स्वास्थ्य

10 Desi Superfoods to Build Muscles Naturally

10 Desi Superfoods to Build Muscles: देसी खाने से बढ़ाएं मसल्स और ताकत

surbhi मार्च 16, 2026 0
10 desi superfoods including chicken, paneer, eggs, dals, and fish for building muscles and strength naturally.
Desi Superfoods to Build Muscles Naturally

 

अगर आप मसल्स बनाना चाहते हैं तो महंगे सप्लीमेंट और प्रोटीन पाउडर ही जरूरी नहीं हैं। आपके किचन में मौजूद कई देसी फूड्स ही शरीर को भरपूर प्रोटीन, ताकत और रिकवरी दे सकते हैं। आइए जानते हैं ऐसे 10 देसी सुपरफूड्स, जो मसल्स ग्रोथ और रिकवरी के लिए बेहद फायदेमंद हैं।

 

1.  Chicken Breast

चिकन ब्रेस्ट को बॉडीबिल्डिंग में सबसे बेहतरीन प्रोटीन स्रोत माना जाता है। इसमें लीन प्रोटीन और जरूरी अमीनो एसिड होते हैं, जो वर्कआउट के बाद मसल्स रिपेयर और ग्रोथ में मदद करते हैं।

2.  Paneer Tikka

पनीर शाकाहारी लोगों के लिए शानदार प्रोटीन सोर्स है। यह मसल्स डेवलपमेंट के साथ कैल्शियम भी देता है, जिससे हड्डियां मजबूत रहती हैं।

3.  Egg Bhurji

अंडे को “complete protein” माना जाता है। इसमें मौजूद विटामिन, मिनरल और हेल्दी फैट मसल्स बनाने और शरीर की एनर्जी बढ़ाने में मदद करते हैं।

4.  Moong Dal Khichdi

मूंग दाल प्रोटीन और फाइबर से भरपूर होती है। यह मसल्स रिकवरी, पाचन और एनर्जी लेवल को बेहतर बनाने में मदद करती है।

5.  Tandoori Fish

मछली में उच्च गुणवत्ता का प्रोटीन और ओमेगा-3 फैटी एसिड होता है, जो मसल्स को मजबूत बनाता है और वर्कआउट के बाद शरीर की रिकवरी तेज करता है।

6.  Quinoa Pulao

क्विनोआ एक complete plant protein है। इसमें प्रोटीन, फाइबर और कॉम्प्लेक्स कार्ब्स होते हैं, जो वर्कआउट के दौरान ऊर्जा बनाए रखते हैं।

7.  Chickpea Curry (चना मसाला)

चना प्रोटीन और फाइबर का बेहतरीन स्रोत है। यह मसल्स ग्रोथ, पाचन और लंबे समय तक ऊर्जा देने में मदद करता है।

8.  Soya Chunks Stir-Fry

सोया चंक्स शाकाहारी लोगों के लिए सबसे ज्यादा प्रोटीन वाले फूड्स में से एक हैं। यह मसल्स रिपेयर और बॉडी स्ट्रेंथ बढ़ाने में मदद करता है।

9.  Greek Yogurt

ग्रीक योगर्ट में सामान्य दही से ज्यादा प्रोटीन होता है। यह वर्कआउट के बाद मसल्स रिकवरी और गट हेल्थ के लिए बहुत अच्छा माना जाता है।

10. Masoor Dal Soup

मसूर दाल में प्रोटीन और आयरन भरपूर होता है। यह मसल्स ग्रोथ के साथ शरीर में ऑक्सीजन फ्लो बेहतर करने में भी मदद करता है।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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kidney stone blood in urine
किडनी स्टोन में यूरिन से खून आना क्यों होता है? जानें एक्सपर्ट की राय

नई दिल्ली, एजेंसियां। किडनी स्टोन यानी गुर्दे की पथरी आजकल एक आम लेकिन बेहद तकलीफदेह समस्या बन चुकी है। कई बार इस परेशानी से जूझ रहे मरीजों को यूरिन करते समय खून भी दिखाई देता है, जिससे डर और चिंता बढ़ जाती है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि क्या किडनी स्टोन में यूरिन से खून आना सामान्य है या यह किसी गंभीर खतरे का संकेत हो सकता है।   विशेषज्ञों के अनुसार विशेषज्ञों के अनुसार, पेशाब में खून आने की स्थिति को मेडिकल भाषा में हीमेट्यूरिया (Hematuria) कहा जाता है। यह किडनी स्टोन के मरीजों में देखा जाने वाला एक सामान्य लक्षण हो सकता है। जब किडनी में मौजूद स्टोन दवाओं या प्राकृतिक तरीके से शरीर से बाहर निकलने लगते हैं, तो वे यूरिनरी ट्रैक्ट यानी मूत्र मार्ग से होकर गुजरते हैं। इस दौरान स्टोन की सतह मूत्र नली या आसपास की अंदरूनी परत को हल्का नुकसान पहुंचा सकती है। इसी वजह से वहां से थोड़ी मात्रा में ब्लड निकलता है, जो यूरिन के साथ बाहर आ जाता है।   कब तक सामान्य और कब हो सकता है खतरे का संकेत डॉक्टरों का कहना है कि एक-दो बार हल्का खून आना कई मामलों में बहुत गंभीर नहीं होता, खासकर तब जब स्टोन छोटा हो और बाहर निकल रहा हो। लेकिन यदि बार-बार यूरिन में खून आ रहा है, पेशाब करते समय तेज जलन, बुखार, तेज दर्द, उल्टी या पेशाब रुकने जैसी समस्या भी हो रही है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति केवल स्टोन ही नहीं, बल्कि किडनी इंफेक्शन, यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (UTI) या किसी अन्य गंभीर समस्या का संकेत भी हो सकती है।   क्या सभी किडनी स्टोन अपने आप निकल जाते हैं? यह पूरी तरह स्टोन के आकार और उसकी लोकेशन पर निर्भर करता है। आमतौर पर 5 मिमी (MM) से छोटे स्टोन दवाओं, पर्याप्त पानी और कुछ मेडिकल मैनेजमेंट की मदद से यूरिन के रास्ते बाहर निकल सकते हैं। लेकिन यदि स्टोन बड़ा हो, अटका हुआ हो या दर्द और ब्लीडिंग बढ़ रही हो, तो सर्जरी या अन्य मेडिकल प्रोसीजर की जरूरत पड़ सकती है।   जांच और इलाज में देरी न करें यदि यूरिन में खून दिखाई दे, तो डॉक्टर की सलाह जरूर लें। यूरिन टेस्ट, अल्ट्रासाउंड, सीटी स्कैन और अन्य जांचों से सही कारण का पता लगाया जा सकता है। समय पर इलाज से जटिलताओं से बचा जा सकता है और किडनी को सुरक्षित रखा जा सकता है।

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आयरन की कमी से बचने के लिए खाएं ये 6 हरी चीजें

  आजकल आयरन की कमी (Iron Deficiency) एक आम समस्या बन गई है, खासकर महिलाओं में। लेकिन सही डाइट अपनाकर इसे आसानी से कंट्रोल किया जा सकता है। आइए जानते हैं 6 ऐसी हरी चीजों के बारे में जो आपके शरीर में आयरन की कमी नहीं होने देंगी  1. करी पत्ता (Curry Leaves) — आयरन का पावरहाउस करी पत्ता सिर्फ तड़के के लिए नहीं, बल्कि आयरन और फोलिक एसिड का बेहतरीन स्रोत है। फोलिक एसिड आयरन को शरीर में अच्छे से अवशोषित करने में मदद करता है। इसे चटनी बनाकर या सीधे खाएं, फेंकें नहीं। 2. पालक (Spinach) — सबसे मशहूर आयरन सोर्स पालक आयरन से भरपूर होता है और रेड ब्लड सेल्स बनाने में मदद करता है। हल्का उबालकर या पकाकर खाएं नींबू या टमाटर के साथ लेने से आयरन जल्दी अवशोषित होता है 3. मेथी के पत्ते (Fenugreek Leaves) — खून बढ़ाने वाली सब्जी मेथी में आयरन के साथ-साथ फाइबर और विटामिन K भी होता है। खासकर महिलाओं के लिए फायदेमंद पराठा, सब्जी या दाल में शामिल करें 4. सहजन के पत्ते (Moringa) — ‘मिरेकल फूड’ मोरिंगा के पत्तों में पालक से भी ज्यादा आयरन होता है। इसमें विटामिन C भी होता है, जो आयरन को आसानी से शरीर में पहुंचाता है पाउडर, सूप या सांभर में इस्तेमाल करें 5. चौलाई (Amaranth Leaves) — आयरन + कैल्शियम का खजाना चौलाई के पत्ते आयरन और कैल्शियम से भरपूर होते हैं। ये खून को मजबूत बनाते हैं स्टर-फ्राई या सब्जी के रूप में खाएं 6. सरसों का साग (Mustard Greens) — सर्दियों की ताकत सरसों का साग आयरन के साथ विटामिन A, C और K से भरपूर होता है। यह शरीर को डिटॉक्स करता है और खून साफ करता है सर्दियों में इसे जरूर डाइट में शामिल करें जरूरी टिप्स आयरन के साथ विटामिन C लेना जरूरी है (नींबू, आंवला) चाय/कॉफी खाने के तुरंत बाद न लें (आयरन अवशोषण कम होता है) संतुलित मात्रा में सेवन करें

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गर्मियों में बार-बार निकलते पिंपल्स? अपनाएं ये आसान उपाय और पाएं तुरंत राहत

नई दिल्ली, एजेंसियां। गर्मियों में तेज धूप, बढ़ता पसीना और ऑयल प्रोडक्शन स्किन के लिए बड़ी चुनौती बन जाते हैं। यही कारण है कि इस मौसम में चेहरे पर बार-बार मुहांसे (Acne) उभरते हैं। पसीना और धूल-मिट्टी की वजह से त्वचा पर गंदगी जमती है, जिससे पिंपल्स बढ़ते हैं। हाथों से बार-बार चेहरे को छूना भी बैक्टीरिया फैलाता है और समस्या को और गंभीर बना देता है। सही स्किन केयर और जीवनशैली अपनाकर इस समस्या से राहत पाई जा सकती है।   दिन में दो बार चेहरा धोएं गर्मी में चेहरे को साफ रखना सबसे जरूरी है। दिन में कम से कम दो बार हल्के फेस वॉश से चेहरा धोएं। इससे अतिरिक्त तेल और गंदगी हटती है और पोर्स क्लियर रहते हैं।   ऑयल-फ्री प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल हेल्दी स्किन के लिए ऑयल-फ्री मॉइस्चराइज़र और सनस्क्रीन का उपयोग जरूरी है। ये त्वचा को हाइड्रेट रखते हैं और सूरज की हानिकारक किरणों से भी बचाते हैं।   आइस थेरेपी अपनाएं हफ्ते में दो से तीन बार आइस फेशियल करने से त्वचा की सूजन और रेडनेस कम होती है। बर्फ को सीधे चेहरे पर न लगाएं, बल्कि किसी कपड़े में लपेटकर 2-4 मिनट हल्के हाथों से रगड़ें।   घरेलू नुस्खे नीम का रस या एलोवेरा जेल रात में लगाने से त्वचा को ठंडक और मजबूती मिलती है। गुलाब जल भी चेहरे को हाइड्रेटेड और ग्लोइंग बनाता है।   चेहरे को बार-बार न छुएं हाथों की गंदगी से बैक्टीरिया फैलते हैं। इसलिए चेहरे को अनावश्यक न छुएं और हाथ हमेशा साफ रखें।   हेल्दी डाइट और पर्याप्त पानी हरी सब्जियां, फल और पर्याप्त पानी पीने से शरीर हाइड्रेट रहता है और त्वचा में सुधार आता है।   पर्याप्त नींद लें नींद की कमी से स्किन की समस्या बढ़ सकती है। हर मौसम में पूरी नींद लेना जरूरी है।   क्या न करें ज्यादा केमिकल प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल न करें। पिंपल्स को दबाकर न निकलें और गंदे तौलिये या तकिये का उपयोग बंद करें।

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