झारखंड

रांची में बन रहा मेगा पार्क, सेहत से मनोरंजन तक का ख्याल रखेगा

Anjali Kumari अप्रैल 7, 2026 0
Ranchi mega park
Ranchi mega park

रांची। रांची में एक और मेगा पार्क बन रहा है। अगले छह माह में यह तैयार हो जायेगा। इसके बाद रांची को एक और पार्क की सौगात मिलेगी। वन विभाग की ओर से रिंग रोड के किनारे सेंबो से आगे बारीडीह गांव में 38 एकड़ जमीन पर पार्क बन रहा है। इस पर करीब 11 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इस पार्क को राजभवन के सामने स्थित नक्षत्र वन की तर्ज पर विकसित किया जा रहा है।


औषधीय पौधों की जानकारी मिलेगी


यहां पर्यटकों को औषधीय पौधों की जानकारी मिलेगी। यह पहला पार्क होगा, जहां बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों की सेहत से लेकर मनोरंजन तक की सभी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। क्योंकि, पार्क के अंदर दो तालाब बनेंगे।

एक बोटिंग और दूसरा लोटस पॉन्ड बनेगा। पार्क के अंदर ट्री हाउस और एलिवेटेड व्यू सबसे बड़ा आकर्षण होगा। क्योंकि, ट्री हाउस के ऊपर कैफेटेरिया होगा, जहां पर्यटकों को लजीज व्यंजन परोसे जाएंगे। 


बड़ा पार्किंग एरिया


पार्क के पास वाहनों के लिए सबसे बड़ा पार्किंग एरिया बन रहा है, जहां 200 चार पहिया और दो पहिया वाहनों की पार्किंग की व्यवस्था की गई है।

 

पार्क बनने से फायदा


पार्क में चारों ओर हरे-भरे पेड़ हैं। पार्क बनने से पेड़ संरक्षित रहेंगे। बड़े क्षेत्र में हरियाली रहेगी। पार्क बनने से पूरे क्षेत्र की खूबसूरती बढ़ जाएगी। लोग अपने परिवार के साथ क्वालिटी टाइम गुजार सकेंगे। उन्हें स्वच्छ वातावरण मिलेगा। पार्क के निर्माण से रोजगार के नए अवसर मिलेंगे। आसपास का क्षेत्र भी विकसित होगा। चहल-पहल बढ़ेगी तो बसावट भी बढ़ेगी।

 

बच्चों के लिए पहली बार टॉय ट्रेन व एडवेंचर जोन


इस पार्क में बच्चों के लिए अम्यूजमेंट जोन बन रहा है। यहां तरह-तरह के झूले, खेल उपकरण और टॉय ट्रेन की सुविधा होगी। रांची में यह पहला पार्क होगा, जहां बच्चों के मनोरंजन के लिए इतने बड़े स्तर पर सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। छोटे बच्चों से लेकर किशोरों के लिए अलग-अलग जोन बनाए जाएंगे। क्रिकेट बॉक्स सहित अन्य खेल भी होंगे। युवाओं के लिए ओपन जिम की सुविधा मिलेगी। नॉलेज के साथ स्वच्छ वातावरण का आनंद ले सकेंगे।

 

बाउंड्री से लेकर वॉकिंग ट्रैक तक का काम लगभग पूरा


पार्क के चारों ओर बाउंड्री वॉल का निर्माण पूरा हो चुका है। 2.25 किलोमीटर लंबा वॉकिंग ट्रैक भी तैयार है, जहां लोग सुबह-शाम टहल सकेंगे। इसके अलावा ट्री हाउस का निर्माण तेजी से चल रहा है, जिसके ऊपर कैफेटेरिया बनेगा। वाटर टॉवर के ऊपर भी लोगों के बैठने की व्यवस्था की जाएगी, ताकि लोग ऊंचाई पर बैठकर पूरे पार्क का नजारा ले सकें।

 

बटरफ्लाई कंजर्वेटरी होगा आकर्षण का केंद्र


नेचर लवर्स के लिए यहां बटरफ्लाई कंजर्वेटरी बनाई जा रही है, जहां विभिन्न प्रजातियों की तितलियां संरक्षित की जाएंगी। साथ ही नक्षत्र वन का छोटा स्वरूप भी विकसित होगा, जिसमें औषधीय और धार्मिक महत्व के पौधे लगाए जाएंगे। इससे यह पार्क मनोरंजन के साथ-साथ शैक्षणिक महत्व भी रखेगा। यहां पर्यटकों को विभिन्न प्रकार के औषधीय पौधों के बारे में जानकारी दी जाएगी।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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Sido Kanhu martyrs tribute
"जल, जंगल और जमीन की रक्षा का संघर्ष हमारी प्रेरणा": मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने शहीद सिदो-कान्हू को दी श्रद्धांजलि

रांची। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्य के महान क्रांतिकारी वीर शहीद सिदो-कान्हू की जयंती के अवसर पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। राजधानी रांची के मोरहाबादी स्थित सिदो-कान्हू उद्यान में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री और गांडेय विधायक कल्पना सोरेन ने वीर शहीदों की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने राज्य की अस्मिता और स्वाभिमान की रक्षा के लिए प्राणों की आहुति देने वाले इन सपूतों के योगदान को याद करते हुए उन्हें नमन किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि झारखंड की मिट्टी वीरों की भूमि रही है और यहां के महापुरुषों का संघर्ष आज भी समाज को नई ऊर्जा प्रदान करता है।   आदिवासियों और मूलवासियों के हक की ऐतिहासिक लड़ाई श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि झारखंड का इतिहास संघर्षों की गाथाओं से भरा हुआ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य के आदिवासी एवं मूलवासी समाज ने अपने अधिकारों और अपनी पहचान के लिए उस दौर में बिगुल फूंका था, जब पूरे देश में आजादी की चेतना भी व्यापक रूप से जागृत नहीं हुई थी। मुख्यमंत्री के अनुसार, जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए हमारे पूर्वजों ने जो बलिदान दिए हैं, वे अद्वितीय हैं। उन्होंने बताया कि सिदो-कान्हू जैसे नायकों ने समाज को एकजुट कर अन्याय के खिलाफ खड़ा होना सिखाया, जिसका परिणाम है कि आज झारखंड अपनी विशिष्ट पहचान के साथ देश के मानचित्र पर मजबूती से खड़ा है।   अन्याय और शोषण के विरुद्ध साहस का प्रतीक मुख्यमंत्री ने सिदो-कान्हू के नेतृत्व में हुए विद्रोह की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इन वीर भाइयों ने ब्रिटिश हुकूमत और तत्कालीन दमनकारी व्यवस्था के खिलाफ ऐतिहासिक बिगुल फूंका था। उन्होंने कहा कि उनका संघर्ष केवल सत्ता परिवर्तन के लिए नहीं, बल्कि शोषण और अत्याचार को जड़ से खत्म करने के लिए था। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सिदो-कान्हू द्वारा दिखाया गया साहस और स्वाभिमान का मार्ग आज के युवाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत है। उनका व्यक्तित्व हमें यह सीख देता है कि विपरीत परिस्थितियों में भी अपने हक के लिए कैसे डटा रहा जाता है। सरकार इन महापुरुषों के आदर्शों को जन-जन तक पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है।   राष्ट्रीय स्तर पर अमिट पहचान और गौरवशाली विरासत कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने इस बात पर गर्व व्यक्त किया कि सिदो-कान्हू की शहादत और उनकी जयंती का दिन भारत के इतिहास के पन्नों में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है। उन्होंने रेखांकित किया कि आज केवल झारखंड ही नहीं, बल्कि समूचे देश में लोग इन महान क्रांतिकारियों की जन्मस्थली, प्रतिमाओं और शहादत स्थलों पर जाकर अपना सम्मान प्रकट कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे वीर सपूतों पर पूरे राष्ट्र को गर्व है जिन्होंने समाज को एक नई दिशा देने का कार्य किया। यह दिन हमें याद दिलाता है कि हमारी भावी पीढ़ियों को इन महापुरुषों के पदचिन्हों पर चलकर समाज के कल्याण और विकास में अपना योगदान देना चाहिए।   झारखंड के सपूतों के सपनों का राज्य बनाने का संकल्प समापन के दौरान मुख्यमंत्री ने राज्यवासियों का आह्वान किया कि वे शहीदों के सपनों का झारखंड बनाने के संकल्प को दोहराएं। उन्होंने कहा कि सरकार राज्य के सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर कार्य कर रही है और इसमें आदिवासियों-मूलवासियों के हितों को सर्वोपरि रखा गया है। माल्यार्पण कार्यक्रम में उपस्थित अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने भी शहीदों के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की। मुख्यमंत्री ने अंत में दोहराया कि सिदो-कान्हू जैसे महापुरुषों की विरासत ही झारखंड की असली ताकत है और उनकी शिक्षाएं हमेशा राज्य के विकास की नीति का आधार बनी रहेंगी। इस अवसर पर भारी संख्या में लोग मोरहाबादी मैदान पहुंचे थे, जहां सुरक्षा और अन्य व्यवस्थाएं चाक-चौबंद रखी गई थीं।

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धनबाद में प्रिंस खान पर पुलिस का बड़ा एक्शन, कुर्की की तैयारी

धनबाद। कोयलांचल के कुख्यात और लंबे समय से फरार चल रहे अपराधी प्रिंस खान और उसके गुर्गों के खिलाफ धनबाद पुलिस ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। शनिवार, 11 अप्रैल 2026 को पुलिस की टीम ने वासेपुर क्षेत्र में बड़ी दबिश दी। अदालत से प्राप्त आदेश के आलोक में पुलिस ने प्रिंस खान और उसके करीबी सहयोगी गोपी खान के घर पर सार्वजनिक उद्घोषणा (इश्तेहार) चस्पा की है। यह कदम अपराधियों को आत्मसमर्पण करने का अंतिम अवसर देने और उसके बाद उनकी संपत्तियों की कुर्की-जब्ती करने की कानूनी प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।   अदालती आदेश के बाद वासेपुर में पुलिस की बड़ी कार्रवाई धनबाद के वासेपुर स्थित कमरमखदूमी रोड पर शनिवार को पुलिस की हलचल काफी तेज रही। बैंक मोड़ थाना की पुलिस टीम ने भारी सुरक्षा के बीच प्रिंस खान और गोपी खान के आवासों को चिन्हित कर वहां नोटिस चिपकाया। बैंक मोड़ थाना के एएसआई सुनील कुमार रवि ने इस कार्रवाई की पुष्टि करते हुए बताया कि ये दोनों आरोपी कई गंभीर आपराधिक मामलों में वांछित हैं और लगातार पुलिस की पकड़ से बाहर चल रहे हैं। इश्तेहार चस्पा होने के बाद अब पुलिस जल्द ही अदालत से कुर्की-जब्ती का वारंट प्राप्त कर इनकी संपत्तियों को कुर्क करने की दिशा में आगे बढ़ेगी।   रंगदारी और आर्म्स एक्ट के दर्जनों मामलों में है तलाश प्रिंस खान पर धनबाद के विभिन्न थानों में रंगदारी, हत्या का प्रयास और आर्म्स एक्ट जैसे संगीन अपराधों के दर्जनों मुकदमे दर्ज हैं। एएसआई सुनील कुमार रवि के अनुसार, विशेष रूप से बैंक मोड़ थाना कांड संख्या 175/2023 और 277/2023 के तहत दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस लंबे समय से छापेमारी कर रही है। पुलिस का मानना है कि इस कानूनी प्रक्रिया से फरार चल रहे अपराधियों पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनेगा। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित अवधि के भीतर आरोपी न्यायालय या पुलिस के समक्ष उपस्थित नहीं होते हैं, तो उनके घरों की ईंट से ईंट बजा दी जाएगी।   एसएसपी की दोटूक: अपराधियों की धमकियों से न डरें व्यवसायी इस बड़ी कार्रवाई से एक दिन पहले, शुक्रवार को एसएसपी प्रभात कुमार ने जिले की कानून-व्यवस्था को लेकर एक महत्वपूर्ण मासिक अपराध समीक्षा बैठक की थी। इस बैठक में पुलिस कप्तान ने अधिकारियों को लंबित मामलों के त्वरित निष्पादन और संगठित अपराध के खात्मे के सख्त निर्देश दिए। मीडिया से बातचीत में एसएसपी ने जिले के व्यवसायियों और आम नागरिकों को आश्वस्त किया कि किसी भी अपराधी द्वारा मोबाइल या इंटरनेट के माध्यम से दी जाने वाली धमकियों से घबराने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि पुलिस हर धमकी को गंभीरता से ले रही है और अपराधियों को उनके अंजाम तक पहुँचाने के लिए पूरी तरह मुस्तैद है।   केंद्रीय एजेंसियों के साथ समन्वय और भविष्य की रणनीति प्रिंस खान के विदेश में छिपे होने की आशंकाओं के बीच, धनबाद पुलिस अब केंद्रीय जांच एजेंसियों के साथ मिलकर काम कर रही है। एसएसपी प्रभात कुमार ने बताया कि प्रिंस खान से जुड़े नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए उच्चस्तरीय रणनीति तैयार की गई है। पुलिस न केवल जमीनी स्तर पर कार्रवाई कर रही है, बल्कि तकनीकी सर्विलांस और अंतरराज्यीय समन्वय के माध्यम से भी अपराधियों पर शिकंजा कस रही है। जिले में भय का माहौल पैदा करने वाले संगठित सिंडिकेट के खिलाफ पुलिस पहले से अधिक आक्रामक और त्वरित कार्रवाई करने की योजना पर काम कर रही है, ताकि कोयलांचल में शांति व्यवस्था बनी रहे।

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Jamtara police reshuffle
जामताड़ा में पुलिस महकमे में बड़ा फेरबदल, कई थाना प्रभारियों का तबादला

जामताड़ा। जिले में पुलिस व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से प्रशासन ने बड़े स्तर पर पुलिस पदाधिकारियों का तबादला किया है। जारी आदेश के तहत कई अधिकारियों को उनके वर्तमान पद से हटाकर अलग-अलग थानों और इकाइयों में नई जिम्मेदारी सौंपी गई है।   थाना प्रभारियों में व्यापक बदलाव   जारी सूची के अनुसार, किशन कुमार को मिहिजाम थाना से हटाकर बागडेहरी थाना का प्रभारी बनाया गया है, जबकि प्रदीप राणा को बागडेहरी से मिहिजाम थाना प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई है। इसी तरह विकास कुमार यादव को बिन्दापाथर से स्थानांतरित कर नाला थाना का प्रभारी नियुक्त किया गया है।   वहीं, अलखनाथ चौबे को जामताड़ा थाना से हटाकर करमाटांड़ थाना की कमान सौंपी गई है। इसके अलावा विनय कुमार यादव को नारायणपुर थाना से स्थानांतरित कर बिन्दापाथर थाना प्रभारी बनाया गया है।   कुछ अधिकारियों को पुलिस केंद्र भेजा गया   प्रशासनिक फेरबदल के तहत चंदन कुमार तिवारी को करमाटांड़ थाना से हटाकर पुलिस केंद्र जामताड़ा भेजा गया है। वहीं नाला थाना में पदस्थ राजीव रंजन कुमार को भी स्थानांतरित कर पुलिस केंद्र में योगदान देने का निर्देश दिया गया है।   इसके अतिरिक्त विवेकानन्द दूबे को मिहिजाम थाना प्रभारी के पद से हटाकर डीसीबी शाखा, पुलिस कार्यालय जामताड़ा में पदस्थापित किया गया है।   प्रशासनिक मजबूती के लिए लिया गया निर्णय   बताया जा रहा है कि यह फेरबदल जिले में कानून-व्यवस्था को और सुदृढ़ करने तथा पुलिस कार्यप्रणाली को प्रभावी बनाने के उद्देश्य से किया गया है। अधिकारियों को नई जिम्मेदारियों के साथ तत्काल प्रभाव से योगदान देने का निर्देश दिया गया है।

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