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Bank Holiday 1 April 2026: Open & Closed Banks

Bank Holiday 1 April 2026: नए वित्तीय वर्ष के पहले दिन क्या बैंक खुले हैं या बंद? जानिए RBI की गाइडलाइन

surbhi अप्रैल 1, 2026 0
RBI bank holiday notice for 1 April 2026 showing which states banks are open or closed.
Bank Holiday 1 April 2026: RBI Guidelines

1 अप्रैल 2026 से भारत में नया वित्तीय वर्ष FY 2026-27 शुरू हो चुका है। इस दिन को लेकर हर साल की तरह इस बार भी ग्राहकों के मन में सवाल है कि बैंक खुले हैं या बंद।

Reserve Bank of India (RBI) की गाइडलाइन के अनुसार, 1 अप्रैल को देश के अधिकांश राज्यों में बैंक बंद रहते हैं, क्योंकि यह दिन “Annual Closing of Accounts” के लिए निर्धारित होता है।

किन राज्यों में बैंक बंद और कहां खुले?

इस बार भी अधिकतर राज्यों में बैंक शाखाएं बंद हैं। हालांकि, कुछ राज्यों में बैंक सामान्य रूप से खुले हैं:

  • मिजोरम
  • सिक्किम
  • नागालैंड
  • झारखंड
  • मेघालय
  • हिमाचल प्रदेश

इन राज्यों में ग्राहक बैंक जाकर सामान्य लेन-देन कर सकते हैं, जबकि बाकी राज्यों में शाखा सेवाएं उपलब्ध नहीं रहेंगी।

क्या डिजिटल बैंकिंग सेवाएं चलेंगी?

भले ही बैंक शाखाएं बंद हों, लेकिन ग्राहकों को घबराने की जरूरत नहीं है।

  • ATM
  • UPI
  • मोबाइल बैंकिंग
  • इंटरनेट बैंकिंग

सभी डिजिटल सेवाएं सामान्य रूप से चालू रहेंगी। हालांकि, चेक क्लियरेंस और कुछ बैंकिंग प्रोसेस में देरी हो सकती है।

हर महीने कब-कब बंद रहते हैं बैंक?

RBI के नियमों के मुताबिक:

  • दूसरे और चौथे शनिवार को बैंक बंद रहते हैं
  • पहले, तीसरे और पांचवें शनिवार को बैंक खुले रहते हैं (यदि कोई विशेष अवकाश न हो)

अप्रैल 2026 में अन्य प्रमुख बैंक छुट्टियां

अप्रैल महीने में अलग-अलग राज्यों में कई त्योहारों और अवसरों पर बैंक बंद रहेंगे, जैसे:

  • मौंडी थर्सडे
  • गुड फ्राइडे
  • डॉ. भीमराव आंबेडकर जयंती
  • बैसाखी / बोहाग बिहू / तमिल न्यू ईयर
  • अक्षय तृतीया 
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Surbhi

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RBI सरकार को देगा ₹2.87 लाख करोड़ का डिविडेंड, पिछले साल से 7% की बढ़ोतरी ईरान-इजराइल संकट के बीच खजाने को मिलेगी बड़ी राहत

नई दिल्ली, एजेंसियां। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए केंद्र सरकार को ₹2,86,588.46 करोड़ का डिविडेंड (प्रोफिट का हिस्सा) देने की मंजूरी दी है। RBI के सेंट्रल बोर्ड की बैठक में यह फैसला लिया गया है। अब तक का सबसे बड़ा डिविडेंड भुगतान यह अब तक का सबसे बड़ा डिविडेंड भुगतान है। पिछले साल RBI ने ₹2.11 लाख करोड़ के मुकाबले 27% ज्यादा यानी ₹2.69 लाख करोड़ का डिविडेंड दिया था। इस बार की राशि पिछले रिकॉर्ड से भी करीब 7% अधिक है।   मिडल ईस्ट संकट के बीच सरकार को मिला सुरक्षा कवच मिडल ईस्ट में जारी तनाव की वजह से ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतें अस्थिर बनी हुई हैं। भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर तेल आयात करता है, जिससे सरकारी खजाने पर बोझ बढ़ रहा है। ऐसे में RBI से मिली यह बड़ी रकम केंद्र सरकार के लिए एक सुरक्षा कवच का काम करेगी। इससे सरकार को खाद और ईंधन पर दी जाने वाली सब्सिडी के बढ़ते खर्चों को संभालने में मदद मिलेगी। RBI की कमाई 26% बढ़ी, बैलेंस शीट ₹91 लाख करोड़ पार रिजर्व बैंक ने बताया कि पिछले साल की तुलना में उसकी कुल कमाई में लगभग 26% की बढ़ोतरी हुई है। हालांकि, बैंक के खर्चों में भी करीब 28% का इजाफा हुआ है। RBI की बैलेंस शीट अब 20% बढ़कर करीब ₹92 लाख करोड़ की हो गई है। अगर बैंक के शुद्ध मुनाफे की बात करें (किसी भी तरह के रिस्क फंड को अलग रखने से पहले), तो इस साल RBI ने ₹3.95 लाख करोड़ कमाए हैं, जो पिछले साल के ₹3.13 लाख करोड़ के मुकाबले काफी ज्यादा है।

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कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के पीए चंद्रनाथ रथ हत्याकांड मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। इसके तार एक बार फिर बिहार से जुड़ते दिख रहे हैं। बंगाल STF ने बक्सर सेंट्रल जेल से एक अपराधी को रिमांड पर लिया है। पुलिस उसे लेकर कोलकाता पहुंच गई है।  गाजीपुर का निवासी है आरोपी जांच के दौरान सामने आए सुरागों के आधार पर STF टीम गुरुवार को बक्सर सेंट्रल जेल पहुंची। वहां एक आरोपी को रिमांड पर लेकर अपने साथ कोलकाता ले गई। STF टीम की इस कार्रवाई के बाद जांच अभियान को और गति मिली है। रिमांड पर लिए गए आरोपी की पहचान संजय राय के रूप में हुई है, जो उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के जमानियां थाना क्षेत्र के मतसा गांव का निवासी है। बताया जा रहा है कि वह फिलहाल किसी अन्य मामले में बक्सर सेंट्रल जेल में बंद था। 10 दिन पहले ही गिरफ्तार हुआ जानकारी के अनुसार, करीब दस दिन पहले संजय राय को बिहार पुलिस ने राजपुर थाना क्षेत्र से शराब के साथ गिरफ्तार कर बक्सर सेंट्रल जेल भेजा था। इसी दौरान पश्चिम बंगाल पुलिस को उसके खिलाफ जांच में महत्वपूर्ण जानकारी मिली, जिसके आधार पर उसे रिमांड पर लिया गया। फिलहाल STF उससे पूछताछ कर पूरे मामले की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है। जांच एजेंसियां इस मामले को गंभीरता से लेते हुए हर पहलू को बारीकी से जांच कर रही है।

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भाजपा नेता और ‘एक देश, एक चुनाव’ पर संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के अध्यक्ष P. P. Chaudhary ने शुक्रवार को ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ प्रस्ताव का जोरदार समर्थन किया। उन्होंने कहा कि लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने से शासन व्यवस्था में होने वाले व्यवधान कम होंगे और देश को बड़े आर्थिक नुकसान से बचाया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि बार-बार होने वाले चुनावों का असर केवल राजनीति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, प्रशासन और औद्योगिक उत्पादन जैसे कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर भी पड़ता है। गांधीनगर और अहमदाबाद में हुई बैठकें पीपी चौधरी ने बताया कि पिछले तीन दिनों में Gandhinagar और Ahmedabad में ‘एक देश, एक चुनाव’ को लेकर कई अहम बैठकें आयोजित की गईं। उन्होंने कहा, “लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने का प्रधानमंत्री मोदी का विजन विकसित भारत के निर्माण से जुड़ा हुआ है। इसका उद्देश्य देश में स्थिर शासन और तेज विकास सुनिश्चित करना है।” “बार-बार चुनाव से विकास प्रभावित” भाजपा नेता के मुताबिक, लगातार अलग-अलग राज्यों में चुनाव होने से सरकारी मशीनरी लंबे समय तक चुनावी प्रक्रिया में व्यस्त रहती है, जिससे विकास कार्य प्रभावित होते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि बच्चों की शिक्षा बिना बाधा के चलती रहे, स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित न हों और प्रशासनिक कार्यों में रुकावट न आए। चौधरी ने कहा, “जब बार-बार चुनाव होते हैं तो आचार संहिता लागू हो जाती है, जिससे कई नीतिगत फैसले और विकास परियोजनाएं प्रभावित होती हैं।” “7 लाख करोड़ रुपये से अधिक की बचत संभव” आर्थिक पहलू पर बात करते हुए पीपी चौधरी ने दावा किया कि अगर लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराए जाएं तो देश की अर्थव्यवस्था को 7 लाख करोड़ रुपये से अधिक की बचत हो सकती है। उनके अनुसार, चुनावों पर होने वाला भारी खर्च, प्रशासनिक संसाधनों का उपयोग और विकास कार्यों में देरी देश की अर्थव्यवस्था पर बड़ा बोझ डालते हैं। “1967 तक साथ होते थे चुनाव” चौधरी ने कहा कि भारत में पहले लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ ही कराए जाते थे। उन्होंने बताया कि 1967 तक देश में चार आम चुनाव एक साथ हुए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि बाद के वर्षों में कांग्रेस सरकारों के दौरान कई राज्य विधानसभाओं को समय से पहले भंग किया गया, राष्ट्रपति शासन लगाया गया और आपातकाल जैसी परिस्थितियों के कारण चुनावी चक्र टूट गया। उन्होंने कहा, “1967-68 के दौरान सात राज्य विधानसभाओं को उनका कार्यकाल पूरा होने से पहले भंग कर दिया गया। इसके बाद धीरे-धीरे लोकसभा और विधानसभा चुनाव अलग-अलग होने लगे।” चुनावी सुधार की जरूरत पर जोर भाजपा नेता ने बताया कि संयुक्त संसदीय समिति ने इस मुद्दे पर कई हितधारकों से बातचीत की है। इनमें सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम, बैंकिंग क्षेत्र, नौकरशाह, मंत्री, कानूनी विशेषज्ञ और नागरिक समाज के प्रतिनिधि शामिल हैं। उन्होंने कहा कि ज्यादातर लोगों ने बार-बार होने वाले चुनावों से पैदा होने वाले आर्थिक और प्रशासनिक बोझ को लेकर चिंता जताई है। पीपी चौधरी ने कहा, “देश की अर्थव्यवस्था और शासन व्यवस्था को भारी नुकसान हो रहा है। इसलिए आज भारत को इस तरह के चुनावी सुधार की सख्त जरूरत है।”  

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