aviation news

A damaged Cessna-152 training aircraft lies in a field in Kasganj after making an emergency crash landing, while rescue teams inspect the site.
उत्तर प्रदेश में प्रशिक्षण विमान की क्रैश-लैंडिंग, महिला प्रशिक्षु पायलट सुरक्षित; हाई-टेंशन तार से टकराने के बाद खेत में गिरा एयरक्राफ्ट

  कासगंज: उत्तर प्रदेश के कासगंज जिले में मंगलवार को एक प्रशिक्षण विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। राहत की बात यह रही कि विमान उड़ा रही महिला प्रशिक्षु पायलट सुरक्षित बच गई। हादसे में विमान को गंभीर नुकसान पहुंचा है, जबकि घटना की जांच शुरू कर दी गई है। नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) के अनुसार, चेतक एविएशन का सेसना-152 (VT-AFB) प्रशिक्षण विमान अलीगढ़ से सोलो प्रशिक्षण उड़ान पर था। उड़ान के दौरान विमान की आपात स्थिति उत्पन्न होने पर उसकी कासगंज के एक खेत में क्रैश-लैंडिंग हो गई। हाई-टेंशन बिजली लाइन से टकराया विमान पुलिस के मुताबिक, अलीगढ़ हवाई अड्डे से उड़ान भरने के बाद विमान कासगंज पुलिस लाइंस क्षेत्र के ऊपर उड़ान भर रहा था। इसी दौरान उसकी ऊंचाई अचानक कम होने लगी। क्रैश-लैंडिंग से पहले विमान एक हाई-टेंशन बिजली लाइन से टकरा गया, जिससे बिजली के तार टूट गए और विमान को भी भारी नुकसान पहुंचा। इसके बाद एयरक्राफ्ट पास के खेत में गिर गया। महाराष्ट्र की रहने वाली हैं प्रशिक्षु पायलट घायल प्रशिक्षु पायलट की पहचान कायनात के रूप में हुई है, जो महाराष्ट्र की रहने वाली हैं। हादसे के तुरंत बाद उन्हें एंबुलेंस के जरिए जिला अस्पताल पहुंचाया गया। डॉक्टरों के अनुसार, उन्हें मामूली चोटें आई हैं और उनकी हालत फिलहाल स्थिर है। मौके पर पहुंची पुलिस और बचाव टीमें घटना की सूचना मिलते ही पुलिस, प्रशासन और बचाव दल मौके पर पहुंच गए। दुर्घटनास्थल की घेराबंदी कर सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की गई। बिजली विभाग की टीम ने टूटी हुई हाई-टेंशन लाइन की मरम्मत का काम शुरू किया, जबकि अलीगढ़ से भी तकनीकी टीम को जांच के लिए कासगंज भेजा गया है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, विमान अचानक तेजी से नीचे आया और कुछ ही क्षणों बाद खेत में गिर गया। तकनीकी खराबी की आशंका, DGCA करेगी जांच प्रारंभिक तौर पर हादसे की वजह तकनीकी खराबी मानी जा रही है, अधिकारियों का कहना है कि दुर्घटना के वास्तविक कारणों का पता विस्तृत तकनीकी जांच के बाद ही चल सकेगा। DGCA ने घटना की जांच शुरू कर दी है और विमान के तकनीकी रिकॉर्ड, उड़ान से जुड़े डेटा तथा अन्य पहलुओं की जांच की जाएगी।  

Deepshikha जून 30, 2026 0
Passenger aircraft at an airport as airlines maintain high ticket prices despite easing oil market concerns.
होर्मुज खुलने के बावजूद अभी सस्ते नहीं होंगे फ्लाइट टिकट, जानिए क्यों नहीं मिलेगा तुरंत राहत का फायदा

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने और समझौता होने के बाद वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी देखने को मिल रही है। होर्मुज जलडमरूमध्य के सामान्य होने से तेल आपूर्ति में सुधार की उम्मीद भी बढ़ी है, लेकिन इसके बावजूद हवाई यात्रियों को अभी सस्ती फ्लाइट टिकट का इंतजार करना पड़ेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि अगले तीन से चार महीनों तक विमान किराए में बड़ी राहत मिलने की संभावना बेहद कम है। इस तिमाही में किराया घटने की उम्मीद कम एविएशन सेक्टर के जानकारों के मुताबिक अधिकांश एयरलाइंस आने वाले कुछ महीनों के लिए अपनी ऑपरेशनल लागत पहले ही तय कर चुकी हैं। ऐसे में ईंधन की कीमतों में गिरावट का सीधा असर तुरंत टिकटों पर नहीं दिखाई देगा। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि एयर टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों में 10 प्रतिशत कमी भी आती है, तो इसका मतलब यह नहीं कि विमान किराया भी उतना ही घट जाएगा। अभी भी ऊंचे स्तर पर हैं ATF के दाम इजरायल-ईरान संघर्ष शुरू होने से पहले की तुलना में एयर टर्बाइन फ्यूल की कीमतें अभी भी काफी ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। बढ़ती लागत के कारण दुनिया भर की कई एयरलाइंस को उड़ानों में कटौती करने और किराए बढ़ाने पड़े थे। अब जबकि हालात सामान्य होने की दिशा में बढ़ रहे हैं, तब भी ईंधन की कीमतों को पुराने स्तर तक पहुंचने में समय लगेगा। एयरलाइंस का सबसे बड़ा खर्च है ईंधन एविएशन उद्योग में जेट फ्यूल सबसे बड़ा खर्च माना जाता है। नए विमानों वाली एयरलाइंस के कुल संचालन खर्च का 25 से 35 प्रतिशत हिस्सा ATF पर खर्च होता है। पुराने विमानों का संचालन करने वाली कंपनियों के लिए यह खर्च 40 से 50 प्रतिशत तक पहुंच जाता है। यही वजह है कि ईंधन की कीमतों में बदलाव का असर एयरलाइन कंपनियों की लागत पर सीधे पड़ता है। अभी टिकट सस्ते करने का दबाव नहीं युद्ध के दौरान बढ़ी हुई लागत का कुछ हिस्सा एयरलाइंस ने खुद वहन किया, जबकि बाकी भार यात्रियों पर बढ़े हुए किराए के रूप में डाला गया। अब कई एयरलाइंस को टिकट कीमतें घटाने की तत्काल जरूरत महसूस नहीं हो रही है, क्योंकि मौजूदा समय में यात्री ऊंचे किराए पर भी यात्रा करने को तैयार हैं। तेल उत्पादन और सप्लाई चेन को सामान्य होने में लगेगा समय विशेषज्ञों के अनुसार, युद्ध के दौरान खाड़ी क्षेत्र में कई तेल कुओं और संबंधित सुविधाओं को बंद कर दिया गया था। इन्हें दोबारा पूरी क्षमता से शुरू करने, रिफाइनरियों को सक्रिय करने और सप्लाई नेटवर्क को सामान्य बनाने में समय लगेगा। इसके अलावा, सुरक्षा कारणों से दूर चले गए तेल टैंकरों और शिपिंग नेटवर्क को भी पहले जैसी स्थिति में लौटने में कई सप्ताह या महीनों का समय लग सकता है। कब मिल सकती है राहत? अगर वैश्विक हालात स्थिर बने रहते हैं और कच्चे तेल की कीमतों में लगातार गिरावट जारी रहती है, तो वर्ष की अगली तिमाही में हवाई किराए में कुछ राहत देखने को मिल सकती है। हालांकि फिलहाल यात्रियों को महंगे टिकट के साथ ही यात्रा करनी पड़ सकती है।  

surbhi जून 19, 2026 0
Former Air Canada pilot investigated over alleged license fraud after operating hundreds of flights.
17 साल तक बिना जरूरी लाइसेंस उड़ाता रहा यात्री विमान, एयर कनाडा का पूर्व कैप्टन गिरफ्तार

  ओटावा: कनाडा की प्रमुख एयरलाइन एयर कनाडा के एक पूर्व पायलट को कथित लाइसेंस धोखाधड़ी के मामले में गिरफ्तार किया गया है। आरोप है कि उसने कैप्टन के लिए आवश्यक वैध लाइसेंस के बिना लगभग 17 वर्षों तक 900 से अधिक घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का संचालन किया। आरोपी पायलट जेफ्री वॉल पर आरोप है कि वर्ष 2009 से 2025 के बीच उन्होंने बोइंग 767, 777 और 787 जैसे बड़े यात्री विमानों का संचालन किया, जबकि उनके पास एयरलाइन ट्रांसपोर्ट पायलट लाइसेंस (ATPL-A) नहीं था, जो कैप्टन के पद के लिए अनिवार्य माना जाता है। 900 से अधिक उड़ानें, लाखों डॉलर की कमाई जांच एजेंसियों के अनुसार, जेफ्री वॉल ने अपने कार्यकाल के दौरान सैकड़ों उड़ानों का संचालन किया और वेतन एवं अन्य लाभों के रूप में 20 लाख अमेरिकी डॉलर से अधिक की राशि अर्जित की। अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने अपनी योग्यता और लाइसेंस संबंधी जानकारी को गलत तरीके से प्रस्तुत कर लंबे समय तक एयरलाइन और नियामक संस्थाओं को गुमराह किया। कमर्शियल लाइसेंस था, लेकिन कैप्टन बनने की अनुमति नहीं जांच में सामने आया है कि जेफ्री वॉल पूरी तरह से बिना योग्यता वाले पायलट नहीं थे। उनके पास कमर्शियल पायलट लाइसेंस मौजूद था, जिसके आधार पर वे व्यावसायिक विमान उड़ा सकते थे। 2009 में कैप्टन पद पर पदोन्नति मिलने के बाद भी उन्होंने आवश्यक उच्च स्तरीय ATPL-A लाइसेंस हासिल नहीं किया। पील रीजनल पुलिस के डिप्टी चीफ मिलिनोविच ने कहा कि यह मामला ऐसा है जैसे किसी सामान्य चिकित्सक को मस्तिष्क सर्जरी करने की अनुमति मिल जाए। उन्होंने कहा कि पेशेवर पदों के लिए निर्धारित मानकों का पालन करना सुरक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। रूटीन जांच में सामने आया बड़ा फर्जीवाड़ा इस मामले का खुलासा 2025 में दस्तावेजों की नियमित समीक्षा के दौरान हुआ। लाइसेंस संबंधी रिकॉर्ड में विसंगतियां मिलने के बाद एयर कनाडा ने मामले की जानकारी विमानन नियामक संस्थाओं को दी। इसके बाद ‘प्रोजेक्ट इकारस’ नाम से आपराधिक और नियामकीय जांच शुरू की गई। जांच शुरू होने से पहले ही जेफ्री वॉल ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली थी। एयर कनाडा बोली- सुरक्षा से कोई समझौता नहीं हुआ एयर कनाडा ने स्पष्ट किया है कि इस पूरे मामले के बावजूद यात्रियों की सुरक्षा प्रभावित नहीं हुई। एयरलाइन के अनुसार, सभी पायलटों को हर छह महीने में अनिवार्य प्रशिक्षण और नियमित दक्षता परीक्षण से गुजरना पड़ता है। कंपनी ने कहा कि उचित लाइसेंसिंग विमानन सुरक्षा प्रणाली का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और इस मामले को पूरी गंभीरता के साथ लिया जा रहा है। कई आपराधिक मामलों का सामना करेंगे जेफ्री वॉल मामले में ट्रांसपोर्ट कनाडा ने जेफ्री वॉल पर भारी जुर्माना लगाया है। इसके अलावा उन पर धोखाधड़ी, जाली दस्तावेजों के इस्तेमाल और फर्जी मुहर रखने सहित सात आपराधिक आरोप लगाए गए हैं। अदालत ने उन्हें 29 जून 2026 को पेश होने का निर्देश दिया है। यदि आरोप साबित होते हैं तो उन्हें कड़ी कानूनी कार्रवाई और सजा का सामना करना पड़ सकता है। विमानन उद्योग में उठे निगरानी व्यवस्था पर सवाल इस मामले ने कनाडा के विमानन क्षेत्र में लाइसेंस सत्यापन और निगरानी व्यवस्था को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इतने लंबे समय तक एक पायलट द्वारा आवश्यक लाइसेंस के बिना कैप्टन के रूप में उड़ान भरना नियामकीय प्रक्रियाओं की गंभीर खामी को दर्शाता है।  

Deepshikha जून 11, 2026 0
Delhi Airport
दिल्ली में अचानक आई आंधी से  एयरपोर्ट पर खड़े तीन विमान क्षतिग्रस्त

नई दिल्ली, एजेंसियां। नई दिल्ली स्थित इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय (आईजीआई) हवाई अड्डे पर रविवार शाम अचानक आए तेज आंधी-तूफान और बारिश के कारण एअर इंडिया के तीन विमान क्षतिग्रस्त हो गए। घटना उस समय हुई जब विमान पार्किंग क्षेत्र में खड़े थे और तेज हवाओं के कारण ग्राउंड सपोर्ट उपकरण अपनी जगह से खिसककर विमानों से टकरा गए। हालांकि इस घटना में किसी यात्री या कर्मचारी के घायल होने की सूचना नहीं है।   पार्किंग एरिया में हुआ हादसा जानकारी के अनुसार, यह घटना रविवार शाम करीब 4:40 बजे टर्मिनल-2 के पार्किंग क्षेत्र में हुई। अचानक मौसम खराब होने के बाद तेज हवाओं ने एयरपोर्ट पर मौजूद स्टेप लैडर और ट्रेस्टल जैसे उपकरणों को असंतुलित कर दिया। इनमें से कुछ उपकरण पास में खड़े एअर इंडिया के तीन नैरो-बॉडी विमानों से टकरा गए, जिससे विमानों को नुकसान पहुंचा।   बताया गया है कि एक ट्रेस्टल को सुरक्षा मानकों के तहत बांधा गया था, लेकिन तेज हवा के दबाव के कारण वह भी अपनी जगह से हट गया। घटना के बाद एयरपोर्ट प्रशासन और तकनीकी टीम तुरंत सक्रिय हो गई।   उड़ान सेवा से हटाए गए विमान सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए तीनों विमानों को फिलहाल उड़ान संचालन से अलग कर दिया गया है। तकनीकी विशेषज्ञ विमानों की विस्तृत जांच कर रहे हैं। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, एक विमान को अपेक्षाकृत अधिक नुकसान पहुंचा है, जबकि अन्य दो विमानों को मामूली क्षति हुई है। जांच पूरी होने के बाद उन्हें दोबारा सेवा में शामिल किया जा सकता है।   डीजीसीए ने दिए जांच के आदेश घटना को गंभीरता से लेते हुए नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने जांच शुरू कर दी है। एजेंसी यह पता लगाएगी कि सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन सही तरीके से हुआ था या नहीं। साथ ही यह भी जांच की जाएगी कि ग्राउंड उपकरणों की सुरक्षा व्यवस्था पर्याप्त थी या नहीं।   इस घटना ने खराब मौसम के दौरान हवाई अड्डों पर अपनाई जाने वाली सुरक्षा व्यवस्थाओं और ग्राउंड हैंडलिंग प्रक्रियाओं को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए अतिरिक्त सावधानियां जरूरी होंगी।

Unknown जून 8, 2026 0
Commercial aircraft at an airport as jet fuel prices fall, offering relief to Indian airlines
भारतीय एयरलाइंस को बड़ी राहत, अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए जेट फ्यूल 27% सस्ता; घरेलू किरायों पर भी पड़ सकता है असर

एयरलाइंस के लिए राहत भरी खबर पश्चिम एशिया संकट और बढ़ती ईंधन लागत से जूझ रही भारतीय एयरलाइंस को बड़ी राहत मिली है। सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों ने अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए इस्तेमाल होने वाले एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) यानी जेट फ्यूल की कीमत में लगभग 27 प्रतिशत की कटौती कर दी है। वहीं घरेलू उड़ानों के लिए ATF की कीमतों में लगातार दूसरे महीने कोई बदलाव नहीं किया गया है। इस फैसले से भारतीय एयरलाइंस को परिचालन लागत कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है। अंतरराष्ट्रीय और घरेलू ATF कीमतों में आई समानता ताजा कटौती के बाद अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए जेट फ्यूल की कीमत घटकर लगभग 1,100 डॉलर प्रति किलोलीटर रह गई है। भारतीय मुद्रा में यह करीब 1.05 लाख रुपये प्रति किलोलीटर के बराबर है। अब अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए ईंधन की कीमत लगभग घरेलू उड़ानों के समान स्तर पर पहुंच गई है। इससे पहले अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए एयरलाइंस को काफी अधिक कीमत चुकानी पड़ रही थी। अप्रैल में हुआ था भारी इजाफा अप्रैल 2026 में सरकार ने घरेलू उड़ानों के लिए ATF कीमतों में सीमित वृद्धि की अनुमति दी थी, जबकि अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए वैश्विक बाजार के अनुरूप पूरी कीमत बढ़ोतरी लागू की गई थी। उस समय अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए ATF कीमतों में करीब 73,000 रुपये प्रति किलोलीटर तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई थी। इससे एयरलाइंस की लागत में भारी उछाल आया था और कई कंपनियों ने यात्रियों पर अतिरिक्त फ्यूल सरचार्ज भी लगाया था। सरकार ने घरेलू यात्रियों को राहत दी सरकारी अधिकारियों के अनुसार, घरेलू उड़ानों के लिए ATF कीमतों को नियंत्रित रखने का उद्देश्य यात्रियों को अचानक किराया वृद्धि से बचाना था। जानकारी के मुताबिक, तेल कंपनियां घरेलू उड़ानों के लिए ईंधन बेचते समय प्रति लीटर करीब 30 रुपये का नुकसान उठा रही हैं। यदि पूरी लागत एयरलाइंस पर डाली जाती, तो घरेलू ATF की कीमत लगभग 1.35 लाख रुपये प्रति किलोलीटर तक पहुंच सकती थी। एयरलाइंस लंबे समय से कर रही थीं मांग भारतीय एयरलाइंस लंबे समय से सरकार से घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए ईंधन मूल्य निर्धारण में समानता लाने की मांग कर रही थीं। एयरलाइंस का तर्क था कि अंतरराष्ट्रीय मार्गों पर बढ़ी हुई ईंधन लागत उनकी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को प्रभावित कर रही है। इसके अलावा उन्होंने ATF मूल्य निर्धारण में "क्रैक स्प्रेड बैंड" जैसी व्यवस्था दोबारा लागू करने की भी मांग की थी, जिससे ईंधन कीमतों में अत्यधिक उतार-चढ़ाव को सीमित किया जा सके। Air India पर पड़ा सबसे ज्यादा असर पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और पाकिस्तान के हवाई क्षेत्र के बंद रहने से भारतीय एयरलाइंस पहले से दबाव में हैं। इसका सबसे ज्यादा असर Air India पर पड़ा है। यूरोप और उत्तरी अमेरिका के लिए बड़ी संख्या में उड़ानें संचालित करने वाली एयर इंडिया को लंबा और वैकल्पिक मार्ग अपनाना पड़ रहा है। इससे ईंधन खपत और परिचालन लागत दोनों बढ़ गए हैं। कंपनी पहले ही जून से अगस्त के बीच अपने अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क में सैकड़ों साप्ताहिक उड़ानों की कटौती का ऐलान कर चुकी है। इसके अलावा घरेलू उड़ानों की संख्या में भी कमी की गई है। क्या सस्ते हो सकते हैं हवाई टिकट? विशेषज्ञों का मानना है कि ATF कीमतों में कमी से एयरलाइंस की लागत पर कुछ राहत जरूर मिलेगी, लेकिन इसका सीधा लाभ यात्रियों को कब मिलेगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है। वर्तमान में एयरलाइंस पश्चिम एशिया संकट, लंबी उड़ान दूरी और परिचालन चुनौतियों का सामना कर रही हैं। ऐसे में ईंधन लागत में आई राहत का बड़ा हिस्सा इन अतिरिक्त खर्चों को संतुलित करने में इस्तेमाल हो सकता है। हालांकि यदि वैश्विक तेल कीमतें स्थिर रहती हैं और भू-राजनीतिक तनाव कम होता है, तो आने वाले महीनों में टिकट कीमतों पर सकारात्मक असर देखने को मिल सकता है। उद्योग को मिली अस्थायी राहत एविएशन विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए ATF कीमतों में 27 प्रतिशत की कटौती भारतीय एयरलाइंस के लिए महत्वपूर्ण राहत लेकर आई है। इससे विदेशी मार्गों पर बढ़ते वित्तीय दबाव को कम करने में मदद मिलेगी और कंपनियों को परिचालन बनाए रखने में कुछ राहत मिल सकती है।  

surbhi जून 2, 2026 0
flight cancellations
जून से रोज रद्द होंगी 250 घरेलू फ्लाइट्स, दिल्ली-मुंबई समेत कई रूट होंगे प्रभावित

नई दिल्ली, एजेंसियां। देश में हवाई यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए बड़ी खबर सामने आई है। देश की प्रमुख एयरलाइंस इंडिगो और एयर इंडिया जून से अगस्त तक रोजाना करीब 250 घरेलू उड़ानें रद्द करने जा रही हैं। इस फैसले का सबसे ज्यादा असर दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों के रूट पर पड़ने की संभावना है।   एयरलाइंस कंपनियों के इस कदम के पीछे एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) यानी जेट फ्यूल की बढ़ती कीमतें और यात्रियों की मांग में कमी को मुख्य वजह माना जा रहा है। गर्मियों की छुट्टियों के बाद आमतौर पर यात्रा की मांग घट जाती है, ऐसे में एयरलाइंस अपने परिचालन खर्च को कम करने के लिए उड़ानों में कटौती कर रही हैं।   जेट फ्यूल की कीमतों में भारी उछाल मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और अमेरिका-ईरान के बीच जारी संघर्ष के कारण कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित हुई है। इसका सीधा असर जेट फ्यूल की कीमतों पर पड़ा है। कई शहरों में ATF की कीमतें 80 हजार रुपये से बढ़कर एक लाख रुपये प्रति किलोलीटर के पार पहुंच गई हैं। घरेलू उड़ानों के लिए ईंधन लागत करीब 25 प्रतिशत तक बढ़ गई है।   एयर इंडिया और इंडिगो पर सबसे ज्यादा असर एयर इंडिया जून और जुलाई के दौरान अपनी घरेलू उड़ानों में लगभग 22 प्रतिशत कटौती करेगी। कंपनी रोजाना करीब 500 घरेलू उड़ानें संचालित करती है, ऐसे में हर दिन लगभग 110 उड़ानें कम हो सकती हैं।   वहीं इंडिगो भी घरेलू उड़ानों में 5 से 7 प्रतिशत और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में करीब 17 प्रतिशत तक कटौती की तैयारी में है। दोनों एयरलाइंस की कटौती मिलाकर रोजाना लगभग 250 उड़ानें प्रभावित हो सकती हैं।   यात्रियों को मिलेगा विकल्प एयरलाइंस कंपनियों ने कहा है कि जिन यात्रियों की उड़ानें रद्द होंगी, उन्हें फ्री डेट चेंज, वैकल्पिक फ्लाइट या पूरा रिफंड देने का विकल्प उपलब्ध कराया जाएगा। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में टिकट कीमतों में भी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

Unknown मई 29, 2026 0
Air india cuts flights
एअर इंडिया की बड़ी कटौती, हर हफ्ते 800 घरेलू फ्लाइट्स कम होंगी

नई दिल्ली, एजेंसियां। Air India और IndiGo ने बढ़ती ऑपरेशन लागत और महंगे जेट फ्यूल के कारण घरेलू उड़ानों में कटौती का फैसला लिया है। एअर इंडिया जून से अगस्त 2026 के बीच हर हफ्ते करीब 800 घरेलू उड़ानें कम करेगी। वहीं रिपोर्ट्स के मुताबिक इंडिगो भी अपनी 5% से 7% घरेलू उड़ानों में कटौती कर सकती है।   एअर इंडिया ने 22% उड़ानें घटाने का फैसला लिया एअर इंडिया फिलहाल हर सप्ताह लगभग 4400 उड़ानें संचालित करती है, जिनमें 3600 घरेलू और 800 अंतरराष्ट्रीय उड़ानें शामिल हैं। कंपनी ने घरेलू फ्लाइट्स में करीब 22% तक कटौती की घोषणा की है। एयरलाइन का कहना है कि वह बाजार की मांग और ऑपरेटिंग परिस्थितियों की लगातार समीक्षा करेगी और हालात सामान्य होने पर उड़ानों को दोबारा बहाल किया जा सकता है।   मिडिल ईस्ट तनाव और फ्यूल कीमतें बड़ी वजह उड़ानों में कटौती की सबसे बड़ी वजह मध्य पूर्व में बढ़ा तनाव और जेट फ्यूल की कीमतों में तेजी है। ईरान पर हुए हमलों के बाद क्षेत्र में संघर्ष बढ़ने से एयरलाइंस की लागत में भारी इजाफा हुआ है। इसके अलावा ईरानी एयरस्पेस से बचने और पाकिस्तानी हवाई क्षेत्र पर पाबंदियों के कारण उड़ानों के रूट लंबे हो गए हैं, जिससे ईंधन खर्च और बढ़ गया है।   ऑपरेशन कॉस्ट में भारी बढ़ोतरी एविएशन विशेषज्ञों के अनुसार पहले एयरलाइंस के कुल खर्च में फ्यूल का हिस्सा करीब 40% था, जो अब बढ़कर 60% तक पहुंच गया है। इसका सीधा असर टिकट किराए पर भी पड़ा है। बढ़ते किराए की वजह से घरेलू हवाई यात्रा की मांग में भी गिरावट देखी जा रही है।   पहले भी घट चुकी हैं उड़ानें एविएशन एनालिटिक्स फर्म सिरियम के आंकड़ों के अनुसार मार्च और अप्रैल 2026 में देश की प्रमुख एयरलाइंस की उड़ानों में पिछले साल की तुलना में 6% गिरावट दर्ज की गई। इसी महीने एअर इंडिया ने कई अंतरराष्ट्रीय रूट्स पर उड़ानें रद्द और कम करने का फैसला भी लिया था।

Unknown मई 27, 2026 0
Wreckage of Air India AI171 crash and Captain Sumeet Sabharwal amid ongoing investigation debate
AI-171 विमान हादसा: “आखिरी सांस तक कंट्रोल पर थे कैप्टन”, मोर्चरी से सामने आए दावे ने बढ़ाई बहस

Air India Flight AI171 Crash को लेकर एक नया और भावुक दावा सामने आया है। हादसे में अपने परिवार के तीन सदस्यों को खोने वाले गुजरात के खेड़ा निवासी Roman Vohra ने दावा किया है कि उन्होंने मोर्चरी में पायलट Captain Sumeet Sabharwal का शव “बैठी हुई अवस्था” में देखा था और उनके हाथ अब भी विमान के कंट्रोल पर थे। हादसे में गई थी 260 लोगों की जान Air India की फ्लाइट AI-171 12 जून को Sardar Vallabhbhai Patel International Airport से उड़ान भरने के कुछ ही देर बाद मेघानीनगर इलाके में दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। विमान लंदन जा रहा था। इस भीषण हादसे में विमान में सवार 241 लोगों और जमीन पर मौजूद 19 लोगों की मौत हो गई थी। केवल एक यात्री जीवित बचा था। विमान का संचालन कैप्टन सुमीत सभरवाल और सह-पायलट Clive Kunder कर रहे थे। “मोर्चरी में देखा पायलट का शव” रोमन वोहरा ने बताया कि वह 13 जून को अपने भाई, भतीजी और बुआ के शव की पहचान के लिए अहमदाबाद सिविल अस्पताल की मोर्चरी पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि मेडिकल क्षेत्र से जुड़े होने के कारण उन्हें अंदर जाने की अनुमति मिली थी। उनके अनुसार, कैप्टन सुमीत सभरवाल का शव बाकी शवों से अलग रखा गया था और शरीर कठोर अवस्था में बैठने की मुद्रा में था, मानो वह अभी भी विमान की सीट पर बैठे हों। “पायलट के हाथ कंट्रोल योक पर थे” रोमन वोहरा ने दावा किया कि पायलट के हाथ विमान के कंट्रोल योक पर थे और पैर भी बैठे हुए व्यक्ति की मुद्रा में मुड़े हुए थे। उन्होंने कहा कि यूनिफॉर्म और शरीर की बनावट से उन्होंने पायलट की पहचान की। उनके मुताबिक, शव का आगे का हिस्सा और चेहरा ज्यादा नहीं जला था, जबकि पीठ की ओर अधिक जलने के निशान थे। डीएनए मैच के बाद मिला शव रोमन वोहरा ने बताया कि हादसे के बाद कई दिनों तक परिवार के लोग अस्पताल के बाहर इंतजार करते रहे। बाद में डीएनए मिलान के बाद उनके परिजनों के शव सौंपे गए। उन्होंने कहा कि मेडिकल फील्ड से जुड़े होने के कारण वह शरीर की संरचना और अन्य संकेतों के आधार पर पहचान कर सके कि वह शव कैप्टन सभरवाल का ही था। अमेरिकी लॉ फर्म ने उठाए सवाल अमेरिका की लॉ फर्म Chiunuma Law, जो हादसे में मारे गए 115 लोगों के परिवारों का प्रतिनिधित्व करने का दावा कर रही है, ने मामले की स्वतंत्र जांच की मांग की है। फर्म के केस मैनेजर Ayush Rajpal ने कहा कि यदि पायलट आखिरी समय तक विमान को नियंत्रित करने की कोशिश कर रहे थे, तो केवल अटकलों के आधार पर उन्हें दोषी नहीं ठहराया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि हादसे के हर तकनीकी, इलेक्ट्रिकल, मैकेनिकल और मानवीय पहलू की स्वतंत्र विशेषज्ञों द्वारा जांच होनी चाहिए। प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में क्या सामने आया था? Aircraft Accident Investigation Bureau (AAIB) ने जुलाई में जारी अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट में कहा था कि उड़ान भरने के कुछ सेकंड बाद विमान के इंजन के फ्यूल कंट्रोल स्विच बंद हो गए थे। रिपोर्ट के अनुसार, कॉकपिट वॉइस रिकॉर्डिंग में एक पायलट दूसरे से पूछता सुनाई देता है कि उसने फ्यूल सप्लाई क्यों बंद की, जबकि दूसरा जवाब देता है कि उसने ऐसा नहीं किया। AAIB के मुताबिक, फ्यूल सप्लाई बंद होने के बाद इंजन की शक्ति तेजी से कम होने लगी थी। सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी पिछले साल नवंबर में Supreme Court of India ने भी इस मामले पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि हादसे के लिए किसी ने भी मुख्य पायलट को जिम्मेदार नहीं ठहराया है। अदालत ने कैप्टन सुमीत सभरवाल के 91 वर्षीय पिता से कहा था कि वह किसी तरह का भावनात्मक बोझ अपने ऊपर न लें।  

surbhi मई 20, 2026 0
Security personnel inspecting Lufthansa flight at Hyderabad airport after bomb threat alert
Bomb Threat: फ्रैंकफर्ट से हैदराबाद आ रही फ्लाइट में बम की धमकी, एयरपोर्ट पर मचा हड़कंप

Rajiv Gandhi International Airport पर शुक्रवार को उस वक्त हड़कंप मच गया, जब जर्मनी के फ्रैंकफर्ट से आ रही एक अंतरराष्ट्रीय फ्लाइट को बम से उड़ाने की धमकी मिली। धमकी मिलने के बाद एयरपोर्ट की सुरक्षा एजेंसियां तुरंत अलर्ट मोड में आ गईं और विमान की इमरजेंसी जांच शुरू कर दी गई। उड़ान के दौरान मिला धमकी भरा ईमेल जानकारी के मुताबिक, Lufthansa की फ्लाइट LH-754 फ्रैंकफर्ट से हैदराबाद आ रही थी। इसी दौरान एयरलाइन के कस्टमर सपोर्ट को एक ईमेल मिला, जिसमें दावा किया गया कि विमान में बम रखा गया है और शमशाबाद पहुंचने से पहले उसे उड़ा दिया जाएगा। धमकी मिलते ही एयर ट्रैफिक कंट्रोल, CISF और एयरपोर्ट सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रखा गया। सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत विमान की निगरानी बढ़ा दी गई। सुरक्षित लैंडिंग के बाद आइसोलेशन बे में ले जाया गया विमान राहत की बात यह रही कि फ्लाइट सुरक्षित तरीके से हैदराबाद एयरपोर्ट पर उतर गई। लैंडिंग के तुरंत बाद विमान को आइसोलेशन बे में ले जाया गया, जहां सुरक्षा एजेंसियों और बम निरोधक दस्ते ने गहन जांच शुरू की। यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला गया और उनकी भी सुरक्षा जांच की गई। शुरुआती जांच में किसी भी तरह की संदिग्ध वस्तु नहीं मिली है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियां अभी भी पूरे मामले की जांच कर रही हैं। ईमेल भेजने वाले की तलाश जारी अधिकारियों ने बताया कि धमकी भरा ईमेल किसने भेजा और उसका स्रोत क्या है, इसकी जांच साइबर और सुरक्षा एजेंसियों की मदद से की जा रही है। फिलहाल एयरपोर्ट पर सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है। एयरपोर्ट पर विदेशी करेंसी भी बरामद इसी बीच एयरपोर्ट से एक और बड़ा मामला सामने आया। सुरक्षा जांच के दौरान एक यात्री के पास से करीब 11.85 लाख रुपये मूल्य की विदेशी मुद्रा बरामद की गई। अधिकारियों के मुताबिक, यात्री की पहचान सैयद इस्माइल अली के रूप में हुई है, जो बैंकॉक जाने की तैयारी में था। बैगेज स्क्रीनिंग के दौरान CISF जवानों को उसके बैग में संदिग्ध विदेशी करेंसी दिखाई दी, जिसके बाद उसे हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी गई। फिलहाल अधिकारियों ने पूरी विदेशी मुद्रा जब्त कर ली है और जांच की जा रही है कि इतनी बड़ी रकम कहां से लाई गई और उसे बैंकॉक क्यों ले जाया जा रहा था।  

surbhi मई 15, 2026 0
Air India aircraft at airport amid viral claims about international flight cancellations in July 2026.
क्या एयर इंडिया ने जुलाई 2026 तक सभी इंटरनेशनल उड़ानें बंद कर दी हैं? जानिए वायरल दावे की सच्चाई

सोशल मीडिया पर इन दिनों एक दावा तेजी से वायरल हो रहा है कि Air India ने जुलाई 2026 तक अपनी सभी अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद्द कर दी हैं। इस खबर के सामने आने के बाद यात्रियों के बीच भ्रम और चिंता का माहौल बन गया। हालांकि, यह दावा पूरी तरह गलत और भ्रामक है। पूरी तरह बंद नहीं हुईं इंटरनेशनल फ्लाइट्स असल में एयर इंडिया ने अपनी सभी विदेशी उड़ानें बंद नहीं की हैं। एयरलाइन अभी भी यूरोप, नॉर्थ अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और एशिया के कई बड़े शहरों के लिए नियमित उड़ानें संचालित कर रही है। हाँ, बढ़ती परिचालन लागत और वैश्विक तनाव के चलते कुछ चुनिंदा अंतरराष्ट्रीय रूट्स पर उड़ानों की संख्या में अस्थायी कटौती की गई है। कुछ फ्लाइट्स के शेड्यूल में भी बदलाव किए गए हैं, लेकिन पूरे इंटरनेशनल नेटवर्क को बंद नहीं किया गया। आखिर कन्फ्यूजन कैसे फैला? यह भ्रम तब फैला जब कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया कि जून और जुलाई 2026 के दौरान एयर इंडिया अपने अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क के कुछ हिस्सों में अस्थायी कमी कर सकती है। बताया जा रहा है कि इसके पीछे कई वजहें हैं, जिनमें शामिल हैं: एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की बढ़ती कीमतें वेस्ट एशिया में जारी तनाव एयरस्पेस प्रतिबंध लंबी दूरी की उड़ानों का बढ़ता परिचालन खर्च इन परिस्थितियों का असर खासतौर पर लॉन्ग-हॉल फ्लाइट्स पर पड़ा है। हालांकि, यह बदलाव केवल कुछ सीमित रूट्स तक ही है। रोजाना 1000 से ज्यादा उड़ानें संचालित कर रही एयर इंडिया एयर इंडिया अभी भी हर दिन 1000 से ज्यादा घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानें ऑपरेट कर रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक करीब 100 उड़ानों पर अस्थायी कटौती, कैंसिलेशन या शेड्यूल में बदलाव देखने को मिल सकता है। यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे यात्रा से पहले अपनी फ्लाइट का स्टेटस जरूर चेक करें, ताकि किसी तरह की परेशानी से बचा जा सके। पीएम मोदी की अपील के बाद चर्चा तेज इस बीच प्रधानमंत्री Narendra Modi की हालिया अपील के बाद भी इस मुद्दे पर चर्चा बढ़ गई है। पीएम मोदी ने लोगों से देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाए रखने के लिए कुछ समय तक विदेश यात्राओं और अनावश्यक खर्च से बचने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि लोग जहां संभव हो वर्क फ्रॉम होम अपनाएं, खाने के तेल की खपत कम करें और एक साल तक सोना खरीदने से बचें, ताकि आर्थिक दबाव कम किया जा सके।  

surbhi मई 13, 2026 0
Turkish Airlines aircraft at Kathmandu airport after landing gear fire during emergency landing evacuation
काठमांडू एयरपोर्ट पर बड़ा हादसा टला, लैंडिंग के दौरान Turkish Airlines विमान में लगी आग

नेपाल की राजधानी काठमांडू स्थित Tribhuvan International Airport पर सोमवार सुबह उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब Turkish Airlines के एक विमान के लैंडिंग के दौरान टायर में आग लग गई। हादसे के समय विमान में 277 यात्री और 11 क्रू मेंबर सवार थे। राहत की बात यह रही कि सभी यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। लैंडिंग के दौरान लगी आग अधिकारियों के अनुसार, Turkish Airlines की फ्लाइट TK726 इस्तांबुल से काठमांडू पहुंची थी। सुबह करीब 6:45 बजे विमान जैसे ही रनवे पर उतरा, उसके दाएं लैंडिंग गियर से धुआं और आग की लपटें दिखाई देने लगीं। स्थिति गंभीर होते देख एयरपोर्ट प्रशासन ने तुरंत इमरजेंसी अलर्ट जारी किया और फायर ब्रिगेड तथा रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंच गई। इमरजेंसी दरवाजों से निकाले गए यात्री नेपाल सिविल एविएशन अथॉरिटी के सूचना अधिकारी Gyanendra Bhul ने बताया कि आग लगने के तुरंत बाद विमान के इमरजेंसी एग्जिट खोले गए और यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। निकासी के दौरान कुछ यात्रियों को मामूली चोटें आईं, लेकिन किसी के गंभीर रूप से घायल होने की खबर नहीं है। विमान में कुछ United Nations अधिकारी भी सवार बताए गए हैं। कुछ समय के लिए प्रभावित हुआ एयरपोर्ट संचालन घटना के बाद अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का संचालन कुछ समय के लिए प्रभावित रहा। सुरक्षा जांच और रनवे क्लियर होने के बाद एयरपोर्ट सेवाओं को सामान्य किया गया। 2015 में भी हुआ था बड़ा हादसा यह पहला मौका नहीं है जब Turkish Airlines का विमान काठमांडू एयरपोर्ट पर हादसे का शिकार हुआ हो। साल 2015 में घने कोहरे के बीच एयरलाइन का एक विमान रनवे से फिसल गया था। उस घटना के बाद एयरपोर्ट कई दिनों तक बंद रहा था, हालांकि तब भी कोई बड़ा जानमाल का नुकसान नहीं हुआ था।  

surbhi मई 11, 2026 0
Spirit Airlines faces lawsuit after dementia patient passenger died in a road accident near Texas airport
स्पिरिट एयरलाइंस पर गंभीर लापरवाही का आरोप, डिमेंशिया पीड़ित बुजुर्ग यात्री की सड़क हादसे में मौत

अमेरिका की विमानन कंपनी स्पिरिट एयरलाइंस पर एक डिमेंशिया पीड़ित बुजुर्ग यात्री को एयरपोर्ट पर असहाय छोड़ने का गंभीर आरोप लगा है। परिवार का दावा है कि एयरलाइन की लापरवाही के कारण बुजुर्ग रास्ता भटक गए और बाद में सड़क हादसे में उनकी मौत हो गई। मामले को लेकर एयरलाइन के खिलाफ मुकदमा दायर किया गया है। मृतक की पहचान 75 वर्षीय मार्कोस हम्बर्टो विंडेल ओसोरियो के रूप में हुई है। वह होंडुरास के पाल्मेरोला इंटरनेशनल एयरपोर्ट से अमेरिका अपने परिवार से मिलने के लिए रवाना हुए थे। उनका विमान टेक्सास के जॉर्ज बुश इंटरकॉन्टिनेंटल एयरपोर्ट पर उतरा था। परिवार के अनुसार, यात्रा से पहले ही एयरलाइन को बता दिया गया था कि ओसोरियो डिमेंशिया से पीड़ित हैं और उन्हें एयरपोर्ट पर विशेष सहायता की जरूरत होगी। इसके बावजूद एयरलाइन ने जरूरी मदद उपलब्ध नहीं कराई। एयरपोर्ट से लापता होने के बाद हाईवे पर मिला शव परिवार एयरपोर्ट के आगमन क्षेत्र में उनका इंतजार करता रहा, लेकिन ओसोरियो वहां तक नहीं पहुंच सके। काफी देर तक संपर्क न होने पर परिवार ने पुलिस को सूचना दी। बाद में उसी रात एयरपोर्ट से करीब आठ मिनट की दूरी पर हाईवे पर उनका शव मिला। रिपोर्ट के मुताबिक, उन्हें कई वाहनों ने टक्कर मारी थी। परिवार ने एयरलाइन पर लगाया गंभीर आरोप परिवार की ओर से दायर मुकदमे में कहा गया है कि स्पिरिट एयरलाइंस ने वादा किए गए सहयोग की व्यवस्था नहीं की और एक मानसिक रूप से कमजोर बुजुर्ग यात्री को अकेले अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट से बाहर निकलने के लिए छोड़ दिया। परिवार का कहना है कि यही उनकी मौत की मुख्य वजह बनी। मुकदमे में यह भी कहा गया है कि ओसोरियो को हल्का डिमेंशिया था, जो तनावपूर्ण परिस्थितियों में बढ़ जाता था। ऐसे में उन्हें निगरानी और सहायता की जरूरत थी। अमेरिकी कानून क्या कहता है? अमेरिका में एयर कैरियर एक्सेस एक्ट के तहत एयरलाइंस के लिए दिव्यांग या मानसिक बीमारी से पीड़ित यात्रियों को सहायता देना अनिवार्य है। इसमें यात्रियों को गेट तक पहुंचाने, विमान में चढ़ाने और उतरने तक मदद करना शामिल है। अब ओसोरियो का परिवार मानसिक पीड़ा, अंतिम संस्कार के खर्च और अन्य नुकसान के लिए मुआवजे की मांग कर रहा है। मामले की प्रारंभिक सुनवाई 17 जुलाई को होगी।  

surbhi मई 9, 2026 0
Etihad Airways reportedly dismisses Pakistani employees in Abu Dhabi amid rising UAE-Pakistan tensions
UAE में पाकिस्तानियों पर कार्रवाई? एतिहाद एयरवेज ने 15 कर्मचारियों को निकाला, 48 घंटे में देश छोड़ने का आदेश

संयुक्त अरब अमीरात और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव के बीच एक बड़ी खबर सामने आई है। यूएई की प्रमुख एयरलाइन एतिहाद एयरवेज ने अबू धाबी में काम कर रहे 15 पाकिस्तानी कर्मचारियों को अचानक नौकरी से निकाल दिया है। 48 घंटे में देश छोड़ने का आदेश रिपोर्ट्स के मुताबिक, निकाले गए कर्मचारियों को बिना किसी पूर्व सूचना के इमिग्रेशन ऑफिस बुलाया गया और 48 घंटे के भीतर देश छोड़ने का आदेश थमा दिया गया। इस फैसले से वहां काम कर रहे पाकिस्तानी समुदाय में चिंता और असमंजस का माहौल बन गया है। बिना नोटिस कार्रवाई पर सवाल बताया जा रहा है कि इस पूरी प्रक्रिया में सामान्य एचआर नियमों का पालन नहीं किया गया। आमतौर पर कंपनियां कर्मचारियों को नोटिस पीरियड देती हैं, लेकिन इस मामले में सीधे निष्कासन और देश छोड़ने का निर्देश दिया गया, जिससे पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं। सीनियर कर्मचारियों पर भी असर निकाले गए लोगों में कई अनुभवी कर्मचारी भी शामिल हैं। रिपोर्ट के अनुसार, एक कर्मचारी पिछले 20 वर्षों से कंपनी में कार्यरत था। सिर्फ 48 घंटे का समय मिलने के कारण कर्मचारियों को आर्थिक और पारिवारिक व्यवस्थाएं संभालने में भारी परेशानी हो रही है। एतिहाद की चुप्पी फिलहाल एतिहाद एयरवेज की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। एविएशन सेक्टर में छंटनी आम बात है, लेकिन इस तरह इमिग्रेशन को शामिल कर त्वरित कार्रवाई असामान्य मानी जा रही है। कूटनीतिक तनाव से जोड़कर देखा जा रहा मामला विशेषज्ञों का मानना है कि यह सिर्फ नौकरी से जुड़ा मामला नहीं, बल्कि यूएई और पाकिस्तान के बीच ठंडे पड़ते रिश्तों का संकेत भी हो सकता है। हाल ही में यूएई द्वारा पाकिस्तान से करीब 3 अरब डॉलर का कर्ज वापस मांगे जाने की खबरों ने भी इस तनाव को और बढ़ाया है। पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति पर असर पाकिस्तान पहले से ही आर्थिक संकट से जूझ रहा है और बड़ी संख्या में उसके नागरिक विदेशों में काम करते हैं। ऐसे में इस तरह की घटनाएं वहां की अर्थव्यवस्था पर भी असर डाल सकती हैं, क्योंकि विदेशी कमाई (remittances) पाकिस्तान के लिए अहम स्रोत है।  

surbhi मई 1, 2026 0
Air India aircraft on runway amid rising jet fuel costs and flight cuts
महंगे जेट फ्यूल से एयर इंडिया पर दबाव: 100 उड़ानों में कटौती की तैयारी, किराए बढ़ने के संकेत

वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज उछाल का असर अब भारतीय एविएशन सेक्टर पर साफ दिखाई देने लगा है। विमान ईंधन (ATF) की बढ़ती कीमतों ने एयरलाइंस कंपनियों के ऑपरेशन को महंगा बना दिया है। इसी दबाव के चलते Air India ने रोजाना करीब 100 उड़ानों में कटौती की तैयारी शुरू कर दी है, जिनमें घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों रूट शामिल हैं। जानकारी के मुताबिक, Air India फिलहाल रोजाना लगभग 1,100 फ्लाइट्स ऑपरेट करती है। जून महीने में यूरोप, नॉर्थ अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और सिंगापुर जैसे अंतरराष्ट्रीय रूट्स पर सबसे ज्यादा कटौती देखने को मिल सकती है। यह फैसला बढ़ती लागत और घटते मुनाफे के दबाव में लिया जा रहा है। एटीएफ की कीमतों ने बढ़ाई चिंता एयरलाइन इंडस्ट्री के लिए जेट फ्यूल सबसे बड़ा खर्च होता है, जिसकी हिस्सेदारी कुल ऑपरेटिंग कॉस्ट में करीब 40% तक होती है। हाल के महीनों में ATF की कीमतों में भारी उछाल आया है। हालांकि सरकार ने फिलहाल घरेलू जेट फ्यूल की कीमतों में राहत दी है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए कोई राहत नहीं दी गई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, दिल्ली में जेट फ्यूल की कीमतें मार्च के मुकाबले लगभग दोगुनी हो चुकी हैं। वहीं, ग्लोबल एवरेज जेट फ्यूल की कीमत फरवरी के करीब 99.40 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर अप्रैल के अंत तक 179.46 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई–यानी करीब 80% की बढ़ोतरी। इंडस्ट्री ने सरकार से मांगी मदद Federation of Indian Airlines, जिसमें इंडिगो, एयर इंडिया और स्पाइसजेट जैसी कंपनियां शामिल हैं, ने सरकार से राहत की मांग की है। फेडरेशन का कहना है कि मौजूदा कीमतों के चलते इंडस्ट्री पर भारी दबाव है और अगर जल्द राहत नहीं मिली तो स्थिति गंभीर हो सकती है। लंबे रूट और बढ़ती लागत ने बढ़ाया संकट Air India पर अन्य कंपनियों की तुलना में ज्यादा असर इसलिए भी पड़ रहा है क्योंकि इसका अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क बड़ा है। पाकिस्तान का एयरस्पेस बंद होने के कारण यूरोप और नॉर्थ अमेरिका जाने वाली फ्लाइट्स को लंबा रूट लेना पड़ रहा है, जिससे ईंधन खपत और क्रू कॉस्ट दोनों बढ़ गए हैं। कई फ्लाइट्स को वियना और स्टॉकहोम जैसे शहरों में स्टॉपओवर करना पड़ रहा है। घाटा 20,000 करोड़ के पार, टाटा ग्रुप पर दबाव एयर इंडिया का कुल घाटा पहले ही 20,000 करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है। Tata Group और उसकी साझेदार Singapore Airlines पर इस घाटे को कम करने और कंपनी को मुनाफे में लाने का दबाव बढ़ता जा रहा है। गौरतलब है कि टाटा ग्रुप ने 2022 में एयर इंडिया का अधिग्रहण किया था। यात्रियों पर क्या होगा असर? विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ATF की कीमतों में बढ़ोतरी जारी रहती है, तो आने वाले समय में फ्लाइट टिकट महंगे हो सकते हैं और उड़ानों की संख्या में और कटौती भी संभव है। इसका सीधा असर यात्रियों की जेब और यात्रा योजनाओं पर पड़ेगा।  

surbhi मई 1, 2026 0
emergency landing after technical fault, anxious passengers onboard
हवा में 4 घंटे तक फंसी रही फ्लाइट, यात्रियों में दहशत: हैदराबाद-हुबली उड़ान में तकनीकी खराबी, बेंगलुरु में इमरजेंसी लैंडिंग

हैदराबाद से हुबली जा रही एक यात्री उड़ान में उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब बीच रास्ते में तकनीकी खराबी आ गई और विमान को घंटों तक हवा में ही चक्कर लगाना पड़ा। हालांकि पायलटों की सूझबूझ से बड़ा हादसा टल गया और आखिरकार सभी यात्रियों को सुरक्षित उतार लिया गया। उड़ान के दौरान अचानक आई दिक्कत Fly91 की फ्लाइट IC3401 ने Rajiv Gandhi International Airport से दोपहर करीब 3 बजे उड़ान भरी थी। इस फ्लाइट को शाम 4:30 बजे Hubli पहुंचना था, लेकिन लैंडिंग से ठीक पहले विमान में तकनीकी खराबी आ गई। पायलटों ने स्थिति को भांपते हुए तुरंत लैंडिंग रोक दी और विमान को सुरक्षित ऊंचाई पर बनाए रखा, ताकि आपात स्थिति से निपटा जा सके। 4 घंटे तक हवा में चक्कर लगाता रहा विमान तकनीकी समस्या के कारण विमान को तुरंत उतारना संभव नहीं था। ऐसे में: विमान करीब चार घंटे तक हवा में ही घूमता रहा Mundgod, Davanagere और Shivamogga के आसमान में चक्कर लगाए गए इस दौरान पायलट सुरक्षित लैंडिंग के लिए तैयारी करते रहे यात्रियों में डर और घबराहट लंबे समय तक हवा में फंसे रहने से विमान के अंदर माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया: कई यात्री डर के कारण प्रार्थना करने लगे कुछ लोग रोने लगे और घबराहट साफ दिखाई दी परिवार वालों को भी सही जानकारी न मिलने से चिंता बढ़ गई यात्रियों के परिजनों ने एयरलाइंस पर नाराजगी जताते हुए कहा कि उन्हें समय पर स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। बेंगलुरु में सुरक्षित लैंडिंग स्थिति को देखते हुए पायलटों ने विमान को डायवर्ट करने का फैसला लिया। आखिरकार फ्लाइट को Kempegowda International Airport, Bengaluru में उतारा गया। शाम करीब 7:30 बजे सुरक्षित लैंडिंग हुई सभी यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया इस सफल लैंडिंग के बाद यात्रियों और उनके परिवारों ने राहत की सांस ली। एयरलाइंस पर उठे सवाल इस घटना के बाद कई सवाल खड़े हो रहे हैं: तकनीकी खराबी आखिर किस वजह से आई? यात्रियों को समय पर जानकारी क्यों नहीं दी गई? क्या सुरक्षा प्रोटोकॉल पूरी तरह फॉलो किए गए?

surbhi अप्रैल 20, 2026 0
Fighter jet hard landing blocks Pune Airport runway
पुणे एयरपोर्ट पर बड़ा घटनाक्रम: वायुसेना के फाइटर जेट की हार्ड लैंडिंग से रनवे बंद, उड़ानें प्रभावित

  पुणे: Pune Airport पर शुक्रवार देर रात अचानक अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जब भारतीय वायुसेना के एक लड़ाकू विमान की लैंडिंग के दौरान तकनीकी समस्या आ गई। इस “हार्ड लैंडिंग” के चलते रनवे पूरी तरह ब्लॉक हो गया और एयरपोर्ट पर सभी फ्लाइट ऑपरेशन तत्काल प्रभाव से रोक दिए गए। घटना रात करीब 10:25 बजे की बताई जा रही है। वायुसेना के अधिकारियों के मुताबिक, विमान को उतारते समय अचानक खराबी आई, जिससे सामान्य लैंडिंग संभव नहीं हो सकी और विमान ने कड़ी लैंडिंग की। इस वजह से रनवे पर रुकावट पैदा हो गई और उसे अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा। राहत की बात यह रही कि इस पूरे घटनाक्रम में विमान में मौजूद सभी एयरक्रू पूरी तरह सुरक्षित हैं। किसी के घायल होने या किसी नागरिक संपत्ति को नुकसान पहुंचने की कोई सूचना नहीं है। एयरपोर्ट और वायुसेना की टीमें तुरंत हरकत में आ गईं और रनवे को साफ करने का काम शुरू कर दिया गया। एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) के अनुसार, स्थिति को सामान्य करने में करीब 4 से 5 घंटे का समय लग सकता है। इस दौरान कई उड़ानों में देरी हुई, जबकि कुछ फ्लाइट्स को डायवर्ट या रद्द भी करना पड़ा, जिससे यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। उड्डयन राज्य मंत्री Murlidhar Mohol ने भी इस घटना की पुष्टि करते हुए कहा कि सभी एयरलाइंस को समय रहते सूचित कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि वे लगातार एयरपोर्ट डायरेक्टर और वायुसेना अधिकारियों के संपर्क में हैं ताकि जल्द से जल्द सेवाएं बहाल की जा सकें। फिलहाल प्राथमिक जांच में तकनीकी खराबी को इस घटना की वजह माना जा रहा है, लेकिन विस्तृत जांच रिपोर्ट के बाद ही असली कारण सामने आएगा। इस घटना ने एक बार फिर एयरपोर्ट संचालन में सुरक्षा और आपात स्थिति से निपटने की तैयारियों पर ध्यान खींचा है।  

surbhi अप्रैल 18, 2026 0
Aircraft refueling with rising jet fuel prices impacting aviation industry and airfares
Jet Fuel Price Hike: ईरान युद्ध का असर, ATF पहली बार ₹2 लाख के पार, हवाई यात्रा होगी महंगी

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और Iran से जुड़े युद्ध हालात का असर अब भारत के एविएशन सेक्टर पर साफ दिखाई देने लगा है। कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के चलते विमान ईंधन यानी ATF (एविएशन टरबाइन फ्यूल) की कीमतों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे हवाई यात्रा महंगी होने के संकेत मिल रहे हैं। 100% से ज्यादा बढ़ी ATF की कीमत सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने अप्रैल महीने के लिए ATF की कीमतों में भारी इजाफा किया है। घरेलू उड़ानों के लिए कीमत में करीब 115% की बढ़ोतरी अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए 107% तक वृद्धि नई दरों के अनुसार, New Delhi में ATF की कीमत बढ़कर ₹2,07,341.22 प्रति किलोलीटर हो गई है, जो पिछले महीने ₹96,638.14 थी। यह पहली बार है जब दिल्ली समेत Kolkata और Chennai में ATF ₹2 लाख के पार पहुंचा है। वहीं Mumbai में इसकी कीमत बढ़कर ₹1,94,968.67 हो गई है। इंटरनेशनल फ्लाइट्स पर भी असर अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए ATF की कीमत पहली बार 1000 डॉलर प्रति किलोलीटर के पार पहुंच गई है। दिल्ली में यह बढ़कर 1,690.81 डॉलर हो गई पहले यह 816.91 डॉलर थी एयरलाइंस पर बढ़ा दबाव एविएशन इंडस्ट्री में जेट फ्यूल की हिस्सेदारी कुल ऑपरेटिंग कॉस्ट का 40–45% तक होती है। ऐसे में इस बढ़ोतरी ने एयरलाइंस की लागत को सीधे प्रभावित किया है। कमजोर होते रुपये (करीब 95 प्रति डॉलर) ने भी स्थिति को और चुनौतीपूर्ण बना दिया है। टिकट हो सकते हैं महंगे विशेषज्ञों का मानना है कि एयरलाइंस इस अतिरिक्त बोझ को यात्रियों पर डाल सकती हैं। हाल ही में IndiGo, Air India और Akasa Air ने फ्यूल सरचार्ज लगाया था, जिसे अब और बढ़ाया जा सकता है। इसके साथ ही: फ्लाइट टिकट महंगे हो सकते हैं यात्रियों की मांग प्रभावित हो सकती है कुछ रूट्स पर उड़ानों की संख्या घट सकती है छोटी एयरलाइंस पर खतरा इस तेज बढ़ोतरी से खासकर छोटी एयरलाइंस पर बड़ा असर पड़ सकता है। लागत बढ़ने से उनके लिए संचालन जारी रखना मुश्किल हो सकता है। सरकार के फैसले का भी असर सरकार ने हाल ही में घरेलू उड़ानों पर किराया सीमा (₹18,000 कैप) हटा दी थी। ऐसे में एयरलाइंस के पास किराए बढ़ाने की पूरी गुंजाइश है, जिसका सीधा असर यात्रियों की जेब पर पड़ेगा।  

surbhi अप्रैल 1, 2026 0
Russian An-26 military transport aircraft crash
क्रीमिया में रूस का सैन्य विमान An-26 क्रैश, 29 लोगों की मौत

रूस का सैन्य ट्रांसपोर्ट विमान An-26 मंगलवार को क्रीमिया में दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमें सवार सभी 29 लोगों की मौत हो गई। हादसे में 23 यात्री और 6 क्रू मेंबर शामिल थे। दुर्घटना के बाद किसी के भी जीवित बचने की खबर नहीं है। रूसी न्यूज एजेंसी TASS के मुताबिक, विमान से पहले संपर्क टूट गया था। इसके कुछ समय बाद पता चला कि विमान चट्टान से टकराकर क्रैश हो गया। हादसे के कारणों की जांच जारी है, हालांकि शुरुआती रिपोर्ट में तकनीकी खराबी की आशंका जताई गई है। जांच जारी, तकनीकी खराबी की आशंका रूसी अधिकारियों ने बताया कि दुर्घटना के पीछे असली कारणों का पता लगाने के लिए जांच शुरू कर दी गई है। फिलहाल तकनीकी खामी को संभावित वजह माना जा रहा है, लेकिन इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। An-26 विमान की खासियत An-26 सोवियत दौर का सैन्य ट्रांसपोर्ट विमान है, जिसे एंटोनोव कंपनी ने विकसित किया था। इसकी पहली उड़ान 1969 में हुई थी। इस विमान का इस्तेमाल मुख्य रूप से सैनिकों, हथियारों और सैन्य सामान के परिवहन के लिए किया जाता है। यह विमान अपनी खास क्षमता के लिए जाना जाता है, जिसमें छोटे और खराब रनवे से भी उड़ान भरने की क्षमता शामिल है। यही कारण है कि इसका उपयोग दुर्गम और युद्ध क्षेत्रों में व्यापक रूप से किया जाता रहा है। इसके पीछे मौजूद बड़े कार्गो दरवाजे से एयरड्रॉप ऑपरेशन भी किए जा सकते हैं। पुराना डिजाइन, उठते रहे हैं सवाल करीब 50 साल पुराने डिजाइन वाले इस विमान की सुरक्षा को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। पहले भी इस तरह के विमानों से जुड़े हादसे सामने आ चुके हैं। हालांकि, आज भी कई देशों की वायुसेनाएं इसका उपयोग कर रही हैं, लेकिन धीरे-धीरे इन्हें आधुनिक ट्रांसपोर्ट विमानों से बदला जा रहा है।  

surbhi अप्रैल 1, 2026 0
Airplane taking off with rising flight ticket prices between India and Dubai
पश्चिम एशिया संकट का असर: भारतीयों की जेब पर भारी बोझ, दुबई फ्लाइट किराया ₹90,000 तक पहुंचा

पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच अब इसका सीधा असर आम भारतीयों की जेब पर दिखने लगा है. हालात धीरे-धीरे सामान्य होने के बावजूद विदेशों में काम कर रहे भारतीयों के लिए घर लौटना या वापस नौकरी पर जाना काफी महंगा साबित हो रहा है. खासतौर पर दिल्ली से दुबई की उड़ानों के किराए में जबरदस्त उछाल देखा गया है। क्यों महंगे हुए फ्लाइट टिकट? हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दिल्ली से दुबई जाने वाली इकोनॉमी क्लास की एकतरफा टिकट की कीमत अब ₹50,000 से शुरू होकर ₹85,000 से ₹90,000 तक पहुंच गई है। इसके पीछे कई प्रमुख कारण हैं: सीमित उड़ानें: संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने विदेशी एयरलाइंस की फ्लाइट्स की संख्या सीमित कर दी है। बढ़ती मांग: बड़ी संख्या में भारतीयों को दोबारा काम पर लौटने के लिए बुलाया जा रहा है। क्षेत्रीय तनाव: पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव ने हवाई सेवाओं को प्रभावित किया है। इन सभी कारणों के चलते यात्रियों के पास महंगे टिकट लेने के अलावा ज्यादा विकल्प नहीं बचा है। सस्ते विकल्प भी मौजूद, लेकिन सीमित हालांकि कुछ एयरलाइंस थोड़े सस्ते विकल्प दे रही हैं: कुछ भारतीय एयरलाइंस में किराया ₹40,000 से शुरू हो रहा है लो-कॉस्ट एयरलाइन फ्लाईदुबई में ₹35,000–₹40,000 तक टिकट मिल सकते हैं इंडायरेक्ट रूट: यात्री इंडिगो से अबू धाबी जाकर सड़क मार्ग से दुबई पहुंच रहे हैं, जिससे खर्च करीब ₹30,000 तक आ सकता है लेकिन इन विकल्पों की उपलब्धता सीमित है, जिससे अधिकांश यात्रियों को महंगे टिकट ही खरीदने पड़ रहे हैं। काम पर लौटने का दबाव बढ़ा कई भारतीय पहले ही अपने परिवार को सुरक्षित भारत भेज चुके थे, लेकिन अब कंपनियां कर्मचारियों को वापस बुला रही हैं। ऐसे में नौकरी बचाने के दबाव में लोगों को महंगे टिकट खरीदने पड़ रहे हैं। एक प्रवासी भारतीय के अनुसार, “अगर समय पर काम पर नहीं लौटे तो नौकरी जाने का खतरा है, इसलिए मजबूरी में महंगा टिकट लेना पड़ रहा है।” आगे क्या? विशेषज्ञों का मानना है कि 5 अप्रैल तक किराए ऊंचे बने रह सकते हैं। इसके बाद स्थिति सामान्य होने पर धीरे-धीरे कीमतों में कमी आ सकती है। फिलहाल, यह संकट सिर्फ जियोपॉलिटिक्स तक सीमित नहीं रहा, बल्कि आम लोगों के रोजमर्रा के जीवन और खर्च पर भी गहरा असर डाल रहा है।  

kalpana मार्च 26, 2026 0
Damaged passenger plane after collision with fire truck at New York LaGuardia Airport runway emergency scene
न्यूयॉर्क एयरपोर्ट पर बड़ा विमान हादसा: लैंडिंग के दौरान प्लेन और फायर ट्रक की टक्कर, दोनों पायलटों की मौत

न्यूयॉर्क: ला गार्डिया एयरपोर्ट पर सोमवार को एक दर्दनाक विमान हादसा सामने आया, जब एयर कनाडा एक्सप्रेस का एक यात्री विमान लैंडिंग के दौरान रनवे पर मौजूद फायर ट्रक से टकरा गया। इस भीषण टक्कर में विमान के दोनों पायलटों की मौत हो गई, जबकि 100 से अधिक यात्री घायल बताए जा रहे हैं। कैसे हुआ हादसा प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, मॉन्ट्रियल से आ रहा सीआरजे-900 विमान रनवे-4 पर उतर रहा था, तभी उसकी टक्कर एक आपातकालीन फायर ट्रक से हो गई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि विमान बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और एयरपोर्ट पर अफरातफरी मच गई। एयरपोर्ट पर इमरजेंसी और ग्राउंड स्टॉप हादसे के तुरंत बाद फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (FAA) ने पूरे एयरपोर्ट पर ‘ग्राउंड स्टॉप’ लागू कर दिया, जिससे सभी उड़ानों का संचालन अस्थायी रूप से रोक दिया गया। राहत और बचाव दल तुरंत मौके पर पहुंचा और घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया। घायलों की स्थिति रिपोर्ट्स के मुताबिक, विमान में सवार 100 से अधिक यात्रियों को चोटें आई हैं। वहीं न्यूयॉर्क फायर डिपार्टमेंट के कम से कम पांच फायरफाइटर गंभीर रूप से घायल हुए हैं। चेतावनी के बावजूद टक्कर घटना से जुड़े ऑडियो और वीडियो सामने आए हैं, जिनमें एयर ट्रैफिक कंट्रोल द्वारा विमान और ग्राउंड वाहन दोनों को टक्कर से पहले कई बार रुकने के निर्देश दिए जाने की बात सामने आई है। इसके बावजूद यह हादसा हो गया, जिससे सुरक्षा व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े हो रहे हैं। जांच शुरू FAA और अन्य एजेंसियों ने हादसे की जांच शुरू कर दी है। शुरुआती फोकस इस बात पर है कि चेतावनी के बावजूद टक्कर कैसे हुई और रनवे पर सुरक्षा प्रोटोकॉल में कहीं चूक तो नहीं हुई।  

surbhi मार्च 23, 2026 0
F-35 stealth fighter jet in flight amid global debate over performance and reliability issues
F-35 पर उठे सवाल: क्या भारत का फैसला सही था? पांचवीं पीढ़ी के जेट की क्षमता पर नई बहस

दुनिया के सबसे आधुनिक माने जाने वाले लड़ाकू विमानों में शामिल F-35 Lightning II एक बार फिर विवादों में है। हालिया रिपोर्ट्स और घटनाओं ने इस फिफ्थ जेनरेशन स्टेल्थ फाइटर की क्षमताओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिससे भारत के इसे न खरीदने के फैसले पर नई चर्चा शुरू हो गई है। बार-बार हादसे और तकनीकी खामियां पिछले कुछ वर्षों में F-35 से जुड़ी कई दुर्घटनाएं सामने आई हैं। अलग-अलग देशों के बेड़े में शामिल इन विमानों को तकनीकी खराबी, ट्रेनिंग मिशन या लैंडिंग के दौरान नुकसान झेलना पड़ा है। केरल में ब्रिटिश नेवी के F-35B की इमरजेंसी लैंडिंग जैसी घटनाओं ने भी इसकी विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए। ईरान के दावे से बढ़ी बहस हालिया घटनाक्रम में ईरान ने दावा किया है कि उसने अपने एयर डिफेंस सिस्टम से F-35 को इंटरसेप्ट कर नुकसान पहुंचाया। हालांकि, अमेरिका ने विमान के नष्ट होने की पुष्टि नहीं की है, लेकिन इस दावे ने स्टेल्थ टेक्नोलॉजी की वास्तविक क्षमता पर चर्चा तेज कर दी है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि कोई स्टेल्थ जेट आसानी से ट्रैक या हिट हो सकता है, तो उसकी तकनीकी बढ़त पर सवाल उठना स्वाभाविक है। भारत क्यों रहा सतर्क? भारत को लंबे समय से आधुनिक 5th जेनरेशन फाइटर जेट की जरूरत है, खासकर चीन की बढ़ती सैन्य ताकत को देखते हुए। अमेरिका ने कई बार भारत को F-35 बेचने की कोशिश की, खासतौर पर डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल में इस पर जोर दिया गया। लेकिन भारत ने अब तक इस डील पर अंतिम निर्णय नहीं लिया। इसके पीछे कई अहम कारण रहे- टेक्नोलॉजी ट्रांसफर पर सीमाएं   हथियार सिस्टम के इंटीग्रेशन की चुनौती   लागत और मेंटेनेंस का बोझ   और अब उभरते तकनीकी सवाल   क्या JF-17 से भी तुलना सही? कुछ रिपोर्ट्स में F-35 की तुलना JF-17 Thunder से की जा रही है, लेकिन रक्षा विशेषज्ञ इसे अतिशयोक्ति मानते हैं। JF-17 एक हल्का मल्टी-रोल फाइटर है, जबकि F-35 अत्याधुनिक स्टेल्थ टेक्नोलॉजी, सेंसर फ्यूजन और नेटवर्क-सेंट्रिक वॉरफेयर के लिए डिजाइन किया गया है। दोनों की श्रेणी और क्षमताएं अलग हैं, इसलिए सीधी तुलना तकनीकी रूप से सटीक नहीं मानी जाती। भारत के पास क्या विकल्प? भारत फिलहाल अपने स्वदेशी और विदेशी विकल्पों पर समानांतर काम कर रहा है- Su-57 जैसे विकल्पों पर नजर   और स्वदेशी 5th जेनरेशन प्रोजेक्ट (AMCA) पर तेजी   भारत का लक्ष्य केवल खरीद नहीं, बल्कि तकनीकी आत्मनिर्भरता भी है। F-35 पर उठते सवालों के बीच यह साफ है कि भारत बेहद सतर्क रणनीति अपना रहा है। रक्षा खरीद में जल्दबाजी के बजाय दीर्घकालिक रणनीतिक फायदे को प्राथमिकता दी जा रही है।  

surbhi मार्च 20, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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बिहार में असिस्टेंट प्रोफेसर बनने के नियम बदले, जानिए कब जरूरी होगा NET ?

abhishek singh जुलाई 2, 2026 0