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Eid desserts: मीठी सेवई नहीं, इस बार ईद पर ट्राई करें ये 5 टेस्टी डिश

Anjali Kumari मार्च 21, 2026 0
Eid desserts
Eid desserts

नई दिल्ली, एजेंसियां। ईद का त्योहार खुशियों, मेल-जोल और स्वादिष्ट पकवानों के लिए जाना जाता है। रमजान के बाद जब ईद आती है, तो हर घर में खास मिठाइयों की तैयारी शुरू हो जाती है। आमतौर पर मीठी सेवई बनाई जाती है, लेकिन इस बार आप कुछ नए और खास डेजर्ट्स ट्राई कर सकते हैं।

 

1. मीठी सेवई 


सेवई ईद की पहचान मानी जाती है। इसे बनाने के लिए सेवई को घी में भूनकर पानी और चीनी के साथ पकाया जाता है। इलायची और ड्राई फ्रूट्स डालकर इसका स्वाद और बढ़ाया जाता है।

 

2. शीर खुरमा 


Sheer Khurma ईद का सबसे खास डेजर्ट है। दूध, सेवई, खजूर और मेवों से तैयार यह डिश बेहद स्वादिष्ट और हेल्दी होती है। केसर और इलायची इसे और खास बना देते हैं।

 

3. फिरनी 


Phirni एक बेहतरीन ऑप्शन है, खासकर अगर आप कुछ ठंडा बनाना चाहते हैं। पिसे हुए चावल, दूध और चीनी से तैयार यह मिठाई मिट्टी के बर्तन में ठंडी करके परोसी जाती है।

 

4. शाही टुकड़ा 


Shahi Tukda एक शाही मिठाई है, जिसमें फ्राइड ब्रेड पर रबड़ी डाली जाती है और ऊपर से ड्राई फ्रूट्स से सजाया जाता है। इसका स्वाद मेहमानों को जरूर पसंद आएगा।

 

5. नमकीन ट्विस्ट 


अगर आप मीठे से हटकर कुछ अलग बनाना चाहते हैं, तो उपमा स्टाइल नारियल सेवई भी बना सकते हैं। इसमें सब्जियां और मसाले डालकर हल्की और स्वादिष्ट डिश तैयार की जाती है।

 

हर स्वाद का रखें ख्याल


इन आसान रेसिपी आइडियाज के जरिए आप इस ईद अपने मेहमानों को कुछ नया और स्वादिष्ट परोस सकते हैं, जिससे त्योहार की मिठास और भी बढ़ जाएगी।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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Microscopic view of gastric cancer cells highlighting biomarkers CXCL12 and eotaxin in medical research
गैस्ट्रिक कैंसर में बड़ी खोज: CXCL12 और Eotaxin बने सर्वाइवल के नए संकेतक

गैस्ट्रिक कैंसर के इलाज और पूर्वानुमान (प्रोग्नोसिस) को लेकर एक नई रिसर्च ने अहम जानकारी सामने रखी है। इस अध्ययन में दो नए बायोमार्कर-CXCL12 और eotaxin-की पहचान की गई है, जो मरीजों की जीवित रहने की संभावना का अनुमान लगाने में मदद कर सकते हैं। यह खोज Gastric Cancer के उपचार और निगरानी के तरीकों को बदल सकती है। क्यों महत्वपूर्ण है यह खोज? गैस्ट्रिक कैंसर दुनिया में कैंसर से होने वाली मौतों के प्रमुख कारणों में से एक है। इसकी बड़ी वजह है-देर से पहचान और एडवांस स्टेज में सीमित इलाज विकल्प। ऐसे में, ब्लड टेस्ट के जरिए मापे जा सकने वाले बायोमार्कर डॉक्टरों को यह समझने में मदद करते हैं कि कौन सा मरीज ज्यादा जोखिम में है और किसे ज्यादा निगरानी या अलग इलाज की जरूरत है। रिसर्च में क्या पाया गया? यह अध्ययन Helsinki University Hospital में 2000 से 2009 के बीच सर्जरी करा चुके 240 मरीजों पर आधारित था। वैज्ञानिकों ने 48 अलग-अलग प्रोटीन का विश्लेषण किया, जिनमें से तीन ने शुरुआती स्तर पर अहम भूमिका दिखाई: CXCL12 Stem Cell Factor Eotaxin लेकिन विस्तृत विश्लेषण (Multivariate Analysis) में केवल CXCL12 और Eotaxin ही स्वतंत्र (independent) रूप से सर्वाइवल के मजबूत संकेतक साबित हुए। कैसे काम करते हैं ये बायोमार्कर? CXCL12: यह एक केमोकिन है, जो इम्यून सेल्स की गतिविधि और ट्यूमर के माइक्रोएनवायरमेंट को नियंत्रित करता है। अध्ययन में यह बेहतर सर्वाइवल से जुड़ा पाया गया। Eotaxin: यह एक इंफ्लेमेटरी प्रोटीन है, जो शरीर में सूजन और इम्यून प्रतिक्रिया से संबंधित है। इसका भी स्वतंत्र प्रभाव सर्वाइवल पर देखा गया। यह संकेत देता है कि कैंसर के विकास में इम्यून सिस्टम की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। क्लिनिकल महत्व क्या है? इस खोज से भविष्य में: मरीजों के लिए सटीक जोखिम आकलन संभव होगा डॉक्टर बेहतर तरीके से ट्रीटमेंट प्लान बना सकेंगे हाई-रिस्क मरीजों की करीबी निगरानी की जा सकेगी यह पर्सनलाइज्ड मेडिसिन की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। सीमाएं और आगे की जरूरत हालांकि, यह अध्ययन एक ही सेंटर और पुराने डेटा पर आधारित है, जिससे इसके परिणामों की व्यापकता सीमित हो सकती है। साथ ही, इन बायोमार्कर्स को रोजमर्रा की क्लिनिकल प्रैक्टिस में लागू करने से पहले बड़े और भविष्य-आधारित (prospective) अध्ययनों की जरूरत होगी।  

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नई स्टडी में खुलासा: टेलीमेडिसिन से कम हो सकता है फैटी लिवर का खतरा, डायबिटीज मरीजों के लिए उम्मीद की किरण

एक नई स्टडी में सामने आया है कि न्यूट्रिशन आधारित टेलीमेडिसिन मॉडल, टाइप 2 डायबिटीज और मोटापे से जूझ रहे लोगों में लिवर से जुड़ी गंभीर बीमारी Metabolic dysfunction-associated steatotic liver disease (MASLD) के खतरे को काफी हद तक कम कर सकता है। MASLD एक ऐसी स्थिति है, जिसमें लिवर में फैट जमा होने लगता है और यह आगे चलकर गंभीर बीमारी Metabolic dysfunction-associated steatohepatitis में बदल सकती है, जिससे मृत्यु और अन्य जटिलताओं का जोखिम बढ़ जाता है। क्यों खतरनाक है MASLD? Type 2 Diabetes और मोटापे से पीड़ित लोगों में MASLD तेजी से बढ़ती समस्या बनती जा रही है। दुनियाभर में इसके मामलों में बढ़ोतरी के कारण डॉक्टर अब ऐसे उपायों की तलाश में हैं, जो आसान, सुलभ और लंबे समय तक असरदार हों। टेलीमेडिसिन से मिला बड़ा फायदा इस स्टडी में 2015 से 2024 के बीच 5,000 से ज्यादा मरीजों पर एक खास टेलीमेडिसिन प्रोग्राम कार्बोहाइड्रेट कम करने पर आधारित न्यूट्रिशन थेरेपी का असर देखा गया। रिसर्च में सामने आया कि: टेलीमेडिसिन अपनाने वाले मरीजों में लिवर रोग का खतरा 36% कम था गंभीर स्थिति (MASH) में जाने का खतरा 62% कम हुआ एडवांस्ड लिवर डिजीज का रिस्क 67% तक घटा लिवर से जुड़ी जटिलताएं 75% तक कम देखी गईं वजन घटाना बना सबसे बड़ा हथियार स्टडी में यह भी पाया गया कि जिन मरीजों ने 15% या उससे ज्यादा वजन कम किया, उनमें लिवर बीमारी का खतरा और भी कम हो गया। यानी डाइट कंट्रोल और वजन घटाना, दोनों मिलकर इस बीमारी के खिलाफ मजबूत सुरक्षा दे सकते हैं। ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों के लिए बड़ा समाधान टेलीमेडिसिन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह उन लोगों तक भी पहुंच सकता है, जहां हेल्थकेयर सुविधाएं सीमित हैं। ऐसे में यह मॉडल भविष्य में बड़े स्तर पर लागू किया जा सकता है।  

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गर्मियों में सेहतमंद रहने के लिए खाएं ये 5 रोटियां

नई दिल्ली, एजेंसियां। गर्मियों का मौसम शरीर पर असर डालता है, इसलिए इस दौरान खाने-पीने का खास ध्यान रखना बेहद जरूरी है। गर्मी में हल्का और ठंडी तासीर वाला भोजन सेहत के लिए सबसे फायदेमंद होता है। सही रोटी का चुनाव न केवल पेट को हल्का रखता है बल्कि शरीर को ठंडक और ऊर्जा भी देता है।विशेषज्ञों के अनुसार, ज्वार, गेहूं और मल्टीग्रेन जैसी रोटियां गर्मियों में सबसे अच्छी मानी जाती हैं। ये रोटियां पचने में आसान होती हैं और इन्हें दही या छाछ के साथ खाने से शरीर हाइड्रेटेड रहता है।   आइए जानते हैं गर्मियों के लिए सबसे उपयुक्त रोटियां   1. ज्वार की रोटी ज्वार की रोटी ठंडी तासीर वाली होती है और यह पाचन को बेहतर बनाती है। इसे नियमित खाने से शरीर को ठंडक मिलती है और गर्मी में राहत महसूस होती है। 2. बाजरे की रोटी बाजरे की रोटी पोषण में अच्छी होती है, लेकिन यह गर्म होती है। इसलिए इसे गर्मियों में सीमित मात्रा में ही खाना चाहिए। 3. गेहूं की पतली रोटी गेहूं की पतली रोटी हल्की और पचने में आसान होती है। यह रोजाना खाने के लिए एक अच्छा विकल्प है और शरीर को लंबे समय तक ऊर्जा देती है। 4. चने के आटे (बेसन) की रोटी बेसन की रोटी प्रोटीन से भरपूर होती है और हल्की भी रहती है। यह गर्मियों में सेहत को बनाए रखने में मदद करती है। 5. मल्टीग्रेन रोटी मल्टीग्रेन रोटी विभिन्न अनाजों से बनाई जाती है। यह शरीर को संतुलित पोषण देती है और गर्मी में भी हल्की और फायदेमंद रहती है। गर्मियों में इन रोटियों के साथ दही, छाछ या सलाद का सेवन करने से शरीर ठंडक महसूस करता है और ऊर्जा बनी रहती है। सही रोटी चुनकर आप अपने स्वास्थ्य को बेहतर रख सकते हैं और गर्मियों में सेहतमंद रह सकते हैं

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