कोडरमा। झारखंड के कोडरमा जिले के डोमचांच नगर पंचायत क्षेत्र में हाथियों के झुंड ने एक बार फिर आतंक मचाया है। बुधवार देर रात गांवों में घुसे हाथियों ने कई घरों को नुकसान पहुंचाया और गुरुवार सुबह एक महिला की जान ले ली। इस घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल है, जबकि ग्रामीणों ने वन विभाग से हाथियों के बढ़ते आतंक पर रोक लगाने की मांग की है। जानकारी के अनुसार, हाथियों का झुंड देर रात दुरोडीह और तेतरियाडीह गांव में पहुंच गया। हाथियों ने कई घरों की दीवारों को क्षतिग्रस्त कर दिया, जिससे ग्रामीणों में अफरा-तफरी मच गई। लोगों ने बम-पटाखे फोड़कर और शोर मचाकर हाथियों को गांव से भगाने का प्रयास किया। इसके बावजूद हाथियों का झुंड तेतरियाडीह होते हुए खरीटांड की ओर बढ़ गया। भय के कारण ग्रामीण पूरी रात जागकर पहरा देते रहे। खेत देखने निकली महिला बनी हाथियों का शिकार गुरुवार सुबह तेतरियाडीह निवासी सुदामा देवी खेत-बाड़ी का हाल जानने घर से निकली थीं। इसी दौरान उनका सामना हाथियों के झुंड से हो गया। हाथियों ने उन्हें कुचल दिया, जिससे उनकी मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। सुबह टहलने निकले ग्रामीणों ने जब खेत के पास महिला का क्षत-विक्षत शव देखा तो घटना की जानकारी पूरे गांव में फैल गई। मौके से महिला की टॉर्च, चप्पल और झोला भी बरामद किया गया। मृतका की पहचान सुदामा देवी, पति केदार मेहता, निवासी तेतरियाडीह के रूप में हुई है। घटना के बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। जांच में जुटी पुलिस, ग्रामीणों में आक्रोश सूचना मिलने पर थाना प्रभारी अभिमन्यु पडिहारी पुलिस बल के साथ घटनास्थल पहुंचे और मामले की जांच शुरू की। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए कोडरमा सदर अस्पताल भेज दिया है। घटना के बाद ग्रामीणों में आक्रोश है। लोगों ने वन विभाग से हाथियों के आतंक से स्थायी समाधान निकालने, प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा बढ़ाने और मृतक महिला के परिजनों को उचित मुआवजा देने की मांग की है। लगातार बढ़ रहे मानव-हाथी संघर्ष ने क्षेत्र के लोगों की चिंता और परेशानी बढ़ा दी है।
कोडरमा। जिले के चंदवारा थाना क्षेत्र स्थित चंदवारा बाजार में शनिवार को एक बड़ा सड़क हादसा होते-होते टल गया। तेज रफ्तार कार टोटो और मोटरसाइकिल को बचाने के प्रयास में अनियंत्रित होकर डिवाइडर से जा टकराई। टक्कर इतनी भीषण थी कि कार डिवाइडर से टकराने के बाद हवा में उछल गई। राहत की बात यह रही कि कार में सवार सभी चार लोग सुरक्षित बच गए। पूरी घटना पास में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई। टोटो चालक की लापरवाही बनी हादसे की वजह प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, टोटो चालक सवारी बैठाने के बाद बिना आगे-पीछे का ट्रैफिक देखे अचानक चार लेन हाईवे पर मुड़ गया। उसी समय तेज रफ्तार से आ रही कार के चालक ने टोटो और बाइक को बचाने की कोशिश की, लेकिन वाहन पर नियंत्रण खो बैठा। इसके बाद कार सीधे डिवाइडर से टकरा गई और गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गई। हादसे के बाद टोटो चालक मौके से फरार हो गया। पटना जा रहे थे कार सवार कार में सवार लोगों ने बताया कि वे पटना जा रहे थे। अचानक सामने टोटो आने के कारण दुर्घटना से बचने के लिए कार मोड़ी गई, लेकिन संतुलन बिगड़ने से हादसा हो गया। हालांकि कार बुरी तरह क्षतिग्रस्त होने के बावजूद किसी भी यात्री को गंभीर चोट नहीं आई। यातायात नियमों के पालन की उठी मांग घटना के बाद स्थानीय लोगों ने हाईवे पर बढ़ती लापरवाही पर चिंता जताई। उनका कहना है कि बिना ट्रैफिक देखे सड़क पार करना और नियमों की अनदेखी लगातार हादसों का कारण बन रही है। लोगों ने प्रशासन से चंदवारा बाजार क्षेत्र में प्रभावी ट्रैफिक व्यवस्था, गति नियंत्रण के उपाय और आवश्यकता अनुसार स्पीड ब्रेकर लगाने की मांग की है, ताकि भविष्य में इस तरह की दुर्घटनाओं को रोका जा सके।
कोडरमा। झारखंड के कोडरमा जिले में अवैध शराब तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत पुलिस ने बड़ी सफलता हासिल की है। बिहार भेजी जा रही अंग्रेजी शराब की खेप को जब्त करते हुए पुलिस ने टाटा मैजिक वाहन से 48 बोतल शराब बरामद की और दो तस्करों को गिरफ्तार किया। दोनों आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और उत्पाद अधिनियम की धाराओं के तहत मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है। गुप्त सूचना पर हुई कार्रवाई पुलिस अधीक्षक कुमार शिवाशीष के निर्देश पर जिले में अवैध शराब के निर्माण, भंडारण और तस्करी के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में पुलिस को सूचना मिली कि डोमचांच की ओर से सतगावां होते हुए बिहार ले जाने के लिए एक टाटा मैजिक में शराब की खेप लोड की गई है। सूचना के बाद ढाब थाना प्रभारी बमबम कुमार के नेतृत्व में विशेष टीम का गठन कर ढाब चौक पर वाहन जांच अभियान शुरू किया गया। पुलिस को देख भागने लगे तस्कर जांच के दौरान संदिग्ध टाटा मैजिक को रोकने का प्रयास किया गया, लेकिन चालक ने वाहन की रफ्तार बढ़ाकर भागने की कोशिश की। कुछ दूरी पर वाहन छोड़कर चालक और उपचालक पैदल फरार होने लगे। पुलिस ने पीछा कर दोनों को पकड़ लिया और वाहन की तलाशी ली। 48 बोतल अंग्रेजी शराब बरामद तलाशी में टाटा मैजिक से कुल 48 बोतल अंग्रेजी शराब बरामद हुई। इनमें 42 बोतल रॉयल स्टैग (750 एमएल) और 6 बोतल आइकोनिक व्हाइट शामिल हैं। पूछताछ के दौरान आरोपी शराब परिवहन से संबंधित कोई वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान बिहार के नालंदा निवासी चंदन कुमार (19) और नवादा निवासी अमन कुमार (24) के रूप में हुई है। जांच जारी, एसपी ने दी सख्त चेतावनी इस मामले में ढाब थाना में कांड संख्या 04/26 दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। एसपी कुमार शिवाशीष ने कहा कि जिले में अवैध शराब कारोबार और तस्करी के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि कानून तोड़ने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और किसी भी तस्कर को बख्शा नहीं जाएगा।
कोडरमा। कोडरमा जिले के प्रसिद्ध केशरिया कलाकंद को अब भौगोलिक संकेत (GI Tag) मिल गया है। इस उपलब्धि के बाद स्थानीय मिठाई कारोबारियों और लोगों में खुशी की लहर है। यह मान्यता न सिर्फ इस पारंपरिक मिठाई की पहचान को मजबूत करेगी, बल्कि इसे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में नई ऊंचाई भी देगी। झारखंड के 11 उत्पादों को मिला GI टैग GI टैग मिलने के साथ ही झारखंड के कुल 11 पारंपरिक उत्पादों को यह विशेष पहचान मिली है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं— कोडरमा का केशरिया कलाकंद गोड्डा का भगैया सिल्क सरायकेला-खरसावां का कुचाई सिल्क मुंडा ज्वेलरी खूंटी का बांस शिल्प डोकरा क्राफ्ट दुमका के चंदर बदोनी पपेट्स तसर सिल्क और साड़ी जादूपटुआ पेंटिंग पंची साड़ी झारखंड हैंडीक्राफ्ट उत्पाद इस प्रक्रिया में नाबार्ड (NABARD) की भी अहम भूमिका रही है, जिसने GI टैग की पुष्टि की। कोडरमा के केशरिया कलाकंद का ऐतिहासिक सफर कोडरमा के झुमरीतिलैया का केशरिया कलाकंद आज सिर्फ एक मिठाई नहीं, बल्कि एक ऐतिहासिक पहचान बन चुका है। इसका इतिहास ब्रिटिश काल से जुड़ा हुआ बताया जाता है। स्थानीय व्यापारी रवि अग्रवाल के अनुसार, विभाजन के बाद पाकिस्तान के रावलपिंडी से आए भाटिया परिवार ने कोडरमा में इस मिठाई की शुरुआत की थी। शुरुआती दौर में इसे “भाटिया स्वीट्स” के नाम से बेचा जाता था और उस समय सफेद कलाकंद प्रसिद्ध था। 1975 में बना केशरिया कलाकंद 1975 में झुमरीतिलैया के आदर्श जलपान के एक कारीगर ने प्रयोग करते हुए पहली बार केशरिया कलाकंद तैयार किया। इसके बाद इसकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ी और 1977 में यह दुकान “आनंद बिहार मिठाई” के रूप में स्थापित हुई। आज भी झुमरीतिलैया की कई दुकानों में यह मिठाई बनाई जाती है और इसकी मांग लगातार बढ़ ही रही है। विदेशों तक पहुंची कोडरमा की मिठास केशरिया कलाकंद की पहचान सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि विदेशों में भी इसकी मांग बनी हुई है। प्रवासी भारतीय जब अपने देश लौटते हैं तो वे अक्सर यह मिठाई अपने साथ ले जाना नहीं भूलते। स्थानीय लोगों का मानना है कि झुमरीतिलैया की जलवायु और परंपरागत बनाने की विधि इसके स्वाद को खास बनाती है। GI टैग से मिलेगा बड़ा लाभ GI टैग मिलने के बाद कोडरमा के केशरिया कलाकंद को वैश्विक बाजार में नई पहचान मिलेगी। इससे— उत्पाद की ब्रांड वैल्यू बढ़ेगी स्थानीय कारीगरों की आय में वृद्धि होगी नकली उत्पादों पर रोक लगेगी पारंपरिक विरासत को कानूनी सुरक्षा मिलेगी GI टैग किसी भी विशेष भौगोलिक क्षेत्र के उत्पाद को दी जाने वाली पहचान है, जो उसकी विशिष्टता और गुणवत्ता को प्रमाणित करता है। कोडरमा के केशरिया कलाकंद को मिला GI टैग झारखंड की सांस्कृतिक और पाक विरासत के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। यह न केवल स्थानीय पहचान को मजबूत करेगा, बल्कि इस पारंपरिक मिठाई को वैश्विक मंच पर भी नई ऊंचाई तक पहुंचाएगा।
कोडरमा। कोडरमा जिले के कॉलेजों को विनोबा भावे विश्वविद्यालय (VBU), हजारीबाग से अलग कर गिरिडीह में बनने वाले नए विश्वविद्यालय से जोड़ने के फैसले का विरोध लगातार बढ़ता जा रहा है। इस मुद्दे को लेकर छात्र, अभिभावक और सामाजिक संगठन खुलकर सड़क पर उतर आए हैं। जिले के कई कॉलेजों, खासकर जेजे कॉलेज परिसर में छात्रों और स्थानीय लोगों ने धरना-प्रदर्शन कर सरकार के फैसले के खिलाफ आवाज बुलंद की। कोडरमा बचाओ संघर्ष समिति के बैनर तले हुए प्रदर्शन में शामिल लोगों का कहना है कि कोडरमा के कॉलेजों का वर्षों पुराना संबंध विनोबा भावे विश्वविद्यालय से रहा है। ऐसे में अचानक उन्हें गिरिडीह विश्वविद्यालय से जोड़ना छात्रों के हित में नहीं है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि इससे पढ़ाई, परीक्षा, सर्टिफिकेट और अन्य प्रशासनिक कार्यों में अनावश्यक परेशानी बढ़ेगी। दूरी और खर्च बढ़ने की चिंता छात्रों का कहना है कि हजारीबाग कोडरमा से काफी नजदीक है, जबकि गिरिडीह की दूरी अधिक होने के कारण आने-जाने में समय और खर्च दोनों बढ़ेंगे। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के छात्रों के लिए यह फैसला मुश्किलें खड़ी कर सकता है। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि अभी छात्र विश्वविद्यालय संबंधी कार्य आसानी से निपटा लेते हैं, लेकिन नए बदलाव के बाद उन्हें लंबी दूरी तय करनी पड़ेगी। छात्राओं की सुरक्षा को लेकर भी उठे सवाल इस फैसले को लेकर छात्राओं और उनके अभिभावकों में भी चिंता देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि दूर विश्वविद्यालय होने से छात्राओं की सुरक्षा और यात्रा संबंधी परेशानियां बढ़ सकती हैं। इससे कई छात्राएं उच्च शिक्षा से दूर हो सकती हैं। प्रदर्शन कर रहे संगठनों ने सरकार को चेतावनी दी है कि यदि फैसला वापस नहीं लिया गया तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर सड़क जाम और बड़े प्रदर्शन भी किए जाएंगे।
कोडरमा। अमृत भारत योजना के तहत कोडरमा स्टेशन समेत लोकसभा क्षेत्र के कई स्टेशनों पर सुविधाएं बढ़ाने और विकास कार्यों को तेज किया जा रहा है। इसी को लेकर केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने धनबाद रेल मंडल के डीआरएम और अन्य रेलवे अधिकारियों के साथ अहम बैठक की। मंत्री ने स्टेशनों की सुविधाओं की समीक्षा की यह बैठक कोडरमा स्टेशन के नए गेस्ट हाउस में हुई। बैठक में बरकट्ठा विधायक अमित यादव, धनबाद रेल मंडल के डीआरएम और रेलवे निर्माण से जुड़े अधिकारी भी मौजूद रहे। बैठक के दौरान सभी ने स्टेशन विकास और यात्री सुविधाओं को लेकर विस्तार से चर्चा की। मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने कोडरमा लोकसभा क्षेत्र के अलग-अलग रेलवे स्टेशनों पर मौजूद सुविधाओं की समीक्षा की। साथ ही आने वाले समय में किन-किन सुविधाओं को बढ़ाया जाना है, इस पर अधिकारियों को जरूरी दिशा-निर्देश भी दिए। कोडरमा स्टेशन पर मिलेंगी आधुनिक सुविधाए अमृत भारत योजना के तहत कोडरमा स्टेशन पर एयरपोर्ट जैसी आधुनिक सुविधाओं वाला नया भवन तैयार किया जा रहा है। इसके पूरा होने के बाद यात्रियों को बेहतर और आधुनिक सुविधाएं मिलेंगी। कोडरमा के रास्ते फ्रेट कॉरिडोर परियोजना पर भी काम चल रहा है। बैठक में इस पर भी चर्चा हुई कि कैसे रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर को और मजबूत किया जाए और क्षेत्रीय विकास को गति दी जाए। कई प्रस्तावों को मिली मंजूरी मंत्री ने बताया कि कोडरमा लोकसभा क्षेत्र से जुड़े कई प्रस्ताव केंद्र सरकार के पास भेजे गए हैं, जिनमें से कई को मंजूरी मिल चुकी है और कुछ पर प्रक्रिया जारी है। आने वाले समय में इन योजनाओं का फायदा आम लोगों को मिलेगा। अन्नपूर्णा देवी ने कहा कि रेलवे का फोकस सिर्फ स्टेशन निर्माण नहीं, बल्कि यात्रियों की सुविधा और आधारभूत संरचना को मजबूत करने पर भी है। उन्होंने भरोसा जताया कि आने वाले दिनों में लोगों को इसका सीधा फायदा देखने को मिलेगा।
कोडरमा। कोडरमा जिले के जयनगर थाना क्षेत्र के कंझियाडीह गांव में बीती रात जंगली हाथियों के झुंड ने कहर बरपा दिया। ईंट भट्टे के पास रह रहे मजदूरों की झोपड़ियों पर अचानक हमला होने से पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे, लेकिन भगदड़ में कई लोग फंस गए। हाथियों ने कच्चे मकानों को तोड़ते हुए भारी नुकसान पहुंचाया। दो लोगों की दर्दनाक मौत इस हमले में दो लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि तीन अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। मृतकों की पहचान बिहार के फतेहपुर निवासी 32 वर्षीय राजकुमार मांझी और 12 वर्षीय लवकुश के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि हमले के दौरान एक बच्चा झोपड़ी में फंस गया था। उसे बचाने की कोशिश में परिजन दौड़े, लेकिन अफरा-तफरी में बच्चा हाथियों के करीब पहुंच गया और उनकी चपेट में आ गया। घायलों का इलाज जारी घायलों में राजकुमार मांझी की पत्नी गौरी देवी, लवकुश की मां कारी देवी और एक डेढ़ वर्षीय बच्चा शामिल हैं। सभी को तुरंत अस्पताल भेजा गया, जहां उनका इलाज चल रहा है। डॉक्टरों के अनुसार कुछ घायलों की हालत गंभीर बनी हुई है। गांव में मातम और डर का माहौल घटना के बाद गांव में शोक और भय का माहौल है। आसपास के इलाकों में भी दहशत फैल गई है। ग्रामीण रात में घरों से बाहर निकलने से डर रहे हैं और लगातार सुरक्षा की मांग कर रहे हैं। वन विभाग पर उठे सवाल ग्रामीणों ने वन विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि क्षेत्र में हाथियों की लगातार आवाजाही के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। लोगों ने प्रशासन से जल्द स्थायी समाधान और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग की है।
कोडरमा। झारखंड में अब व्हाट्सएप के जरिए भी साइबर ठगी का मामला प्रकाश में आया है। कोडरमा पुलिस ने ऑनलाइन ठगी के एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। एस्कॉर्ट सर्विस के नाम पर लोगों को झांसे में लेकर उनसे पैसे ऐंठे जा रहे थे। यह कार्रवाई SP अनुदीप सिंह को मिली गुप्त सूचना के आधार पर की गई। फर्जी आईडी बनाकर ठगी पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी अलग-अलग वेबसाइटों पर फर्जी आईडी बनाकर अपना मोबाइल नंबर डालते थे। जब कोई व्यक्ति संपर्क करता, तो उसे लड़कियों की तस्वीरें भेजकर भरोसे में लिया जाता था। इसके बाद “बुकिंग” के नाम पर QR कोड भेजकर पैसे मंगवाए जाते थे। QR कोड स्कैन करते ही कट जाते थे पैसे पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि जैसे ही कोई व्यक्ति QR कोड स्कैन करता, पैसे सीधे उनके खाते में पहुंच जाते थे। इसके बाद वे संपर्क बंद कर देते थे और रकम आपस में बांट लेते थे। पुलिस ने छापेमारी कर इन्हे किया गिरफ्तार कोडरमा थाना प्रभारी विकास पासवान के नेतृत्व में बनी टीम ने बेकोबार में छापेमारी कर अनिल पंडित और मंटू कुमार पंडित को गिरफ्तार किया। दोनों मौके से भागने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन पुलिस ने पकड़ लिया। कई शहरों में फैला नेटवर्क पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि यह गिरोह सिर्फ कोडरमा ही नहीं, बल्कि कई अन्य शहरों में भी सक्रिय था। आरोपियों के पास से मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं, जिनमें फर्जी चैट, युवतियों की तस्वीरें और ठगी के लिए इस्तेमाल किए गए QR कोड मिले हैं। 7 अन्य तलाश में छापेमारी जारी मामले में बेकोबार गांव के सात अन्य लोगों की भी पहचान की गई है। उनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। कोडरमा थाना में प्राथमिकी दर्ज कर आगे की कार्रवाई जारी है। पुलिस ने आम लोगों से की अपील पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि वे ऐसे ऑनलाइन प्रलोभनों और अनजान वेबसाइटों से सावधान रहें। बिना जांचे-परखे किसी QR कोड को स्कैन करने से बचें।
रांची। झारखंड के कोडरमा जिले में गुरुवार सुबह एक सड़क हादसे में पांच प्रवासी मजदूर घायल हो गए। यह दुर्घटना चंदवारा थाना क्षेत्र के ढाब-पांडेयबारा रोड पर हुई, जहां एक ऑटो अनियंत्रित होकर पलट गया। घायलों में एक मजदूर की हालत गंभीर बताई जा रही है। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और स्थानीय लोगों की मदद से राहत कार्य शुरू किया गया। सुबह करीब 5 बजे हुआ हादसा जानकारी के अनुसार, सभी मजदूर मुंबई से ट्रेन के जरिए कोडरमा स्टेशन पहुंचे थे। वहां से वे अपने घर जाने के लिए एक ऑटो किराए पर लेकर निकले थे। सुबह करीब 5 बजे, जब ऑटो चंदवारा मस्जिद के पास पहुंचा, तभी चालक वाहन पर नियंत्रण खो बैठा। देखते ही देखते ऑटो सड़क पर पलट गया और उसमें सवार सभी मजदूर घायल हो गए। स्थानीय लोगों ने दिखाई तत्परता हादसे के तुरंत बाद आसपास के लोग घटनास्थल पर पहुंच गए। स्थानीय लोगों ने घायलों को ऑटो से बाहर निकाला और उन्हें प्राथमिक सहायता दी। साथ ही चंदवारा थाना पुलिस को घटना की सूचना भी दी गई। कुछ देर के लिए इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बना रहा। पुलिस ने घायलों को अस्पताल पहुंचाया सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और सभी घायलों को इलाज के लिए सदर अस्पताल, कोडरमा भेजा गया। अस्पताल में उनका इलाज जारी है। डॉक्टरों के मुताबिक, घायलों में एक की हालत गंभीर बनी हुई है, जबकि अन्य चार की स्थिति स्थिर बताई जा रही है। हजारीबाग के चौपारण के रहने वाले हैं मजदूर स्थानीय सूत्रों के अनुसार, घायल सभी मजदूर हजारीबाग जिले के चौपारण प्रखंड के निवासी हैं। वे मुंबई में काम करते थे और अब अपने गांव लौट रहे थे। घर पहुंचने से पहले हुए इस हादसे ने उनके परिवारों की चिंता बढ़ा दी है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
झारखंड के कोडरमा जिले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक पुलिस अधिकारी को रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया। Anti Corruption Bureau (ACB) की टीम ने गुरुवार को Koderma के चंदवारा थाना में तैनात दारोगा पवन कुमार राम को 15 हजार रुपये घूस लेते हुए पकड़ लिया। अवैध शराब मामले को मैनेज करने के नाम पर मांगी थी घूस जानकारी के मुताबिक चंदवारा थाना क्षेत्र में कुछ दिन पहले अवैध शराब को लेकर छापेमारी की गई थी। इसी मामले को मैनेज करने और आरोपी पक्ष को राहत देने के नाम पर दारोगा की ओर से करीब एक लाख रुपये रिश्वत की मांग की गई थी। पीड़ित पक्ष इस मांग से परेशान होकर शिकायत करने का फैसला किया। शिकायत के बाद ACB ने बिछाया जाल बताया जाता है कि पीड़ित ने इस मामले की जानकारी JKLM के नेता प्रेम नायक को दी। इसके बाद शिकायत Hazaribagh स्थित ACB कार्यालय में पहुंची। प्रारंभिक जांच में रिश्वत की पुष्टि होने के बाद ACB की टीम ने ट्रैप बिछाने की योजना बनाई। क्वार्टर में बुलाकर ले रहा था रिश्वत योजना के तहत गुरुवार को पीड़ित को दारोगा को 15 हजार रुपये देने के लिए भेजा गया। जैसे ही दारोगा पवन कुमार राम ने पैसे लिए, पहले से मौजूद ACB की टीम ने उसे मौके पर ही पकड़ लिया। बताया गया कि दारोगा थाना परिसर में बने अपने सरकारी क्वार्टर में ही रिश्वत ले रहा था। गिरफ्तारी के बाद हजारीबाग ले जाया गया रंगेहाथ गिरफ्तारी के बाद ACB की टीम आरोपी दारोगा को अपने साथ हजारीबाग ले गई, जहां उससे पूछताछ की जा रही है और आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा रही है। भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई का संदेश इस कार्रवाई के बाद जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त संदेश गया है। ACB अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि यदि कोई सरकारी कर्मचारी रिश्वत की मांग करता है तो उसकी जानकारी तुरंत ACB को दें, ताकि ऐसे मामलों पर सख्त कार्रवाई की जा सके।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।