झारखंड

मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने रेल अधिकारियों संग की बैठक,  कोडरमा में बढ़ेंगी यात्री सुविधाएं

Anjali Kumari मई 2, 2026 0
Koderma railway update
Koderma railway update

कोडरमा। अमृत भारत योजना के तहत कोडरमा स्टेशन समेत लोकसभा क्षेत्र के कई स्टेशनों पर सुविधाएं बढ़ाने और विकास कार्यों को तेज किया जा रहा है। इसी को लेकर केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने धनबाद रेल मंडल के डीआरएम और अन्य रेलवे अधिकारियों के साथ अहम बैठक की।


मंत्री ने स्टेशनों की सुविधाओं की समीक्षा की


यह बैठक कोडरमा स्टेशन के नए गेस्ट हाउस में हुई। बैठक में बरकट्ठा विधायक अमित यादव, धनबाद रेल मंडल के डीआरएम और रेलवे निर्माण से जुड़े अधिकारी भी मौजूद रहे। बैठक के दौरान सभी ने स्टेशन विकास और यात्री सुविधाओं को लेकर विस्तार से चर्चा की। मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने कोडरमा लोकसभा क्षेत्र के अलग-अलग रेलवे स्टेशनों पर मौजूद सुविधाओं की समीक्षा की। साथ ही आने वाले समय में किन-किन सुविधाओं को बढ़ाया जाना है, इस पर अधिकारियों को जरूरी दिशा-निर्देश भी दिए।


कोडरमा स्टेशन पर मिलेंगी आधुनिक सुविधाए


अमृत भारत योजना के तहत कोडरमा स्टेशन पर एयरपोर्ट जैसी आधुनिक सुविधाओं वाला नया भवन तैयार किया जा रहा है। इसके पूरा होने के बाद यात्रियों को बेहतर और आधुनिक सुविधाएं मिलेंगी। कोडरमा के रास्ते फ्रेट कॉरिडोर परियोजना पर भी काम चल रहा है। बैठक में इस पर भी चर्चा हुई कि कैसे रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर को और मजबूत किया जाए और क्षेत्रीय विकास को गति दी जाए।

 

कई प्रस्तावों को मिली मंजूरी


मंत्री ने बताया कि कोडरमा लोकसभा क्षेत्र से जुड़े कई प्रस्ताव केंद्र सरकार के पास भेजे गए हैं, जिनमें से कई को मंजूरी मिल चुकी है और कुछ पर प्रक्रिया जारी है। आने वाले समय में इन योजनाओं का फायदा आम लोगों को मिलेगा। अन्नपूर्णा देवी ने कहा कि रेलवे का फोकस सिर्फ स्टेशन निर्माण नहीं, बल्कि यात्रियों की सुविधा और आधारभूत संरचना को मजबूत करने पर भी है। उन्होंने भरोसा जताया कि आने वाले दिनों में लोगों को इसका सीधा फायदा देखने को मिलेगा।

Popular post
शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

झारखंड

View more
Election exit polls
एग्जिट पोल के दावे  कितने सही कितने गलत

रांची। देश के पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव संपन्न होने के बाद रिजल्ट का इंतजार है जो 4 मई को आएंगे।  इस बीच 29 अप्रैल को चुनाव संपन्न होते ही पांच राज्यों के एग्जिट पोल भी सामने आए। इन सब में पश्चिम बंगाल में हुए चुनाव को लेकर एग्जिट पोल में सबसे ज्यादा चर्चा है। यहां 6 में से चार सर्वे एजेंसियों ने NDA की बढ़त दिखाई है जबकि दो ने TMC की बढ़त का अनुमान लगाया है। एग्जिट पोल के इन दावों से जहां एक ओर NDA समर्थक उत्साहित है वही TMC समर्थक भड़के हुए है। वे केंद्र सरकार और सुरक्षा एजेंसियों पर  गड़बड़ी का आरोप लगा रहे  हैं। वहीं BJP इसे उनकी हताशा बता रही है। बावजूद इसके एग्जिट पोल के दावों को लेकर NDA समर्थक के अंदर कहीं ना कहीं एक आशंका भी है। यह आशंका पिछले विधानसभा चुनाव के नतीजों से जुड़ी है। बता दे की साल 2021 में पश्चिम बंगाल में हुए विधानसभा चुनाव को लेकर ज्यादातर सर्वे एजेंसियों ने अपने एग्जिट पोल में NDA को बढ़त मिलते दिखाई थी और बहुमत की ओर से इशारा किया था। परंतु जब चुनाव के नतीजे आए तो एग्जिट पोल के दावों के बिल्कुल विपरीत थे, जहां सर्वे एजेंसी या नहीं ममता बनर्जी की टीएमसी को 80 से लेकर 150 सीट मिलने का दावा किया था। वही नतीजे में ममता की पार्टी 200 का आंकड़ा पार कर गई। वही जिस NDA  को सर्वे एजेंसी ने 120 से 180 सीटें  मिलने का दावा किया था वह अब महज 77 पर सिमट गई। इसी नतीजे को याद कर NDA  नेताओं और समर्थकों के मन के किसी कोने में आशंका का एक तिनका गढ़ा हुआ है,तो वहीं एग्जिट पोल इन दावों से TMC के नेताओं और समर्थकों में जरा भी उत्साह कम नहीं हुआ। उन्हें अभी भी यकीन है कि साल 2021 की तरह इस बार भी एग्जिट पोल के दावों के विरुद्ध चुनावी नतीजे उनके पक्ष में होंगे और एक बार फिर ममता दी की सरकार बनेगी। पश्चिम बंगाल की विधानसभा चुनाव की एक कहानी पहले और आखिरी नहीं थी जब से चुनाव के बाद एग्जिट पोल की शुरुआत हुई है।जब से चुनाव के बाद एग्जिट पोल को शुरुआत हुई हैं तब से ही यह उलट फेर देखने को मिलते रहे हैं। इसका मतलब यह नहीं है एग्जिट पोल के दावे हमेशा सही नहीं होते।  कई बार यह सही भी होते हैं और कई बार गलत भी होते हैं।  चूँकि एग्जिट पोल वोटरों से बातचीत और उनके राय पर आधारित होता है। चुनाव के दौरान विभिन्न सर्वे एजेंसियों के सर्वेक्षक अलग-अलग कोटि के मतदाताओं से बातचीत से डाटा एकत्र करते और बाद में एजेंसी द्वारा प्राप्त आंकड़ों के आधार पर विभिन्न सीटों का अनुमान लगाया जाता है।इसमें मतदात सर्वेक्षक को सटीक जानकारी दे रहा है कि नहीं यह अनुमान लगाना मुश्किल होता है यही कारण है कि कई बार एक्जिट पोल के दावे सटीक होते हैं और कई बार नहीं होते हैं। इसका सबसे ताजा उदाहरण 2024 के अंत में हुए झारखंड विधानसभा चुनाव है जहां झारखंड के एग्जिट पोल में कांटे की टक्कर दिखाई गई थी। एक-दो एजेंसियों ने NDA  की बढ़त दिखाई थी लेकिन Axis My India के दावे सटीक हुए। परंतु ऐसा नहीं है कि हर बार एक्जिट पोल गलत होता है कभी-कभी एग्जिट पोल का अनुमान लगाना सही भी हो सकता है। वहीं महाराष्ट्र में सभी एजेंसियों  ने NDA की सत्ता में वापस आते ही दिखाया था। इससे यह साबित  कि सभी के दावे गलत नहीं  होते कुछ दावें  सच भी होते  हैं। वही बात बिहार की करें तो बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में भी काफी हद तक एग्जिट पोल का अनुमान सच हुआ। ठीक ऐसे ही 2024 के लोकसभा चुनाव में भी हुआ था 400 का आंकड़ा पार तो नहीं  कर पाई। लेकिन बीजेपी ने 240 सीटों के साथ सत्ता  पर  वापस आई। अंत  में  यह कहा जा सकता है  कि एग्जिट पोल हमेशा  गलत नहीं  होती कभी  कभी सच भी होती  है।

Anjali Kumari मई 2, 2026 0
BJP protest

बीजेपी ने भोजपुरी-मगही हटाने पर ने सरकार को घेरा

Prince Khan gangster news

गैंगस्टर प्रिंस खान का राइट हैंड शैफी उर्फ मेजर और 3 दिन के रिमांड पर, खुलेंगे कई राज

Koderma railway update

मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने रेल अधिकारियों संग की बैठक,  कोडरमा में बढ़ेंगी यात्री सुविधाएं

CM Hemant Soren
CM हेमंत सोरेन के डिस्चार्ज पिटीशन पर सुनवाई पूरी

रांची। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के डिस्चार्च पिटीशन पर रांची के पीएमएलए कोर्ट में सुनवाई पूरी हो गयी। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने रांची के 8.87 एकड़ भूमि घोटाले से संबंधित मनी लाउंड्रिंग को लेकर कोर्ट में डिस्चार्ज पिटीशन दायर कर रखा है। जानकारी के अनुसार कोर्ट में ED और हेमंत सोरेन की ओर से हुई बहस पूरी हो गयी। इसके बाद कोर्ट ने दोनों पक्षों को 8 मई तक लिखित रूप में भी अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया। 5 दिसंबर 2025 को याचिका दाखिल की थी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पूर्व में कोर्ट में 5 दिसंबर 2025 को याचिका दाखिल की थी। इसमें उन्होंने अपने को बेदाग बताते हुए आरोप मुक्त करने का आग्रह किया था। उधर ईडी ने इस मामले में लगभग 10 आरोपियों के विरुद्ध चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। भूमि घोटाले से जुड़े इस मामले में ईडी द्वारा कई आरोपियों के यहां छापेमारी की गयी थी। साथ ही कई को दफ्तर बुला कर पूछताछ की गयी थी।  इसी मामले में ईडी ने हेमंत सोरेन को 31 जनवरी 2024 को गिरफ्तार किया था। हालांकि 24 जून 2024 को हाईकोर्ट से उन्हें जमानत मिल गयी थी।

Anjali Kumari मई 2, 2026 0
Emergency alert test

देशभर में करोड़ों मोबाइल पर एकसाथ अलर्ट मैसेज आया, सायरन की आवाज सुनाई दी, सरकार ने इमरजेंसी अलर्ट सिस्टम की टेस्टिंग की

6th pay scale pension

झारखंड में 6वें वेतनमान वाले पेंशनरों का बढ़ा महंगाई भत्ता

Jharkhand rainfall

झारखंड में हो रही बारिश से फसलों को फायदा, किसान खुश

Chutney Don
जमशेदपुर की ‘चटनी डॉन’ को राहत, तड़ीपार उल्लंघन केस में मिली जमानत

जमशेदपुर। जमशेदपुर की चर्चित महिला अपराधी प्रिया सिंह उर्फ ‘चटनी डॉन’ को अदालत से बड़ी राहत मिली है। जिला प्रधान एवं सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार पांडेय की अदालत ने शनिवार को सुनवाई के बाद उसे जमानत दे दी। इस फैसले के बाद वह जेल से बाहर आ सकेगी।   तड़ीपार आदेश तोड़ने पर हुई थी गिरफ्तारी प्रिया सिंह को पहले सीसीए (क्रिमिनल लॉ) के तहत जिला बदर यानी तड़ीपार किया गया था। इसके बावजूद वह अवैध रूप से शहर में प्रवेश कर रही थी। बीते 10 मार्च को सोनारी थाना पुलिस और सशस्त्र बलों ने गुप्त सूचना के आधार पर ग्वाला बस्ती में छापेमारी कर उसे गिरफ्तार किया था। इसके बाद उसे घाघीडीह सेंट्रल जेल भेज दिया गया था।   जमानत के लिए दिए गए अहम तर्क बचाव पक्ष के अधिवक्ता आनंद झा ने कोर्ट में जमानत के लिए कई महत्वपूर्ण दलीलें पेश कीं। उन्होंने कहा कि तड़ीपार उल्लंघन के मामले में अधिकतम सजा पांच साल से कम है और आरोपी पहले ही करीब दो महीने जेल में बिता चुकी है। इसके अलावा मानवीय आधार पर यह भी बताया गया कि प्रिया सिंह का छोटा बच्चा बीमार है। कोर्ट में बच्चे के इलाज से जुड़े मेडिकल दस्तावेज भी प्रस्तुत किए गए। इन तथ्यों को ध्यान में रखते हुए अदालत ने जमानत याचिका स्वीकार कर ली।   अपराध जगत में है पहचान सोनारी क्षेत्र की रहने वाली प्रिया सिंह उर्फ ‘चटनी डॉन’ पर रंगदारी, मारपीट और अन्य अवैध गतिविधियों से जुड़े सात से अधिक मामले दर्ज हैं। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तारी के समय वह किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने की योजना में थी।

Anjali Kumari मई 2, 2026 0
Stray dogs attack

धनबाद में आवारा कुत्तों के झुंड ने 5 साल के बच्चे की जान ली

Rajya Sabha Election

Rajya Sabha Election: झारखंड में राज्यसभा चुनाव को लेकर JMM-कांग्रेस आमने-सामने

Jharkhand weather update

झारखंड में इस साल सुखाड़ की आशंका, सरकार सतर्क

0 Comments

Top week

Donald Trump and Iranian leader amid rising tensions over nuclear talks and Strait of Hormuz
दुनिया

युद्ध रोकने को ईरान का नया प्रस्ताव, लेकिन ट्रंप खुश नहीं; परमाणु मुद्दे पर अड़ा अमेरिका

surbhi अप्रैल 28, 2026 0

Voting poll

अगर भविष्य में रश्मिका और विजय जीवनसाथी बनते हैं, तो क्या आपको उनकी जोड़ी पसंद होगी?