जामताड़ा: जिले में अवैध कोयला उत्खनन पर लगाम लगाने के लिए जिला प्रशासन ने सोमवार को बड़ी कार्रवाई की। पुलिस अधीक्षक राजकुमार मेहता के निर्देश पर नाला थाना क्षेत्र के कास्ता और पलास्थली इलाके में बंद पड़ी अवैध कोयला खदानों को जेसीबी और बुलडोजर की मदद से मिट्टी भरकर बंद करने का अभियान चलाया गया।
बताया जाता है कि इसी वर्ष फरवरी महीने में कास्ता और पलास्थली क्षेत्र की अवैध खदानों में कोयला निकालने के दौरान एक बड़ा हादसा हुआ था। उस दुर्घटना में तीन से चार मजदूरों के मलबे में दबने की सूचना सामने आई थी। इस घटना के बाद प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे थे और अवैध खनन पर रोक लगाने की मांग तेज हो गई थी।
घटना को गंभीरता से लेते हुए सोमवार को पुलिस और ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ECL) के अधिकारियों ने संयुक्त रूप से कार्रवाई शुरू की। बंद पड़ी खदानों को जेसीबी और बुलडोजर से मिट्टी भरकर डोजिंग की गई, ताकि वहां दोबारा अवैध उत्खनन न हो सके।
जानकारी के अनुसार, ये खदानें मूल रूप से ECL के पांडेश्वर जोनल ऑफिस के अधीन थीं और कई साल पहले इन्हें बंद कर दिया गया था। लेकिन बीते करीब तीन दशकों में यहां अवैध कोयला उत्खनन का जाल फैल गया था। इसके कारण कई जगहों पर गहरी और बेहद असुरक्षित खदानें बन गई थीं।
इस अभियान का नेतृत्व नाला थाना प्रभारी राजीव रंजन कुमार और ECL अधिकारियों ने संयुक्त रूप से किया। कार्रवाई के दौरान CISF और नाला थाना की पुलिस भी मौके पर तैनात रही।
इस दौरान सहायक अवर निरीक्षक संजय गहलौत समेत बड़ी संख्या में पुलिस बल और सुरक्षाकर्मी मौजूद रहे।
प्रशासन ने इलाके के लोगों को सख्त चेतावनी देते हुए कहा है कि इन क्षेत्रों में किसी भी कीमत पर अवैध कोयला उत्खनन को दोबारा पनपने नहीं दिया जाएगा। पुलिस और ECL की टीम लगातार निगरानी करेगी।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यदि कोई भी व्यक्ति अवैध खनन में संलिप्त पाया गया तो उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन की इस कार्रवाई से क्षेत्र में सक्रिय अवैध कोयला कारोबारियों में हड़कंप मच गया है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
रांची। नक्सल उन्मूलन अभियान के तहत झारखंड पुलिस और CRPF को बड़ी सफलता मिली है। झारखंड में पहली बार एक साथ 27 नक्सलियों ने भारी संख्या में हथियार के साथ सरेंडर किया है। सरेंडर करने वाले 27 नक्सलियों में 25 भाकपा माओवादी संगठन और दो जेजेएमपी उग्रवादी संगठन के नक्सली शामिल है। सरेंडर करने वाले इन नक्सलियों में आठ नक्सलियों के ऊपर कुल 33 लाख रुपये का इनाम घोषित है। इन सभी नक्सलियों के खिलाफ कुल 426 नक्सल मामले दर्ज है। डीजीपी के समक्ष सरेंडर गुरुवार को झारखंड पुलिस मुख्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम में डीजीपी तदाशा मिश्र, एडीजी अभियान, एडीजी मनोज कौशिक सीआरपीएफ आईजी साकेत सिंह, आईजी अभियान नरेंद्र सिंह ने इन सभी नक्सलियों को झारखंड पुलिस और सीआरपीएफ के अधिकारियों के द्वारा आधिकारिक तौर पर सरेंडर कराया गया। ये पुलिस अधिकारी रहे मौजूद आईजी पंकज कंबोज, आईजी प्रभात कुमार, आईजी सुनील बंसल, आईजी असीम विक्रांत मिंज, आईजी अनूप बिरथरे, आईजी मयूर पटेल कन्हैयालाल, डीआईजी, इन्द्रजीत महथा, डीआईजी मनोज रतन चौथे, डीआईजी कार्तिक एस, शैलेंद्र वर्णवाल, एसएसपी राकेश रंजन, एसपी हरिश बिन जमा, एसपी श्री सौरभ समेत कई अधिकारी उपस्थित थे। नक्सलियों ने भारी मात्रा में हथियार पुलिस को सौंपे इस आत्मसमर्पण के साथ ही नक्सलियों ने भारी मात्रा में आधुनिक हथियार, मैगजीन और हजारों राउंड जिंदा कारतूस भी पुलिस को सौंपे हैं। जिनमें एक इंसास एलएमजी, पांच इंसास राइफल, नौ एसएलआर, एक बोल्ट एक्शन रायफल और एक पिस्टल शामिल है। इसके अलावा 31 मैगजीन और 2987 राउंड कारतूस भी इन नक्सलियों के द्वारा पुलिस को सौंपे गए है। सरेंडर करनेवाले नक्सलियों के रैंक – विशेष क्षेत्र समिति सदस्य: 07 – एरिया कमांडर: 07 – सक्रिय कैडर: 13 सरेंडर करने वाले भाकपा माओवादियों की सूची – करण तियू (निवासी गोइल केरा चाईबासा) एरिया कमिटी मेम्बर, 2 लाख इनामी, चाईबासा में 29 मामले दर्ज। – गादी मुण्डा उर्फ गुलशन (निवासी: बुण्डू, रांची), विशेष क्षेत्र समिति सदस्य, इनाम: 5 लाख रुपये, चाईबासा, सरायकेला, रांची और खूंटी मिलाकर कुल 48 मामले दर्ज। – नागेंद्र मुण्डा उर्फ प्रभात मुण्डा उर्फ मुखिया (निवासी: अड़की, खूंटी), विशेष क्षेत्र समिति सदस्य, इनाम: 5 लाख रुपये, चाईबासा और सरायकेला में कुल 38 मामले दर्ज। – रेखा मुण्डा उर्फ जयंती (निवासी: बुण्डू, रांची) विशेष क्षेत्र समिति सदस्य, इनाम: 5 लाख रुपये, चाईबासा और सरायकेला में कुल 18 मामले दर्ज। – सागेन आंगारिया उर्फ दोकोल (निवासी: गोइलकेरा, चाईबासा), विशेष क्षेत्र समिति सदस्य, इनाम: 5 लाख रुपये, चाईबासा में रिकॉर्ड 123 मामले दर्ज। – दर्शन उर्फ बिंज हांसदा (निवासी: चाईबासा), विशेष क्षेत्र समिति सदस्य, चाईबासा में 14 मामले दर्ज। – सुलेमान हांसदा उर्फ सुनी हांसदा, (निवासी: छोटानगरा,चाईबासा),विशेष क्षेत्र समिति सदस्य, इनाम: 5 लाख रुपये, चाईबासा में 13 मामले दर्ज। – बासुमती जेराई उर्फ बासू (निवासी: किरीबुरू, चाईबासा), एरिया कॉमेडनर इनाम: 1 लाख रुपया, चाईबासा में 14 मामले दर्ज। – बैजनाथ मुण्डा: (निवासी: तमाड़, रांची), एरिया कमांडर चाईबासा में 4 मामले दर्ज। – रघु कायम उर्फ गुणा (निवासी: मुफसिल, चाईबासा), एरिया कमांडर, चाईबासा में 19 मामले दर्ज। – किशोर सिरका उर्फ दुर्गा सिरका: (निवासी: टोंटो, चाईबासा), एरिया कमांडर, चाईबासा में 11 मामले दर्ज। – राम दयाल मुण्डा: (निवासी: तमाड़, रांची), एरिया कमांडर रैंक, सरायकेला और चाईबासा में कुल चार मामले दर्ज। – इसके अलावा 13 अन्य सक्रिय कैडर्स ने भी आत्मसमर्पण किया है। इनमें वंदना उर्फ शांति, सुनिता सरदार, डांगुर बोइपाई, बसंती देवगम, मुन्नीराम मुण्डा, अनिशा कोड़ा उर्फ रानी, सपना उर्फ सुरू कालुंडिया, सुसारी उर्फ दसमा कालुंडिया, बिरसा कोड़ा उर्फ हरिसिंह, नुअस, बुमली तियू, निति माई उर्फ निति हेंब्रम और लादू तिरिया शामिल हैं। इन कैडर्स पर भी चाईबासा और अन्य थानों में कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। JJMP के 1 इनामी समेत 2 नक्सलियों ने किया सरेंडरः – सचिन बैक: (अपर घाट, गुमला) 5 लाख का इनामी, 6 मामले गुमला में दर्ज है। – श्रवण गोप: (कलिगा, गुमला) 8 मामले गुमला में दर्ज है। झारखंड में सक्रिय 3 भाकपा माओवादी नक्सली ने दूसरे राज्यों में किया सरेंडर – विश्वनाथ उर्फ संतोष उर्फ सिलाय: (निवासी: पूर्वी गोदावरी, आंध्र प्रदेश) – स्पेशल एरिया कमेटी सदस्य चाईबासा में 13 मामले दर्ज है। इन्होंने तेलंगाना में सरेंडर किया। – पूनम उर्फ जोभा उर्फ भवानी उर्फ सुजाता: (पति: विश्वनाथ, निवासी: पूर्वी गोदावरी, आंध्र प्रदेश), रिजनल कमेटी सदस्य, चाईबासा में 11 मामले दर्ज। इन्होंने भी तेलंगाना में सरेंडर किया। – समर दा उर्फ मधाई पात्रा: (निवासी: पश्चिम बंगाल) – जोनल कमेटी सदस्य, चाईबासा में 3 मामले दर्ज। एक सप्ताह पहले पश्चिम बंगाल में किया सरेंडर। झारखंड में सक्रिय 15 लाख इनामी महिला नक्सली बंगाल में गिरफ्तारः – 15 लाख इनामी बेला सरकार उर्फ आशा दी उर्फ दीपा सरकार: (पति: श्याम सिंकू, निवासी: नादिया मुर्शिदाबाद, पश्चिम बंगाल), रिजनल कमेटी सदस्य,चाईबासा में 3 मामले दर्ज। बाकी बचे नक्सलियों से मुख्य धारा में लौटने की अपील पुलिस प्रशासन के अनुसार, इतनी बड़ी संख्या में कुख्यात नक्सलियों और शीर्ष कमेटी के सदस्यों का मुख्यधारा में लौटना माओवादी संगठन के लिए एक बहुत बड़ा झटका है। सरकार की आत्मसमर्पण नीति और सुरक्षा बलों के बढ़ते दबाव के कारण नक्सली अब लगातार हथियार डाल रहे हैं। पुलिस ने अन्य भटके हुए नक्सलियों से भी हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में शामिल होने की अपील की है।
रांची। बिजली की समस्या से जूझ रही राजधानी रांची सुधार के प्रयास तेज हो गये हैं। बढ़ती गर्मी और लगातार बढ़ रही बिजली की मांग को देखते हुए बिजली विभाग अब ग्रिडों की क्षमता बढ़ाने जा रहा है। शहर के तीन बड़े ग्रिड स्टेशन नामकुम, कांके और हटिया की क्षमता बढ़ाई जा रही है। इससे आने वाले दिनों में लोगों को बिजली कटौती, लो-वोल्टेज और बार-बार ट्रिपिंग जैसी समस्याओं से काफी राहत मिलेगी। रांची में तेजी से आबादी बढ़ रही है। नए अपार्टमेंट, कॉलोनियां और कमर्शियल बिल्डिंग लगातार बन रहे हैं। इसके साथ ही गर्मी बढ़ने पर AC, कूलर और दूसरे बिजली उपकरणों का इस्तेमाल भी तेजी से बढ़ा है। इसी वजह से शहर के कई इलाकों में बिजली ग्रिड पर दबाव बढ़ गया है। कई बार ओवरलोडिंग की वजह से फॉल्ट और बिजली बाधित होने की शिकायतें सामने आती रही हैं। तीन बड़े ग्रिड होंगे अपग्रेड बिजली विभाग की योजना के तहत नामकुम, कांके और हटिया ग्रिड स्टेशनों को अपग्रेड किया जाएगा। बताया जा रहा है कि इन ग्रिडों में ट्रांसफॉर्मर की क्षमता बढ़ाई जाएगी, ताकि ज्यादा लोड संभाला जा सके। मौजूदा समय में हटिया और नामकुम ग्रिड में 50 MVA क्षमता वाले ट्रांसफॉर्मर लगे हैं। अब इनमें से कुछ ट्रांसफॉर्मरों को 80 MVA क्षमता में अपग्रेड करने की तैयारी है। इससे कुल बिजली आपूर्ति क्षमता में बड़ा इजाफा होगा। ट्रिपिंग और लो-वोल्टेज की समस्या रांची के कई इलाकों में गर्मी के दिनों में लो-वोल्टेज की समस्या आम हो जाती है। लोगों को पंखा, कूलर और मोटर तक सही तरीके से नहीं चलने की शिकायत रहती है। ग्रिड की क्षमता बढ़ने के बाद बिजली सप्लाई ज्यादा स्थिर होगी। इससे ट्रिपिंग कम होगी और उपभोक्ताओं को बेहतर वोल्टेज मिलने की उम्मीद है। खासकर शाम के पीक आवर में राहत मिल सकती है। बिजली विभाग सिर्फ गर्मी ही नहीं, बल्कि आने वाले मानसून को देखते हुए भी तैयारी कर रहा है। बारिश के दौरान कई बार लाइन फॉल्ट और ओवरलोडिंग की दिक्कत बढ़ जाती है। ऐसे में पहले से ग्रिड मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। नामकुम, कांके और हटिया ग्रिड रांची शहर की बिजली व्यवस्था की रीढ़ माने जाते हैं। इनकी क्षमता बढ़ने से राजधानी के लाखों घरेलू और व्यावसायिक उपभोक्ताओं को सीधा फायदा मिलेगा।
रांची। झारखंड मुक्ति मोर्चा के पूर्व महासचिव एवं युवा मोर्चा के संस्थापक स्वर्गीय दुर्ग सोरेन की 17वीं पुण्यतिथि दुर्गा सोरेन चौक रांची पर मनाई गई। इस अवसर पर पार्टी के सैकड़ो कार्यकर्ताओं ने भाग लिया और स्व. सोरेन को श्रद्धांजलि अर्पित की। मौके पर राज्यसभा सांसद महुआ माजी, पार्टी के केंद्रीय महासचिव विनोद पांडे, मुश्ताक आलम, अंतू तिर्की, उमेश यादव, रामशरण विश्वकर्मा, तारकेश्वर महतो, वीरू साहू, अभय ढूंढो, सुनील टीका, शांति चामू, बाग कुजूर, पवन तिर्की, बिहारी गोप, उत्तम यादव एवं पवन जेडिया समेत सैकड़ों कार्यकर्ता मौजूद रहे।