वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज उछाल का असर अब भारतीय एविएशन सेक्टर पर साफ दिखाई देने लगा है। विमान ईंधन (ATF) की बढ़ती कीमतों ने एयरलाइंस कंपनियों के ऑपरेशन को महंगा बना दिया है। इसी दबाव के चलते Air India ने रोजाना करीब 100 उड़ानों में कटौती की तैयारी शुरू कर दी है, जिनमें घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों रूट शामिल हैं।
जानकारी के मुताबिक, Air India फिलहाल रोजाना लगभग 1,100 फ्लाइट्स ऑपरेट करती है। जून महीने में यूरोप, नॉर्थ अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और सिंगापुर जैसे अंतरराष्ट्रीय रूट्स पर सबसे ज्यादा कटौती देखने को मिल सकती है। यह फैसला बढ़ती लागत और घटते मुनाफे के दबाव में लिया जा रहा है।
एटीएफ की कीमतों ने बढ़ाई चिंता
एयरलाइन इंडस्ट्री के लिए जेट फ्यूल सबसे बड़ा खर्च होता है, जिसकी हिस्सेदारी कुल ऑपरेटिंग कॉस्ट में करीब 40% तक होती है। हाल के महीनों में ATF की कीमतों में भारी उछाल आया है। हालांकि सरकार ने फिलहाल घरेलू जेट फ्यूल की कीमतों में राहत दी है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए कोई राहत नहीं दी गई है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, दिल्ली में जेट फ्यूल की कीमतें मार्च के मुकाबले लगभग दोगुनी हो चुकी हैं। वहीं, ग्लोबल एवरेज जेट फ्यूल की कीमत फरवरी के करीब 99.40 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर अप्रैल के अंत तक 179.46 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई–यानी करीब 80% की बढ़ोतरी।
इंडस्ट्री ने सरकार से मांगी मदद
Federation of Indian Airlines, जिसमें इंडिगो, एयर इंडिया और स्पाइसजेट जैसी कंपनियां शामिल हैं, ने सरकार से राहत की मांग की है। फेडरेशन का कहना है कि मौजूदा कीमतों के चलते इंडस्ट्री पर भारी दबाव है और अगर जल्द राहत नहीं मिली तो स्थिति गंभीर हो सकती है।
लंबे रूट और बढ़ती लागत ने बढ़ाया संकट
Air India पर अन्य कंपनियों की तुलना में ज्यादा असर इसलिए भी पड़ रहा है क्योंकि इसका अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क बड़ा है। पाकिस्तान का एयरस्पेस बंद होने के कारण यूरोप और नॉर्थ अमेरिका जाने वाली फ्लाइट्स को लंबा रूट लेना पड़ रहा है, जिससे ईंधन खपत और क्रू कॉस्ट दोनों बढ़ गए हैं। कई फ्लाइट्स को वियना और स्टॉकहोम जैसे शहरों में स्टॉपओवर करना पड़ रहा है।
घाटा 20,000 करोड़ के पार, टाटा ग्रुप पर दबाव
एयर इंडिया का कुल घाटा पहले ही 20,000 करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है। Tata Group और उसकी साझेदार Singapore Airlines पर इस घाटे को कम करने और कंपनी को मुनाफे में लाने का दबाव बढ़ता जा रहा है। गौरतलब है कि टाटा ग्रुप ने 2022 में एयर इंडिया का अधिग्रहण किया था।
यात्रियों पर क्या होगा असर?
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ATF की कीमतों में बढ़ोतरी जारी रहती है, तो आने वाले समय में फ्लाइट टिकट महंगे हो सकते हैं और उड़ानों की संख्या में और कटौती भी संभव है। इसका सीधा असर यात्रियों की जेब और यात्रा योजनाओं पर पड़ेगा।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। नई दिल्ली में लगातार तीन दिनों से जारी सोने और चांदी की तेजी पर अब ब्रेक लग गया है। वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव में नरमी और अमेरिका-ईरान शांति वार्ता से जुड़ी खबरों के बीच निवेशकों ने मुनाफावसूली शुरू कर दी है, जिससे कीमती धातुओं के दामों में गिरावट दर्ज की गई है। वायदा बाजार में नरमी मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर कारोबार की शुरुआत आज गिरावट के साथ हुई। जुलाई 2026 डिलीवरी वाली चांदी की कीमत करीब 0.5% गिरकर 2,50,001 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई, जबकि अगस्त 2026 डिलीवरी वाला सोना भी हल्की कमजोरी के साथ 1,52,842 रुपये प्रति 10 ग्राम पर रहा। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, सुरक्षित निवेश की मांग में कमी के चलते कीमतों पर दबाव बना है। शहरों में अलग-अलग रेट देश के विभिन्न शहरों में सोने की कीमतों में स्थानीय टैक्स और मेकिंग चार्ज के कारण अंतर देखने को मिला। दक्षिण भारत के तिरुवनंतपुरम में सोना सबसे महंगा रहा, जहां 24 कैरेट सोना 1,53,280 रुपये और 22 कैरेट 1,40,507 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया। चेन्नई भी महंगे शहरों में शामिल रहा। इसके विपरीत, राजधानी दिल्ली में सोना सबसे सस्ता रहा, जहां 24 कैरेट सोना 1,52,470 रुपये और 22 कैरेट 1,39,764 रुपये प्रति 10 ग्राम पर उपलब्ध रहा। मुंबई, कोलकाता, हैदराबाद और बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों में भी कीमतें लगभग समान स्तर पर दर्ज की गईं। चांदी की कीमत स्थिर देशभर में चांदी का खुदरा भाव लगभग स्थिर रहा और यह 2,50,260 रुपये प्रति किलोग्राम पर कारोबार करता दिखा। बाजार में फिलहाल सीमित उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है, जिससे निवेशकों में सतर्कता बनी हुई है। आगे बाजार की दिशा पर नजर विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरावट अस्थायी हो सकती है। वैश्विक बाजार अब अमेरिका-ईरान वार्ता के अंतिम परिणाम और केंद्रीय बैंकों की ब्याज दर नीतियों पर नजर बनाए हुए हैं। इन्हीं कारकों के आधार पर आने वाले दिनों में सोना-चांदी की कीमतों की दिशा तय होगी।
ट्रिलियन डॉलर की संपत्ति के बाद अब क्वाड्रिलियन डॉलर की चर्चा दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति Elon Musk एक बार फिर अपने बड़े और भविष्यवादी विचारों को लेकर सुर्खियों में हैं। दुनिया के पहले ट्रिलियनेयर बनने के बाद अब मस्क ने कहा है कि किसी व्यक्ति का क्वाड्रिलियनेयर बनना भी असंभव नहीं है। हालांकि इसके लिए मानव सभ्यता को पृथ्वी से आगे बढ़कर चंद्रमा और मंगल ग्रह पर औद्योगिक विस्तार करना होगा। मस्क की यह टिप्पणी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है और भविष्य की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था को लेकर नई बहस छेड़ रही है। आखिर कितनी होती है क्वाड्रिलियन डॉलर की संपत्ति? मस्क की मौजूदा अनुमानित संपत्ति 1.1 ट्रिलियन डॉलर बताई जा रही है। लेकिन क्वाड्रिलियन डॉलर की संपत्ति का मतलब है 1,000 ट्रिलियन डॉलर यानी 1,000,000,000,000,000 डॉलर। तुलना करें तो वर्ष 2026 में पूरी दुनिया की कुल अर्थव्यवस्था (Global GDP) लगभग 120 ट्रिलियन डॉलर के आसपास मानी जाती है। ऐसे में एक क्वाड्रिलियनेयर की संपत्ति दुनिया के कुल आर्थिक उत्पादन से कई गुना अधिक होगी। जब सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा गया कि मस्क को इस स्तर तक पहुंचने के लिए अभी करीब 998.9 ट्रिलियन डॉलर और चाहिए, तो उन्होंने जवाब दिया, "Not impossible." चांद और मंगल पर फैक्ट्रियां होंगी तो बनेगा नया आर्थिक युग मस्क ने स्पष्ट किया कि इतनी बड़ी संपत्ति हासिल करने का रास्ता पृथ्वी पर नहीं, बल्कि अंतरिक्ष में है। उन्होंने कहा कि इसके लिए चंद्रमा और मंगल ग्रह पर फैक्ट्रियों की जरूरत होगी। मस्क लंबे समय से मंगल ग्रह पर मानव बस्ती बसाने की वकालत करते रहे हैं। उनकी कंपनी SpaceX का प्रमुख लक्ष्य भी भविष्य में बड़े पैमाने पर इंसानों और सामान को मंगल तक पहुंचाना है। मस्क का मानना है कि यदि मंगल और चंद्रमा पर औद्योगिक उत्पादन शुरू होता है, तो अंतरग्रहीय व्यापार (Interplanetary Commerce) की शुरुआत होगी, जिससे मानव इतिहास की सबसे बड़ी आर्थिक क्रांति देखने को मिल सकती है। भविष्य में डॉलर नहीं, ‘द्रव्यमान और ऊर्जा’ होगी असली मुद्रा! मस्क ने भविष्य को लेकर एक और दिलचस्प दावा किया। उनका कहना है कि जब यह सब संभव होगा, तब शायद डॉलर जैसी पारंपरिक मुद्रा का अस्तित्व ही न रहे। उनके मुताबिक, भविष्य की अर्थव्यवस्था में "Mass and Energy" यानी द्रव्यमान और ऊर्जा सबसे महत्वपूर्ण संसाधन होंगे। उन्होंने संकेत दिया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और रोबोटिक्स दुनिया को इतना बदल देंगे कि पैसों की मौजूदा अवधारणा अप्रासंगिक हो सकती है। AI और रोबोट बदल देंगे पूरी अर्थव्यवस्था मस्क पहले भी कई बार कह चुके हैं कि आने वाले दशकों में AI और रोबोट अधिकांश वस्तुओं और सेवाओं का उत्पादन करेंगे। इससे उत्पादन लागत बेहद कम हो जाएगी और कई क्षेत्रों में मानव श्रम की आवश्यकता घट सकती है। उनका मानना है कि जब मशीनें लगभग हर काम इंसानों से बेहतर और सस्ते तरीके से करने लगेंगी, तब वेतन, रोजगार और धन जैसी पारंपरिक आर्थिक अवधारणाओं में बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे। आखिर एलन मस्क की संपत्ति कहां से आती है? दक्षिण अफ्रीका में जन्मे एलन मस्क की संपत्ति का सबसे बड़ा हिस्सा उनकी अंतरिक्ष कंपनी SpaceX से जुड़ा है। इसके अलावा इलेक्ट्रिक वाहन निर्माता Tesla, न्यूरोटेक कंपनी Neuralink और The Boring Company में उनकी हिस्सेदारी भी उनकी संपत्ति का बड़ा स्रोत है। वर्ष 2022 में उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) का अधिग्रहण भी किया था, जिसने उन्हें वैश्विक स्तर पर और अधिक प्रभावशाली बना दिया। क्या सचमुच संभव है क्वाड्रिलियनेयर बनना? विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा वैश्विक आर्थिक व्यवस्था में किसी व्यक्ति का क्वाड्रिलियन डॉलर की संपत्ति तक पहुंचना बेहद कठिन है। लेकिन यदि अंतरिक्ष उद्योग, AI और स्वचालित उत्पादन भविष्य में मस्क की कल्पना के अनुसार विकसित होते हैं, तो आज असंभव लगने वाले आर्थिक आंकड़े भी वास्तविकता बन सकते हैं।
नई दिल्ली: घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोमवार को सोने और चांदी की कीमतों में जोरदार उछाल देखने को मिला। लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में दोनों कीमती धातुओं में तेजी दर्ज की गई। एमसीएक्स (MCX) पर शुरुआती कारोबार में सोना करीब ₹3,300 महंगा हुआ, जबकि चांदी में ₹7,200 तक की तेज बढ़त देखने को मिली। विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते और वैश्विक बाजारों में बढ़ी हलचल का असर कीमती धातुओं की कीमतों पर भी दिखाई दे रहा है। MCX पर सोने का ताजा भाव 5 अगस्त डिलीवरी वाला सोना पिछले कारोबारी सत्र में ₹1,50,528 प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था। सोमवार को यह: ₹1,53,829 पर खुला शुरुआती कारोबार में ₹3,301 की तेजी के साथ ऊपर पहुंचा सुबह 10:10 बजे के आसपास ₹1,53,245 प्रति 10 ग्राम पर कारोबार करता देखा गया चांदी में जबरदस्त उछाल 3 जुलाई डिलीवरी वाली चांदी का पिछला बंद भाव ₹2,46,186 प्रति किलोग्राम था। आज: यह ₹2,51,563 पर खुली शुरुआती कारोबार में ₹2,53,345 प्रति किलो तक पहुंच गई सुबह 10:10 बजे लगभग ₹2,52,486 प्रति किलो पर ट्रेड कर रही थी पिछले तीन दिनों में चांदी की कीमत में करीब ₹18,000 प्रति किलो की तेजी दर्ज की गई है। सर्राफा बाजार में सोने-चांदी के भाव गुड रिटर्न्स के अनुसार: 24 कैरेट सोना: ₹1,51,530 प्रति 10 ग्राम 22 कैरेट सोना: ₹1,38,900 प्रति 10 ग्राम 18 कैरेट सोना: ₹1,13,650 प्रति 10 ग्राम चांदी: ₹1,65,000 प्रति किलो प्रमुख शहरों में 24 कैरेट सोने का भाव शहर 24 कैरेट सोना दिल्ली ₹1,51,680 मुंबई ₹1,51,530 कोलकाता ₹1,51,530 चेन्नई ₹1,53,590 लखनऊ ₹1,51,680 पटना ₹1,51,580 जयपुर ₹1,51,680 भोपाल ₹1,51,680 अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी तेजी वैश्विक बाजार में भी कीमती धातुओं में मजबूती देखी गई। स्पॉट गोल्ड: 2% बढ़कर $4,304.11 प्रति औंस यूएस गोल्ड फ्यूचर (अगस्त): 2% बढ़कर $4,325.20 प्रति औंस स्पॉट सिल्वर: 3.1% उछलकर $70.07 प्रति औंस निवेशकों के लिए क्या संकेत? विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक घटनाक्रम, डॉलर की चाल और केंद्रीय बैंकों की नीतियां आने वाले दिनों में सोने-चांदी की कीमतों को प्रभावित कर सकती हैं। ऐसे में निवेश से पहले बाजार की दिशा और विशेषज्ञों की सलाह पर ध्यान देना जरूरी है।