियमित योग करने से शरीर लचीला रहता है और मानसिक तनाव भी कम हो सकता है। भुजंगासन से पेट और कमर को मिलता है फायदा Bhujangasana को कोबरा पोज भी कहा जाता है। यह योगासन पेट और कमर की मांसपेशियों पर खिंचाव पैदा करता है, जिससे पेट की चर्बी कम करने में मदद मिल सकती है। साथ ही यह रीढ़ की हड्डी को मजबूत बनाने में भी सहायक माना जाता है। नौकासन तेजी से कैलोरी बर्न करने में मददगार Naukasana पेट की चर्बी घटाने के लिए बेहद लोकप्रिय योगासन है। इस आसन में शरीर नाव की तरह दिखाई देता है। यह सीधे पेट की मांसपेशियों पर असर डालता है और नियमित अभ्यास से तोंद कम करने में मदद कर सकता है। पवनमुक्तासन से सुधरता है पाचन Pawanmuktasana गैस, कब्ज और पेट फूलने जैसी समस्याओं में राहत देने के लिए जाना जाता है। यह आसन पेट की अतिरिक्त चर्बी कम करने के साथ पाचन तंत्र को बेहतर बनाने में भी सहायक माना जाता है। फलकासन और सूर्य नमस्कार भी हैं असरदार Phalakasana यानी प्लैंक पोज पूरे शरीर की मांसपेशियों को सक्रिय करता है। इससे पेट और कमर के आसपास की चर्बी कम करने में मदद मिल सकती है। वहीं Surya Namaskar को फुल बॉडी वर्कआउट माना जाता है, जो कैलोरी बर्न करने और शरीर को फिट रखने में सहायक हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि नियमित योग, संतुलित आहार और अच्छी दिनचर्या अपनाने से पेट की चर्बी कम करने में बेहतर परिणाम मिल सकते हैं।
नई दिल्ली, एजेंसियां। गर्मी के मौसम में बाजार में मिलने वाला जामुन स्वाद के साथ-साथ सेहत का भी खजाना माना जाता है। हल्के खट्टे-मीठे स्वाद वाला यह मौसमी फल शरीर को ठंडक देने के साथ कई बीमारियों से बचाने में मदद करता है। जामुन में आयरन, कैल्शियम, पोटैशियम, फाइबर, विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट्स भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और पाचन सुधारने में सहायक होते हैं। डायबिटीज मरीजों के लिए बेहद फायदेमंद जामुन को डायबिटीज के मरीजों के लिए काफी लाभकारी माना जाता है। इसमें मौजूद प्राकृतिक तत्व ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित रखने में मदद करते हैं। खासतौर पर जामुन के बीजों का पाउडर पारंपरिक रूप से शुगर कंट्रोल करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। सीमित मात्रा में नियमित सेवन से ग्लूकोज लेवल संतुलित रखने में मदद मिल सकती है। पाचन और इम्यूनिटी को करता है मजबूत जिन लोगों को कब्ज, गैस, अपच या एसिडिटी जैसी समस्याएं रहती हैं, उनके लिए जामुन काफी फायदेमंद माना जाता है। इसमें मौजूद फाइबर पाचन तंत्र को बेहतर बनाता है। वहीं विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट्स शरीर की इम्यूनिटी मजबूत कर संक्रमण और मौसमी बीमारियों से बचाने में मदद करते हैं। लू और कमजोरी से बचाने में मददगार गर्मी में लू लगने का खतरा ज्यादा रहता है। ऐसे में जामुन शरीर को अंदर से ठंडक पहुंचाकर हाइड्रेट रखने में मदद करता है। आयरन से भरपूर होने के कारण यह शरीर में हीमोग्लोबिन बढ़ाने और खून की कमी दूर करने में भी सहायक माना जाता है। कमजोरी और थकान महसूस करने वाले लोगों के लिए इसका सेवन लाभदायक हो सकता है। वजन और त्वचा के लिए भी फायदेमंद कम कैलोरी और अधिक फाइबर वाला जामुन वजन कम करने वालों के लिए अच्छा विकल्प है। इसे खाने से लंबे समय तक पेट भरा रहता है। साथ ही इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स त्वचा को हेल्दी, साफ और चमकदार बनाए रखने में मदद करते हैं।