भारत ने रक्षा तकनीक के क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। भारतीय वैज्ञानिकों ने छठी पीढ़ी (6th Generation) के फाइटर जेट की डिजाइन से जुड़ी एक अहम तकनीक विकसित कर ली है। यह तकनीक भविष्य में भारत के पांचवीं और छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमानों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
दुनिया में अभी तक किसी भी देश के पास पूरी तरह से विकसित छठी पीढ़ी का फाइटर जेट नहीं है। अमेरिका, चीन, जापान और यूरोप के कुछ देश इस दिशा में काम कर रहे हैं, लेकिन फिलहाल इस दौड़ में सबसे गंभीर रूप से अमेरिका और चीन ही आगे माने जाते हैं। ऐसे समय में भारत की यह तकनीकी सफलता रक्षा क्षेत्र में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।
भारत इस समय 4.5 जेनरेशन और 5वीं पीढ़ी के फाइटर जेट विकसित करने की दिशा में काम कर रहा है। 4.5 जेनरेशन तकनीक के तहत तेजस मार्क-2 के प्रोटोटाइप पर काम जारी है। इसके अलावा भारत का स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी का फाइटर जेट प्रोजेक्ट AMCA (एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट) भी विकास के चरण में है।
इसी बीच भारत ने 4.5+ जेनरेशन के राफेल लड़ाकू विमानों को भी अपने बेड़े में शामिल करने की योजना बनाई है और भविष्य में भारतीय वायुसेना में 114 और राफेल विमानों के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है।
छठी पीढ़ी के फाइटर जेट्स भविष्य की युद्ध तकनीक का अहम हिस्सा माने जा रहे हैं। इन विमानों में अत्याधुनिक स्टेल्थ तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ड्रोन के साथ समन्वित ऑपरेशन जैसी क्षमताएं होंगी।
ये फाइटर जेट केवल अकेले युद्ध नहीं करेंगे, बल्कि ड्रोन और अन्य लड़ाकू विमानों के साथ एक टीम की तरह काम करेंगे। इन्हें भविष्य के “फ्लाइंग कमांड सेंटर” के रूप में भी देखा जा रहा है।
भारत में फाइटर जेट्स के विकास का काम एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (ADA) कर रही है। इस संस्था के वैज्ञानिकों ने स्टेल्थ फाइटर जेट्स के लिए एयर इनटेक सिस्टम के एयरोडायनामिक डिजाइन में एक महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है।
फरवरी 2026 में ‘जर्नल ऑफ एयरोस्पेस साइंसेज एंड टेक्नोलॉजीज’ में प्रकाशित इस शोध में बताया गया है कि कैसे हाई इंजन परफॉर्मेंस को बनाए रखते हुए विमान की स्टेल्थ क्षमता को सुरक्षित रखा जा सकता है। यह तकनीक भारत के AMCA प्रोजेक्ट और भविष्य के छठी पीढ़ी के टेललेस एयरक्राफ्ट के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार स्टेल्थ फाइटर जेट्स की सबसे बड़ी चुनौती इंजन के कंप्रेसर ब्लेड्स को दुश्मन के रडार से छिपाना होती है। ये ब्लेड रडार तरंगों को तेज़ी से परावर्तित करते हैं, जिससे विमान की पहचान हो सकती है।
इस समस्या के समाधान के लिए डिजाइनर ‘S-Duct’ या सर्पाकार एयर इनटेक का उपयोग करते हैं। यह डिजाइन हवा को घुमावदार रास्ते से इंजन तक पहुंचाता है, जिससे इंजन सीधे रडार की नजर में नहीं आता।
हालांकि इस तरह के घुमावदार रास्ते से गुजरते समय हवा का प्रवाह अस्थिर हो सकता है, जिससे इंजन की क्षमता प्रभावित होने का खतरा रहता है।
ADA के इंजीनियर आर. अबिलाशनिनी और विल्लिआम्माई सोमासुंदरम ने विंड टनल परीक्षण और कंप्यूटेशनल फ्लूइड डायनामिक्स तकनीक का उपयोग करके एक नई एयर इनटेक ज्योमेट्री विकसित की है।
इस तकनीक के परिणाम बेहद प्रभावशाली बताए जा रहे हैं। इससे इंजन की परफॉर्मेंस बनाए रखते हुए स्टेल्थ क्षमता को सुरक्षित रखने का रास्ता साफ हुआ है।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीकी उपलब्धि भारत के AMCA प्रोजेक्ट के लिए एक निर्णायक कदम साबित हो सकती है। इसके साथ ही भविष्य में छठी पीढ़ी के फाइटर जेट विकसित करने की दिशा में भी भारत को मजबूत आधार मिलेगा।
यदि इस तकनीक को सफलतापूर्वक लागू किया गया, तो भारत आने वाले वर्षों में उन्नत लड़ाकू विमान तकनीक के क्षेत्र में एक बड़ा वैश्विक खिलाड़ी बनकर उभर सकता है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल में नेता प्रतिपक्ष शुवेंदु अधिकारी के पर्सनल असिस्टेंट चंद्रकांत रथ हत्याकांड में एक चौंकाने वाला मोड़ सामने आया है। मामले में उत्तर प्रदेश के बलिया निवासी राज कुमार सिंह को गलत पहचान के आधार पर गिरफ्तार कर लिया गया था। बाद में जांच में निर्दोष पाए जाने पर केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने उन्हें रिहा कर दिया। अयोध्या से लौटते ही हुई गिरफ्तारी राज सिंह के अनुसार, वह अपनी मां के साथ अयोध्या दर्शन के लिए गए थे। घर लौटने पर पुलिस टीम ने उन्हें हिरासत में ले लिया। उनका आरोप है कि पुलिस ने बिना पर्याप्त जांच और सबूत के केवल नाम समान होने के कारण उन्हें आरोपी मान लिया। उन्होंने कहा कि पुलिस ने उनकी कोई बात नहीं सुनी और सीधे गिरफ्तार कर लिया। ‘फर्जी एनकाउंटर’ की धमकी का आरोप राज सिंह ने पुलिस और जांच एजेंसियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि हिरासत के दौरान उन्हें अपराध कबूल करने का दबाव बनाया गया। उन्होंने दावा किया कि पुलिसकर्मियों ने उन्हें ‘एनकाउंटर’ की धमकी दी और कहा कि अगर जुर्म स्वीकार नहीं किया तो उन्हें मार दिया जाएगा। राज सिंह के मुताबिक, उन्हें कोलकाता ले जाया गया, जहां पूछताछ के दौरान मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना दी गई। उनका आरोप है कि जांच एजेंसियां किसी भी तरह उन्हें दोषी साबित करना चाहती थीं। CBI जांच में सामने आई सच्चाई बाद में CBI की निष्पक्ष जांच में स्पष्ट हुआ कि गिरफ्तार किया गया व्यक्ति असली आरोपी नहीं है। इसके बाद राज सिंह को रिहा कर दिया गया। उन्होंने CBI का धन्यवाद करते हुए कहा कि एजेंसी ने निष्पक्ष तरीके से जांच की और सच सामने लाया। मुख्यमंत्री योगी से कार्रवाई की मांग राज सिंह ने योगी आदित्यनाथ से अपील की है कि मामले में शामिल पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि लगातार डर और मानसिक दबाव के बीच उन्होंने कई रातें गुजारीं और उन्हें हर समय एनकाउंटर का भय सताता रहा।
चेन्नई, एजेंसियां। तमिलनाडु में मुख्यमंत्री विजय के नेतृत्व वाली सरकार के शपथ ग्रहण समारोह के दौरान राज्य गीत ‘तमिल थाई वाज़्थु’ को सबसे आखिर में बजाए जाने पर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। गुरुवार को 23 विधायकों के मंत्री पद की शपथ के दौरान सबसे पहले ‘वंदे मातरम’, उसके बाद राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ और अंत में तमिल प्रार्थना गीत बजाया गया। इसी क्रम को लेकर विपक्षी दलों और सहयोगियों ने कड़ी नाराजगी जताई है। पहले भी हो चुका है विवाद इससे पहले 10 मई को मुख्यमंत्री विजय के शपथ ग्रहण समारोह में भी यही क्रम अपनाया गया था। उस समय भी इसे लेकर राजनीतिक और सामाजिक संगठनों ने विरोध जताया था। आलोचकों का कहना है कि तमिलनाडु की परंपरा के अनुसार सरकारी कार्यक्रमों में सबसे पहले ‘तमिल थाई वाज़्थु’ बजाया जाना चाहिए। TVK ने गवर्नर कार्यालय को ठहराया जिम्मेदार Tamilaga Vettri Kazhagam (TVK) ने इस विवाद के लिए राजभवन को जिम्मेदार बताया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि समारोह का आयोजन गवर्नर कार्यालय की ओर से किया गया था और गीतों का क्रम भी वहीं तय किया गया। पार्टी नेता नांजिल संपत ने कहा कि तमिलनाडु सरकार की इसमें कोई भूमिका नहीं थी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि विधानसभा के कार्यक्रमों में तमिल गीत सबसे पहले ही बजाया जाएगा। विपक्ष और सहयोगियों ने साधा निशाना Dravida Munnetra Kazhagam (DMK) ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरा है। पार्टी प्रवक्ता सरवनन अन्नादुरई ने सोशल मीडिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि तमिल अधिकारों की रक्षा का वादा आखिर कहां गया। वहीं, कांग्रेस और CPI नेताओं ने भी इसे तमिल भावनाओं के खिलाफ बताया। MDMK ने जताया कड़ा विरोध Vaiko ने ‘वंदे मातरम’ को राज्य सरकार के कार्यक्रमों में शामिल करने का विरोध करते हुए कहा कि तमिलनाडु के आधिकारिक कार्यक्रमों में पहले ‘तमिल थाई वाज़्थु’ और उसके बाद राष्ट्रगान ही बजाया जाना चाहिए।
बेंगलुरु, एजेंसियां। CJI सूर्यकांत के कॉकरोच वाले बयान के विरोध में बनी ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के सोशल मीडिया पर 6 दिन में लाखों फॉलोअर हो गए हैं। गुरुवार दोपहर 12:30 बजे तक यह आंकड़ा इंस्टाग्राम पर 1.23 करोड़ तक पहुंच गया। इंस्टाग्राम पर भाजपा के 87 लाख और कांग्रेस के 1.33 करोड़ फॉलोअर्स हैं। एक्स ने बैन किया एकाउंट वहीं, X पर 12 बजे तक पार्टी के करीब 1 लाख 93 हजार फॉलोअर्स थे। लेकिन अब एक्स ने पार्टी के अकाउंट को भारत में बैन कर दिया है। इन्होंने बनाई पार्टी कॉकरोच जनता पार्टी महाराष्ट्र के अभिजीत दीपके ने बनाई है। इसका नारा है- ‘सेक्युलर, सोशलिस्ट, डेमोक्रेटिक, लेजी।’ पार्टी के महज एक दिन में ही 40 लाख से ज्यादा फॉलोअर बढ़ चुके हैं। CJI ने बयान से किया इनकार दरअसल, 15 मई को कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि CJI सूर्यकांत ने एक मामले की सुनवाई के दौरान कुछ बेरोजगार युवाओं की तुलना कॉकरोच से की थी। CJI ने एक दिन बाद ही कहा कि उन्होंने ऐसा नहीं कहा। पार्टी की सदस्यता के लिए 4 योग्यताए पहली- बेरोजगारी। दूसरी- आलसी होना यानी डले रहो, पड़े रहो। तीसरी- ऑनलाइन रहने की लत। चौथी- प्रोफेशनली भड़ास निकालने की क्षमता। मैनिफेस्टो जारी, 5 वादे अगर CJP यानी कॉकरोच जनता पार्टी सरकार में आती है, तो रिटायरमेंट के बाद किसी भी CJI को राज्यसभा जाने का रिवॉर्ड नहीं मिलेगा। अगर कोई वैध वोट डिलीट किया जाएगा, तो मुख्य चुनाव आयुक्त को UAPA में गिरफ्तार किया जाएगा, क्योंकि किसी के वोटिंग का अधिकार छीनना आतंकवाद से कम नहीं। महिलाओं के लिए 50% का आरक्षण होगा, न कि 33%. इसके लिए सांसदों की संख्या भी नहीं बढ़ाई जाएगी। कैबिनेट में भी महिलाओं के लिए 50% आरक्षण होगा। अंबानी और अडाणी के सभी मीडिया संस्थानों के लाइसेंस रद्द किए जाएंगे, ताकि वास्तव में स्वतंत्र मीडिया को जगह मिल सके। गोदी मीडिया एंकरों के बैंक अकाउंट्स की जांच कराई जाएगी। अगर कोई विधायक या सांसद दलबदल कर दूसरी पार्टी में जाता है, तो उसके चुनाव लड़ने पर पाबंदी लगाई जाएगी। उसे अगले 20 साल तक किसी भी पब्लिक ऑफिस में पद नहीं दिया जाएगा। अभिजीत AAP में काम कर चुके, बताया कैसे आया आइडिया अभिजीत अमेरिका की बॉस्टन यूनिवर्सिटी में पब्लिक रिलेशन की मास्टर डिग्री कर रहे हैं। वो 2020 से 2023 तक आम आदमी पार्टी (AAP) की सोशल मीडिया टीम में वॉलंटियर भी रह चुके हैं। उन्होंने BBC को बताया, 'मैं X पर CJI का बयान देख रहा था, जहां पर वो सिस्टम की आलोचना करने और राय देने के लिए देश के युवाओं की तुलना कॉकरोच और परजीवियों से कर रहे थे। सोशल मीडिया पर मैंने इस पर अपनी राय दी। मैंने पूछा कि सब कॉकरोच एक साथ आ जाएं तो क्या होगा। मुझे Gen Z और 25 साल तक के युवाओं के कमाल के जवाब मिले। उन्होंने कहा कि हमें साथ आना चाहिए और एक प्लेटफॉर्म बनाना चाहिए। फिर क्या था मैंने CJP बना ली। 16 मई को CJI ने कॉकरोच वाले बयान पर सफाई दी चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने शनिवार को अपनी पैरासाइट और कॉकरोच वाली टिप्पणी पर सफाई दी। उन्होनें कहा, 'मेरी टिप्पणी खास तौर पर उन लोगों के लिए थी, जो फर्जी और नकली डिग्रियों के सहारे वकालत जैसे पेशों में आ गए हैं। मीडिया, सोशल मीडिया और दूसरे सम्मानित पेशों में भी ऐसे लोग घुस आए हैं। वे परजीवियों जैसे हैं।