झारखंड

अब WhatsApp के जरिए ठगी, कोडरमा में 2 धराये

Anjali Kumari अप्रैल 15, 2026 0
WhatsApp cheating scam
WhatsApp cheating scam

कोडरमा।  झारखंड में अब व्हाट्सएप के जरिए भी साइबर ठगी का मामला प्रकाश में आया है। कोडरमा पुलिस ने ऑनलाइन ठगी के एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। एस्कॉर्ट सर्विस के नाम पर लोगों को झांसे में लेकर उनसे पैसे ऐंठे जा रहे थे। यह कार्रवाई SP अनुदीप सिंह को मिली गुप्त सूचना  के आधार पर की गई।

 

फर्जी आईडी बनाकर ठगी


 पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी अलग-अलग वेबसाइटों पर फर्जी आईडी बनाकर अपना मोबाइल नंबर डालते थे। जब कोई व्यक्ति संपर्क करता, तो उसे लड़कियों की तस्वीरें भेजकर भरोसे में लिया जाता था। इसके बाद “बुकिंग” के नाम पर QR कोड भेजकर पैसे मंगवाए जाते थे।

 

QR कोड स्कैन करते ही कट जाते थे पैसे


पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि जैसे ही कोई व्यक्ति QR कोड स्कैन करता, पैसे सीधे उनके खाते में पहुंच जाते थे। इसके बाद वे संपर्क बंद कर देते थे और रकम आपस में बांट लेते थे।

 

पुलिस ने छापेमारी कर इन्हे किया गिरफ्तार


कोडरमा थाना प्रभारी विकास पासवान के नेतृत्व में बनी टीम ने बेकोबार में छापेमारी कर अनिल पंडित और मंटू कुमार पंडित को गिरफ्तार किया। दोनों मौके से भागने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन पुलिस ने पकड़ लिया।

 

कई शहरों में फैला नेटवर्क


पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि यह गिरोह सिर्फ कोडरमा ही नहीं, बल्कि कई अन्य शहरों में भी सक्रिय था। आरोपियों के पास से मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं, जिनमें फर्जी चैट, युवतियों की तस्वीरें और ठगी के लिए इस्तेमाल किए गए QR कोड मिले हैं।

 

7 अन्य तलाश में छापेमारी जारी


मामले में बेकोबार गांव के सात अन्य लोगों की भी पहचान की गई है। उनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। कोडरमा थाना में प्राथमिकी दर्ज कर आगे की कार्रवाई जारी है।


पुलिस ने आम लोगों से की अपील


पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि वे ऐसे ऑनलाइन प्रलोभनों और अनजान वेबसाइटों से सावधान रहें। बिना जांचे-परखे किसी QR कोड को स्कैन करने से बचें।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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JAC 9वीं रिजल्ट जारी, 99.17% छात्र पास; बेटियों का शानदार प्रदर्शन

रांची। JAC ने कक्षा 9वीं बोर्ड परीक्षा 2026 का परिणाम जारी कर दिया है। इस साल रिजल्ट बेहद शानदार रहा, जहां कुल 99.17% छात्र सफल घोषित किए गए। परीक्षा में राज्यभर से 4,10,258 परीक्षार्थी शामिल हुए थे, जिनमें से 4,06,883 छात्रों ने सफलता हासिल की।   बेटियों ने फिर मारी बाजी इस वर्ष भी छात्राओं ने छात्रों से बेहतर प्रदर्शन किया है। छात्राओं का पास प्रतिशत 99.22% रहा, जबकि छात्रों का 99.12% दर्ज किया गया। यह लगातार दूसरा साल है जब बेटियों ने परीक्षा में अपनी श्रेष्ठता साबित की है। पिछले वर्ष की तुलना में इस बार का कुल परिणाम भी बेहतर रहा है।   जिलों में बोकारो नंबर-1 जिलावार प्रदर्शन की बात करें तो बोकारो 99.63% सफलता दर के साथ राज्य में पहले स्थान पर रहा। इसके बाद कोडरमा और हजारीबाग का स्थान रहा। वहीं, सिमडेगा जिले का प्रदर्शन सबसे कम रहा, जहां 98.20% छात्र ही पास हो सके।   प्रमंडलवार आंकड़े भी बेहतर प्रमंडल स्तर पर उत्तरी छोटानागपुर 99.45% के साथ सबसे आगे रहा। इसके बाद संताल परगना (99.42%), पलामू (99.11%), कोल्हान (99.05%) और दक्षिणी छोटानागपुर (99.02%) का स्थान रहा।   OMR शीट पर हुई थी परीक्षा यह परीक्षा मार्च के पहले सप्ताह में OMR शीट के माध्यम से आयोजित की गई थी। रिजल्ट जारी करते समय JAC अध्यक्ष और अन्य अधिकारी मौजूद रहे।   शिक्षा के स्तर में सुधार का संकेत इस शानदार परिणाम को राज्य में शिक्षा के स्तर में सुधार का संकेत माना जा रहा है। उच्च सफलता दर से छात्रों और अभिभावकों में उत्साह का माहौल है।

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रांची। रांची के बिरसा मुंडा एयरपोर्ट से हवाई सेवाओं का विस्तार किया जा रहा है। बढ़ती यात्रियों की संख्या और समर सीजन को देखते हुए मई महीने से अतिरिक्त उड़ानों का संचालन शुरू होगा। इससे खासकर मुंबई, नई दिल्ली और हैदराबाद जाने वाले यात्रियों को काफी राहत मिलने की उम्मीद है।   इंडिगो और एयर इंडिया बढ़ा रही सेवाएं IndiGo मुंबई रूट पर 1 मई से 29 मई तक विशेष समर फ्लाइट चलाएगी। यह सेवा सप्ताह में तीन दिन सोमवार, बुधवार और शुक्रवार को उपलब्ध रहेगी। वहीं Air India ने भी रांची से मुंबई, दिल्ली और हैदराबाद के लिए अतिरिक्त उड़ानें शुरू करने का निर्णय लिया है। ये उड़ानें अलग-अलग समय स्लॉट में संचालित होंगी, जिससे यात्रियों को सुविधा अनुसार विकल्प मिल सकेगा।   समय और सुविधा का बेहतर संतुलन नई व्यवस्था के तहत मुंबई के लिए शाम के समय, दिल्ली के लिए सुबह और हैदराबाद के लिए दोपहर में सीधी उड़ान उपलब्ध होगी। इससे बिजनेस ट्रैवलर्स और आपात यात्रा करने वाले लोगों को खास फायदा होगा। यात्रियों को अब ज्यादा फ्लेक्सिबल टाइमिंग और बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी।   गर्मी की छुट्टियों में बढ़ती मांग का असर गर्मी की छुट्टियों के दौरान यात्रियों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी होती है। ऐसे में अतिरिक्त उड़ानों से टिकट की उपलब्धता बेहतर होगी और किराए में भी संतुलन बने रहने की उम्मीद है। एयरपोर्ट अथॉरिटी के अनुसार, पिछले कुछ महीनों में यात्रियों की संख्या में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है।   मजबूत होगा रांची का हवाई नेटवर्क नई उड़ानों के शुरू होने से रांची का हवाई नेटवर्क और मजबूत होगा। इससे राज्य के यात्रियों को देश के प्रमुख शहरों तक पहुंचने के लिए अधिक विकल्प मिलेंगे। यह कदम न केवल यात्रा को आसान बनाएगा, बल्कि क्षेत्रीय विकास और कनेक्टिविटी को भी नई दिशा देगा।

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रांची। झारखंड में अवैध अफीम की खेती और मादक पदार्थों की तस्करी पर रोक लगाने के लिए पुलिस मुख्यालय ने सख्ती बढ़ा दी है। इसी कड़ी में आज 17 अप्रैल को दोपहर 3 बजे डीजीपी तदाशा मिश्रा की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की जाएगी। यह बैठक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्य से होगी, जिसमें राज्य के विभिन्न जिलों के पुलिस अधिकारी शामिल होंगे।   अभियान की प्रगति और कार्रवाई की होगी समीक्षा बैठक में अब तक चलाए गए अभियान की समीक्षा की जाएगी, जिसमें अवैध अफीम की खेती को नष्ट करने की प्रगति, तस्करी से जुड़े मामलों में की गई गिरफ्तारी, जब्ती और पुलिस कार्रवाई के आंकड़ों पर विस्तार से चर्चा होगी। साथ ही भविष्य की रणनीति तैयार करने पर भी विशेष जोर दिया जाएगा।   कई जिलों के एसपी को शामिल होने का निर्देश इस अहम बैठक में रांची, चतरा, पलामू, चाईबासा, सरायकेला-खरसावां, हजारीबाग, लातेहार और खूंटी सहित कई जिलों के पुलिस अधीक्षकों (एसपी) को भाग लेने के निर्देश दिए गए हैं। इन जिलों को इसलिए शामिल किया गया है क्योंकि यहां अवैध अफीम खेती और नशा तस्करी के मामले अधिक सामने आते रहे हैं।   पूरी तैयारी के साथ शामिल होने के निर्देश पुलिस मुख्यालय की ओर से जारी निर्देश में कहा गया है कि सभी अधिकारी बैठक में पूरी तैयारी के साथ शामिल हों। उन्हें अपने-अपने जिलों की विस्तृत रिपोर्ट, कार्रवाई की स्थिति और संबंधित आंकड़े प्रस्तुत करने होंगे। यह आदेश सीआईडी एसपी (द्वितीय) की ओर से जारी किया गया है।   नशा कारोबार पर नकेल कसने की कोशिश राज्य सरकार और पुलिस विभाग अवैध नशा कारोबार पर सख्ती से रोक लगाने के लिए लगातार अभियान चला रहे हैं। इस समीक्षा बैठक को इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे आने वाले दिनों में कार्रवाई और तेज हो सकती है।

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