धनबाद से बड़ी खबर
झारखंड के धनबाद से कोयला उपभोक्ताओं के लिए अहम खबर सामने आई है। देश की प्रमुख कोयला कंपनी कोल इंडिया लिमिटेड ने सभी ग्रेड के कोयले की कीमतों में बढ़ोतरी का फैसला लिया है। नई दरें 1 अप्रैल 2026 की मध्यरात्रि से लागू होंगी, जिससे कोयला करीब 0.24 फीसदी महंगा हो जाएगा।
कंपनी के अनुसार यह मूल्य वृद्धि थोक मूल्य सूचकांक (WPI) के आधार पर की गई है। दिसंबर 2024 में WPI जहां 155.7 था, वहीं दिसंबर 2025 में यह बढ़कर 157.2 हो गया। यानी कुल 0.96 फीसदी की वृद्धि हुई। नियमों के तहत इसका 25 फीसदी ही लागू किया गया, जिसके चलते कीमतों में 0.24 फीसदी की बढ़ोतरी की गई है।
इस संबंध में कोल इंडिया ने अपनी प्रमुख सहायक कंपनियों जैसे बीसीसीएल, ईसीएल और सीसीएल समेत अन्य यूनिट्स को अधिसूचना जारी कर दी है। सभी कंपनियों को निर्देश दिया गया है कि वे नई दरों को लागू करें और उपभोक्ताओं को इसकी जानकारी दें।
नई कीमतें नॉन-रेगुलेटेड सेक्टर (NRS) के लिए लागू होंगी और ई-ऑक्शन में बेस प्राइस के रूप में इस्तेमाल की जाएंगी। कंपनी ने साफ किया है कि ई-ऑक्शन में मिलने वाला प्रीमियम इन बेस कीमतों के ऊपर जोड़ा जाएगा। साथ ही कोकिंग और वॉश्ड कोयले की कीमतें भी इसी फॉर्मूले के आधार पर तय की जाएंगी।
(G-1 ग्रेड की कीमत स्पष्ट नहीं की गई है)
कोयले की कीमतों में बढ़ोतरी का असर बिजली उत्पादन, स्टील और सीमेंट जैसे उद्योगों पर पड़ सकता है। इससे आने वाले समय में बिजली दरों और निर्माण लागत में भी हल्की बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
कोल इंडिया का यह फैसला बाजार के अनुरूप मूल्य निर्धारण और पारदर्शिता बनाए रखने की दिशा में उठाया गया कदम माना जा रहा है, लेकिन इसका सीधा असर आम उपभोक्ताओं तक पहुंच सकता है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
रांची। राजधानी रांची में पाइप से घर-घर गैस पहुंचाने की योजना तेजी से आगे बढ़ाई जा रही है। जल्द ही मोरहाबादी, हेहल, लालपुर, स्मार्ट सिटी, मेसरा समेत छह नए इलाकों में PNG यानी पाइप्ड नेचुरल गैस की सप्लाई शुरू की जाएगी। इससे लाखों परिवारों को राहत मिलेगी। अभी तक कई इलाकों में लोग एलपीजी सिलेंडर पर निर्भर हैं, लेकिन PNG सेवा शुरू होने के बाद लोगों को गैस सिलेंडर की बुकिंग और डिलीवरी के झंझट से काफी हद तक छुटकारा मिल जाएगा। इन इलाकों में शुरू होगी सुविधा जानकारी के मुताबिक मोरहाबादी, हेहल, लालपुर, स्मार्ट सिटी और मेसरा के अलावा कुछ अन्य नए क्षेत्रों में भी पाइपलाइन नेटवर्क का विस्तार किया जा रहा है। कंपनी की ओर से पाइपलाइन बिछाने और कनेक्शन देने का काम तेजी से चल रहा है। इन इलाकों में रहने वाले लोगों को जल्द घरेलू PNG कनेक्शन मिलने शुरू हो सकते हैं। PNG यानी पाइप्ड नेचुरल गैस सीधे पाइपलाइन के जरिए घरों तक पहुंचाई जाती है। इसमें सिलेंडर खत्म होने या बार-बार बुकिंग कराने की परेशानी नहीं रहती। इसके अलावा इसे एलपीजी की तुलना में ज्यादा सुरक्षित और सुविधाजनक माना जाता है। गैस का बिल भी इस्तेमाल के हिसाब से आता है, जिससे लोगों को खर्च पर नियंत्रण रखने में आसानी होती है। स्मार्ट सिटी में काम जोरो पर रांची स्मार्ट सिटी क्षेत्र में आधुनिक सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए PNG नेटवर्क पर खास फोकस किया जा रहा है। यहां नई पाइपलाइन डालने का काम तेजी से चल रहा है, ताकि आने वाले समय में लोगों को बेहतर गैस सुविधा मिल सके। PNG नेटवर्क के विस्तार से राजधानी के हजारों घरों को फायदा मिलने की उम्मीद है। खासकर अपार्टमेंट और नए हाउसिंग प्रोजेक्ट्स में रहने वाले लोगों के लिए यह सुविधा काफी उपयोगी है।
रांची। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के तहत 23 मई से जिले के सभी मतदान केंद्रों पर अन-मैप्ड मतदाताओं की सूची प्रकाशित की जाएगी। यह सूची लगातार दो सप्ताह तक मतदान केंद्रों पर प्रदर्शित रहेगी, ताकि ऐसे मतदाता जिनका नाम वर्तमान मतदाता सूची में वर्ष 2003 के गहन पुनरीक्षण वाली सूची से लिंक या मैप नहीं हो पाया है, वे इसकी जांच कर सकें। बूथ पर जाकर जांच ले अपना नाम निर्वाचन विभाग के अनुसार अन-मैप्ड मतदाता वे हैं, जिनके नाम का पुराने अभिलेखों से सत्यापन या मिलान अब तक पूरा नहीं हो सका है। ऐसे मतदाताओं को अपने संबंधित मतदान केंद्र पर जाकर सूची में अपना नाम अवश्य जांचना चाहिए। सूची में नाम होने पर तुरंत बीएलओ से मिले यदि किसी मतदाता का नाम अन-मैप्ड सूची में शामिल है, तो उन्हें अपने क्षेत्र के बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) से संपर्क कर आवश्यक जानकारी एवं दस्तावेज उपलब्ध कराने होंगे, ताकि मैपिंग की प्रक्रिया पूरी की जा सके। अधिकारियों ने बताया कि सूची का प्रदर्शन मतदाताओं की सुविधा और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से किया जा रहा है। समय पर मैपिंग नहीं होने की स्थिति में भविष्य में मतदाता सूची से संबंधित समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। इसलिए संबंधित मतदाताओं को निर्धारित अवधि के भीतर अपने नाम का सत्यापन कराना जरूरी है। निर्वाचन आयोग ने की अपील राज्य निर्वाचन आयोग ने नागरिकों से अपील की है कि वे मतदान केंद्रों पर प्रदर्शित सूची का अवलोकन करें और किसी भी प्रकार की त्रुटि या विसंगति मिलने पर तत्काल बीएलओ को सूचित करें। इससे मतदाता सूची को अधिक सटीक और अद्यतन बनाने में मदद मिलेगी तथा आगामी चुनावों में मतदाताओं को किसी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। क्या करें मतदाता • 23 मई से अपने मतदान केंद्र पर जाकर अन-मैप्ड सूची में नाम जांचें। • नाम मिलने पर संबंधित बीएलओ से संपर्क करें। • आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराकर वर्ष 2003 की मतदाता सूची से मैपिंग कराएं। • दो सप्ताह के भीतर प्रक्रिया पूरी करें, ताकि मतदाता रिकॉर्ड सही तरीके से अपडेट हो सके। • लिस्ट में होगा नाम तो बीएलओ से संपर्क कर पूरी करानी होगी मैपिंग प्रक्रिया
गिरिडीह। बिहार और झारखंड को जोड़ने वाली बहुप्रतीक्षित नवादा-गिरिडीह नई रेल लाइन परियोजना को लेकर बड़ी प्रगति हुई है। रेलवे मंत्रालय ने बिहार के जिन 29 नई रेलवे लाईन के सर्वे को लेकर मंजूरी दी है। उसमें इस महत्वाकांक्षी परियोजना को भी शामिल किया गया है। रेलवे लाइन के एलाइनमेंट तथा प्रारंभिक इंजीनियरिंग-सह-यातायात सर्वेक्षण को मंजूरी मिली है। इस निर्णय को गिरिडीह जिले के लिए विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। इस रास्ते से गुजरेगी नई लाइन प्रस्तावित रेल मार्ग बिहार के नवादा से शुरू होकर झारखंड के कोडरमा जिले के सतगावां होते हुए गिरिडीह जिले के गावां और तिसरी प्रखंड से गुजरते हुए जिला मुख्यालय गिरिडीह तक पहुंचेगा। इस परियोजना के भविष्य में पारसनाथ क्षेत्र से जुड़ने की भी संभावना जताई जा रही है, जिससे धार्मिक पर्यटन और अधिक मजबूत होगा। करीब 130 किलोमीटर लंबी इस प्रस्तावित रेल लाइन के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 में प्रारंभिक सर्वेक्षण कार्य के लिए 2.67 करोड़ रुपए की राशि स्वीकृत की गई है। अधिकारियों के अनुसार, आवश्यकता पड़ने पर आगे बजट में और वृद्धि की जाएगी। सर्वे के बाद तैयार होगा डीपीआर सर्वेक्षण कार्य पूरा होने के बाद संबंधित एजेंसी द्वारा विस्तृत डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की जाएगी, जिसे रेलवे मंडल को सौंपा जाएगा। लाइन बनने से गिरिडीह से गया का होगा सीधा कनेक्ट सर्वे के बाद यदि रेलवे की ओर से इस रेल लाइन के बिछाने का कार्य शुरू किया जाता है, तो गिरिडीह जिला मुख्यालय से लेकर जिले के ग्रामीण इलाकों के लोगों का सीधा संपर्क गया से हो जाएगा। अभी तक जिले के लोगों को दिल्ली, मुंबई आदि स्थानों के लिए ट्रेन पकड़ने के लिए कोडरमा जाना पड़ता है, लेकिन यह प्रस्तावित रेल लाइन एक बेहतर विकल्प के रूप में विकसित होगी। इससे खासकर गावां, तिसरी और देवरी इलाके के लोगों को गया तक पहुंचना काफी आसान हो जाएगा। एक तरह से ग्रामीण इलाकों के लोगों के साथ-साथ गिरिडीह शहर के लोगों को भी इसका सीधा लाभ मिलेगा। लाइन से ग्रामीण इलाकों का होगा विकास प्रस्तावित नवादा–गिरिडीह नई रेल लाइन परियोजना के निर्माण के बाद गिरिडीह जिले के ग्रामीण एवं पिछड़े इलाकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। इस रेल लाइन से जिले के गावां, तिसरी और देवरी जैसे दूरस्थ प्रखंड पहली बार सीधे रेल संपर्क से जुड़ जाएंगे, जिससे क्षेत्र की कनेक्टिविटी में ऐतिहासिक सुधार होगा। नई लाइफ लाइन मिलेगी। इस परियोजना के पूरा होने के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन की सुविधा काफी आसान हो जाएगी।